हिमाचल विरोधी चेहरा बेनकाब होने से बौखला गए हैं जयराम ठाकुर – कांग्रेस
हिमाचल विरोधी चेहरा बेनकाब होने से बौखला गए हैं जयराम ठाकुर – कांग्रेस
शिमला: उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि भाजपा का आरडीजी पर असली चेहरा प्रदेश के सामने बेनकाब हो चुका है, जिससे वह पूरी तरह बौखलाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज जय राम ठाकुर और भाजपा के अन्य नेता आरडीजी विरोधी हैं, जबकि उन्होंने हिमाचल प्रदेश की सीमित आर्थिक संसाधनों और भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए पंद्रहवें और सोलहवें वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश को आरडीजी देने की पुरजोर वकालत की थी। मंत्रियों ने सवाल उठाया कि जय राम ठाकुर प्रदेश की जनता को स्पष्ट करें कि कुछ ही महीनों में उनका रुख क्यों बदल गया है। आखिर क्यों आज वह और पूरी भाजपा हिमाचल प्रदेश के हितों के खिलाफ खड़ी है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का विरोध करते-करते भाजपा नेतृत्व शायद प्रदेश के लोगों के हितों को भूल चुका है।
मंत्रियों ने कहा कि भाजपा नेता आज केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली धनराशि को आर्थिक मदद के रूप में गिना रहे हैं, जबकि यह प्रदेश की जनता का अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बेतुके स्पष्टीकरण प्रदेश के लोगों के गले नहीं उतरने वाले। उन्होंने कहा कि जय राम ठाकुर और भाजपा नेताओं ने अब तक आरडीजी के मुद्दे पर एक बार भी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि क्या भाजपा आरडीजी को बंद करने के पक्ष में है या नहीं? उन्होंने कहा कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है, जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 275(1) में किया गया है। उन्होंने कहा कि जब जय राम ठाकुर के कार्यकाल में प्रदेश को 56 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के अतिरिक्त 14 हजार करोड़ रुपये का जीएसटी क्षतिपूर्ति (कंपनसेशन) प्राप्त हुआ, तब आरडीजी पर कोई आपत्ति नहीं थी, तो अब विरोध क्यों? क्या इसलिए कि आज हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है?
हर्षवर्धन चौहान और राजेश धर्माणी ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान हिमाचल प्रदेश के लिए आरडीजी बहाल करने के लिए नियम 102 के तहत लाए गए सरकारी प्रस्ताव का विरोध कर जय राम ठाकुर और भाजपा ने अपना वास्तविक चेहरा उजागर कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले आपदा प्रभावितों को विशेष आर्थिक सहायता देने संबंधी विधानसभा प्रस्ताव का भी भाजपा विधायकों ने समर्थन नहीं किया था। प्रदेश की जनता देख चुकी है कि भाजपा हिमाचल प्रदेश के अधिकारों के लिए कभी खड़ी नहीं होती।