देश में अंगदानको बढ़ावा देने को इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटलस व आईएमए डब्ल्यूडीडब्ल्यू ने किए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

देश में अंगदान को बढ़ावा देने को इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटलस व आईएमए डब्ल्यूडीडब्ल्यू ने किए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

शिमला: अगस्त का दिन हर साल दुनिया भर में ‘विश्व अंगदान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोगों को अंगदान की शपथ के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हर साल हज़ारों लोग ओर्गेन फेलियर के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। अंगदान एक नेक काज है जिसके द्वारा हम किसी व्यक्ति को नया जीवन दे सकते हैं। लोगों को अंगदान के बारे में जागरूक और प्रोत्साहित करने के प्रयास में अपोलो हास्पिटल्स ग्रुप ने आईएमए के वुमेन डाक्टर्स विंग के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के माध्यम से एक स्थायी अभियान के ज़रिए आम जनता को अंगदान के बारे में शिक्षित किया जाएगा ताकि लोगों की कीमती ज़िंदगियों को बचाया जा सके।

डॉ. नीलम लेखी,  प्रेज़ीडेन्ट- दिल्ली चैप्टर, आईएमए, डब्ल्यूडीडब्ल्यू ने कहा, ‘‘एक जीवित व्यक्ति भी अपने अंग दान कर कम से कम एक व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है, जबकि ब्रेन डेड मरीज़ कम से 3-4 लोगों को नया जीवन दे सकता है। भारत में अंगदान के बारे में कई गलत अवधारणाएं हैं, जिसके चलते लोगों में अंगदान के बारे में जागरुकता की कमी है और अंगदान करने वालों की संख्या भी कम है। इस तरह के मंच के माध्यम से हम लोगों को अंगदान के बारे में जागरुक बनाना चाहते हैं, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में लोग अंगदान देकर कीमती ज़िदगियां बचाने में योगदान दे सकें।’’

डॉ. एन सुब्रमण्यम ने कहा, ‘‘विभिन्न हितधारकों के संयुक्त प्रयासों के चलते ऐसे लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है जो अंगदान की शपथ ले रहे हैं। अपोलो हास्पिटल्स की ओर्गेन ट्रांसप्लान्ट टीम द्वारा कई ट्रांसप्लान्ट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। इनमें से ज़्यादातर अंगदान जीवित व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं। देश में हर साल 90000 से अधिक मरीज़ ब्रेन डैड हो जाते हैं, ऐसे में मृत व्यक्ति द्वारा अंगदान की प्रक्रिया को बहुत अधिक बढ़ावा दिया जा सकता है।’’ पश्चिमी देशों की तुलना में अंगदान की दर भारत में बहुत कम है। हर दिन कम से कम 15 ऐसे मरीज़ों की मौत हो जाती है जिन्हें ट्रांसप्लान्ट के लिए अंग नहीं मिल पाता, हर 10 मिनट में इस सूची में एक नया नाम शामिल हो जाता है। भारत ट्रांसप्लान्ट के लिए अंगों की कमी से जूझ रहा है। यह अंतर बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि एक व्यक्ति अपने अंगदान कर 8 लोगों तक को नया जीवन दे सकता है। एक अनुमान के अनुसार एक चैथाई मिलियन लोग किडनी ट्रांसप्लान्ट की इंतज़ार में हैं, लेकिन इनमें से 5 फीसदी से ज़्यादा लोगों को किडनी नहीं मिल पाती। वहीं हार्ट ट्रांसप्लान्ट की बात करें तो स्थिति और भी बदतर है।’’

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