माता-पिता की संपति में बेटी के अधिकार

अधिवक्ता - रोहन सिंह चौहान

अधिवक्ता – रोहन सिंह चौहान

आज भले ही बेटी को माता-पिता की संपत्ति में कानूनी अधिकार अधिकार मिल गया है लेकिन संशोधन से पहले ऐसा नहीं था। जिसके चलते बहुत सी बेटियां किसी न किसी मजबूरी के चलते अपने अधिकारों से वंचित रह जातीं थीं। लेकिन अब अगर आज की बात की जाए तो अब प्रथम वर्ग के उत्तराधिकारियों में बेटी आती है। हिंदू उत्तराधिकार कानून-1956 से 2005 में हुए बदलाव से क्लास वन वारिसों की सूची में महिलाओं को भी वरीयता दी गई है। जहां कहीं संपत्ति संबंधी विवाद है, वे अपने इस अधिकार का प्रयोग कर सकती हैं। माता-पिता की संपति में बेटी के अधिकार के विषय को लेकर हम शिमला के एडवोकेट रोहन सिंह चौहान से विस्तार पूर्वक जानकारी लेने जा रहे हैं। पेश है हिम शिमला लाइव के ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट:

प्रश्र: बेटी को पिता की संपत्ति में अधिकार महिला हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम से पहले किसी भी प्रकार का क्या कोई अधिकार नहीं था?

उत्तर: जी नहीं, ऐसा नहीं अधिकार तो नहीं था लेकिन अगर माता-पिता अपनी इच्छा से बेटी को शादी से पहले या बाद में अगर संपत्ति देना चाहते तो वे दे सकते थे। भारत में महिलाओं के पारिवारिक सम्पति अधिकार इच्छापत्र के अभाव में धर्म के आधार पर उत्तराधिकार कानूनों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। 1937 से पहले हिन्दू कानून के तहत एक महिला को उसकी शादी के समय उसके माता-पिता से प्राप्त सम्पति छोडक़र , कोई संपत्ति रखने का अधिकार नहीं था। वहीं पिता की संपत्ति में अधिकार महिला हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 से पहले मिताक्षरा कानून में महिला सहभागी नहीं थी। संशोधन से पूर्व बेटी को घर या संपत्ति में निवास करने का अधिकार था, लेकिन स्वामित्व का अधिकार नहीं था। बेटी को हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 लागू होने के बाद से संयुक्त संपत्ति में जन्म से ही एक समान उत्तराधिकारी बना दिया गया है।

प्रश्र: हिंदू उत्तराधिकार नियम क्या है?

उत्तर: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम: इस अधिनियम में संशोधन के बाद माता-पिता की संपत्ति बेटी के हस्ताक्षर के बगैर न तो ट्रांसफर हो सकती है, न पट्टा बन सकता है, ना रजिस्ट्री हो पाती है। इसके लिए सबसे पहले बेटी को संपत्ति में अपने हक का त्याग करना पड़ता है। हिंदू उत्तराधिकर 1956 सेक्शन 8 की धारा आठ के तहत माता-पिता की संपत्ति में बेटे और बेटी को समान अधिकार है।

प्रश्र: हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 क्या है?

उत्तर: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 6 हिंदू महिलाओं को किसी भी पैतृक संपत्ति के वारिस होने के अधिकार से वंचित रखती है। इस सम्पति में हिस्सा विभाजन के बाद केवल पुरुष सदस्यों को ही मिलता है। इन कारणों से भारत के विधि आयोग की सिफारिशों पर संसद ने हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 लागू किया है इसके अनुसार बेटे की तरह ही बेटी भी जन्म के आधार पर परिवार में हमवारिस हो जाती है। इसमें बेटियों के सभी रूप , विशेष रूप से विवाहित बेटियां भी शामिल है। इसलिए यह सामान्य धारणा की शादी के बाद महिला केवल अपने पति के परिवार के अंतर्गत आती है, गलत है अब यदि महिला की शादी भी टूट जाये तो महिला अपने पैतृक घर लौट सकती है और ये उसका कानूनी अधिकार है।

प्रश्र: हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम धारा 6 में संशोधन क्या है? इसका उददेश्य क्या था?

उत्तर: महिला हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 पहले मिताक्षरा कानून में महिला सहभागी नहीं थी। संशोधन से पूर्व बेटी को घर या संपत्ति में निवास करने का अधिकार था, लेकिन स्वामित्व कर अधिकार नहीं था। बेटी को हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम , 2005 लागू होने के बाद से संयुक्त संपत्ति में जन्म से ही एक समान उत्तराधिकारी बना दिया गया है। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 6 में संशोधन का मूल उद्देश्य सभी को बराबर उत्तराधिकार प्रदान करना था। मिताक्षरा कानून के अंतर्गत एक हिंदू संयुक्त परिवार में बेटी अब एक बेटे की तरह जन्म से ही समान उत्तराधिकारी है। वह उत्तराधिकारी के रूप में दावे का अधिकार रखती है और परिवार के सभी सदस्यों के बीच बराबर हिस्से का स्वामित्व भी।

प्रश्र: महिला की संपत्ति और हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के बारे में आप कुछ विस्तार से बताएंगे?

उत्तर: महिला को संपत्ति में अधिकार मिलने से महिलाओं के हितों में काफी हिजाफा देखने को मिला जिसके चलते हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के आने से महिलाओं के सम्पति अधिकारों में काफी सुधार आया है। महिलाओं को एक सीमित विरासत सम्पति की धारणा को समाप्त कर दिया गया है और अब महिलाओं को किसी भी सम्पति के उत्तराधिकार के दौरान पुरूषों की तरह ही पूर्ण सम्पति में अधिकार है। ये बेटी पर निर्भर करता है कि वे अपना अधिकार लेना चाहती है या नहीं। वहीं जो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम , 1956 की बात है तो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 से पहले शास्त्रिक और प्रथा कानून जो विभिन्न क्षेत्रो में अलग अलग प्रकार के थे हिन्दुओ को नियंत्रित करने के प्रयोग में लाये जाते थे।

प्रश्र: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम , 1956 की धरा 14 में भी महिलाओं को कोई अधिकार मिला इसके बारे में भी आप बताएं?

उतर: जी,धारा 14 के अनुसार सम्पति में महिला का सीमित हक अब पूर्ण अधिकार में बदल जाता है। इसके तहत अगर महिला को अपने पति से संपत्ति विरासत में मिले तो वह महिला उसे अपनी शर्तों पर उस सम्पति को बेच सकती है। उत्तराधिकार अधिनियम 1956 से वर्गों 4 ( 2) और 23 का विलोपन । हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 4   ( 2) का विलोपन द्वारा महिलाओं को भी पुरूषों की भांति कृषि भूमि पर उत्तराधिकार के अधिकार अर्जित किया है। जहां अब धारा 23 के होने से अब परिवार रिहायशी घर के विभाजन में बेटियों को बेटों की तरह ही समान अधिकार दिया गया है। जबकि पहले धारा 23 विवाहित महिलाओं को उनके पैतृक घर में रहने की अनुमति नहीं देता था। इसमें अविवाहित बेटियों को तो निवास दिए गए हैंै । लेकिन वे भी विभाजन की मांग नहीं कर सकते। जिस वजह से धारा 23 का संशोधन अधिनियम 2005 में एक बड़ी उपलब्धि साबित हुआ।

प्रश्र: यदि एक हिन्दू महिला की निर्वसीयत मृत्यु हो जाती है तो उसकी सम्पति को किस प्रकार बांटा जाएगा?

उतर: एक हिन्दू महिला की निर्वसीयत मृत्यु हो जाने पर उनकी सम्पति को उनके वारिसो में विभाजित किया जायेगा जैसे: उनके बेटे और बेटियों में। अगर बेटे बेटी जीवित नहीं हैं तो पोते और पोतियों में तथा उनके पति में। लेकिन अगर बेटे बेटियां या पोते पोतियां नहीं है तो सम्पति उसके पति के वारिसों को विभाजित होगी। पति के वारिसों के अभाव में सम्पति महिला के माता पिता में विभाजित होगी। इसके पश्चात् महिला के पिता के वारिसों में विभाजित होगी। अंत में महिला के माता के वारिसों में विभाजित होगी।

2020 में हुआ ये बदलाव:-साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट के फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया था कि अगर किसी के पिता की मौत 9 सितंबर 2005 के पहले भी हुई हो,तब भी बेटी का अपने पैतिृक संपत्ति पर पूरा हक होगा।

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8 Responses

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  1. Arti kumari
    Sep 02, 2016 - 06:07 PM

    Mere Papa kuchh jamin apne eklaute bete k naam par transfer kar k Gaye hi ab aap itna bata do sirf kya mai ush jamin l liye koi kanooni karwai kar sakti hu ya nahi or us jamin p mai pichhle 30 shal se rah rahi but av nahu rah rahi hu av ushko wapas kar di hu kya mai koi kanooni karwai kar sakti hu ple plr help me

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  2. kamlesh
    Oct 07, 2016 - 01:47 PM

    mere nana ke 2 beti thi jinme meri maa ki mirtu 1989 me ho gai ha mere nana jinda ha our meri ek mosi nana ke saat rati ha kya nana ki jamin me mujhe hissa milega

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  3. Amit
    Oct 18, 2016 - 08:17 PM

    वसीयत करने के बाद क्या कोई हक मांग सकता है क्या

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  4. नरेश कुमार
    Dec 01, 2016 - 10:22 PM

    यदी एक पिता अपनी सम्पति किसी एक पुत्री को बेच दे तो क्या दूसरी पुत्री दावा कर सकती है

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  5. सुधांशु
    Dec 28, 2016 - 06:52 AM

    किसी बेटी को अपने पिता की सम्पति मे अपना हक लेने के लिए क्या क़ानूनी प्रोसेस है।

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  6. Mandakini डोंगरे
    Apr 17, 2017 - 09:52 PM

    नमस्ते ! Father doesn’t want to give share in enchestal property he wants to give only his sons plz answer

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  7. Shiv shankar pal
    May 22, 2017 - 06:20 PM

    Yadi pati ki mrityu ho gayi aur uske four daughter hai to kya patni poori sampatti ki malkin hogi kripya answer de

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  8. तनिष्क खेडेकर
    Jun 06, 2017 - 08:40 PM

    किसी अचल संपत्तिधारी महिला की म्रत्यु पश्चात उसकी सम्पत्ति किन किन लोगों को प्राप्त होगी…? उसके पिछे जिवितों में पति , एक बेटा , और दो बेटी हो और तीनों शादी शुदा हो….?

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