


हिमाचल: प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल सीटों की संख्या 277 से बढ़ाकर 597 करने का प्रस्ताव रखा है। एक ही चरण में पीजी सीटों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहली बार प्रस्तावित की गई है।
इससे प्रदेश के छात्रों को राज्य में ही स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के अधिक अवसर मिलेंगे। साथ ही विभिन्न विषयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने में सहायता मिलेगी और प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। पीजी डॉक्टर मरीजों के इलाज, चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसलिए पीजी छात्रों की संख्या बढ़ने से राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में मरीजों की देखभाल भी बेहतर होगी।
प्रस्ताव के अनुसार इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (आईजीएमसी) शिमला में पीजी सीटें 139 से बढ़ाकर 230, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में 99 से बढ़ाकर 156, श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, मंडी में 24 से बढ़ाकर 79, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नाहन में 3 से बढ़ाकर 35, पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, चंबा में 4 से बढ़ाकर 32 तथा डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में 8 से बढ़ाकर 65 करने का प्रस्ताव है।
इस विस्तार को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने पिछले तीन वर्षों में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर विशेषज्ञ के 218 नए पद भी सृजित किए हैं। इनमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में 54, डॉ. वाई.एस. परमार चिकित्सा महाविद्यालय नाहन में 31, पंडित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय चंबा में 32, श्री लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सा महाविद्यालय मंडी में 36, डॉ. राधाकृष्णन चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में 63 तथा अटल इंस्टीट्यूट ऑॅफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी चमियाना में 2 पद शामिल हैं। इन पदों के सृजन से विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी, पीजी चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं के विकास और विशेषज्ञ मानव संसाधन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाकर प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सीनियर रेजिडेंट बड़े अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों की रीढ़ होते हैं। वह मरीजों के उपचार, चिकित्सा शिक्षा, शोध और क्लीनिकल प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वह शिक्षकों और मेडिकल छात्रों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं तथा अस्पतालों की सेवाओं को सुचारु रूप से चलाने में योगदान देते हैं।
उन्होंने कहा कि पीजी सीटों में बढ़ोतरी से प्रदेश में अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार होंगे, जो लोगों की बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे। प्रदेश सरकार चिकित्सा महाविद्यालयों में आधुनिक भवन, अत्याधुनिक जांच सुविधाएं व प्रयोगशालाएं और बेहतर शिक्षण संसाधन उपलब्ध करवा रही है ताकि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करना और विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण की क्षमता बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इन प्रयासों से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी और लोगों को विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हिमाचल को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट राज्य के रूप में विकसित करना है। इसके लिए आधारभूत ढांचे, मानव संसाधन और आधुनिक तकनीक पर निरन्तर निवेश किया जा रहा है।

ऊना: मैसर्ज जीडीएच इंडस्ट्रीज बसाल में 56 पद विभिन्न श्रेणी में भरे जाएंगे। इन पदों के लिए साक्षात्कार 18 जुलाई को सुबह 10.30 बजे जिला रोजगार कार्यालय ऊना में लिया जाएगा।
जिला रोजगार अधिकारी, ऊना अक्षय शर्मा ने बताया कि जीडीएच इंडस्ट्रीज बसाल में प्लांट हेल्पर के 10 पद, टूल रूम वर्कर के 15, फरनेस हेल्पर के 15, सुपरवाइजर के 3, प्रेस ऑप्रेटर के 4, फरनास ऑप्रेटर के 2, टेबल ऑप्रेटर के 2 और टूल एंड डाई ऑप्रेटर के 5 पद भरे जाएंगे।
उन्होंने बताया कि प्लांट हेल्पर, प्रेस ऑप्रेटर, फरनास ऑप्रेटर, टेबल ऑप्रेटर एवं टूल एंड डाई ऑप्रेटर पदों के लिए 10वीं निर्धारित की गई है। टूल रूम वर्कर के लिए 10वीं और आईटीआई निर्धारित की गई है। इन सभी पदों के लिए आयु सीमा 18 से 35 वर्ष तथा वेतन सरकारी मानदंडों के अनुसार दिया जाएगा। इसके अलावा सुपरवाइजर पद के लिए शैक्षणिक योग्यता 12वीं और स्नातक, 1 से 3 वर्ष का अनुभव और आयु सीमा 20 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है।
अक्षय शर्मा ने बताया कि इच्छुक व योग्य अभ्यर्थी अपनी योग्यता प्रमाण पत्र, जन्म तिथि, रोजगार कार्यालय पंजीकरण कार्ड, आधार कार्ड, दो पासपोर्ट आकार की फोटो, अनुभव प्रमाण पत्र, बायोडाटा व मूल प्रमाण पत्रों सहित साक्षात्कार में भाग ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए 98050-54957 पर सम्पर्क कर सकते हैं। साक्षात्कार में आने जाने का यात्रा भत्ता देय नहीं होगा।

हमीरपुर: दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण तथा दिव्यांगजनों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करके उनके लिए समाज में अनुकूल माहौल विकसित करने में सराहनीय कार्य करने वाले लोगों, संस्थानों, संस्थाओं, संगठनों और प्रतिष्ठानों को इस वर्ष भी 3 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के उपलक्ष्य पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने बताया कि इन पुरस्कारों के लिए पात्र व्यक्ति, संस्थाएं और संस्थान 31 जुलाई तक राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल अवार्ड्स.जीओवी.इन पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पुरस्कारों से संबंधित विस्तृत जानकारी इसी पोर्टल पर उपलब्ध है। इसके अलावा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की वेबसाइट डीईपीडब्ल्यूडी.जीओवी.इन पर भी राष्ट्रीय पुरस्कारों से संबंधित दिशा-निर्देश अपलोड किए गए हैं।
उपायुक्त ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए सराहनीय कार्य करने वाले पात्र लोगों, संस्थाओं, संस्थानों एवं संगठनों से राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु 31 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की है

कुल्लू: उपायुक्त एवं जिला दण्डाधिकारी अनुराग चन्द्र शर्मा ने एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के संदर्भ में स्पष्ट किया है कि पार्वती घाटी में किसी भी प्रकार की अवैध पार्टी अथवा रेव पार्टी के आयोजन की प्रशासन द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है।
उन्होंने बताया कि समाचार में 4 से 6 सितम्बर तक पार्वती घाटी में कथित रेव पार्टी के आयोजन से संबंधित सोशल मीडिया पर प्रसारित विज्ञापनों का उल्लेख किया गया है। इस संबंध में प्रशासन स्पष्ट करता है कि ऐसे किसी भी आयोजन के लिए कोई अनुमति प्रदान नहीं की गई है तथा इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन पूरी सतर्कता एवं गंभीरता के साथ कार्य कर रहा है। उपायुक्त ने बताया कि जिला दण्डाधिकारी, कुल्लू द्वारा 30 अप्रैल, 2026 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया गया था, जिसके अनुसार कसोल, मणिकर्ण, तोष, पुलगा, तुलगा, ग्राहण तथा बरशैणी क्षेत्रों में इस प्रकार की पार्टियों के आयोजन एवं उनके प्रचार-प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। यह आदेश वर्तमान में भी प्रभावी है।
उन्होंने बताया कि उक्त आदेश की अवहेलना एवं नियमों के उल्लंघन के मामले में पुलिस थाना मणिकर्ण में संबंधित इंस्टाग्राम यूजर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 (लोक सेवक द्वारा विधिवत प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है तथा इस मामले पूर्ण रूप से निष्पक्ष जांच एवं अन्वेषण की प्रक्रिया अम्ल में लाई जाएगी।
उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन नशे एवं अवैध गतिविधियों के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति के तहत लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। सोशल मीडिया पर इस प्रकार के भ्रामक प्रचार से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने तथा शांति भंग होने की आशंका रहती है। इसलिए घाटी में किसी भी प्रकार के अवैध अथवा प्रतिबंधित आयोजनों का प्रचार-प्रसार करने अथवा शांति व्यवस्था भंग करने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

कुल्लू: श्री खंड महादेव यात्रा-2026 को लेकर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, जिला प्रशासन कुल्लू ने यात्रा मार्ग की सुरक्षा स्थिति का नए सिरे से आकलन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जिला दंडाधिकारीअनुराग चंद्र शर्मा कुल्लू द्वारा आज एक आदेश जारी कर एक उच्च स्तरीय ‘संयुक्त निरीक्षण समिति’ का गठन किया गया है।
आदेश में कहा गया है कि पर्वतारोहण संस्थान मनाली, राजस्व और वन विभाग की विशेषज्ञ टीम की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर, भीमद्वारी और पार्वती बाग के बीच के ट्रैक को अत्यधिक खतरनाक और असुरक्षित पाए जाने के कारण सुरक्षा कारणों से यात्रा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद विभिन्न धार्मिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों द्वारा यात्रा को पुन: शुरू करने के अनुरोध को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
आदेश में कहा गया है कि नवगठित समिति की अध्यक्षता उप-मंडल दंडाधिकारी (एसडीएम) निरमंड करेंगे। समिति में अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान मनाली के विशेषज्ञ,राजस्व, वन विभाग, श्री खंड महादेव यात्रा ट्रस्ट और श्री खंड क्षेत्रीय संगठन चायल (जुआगी) के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
यह समिति 18 जुलाई 2026 को यात्रा मार्ग के सबसे संवेदनशील हिस्सों, विशेष रूप से भीमद्वारी से पार्वती बाग के बीच के ट्रैक का विस्तृत भौतिक निरीक्षण करेगी तथा एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट जिला दंडाधिकारी को सौंपेगी। समिति इस बात की जांच करेगी कि क्या यात्रा के लिए कोई अन्य सुरक्षित या वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा सकता है। यदि मार्ग सुरक्षित पाया जाता है, तो समिति प्रतिदिन जाने वाले तीर्थयात्रियों की अधिकतम संख्या, यात्रा की सुरक्षित अवधि, अनिवार्य लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं और आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल को लेकर अपनी स्पष्ट सिफारिशें देगी।
जिला दंडाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि तीर्थयात्रियों, स्वयंसेवकों और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। समिति की तकनीकी रिपोर्ट और मौसम व भूस्खलन की स्थिति की समीक्षा करने के बाद ही कानून के दायरे में यात्रा के संचालन पर अंतिम और उचित निर्णय लिया जाएगा।
आदेश में एसडीएम निरमंड को निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल उन टेंट ऑपरेटरों को ही पास जारी करें, जिन्होंने अपने टेंटों की पुनर्व्यवस्था करने के लिए इस मार्ग पर पहले से ही अस्थायी कैंप स्थापित किए हुए हैं।

शिमला: शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से वृद्धावस्था पेंशन और सहारा योजना से जुड़ी गंभीर शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। बड़ी संख्या में पात्र बुजुर्ग पहचान सत्यापन (केवाईसी) प्रक्रिया में हुई त्रुटियों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण लंबे समय से पेंशन से वंचित हैं। सरकार केवाईसी के नाम पर जरूरतमंद लोगों की पेंशन रोकने से बाज आए। चालू वित्त वर्ष के लिए घोषित एससी, एसटी, ओबीसी, माइनॉरिटी एवं समाज कल्याण के बजट को सुक्खू सरकार ने 1,618 करोड़ रुपये से घटाकर 604 करोड़ रुपये कर दिया है। बजट में 63 प्रतिशत की कटौती के कारण लोगों को पेंशन नहीं मिल रही है और इसी वजह से सरकार केवाईसी जैसी तकनीकी खामियों की आड़ में वृद्धावस्था एवं सहारा पेंशन समेत समाज कल्याण की अन्य योजनाओं को रोक रही है। इसका खामियाजा पात्र लाभार्थियों को भुगतना पड़ रहा है और अनेक लोगों की पेंशन एक वर्ष या उससे अधिक समय से शुरू नहीं हो पाई है। ऐसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं कि जब बुजुर्ग संबंधित कार्यालयों में जानकारी लेने जाते हैं तो उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि “फंड नहीं आया है” या “केस भेज दिया गया है।”
जयराम ठाकुर ने कहा कि इससे भी अधिक गंभीर विषय यह है कि सहारा योजना के कई वास्तविक लाभार्थियों को रिकॉर्ड में मृत दर्शाकर उनकी पेंशन रोक दी गई है। जिन लोगों का सत्यापन किए बिना उन्हें मृत घोषित कर पेंशन बंद कर दी गई, उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। सरकार को ऐसे सभी मामलों की जिला स्तर पर निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और प्रत्येक मामले का पुनः सत्यापन कराया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिन लाभार्थियों को गलत तरीके से मृत दर्शाकर उनकी पेंशन रोकी गई है, उनकी पेंशन तत्काल प्रभाव से बहाल की जाए तथा रोकी गई समस्त बकाया राशि भी उन्हें प्रदान की जाए। साथ ही जिन मामलों में केवाईसी की त्रुटियों या प्रशासनिक लापरवाही के कारण पात्र बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिल सकी, उन सभी त्रुटियों को समयबद्ध अभियान चलाकर ठीक किया जाए। सरकार से आग्रह है कि ऐसे मामलों में केवाईसी पूरा कराने का दायित्व पात्र लाभार्थियों के बजाय स्थानीय प्रशासन का हो। इसकी समुचित निगरानी की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की कोताही की संभावना न रहे।
जयराम ठाकुर ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन और सहारा योजना से जुड़े सभी लंबित मामलों का विशेष अभियान चलाकर शीघ्र निपटारा किया जाए। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य स्तर पर लापरवाही, गलत केवाईसी या तथ्यात्मक त्रुटि सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय कर उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि वृद्धजन समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उन्हें सम्मान, संवेदनशीलता और समय पर सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। सरकार को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि प्रदेश का कोई भी पात्र बुजुर्ग अथवा सहारा योजना का लाभार्थी अपनी पेंशन से वंचित न रहे।
भगवान जगन्नाथ की कृपा से प्रदेश में सुख, समृद्धि और खुशहाली का हो संचार
जयराम ठाकुर ने भगवान जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा के शुभ अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की कि उनकी कृपा से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति का संचार हो तथा हिमाचल प्रदेश निरंतर प्रगति और खुशहाली के पथ पर अग्रसर रहे।

शिमला: एसजेवीएन लिमिटेड की अध्यक्षता में गठित नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), शिमला (कार्यालय-2) की छमाही बैठक का आयोजन एसजेवीएन लिमिटेड के परिसर में आज किया गया।
बैठक की अध्यक्षता एसजेवीएन के निदेशक (कार्मिक)अजय कुमार शर्मा ने की। बैठक में शिमला स्थित केंद्रीय सरकारी
कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग की समीक्षा की गई तथा भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में विचार–विमर्श किया गया।बैठक की अध्यक्षता कर रहे एसजेवीएन के निदेशक (कार्मिक), अजय कुमार शर्मा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सभी सदस्य कार्यालय अपने–अपने कार्यालय में सराहनीय कार्य कर रहे हैं और आगे भी इसी गति को बनाए रखते हुए अधिकतम कामकाज हिंदी में सम्पन्न करने का हर संभव प्रयास करें।
बैठक में अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने नराकास, शिमला (कार्यालय-2) की अध्यक्षता का कार्यभार भारतीय रिजर्व बैंक को सौंपा और उन्हें इसके लिए हार्दिक शुभकामनाएं भी दी।
बैठक में उपस्थित भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक, अनूप किशोर ने कहा कि एसजेवीएन लिमिटेड की अध्यक्षता में कार्यरत नराकास, शिमला (कार्यालय-2) वर्ष 2015 से अपने दायित्व का बखूबी निर्वहन कर रहा है और समय–समय पर नियमित रूप से बैठकों तथा अन्य कार्यक्रमों का आयोजन सफलतापूर्वक करता रहा है, जिसके लिए एसजेवीएन लिमिटेड बधाई का पात्र है। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय राजभाषा समिति द्वारा भी एसजेवीएन लिमिटेड की अध्यक्षता में गठित नराकास, शिमला (कार्यालय-2) की प्रशंसा की गई है।
इस अवसर पर निगम के विभागाध्यक्ष (मानव संसाधन), बलजीत सिंह सहित सदस्य –सचिव, नराकास-2, शिमला, आशीष पंत भी उपस्थित थे। समिति की बैठक में शिमला स्थित केंद्रीय सरकारी कार्यालयों, उपक्रमों तथा बैंकों से 54 वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

हिमाचल: प्रदेश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के प्रशिक्षुओं ने अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर विजिट के अंतर्गत कजाकिस्तान के अल्माटी में समाल वाटर बॉटलिंग प्लांट, राखात चॉकलेट फैक्ट्री और ग्रीन मार्केट की कार्य प्रणाली की जानकारी हासिल की।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर कार्यक्रम का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के आईटीआई प्रशिक्षुओं को वैश्विक औद्योगिक प्रणालियों, आधुनिक तकनीकों तथा अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति से परिचित करवाना है। इससे वे अपने तकनीकी कौशल को और अधिक सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ भविष्य में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि समाल वाटर बॉटलिंग प्लांट में प्रशिक्षुओं ने जल शुद्धिकरण, स्वचालित बोतल निर्माण, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण तथा खाद्य सुरक्षा मानकों की आधुनिक प्रक्रियाओं का अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षुओं के दल ने राखात चॉकलेट फैक्ट्री में चॉकलेट निर्माण, पैकेजिंग, गुणवत्ता प्रबंधन तथा बड़े पैमाने पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की कार्यप्रणाली भी देखी।
ग्रीन मार्केट के भ्रमण के दौरान प्रशिक्षुओं ने स्थानीय कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक खाद्य पदार्थों तथा बाजार प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन किया, जिससे उन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं उद्यमिता के विभिन्न आयामों की जानकारी प्राप्त हुई। प्रशिक्षुओं के दल ने मानव निर्मित झील का भी भ्रमण किया, जहां प्रशिक्षुओं ने शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन तथा सार्वजनिक पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित रखरखाव का अवलोकन किया।
प्रशिक्षुओं ने शिम्बुलाक माउंटेन रिजॉर्ट एवं केबल कार का भ्रमण भी किया। यहां ऑपरेशन मैनेजर ने प्रशिक्षुओं को केबल कार प्रणाली के संचालन, नियंत्रण प्रणाली, सुरक्षा मानकों, नियमित निरीक्षण, रखरखाव, आपदा प्रबंधन तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अपनाई जाने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी।
श्री धर्माणी ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय अध्ययन भ्रमण युवाओं में नवाचार, गुणवत्ता, अनुशासन, आत्मविश्वास और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा का उद्देश्य अनुभव आधारित शिक्षा पद्धति को बढ़ावा देना है। प्रशिक्षु शैक्षणिक संवाद और विविध विकास मॉडलों और सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में मिली लाभप्रद जानकारी का उपयोग अपनी भविष्य की योजनाओं में कर सकेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस भ्रमण से प्राप्त अनुभव प्रशिक्षुओं को भविष्य में बेहतर तकनीशियन, कुशल कार्यबल एवं सफल उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करेगा।
इस अन्तरराष्ट्रीय एक्सपोजर विजिट के दौरान उत्कृष्ठ शिक्षविद्ों के साथ शैक्षणिक संवाद आयोजित करवाए जा रहे हैं। ‘क्रॉस एण्ड क्लचरल कम्यूनिकेशन इन मेनेजमेंट इन विषय पर हायर स्कूल ऑफ मीडिया एंड इंटरकल्चरल कम्युनिकेशन, तुरान यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर आइतोल्किन अशिमोवा ने वैश्विक कार्यस्थलों में प्रभावी संवाद, सांस्कृतिक विविधता, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क तथा व्यावसायिक नैतिकता के महत्त्व पर प्रकाश डाला।
‘पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन गर्वनेंस एण्ड इंटरनेशनेलाईजेशन ऑफ हायर एजुकेशन इन सेंटरल एशिया विषय पर व्याख्यान के माध्यम से प्रो. अलीशेर कादिरोव ने कजाकिस्तान की उच्च शिक्षा प्रणाली में हुए सुधारों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा विदेशी विश्वविद्यालयों को कजाकिस्तान में परिसर स्थापित करने के लिए प्रदान की जा रही सुविधाओं की जानकारी दी।
अलमाटी टेकनोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सदिकोवा नरगिज़ा अलालदीनकिजी ने बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च इनोवशन एण्ड डॉक्टोरल स्टडीस इन कजाकिस्तान विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के साथ-साथ स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा, एआई, रोबोटिक्स, इंडस्ट्री 4.0, ग्रीन केमिस्ट्री, डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा सतत औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में कजाकिस्तान की उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी साझा की।

