शिमला: अधिवक्ताओं ने राज्य सचिवालय का किया घेराव

शिमला: शिमला शहर की प्रतिबंधित सड़क शिल्ली चौक-छोटा शिमला पर वाहनों की आवाजाही रोकने के खिलाफ अधिवक्ताओं ने मंगलवार को प्रदेश सचिवालय का घेराव किया। इस दौरान तीन घंटे तक चक्का जाम किया गया। अधिवक्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इससे पहले अधिवक्ता मुख्यमंत्री से मिलने के लिए ओक ओवर पहुंचे थे लेकिन यहां सीएम के नहीं मिलने के कारण उन्होंने प्रदेश सचिवालय की ओर कूच किया। इस दौरान सैकड़ों अधिवक्ता नारेबाजी करते हुए सुबह साढ़े ग्यारह बजे सचिवालय पहुंचे और सर्कुलर सड़क पर बैठ गए। इस दौरान प्रदेश सचिवालय के दरवाजे को बंद कर दिया गया। अधिवक्ता इस पर अड़े रहे कि मुख्यमंत्री बाहर आकर उनसे बातचीत करें।

अधिवक्ताओं ने प्रतिबंधित मार्गों की परमिट फीस बढ़ाने पर भी विरोध जताया। उन्होंने कहा कि पहले परमिट राशि तीन हजार रुपये थी जिसे अब बढ़ाकर पंद्रह हजार रुपये कर दिया है। अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से मांग उठाई कि उन्हें पर सामान्य फीस पर परमिट जारी किए जाएं।

प्रतिबंधित मार्गों पर चालान के विरोध में अधिवक्ताओं ने प्रदेश सचिवालय शिमला के बाहर काफी देर तक प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदेश सरकार के इस निर्णय के खिलाफ अधिवक्ताओं ने जमकर नारेबाजी भी की। सचिवालय में अधिवक्ताओं के प्रदर्शन के कारण करीब तीन घंटे तक वाहनों की आवाजाही अवरुद्ध रही।  इस वजह से शहरवासियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।

अधिवक्ताओं ने करीब तीन घंटे तक सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर दिया था। इस वजह से शहर में यातायात व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई और हजारों लोगों को आवाजाही में परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालत यह थी कि घंटों बसों समेत अन्य वाहन कतारों में खड़े रहे। लोगों को पैदल गंतव्य के लिए जाना पड़ा।

शिमला में हाई कोर्ट जाने वाले मार्ग पर वकीलों के वाहनों की आवाजाही को लेकर चल रहे विवाद के बीच वकीलों और सरकार के बीच सहमति बन गई है। बार काउंसिल के अध्यक्ष अजय कोचर ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई और वकीलों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। बातचीत के बाद  प्रदर्शन समाप्त कर लिया गया है।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष अजय कोचर ने बताया कि प्रशासन ने वकीलों की दिक्कतों को समझते हुए समाधान निकालने का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया कि बैठक में दोनों पक्षों की ओर से कई सुझाव रखे गए। उन्होंने कहा कि वकील किसी निजी उद्देश्य से नहीं बल्कि अपने न्यायिक और अर्ध-न्यायिक कार्यों के निर्वहन के लिए हाई कोर्ट आते हैं। अजय कोचर ने कहा कि प्रशासन ने एक समिति गठित करने का आश्वासन दिया है, जो इस मामले का स्थायी समाधान तलाशेगी। साथ ही वकीलों को विशेष रियायत वाले परमिट जारी करने पर भी सहमति बनी है। हालांकि केवल वही वकील इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे, जिन्हें बार एसोसिएशन की ओर से प्रमाणित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बातचीत सफल रहने और प्रशासन द्वारा उनकी मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद अब विरोध-प्रदर्शन समाप्त किया जा रहा है।

शिमला शहर की प्रतिबंधित सड़कों पर अधिवक्ताओं की गाड़ियों को रोकने को लेकर हुए विवाद के बाद मंगलवार को कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह की गाड़ी समेत कई सरकारी अफसरों के वाहनों के पुलिस ने चालान काटे। अधिवक्ताओं ने उन्हें रोकने के विरोध में शिल्ली चौक-छोटा शिमला मार्ग पर वाहनों को रोका। इस दौरान बिना परमिट के दौड़ रहे वाहनों पर आपत्ति जताई गई। इसके बाद पुलिस ने वाहनों के चालान काटे।

वहीं पुलिस दवारा आज सचिवालय क्षेत्र, शिमला में हुई इस घटना के संबंध में हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा त्वरित कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई है। प्राप्त सूचना के अनुसार कुछ व्यक्तियों द्वारा बिना अनुमति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर प्रदर्शन किया गया तथा यातायात बाधित किया गया, जिससे आम जनता एवं वाहन चालकों को असुविधा का सामना करना पड़ा।

घटना के संबंध में पुलिस थाना पूर्व (ईस्ट) शिमला में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत सार्वजनिक मार्ग में अवरोध उत्पन्न करने, वैध आदेशों की अवहेलना करने तथा लोक असुविधा उत्पन्न करने से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित स्थानों की उपलब्धता के बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्र में एकत्र होकर प्रदर्शन किया, जिसके कारण सचिवालय एवं आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई तथा आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

हिमाचल प्रदेश पुलिस नागरिकों एवं संगठनों के शांतिपूर्ण एवं विधिसम्मत तरीके से अपने विचार व्यक्त करने के लोकतांत्रिक अधिकार का पूर्ण सम्मान करती है। तथापि, कानून का उल्लंघन कर सार्वजनिक मार्गों को अवरुद्ध करना, यातायात व्यवस्था में बाधा उत्पन्न करना अथवा आम जनता को असुविधा पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है और ऐसे मामलों में विधि के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मामले की जांच जारी है तथा जांच के दौरान दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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