किशाऊ परियोजना: कबिनेट मंत्री बोले- मुख्यमंत्री सुक्खू और प्रदेश सरकार के प्रयासों को भाजपा नकार नहीं सकती
किशाऊ परियोजना: कबिनेट मंत्री बोले- मुख्यमंत्री सुक्खू और प्रदेश सरकार के प्रयासों को भाजपा नकार नहीं सकती
शिमला: कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज यहां जारी एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर सांसद अनुराग सिंह ठाकुर और भाजपा के अन्य नेताओं द्वारा किए जा रहे दावों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार द्वारा किए गए सतत् प्रयासों को भाजपा नकार नहीं सकती। उनकी दूरदर्शी सोच से यह उपलब्धि हासिल हुई है। भाजपा नेता तथ्यों और रिकॉर्ड को तोड़-मरोड़कर पेश कर इस परियोजना की सफलता का श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं। मंत्रियों ने कहा कि छः राज्यों के बीच अंतिम समझौता करवाने में केंद्र सरकार की भूमिका अहम है, लेकिन भाजपा नेता इस तथ्य का अनुचित तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि मुख्मयंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इस परियोजना में हिमाचल प्रदेश के वित्तीय हितों की रक्षा की है। सभी राज्यों में सर्वसम्मति से समझौता करवाया गया, लेकिन प्रदेश के राजस्व पर पड़ने वाले अनुचित वित्तीय बोझ से राज्य को वर्तमान प्रदेश सरकार ने बचाया है। वर्तमान राज्य सरकार ने पहले से तय व्यवस्था को नकारा क्योंकि इससे प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा था। प्रदेश सरकार ने यह मुद्दा केंद्र सरकार के समक्ष उठाया और राज्य के हितों की रक्षा के लिए निरन्तर बातचीत का क्रम भी जारी रखा। उन्होंने कहा कि हिमाचल के लिए यह मामला उसकी विद्युत हिस्सेदारी से जुड़ी वित्तीय देनदारी थी। पिछली भाजपा सरकार ने लगभग 800 करोड़ रुपये के योगदान पर सहमति दी थी, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार ने प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों तथा परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को देखते हुए इस वित्तीय बोझ को अस्वीकार किया। वर्तमान सरकार के निरन्तर प्रयासों के परिणामस्वरूप लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित देनदारी अब दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा राज्य वहन करेंगे। प्रो. चन्द्र कुमार और विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि भाजपा को अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से प्रदेशवासियों के सामने रखना चाहिए। उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछली भाजपा सरकार ने प्रदेश के हितों को ताक पर रखते हुए लगभग 800 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ डालने वाली व्यवस्था को क्यों स्वीकार किया था। वहीं दूसरी ओर वर्तमान सरकार के हस्तक्षेप के बाद हासिल हुई उपलब्धि का वह श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं। हिमाचल की जनता पहले के निर्णय और उसके बाद उसे बदलने के लिए किए गए प्रयासों के बीच के अंतर को समझने में पूर्णता सक्षम है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से हिमाचल को हर वर्ष लगभग 1,000 मिलियन यूनिट बिजली भी प्राप्त होने की संभावना है। यह समझौता एक उज्ज्वल और आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके तहत बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के राज्य को हर साल अनुमानित 1,200दृ1,500 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा। किशाऊ बहुद्देश्यीय परियोजना समझौता राज्य के अधिकारों और दीर्घकालिक आर्थिक हितों की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित कर रहा है। मंत्रियों ने कहा कि किशाऊ बहुद्देशीय परियोजना से जुड़े हुए तथ्यों को भाजपा नेता नजरअंदाज करने का प्रयास कर रहे हैं। यदि वर्तमान सरकार ने पहले से तय व्यवस्था को स्वीकार किया होता, तो हिमाचल पर भारी वित्तीय देनदारी बनी रहती। इसके बजाय प्रदेश सरकार ने अपने पक्ष को प्रखरता से केन्द्र के समक्ष रखा और एक अलग व्यवस्था के लिए बातचीत की, जिसके परिणामस्वरूप राज्य को वित्तीय बोझ से बचाया गया। सांसद अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा पूरे मामले की उपलब्धि का श्रेय केंद्र सरकार को देने के प्रयास पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मंत्रियों ने कहा कि इस प्रकार का व्यापक दावा पूरे रिकॉर्ड को प्रतिबिंबित नहीं कर रहा है। छः राज्यों को एक साथ लाकर समझौते की दिशा में आगे बढ़ाने में केंद्र की अहम भूमिका है, लेकिन इससे वर्तमान राज्य सरकार द्वारा की गई वार्ताओं और हिमाचल प्रदेश की वित्तीय देनदारी के संबंध में अपनाए गए स्पष्ट रुख के महत्व को कम नहीं आंका जा सकता। वर्तमान राज्य सरकार ने केन्द्र के साथ निरंतर बैठकें कर अपने पक्ष को रखा, जिसके उपरान्त अंतिम व्यवस्था पर सहमति बनी। इसलिए भाजपा नेताओं को छः राज्यों से जुड़े एक जटिल अंतरराज्यीय समझौते को किसी एक सरकार या एक राजनीतिक दल की उपलब्धि के रूप में पेश नहीं करना चाहिए। प्रो. चन्द्र कुमार और विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यदि भाजपा नेता अपने दावों को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं, तो उन्हें पूरा दस्तावेजी रिकॉर्ड जनता के सामने रखना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि पहले क्या वित्तीय व्यवस्था थी, हिमाचल प्रदेश पर कितना बोझ प्रस्तावित था और वर्तमान सरकार को इस मामले को क्यों उठाना पड़ा तथा एक अलग परिणाम के लिए बातचीत क्यों करनी पड़ी। राजनीतिक बयानबाजी रिकॉर्ड को नहीं बदल सकती। मंत्रियों ने कहा कि लगभग 76,000 करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ और छठे वेतन आयोग से संबंधित लगभग 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां विरासत में मिलने के बावजूद वर्तमान राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है और राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इसके परिणामस्वरूप 2,200 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व जुटाया गया है, जबकि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से लगभग 3,000 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान को रोकने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनता के हितों को सुरक्षित रख रही है और प्रदेश के वित्तीय तथा बहुमूल्य संसाधनों का उपयोग प्रदेश हित में किया जा रहा है। राज्य के जायज हितों की रक्षा के लिए सरकार हर आवश्यक मामले पर बातचीत, आपत्ति और हर स्तर पर प्रयास जारी रखेगी। मंत्रियों ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के जल और विद्युत संसाधनों में उसके जायज हिस्से को सुरक्षित करने और उसकी रक्षा करने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगी। इसमें भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड तथा शानन पावर प्रोजेक्ट से जुड़े मामले भी शामिल हैं। प्रदेश की जनता तथ्यों और पूरे रिकॉर्ड की स्पष्ट जानकारी पाने की हकदार है। प्रदेश के प्रबुद्ध जनता इस बात से भली-भांति परिचित है कि भाजपा नेता राजनीतिक लाभों के लिए दूसरों की उपलब्धियों का श्रेय लेने में माहिर है। उन्होंने भाजपा नेताओं को परामर्श दिया कि वह हिमाचल प्रदेश के हितों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों में सहयोग करें, न कि महत्वपूर्ण मामलों का अनावश्यक राजनीतिकरण करें। राज्य के जल, विद्युत और वित्तीय हितों से जुड़े विषय इतने महत्वपूर्ण हैं कि उन्हें दलगत राजनीति तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। सभी राजनीतिक नेताओं को राजनीतिक लाभ या आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर हिमाचल प्रदेश के हित, समृद्धि और कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।