यूं ही सब पलायन करते रहे तो---खेत हो जाएंगे बंजर---घर बन जाएंगे खंडहर

यूं ही सब पलायन करते रहे तो…खेत हो जाएंगे बंजर…घर बन जाएंगे खंडहर

  • गांव से शहरों का रूख, शहरों से अन्य राज्यों, राज्यों से देश-विदेशों की ओर पलायन
देश के हर बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए सरकार का सतर्क होना और प्रशासन का जागना और माता-पिता का अपने दायित्व को समझाना अतिआवश्यक

देश के हर बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए
सरकार का सतर्क होना और प्रशासन का जागना और माता-पिता का अपने दायित्व को समझाना अतिआवश्यक

गांव के लोगों का रूख अब शहरों की ओर होने लगा है और शहर के लोग अन्य राज्यों की तरफ रूख कर रहे हैं। अन्य राज्यों के लोग अन्य देशों की ओर तथा देशों के लोग विदेशों की ओर। आज कृषि भूमि बंजर होती नज़र आ रही है। वो दिन भी दूर नहीं जब आदमी को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होगी। जी हां, वही रोटी जो गेंहू, मक्की, के आटे से बनती है क्यों?

जनाब वजह तो साफ है। हर कोई आज सरकारी नौकरी की तरफ भाग रहा है। उसे लगता है कि शहरों में तो सरकारी नौकरी के अंबार लगे हैं जो उन्हें जाते ही मिल जाएगी। जो शहर आता है वो गांव की ओर जाना ही नहीं चाहता। तो दूसरी वजह हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों को बेहतरीन शिक्षा मिले, लेकिन उनका मानना है कि बेहतरीन शिक्षा शहरों के प्राइवेट स्कूलों में है। गांव के सरकारी स्कूल तो बस नाम के हैं। हालांकि सरकार द्वारा बच्चों के शिक्षा स्तर को उठाने के लिए बेहतरीन प्रयास किए जा रहे हैं परन्तु बीच में ये प्रयास कहां गुम होकर रह जाते हैं पता नहीं चलता।

तीसरी वजह यह है कि अब गांववासी व किसान जंगली जानवरों व आवारा पशुओं से इतने परेशान हो गए हैं कि कृषि करने के बजाए दिहाड़ी में कहीं ओर या मनरेगा में काम करना पसंद कर रहे हैं। देश व प्रदेश के जाने कितने जगहों में आवारा पशुओं द्वारा फसलें तबाह की जा रही हैं तो कभी मौसम का कहर। ऐसे में कोई क्या करे?

  •  बेहतरीन अवसर की तलाश में बाहर का रूख

शायद शहरों का रूख और शहरों के लोग अपने प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों की ओर बेहतरीन अवसर तलाश करते नज़र आते हैं। चाहे

देश से विदेशों की ओर रूख

देश से विदेशों की ओर रूख

शिक्षा की बात हो या व्यवसाय की या फिर नौकरी, अपने प्रदेश में अवसर नज़र नहीं आते। जिसके चलते उनका रूख अन्य बड़े राज्यों की तरफ बढ़ता जा रहा है। अब अन्य राज्यों के लोग आगे बढऩा चाहते हैं। उन्हें लगता है कि उनके राज्य में उनकी प्रतिभा के मुताबिक कुछ है ही नहीं और वे लोग अपने देश से विदेशों की ओर रूख कर रहे हैं। सोचने की बात है जब एक किसान खेती करना छोड़ देगा तो देश से विदेशों की ओर रूख करने वाला आने वाले समय में खाएगा क्या? सिर्फ पैसा….।

  •  गांव के लोगों को भाने लगी शहरों की चकाचौंध जिंदगी
गांव के लोगों का शहरों की ओर रूख

गांव के लोगों का शहरों की ओर रूख

हमारे देश में अधिकतर भूमि कृषि उपजाऊ है, लेकिन अब वो भूमि बंजर होती जा रही है। सब जानकर भी अनजान बने हुए है। गांव में रहने वालों को शहरों की चकाचौंध जिंदगी भाने लगी है। देशी-विदेशी बनने में बड़प्पन महसूस करने लगे हैं लेकिन कोई यह नहीं समझ पा रहा है कि ये चकाचौंध, ये बड़प्पन चार दिन का है। भूमि बंजर होगी, सब इस तरह से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भागते रहेंगे तो जिंदगी के मायने रह क्या जाएंगे? आने वाले कल के बच्चों का भविष्य क्या होगा? कहां से हरी-भरी सब्जियां मिलेंगी, अन्न उगेगा, दालें होंगी। जब पैदावार ही नहीं होगी तो बेहतर शिक्षा क्या सुखी होगी? आज प्रदेश व गांवों में शिक्षा के स्तर को सुधारा जा रहा है, सब जगह ज्यादा से ज्यादा स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय खोले जा रहे हैं, कृषि के लिए नई-नई तकनीकें अपनाई जा रही हैं ताकि सबको मूलभूत सुविधाएं उनके घर-द्वार पर ही मिल सके। परन्तु इनका फायदा किस हद तक जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रहा है ये किसी को ज्ञात नहीं। इसके लिए कौन जिम्मेवार है? हमारा प्रशासन, हमारी सरकार या खुद हम। इसके लिए तीनों ही जिम्मेवार है। जब तक हम बाहरी राज्यों, व अन्य देश-विदेशों की ओर अपना पलायन नहीं रोकते। हमें रूकना होगा क्योंकि सब अगर बाहर ही दौडऩे लगें तो घर खाली हो जाएंगे और मकान, मकान नहीं रहेंगे बल्कि खंडहर बन जाएंगे।

इसके लिए प्रशासन को भी जागना होगा। गांव-गांव जाकर प्रशासन को नज़र रखनी होगी। वजह क्या है? किसान खेती करने से भाग

आवारा पशुओं का खेतों में आतंक

आवारा पशुओं का खेतों में आतंक

रहा है उसे सहयोग के वक्त सहयोग देना होगा। अतिआवश्यक बात यह है कि किसान केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अन्न पैदा करता है। प्रशासन को देखना कि क्यों लोग शहरों में बेहतर शिक्षा देखते हैं। कागजों तक फायदे आम लोगों के नहीं होते जाएं क्योंकि जो हक व योजनाएं आम जनता की है उन्हें मिलनी चाहिए। यहां तो भरपेट इंसान को खूब परोसा जाता है और भूखा बेचारा एक वक्त की एक रोटी के टुकड़े के लिए तड़प-तड़प कर मर जाता है।

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One Response

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  1. Neelam
    Mar 30, 2017 - 02:32 PM

    पहले तो आवारा पशुओं को रोकना होगा जब तक यह नहीं रुकेंगे किसान कुछ भी नहीं कर पाएगा जो थोड़े बहुत एक किसान थे जो काम कर रहे थे वह भी उनके कहर से अब खेती करना बंद कर दिए हैं लोग जो है वह अब खेती से भाग रहे हैं क्योंकि उनकी मेहनत का फल उनको मिल नहीं रहा है इसके लिए सरकार को कांटेदार तार या उनकी रोक के लिए प्रबंध करना होगा बहुत सारे कारण हैं जो गांव के लोग शहर की ओर आकर्षित हो रहे हैं लेकिन जो गांव में लोग हैं वह भी दुखी हो रहे हैं कि आज किसान जो है उसके खेत सारे बंजर हो रहे हैं और कहीं से भी कोई सुविधा नहीं है उन को या फिर है तो उन तक पहुंच नहीं पाती है उनको पता नहीं सबसे पहले अगर पशुओं की रोकथाम की जाए तार लगा दी जाए तो इस से बहुत फर्क पड़ेगा किसान जो वो खेती करने लगेगा ज्यादा नहीं तो कम से कम अपना गुजारे लायक ही हो जाए किसान खेती करना चाहते हैं लेकिन पशुओं के प्रकोप से वह सब छोड़ रहे हैंऔर हम जो छोटे किसान हैं जो खेती पर ही आश्रित नहीं है पर खेती करना चाहते हैं जब तक यह आवारा पशु नहीं रोके जाएंगे सारे किसान जो हमको खेती करना छोड़ देंगे छोड़ देंगे उन्होंने छोड़ ही दिया है सभी किसान यही उम्मीद करते हैं कि सरकार उनके लिए सपोर्ट करें कुछ ज्यादा नहीं तो वह कांटेदार तार लगवा दें उसके बाद वह अपना खेती-बाड़ी कर सके और जंगली जंगली जानवरों से बच सकें धन्यवाद

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