शिमला: तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर) की स्थापना के लिए प्रयासरत है। इसके दृष्टिगत केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा पत्र के माध्यम से यह अवगत करवाया गया है कि केन्द्रीय बजट 2026-27 के बायोफार्मा शक्ति मिशन के अंतर्गत केंद्र के फार्मास्यूटिकल विभाग द्वारा संरूपण, महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश, लागू करने की पद्धति एवं अन्य पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मिशन के समग्र रणनीतिक उद्देश्यों एवं कार्यक्षेत्र, मौजूदा नीतिगत ढांचे तथा संसाधनों के सर्वोत्तम आवंटन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न हितधारकों और संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के मध्य चर्चा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का प्रमुख फार्मास्यूटिकल हब है। हिमाचल प्रदेश में बड़े स्तर पर दवाओं का उत्पादन किया जा रहा है। दवा उत्पादन के साथ-साथ अन्य सहायक उद्योग भी विकसित हो रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि हिमाचल में बेहतर स्वास्थ्य इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश में अनेक अग्रणी राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां कार्यरत हैं। प्रदेश दवा विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राज्य में एनआईपीईआर स्थापित करने की आवश्यकता है। इस संस्थान की स्थापना से दवा क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इस पहल के माध्यम से हिमाचल प्रदेश भारत के फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की क्षमताओं के निर्माण और दवा क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।













