प्रारंभ में एक छोटा सा गांव था "शिमला"

कभी एक छोटा सा गांव था “शिमला”

  • शिमला हिल स्टेट्स
  • ‘श्यामला’ से लिया गया शिमला का नाम
  • 1808-1809 ई. में सिक्खों और गोरखों की लड़ाई के बाद शिमला से जुड़ा अंग्रेजों का संबंध

“शिमला” न केवल हिमाचल की राजधानी है अपितु भारत की शान भी है जिसे न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की श्रेणीयों में अहम माना जाता है। शिमला का इतिहास जानने के लिए अभी भी यहाँ की कुछ इमारतें और धरोहरें अपने इतिहास को जीवित रखे हुए हैं। इसी के चलते इस बार हम आपको शिमला के कुछ एक ऐतिहासिक स्थलों व इमारतों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

1808-1809 ई. में सिक्खों और गोरखों की लड़ाई के बाद शिमला से जुड़ा अंग्रेजों का संबंध

1808-1809 ई. में सिक्खों और गोरखों की लड़ाई के बाद शिमला से जुड़ा अंग्रेजों का संबंध

शिमला के नाम के बारे में कई धारणाएं हैं। एक धारणा के अनुसार शिमला नाम शिअमलाय से लिया गया। जिसका अर्थ है नीला घर। जो कि फकीरन जाखू द्वारा बनाया गया। एक और धारणा के अनुसार शिमला का नाम श्यामला जो माता काली देवी के दूसरे नाम से लिया गया है। जाखू हिल पर माता काली देवी का छोटा सा मंदिर था जो अंग्रेजों के शासन के समय इस स्थान को बदलकर मौजूदा कालीबाड़ी के स्थान पर बना दिया गया। शिमला प्रारंभ में एक छोटा सा गांव था। इसका वर्णन स्काट अधिकारी लेफ्टीनेंट पैटरिक और अलैक्जंडर की डायरी 1817 ई. से प्राप्त होता है। यह क्षेत्र 18वीं सदी के प्रारम्भ में क्यौंथल रियासत का भाग था। अंग्रेजों का इस क्षेत्र से संबंध 1808-1809 ई. में हुई सिक्खों और गोरखों की लड़ाई के बाद जुड़ा। सिक्खों ने गोरखों को सतलुज घाटी से दूर तक भगा दिया था। गोरखों के डर से लोगों ने अंग्रेजों के आने का स्वागत किया। अंग्रेज सरकार ने मेजर जनरल डेविड आक्टरलोनी के नेतृत्व में सेना भिजवाई और यह हुक्म दिया कि वे गोरखों से रियासत को आजाद करवाएं। लगभग सारी रियासतों के सरदार अंग्रेज सेना के साथ शामिल हो गए और गोरखों के विरूद्ध खड़े हो गए। रामगढ़ के किले में दुश्मन की सेनाएं लड़ाई के लिए तैयार हो गई। मलाओं के किले के नजदीक जोरदार युद्ध हुआ। जिसमें गोरखों को हार का मुंह देखना पड़ा। अंगे्रजी सेना ने किले पर कब्जा कर लिया। अंग्रेजों ने अपनी सेना में गोरखा बटालियन का संगठन किया। आज तक मलाओं रायफल के नाम से भारतीय सेना में रेंजीमेंट मौजूद है। 15 मई, 1815 ई. को गोरखों का इस क्षेत्र में शासन करने का सपना समाप्त हो गया। गोरखों को 1814-15 ई. में ट्रीटी ऑफ संगुअली पर दस्तखत करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। 1819 ई. को शिमला में लैफ्टीनेंट रोज़ ने ब्रिटिश की रिहाईश के लिए लकड़ी की काटेज बनवाई।

  • चार्ल्स पाट कैनेडी ने 1822 ई. को बनवाया कनैडी हाऊस

1822 ई. को चार्ल्स पाट कैनेडी ने कनैडी हाऊस बनवाया। लार्ड कोमबरमीयर जो भारत में अंग्रेज सेना का कमांडर था। उसने तीन मील लंबी सड़क जाखू मंदिर तक बनवाई। उसके बाद 1830 ई. में सरकार ने शिमला के विकास के लिए कार्यक्रम बनवाया। पटियाला और कैथल रियासत 12 गांव पंजार, शरहन, कालीआना, खलीनी, डेबरीया, फागली, डलही, कैअर, बमनोई, पागावग, धार, कानहलग ले लिए गए, इनके बदले रावेन के परगना को दिया। महाराजा पटियाला से कैंथू, बांगलेग, चेओग और एैनदारी गांव लिए गए। इनके बदले में भरोली परगना का कुछ हिस्सा, धानोटी, कलावर और घरोल गांव दिए गए। सन् 1832 ई. में लार्ड विलियम बैंटिक के आने तक शिमला, अंग्रेज असुरों के लिए गर्मियों में राहत पाने का बढ़िया साधन बन गया था। लार्ड बैंटिक की मुलाकात का आमंत्रण महाराजा रणजीत सिंह की ओर से शिमला पहुंचाया गया था।

  • 1881 ई. में 1141 घर थे शिमला में

1838 ई. की ट्रीटी, ब्रिटिश, पंजाब सरकार और शाह शुजाह की योजना शिमला में बनाई गई थी। शिमला डिस्ट्रिक गजटीयर 1888-89 ई. के अनुसार 1830 ई. में शिमला में 30 घर थे, 1841 में 100, 1866 तक 290, 1881 तक 1141 घर बन गए थे, कैनेडी के साहस से सड़कों, बाजार, घरों के लिए जगह और खुरदरी पहाड़ियों और जंगली पहाड़ियों का नया रूप मिलना शुरू हो गया था।

 1881 ई. में 1141 घर थे शिमला में

1881 ई. में 1141 घर थे शिमला में

  • सन् 1887 में बना गेयटी थियेटर

सन् 1860 में 560 फुट लंबी सुरंग शिमला में संजौली बाजार में बनाई गई थी। नगर निगम के कामों के लिए शिमला को दो हिस्सों में बांटा गया। एक हिस्से को स्टेशन वार्ड और दूसरे को बाजार वार्ड का नाम दिया गया। स्टेशन वार्ड में 400 घर थे, बाजार वार्ड में बालूगंज, कैथू, लकड़ बाजार छोटा और बड़ा, बड़ा और नीचा बाजार। शिमला सन् 1887 में गेयटी थियेटर, 1904 ई. में सचिवालय को नई इमारत गार्टन कैसल में तबदील किया गया था।

  • लार्ड कर्जन ने 1899-1905 में बनवाई कालका-शिमला रेल लाइन

लार्ड कर्जन ने 1899-1905 में कालका-शिमला रेल लाइन बनवाई। रेलवे लाइन की कुल लम्बाई 60 मील थी। इस रास्ते में 103 सुरंगें हैं। सबमें बड़ी 1143.61 मीटर लंबी बरोग की सुरंगे हैं। 9 नवम्बर, 1903 ई में सबसे पहले यात्री गाड़ी चलाई गई।

  • 1852 ई. में बनी शिमला म्युनिसिपल कमेटी
लार्ड कर्जन ने 1899-1905 में बनवाई कालका-शिमला रेल लाइन

लार्ड कर्जन ने 1899-1905 में बनवाई कालका-शिमला रेल लाइन

शिमला म्युनिसिपल कमेटी 1852 ई. में बनाई गई जिसे 1871 ई. में प्रथम श्रेणी का दर्जा दिया गया था। सन् 1875 में शहर की तरक्की के लिए चुंगी व्यवस्था प्रारंभ की गई थी।

  • अंग्रेजी राज के समय गर्मियों के दिनों में भारत की राजधानी हुआ करता था शिमला

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी है। यह शहर भारत के पर्यटन के मुख्य शहरों में से खूबसूरत पहाड़ी स्थान है। अंग्रेजी राज के समय शिमला गर्मियों के दिनों में भारत की राजधानी हुआ करता था। शिमला का क्षेत्र केन्द्रीय हिमाचल पर्वत के घने जंगलों पर ऊंची चोटियों से घिरा हुआ है। इनमें जाखू हिल 8050 फुट, प्रोस्पैक्ट हिल 7140 फुट, समर हिल 6900 फुट, आबजरवेटरी हिल 7050 फुट, एैलशिथम 7400 फुट, म्यूजियम हिल और फैटर हिल शामिल हैं।

  • शिमला जाने के लिए बसों और रेलवे स्टेशन के अलावा हवाई सेवा उपलब्ध

शिमला जाने के लिए कालका से बसें और छोटी रेलगाड़ी चलती है। रेलगाड़ी पहाड़ी सुरंगों, खड्डों और खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों को पार करती हुई शिमला पहुंचती है। बसों और रेलवे स्टेशन के अलावा हवाई सेवा भी है। दिल्ली से शिमला, चंडीगढ़ और भूंतर तक हवाई सेवा उपलब्ध है।

  • पर्यटक बर्फबारी, स्केटिंग और सर्दियों के खेलों का आनंद लेने आते हैं शिमला

शिमला का हवाई अड्डा शिमला से 20 किलोमीटर दूर जुब्बड़हट्टी में स्थित है। शिमला का मौसम गर्मियों में सुहावना होता है। आमतौर पर भारी कपड़े पहने जाते हैं। दिसंबर से मार्च तक मौसम बहुत ठंडा होता है। पर्यटक सर्दियों में बर्फबारी, स्केटिंग और सर्दियों के खेलों का आनंद लेने आते हैं। ग्रामीण लोगों की भाषा हिन्दी, पंजाबी, पहाड़ी, अंग्रेजी और उर्दू हैं। पर्यटकों के रहने के लिए बड़ी तादात में होटल हैं। इनके अलावा धर्मशालाएं और गुरूद्वारे भी हैं। उस समय प्रसिद्ध बस्तियां संजौली, छोटा शिमला, लक्कड़ बाजार, लोअर बाजार, यूएस क्लब, खलीणी, जाखू, कैथू, बोवल गंज, चक्कर, टुटू, ढली, फागली, लोंगवुड और टूटीकंडी थीं।

…..शिमला के विषय में हम आपको बाकि जानकारी हम अपने अगले अंक में जल्दी ही देंगे।

साभार: हिमाचल दर्पण

 

 

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