
सेल्स एग्जीक्यूटिव और सेल्स मेनेजर के 06 पदों के लिए घुमारवीं में होंगे साक्षात्कार
बिलासपुर: ब्लू स्टार कंपनी, नाहन रोड, रामपुर काला अंब, जिला सिरमौर द्वारा ऑपरेटर के 50 पदों को भरा जा रहा है। जबकि श्रीराम इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, घुमारवीं, द्वारा सेल्स एक्जेक्यूटिव तथा सेल्स मेनेजर के 06 पदों को भी भरा जाएगा। इन पदों के लिए आगामी 17 अप्रैल को उप-रोजगार कार्यालय घुमारवीं में प्रातः 10ः30 बजे से कैंपस इंटरव्यू का आयोजन किया जाएगा।
इस बारे जानकारी देते हुए जिला रोजगार अधिकारी बिलासपुर राजेश मेहता ने बताया कि ब्लू स्टार के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता किसी भी ट्रेड में आईटीआई, फिटर, टर्नर, इलेक्ट्रिशियन, इलेक्ट्रिक, मोटर मेकेनिक, पंप ऑपरेटर और वेल्डर डिप्लोमा होना चाहिए। इन पदों के लिए 16 से 25 वर्ष आयु वर्ग के उम्मीदवार आवेदन कर सकते है। चयनित अभ्यर्थियों को 16 हजार से 20 हजार 800 रुपये तक मासिक वेतन प्रदान किया जाएगा।
इसी तरह सेल्स एग्जीक्यूटिव तथा सेल्स मेनेजर के इन पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक व एमबीए पास रखी गई है। इन पदों के लिए 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के उम्मीदवार आवेदन कर सकते है। चयनित अभ्यर्थियों को 20 हजार से 30 हजार रुपये तक मासिक वेतन प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित निर्धारित स्थान, तिथि व समय पर उपस्थित होकर कैंपस इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं। इस बारे अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नम्बर 01978-222450 पर संपर्क किया जा सकता है।

कुल्लू : जिला मजिस्ट्रेट कुल्लू, अनुराग चंद्र शर्मा ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आगामी पर्यटन सीजन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और सुचारू यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भुंतर-मणिकरण मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को विनियमित करने के आदेश जारी किए हैं।
जारी आदेश में कहा गया है कि पर्यटन सीजन के दौरान पर्यटकों की संख्या में संभावित वृद्धि और भुंतर-मणिकरण सड़क के कई स्थानों पर संकीर्ण होने व भूस्खलन के कारण लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
आदेशानुसार वोल्वो बसों और अन्य भारी वाहनों (जैसे डंपर और उच्च क्षमता वाले वाहन) की आवाजाही की अनुमति केवल रात 08:00 बजे से सुबह 08:00 बजे तक रहेगी।
यह प्रतिबंध आपातकालीन वाहनों, अग्निशमन वाहनों, एम्बुलेंस, स्कूल बसों और नियमित यात्री बसों पर लागू नहीं होगा। ये आदेश 14 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और पर्यटन सीजन के अंत तक प्रभावी रहेंगे।
जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया है कि सड़क पर तैनात पुलिस प्रभारी यातायात तथा दोनों ओर से भारी वाहनों की आवाजाही को विनियमित और सिंक्रोनाइज़ करने के लिए अधिकृत होंगे तथा पुलिस अधीक्षक कुल्लू को आदेश के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।

हिमाचल : प्रदेश में 184 साल पुरानी हेरिटेज मार्केट कसौली छावनी में भीषण अग्निकांड हुआ है। सुबह के समय करीब साढ़े चार बजे लगी इस आग में देखते ही देखते बाजार की कई दुकानें को चपेट में आ गई और अफरातफरी मच गई। आग लगने से हेरिटेज मार्केट की कई दुकानें और उस में रखा सामान खाक हो गया है।
लोगों ने जब दुकान में आग लगी देखी तो दमकल विभाग को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए। पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों के साथ आग बुझाने में जुटी। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। बताया जा रहा है कि आग लगने की शुरुआत एक रेस्टोरेंट से बताई जा रही है, जिसके बाद दुकानों में रखे गैस सिलेंडरों में धमाके होने लगे। 29 दुकानों वाली इस लाइन में आठ दुकानें पूरी तरह जल गईं, जबकि कई अन्य को क्षति हुई। आग की घटना से पांच से सात करोड़ के नुकसान की आशंका जताई गई है। कसौली छावनी की नींव सन 1842 में पड़ी थी। ब्रिटिशकाल में अंग्रेजों व स्थानीय लोगों के लिए एक मार्केट बसाई गई थी। छावनी प्रशासन ने इस मार्केट को कुछ वर्षों पहले हेरिटेज मार्केट का दर्जा दिया था। पहले यह मार्केट छोटे स्तर पर थी और रेहड़ी-खोखों की तरह चलती थी, लेकिन उसके बाद छावनी प्रशासन ने दुकानों को बड़ा बनाया था।
शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज लोक भवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को पारंपरिक हिमाचली टोपी, शॉल तथा स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर राज्य के विकास एवं जनकल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

महिला समिति ने खोला मोर्चा
शिमला : शिमला के कमला नेहरू अस्पताल से गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में पूरी तरह शिफ्ट करने के लिए अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने मोर्चा खोल दिया है। इस दौरान महिलाओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारे बाजी की। समिति ने सरकार ने चेतावनी दी कि अगर सरकार फैसले को वापस नहीं लेती है तो महिलाएं सड़कों पर आंदोलन करेगी। इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार की होगी।
अस्पताल परिसर के बाहर बड़ी संख्या में महिलाओं ने इकट्ठा होकर सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वे 100 साल से ज्यादा पुरानी इस धरोहर को किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने देंगे। समिति का कहना है कि KNH राज्य का एकमात्र ‘मदर एंड चाइल्ड’ अस्पताल है, जहां महिलाओं और नवजातों को एक ही जगह सभी सुविधाएं मिलती हैं। IGMC में पहले से ही मरीजों का भारी दबाव है, ऐसे में ओपीडी शिफ्ट करना मरीजों के लिए मुश्किलें बढ़ाएगा।
जनवादी महिला समिति (AIDWA) महासचिव फ़ालमा ने कहा कि KNH केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी कमला नेहरू की विरासत और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। इसे खत्म करना इतिहास और पहचान दोनों के साथ अन्याय होगा। फ़ालमा चौहान ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस फैसले के पीछे अस्पताल की जमीन पर कब्जा कर निर्माण करने की मंशा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन जल्दबाजी में 16 तारीख तक ओपीडी शिफ्ट करने का आदेश देकर विरोध को दबाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस ऐतिहासिक नाम और पहचान को मिटाने पर तुली है। उन्होंने कहा कि ‘जब तक फैसला वापस नहीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।महिला समिति ने प्रदेश की जनता और महिलाओं से इस निर्णय के खिलाफ लामबंद होने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
महिला समिति ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही प्रदेश की महिलाओं और आम जनता से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील भी की गई है।

मण्डी: हिमाचल प्रदेश के जिला मण्डी में कॉलेज जा रही छात्रा की एक युवक ने निर्मम हत्या कर दी। 19 वर्षीय सिया गुलेरिया पुत्री जोगिंद्र कुमार गांव नैण डाकघर गोपालपुर तहसील सरकाघाट जिला मंडी घर से कॉलेज के लिए निकली थी। घर से एक किलोमीटर की दूरी पर ही युवती पर युवक ने दराट से हमला कर दिया। घर से एक किलोमीटर की दूरी पर ही युवती पर युवक ने दराट से हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि एक युवक हुड पहनकर आया और उसने दराट से युवती की गर्दन पर हमला कर दिया। जिसने पहले युवती की बाजू पर वार किया, जिससे वह नीचे गिर गई। इसके बाद उसने गर्दन पर वार कर उसकी हत्या कर दी। बताया जा रहा है आरोपित उसी गांव का निवासी है, जहाँ वारदात के बाद अंडरग्राउंड हो गया था। पुलिस पूछताछ करते हुए व कड़ियां जोड़ते हुए आरोपित तक पहुंच गई। जिस जगह यह वारदात हुई है, वहां आसपास पेड़ हैं व कुछ दूरी पर एक घर है। सड़क पर वारदात के वक्त कोई नहीं था। बताया जा रहा है लोग युवती की चीख सुनकर उस और आए तो आरोपित फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही सरकाघाट पुलिस थाना की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है आरोपित वारदात के बाद गेहूं के खेतों में जाकर छिप गया था, जिसे ग्रामीणों ने देख लिया। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया और युवक को पकड़ लिया, इतने में पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। सीसीटीवी फुटेज से आरोपित की पहचान कर पुलिस ने लोगों की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपित नशे का आदी बताया जा रहा है। हत्या क्यों की अभी इसका पता नहीं चला है। आरंभिक पूछताछ में उसने गुनाह माना है।

शिमला: राज्य के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने मछुआरा समुदाय के उत्थान के लिए सक्रिय और केंद्रित कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने और मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के बजट 2026-27 की घोषणाओं के अनुरूप, मत्स्य विभाग इन पहलों को जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रहा है। बाजार के उतार-चढ़ाव से जलाशय मछुआरों की सुरक्षा, उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाए गए हैं। यह प्रयास सरकार की मछुआरों के कल्याण और मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार जलाशयों से प्राप्त मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य मछुआरों को कीमतों में अनिश्चितता से बचाना और उन्हें सुनिश्चित आय प्रदान करना है। जलाशय मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। इसके अतिरिक्त, यदि नीलामी मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम से कम होता है, तो राज्य सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से प्रति किलोग्राम अधिकतम 20 रुपये तक की सब्सिडी प्रदान करेगी। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और सब्सिडी सीधे पात्र मछुआरों के बैंक खातों में जमा होगी।
मुख्यमंत्री ने मछुआरों को एक बड़ी राहत के रूप में, जलाशयों से प्राप्त मछलियों पर रॉयल्टी दर में उल्लेखनीय कमी की घोषणा की है। प्रदेश सरकार पहले ही रॉयल्टी को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर चुकी थी, और अब इसे वर्तमान वित्त वर्ष में घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया गया है। इस निर्णय से 6,000 से अधिक जलाशय मछुआरों को सीधा लाभ प्राप्त होगा और उनका आर्थिक बोझ कम होगा।
हिमाचल प्रदेश में पांच प्रमुख जलाशय हैं-गोबिंद सागर (बिलासपुर और ऊना), पोंग डैम (कांगड़ा), रंजीत सागर और चमेरा (चंबा), तथा कोल डैम (बिलासपुर)। गोबिंद सागर, कोल डैम, रंजीत सागर और चमेरा जलाशयों में सिल्वर कार्प प्रमुख प्रजाति है, जबकि पोंग डैम में सिंधारा प्रमुख है। अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियों में रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प शामिल हैं। उन्नत फिंगरलिंग्स (70-100 मिमी) के वार्षिक स्टॉकिंग जैसे लक्षित प्रयासों के कारण जलाशय मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जलाशयों से वर्ष 2022-23 का उत्पादन 549.35 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है, जो इस क्षेत्र में मजबूत प्रगति को दर्शाता है।
इन प्रगतिशील नीतिगत उपायों से जलाशय मत्स्य अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, सतत मछली पकड़ने की पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा और मछुआरा समुदाय की भागीदारी में वृद्धि होगी। सरकार मत्स्य अवसंरचना के विस्तार, विपणन व्यवस्था में सुधार और मछुआरों व मत्स्य पालकों के लिए बेहतर आजीविका अवसर सृजित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
प्रदेश सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप राज्य में कुल मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मच्छली उत्पादन वर्ष 2024-25 के 19,019 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 20,005 मीट्रिक टन हो गया है। यह वृद्धि मत्स्य क्षेत्र में चल रही विकासात्मक पहलों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है और ग्रामीण रोजगार व राज्य की अर्थव्यवस्था में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।

अपनी ही पार्टी के विधायकों ने खोल दी पोल, सदन में भीगी बिल्ली बने बैठे रहे मंत्री*
शिमला: पूर्व मंत्री एवं जसवां-प्रागपुर से विधायक बिक्रम ठाकुर ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि आजकल वह फेसबुक और बयानबाजी की राजनीति कर खुद को बड़ा नेता साबित करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जैसे वरिष्ठ नेताओं पर कीचड़ उछालकर कोई भी व्यक्ति बड़ा नहीं बन सकता, बल्कि इससे उनकी अपनी राजनीतिक कमजोरी और हताशा ही उजागर होती है।
बिक्रम ठाकुर ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि अपनी ही सरकार और पार्टी में हाशिए पर जा चुके विक्रमादित्य सिंह अब सुर्खियों में बने रहने के लिए अमर्यादित बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि “दिल्ली दरबार में नंबर बनाने और हाईकमान की गुड बुक में आने की लालसा में वह हिमाचल की राजनीतिक संस्कृति को तार-तार कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश की जागरूक जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।”
उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि बीते साढ़े तीन वर्षों में लोक निर्माण विभाग पूरी तरह फेल साबित हुआ है। प्रदेश की सड़कों की हालत बद से बदतर हो चुकी है, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आज तक मलबा नहीं हट पाया है और टेंडर प्रक्रिया भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है। जहां विकास की जरूरत थी, वहां लूट का खेल चल रहा है।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस के ही चार विधायकों ने विक्रमादित्य सिंह की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाकर उनकी कार्यक्षमता की पोल खोल दी। लेकिन जवाब देने के बजाय मंत्री सदन में चुप्पी साधे बैठे रहे। यह पहली बार है जब कोई मंत्री सदन के सवालों का जवाब देने से बचता हुआ चेंबर में बुलाने की बात करता है — इससे बड़ा लोकतंत्र का अपमान क्या हो सकता है?
उन्होंने आगे कहा कि ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा, सरकारी भवनों का काम ठप पड़ा है, अस्पतालों में ताले लग रहे हैं और विभागीय अव्यवस्था चरम पर है। “लोक निर्माण विभाग आज भ्रष्टाचार, बदइंतजामी और अक्षमता का केंद्र बन चुका है।
बिक्रम ठाकुर ने दो टूक कहा कि हिमाचल में जो भी विकास कार्य हो रहे हैं, वह केंद्र सरकार के सहयोग से ही संभव हो पाए हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन नेताओं ने हमेशा हिमाचल के विकास को प्राथमिकता दी, उन्हीं के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना विक्रमादित्य सिंह की ओछी राजनीति को दर्शाता है।
अंत में उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य सिंह को “राहुल गांधी मॉडल” की भटकाऊ और नकारात्मक राजनीति से बचना चाहिए और हिमाचल की मर्यादित एवं सकारात्मक राजनीतिक परंपरा का सम्मान करना चाहिए, अन्यथा जनता उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिए पर भेजने में देर नहीं करेगी।