खरीफ फसलों का रकबा 685 लाख हेक्टेयर के पार

हिमाचल प्रदेश की अर्थ-व्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान

  • डा. वाई.एस. परमार किसान स्वरोजगार योजना बनी वरदान
  • किसानों को 5.4 करोड़ रुपये का उपदाऩ
  • 50 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र संरक्षित खेती के तहत लाया गया
  • प्रदेश सरकार के सतत प्रयासों तथा नीतियों से राज्य में बे-मौसमी सब्जी उत्पादन को मिल रहा बढ़ावा
  • प्रदेश में अब तक 26,741 कृषकों को जैविक खेती के लिए किया जा चुका है पंजीकृत

 

हिमाचल प्रदेश की अर्थ-व्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश की 90 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और 70 प्रतिशत से अधिक लोगों की आजीविका सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि तथा इससे जुड़े क्षेत्रों का लगभग 20 प्रतिशत योगदान है। प्रदेश की जलवायु नकदी फसलों जैसे आलु, बे-मौसमी सब्जियों व अदरक के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। प्रदेश सरकार द्वारा इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार द्वारा इस वित्त वर्ष के दौरान कृषि तथा इससे सम्बद्ध क्षेत्रों के लिए 450 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।

प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने व कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं व कार्यक्रम आरम्भ किए गए हैं। प्रदेश सरकार ने राज्य में संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 111.19 करोड़ रुपये की डा. वाई.एस. परमार किसान स्वरोजगार योजना आरम्भ की है, जिसके तहत वर्ष 2014-15 से वर्ष 2017-18 तक 4700 पॉलीहाऊसों का निर्माण, 2150 स्प्रिींकल/ड्रिप इकाईयां लगाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत पॉलीहाऊस, स्प्रिींकलर/ड्रिप इकाईयों के निर्माण के लिए 85 प्रतिशत तक का उपदान प्रदान किया जा रहा है। योजना के अन्तर्गत इन वर्षों में 8 लाख 35 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र को संरक्षित खेती के तहत लाने तथा 8 लाख 20 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के अन्तर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अन्तर्गत गत दो वर्षों के दौरान 50 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र संरक्षित खेती के तहत लाया जा चुका है, जिसपर किसानों को 5.4 करोड़ रुपये का उपदान प्रदान किया गया है। योजना के तहत इस वित्त वर्ष के दौरान 2 लाख वर्ग मीटर अतिरिक्त क्षेत्र संरक्षित खेती के अधीन लाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए 30 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।

प्रदेश सरकार के सतत प्रयासों तथा नीतियों से राज्य में बे-मौसमी सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश में बे-मौसमी सब्जियों का उत्पादन बढ़ कर 14 लाख टन से अधिक हो गया है, जिससे गत वित्त के दौरान 2,500 करोड़ रुपये की आय अर्जित हुई है। इस वित्त वर्ष के दौरान बे-मौसमी फसलों विशेषकर सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

प्रदेश में किसानों को समुचित सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा राजीव गांधी सूक्ष्म सिंचाई योजना के नाम से एक नई योजना आरम्भ की गई है, जिसपर चार वर्षों की समयावधि के दौरान 154 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। परियोजना के माध्यम से 8500 हेक्टेयर क्षेत्र को टपक/फव्वारा सिंचाई प्रणाली के तहत लाकर 14 हजार किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत किसानों को 113 करोड़ रुपये का उपदान दिया जाएगा।

प्रदेश के अधिकांश भागों में सिंचाई उद्देश्यों के लिए जल लिफ्ट द्वारा उठाने की आवश्यकता रहती है, इसी के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने उठाऊ सिंचाई योजना निर्माण व बोरवैल स्थापित करने के लिए किसानों को 50 प्रतिशत का उपदान प्रदान करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत वर्ष 2015-16 में 20 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।

प्रदेश सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए ‘मुख्यमंत्री आदर्श कृषि गांव योजना’ आरम्भ की है, जिसके अन्तर्गत हर विधानसभा क्षेत्र में दो चयनित पंचायतों के लिए कृषि विकास योजना तैयार की गई है तथा उस पंचायत में 10 लाख रुपये की राशि कृषि संबंधी अधोसंरचना स्थापित करने के लिए खर्च किए गए हैं। योजना के तहत गत दो वर्षों के दौरान 7.37 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

कृषि उत्पादन बढ़ाने व भूमि की उपयोगिता जानने के लिए मिट्टी परीक्षण का बहुत महत्व है। कृषि विभाग किसानों को निःशुल्क मिट्टी परीक्षण सुविधा उपलब्ध करवा रहा है ताकि किसान अपने खेतों में मिट्टी की जांच की सिफारिशों के अनुसार कृषि उत्पादन में वृद्धि कर सके। इसके लिए प्रदेश में चार स्वचालित मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं व 11 अचल मिट्टी प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। गत दो वर्षों के दौरान किसानों को 2 लाख 2 हजार 687 मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए गए और वर्ष 2015-16 के लिए 1 लाख मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के दुर्गम तथा दूर-दराज क्षेत्रों में मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करवाने के लिए 3 नई सचल मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है।

प्रदेश सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। प्रदेश में अब तक 26,741 कृषकों को जैविक खेती के लिए पंजीकृत किया जा चुका है तथा 15,548 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है।

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