ताज़ा समाचार

शिमला: शिक्षा और संस्कारों का संगमः दयानंद पब्लिक स्कूल में ‘जीवन कौशल’ पर गहन कार्यशाला आयोजित

शिमला: दयानंद पब्लिक स्कूल, द मॉल शिमला के प्रांगण में आज केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पंचकुला उत्कृष्टता केंद्र के तत्वावधान में ‘जीवन कौशल (उन्नत)’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का अत्यंत भव्य एवं बौद्धिक आयोजन किया गया। यह कार्यशाला न केवल शैक्षणिक दृष्टिकोण से उत्कृष्ट रही, बल्कि इसने मानवीय मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना के नए आयामों को भी स्पर्श किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती अनुपम द्वारा मुख्य वक्ताओं के आत्मीय स्वागत और पावन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। ज्ञान की इस ज्योति ने संपूर्ण वातावरण को सकारात्मकता और जिज्ञासा से अभिसिंचित कर दिया। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ के रूप में श्री रजनीश कुमार एवं श्री रवि शर्मा ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यशाला को अलंकृत किया।

प्रथम सत्रः अध्यात्म और जीवन मूल्यों का उद्घोष: कार्यशाला का प्रथम सोपान  रजनीश कुमार के मार्गदर्शन में आरंभ हुआ। उन्होंने अध्यात्म और जीवन मूल्यों के अंतर्संबंधों पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने शिक्षकों को स्वयं के भीतर झांकने और नैतिक मूल्यों को शिक्षण पद्धति का अभिन्न हिस्सा बनाने हेतु प्रेरित किया।

द्वितीय सत्रः कक्षा-कक्ष का व्यावहारिक चित्रण: द्वितीय सत्र में  रवि शर्मा ने जीवन और कक्षा-कक्ष के जीवंत उदाहरणों के माध्यम से ‘जीवन कौशल’ की जटिलताओं को सरलता से प्रतिपादित किया। शिक्षकों ने अपनी सक्रिय सहभागिता और प्रगाढ़ विमर्श से इस सत्र को अत्यंत ऊर्जस्वित बनाया।

तृतीय सत्रः पौराणिक आख्यानों से मूल्यों का अन्वेषण: तृतीय सत्र पुनः रजनीश कुमार के सान्निध्य में संपन्न हुआ, जिसमें उन्होंने ‘ॐ’ की महत्ता, भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण के आदर्शों, महाभारत के प्रसंगों तथा मनु स्मृति के सूत्रों के माध्यम से जीवन कौशल की प्रासंगिकता सिद्ध की। इस दौरान शिक्षकों ने अपनी कक्षागत चुनौतियों और व्यावहारिक समस्याओं पर विशेषज्ञों के साथ सार्थक संवाद किया।

अंतिम सत्र एवं समापनः बोध और प्रतिपुष्टि: अंतिम सत्र में  रवि शर्मा द्वारा मुख्य विषय के सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक पक्षों का निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया। उपस्थित प्रबुद्ध शिक्षकों ने कार्यशाला की गुणवत्ता पर अपनी सकारात्मक प्रतिपुष्टि (फीडबैक) प्रदान की। सभी प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि यह कार्यशाला ज्ञानवर्धक होने के साथ-साथ अत्यंत मनोरंजक भी रही।

अंततः, संपूर्ण परिसर ‘शांति पाठ’ के पावन स्वरों से गुंजायमान हो उठा, जिसके साथ इस गरिमामयी कार्यशाला का विधिवत समापन हुआ। इस बौद्धिक समागम के माध्यम से शिक्षकों ने शिक्षण प्रक्रिया में जीवन कौशल के समावेश का जो संकल्प लिया, वह निसंदेह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

सम्बंधित समाचार

Comments are closed