नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिवाली से पहले राहत दी है। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। इसके बाद कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए डीए और डीआर की दर 60 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो गई है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2026 से लागू मानी जाएगी। इस फैसले से करीब 48 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनर्स को फायदा मिलने की उम्मीद है।
जुलाई से मिलेगा बढ़े हुए महंगाई भत्ते का फायदा: सरकार के इस फैसले के तहत कर्मचारियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते और पेंशनर्स को महंगाई राहत का लाभ 1 जुलाई 2026 से मिलेगा। यानी यह बढ़ोतरी पिछली तारीख से लागू होगी। इस फैसले से सरकारी खजाने पर सालाना करीब 10,016 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। महंगाई भत्ते में यह बढ़ोतरी सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर स्वीकार किए गए फॉर्मूले के अनुसार की गई है। डीए में बढ़ोतरी से केंद्रीय कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जबकि डीआर बढ़ने से पेंशनर्स को फायदा होगा।

शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार के शहरी विकास विभाग और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) की पहल प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत के अंतर्गत प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। इस पहल के माध्यम से प्रदेश के सभी शहरी स्थानीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 पर प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि शहरी निकायों में प्रभावी, समावेशी और पर्यावरण-अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा सके।
विक्रमादित्य सिंह, मंत्री, शहरी विकास एवं लोक निर्माण विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार, ने कहा कि हमारा उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों को स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम बनाना है। यह प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत के तहत प्रदेश स्तरीय पहल निकायों को नेतृत्व और सशक्त बनाएगी और स्वच्छ, व्यवस्थित तथा पर्यावरण-अनुकूल शहरी क्षेत्रों के निर्माण में योगदान देगी।
बी.पी. बिद्दप्पा, कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य पीपल, ट्रांसफॉर्मेशन एवं सस्टेनेबिलिटी अधिकारी, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड, ने कहा कि प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत के माध्यम से हमारा उद्देश्य सर्कुलर इकोनिमी को बढ़ावा देना, अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ करना तथा संसाधनों के पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करना है। हमारा मानना है कि प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मजबूत निकायों, नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ यह साझेदारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
नीरज कुमार निदेशक शहरी विकास विभाग ने कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा कि शहरी स्थानीय निकायों के नेतृत्व एवं संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करना, अपशिष्ट प्रबंधन के व्यावहारिक समाधानों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण, परिवहन, उपचार, व्यवहार परिवर्तन, संसाधन पुनर्प्राप्ति, पुनर्चक्रण तथा मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी के प्रभावी संचालन एवं प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।कार्यक्रम का नेतृत्व निदेशालय शहरी विकास विभाग एवं हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड का प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत के तहत सर्कुलर इकॉनमी और रिसोर्स रिकवरी के क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा। जिसमें अपशिष्ट उत्पादन में कमी, स्रोत पर पृथक्करण, संग्रहण एवं प्रसंस्करण, संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण जैसे प्रमुख विषय शामिल होंगे।

हिमाचल: प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार ने भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज देश में लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन इन सवालों का जवाब देने के बजाय भाजपा उल्टा कांग्रेस पर आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि अगर देश में किसी ने अराजकता फैलाने का काम किया है, तो वह भाजपा है; अगर किसी ने लोकतंत्र को कमजोर करने का काम किया है, तो वह भाजपा है; और अगर किसी ने संविधान की मूल भावना को कमजोर करने का काम किया है, तो वह भी भाजपा की नीतियों और कार्यशैली के कारण हुआ है। अब भाजपा अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों से बचने के लिए कांग्रेस पर उंगली उठाने का प्रयास कर रही है।
विनय कुमार ने कहा कि भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि पिछले 12 वर्षों से केंद्र में उसकी सरकार है। देश की सत्ता भाजपा के हाथों में है, केंद्र सरकार की जिम्मेदारी भाजपा के पास है और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जवाबदेही भी उसी की है। ऐसे में भाजपा किस नैतिक आधार पर कांग्रेस से सवाल पूछ रही है? यदि देश की चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं, यदि मतदाता सूचियों में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं और यदि नागरिकों के मताधिकार को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं, तो इनका जवाब देना सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं का दायित्व है। सत्ता में भाजपा, जिम्मेदारी भाजपा की और सवालों से बचने के लिए निशाना कांग्रेस पर—यह दोहरा रवैया अब नहीं चल सकता।
उन्होंने कहा कि भाजपा को कांग्रेस पर आरोप लगाने से पहले अपने 12 वर्षों के शासन का हिसाब देश की जनता को देना चाहिए। भाजपा बताए कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए उसने क्या किया, चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए और मतदाता सूचियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की। लोकतंत्र केवल भाषण देने, नारे लगाने और राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाने से मजबूत नहीं होता। लोकतंत्र तब मजबूत होता है, जब हर नागरिक के वोट की रक्षा हो, हर पात्र मतदाता को मतदान का अवसर मिले और चुनाव प्रक्रिया पर देश की जनता का भरोसा कायम रहे।
13 करोड़ मतदाताओं के वोट काटे जाने के आरोप पर देश को जवाब चाहिए
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवाल अत्यंत गंभीर हैं। यदि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाने का दावा सही है, तो यह कोई सामान्य प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण मामला है। उन्होंने मांग की कि इस दावे की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा मतदाता सूची से हटाए गए नामों, उसके कारणों और प्रभावित मतदाताओं की वास्तविक संख्या से संबंधित तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूची से गलत तरीके से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। एक वोट केवल कागज पर दर्ज निशान नहीं, बल्कि नागरिक की आवाज, उसकी भागीदारी और लोकतंत्र में उसकी हिस्सेदारी का प्रतीक है। गरीब हो या अमीर, ग्रामीण हो या शहरी, युवा हो या बुजुर्ग—हर पात्र नागरिक के मताधिकार की समान रूप से रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है।
विनय कुमार ने कहा कि कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि कहीं भी नाम हटाने में अनियमितता हुई है, तो उसकी जांच होनी चाहिए, प्रभावित नागरिकों को न्याय मिलना चाहिए और भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इस विषय को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखा जा सकता, क्योंकि इसका सीधा संबंध देश के नागरिकों के अधिकारों से है।
भाजपा पहले अपने गिरेबान में झांके, फिर कांग्रेस को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाए
विनय कुमार ने कहा कि भाजपा का इतिहास और उसकी राजनीतिक कार्यशैली देश की जनता के सामने है। जब भी सरकार से जवाब मांगा जाता है, तब मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष पर आरोप लगाने का प्रयास किया जाता है। कांग्रेस जब लोकतंत्र, संविधान, चुनावी पारदर्शिता और जनता के अधिकारों की बात करती है, तो भाजपा असहज क्यों हो जाती है? यदि भाजपा को अपनी चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है, तो उसे सवालों से बचने के बजाय तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाने या सवाल पूछने वालों पर आरोप लगाने से जनता के सवाल समाप्त नहीं हो जाते। कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वह जनता के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाए और सरकार से जवाबदेही की मांग करे। लोकतंत्र में सवाल पूछना कोई अपराध नहीं, बल्कि एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान है।
उन्होंने कहा कि देश की जनता ने संविधान के तहत अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार हासिल किया है। इस अधिकार की रक्षा करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते हैं, तो उनका समाधान तथ्यों, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच के माध्यम से किया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक बयानबाजी के जरिए।
जाति-धर्म के नाम पर समाज को बांटने से नहीं, जनता के अधिकारों की रक्षा से मजबूत होगा लोकतंत्र
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा बार-बार जाति और धर्म के मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाकर जनता के वास्तविक सवालों से ध्यान हटाने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि देश की ताकत उसकी विविधता, सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों में निहित है। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देता है और लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि इन अधिकारों की रक्षा कितनी निष्पक्षता से की जाती है।
उन्होंने कहा कि देश को आज ऐसी राजनीति की आवश्यकता है, जो नागरिकों को आपस में बांटने के बजाय उनके अधिकारों को मजबूत करे। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, युवाओं का भविष्य और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास जैसे मुद्दों पर सार्थक जवाब देने के बजाय राजनीतिक ध्यान भटकाना किसी समस्या का समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी। भाजपा को यह तय करना होगा कि वह गंभीर सवालों का जवाब देना चाहती है या फिर हर सवाल को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझाकर अपनी जवाबदेही से बचना चाहती है।
1 नवंबर को दिल्ली में गूंजेगी ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ की आवाज
विनय कुमार ने कहा कि आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ महारैली लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस महारैली में INDIA गठबंधन के नेता और कार्यकर्ता चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूचियों की निष्पक्षता और प्रत्येक पात्र नागरिक के वोट की सुरक्षा की मांग को मजबूती से उठाएंगे।
उन्होंने कहा कि भाजपा इस महारैली को लेकर चाहे जितनी बयानबाजी करे, लेकिन लोकतंत्र से जुड़े सवालों को दबाया नहीं जा सकता। जब नागरिकों के अधिकारों, चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही का प्रश्न सामने हो, तो विपक्ष का दायित्व है कि वह जनता की आवाज बने। कांग्रेस इस जिम्मेदारी से पीछे हटने वाली नहीं है।
उन्होंने कहा कि 1 नवंबर की महारैली केवल किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को सामने रखने का अवसर है। कांग्रेस कार्यकर्ता देशभर में जनता के बीच जाकर मताधिकार के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाएंगे और यह सुनिश्चित करने की मांग करेंगे कि किसी भी पात्र नागरिक का वोट अनुचित तरीके से न कटे।
विनय कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी भी इस अभियान को सफल बनाने के लिए संगठनात्मक स्तर पर प्रयास कर रही है। पार्टी पदाधिकारियों, जिला एवं ब्लॉक इकाइयों तथा कार्यकर्ताओं से आह्वान किया गया है कि वे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं तथा दिल्ली में आयोजित होने वाली महारैली में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
लोकतंत्र किसी पार्टी की जागीर नहीं, देश की जनता की अमानत है
अंत में विनय कुमार ने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है। यह देश की जनता की अमानत है, जिसे संविधान ने सुरक्षित किया है। सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता देश की स्थायी ताकत है। किसी भी सरकार को जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों से ऊपर नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा की बयानबाजी से डरने वाली नहीं है और न ही जनता के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाने से पीछे हटेगी। यदि भाजपा को लगता है कि उसके शासन में लोकतंत्र पूरी तरह सुरक्षित है, तो उसे आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। मतदाता सूचियों से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और हर पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की मांग है।
विनय कुमार ने कहा कि भाजपा चाहे जितने आरोप लगा ले, कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी। देश की जनता को जवाब चाहिए, पारदर्शिता चाहिए और अपने वोट की सुरक्षा का भरोसा चाहिए। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान से यही मांग पूरी मजबूती के साथ उठाई जाएगी—‘वोट बचेगा, तभी लोकतंत्र बचेगा; लोकतंत्र बचेगा, तभी संविधान की आत्मा सुरक्षित रहेगी।’

शिमला: भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं संगठनात्मक जिला सोलन के प्रभारी संदीपनी भारद्वाज ने डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कार्यवाहक कुलपति डॉ. हरमिंदर सिंह बावेजा की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक निर्णयों, प्रबंधन मंडल की कार्यवाही, शिक्षकों के स्थानांतरण और लंबित कानूनी मामलों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच होनी चाहिए।
भारद्वाज ने कहा कि उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार डॉ. बावेजा के विरुद्ध सीबीआई न्यायालय, देहरादून में दो आरोपपत्र लंबित होने और संबंधित मामलों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान किए जाने की बात सामने आई है। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में उनके पूर्व प्रशासनिक कार्यकाल से संबंधित विभागीय जांचें लंबित होने के भी आरोप हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों की वास्तविक स्थिति न्यायालय और संबंधित विभागों के आधिकारिक अभिलेखों से स्पष्ट की जानी चाहिए। आरोपपत्र लंबित होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है, लेकिन उच्च प्रशासनिक पद पर कार्यरत अधिकारी से पारदर्शिता की अपेक्षा अवश्य की जाती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्व कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल का कार्यकाल 8 मई 2026 को समाप्त होने के बाद डॉ. बावेजा को अतिरिक्त कार्यभार सौंपते समय लंबित मामलों और प्रशासनिक परिस्थितियों का क्या परीक्षण किया गया था?
भारद्वाज ने प्रबंधन मंडल की 119वीं से 123वीं बैठकों की कार्यवाही से संबंधित आरोपों को विशेष रूप से गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि 12 अगस्त 2026 को आयोजित 123वीं बैठक के कार्यवृत्त में कथित बदलाव और राज्य सरकार के अधिकारियों की आपत्तियों की जांच आवश्यक है। यदि कार्यवाही में अनधिकृत संशोधन हुआ है, तो उसके आधार पर लिए गए निर्णयों की वैधानिकता भी जांची जानी चाहिए।
भारद्वाज ने कहा कि यह विवाद केवल आरोपों तक सीमित नहीं है। 5 अक्टूबर को कुलपति द्वारा कुलसचिव सिद्धार्थ आचार्य की शक्तियां वापस लेने का आदेश प्रदेश सरकार ने 6 अक्टूबर को निरस्त कर दिया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि कुलसचिव के वैधानिक अधिकार इस प्रकार दूसरे अधिकारी को नहीं सौंपे जा सकते। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार को स्वयं कुलपति का आदेश वापस लेना पड़ा, तो इस प्रशासनिक टकराव की जिम्मेदारी कौन लेगा?
उन्होंने कहा कि 12 अगस्त की प्रबंधन मंडल बैठक में डॉ. बावेजा के व्यक्तिगत सेवा लाभों से संबंधित विषय उठाए जाने पर वित्त विभाग ने हितों के टकराव की आपत्ति दर्ज की थी। पूर्व बैठकों की कार्यवाही को अमान्य घोषित करने के प्रस्ताव से पहले प्रदान की गई सीबीआई अभियोजन स्वीकृति प्रभावित होने का सवाल भी सामने आया है। भारद्वाज ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र कानूनी जांच कराई जाए।
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में लगभग 180 स्थानांतरण किए जाने, कुछ कर्मचारियों पर दबाव डालने और शैक्षणिक गतिविधियों में राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्थानांतरण आदेशों, संबंधित शिकायतों तथा परीक्षा प्रणाली के अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक है। विशेष रूप से थुनाग महाविद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता और कृषि विज्ञान केंद्रों में रिक्त पदों की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
उन्होंने परीक्षा परिणामों को प्रभावित करने संबंधी आरोपों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी के राजनीतिक संगठन से संबंध के आधार पर परीक्षा मूल्यांकन प्रभावित करने के निर्देश दिए गए हैं, तो यह विश्वविद्यालय की अकादमिक स्वतंत्रता का गंभीर विषय है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने राज्य सरकार से मांग की कि प्रबंधन मंडल की 119वीं से 123वीं बैठकों के मूल अभिलेख सुरक्षित किए जाएं, विवादित प्रशासनिक आदेशों की वैधानिक समीक्षा हो तथा लंबित न्यायिक मामलों और विश्वविद्यालय द्वारा दायर अपील से संबंधित निर्णयों का परीक्षण किया जाए।
भारद्वाज ने कहा कि डॉ. बावेजा को भी अपने विरुद्ध उठाए गए प्रश्नों पर दस्तावेजों सहित सार्वजनिक स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच निष्पक्ष रखने के लिए सरकार कार्यवाहक कुलपति की प्रशासनिक शक्तियों के प्रयोग की समीक्षा करे और किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी के विरुद्ध प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न होने दे।
उन्होंने कहा कि नौणी विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के बागवानों, किसानों, विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्थान है। इसकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा और प्रशासनिक विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोपरि होना चाहिए। सरकार को आरोपों की समयबद्ध जांच कराकर तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए और दोष प्रमाणित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

शिमला: प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि सरकार ने दूसरे चरण में सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत अलग-अलग श्रेणियों के 3,100 शिक्षकों की नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करना, विषय-विशेष के शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा सीबीएसई पाठ्यक्रम अपनाने वाले सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल अंग्रेजी एवं गणित शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी उप-योजना के तहत 600 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें अंग्रेजी के 240 शिक्षक और गणित के 360 शिक्षक शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों में निश्चित मानदेय व एकमुश्त समेकित राशि के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी योजना के तहत 2,500 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें हिंदी के 240 शिक्षक, राजनीति विज्ञान के 199 शिक्षक, इतिहास के 199 शिक्षक, अर्थशास्त्र के 202 शिक्षक, भौतिक विज्ञान के 120 शिक्षक, रसायन विज्ञान के 120 शिक्षक, जीव विज्ञान के 240 शिक्षक, संस्कृत के 240 शिक्षक, कम्प्यूटर के 120 शिक्षक, संगीत के 120 शिक्षक, वाणिज्य के 240 शिक्षक, शारीरिक शिक्षा के 240 तथा ललित कला के 220 शिक्षक शामिल हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि इन शिक्षकों का चयन हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग द्वारा प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। चयनित शिक्षकों को 30 हजार रुपये प्रतिमाह निश्चित मानदेय दिया जाएगा।
शिक्षण मानकों को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने अंग्रेजी और गणित शिक्षकों के पदों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य योग्यता बनाने का भी निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत बनाने और सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करना शैक्षणिक स्तर में सुधार लाने और प्रदेशभर के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक अवसरों का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शैक्षणिक अधोसंरचना, शिक्षण मानकों और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने के लिए आवश्यक सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के समग्र विकास और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राजकीय स्कूलों को सशक्त बनाने तथा विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के दृष्टिगत सक्षम बनने के लिए निरंतर प्रगतिशील कदम उठाती रहेगी।

अवैध रूप से पटाखे रखने और बेचने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई: अनुपम कश्यप
शिमला: उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने जिला में पटाखों की अवैध बिक्री और भंडारण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पटाखों की बिक्री के लिए वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है तथा इनकी बिक्री केवल प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों पर ही की जा सकती है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, एफआईआर दर्ज करने और संबंधित प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उपायुक्त ने कहा कि पटाखों की बिक्री और भंडारण को नियंत्रित करने के लिए विस्फोटक अधिनियम, 1884 (Explosives Act, 1884) तथा विस्फोटक नियम, 2008 (Explosives Rules, 2008) के प्रावधान लागू होते हैं। पटाखों का अवैध भंडारण और बिना वैध लाइसेंस बिक्री करना कानून का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
रामपुर में अवैध पटाखे रखने पर एफआईआर दर्ज : जिला में अवैध रूप से पटाखे रखने के मामले में रामपुर पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपक बंसल पुत्र रविंद्र बंसल, निवासी गांव एवं डाकघर रामपुर, तहसील रामपुर, जिला शिमला के खिलाफ पुलिस थाना रामपुर में एफआईआर संख्या 119/26, दिनांक 28 अक्टूबर, 2026 दर्ज की गई है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125 और 288 तथा विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9बी के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी की तलाई (नोगली) स्थित दुकान में अवैध रूप से रखे गए पटाखों के 22 कार्टन जब्त किए गए हैं। जब्त पटाखों को बुशहर हाउस, रामपुर में रखा गया है। मामले की जांच हेड कांस्टेबल सुरेंद्र, नंबर 178, पुलिस थाना रामपुर द्वारा की जा रही है।
उपायुक्त ने कहा कि त्योहारी सीजन के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। पटाखों का अवैध भंडारण और असुरक्षित स्थानों पर बिक्री आगजनी तथा अन्य दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। इसलिए सभी विक्रेताओं को आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करने और प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों पर ही पटाखों की बिक्री करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने पटाखा विक्रेताओं से नियमों का पालन करने तथा आमजन से केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा नियमों के उल्लंघन पर निगरानी रखी जाएगी तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

5 अवैध दुकानों को किया गया ध्वस्त
शिमला: शिमला पुलिस नशा तस्करी के विरुद्ध एक कॉम्प्रिहेंसिव रणनीति के तहत कार्रवाई कर रही है। जिसके अंतर्गत नशे की कमाई को भी खत्म किया जा रहा है। इसी दिशा में पहली बार शिमला पुलिस ने नशा तस्करी से जुड़े आरोपियों द्वारा सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों एवं अनाधिकृत निर्माणों को चिन्हित कर उन्हें हटाने की कार्रवाई भी शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य नशा तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले संभावित ठिकानों और उससे जुड़े अवैध ढांचों को समाप्त करना है, जिससे नशे के काले कारोबार को खत्म करने में काफी सफलता मिल रही है।
इसी अभियान के तहत पिछले कल चिडगांव-रोहड़ू मार्ग पर लंबाखाटल के समीप लोक निर्माण विभाग (PWD) की सरकारी भूमि पर किए गए अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई की गई। यह मामला चिट्ठा तस्करी के खिलाफ ND&PS Act के अंतर्गत, पुलिस थाना कोटखाई से संबंधित है। मामले की समीक्षा के दौरान सरकारी भूमि पर दुकानों एवं एक स्टोर का निर्माण किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस एवं लोक निर्माण विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करते हुए लाखों रुपए की पांच दुकानों को ध्वस्त किया गया तथा स्टोर को अपने कब्जे में लिया गया।
इससे पहले भी 8 अक्टूबर को रोहड़ू क्षेत्र में एक नशा तस्कर के अवैध रेस्टोरेंट को भी बुलडोजर द्वारा ध्वस्त किया गया था।
गौरतलब है कि शिमला जिला में नशा तस्करों के खिलाफ ऐसी कार्यवाही पहली बार ही की गई है और सिर्फ आठ महीनों में ही शिमला पुलिस के अथक प्रयासों के चलते दो नशा तस्करों द्वारा बनाई गई अवैध संपत्तियों को बुलडोजर द्वारा डिस्मेंटल कर दिया गया है।
एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत इस पहलू पर शिमला पुलिस द्वारा फरवरी महीने से ही मजबूत कार्यवाही शुरू करते हुए बड़े-बड़े नशा तस्करों की नशा तस्करी से जुड़ी संपत्तियों एवं निर्माणों का सत्यापन भी किया गया है। अब तक पुलिस द्वारा 940 सत्यापन किए जा चुके हैं, जिनके आधार पर 58 संभावित अवैध संपत्तियों को चिन्हित किया गया हैं।
शिमला पुलिस का स्पष्ट उद्देश्य नशा तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई को गिरफ्तारी और बरामदगी से आगे बढ़ाते हुए मुख्य सप्लायरों, उनके वित्तीय नेटवर्क, अवैध संपत्तियों तथा नशे के कारोबार से जुड़े संभावित ठिकानों तक पहुंचना है। नशा तस्करी से जुड़े अवैध नेटवर्क के हर पहलू पर कार्रवाई जारी रहेगी।
इस अभियान का उद्देश्य केवल नशा तस्करों की गिरफ्तारी और मादक पदार्थों की बरामदगी तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है। इसके तहत मादक पदार्थों की प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बरामदगी, बैकवर्ड लिंकेज की जांच के माध्यम से मुख्य सप्लायरों की गिरफ्तारी तथा नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने के लिए वित्तीय जांच की जा रही है।

शिमला:राज्य चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालय शिक्षक संघ (SAMDCOT) ने सरकार के कथित भेदभावपूर्ण आदेशों और लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। यह निर्णय आज, 28 अक्टूबर को आयोजित संघ की आपातकालीन आम सभा (जनरल बॉडी मीटिंग) में लिया गया। बैठक में प्रदेश के सरकारी चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षकों की लंबे समय से लंबित जायज मांगों की लगातार अनदेखी, सेवा शर्तों में भेदभाव तथा सरकार के उदासीन रवैये को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया गया।
संघ ने स्पष्ट किया कि बार-बार अपनी समस्याओं को सरकार के समक्ष रखने के बावजूद कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया है। ऐसी परिस्थितियों में चिकित्सा शिक्षकों को अपने अधिकारों एवं संस्थागत गरिमा की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा
2 से 4 नवंबर तक डेढ़ घंटे की पेन-डाउन हड़ताल: प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षक 2, 3 और 4 नवंबर 2026 को प्रतिदिन प्रातः 9:30 बजे से 11:00 बजे तक डेढ़ घंटे की पेन-डाउन हड़ताल करेंगे।
हालांकि, इस दौरान आपातकालीन सेवाएं, ट्रॉमा सेवाएं तथा गहन चिकित्सा इकाइयों (ICU) में उपचार पूर्ववत जारी रहेगा, ताकि गंभीर मरीजों की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित न हों।
5 नवंबर को सामूहिक आकस्मिक अवकाश: यदि प्रदेश सरकार 4 नवंबर तक संघ की जायज मांगों पर सकारात्मक बातचीत शुरू नहीं करती अथवा कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षक 5 नवंबर 2026 को सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर जाएंगे।
राज्य सचिवालय तक विरोध मार्च: इसी दिन, 5 नवंबर को प्रदेशभर के चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा शिक्षक शिमला में एकत्रित होकर हिमाचल प्रदेश राज्य सचिवालय तक संयुक्त विरोध मार्च निकालेंगे।
इस मार्च के माध्यम से शिक्षक अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए सरकार से विवादास्पद आदेशों को तत्काल वापस लेने तथा लंबित मांगों का न्यायसंगत समाधान करने की मांग करेंगे।
प्रशासन को आंदोलन की औपचारिक सूचना: संघ द्वारा प्रस्तावित आंदोलन की औपचारिक सूचना संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है। इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (IGMC), शिमला के प्रधानाचार्य को भी इस संबंध में सूचित किया गया है, ताकि आंदोलन की जानकारी तत्काल चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं प्रदेश सरकार तक पहुंचाई जा सके।
मरीजों की असुविधा के लिए खेद, लेकिन आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं: SAMDCOT के पदाधिकारियों ने कहा कि चिकित्सा शिक्षक सदैव मरीजों के हितों और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते आए हैं।
संघ ने पेन-डाउन हड़ताल के दौरान बाह्य रोगी विभाग (OPD) में आने वाले मरीजों को होने वाली संभावित असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है। संघ का कहना है कि सरकार की लगातार उदासीनता, शिक्षकों की न्यायोचित मांगों की अनदेखी तथा सेवा संबंधी भेदभावपूर्ण निर्णयों ने चिकित्सा शिक्षकों में व्यापक असंतोष पैदा कर दिया है।
संघ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति अथवा संस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की गरिमा, शिक्षकों के अधिकारों तथा न्यायसंगत सेवा शर्तों की रक्षा के लिए है।
SAMDCOT ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि वह स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल सार्थक संवाद शुरू करे और विवादास्पद आदेशों को वापस लेकर चिकित्सा शिक्षकों की लंबित मांगों का समाधान सुनिश्चित करे, ताकि आंदोलन की स्थिति को टाला जा सके।