प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने किया 15802 मामलों का निपटारा

वाहन दुर्घटना मुआवजा व नुक्सान की क्षतिपूर्ति के लिए पिटीशन दायर प्रक्रिया

अधिवक्ता - रोहन सिंह चौहान

अधिवक्ता – रोहन सिंह चौहान

आजकल हर व्यक्ति को यात्रा करने के लिए निजी या सार्वजनिक वाहन का प्रयोग करना पड़ता है। वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने पर चोट आना भी संभव है कई बार वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने पर यात्रियों को केवल गंभीर चोटें ही नहीं आती, बल्कि मृत्यु भी हो जाती है। हालाँकि इसमें वाहन में सवार यात्रियों का कोई दोष नहीं होता लेकिन कई बार चालक की लापरवाही या गलती का नुक्सान यात्रियों को ही उठाना पड़ता है वाहन दुर्घटनाग्रस्त में हुए नुक्सान की क्षतिपूर्ति के लिए व्यक्ति मोटर दुर्घटना प्रतिकार विधि 1988 के अंतर्गत चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी के विरुद्ध न्यायालय में पिटीशन दायर कर सकता है। इसके आलावा अगर कोई व्यक्ति वाहन में सवार न हो और सड़क के बाई ओर चल रहा हो और वाहन चालक की लापरवाही से उसे चोट लग जाए तो सभी नुक्सान की भरपाई भी इसी अधिनियम के अंतर्गत होगी अत: वाहन दुर्घटना का मुख्य अभिप्राय हुआ की वाहन चालक की लापरवाही से वाहन दुर्घटनाग्रस्त करके किसी व्यक्ति को नुक्सान पहुँचाना। इस बारे में क्या आधिनियम व अधिकार हैं हमारे ये जानने के लिए हम “अधिवक्ता रोहन सिंह चौहान” द्वारा आपको विस्तार पूर्वक जानकारी देने जा रहे हैं।

सबसे पहले तो आवश्यक है कि आपको पता हो कि कभी अगर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए तो किस प्रकार की सावधानियां बरती जाए। अगर आप किसी पब्लिक वाहन में किराया देकर सफ़र कर रहें है तो उस वाहन का टिकेट अपने पास ज़रूर रखें। वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने पर उसकी जानकारी नजदीक के पुलिस स्टेशन में दें और यदि मोटर दुर्घटना से चोटें आई हैं तो अपनी चोटों का डॉक्टर से मुआयना करवाएं और रिपोर्ट अपने पास रखें। इसके अतिरिक्त चालक का नाम पता, गाड़ी का नंबर और गाड़ी में सफ़र कर रहे व्यक्तियों के बारे में जानकारी होना आपके लिए आवश्यक है। इससे आपको न्यायालय में प्रतिकार प्राप्त करने में आसानी होगी। अगर सड़क पर पैदल चलते हुए दुर्घटना हो तो गाड़ी का नंबर नोट कर लें और नजदीकी पुलिस स्टेशन में तुरंत रिपोर्ट दर्ज करवाएं। अगर मोटर दुर्घटना में पैदल चलने वाले व्यक्तिओ की मृत्यु हो जाती है तो तो आस पास खड़े जिस भी व्यक्ति द्वारा एक्सीडेंट देखा गया है वो व्यक्ति नजदीकी पुलिस स्टेशन में सबसे पहले सूचना रिपोर्ट दर्ज करवा सकता है।

न्यायालय में वाहन दुर्घटना से हुए नुक्सान की क्षतिपूर्ति के लिए पिटीशन दायर करने की प्रक्रिया :

इस संभंध में मोटर दुर्घटना प्रतिकार अधिनियम की धारा 166 में पिटीशन दायर की जाती है। पिटीशन में दुर्घटना से सम्बंधित सभी तथ्यों को भरकर न्यायालय में दायर करें। इस पिटीशन पर 10 /- रूपये की कोर्ट फीस स्टाम्प लगेगी।

न्यायालय में प्रतिकार प्राप्त करने के लिए किन किन व्यक्तियों के विरुद्ध पिटीशन दायर कर सकते हैं –

मोटर दुर्घटना होने पर आप केवल उन्ही व्यक्तियों के विरुद्ध पिटीशन दायर कर सकतें हैं जो दुर्घटना से सम्बंधित हैं। इसमें मुख्य ये तीन आते हैं:

  • वाहन चालक।
  • दुर्घटनाग्रस्त मोटर वाहन का मालिक।
  • बीमा कंपनी जिससे मोटर को बीमित किया गया है।

हर मोटर वहां का बीमा करना आवश्यक होता है, इसलिए मोटर वाहन से जो नुक्सान होता है उसकी भरपाई का दयित्व बीमा कंपनी का ही होता है। इसलिए क्षतिपूर्ति सम्बन्धी आदेश जो न्यायालय पारित करता है उसे आप बीमा कंपनी से ही आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

पिटीशन में नुक्सान की भरपाई और लिए कार्यवाही करने के लिए आपके पास दुर्घटना से सम्बंधित सभी मुख्य दस्तावेज़ होने जरूरी

पिटीशन में नुक्सान की भरपाई और लिए कार्यवाही करने के लिए आपके पास दुर्घटना से सम्बंधित सभी मुख्य दस्तावेज़ होने जरूरी

पिटीशन दायर करने से पहले आवश्यक दस्तावेज़ जो आपके पास होने चहिये:

न्यायालय में पिटीशन दायर करने में आपको कोई परेशानी उठानी नहीं पड़ेगी, लेकिन पिटीशन में नुक्सान की भरपाई और लिए कार्यवाही करने के लिए आपके पास दुर्घटना से सम्बंधित सभी मुख्य दस्तावेज़ होने जरूरी हैं। ये मुख्य दस्तावेज़ प्रथम सूचना रिपोर्ट, चोट आने पर डॉक्टर मुआयना की रिपोर्ट और यदि मृत्यु हो गयी है तो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट। हालाँकि कुछ दस्तावेज़ ऐसे भी हैं जोकि केवल वाहन मालिक के पास से ही प्राप्त होंगे जैसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फिटनेस सर्टिफिकेट, दुर्घटनाग्रस्त वाहन की बीमा पालिसी और वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस।  इन्हें आप पिटीशन दायर करने से पहले प्राप्त करें। अगर व्यक्ति इन दस्तावेजों को देने से इनकार करता है तो आप इन्हें आर.टी .ओ. ऑफिस से प्राप्त कर सकते हैं।

दुर्घटना हुई जगह पर उस क्षेत्र के न्यायालय में पिटीशन दायर करना आवश्यक नहीं :

अगर कोई व्यक्ति हिमाचल का रहने वाला है और दिल्ली में किसी वाहन से उसकी दुर्घटना हो गयी है तो ऐसा आवश्यक नहीं है की दिल्ली के न्यायालय में ही पिटीशन दायर हो। व्यक्ति जिस स्थान पर रहता है, वह उस स्थान पर वाहन पिटीशन दायर कर सकता है। अधिनियम के धरा 166(2) में इसे इस प्रकार से उपबंधित किया गया है की दावाकर्ता अपने आवेदन को जिस स्थान पर दुर्घटना हुई है उसकी अधिकारिता रखने वाला दावा न्यायाधिकरण या जहां पर दावाकर्ता रहता या निवास करता है या व्यापार संचालित करता है वहां पर प्रतिराक्षार्थी पिटीशन दाखिल कर सकता है।

  •  वाहन दुर्घटना से मृतक के परिवार वालों को रु.50,000 /-की अंतरिम राशि तुरंत पाने का अधिकार

अधिनियम की धारा 140 के अंतर्गत अगर किसी व्यक्ति की वाहन दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो मृतक के परिवार वालों को अंतरिम क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हज़ार रूपये पाने का अधिकार होता है। बाकी धनराशी मुख्य पिटीशन के निस्तारण पर प्राप्त की जा सकती है।

  • वाहन दुर्घटना में स्थायी निर्योग्यता होने पर 25 हज़ार रूपये की धनराशी अंतरिम क्षतिपूर्ति के रूप में प्राप्त की जा सकती है :

अधिनियम की धारा 140 में ऐसे व्यक्ति को जिसे दुर्घटना के वजह से स्थायी निर्योग्यता आई है, वह व्यक्ति 25 हज़ार रूपये की राशि अंतरिम क्षतिपूर्ति के रूप में प्राप्त करने का अधिकारी होता है। इसके लिए व्यक्ति को डॉक्टर की रिपोर्ट दिखानी होगी जिससे ये सिद्ध हो जाये की दुर्घटना से उसे वास्तव में स्थायाई निर्योग्यता पहुँचाने वाली चोट आई है। वाहन वहां अधिनियम 1988 की धारा 142 के स्थ्यायाई निर्योग्यता में निम्नलिखित चोटों का उल्लेख किया गया है…..

  •  आखों दृष्टि या किसी एक आँख या कान की श्रवण शक्ति का क्षीण हो गयी हो या शरीर का कोई अंग क्षीण हो गया हो।
  • किसी अंग या जोड़ों के किसी भाग में उसकी क्षमताओं में स्थायी कमी आई हो।
  • सिर या चेहरे का पर गंभीर चोट हो।

केवल तीसरे पार्टी को ही दुर्घटना से हुए नुक्सान की भरपाई करेगी बीमा कंपनी:

  • तीसरे पार्टी से अभिप्राय: ऐसे व्यक्ति से होता है जो वाहन में सवार यात्री या सड़क में चलने वाला व्यक्ति या ऐसे गाड़ी
    वाहन दुर्घटना मुआवजा व नुक्सान की क्षतिपूर्ति  के लिए पिटीशन दायर की प्रक्रिया

    वाहन दुर्घटना मुआवजा व नुक्सान की क्षतिपूर्ति के लिए पिटीशन दायर की प्रक्रिया

    पर सवार सभी व्यक्ति जिनकी बिना गलती के वाहन चालक ने गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त की। हालाँकि अगर वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने पर उसके चालक को चोटें आतीं हैं या उसकी मृत्यु हो जाती है तो बीमा कम्पनी का उस नुक्सान को पूरा करने का दायित्व नहीं होता।

  •  दुर्घटनाग्रस्त वाहन चालक की क्षतिपूर्ति के लिए पिटीशन :

क्योंकि बीमा कंपनी तृतीय पक्षकार को हुए नुक्सान की ही भरपाई करती है इसलिए वाहन चालक अपनी गलती से हुए नुकसान के लिए बीमा कंपनी के पास नहीं जा सकता। इन मामलों में क्षतिपूर्ति हेतु करमकार प्रतिकर अधिनियम 1923 के अंतर्गत सक्षम न्यायालय में पिटीशन दे सकतें हैं। जबकि वाहन अधिनियम 1988 में भी ये व्यवस्था कर दी गई है कि व्यक्ति मोटर दुर्घटना दावा न्यायधिकरण में पिटीशन देकर वाहन मालिक से क्षतिपूर्ति के रूप में प्रतिकार प्राप्त कर सकता है।

  • दुर्घटना के बाद पिटीशन दायर करने का समय:

इस सम्बन्ध में पहले ये व्यवस्था थी, कि दुर्घटना होने के एक वर्ष के अंदर ही आप न्यायालय में पिटीशन फाइल कर दें, लेकिन अब इसको समाप्त करते हुए दावा न्यायाधिकरण में पिटीशन को घटना करीत होने के एक वर्ष के अंदर फाइल करना ज़रूरी नहीं है। अगर आपके पास दावा फाइल करने में विलम्ब का संतोषजनक स्पष्टीकरण है तो पिटीशन को एक वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद भी फाइल कर सकतें हैं। हालाँकि प्रत्येक व्यक्ति का यही प्रयास रहना चहिये कि वो प्रतिकार दावा शीघ्र से शीघ्र फाइल कर दे।

प्रतिकार निर्धारण करने की प्रक्रिया:

  • प्रतिकार की मात्रा मृतक की स्थिति को देखते हुए भिन्न-भिन्न हो सकती है
  • जब आय की जानकारी न हो

सरकारी नौकरी या आयकर देने वाले व्यक्ति की वाहन दुर्घटना में मौत हो जाये तो उसकी आय की मात्र का निर्धारण आसानी से किया जा सकता है। लेकिन जिस परिस्थिति में आय का कोई निश्चित स्त्रोत न हो जैसे अगर मृतक मजदूर है तो इस अधिनियम के अनुसार अगर ऐसे व्यक्ति की आय कम से कम रु. 15000/-मान ली जाये और अगर उसकी मृत्यु 45 की आयु में होती है तो 13 का गुणांक लगते हुए उसे क्षतिपूर्ति के रूप में रु. 137000/- पाने का अधिकार है I

मोटर दुर्घटना में चोट आने पर प्रतिकार :

वाहन दुर्घटना से अगर व्यक्ति को स्थायी निर्योग्यता होती है तो व्यक्ति को रु. 25000/- पाने का अधिकार है I इसके आलावा व्यक्ति की दवाई पर जो खर्च होता है और जो उसे मानसिक कष्ट होता है उस नुक्सान की भरपाई की जाती हैI दुर्घटना के कारण अगर व्यक्ति छुट्टी पर है तो तो उसे वेतन के रूप में कितना नुक्सान हुआ है, इसके लिए भी प्रतिकार उपलब्ध कराया जाता है।

  • मोटर दुर्घटना दावेवहन और लोक अदालत

मोटरयान अधिनियम में अब मृतक की आयु के अनुसार गुनानक की मात्र निरधारित होती है जिससे प्रतिकार की राशि को निरधारित करने में कोई कठिनाई नहीं होती। इसलिए लोक अदालत से मामला सुलझाने से दोनों पक्षों को फ़ायदा होता है।

  •  प्रतिकार की धनराशी पिटीशन स्वीकार होने पर कैसे करें प्राप्त :

जब न्यायालय द्वारा प्रतिकार पिटीशन स्वीकार करने के बाद प्रतिकार राशि को डिक्री कर दिया गया है तो उसके बाद न्यायाधिकरण से वारंट जारी किया जाता है, जोकि जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से निष्पादित किया जाता है। मजिस्ट्रेट इसे रिकवरी वारंट के रूप में निष्पादित करता है।  इसलिए एक बार धनराशी डिक्री होने वाला व्यक्ति उसकी वसूली आसानी से कर सकता है।

  • अगर दुर्घटना करीत वाहन या उसके चालक का पता न चले :

बहुत बार ऐसा होता है की अँधेरे या किसी अन्य चीज़ का फायदा उठा कर दुर्घटना वाहन टक्कर मारकर फरार हो जाता है जिससे व्यक्ति जानकारी के अभाव के कारण मोटरयान अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय में पिटीशन फाइल नहीं कर सकता।

  • ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति को राहत देने के लिए सोलातियम स्कीम 1989 बनाई गयी है जिसकी प्रक्रिया इस प्रकार से है :
  • दुर्घटना होने के 6 महीने के अन्दर प्रार्थना पत्र दें : दुर्घटना करीत वाहन की जानकारी के आभाव में ये ज़रूरी है की वक्ती 6 महीने के अंदर पिटीशन फाइल करे। इसलिए दुर्घटना होने पर ये ज़रूरी है कि इसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दें ताकि 6 महीने के अंतर्गत पिटीशन जा सके।
  •   प्रार्थना पत्र उपखंड अधिकारी को दें : घटना क्षेत्र के अंतर्गत आने उपखंड अधिकारी को प्रार्थना पत्र दें जो घटना से सम्बंधित प्रथम इतिल्ला रिपोर्ट, पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट इत्यादि तैयार करता है। इसके बाद क्षेत्र का एस.डी.एम्. प्रार्थना पत्र का निस्तारण करके प्रतिकार के राशि को उपलब्ध करने सम्बन्धी अपनी संस्तुति मजिस्ट्रेट को भेजता है।
  • प्रतिकार की राशि: मृत्यु होने पर 8000 /- की राशि प्राप्त कर सकतें हैं और गंभीर चोट आने पर 2000 /- की राशि प्राप्त कर सकतें हैं।
  • मुख्य बातें जो ध्यान में रखने योग्य है:
  • वाहन का रजिस्ट्रेशन : गाड़ियों के पंजीकरण के लिए अधिकृत पंजीकरण अधिकारी को आवेदन किया जाना चाहिए।
  • पंजीकरण 15 वर्षों के लिए मान्य होता है।
  • यातायात नियंत्रण की दृष्टि से मोटर गाड़ियों के खाली तथा भरे हुए भारों का निर्धारण कर पंजीकरण आदेश में दर्ज किया जाता है। इसका उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है।
  • राज्य सरकारें इच्छित स्थानों पर इच्छित मोटर गाड़ियों के प्रवेश एवं चालन पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण प्रदूषण पर स्थायी अथवा अस्थायी रोक लगा सकती है।
  • दुर्घटना होने पर मोटर चालक को घायल व्यक्ति के उपचार में मदद करनी चाहिए, पुलिस को तुरंत सूचना देनी चाहिए तथा बीमा कंपनी को सूचना देनी चाहिए।
  • अधिकृत व्यक्तियों को अधिनियम में वर्णित सूचनाएं न देने पर 500 रुपए आर्थिक दंड का प्रावधान है।
  • अनधिकृत व्यक्ति द्वारा मोटर गाड़ी चालन करने पर तीन मास की कैद या 1000 रुपए आर्थिक दंड का प्रावधान है।
  • निर्धारित गति से अधिक गति पर मोटर चालन करने पर 1000 रुपए तक आर्थिक दंड खतरनाक विधि से मोटर चालन पर प्रथम बार में 6 मास का कारावास या और 1000 रुपए जुर्माना, अगले अपराध पर 2 वर्ष तक की कैद या 2000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है। शराब पीकर गाड़ी चलाने पर पहली बार पकड़े जाने पर 6 माह की कैद व दूसरी बार में 3 वर्ष तक कैद हो सकती है।
  • शोर अथवा अन्य किसी प्रकार का प्रदूषण करने वाले वाहन को चलाने पर पहली बार 500 रुपए तक व अगली बार 2000 रुपए तक जुर्माना किया जा सकता है।
  • पर्यावरण समस्याओं के प्रति जागरुकता उत्पन्न करने तथा पर्यावरण संरक्षण में जन भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा पर्यावरण अध्ययन को अनिवार्य विषय के रूप में विश्वविद्यालयों-विद्यालयों में सम्मिलित किया गया है।
  • वाहन दुर्घटना का मुआवजा

मुआवजा क्या है- किसी व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर जो राशि दी जाती है उसे मुआवजा कहते हैं।

मुआवजा क्या है- किसी व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर जो राशि दी जाती है उसे मुआवजा कहते हैं।

मुआवजा क्या है- किसी व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर जो राशि दी जाती है उसे मुआवजा कहते हैं।

मुआवजे का दावा कौन कर सकता है- वह व्यक्ति जिसे चोट आई है या संपत्ति का मालिक या मृतक(जहां मृत्यु हुई हो) उसके सगे-संबंधी या कोई भी कानूनी प्रतिनधि या घायल व्यक्ति द्वारा नियुक्त एजेन्ट या मृतक व्यक्ति का कानूनी प्रतिनिधि(मृतक की संपत्ति में हक रखने वाला उत्तराधिकारी)।

मुआवजे का आवेदन जिस क्षेत्र में दुर्घटना घटी हो उस क्षेत्राधिकार में आने वाली ट्राइब्यूनल को संबोधित की जानी चाहिए।

मुआवजे के दावे के लिए फार्म-

  • दावेदार/दावेदारों का
  • नाम व पता (यदि मालूम हो तो)
  • मोटर चालक
  • मोटर मालिक का नाम व पता(यदि मालूम हो तो)
  • मोटर का बीमा करने वालों का नाम व पता (यदि मालूम हो तो)
  • घायल/मृतक की जानकारी जैसे- नाम, आयु, पता, व्यवसाय, आमदनी इत्यादि
  • दुर्घटना का स्थान, समय तथा तिथि
  • वह साधन जिसके द्वारा घायल/मृतक यात्रा कर रहे थे
  • चोट का नाम तथा इलाज
  • इन सब की भी जानकारी-
  • गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर तथा उसकी मिल्कियत
  •    वाहन का चालक
  •    बीमा कंपनी से संबंधित कवर-नोट
  •    दावे की राशि
  •    दावे का औचित्य
  •    राहत

दुर्घटना के बाद कभी भी मुआवजे के लिए दावा डाला जा सकता है । ट्राइब्यूनल द्वारा निर्धारित मुआवजे की राशि का भुगतान वाहन मालिक या चालक या जिस वाहन कंपनी ने वाहन का बीमा किया है। कोई भी कर सकते हैं।

कानून के अनुसार हर वाहन का तीसरे आदमी कोर्ट खतरे(थर्ड पार्टी रिस्क) के विरुद्ध बीमा होना आवश्यक है। इससे दावों की शीघ्र सुनवाई में मदद मिलती है ।

ट्राइब्यूनल के अवार्ड में से बीमा कंपनी में जितनी राशि का बीमा करवाया है, उतनी राशि देने के लिए जिम्मेदार होती है ।

वाहन दुर्घटना का मुआवजा: मोटर व्हीकल एक्ट ने मोटर यान दुर्घटना दावों के संबंध में यह प्रावधान दिया गया है कि क्षतिपूर्ति का दावा करने वाला व्यक्ति उस की इच्छा से तीन तरह के स्थानों पर स्थित मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरणों में से किसी एक में अपना दावा प्रस्तुत कर सकता है।

ये तीन स्थान निम्न प्रकार हैं-

वहाँ जहाँ दुर्घटना घटित हुई हो।

वहाँ जहाँ दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई हो तथा जहाँ दावे के विरोधी पक्षकारों में से किसी एक का कार्यालय हो या जहाँ वह व्यापार करता हो।

  • ट्राइब्यूनल की प्रक्रिया-

दावा ट्राइब्यूनल को मोटर दुर्घटना से संबंधित केसों पर एकमात्र क्षेत्राधिकार प्राप्त है।

ट्राइब्यूनल निर्णय सुनाते समय यह स्पष्ट करती है कि मुआवजे की राशि कितनी होगी तथा किन लोगों के द्वारा उसका भुगतान किया जायेगा।

ट्राइब्यूनल का क्षेत्राधिकार- जहां दुर्घटना हुई होजहां दावेदार रहते होंजहां बचाव पक्ष रहते हों

ट्राइब्यूनल को दीवानी अदालत की शक्तियां प्राप्त होती हैं।

ट्राइब्यूनल मुआवजे की राशि पर ब्याज भी लगा सकती है। यह ब्याज दावे की तिथि से लेकर राशि के भुगतान तक के लिए लगाया जा सकता है ।

यदि कोई व्यक्ति ट्राइब्यूनल द्वारा निर्धारित मुआवजे की राशि से संतुष्ट नहीं है तो वह ट्रायब्यूनल के निर्णय की तिथि से 90 दिन के भीतर उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है,

यदि अपील 90 दिन के बाद की जाती है , उसे बिलंब के संतोषजनक कारण ट्रायब्यूनल को बताने होंगे।

यदि राशि 2,000 रुपए से कम की है तो उच्च न्यायालय अपील को दाखिल नहीं करेगा।

मुआवजे की राशि के लिए ट्राइब्यूनल से एक प्रमाणपत्र लेना होता है जो जिला कलेक्टर को संबोधित करता है । इस प्रमाणपत्र में मुआवजे की राशि अंकित होती है। कलेक्टर मुआवजे की राशि को ठीक उसी तरह इकट्ठा करने का अधिकार रखता है जिस तरह वह जमीन का राजस्व वसूलता है तथा दावेदार को उसके मुआवजे का भुगतान करता है।

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5 Responses

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  1. Bhanwar singh
    Feb 22, 2017 - 05:23 PM

    दावा Court me pace hone ke baad Court Ki Kya prakriya Hogi step to step Jankari de please

    Reply
  2. Kirti
    Jun 23, 2017 - 05:38 PM

    Respected sir, mere husband ki death railway accident m on the platform ho gayi h or Maine iske liye claim kiya hua h pls yeh bataiye ki claim ki amount aane m kitna time lagega or kitni amount milegi mere husband income tax return payee the.plz clear it all.

    Reply
  3. अमित कुमार
    Aug 13, 2017 - 08:29 AM

    मेरे पिताजी को होटल मालिक ने होटल की टैक्सी टूरिस्ट गाडी पर 3 आदमी के साथ बूकिग पर भेजा जो लापता हो गये होटल मालिक ह मे कया कमपनसेशन कलेम देगा

    Reply
  4. Rupesh prasad
    Dec 09, 2017 - 09:01 AM

    Sir. ….Mere se bike aciddent me ek vridh mahila ki mrityu ho gyi the …….jiska case court me chal rha hai……….lekin us mahila ka koi family nhi hai……but police case ho gya hai………….to kya case finally close hone pr mujhe character certificate diya jayega ya nhi…….Please tell me sir…..

    Reply
  5. H s rana
    Jul 18, 2019 - 12:25 PM

    I have sold my motor cycle to a person who met with an accident very next morning.while the vehicle was not insurred. He ha has accepted in court that he had already bought vehicle before accident. Now court is asking for componsession am i liable or what should I have to do.

    Reply

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