शिमला: वरिष्ठ भाजपा नेता एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि शिमला का ऐतिहासिक चौड़ा मैदान आज प्रदेश की कांग्रेस सरकार की विफलताओं का साक्षात प्रमाण बन गया है। उन्होंने कहा कि बजट सत्र के दूसरे दिन जिस प्रकार पेंशनरों को अपने अधिकारों की रक्षा हेतु सड़कों पर उतरना पड़ा, वह सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक जड़ता का स्पष्ट संकेत है। विपिन सिंह परमार ने कहा कि जिन लोगों ने अपना संपूर्ण जीवन प्रदेश की सेवा में समर्पित किया, आज वही अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने को विवश हैं—यह किसी भी लोकतांत्रिक शासन के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि विधानसभा परिसर के बाहर पेंशनरों द्वारा पारंपरिक ‘नाटी’ के माध्यम से दर्ज कराया गया विरोध केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति गहरे असंतोष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब बुजुर्ग पेंशनर भी सड़कों पर उतरकर सरकार को जगाने का प्रयास करें, तो यह स्पष्ट है कि शासन तंत्र जनभावनाओं से कट चुका है।
विपिन सिंह परमार ने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार प्रशासनिक शिथिलता, वित्तीय अव्यवस्था और नीतिगत अनिर्णय की प्रतिमूर्ति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों की मांगों को लेकर सरकार का रवैया टालमटोल से भरा हुआ है। बार-बार आश्वासन दिए जा रहे हैं, किंतु निर्णय लेने की इच्छाशक्ति का पूर्ण अभाव दिखाई देता है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक होती जा रही है। विकास कार्य ठप पड़े हैं, योजनाएं कागजों में सिमट चुकी हैं और कर्मचारी वर्ग निराशा में डूबा हुआ है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों के लंबित डीए और अन्य वित्तीय लाभों को रोके रखना उनके अधिकारों का सीधा हनन है। चुनाव के समय किए गए वादों को निभाने के स्थान पर सरकार अब बहानों का सहारा ले रही है।
विपिन सिंह परमार ने वित्तीय परिदृश्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि वित्त सचिव स्वयं यह संकेत दे रहे हैं कि ‘सहारा योजना’ तथा बिजली-पानी जैसी मूलभूत सेवाओं पर दी जा रही सब्सिडी बंद करनी पड़ सकती है, तो यह सरकार की आर्थिक विफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जो सरकार राहत देने के नाम पर सत्ता में आई थी, वही आज जनता से राहत छीनने की तैयारी कर रही है। विपिन सिंह परमार ने कहा कि गरीब, निम्न एवं मध्यमवर्गीय परिवारों पर इस प्रकार का बोझ डालना जनादेश के साथ विश्वासघात है और यह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।
आरडीजी के विषय में भी विपिन सिंह परमार ने सरकार की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस शासित अन्य राज्यों में इस विषय पर तीव्र विरोध दर्ज किया गया है, तो हिमाचल में सरकार की स्पष्ट नीति क्या है? विपिन सिंह परमार ने कहा कि दोहरे मापदंड और परस्पर विरोधी वक्तव्य जनता के बीच भ्रम और अविश्वास उत्पन्न करते हैं।
विपिन सिंह परमार ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री न तो विपक्ष की सार्थक आलोचना को महत्व देते हैं और न ही अपने ही विधायकों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा कि शासन संचालन में परिपक्वता का अभाव दिखाई देता है और निर्णय प्रक्रिया में समन्वय की कमी स्पष्ट है। अधिकारी वर्ग असमंजस में कार्य कर रहा है, जिसका सीधा प्रभाव प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ रहा है।
विधानसभा के भीतर की स्थिति का उल्लेख करते हुए विपिन सिंह परमार ने कहा कि जब सदन में भी विषयों पर स्पष्टता और संतुलन का अभाव दिखाई दे, तो यह सरकार की आंतरिक कमजोरी को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, किंतु वर्तमान परिस्थितियां इसके विपरीत संकेत दे रही हैं।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। युवा वर्ग अवसरों के अभाव में हताश हो रहा है, कर्मचारी असंतोष से घिरे हैं और पेंशनर आंदोलनरत हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जनविश्वास के क्षरण का संकेत है।
विपिन सिंह परमार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ही पेंशनरों और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर ठोस एवं समयबद्ध निर्णय नहीं लिए, तो भाजपा सड़क से सदन तक व्यापक जनांदोलन छेड़ने को बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल अधिकारों की बहाली का नहीं, बल्कि प्रदेश की अस्मिता, पारदर्शिता और उत्तरदायी शासन की पुनर्स्थापना का है।