
कुमारसैन: जिला शिमला पुलिस द्वारा महिलाओं को निशाना बनाकर उनकी आंखों में मिर्च पाउडर डालकर आभूषण छीनने की तीन वारदातों को सुलझाते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। कुमारसैन थाने में इस संबंध में तीन अलग-अलग मामले दर्ज थे। 31 अगस्त को जुब्बड़ के पास सीमा देवी की आंखों में मिर्च पाउडर डालकर उनके दोनों कानों की बालियां झपट ली गई थीं। इसके बाद 14 सितंबर को कण्डयाली के पास सुनो देवी को इसी तरीके से निशाना बनाया गया और उनकी सोने की बालियां छीन ली गईं। वहीं, 26 सितंबर को एक ढाबे में अकेली कनकु की आंखों में मिर्च पाउडर डालकर आरोपी उसका मंगलसूत्र छीनकर फरार हो गया था।
अन्वेषण के दौरान तीनों मामलों में आरोपी के modus operandi में स्पष्ट समानता सामने आई है। जांच से यह तथ्य सामने आया कि आरोपी द्वारा वारदातों को योजनाबद्ध एवं सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। आरोपी ने वारदात से कई दिन पूर्व घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्र की रेकी की तथा पीड़ित महिलाओं की आवाजाही और उनके आवागमन के मार्ग का जायजा लिया। इसके बाद वह ऐसे समय और स्थान का इंतजार करता था, जब पीड़ित महिला सुनसान एवं अपेक्षाकृत एकांत पगडंडी पर अकेली हो। उपयुक्त अवसर मिलते ही आरोपी द्वारा महिला की आंखों में मिर्च पाउडर डालकर उसे असहाय किया जाता था और उसके पहने हुए सोने के आभूषण छीनकर मौके से फरार हो जाता था। तीनों वारदातों में अपनाई गई इस समान कार्यप्रणाली से आरोपी द्वारा वारदातों की पूर्व-योजना एवं सुनियोजित तरीके से उनके निष्पादन की पुष्टि होती है।
आरोपी द्वारा अपनी पहचान एवं गतिविधियों को छिपाने तथा पुलिस की पकड़ से बचने के लिए लगातार सावधानी बरती जाती थी। वह सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से बचते हुए सुनसान एवं एकांत स्थानों का चयन कर वारदातों को अंजाम देता था। इसके बावजूद जिला शिमला पुलिस द्वारा तकनीकी एवं मानवीय साक्ष्यों के आधार पर लगातार किए गए प्रयासों और गहन जांच के परिणामस्वरूप आरोपी की पहचान स्थापित कर उसे गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की गई।
कुमारसैन पुलिस द्वारा तीनों वारदातों को आपस में जोड़ते हुए घटनाओं के समान तरीके का विश्लेषण, तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। तकनीकी इनपुट तथा ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर आरोपी की पहचान जेल सिंह पुत्र श्री करण सिंह, निवासी जिला डोडा, जम्मू-कश्मीर, उम्र 26 वर्ष ले रूप में की गई। आरोपी की लोकेशन नूरपुर की होनी पाई गई। जिसपर नूरपुर पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर आरोपी जेल सिंह को दिनांक 05.10.2026 को हिरासत में लिया गया तथा उसे पुलिस थाना कुमारसैन लाया गया। इसके पश्चात तीनों मामलों की पीड़िताओं/शिकायतकर्ताओं द्वारा आरोपी की पहचान की गई।
आरोपी का पूर्व आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके विरुद्ध थाना सिहुंता, जिला चम्बा में FIR No. 16/2026 दिनांक 05.03.2026, धारा 304(2) BNS के तहत स्नैचिंग की वारदात के संबंध में अभियोग दर्ज है।
पुलिस की त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई से तीन अलग-अलग घटनाओं में शामिल संदिग्ध आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिली है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। मामले में जांच जारी है।

शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के रोहड़ू दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अनदेखी पर पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व सांसद एवं वीरभद्र सिंह की प्रतिभा सिंह ने नाराजगी जताई है। पत्नी प्रतिभा सिंह ने रोहड़ू में मंगलवार को पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को उचित सम्मान नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इसे गुटबाजी कहना उचित नहीं होगा, लेकिन यह बात सभी को बुरी लगी कि रोहड़ू में हुए कार्यक्रमों में राजा साहब का चेहरा तक देखने को नहीं मिला। कम से कम पोस्टर और बैनर तो लगाए जा सकते थे। प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह ने रोहड़ू और पूरे हिमाचल के लिए बहुत काम किया है। ऐसे में उनके सम्मान में कार्यक्रम स्थल पर कुछ पोस्टर और बैनर लगाए जाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अपने कार्यकर्ता भी आगे आकर राजा साहब के सम्मान में 20 पोस्टर और 20 बैनर लगा सकते थे। इससे लोगों को खुशी होती और यह संदेश जाता कि पार्टी अपने वरिष्ठ नेताओं और उनके योगदान को याद रखती है। उन्होंने कहा कि इतनी दूरदर्शिता तो होनी चाहिए कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के योगदान को सम्मान के साथ याद रखा जाए। प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह को रोहड़ू से गए अभी चार-साढ़े चार वर्ष ही हुए हैं और इतनी जल्दी उनका चेहरा तथा उनके योगदान को भुला देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी वह नाहन और सिरमौर क्षेत्र में जाती हैं तो प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार को याद करना नहीं भूलतीं। इसी तरह उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने भी हिमाचल प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया और उन्हें याद किया जाना चाहिए।
हमीरपुर : बद्दी की प्रसिद्ध कंपनी माइक्रो सीमलैस में जूनियर इंजीनियर और ट्रेनी जूनियर इंजीनियर के 30 पदों को भरने के लिए 15 अक्तूबर को सुबह साढे दस बजे जिला रोजगार अधिकारी कार्यालय हमीरपुर में साक्षात्कार लिए जाएंगे।
जिला रोजगार अधिकारी सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि इन पदों के लिए अभ्यर्थी इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटैक या डिप्लोमाधारक होना चाहिए। इन पदों के लिए 25 से 40 वर्ष तक के फ्रैशर्स पुरुष अभ्यर्थी पात्र होंगे। चयनित अभ्यर्थियों को 16 से 17 हजार रुपये तक मासिक वेतन एवं अन्य सुविधाएं मिलेंगी तथा उनका कार्यस्थल बद्दी के साथ लगता औद्योगिक क्षेत्र बरोटीवाला होगा।
जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि अगर कोई युवा इन पदों के लिए योग्यता रखता है और उसका नाम किसी भी रोजगार कार्यालय में पंजीकृत है तो वह अपने मूल प्रमाण पत्रों तथा हिमाचली प्रमाण पत्र के साथ साक्षात्कार में भाग ले सकता है।
भर्ती के संबंध में अधिक जानकारी के लिए जिला रोजगार कार्यालय के दूरभाष नंबर 01972-222318 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

नशे से मुक्ति केवल उपचार नहीं, बल्कि पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से पुनर्स्थापन का प्रयास – अनुपम कश्यप
शिमला: नशे के विरुद्ध जिला शिमला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियान को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला प्रशासन ने जिला में कार्यरत विभिन्न नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों (Drug De-Addiction and Rehabilitation Centres) के संचालकों एवं संबंधित प्रतिनिधियों के साथ आज यहां बचत भवन में बैठक आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने की। बैठक में नशा मुक्ति केंद्रों के संचालकों ने विभिन्न मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा।
नशा मुक्ति केंद्रों के संचालन में नियमों का पालन अनिवार्य
उपायुक्त ने कहा कि नशे के खिलाफ कार्य करने वाले हितधारकों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र सामाजिक क्षेत्र में लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रों के संचालन के लिए निर्धारित नियमों एवं मानकों का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की कोताही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति केंद्र व्यवसाय नहीं बल्कि समाज सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति को नशे से बाहर निकालकर स्वस्थ एवं सम्मानजनक जीवन की ओर वापस लाना आसान कार्य नहीं है। इसलिए ऐसे बच्चों, युवाओं और अन्य प्रभावित व्यक्तियों के प्रति सकारात्मक, संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
नशा मुक्ति केंद्रों में नशे की शिकायतों पर गंभीर चिंता
उपायुक्त ने कहा कि नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार के लिए आने वाले लोगों को नशा उपलब्ध करवाए जाने संबंधी शिकायतें सामने आना गंभीर विषय है। उन्होंने केंद्र संचालकों से कहा कि जिन संस्थानों का उद्देश्य लोगों को नशे की लत से बाहर निकालना है, वहां इस प्रकार की शिकायतों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। केंद्रों में सुरक्षित एवं नशा मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक माता-पिता के लिए उनके बच्चों से बढ़कर कुछ नहीं होता। अभिभावक अपने बच्चों का जीवन बचाने और उन्हें सामान्य जीवन में वापस लाने की उम्मीद के साथ नशा मुक्ति केंद्रों में भेजते हैं। ऐसे में केंद्रों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
उपचार के साथ पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर जोर
अनुपम कश्यप ने कहा कि नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल नशा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है बल्कि नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति का उपचार, परामर्श, पुनर्वास और परिवार एवं समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि “Rehabilitation is not the end of treatment — it is the beginning of a new life.” उपचार के बाद भी व्यक्ति को परिवार, शिक्षा, कौशल, रोजगार और समाज से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है, ताकि वह दोबारा नशे की ओर न लौटे और आत्मसम्मान के साथ सामान्य जीवन जी सके।
नशा मुक्ति एवं पदार्थ उपयोग विकार उपचार केंद्रों के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने नशा मुक्ति एवं पदार्थ उपयोग विकार उपचार केंद्रों के संचालन के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपचार सुविधाओं को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
डॉ कुशाल वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रेणी-I में एक माह से कम अवधि के अल्पकालिक उपचार एवं डिटॉक्सिफिकेशन केंद्र शामिल है, जहां ओवरडोज, विड्रॉल, क्रेविंग एवं रिलैप्स का प्रबंधन किया जाता है। श्रेणी-II में एक माह या उससे अधिक अवधि के दीर्घकालिक उपचार एवं पुनर्वास केंद्र शामिल है, जहां विदड्रॉल के बाद उपचार, क्रेविंग एवं रिलैप्स प्रबंधन, काउंसलिंग तथा व्यावसायिक पुनर्वास की सुविधा होनी चाहिए। श्रेणी-III में ऐसे उपचार केंद्र शामिल है, जहां नशे की समस्या के साथ प्राथमिक मनोरोग संबंधी बीमारी का भी उपचार किया जाता है।
प्रशिक्षित चिकित्सक और काउंसलर की उपलब्धता अनिवार्य
उपचार केंद्रों में प्रशिक्षित चिकित्सक तथा आवश्यकता के अनुसार मनोचिकित्सक की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। ओवरडोज के मामलों में चिकित्सक की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। महिला मरीजों एवं नाबालिगों के लिए क्रमशः स्त्री रोग विशेषज्ञ तथा बाल रोग विशेषज्ञ की ऑन-कॉल सुविधा का प्रावधान है।
प्रत्येक 30 मरीज पर कम से कम एक पूर्णकालिक काउंसलर होना चाहिए। काउंसलर के लिए क्लिनिकल साइकोलॉजी, साइकोलॉजी अथवा सोशल वर्क में स्नातक योग्यता तथा नशा मुक्ति सेवाओं में छह माह का अनुभव निर्धारित किया गया है।
मरीजों का पंजीकरण और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य
प्रत्येक मरीज का पंजीकरण कर उसे यूनिक आईडी प्रदान करना अनिवार्य है। मरीज का असेसमेंट, लिखित सहमति, चिकित्सक की प्रिस्क्रिप्शन, दवाओं से संबंधित रिकॉर्ड, मनोसामाजिक हस्तक्षेप तथा डिस्चार्ज समरी सहित आवश्यक अभिलेख सुरक्षित रखने होंगे। रिकॉर्ड मैनुअल अथवा डिजिटल माध्यम से रखा जा सकता है, लेकिन मरीज की गोपनीयता मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 (Mental Healthcare Act, 2017) के प्रावधानों के अनुरूप सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
बिना चिकित्सकीय एवं मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन के भर्ती नहीं
निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी व्यक्ति को चिकित्सकीय एवं मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन के बिना नशा मुक्ति उपचार केंद्र में भर्ती नहीं किया जाएगा। मूल्यांकन की रिपोर्ट मरीज की फाइल के साथ संलग्न करना आवश्यक होगा।
नशे की समस्या वाले व्यक्ति को भर्ती करने के लिए मरीज अथवा उसके प्रथम श्रेणी के परिजन से लिखित सहमति प्राप्त करना आवश्यक है तथा भर्ती प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप संचालित करनी होगी।
डब्ल्यूएचओ प्रोटोकॉल के अनुरूप उपचार पर जोर
डिटॉक्सिफिकेशन, क्रेविंग एवं दीर्घकालिक रिलैप्स प्रबंधन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुशंसित उपचार प्रोटोकॉल अपनाने पर जोर दिया गया। गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित पुनर्वास केंद्रों को भी संबंधित कानूनी प्रावधानों एवं निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। केंद्रों में बच्चों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों तथा अन्य संवेदनशील वर्गों की आवश्यकताओं के अनुरूप जेंडर एवं आयु-संवेदनशील व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यदि किसी केंद्र में बच्चों को देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले मामलों में सेवाएं प्रदान की जाती हैं, तो संबंधित सेवाएं किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) आदर्श नियम, 2016 (Juvenile Justice Rules, 2016) तथा सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित करनी होंगी।
सुरक्षा, स्वच्छता और शिकायत निवारण व्यवस्था पर विशेष ध्यान
केंद्रों में निर्धारित मानकों के अनुसार सैनिटेशन स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों एवं अटेंडेंट की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रयोगशाला सेवाएं इन-हाउस अथवा आउटसोर्स माध्यम से उपलब्ध होना आवश्यक है।
मरीजों को भर्ती करते समय उनके अधिकारों, उपलब्ध सेवाओं, नियमों, शुल्क तथा शिकायत निवारण व्यवस्था की पर्याप्त जानकारी देना और इसे केंद्र में प्रमुखता से प्रदर्शित करना भी अनिवार्य है।
केंद्रों की सुविधाओं में करें सकारात्मक बदलाव
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने सभी केंद्र संचालकों से कहा कि वह अपने-अपने केंद्रों की सुविधाओं, उपचार एवं परामर्श व्यवस्था, स्टाफ की भूमिका, रिकॉर्ड संधारण, सुरक्षा व्यवस्था तथा मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता में आवश्यक सुधार करें।
उन्होंने कहा कि जिला शिमला के नशा मुक्ति केंद्रों को इस दिशा में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए जिसकी प्रदेश भर में सराहना हो। जिला प्रशासन द्वारा इन केंद्रों की संस्थागत निगरानी तथा पुनर्वास कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सामूहिक प्रयास से ही बनेगा नशामुक्त समाज – एसएसपी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी जब नशा बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के साथ-साथ नशे से पीड़ित व्यक्ति के उपचार एवं पुनर्वास के लिए भी समान गंभीरता से कार्य किया जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों, नशा मुक्ति केंद्रों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों तथा नागरिक समाज से नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। नशा मुक्ति केंद्रों में अगर नशे का कारोबार पाया जाता है तो एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा केंद्र के मालिक पर चलेगा। इसमें 10 साल तक सजा का प्रावधान है।

बिलासपुर: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की कामना की।
भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु का हिमाचल प्रदेश में स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश न केवल देवभूमि है, बल्कि वीरभूमि भी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मंदिरों, लोक परंपराओं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत ने हिमाचल प्रदेश को एक विशिष्ट पहचान प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि बिलासपुर के लोगों ने भी राष्ट्र निर्माण और विकास की कीमत के रूप में विस्थापन का दर्द सहा है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की विकास की परिकल्पना के अनुरूप निर्मित भाखड़ा बांध केवल विकास और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि यह बिलासपुर के लोगों के त्याग और योगदान को भी दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सरकार का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के लोगों को राज्य के भीतर ही गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने कहा कि एम्स दिल्ली की तर्ज पर प्रदेश में 3-टेस्ला एमआरआई, पैट स्कैन, उच्च क्षमता वाली एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनों सहित अत्याधुनिक डायग्नॉस्टिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं केवल शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं का पूरे प्रदेश में लगातार विस्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सुक्खू ने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि जो अत्याधुनिक उपचार पहले मुख्य रूप से महंगे निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध थे, अब उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस पहल से विशेष रूप से आम जनता और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पहले केवल 277 स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (पीजी) मेडिकल सीटें थीं और राज्य सरकार अब इसमें 320 अतिरिक्त पीजी सीटें बढ़ाने के प्रयास कर रही है। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से सहयोग का आग्रह भी किया।
उन्होंने कहा कि राज्य में उत्तर भारत का पहला ऐसा कॉलेज भी शुरू किया गया है, जहां पैरामेडिकल और अलाइड पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन तैयार करना है। इसके अतिरिक्त, एम्स की तर्ज पर एक आयुर्वेदिक अस्पताल स्थापित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करना और प्रदेश के लोगों को आधुनिक उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, सांसद हर्ष महाजन, विधायक रणधीर शर्मा, जीत राम कटवाल और त्रिलोक जम्वाल, एम्स के अध्यक्ष एन.के. अरोड़ा, कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल दलजीत सिंह, स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

शिमला: भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में संस्थान के पहले स्नातक बैच को उपाधियां प्रदान कीं। एम्स बिलासपुर की यह विकास यात्रा प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में इसके योगदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन, एम्स बिलासपुर के अध्यक्ष प्रो. नरेंद्र कुमार अरोड़ा तथा कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल दलजीत सिंह भी उपस्थित थे।
प्रथम स्नातक बैच एवं स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विद्यार्थियों, उनके माता-पिता, अभिभावकों और शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दीक्षांत समारोह एम्स बिलासपुर के विकास तथा चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थान की बढ़ती भूमिका की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
समारोह में कुल 92 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 43 एमबीबीएस, 26 बीएससी ऑनर्स नर्सिंग, 9 बीएससी एलाइड हेल्थकेयर तथा 14 एमडी/एमएस के विद्यार्थी शामिल हैं। राष्ट्रपति ने विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किए। एमबीबीएस से सागरिका और रक्षित वशिष्ठ, बीएससी एलाइड हेल्थकेयर साइंस से भावना ठकराल, बीएससी ऑनर्स नर्सिंग से भाव्या मल्होत्रा तथा एमडी, कॉम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन से प्रतीक गोयल को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने एम्स बिलासपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह पर संस्थान को बधाई दी तथा स्नातक विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक अवसर के महत्व और गरिमा को और बढ़ाया है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रथम दीक्षांत समारोह इस दृष्टिकोण को वास्तविकता में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि संस्थान का प्रथम स्नातक बैच अब ज्ञान, कौशल और सेवा के मूल्यों को अपने पेशेवर जीवन में आगे ले जाने के लिए तैयार है। उन्होंने एम्स बिलासपुर के संकाय सदस्यों, चिकित्सकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की भी सराहना की, जिन्होंने कम समय में संस्थान को चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान के एक सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
स्नातक विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनकी डिग्रियों के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने पेशेवर जीवन में करुणा, संवेदनशीलता और सेवा को केंद्र में रखें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्यार्थी अपने ज्ञान और सेवा भावना का उपयोग राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने के लिए करेंगे।
उन्होंने कहा कि एम्स बिलासपुर के स्नातक अपनी प्रतिभा, ज्ञान और सेवा भावना के माध्यम से देशभर के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाएंगे और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भी इस अवसर पर स्नातक विद्यार्थियों और एम्स बिलासपुर को अपनी शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने एम्स बिलासपुर के प्रथम बैच के विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक यात्रा पूरी करते हुए देखकर प्रसन्नता और गर्व व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एम्स नेटवर्क के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए श्री नड्डा ने कहा कि देश में कई दशकों तक केवल एक एम्स था, जबकि पिछले 12 वर्षों में 16 नए एम्स स्थापित किए गए हैं। उन्होंने स्नातक विद्यार्थियों से एम्स बिलासपुर की प्रतिष्ठा को बनाए रखने तथा अपने पेशेवर जीवन में उत्कृष्टता और सेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) ने स्कूल शिक्षा विभाग में स्पेशल एजूकेटरों (प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक) के 108 पदों को भरने के लिए पोस्ट कोड-25022 के तहत आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा में सफल हुए उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है।
आयोग के सचिव डॉ. विक्रम महाजन ने बताया कि इन पदों के लिए कुल 663 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 643 उम्मीदवारों ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा दी थी और इस परीक्षा में 290 उम्मीदवारों का चयन दस्तावेजों की जांच के लिए किया गया था। 20 से 22 अगस्त तक दस्तावेजों की जांच के बाद 105 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। पात्र उम्मीदवार न मिलने के कारण एससी (स्वतंत्रता सेनानी परिजन) वर्ग का एक पद खाली रह गया है। जबकि, कोर्ट केस के कारण सामान्य अनारक्षित वर्ग के दो पद फिलहाल खाली रखे गए हैं। सचिव ने बताया कि यह अंतिम परिणाम सभी उम्मीदवारों के नाम, रोल नंबर और अंकों सहित आयोग की वेबसाइट एचपीआरसीए.एचपी.जीओवी.इन पर उपलब्ध करवा दिया गया है।
हमीरपुर : हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) ने स्कूल शिक्षा विभाग में स्पेशल एजूकेटरों (छठी से 12वीं कक्षा तक) के 83 पदों को भरने के लिए पोस्ट कोड-25023 के तहत आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा में सफल हुए उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है।
आयोग के सचिव डॉ. विक्रम महाजन ने बताया कि इन पदों के लिए कुल 271 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 260 उम्मीदवारों ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा दी थी और इस परीक्षा में 179 उम्मीदवारों का चयन दस्तावेजों की जांच के लिए किया गया था। 26 और 27 अगस्त तक दस्तावेजों की जांच के बाद 81 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। पात्र उम्मीदवार न मिलने के कारण एससी (स्वतंत्रता सेनानी परिजन) वर्ग का एक पद खाली रह गया है। जबकि, कोर्ट केस के कारण सामान्य अनारक्षित वर्ग का एक पद फिलहाल खाली रखा गया है। सचिव ने बताया कि यह अंतिम परिणाम सभी उम्मीदवारों के नाम, रोल नंबर और अंकों सहित आयोग की वेबसाइट एचपीआरसीए.एचपी.जीओवी.इन पर उपलब्ध करवा दिया गया है।