राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने की बैठक की अध्यक्षता, कोलडैम प्रबन्धन एवं विभागीय अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
बिलासपुर: राज्य स्तरीय कोलडैम विस्थापित पुनर्वास एवं परामर्श समिति की महत्वपूर्ण बैठक आज उपायुक्त कार्यालय बिलासपुर के बचत भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत मंत्री जगत सिंह नेगी ने की। इस बैठक में विधायक अर्की संजय अवस्थी, विधायक सदर बिलासपुर त्रिलोक जमवाल, मंडलायुक्त मंडी राज कृष्ण पुरुथी, बिलासपुर, शिमला और सोलन जिलों के उपायुक्त उपस्थित रहे जबकि उपायुक्त मंडी वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए। बैठक का संचालन अतिरिक्त सचिव राजस्व बलवान चन्द ने किया।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में विभिन्न विकास परियोजनाओं के कारण जो भी परिवार विस्थापित हुए हैं, उनके पुनर्वास और अधिकारों की सुरक्षा के प्रति प्रदेश सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि, “विस्थापितों का आखिरी व्यक्ति भी पुनर्वास और सभी सुविधाओं का हकदार है और यह हक उसे हर हाल में मिलेगा।” मंत्री ने बताया कि लगभग 15 वर्षों के अंतराल के बाद कोल बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए बैठक आयोजित की गई है, जिसका उद्देश्य लंबित समस्याओं का व्यापक समाधान करना है।
राजस्व मंत्री ने कोल बांध विस्थापितों के पुनर्वास संबंधी समस्याओं को लेकर बिलासपुर और मंडी जिलों के उपायुक्तों को एसडीएम बिलासपुर सदर और एसडीएम सुंदरनगर की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने के निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि यह कमेटी एक माह के भीतर जमीनी तथ्य, वीडियोग्राफी और सबूतों सहित सरकार के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कहा कि यह जांच औपचारिकता नहीं होगी बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जाएगी ताकि कोल बांध प्रभावितों के पुनर्वास को लेकर आ रही समस्याओं का स्थाई समाधान हो सके।
बैठक में तातापानी से सुन्नी तक कोलडैम में बढ़ रही सिल्ट और बरसातों में जलस्तर बढ़ने से आसपास क्षेत्रों में संभावित जलभराव की गंभीर समस्या पर विस्तृत चर्चा की गई। इस मुद्दे पर राजस्व मंत्री ने एनटीपीसी के अधिकारियों को समस्या का स्थाई समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने तत्काल सभी संबंधित उपायुक्तों को डैम सेफ्टी एक्ट और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत एनटीपीसी को नोटिस जारी करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में गैर सरकारी सदस्यों ने विस्थापित परिवारों के सदस्यों को रोजगार में प्राथमिकता न मिलने के मुद्दे पर भी गहरी आपत्ति जताई। इस पर मंत्री ने निर्देश दिया कि बांध निर्माण से अब तक कितने विस्थापितों को रोजगार उपलब्ध करवाया गया है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कोल बांध प्रबन्धन को निर्देश दिए।
जगत सिंह नेगी ने एनटीपीसी को यह भी निर्देश दिया कि लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड और सीएसआर फंड का उपयोग प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब कोई भी योजना इन प्रभावित क्षेत्रों में बिना स्थानीय लोगों, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासन की संयुक्त बैठक के बिना स्वीकृत नहीं होगी। उन्होंने युवाओं के लिए खेल मैदान, कौशल विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और स्थानीय आजीविका मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने उपायुक्तों को प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय क्षेत्र विकास समिति की बैठक जल्द आयोजित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीएसआर के तहत वर्तमान में केवल 2 प्रतिशत बजट व्यय हो रहा है, जिसे बढाने की आवश्यकता है ताकि प्रभावित क्षेत्रों में पुर्नवास एवं विकास के कार्यों को गति प्रदान की जा सके।
बैठक में गैर-सरकारी सदस्यों द्वारा उठाए गए विस्थापित कॉलोनियों में घरों के मालिकाना हक न मिलने के मुद्दे पर मंत्री ने राजस्व विभाग को तत्काल स्थाई समाधान निकालने के निर्देश दिए, ताकि विस्थापितों को उनके पूर्ण अधिकार प्राप्त हो सकें। बैठक के दौरान गैर-सरकारी सदस्यों ने एनटीपीसी द्वारा बसाई गई कॉलोनियों में पानी, सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, प्लॉट आवंटन सहित कई मूलभूत सुविधाओं के अभाव और अव्यवस्था के मुद्दे उठाए। इस संबंध में उन्होंने अधिकारियों को उचित कदम उठाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर विधायक अर्की संजय अवस्थी और विधायक सदर त्रिलोक जामवाल ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में विस्थापित परिवारों की समस्याओं को उठाया तथा कोल डैम प्रबंधन तथा विभागीय अधिकारियों से उचित कदम उठाने को कहा ताकि समस्याओं का स्थाई समाधान हो सके।
इससे पूर्व उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने राजस्व मंत्री एवं सभी उपस्थित अधिकारियों का स्वागत किया।