सुक्खू सरकार की ‘कथनी और करनी’ में बड़ा अंतर; घोषणाएं कागजों तक सीमित – बिक्रम ठाकुर
सुक्खू सरकार की ‘कथनी और करनी’ में बड़ा अंतर; घोषणाएं कागजों तक सीमित – बिक्रम ठाकुर
विधानसभा में उठाए जनहित के मुद्दे, घोषणाओं, रोजगार और विकास पर सरकार से मांगा जवाब
शिमला: पूर्व उद्योग मंत्री एवं भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने विधानसभा में पूछे गए सवालों के जवाब को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े गंभीर सवालों का सीधा और तथ्यात्मक जवाब देने के बजाय सरकार गोलमोल जवाब देकर वास्तविक स्थिति से बचने का प्रयास कर रही है। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि विधानसभा में पूछे जाने वाले सवाल किसी विधायक के व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं और अधिकारों से जुड़े होते हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक सवाल का स्पष्ट, तथ्यात्मक और जवाबदेह उत्तर दे।
घोषणाएं कागजों तक सीमित: बिक्रम ठाकुर ने अपने विधानसभा क्षेत्र जसवां-प्रागपुर में 15 अप्रैल 2025 को परागपुर में एसडीएम कार्यालय खोलने की घोषणा का उल्लेख करते हुए कहा कि घोषणा के बावजूद आज तक यह कार्यालय धरातल पर शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार नए प्रशासनिक कार्यालय खोलने के मामले में जनगणना का हवाला देती है, वहीं दूसरी ओर चार दिन में कार्यालय खोलने की घोषणा की जाती है। यह सरकार के दोहरे मापदंड को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक इकाइयां खोलने पर रोक है तो सरकार को ऐसी घोषणाएं कर जनता को गुमराह नहीं करना चाहिए।
बंद किए संस्थानों को अब दोबारा खोलने की जरूरत क्यों पड़ी?: भाजपा विधायक ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार के समय खोले गए शिक्षण संस्थानों को कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद बंद कर दिया था। उस समय सरकार की ओर से गुणवत्ता और आवश्यकता के आधार पर संस्थानों को संचालित करने की बात कही गई थी, लेकिन अब उन्हीं संस्थानों को दोबारा खोलने की प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने सवाल किया कि यदि आज ये संस्थान जनता की जरूरत हैं तो इन्हें बंद करने का फैसला किस आधार पर लिया गया था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कारणों से बंद किए गए संस्थानों की समीक्षा होना जरूरी है और जनहित में आवश्यक संस्थानों को दोबारा संचालित किया जाना चाहिए।
1500 रुपये और एक लाख नौकरियों के वादे का क्या हुआ?: बिक्रम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार के चुनावी वादों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने और युवाओं को हर वर्ष एक लाख नौकरियां देने का वादा किया गया था। सरकार को प्रदेश की जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि इन वादों की वर्तमान स्थिति क्या है।
उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यकाल में चुनावी वादों और धरातल की वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। प्रदेश का युवा रोजगार के अवसरों की तलाश में है, जबकि सरकार अपने वादों का हिसाब देने से बच रही है।
2027 में जनता तय करेगी किसकी सरकार बनेगी: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के जयराम ठाकुर को लेकर दिए बयान पर पलटवार करते हुए बिक्रम ठाकुर ने कहा कि 2027 में कौन सत्ता में आएगा, इसका फैसला हिमाचल की जनता करेगी। उन्होंने कहा कि पंचायतों, जिला परिषदों और नगर निकायों में भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आने के बाद सभी फैसलों को केवल राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखेगी, बल्कि प्रत्येक निर्णय की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वह प्रदेश और जनता के हित में है या नहीं। राजनीतिक कारणों से बंद किए गए संस्थानों की समीक्षा कर जनहित में आवश्यक संस्थानों को संचालित किया जाएगा।
सिरमौर खनन हादसे पर सरकार से मांगा जवाब: बिक्रम ठाकुर ने सिरमौर में खनन क्षेत्र में हुए हादसे में तीन लोगों की मौत का मामला भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि बरसात के दौरान जब नियमों के तहत खनन पर रोक रहती है, तो उस स्थान पर खनन कार्य कैसे चल रहा था। उन्होंने संबंधित खदान में सुरक्षा नियमों के पालन, निरीक्षण और अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों को लेकर सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि मामले में स्पष्ट जवाब देने के बजाय अधिकारियों की रिपोर्ट आने का इंतजार करने की बात कही गई। उन्होंने मांग की कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
मेडिकल डिवाइस पार्क और बल्क ड्रग पार्क पर भी सवाल:पूर्व उद्योग मंत्री ने मेडिकल डिवाइस पार्क और बल्क ड्रग पार्क को लेकर भी प्रदेश सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल को महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाएं मिली हैं, लेकिन प्रदेश सरकार इनके क्रियान्वयन को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि बल्क ड्रग पार्क के लिए केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई राशि में से अभी भी बड़ी राशि खर्च होना बाकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मिलने के बावजूद यदि निर्धारित धनराशि का समय पर उपयोग नहीं हो पा रहा है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
रोजगार के लिए उद्योग और पर्यटन को मजबूत करना जरूरी: बिक्रम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हर व्यक्ति को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्र, पर्यटन और स्वरोजगार को मजबूत करना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में बड़ी संख्या में उद्योग प्रदेश से बाहर गए हैं और बद्दी, बरोटीवाला तथा नालागढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना शुरू की थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे बंद कर दिया। भाजपा के पास युवाओं के रोजगार को लेकर स्पष्ट रोडमैप है, जिसमें सरकारी नौकरियों के साथ उद्योग, पर्यटन और स्वरोजगार को बढ़ावा देना प्राथमिकता होगी।
आपदा राहत पर भी सरकार स्थिति स्पष्ट करे: बिक्रम ठाकुर ने कहा कि आपदा के बाद केंद्र सरकार ने विभिन्न मदों और योजनाओं के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को लगातार सहायता उपलब्ध करवाई है। उन्होंने कहा कि केंद्र से मिलने वाली सहायता को मुख्यमंत्री को सीधे दी गई राशि के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा जल्द ही केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल को विभिन्न मदों में उपलब्ध कराई गई सहायता का विस्तृत विवरण जनता के सामने रखेगी। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। सरकार के दावों और धरातल की वास्तविकता को प्रदेश की जनता देख रही है और आने वाले समय में जनता इसका उचित जवाब देगी।