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गौमांस घर में खाने की पैरवी करने वाले हिमंत बिस्वा सरमा का देव भूमि में भाजपा द्वारा स्वागत करना भाजपा की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है – कौशल मूंगटा

शिमल:  हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता कौशल मूंगटा ने आज शिमला स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा की ‘अराजकता हटाओ’ पदयात्रा और उसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की भागीदारी पर सवाल उठाए।
मूंगटा ने कहा कि भाजपा स्वयं को सनातन संस्कृति और गौ संरक्षण का सबसे बड़ा पैरोकार बताती है, लेकिन उसी पार्टी के नेता ऐसे बयान देने वाले असम के मुख्यमंत्री का देवभूमि हिमाचल में स्वागत कर रहे हैं। उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा के 8 अप्रैल 2026 के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि गौमांस खाने पर रोक नहीं लगा रहे हैं, लेकिन इसे घर के भीतर ही खाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि हिमाचल के भाजपा नेताओं को ऐसे व्यक्ति के साथ मंच साझा करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, जो गौमांस को घर में खाने की पैरवी करता है और फिर शिमला आकर हिंदुत्व की राजनीति करता है। भाजपा नेताओं को प्रदेश की जनता को बताना चाहिए कि उनके लिए गौ संरक्षण और धार्मिक आस्था के मुद्दे वास्तव में सिद्धांत हैं या केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित हैं।
मूंगटा ने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा हिंदुत्व और राम मंदिर के विषय पर भाषण देना तभी सार्थक होगा, जब वे अपने राजनीतिक आचरण और सार्वजनिक बयानों में भी समानता रखें। धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक मंचों पर इस्तेमाल करने के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों पर बात होनी चाहिए।
घुसपैठ के मुद्दे पर भाजपा को अपने कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए
मूंगटा ने कहा कि भाजपा नेता लगातार घुसपैठ का मुद्दा उठाते हैं, लेकिन उन्हें केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों का भी जवाब देना चाहिए। गृह मंत्रालय के 14 मार्च 2018 के राज्यसभा जवाब के अनुसार वर्ष 2013 में 5,234 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया था, जबकि भाजपा शासन के शुरुआती वर्षों में यह संख्या वर्ष 2015 में 474, 2016 में 308 और 2017 में केवल 51 रही।
उन्होंने कहा कि भाजपा को बताना चाहिए कि घुसपैठ रोकने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद इन आंकड़ों में इतनी गिरावट क्यों आई। वर्ष 2014 से केंद्र में भाजपा की सरकार है। यदि घुसपैठ का मुद्दा इतना गंभीर है, तो सरकार को अपने कार्यकाल की ठोस उपलब्धियां और कार्रवाई का विवरण भी जनता के सामने रखना चाहिए।
हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम पर बढ़ते कर्ज का भी जवाब दे भाजपा
मूंगटा ने कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा और भाजपा नेता दूसरे राज्यों की सरकारों पर सवाल उठाने से पहले असम में अपने शासन का वित्तीय हिसाब भी जनता के सामने रखें। उन्होंने कहा कि उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार असम की कुल बकाया देनदारियां वर्ष 2019-20 में लगभग 72,256 करोड़ रुपये थीं। वहीं 31 मार्च 2025 तक असम सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार कुल बकाया कर्ज लगभग 1,61,761 करोड़ रुपये पहुंच गया था। इसमें 18,582 करोड़ रुपये ब्याज मुक्त ऋण शामिल है और ब्याज वाले कर्ज की राशि 1,43,179 करोड़ रुपये बताई गई थी।
मूंगटा ने आगे कहा की यही हाल जयराम ठाकुर जी का था जिनके कार्यकाल में पेपर लीक कोरोना काल के घोटाले आम बात थी ।
मूंगटा ने सवाल उठाया कि भाजपा नेता दूसरे राज्यों को उपदेश देने से पहले असम की बढ़ती देनदारियों और ब्याज के बोझ पर भी जवाब दें,सुक्खू सरकार की तारीफ़ तो स्वयं इनके नेता शांता कुमार और वर्ल्ड बैंक करता है जो कि जयराम जी और अनुराग ठाकुर जी को हेमंता को बताने की आवश्यकता है ।
हिमाचल सरकार से इस्तीफा मांगने से पहले भाजपा अपने कार्यकाल का मूल्यांकन करे
मूंगटा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की निर्वाचित सरकार से इस्तीफे की मांग करने वाले भाजपा नेताओं को पहले ये पता करना चाहिए की 1 नवंबर की रैली में विरोध एस आई आर का हो रहा था न की ईवीएम का, भाजपा नेताओं को SIR वोट चोरी विधायक चोरी सरकार चोरी पर अपने राजनीतिक आचरण और केंद्र सरकार के कामकाज पर भी आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा किसी भी लोकतंत्र की बुनियाद है। एस आई आर के माध्यम से मतदाता सूचियों में नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर चिंता है। मतदाता सूची से किसी भी योग्य नागरिक का नाम बिना उचित प्रक्रिया और पर्याप्त सुनवाई के नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 अक्टूबर 2026 को स्वयं एस आई आर के बाद मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत मतदाता सूची में दर्ज 66 लाख लोगों और सरकारी योजनाओं के 55 लाख लाभार्थियों के नाम विधानसभा मतदाता सूची में नहीं हैं।
मूंगटा ने सवाल किया कि जब भाजपा के अपने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एस आई आर के बाद मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में नाम गायब होने का दावा कर रहे हैं, तो फिर विपक्ष द्वारा मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाने को भाजपा गलत कैसे ठहरा सकती है। क्या अब भाजपा अपने ही मुख्यमंत्री के सवालों का जवाब देगी।उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के दावों का आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए और चुनाव आयोग को हर पात्र नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रखने के लिए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रपत्र 6 में ऑनलाइन जोड़े गए अतिरिक्त विवरणों और उनके प्राधिकरण को लेकर भी सवाल उठे हैं। लोकतंत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सर्वोपरि होनी चाहिए।
मूंगटा ने पश्चिम बंगाल में एस आई आर के दौरान मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद 22 लाख से अधिक लोगों ने अपने नाम दोबारा शामिल करवाने के लिए अपील की।उन्होंने कहा कि यह स्थिति बताती है कि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान प्रभावित नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निपटारा कितना आवश्यक है। चुनाव आयोग के सितंबर 2026 में सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार लगभग 38.31 लाख अपीलें दायर हुई थीं, जिनमें उस समय करीब 1.26 लाख का ही निपटारा हुआ था। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और आम मतदाता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
मूंगटा ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी भी है। भाजपा को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने दावों, अपने शासनकाल और अपने नेताओं के बयानों पर भी जनता के सामने जवाब देना चाहिए।

शिमला: दीपावली व अन्य त्योहारों पर पटाखे जलाने के लिए समय निर्धारित

केवल हरित पटाखों की बिक्री व इस्तेमाल की अनुमति

शिमला: उपायुक्त एवं जिला दण्डाधिकारी शिमला अनुपम कश्यप ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तथा प्रदेश सरकार के पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के निर्देशों की अनुपालना करते हुए जिला शिमला में दीपावली, गुरुपर्व, क्रिसमस एवं नववर्ष के अवसर पर पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर आदेश जारी किए हैं।

जारी आदेशों के अनुसार जिला शिमला में केवल हरित पटाखों (ग्रीन क्रैकर्स) की बिक्री एवं इस्तेमाल की अनुमति होगी। निर्धारित समय के अतिरिक्त पटाखे जलाने पर प्रतिबंध रहेगा। यह आदेश वायु गुणवत्ता को नियंत्रित रखने तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से जारी किए गए हैं।

त्योहारों पर पटाखे जलाने का समय निर्धारित: आदेशों के अनुसार दीपावली के अवसर पर 8 नवंबर को रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक पटाखे जलाए जा सकेंगे। गुरुपर्व के अवसर पर 24 नवंबर को प्रातः 4 बजे से 5 बजे तथा रात्रि 9 बजे से 10 बजे तक पटाखे जलाने की अनुमति होगी।

इसी प्रकार क्रिसमस ईव पर 25 एवं 26 दिसंबर,  को रात्रि 11:55 बजे से 12:30 बजे तक तथा नववर्ष की पूर्व संध्या पर 31 दिसंबर और 1 जनवरी, 2027 को भी रात्रि 11:55 बजे से 12:30 बजे तक पटाखे जलाए जा सकेंगे।

नियमों की अवहेलना पर होगी कानूनी कार्रवाई: जिला दण्डाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित निर्देशों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने पुलिस अधीक्षक शिमला तथा जिला के सभी उपमंडलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन आदेशों की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली में इंडिया गठबंधन की महारैली में उमड़ा जनसैलाब; देश में भाजपा की उल्टी गिनती शुरू – विनय कुमार

शिमला : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा है कि वोट चोरी के खिलाफ दिल्ली में इंडिया गठबंधन की महारैली में उमड़ा जनसैलाब से साफ हो गया है कि देश में भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। देश अब किसी भी कीमत पर लोकतंत्र व संविधान से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करेगा।
विनय कुमार ने भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि भाजपा की पदयात्रा देश की समस्याओं व वोट चोरी से लोगों का ध्यान बांटने का असफल प्रयास था।
विनय कुमार ने कहा कि जो राजनैतिक दल लोगों की आस्थाओं से खेलता रहा है जिस पर राम मंदिर से दान की करोड़ो की चोरी के आरोप लगे हो वह कभी भी देश हितेषी व जनहितेषी नही हो सकता।
विनय कुमार ने कहा कि आज देश की चुनाव प्रक्रिया को भाजपा ने पूरी तरह अस्त व्यस्त कर दिया है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में खड़ी हो गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा देश में पदयात्रा के नाम पर ज्ञानेश कुमार को बचाने का प्रयास कर रही है। एसआईआर के नाम पर लोकतंत्र में 13 करोड़ भारतीय नागरिकों को घुसपैठिया बता कर उन्हें चुनाव मतदान से बेदखल करने का जो घोर अपराध भाजपा के साथ मिलकर ज्ञानेश कुमार ने किया है उसके लिए उन्हें कभी माफ नही किया जा सकता।

वैक्सीन को लेकर भी कांग्रेस पार्टी के नेता राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे : रणधीर शर्मा

दिल्ली में कांग्रेस की रैली के लिए सरकारी हेलीकॉप्टर और 200 एचआरटीसी बसों का दुरुपयोग – रणधीर शर्मा

शिमला: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के राजनीतिक आंदोलन के लिए हिमाचल प्रदेश की सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे आर्थिक संकट झेल रहे प्रदेश पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बार-बार सरकारी हेलीकॉप्टर से दिल्ली जाकर कांग्रेस के धरनों और रैलियों में भाग लेते हैं तथा उसी हेलीकॉप्टर से वापस लौटते हैं। उन्होंने दावा किया कि इन यात्राओं से सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस के राजनीतिक कार्यक्रमों का खर्च हिमाचल की जनता क्यों उठाए?

उन्होंने आरोप लगाया कि 1 नवंबर को दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की रैली के लिए हिमाचल प्रदेश से एचआरटीसी की लगभग 200 बसें भेजी गईं, जबकि इनमें से अनेक बसें आधी खाली थीं। इसके कारण पिछले तीन दिनों से लगभग 200 बस रूट प्रभावित रहे और यात्रियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भारी परेशानियां उठानी पड़ीं।

शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने इन बसों के इस्तेमाल के बदले एचआरटीसी को कोई किराया नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पहले से घाटे में चल रहे परिवहन निगम पर राजनीतिक कार्यक्रमों का खर्च डालना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने मांग की कि सरकार बताए कि कितनी बसें दिल्ली भेजी गईं, कितने रूट प्रभावित हुए, कुल किराया कितना बना और एचआरटीसी को कितना भुगतान प्राप्त हुआ।

रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि दिल्ली स्थित हिमाचल भवन और हिमाचल सदन को कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए कमरे बुक किए जा रहे हैं तथा आंदोलन संबंधी बैठकें इन सरकारी परिसरों में आयोजित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारी अतिथि गृह किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं हैं। सरकार को इनके उपयोग, बुकिंग और भुगतान का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।

शर्मा ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर एसआईआर, ईवीएम तथा कथित वोट चोरी के मुद्दों पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से संबंधित शिकायतें प्रमाणों सहित संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष रखी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान के अंतर्गत पदयात्राओं, प्रेस वार्ताओं, प्रबुद्धजन संगोष्ठियों तथा युवा संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जनता तक तथ्य पहुंचाएगी।

रणधीर शर्मा ने मांग की कि सरकारी हेलीकॉप्टर की यात्राओं, एचआरटीसी बसों तथा हिमाचल भवन और सदन के कथित राजनीतिक उपयोग की निष्पक्ष जांच हो।उन्होंने कहा, “कांग्रेस सरकार को सरकारी खजाने से खर्च किए गए एक-एक रुपये का हिसाब देना होगा। हिमाचल की जनता के पैसे का राजनीतिक दुरुपयोग भाजपा बर्दाश्त नहीं करेगी।”

एसजेवीएन सीएमडी भूपेंद्र गुप्ता ने जलविद्युत परियोजनाओं के संबंध में नेपाल सरकार के साथ कीं उच्चस्तरीय बैठकें

शिमला: एसजेवीएन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ताने नेपाल में एसजेवीएन की जलविद्युत परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तीव्रता लाने के लिए आज काठमांडू में उच्चस्तरीय बैठकें कीं।

भूपेंद्र गुप्ता ने वित्त मंत्री, डॉ. स्वर्णिम वाग्ले; ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री,  बिराज भक्त श्रेष्ठ तथा निवेश बोर्ड नेपाल (आईबीएन) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी, यांकी उक्याब से मुलाक़ात की। इन बैठकों में सचिव (वित्त), संयुक्त सचिव (आईबीएन) तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। भूपेंद्र गुप्ता के साथ श्री पार्थजीत डे, निदेशक (वित्त);  राजेश कुमार चंदेल, निदेशक (परियोजनाएं) एवं  पंकज चौधरी, सीईओ, एसएपीडीसी तथा एसएलपीडीसी उपस्थित रहे।

बैठकों के दौरान नेपाल में एसजेवीएन की 900 मेगावाट की अरुण-3 जलविद्युत परियोजना, इससे संबद्ध 217 किलोमीटर लंबी ट्रांमिशन लाइन और 669 मेगावाट की लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना के कार्यान्वयन में तीव्रता लाने पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

प्रमुख चर्चा विषयों में अरुण-3 जलविद्युत परियोजना के शेष कार्यों में तीव्रता लाना, ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण कार्यों को प्रभावित करने वाले भूमि संबंधी मुद्दों एवं वन स्वीकृति से जुड़ी बाधाओं का समाधान करना तथा लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना की अग्रिम प्री-कन्स्ट्रकशन गतिविधियों के लिए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करना शामिल रहा।

नेपाल सरकार एवं एसजेवीएन प्रबंधन ने परियोजना-विशिष्ट चुनौतियों के समाधान तथा इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित प्राधिकरणों के मध्य समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

एसजेवीएन, अपनी अधीनस्थ कंपनियों, एसएपीडीसी एवं एसएलपीडीसी के माध्यम से क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, सतत विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहित करने तथा आर्थिक विकास में योगदान देने के साथ जलविद्युत क्षेत्र में भारत-नेपाल सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

शिमला: इलिनोइस विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने CM सुक्खू से की भेंट

चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में शोध और नवाचार के आदान-प्रदान को मिलेगा बल-मुख्यमंत्री

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज यहां यूएसए के इलिनोइस विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. मनुराज सूद के नेतृत्व में भेंट की। इसके पश्चात प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोजित बैठक में प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं और शोध पर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में विश्व स्तरीय चिकित्सा शिक्षा के विश्व-स्तरीय मापदण्डों को अपना रही है ताकि राज्य में लोगों को बेहतरीन एवं आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। इसी के दृष्टिगत प्रदेश में सभी चिकित्सा महाविद्यालयों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है तथा शोध कार्यों को प्रोत्साहन देने के लिए नवोन्मेषी प्रयास किये जा रहे हैं।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को और सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों के छात्रों के लिए इलिनोइस विश्वविद्यालय के साथ स्टूडेंट एक्सचेंज कार्यक्रम आयोजित करेगी ताकि प्रदेश के छात्र वहां की नवीन तकनीक तथा शिक्षण व्यवस्था से रूबरू हो सकें। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षकों को भी इस विश्वविद्यालय में एक्सपोजर विजिट पर भेजा जाएगा। इसके अलावा संकाय सदस्यों के बीच विशेष प्रशिक्षण, शिक्षण, अनुसंधान एवं व्यावसायिक दक्षता विकास के लिए आदान-प्रदान कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा को अधिक गुणात्मक बनाने के लिए इस विश्वविद्यालय के साथ पूर्व में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। शैक्षणिक संसाधनों, शोध प्रकाशनों, शिक्षण सामग्री एवं तकनीकी ज्ञान का परस्पर आदान-प्रदान भी सुनिश्चित किया जाएगा।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में विश्व स्तरीय चिकित्सा तकनीक और उपकरणों को अपना रही है। चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र को और सुदृढ़ करने में इलिनोइस विश्वविद्यालय में प्रचलित श्रेष्ठ चिकित्सा परम्पराओं को अपनाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा हर संभव सहयोग और मदद प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं में किये जा रहे नवाचार की चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार के लिए चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में शोध, टेलीमेडिसन को सशक्त बनाने के साथ-साथ कैंसर उपचार की नवीन तकनीक तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्रोत्साहित करने की नितान्त आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि खाद्यान्न और पोषण व्यक्ति के स्वस्थ जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि लोगों को रसायन मुक्त खाद्यान्न उपलब्ध हों। इससे बीमारियों को रोकने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने पारम्पारिक रूप से प्रचलित खाद्यान्नों के अध्ययन, खान-पान की आदतों तथा स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता पर विशेष बल दिया।
मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि विश्वविद्यालय के साथ संयुक्त अनुसंधान गतिविधियों के आयोजन, संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रम तथा शैक्षणिक सामग्री के आदान-प्रदान से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र को संबल मिलेगा।
इलिनोइस विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने चिकित्सा शिक्षा के नए आयामों के बारे में विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर सचिव स्वास्थ्य आशीष सिंहमार, अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान, चमियाणा के प्रधानाचार्य एवं कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. बृज शर्मा और विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञ उपस्थित थे।

शिमला: CM सुक्खू ने अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना का किया दौरा

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला के चमियाना स्थित अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान का दौरा किया और विभिन्न विकास कार्यों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने संस्थान के अधिकारियों को विभिन्न दिशा-निर्देश दिए तथा विकास कार्यों मेें उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा।  सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने संस्थान के विभिन्न विभागों का भी दौरा किया और अस्पताल की व्यवस्थाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने उपचाराधीन मरीजों का कुशल-क्षेम जाना तथा परिचारकों से बातचीत की।

मधुमेह से पीड़ित कोविड संक्रमित मरीजों के लिए दिशा-निर्देश जारी

हिमाचल: डॉक्टरों की पेन-डाउन हड़ताल दो सप्ताह के लिए स्थगित, CM से बातचीत के बाद टकराव टला

शिमला: हिमाचल प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों की 2 नवंबर से होने वाली प्रस्तावित पेन-डाउन हड़ताल को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ हुई बैठक में मांगों पर सहमति बनने और फैकल्टी के तबादला आदेश रद्द होने के बाद राज्य चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालय शिक्षक संघ (SAMDCOT) ने यह निर्णय लिया। स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स (SAMDCOT) ने  सुखविंदर सिंह सुक्खू एवं हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

​SAMDCOT ने प्रेस विज्ञाप्ति के माध्यम से कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चिकित्सा शिक्षकों की वास्तविक चिंताओं को संवेदनशीलता से सुना और मेडिकल फैकल्टी कैडर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों का सकारात्मक समाधान निकाला। 
​SAMDCOT राज्य में उत्कृष्ट रोगी देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को निरंतर सुदृढ़ करने के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराता है। हालांकि एसोसिएशन सदैव जनसेवा के लिए समर्पित है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कुछ भ्रामक व अनुचित सलाहों के कारण लिए गए फैसलों के विरोध में लोकतांत्रिक असहमति आवश्यक हो गई थी। मुख्यमंत्री के त्वरित एवं व्यक्तिगत हस्तक्षेप से यह गतिरोध समाप्त हुआ और फैकल्टी सदस्यों का विश्वास पुनः बहाल हुआ।
​यह सहमति सचिवालय में शुक्रवार सायं 7:00 बजे आयोजित बैठक के दौरान बनी, जहाँ SAMDCOT अध्यक्ष डॉ. बलबीर एस. वर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य सचिव की उपस्थिति में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ विस्तृत चर्चा की।
​बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय एवं दिए गए आश्वासन:
​तबादला आदेशों को रद्द करना: मुख्यमंत्री ने उन सभी एसोसिएट प्रोफेसरों और प्रोफेसरों के तबादला आदेश तत्काल रद्द करने के निर्देश दिए, जिन्हें रिलीव नहीं किया गया था अथवा जिन्होंने न्यायालय का रुख नहीं किया था। इसके औपचारिक रद्दीकरण आदेश शनिवार को जारी कर दिए गए।
​फैकल्टी रोटेशन नीति: स्वीकृत एवं आवश्यक पदों के अनुरूप फैकल्टी के लिए 2 महीने के चक्र वाली एक पारदर्शी रोटेशन नीति लागू की जाएगी।
​राज्य के संस्थानों में सेवा शर्तों की एकरूपता: आईजीएमसी (IGMC), एम्स चमियाना (AIMSS Chamiana) और प्रदेश के अन्य सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एकसमान और न्यायसंगत प्रशासनिक नियम लागू होंगे:
​अवकाश (Vacations): सभी पदनामित सहायक प्रोफेसरों (Designated Assistant Professors) के लिए एकसमान ‘नो वैकेशन’ (no vacation) नीति।
​एनपीए (NPA): सभी नियमित सहायक प्रोफेसरों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) का लाभ।
​सीनियर रेजिडेंट नीति: सीनियर रेजिडेंट (SR) नीति में व्यापक सुधार, ताकि सभी मेडिकल कॉलेजों में एम्स चमियाना की तर्ज पर रिक्त पदों को सुचारू रूप से भरा जा सके।
​पीजी बॉन्ड नीति की समीक्षा: हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट-ग्रेजुएशन पूर्ण करने वाले चिकित्सकों को प्राथमिकता और करियर प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से पीजी बॉन्ड नीति की पुनर्परीक्षा की जाएगी।
​मुख्य संस्थागत आवश्यकताएं: एकीकृत प्रशासन एवं एनएमसी (NMC) मानकों की अनिवार्यता
​सरकार द्वारा उठाए गए सकारात्मक कदमों का स्वागत करते हुए, SAMDCOT ने दो प्रमुख संरचनात्मक मुद्दों को रेखांकित किया, जिन पर तत्काल नीतिगत निर्णय आवश्यक है:
​आईजीएमसी शिमला और एम्स चमियाना का एकीकृत प्रशासन: एम्स चमियाना प्रदेश के पहले मेडिकल कॉलेज, आईजीएमसी शिमला का ही सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक है। इसका निर्माण और वित्तीय स्वीकृति किसी स्वतंत्र अस्पताल के रूप में नहीं, बल्कि आईजीएमसी के सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक के तहत हुई थी। इसकी ऐतिहासिक प्रतिष्ठा, राष्ट्रीय रैंकिंग और वैधानिक वैधता बनाए रखने के लिए इसे मूल संस्थान (आईजीएमसी) के अधीन ही रहना चाहिए।
वर्तमान में दोनों केंद्रों के विकास में सबसे बड़ी बाधा प्रशासनिक दोहराव है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा एम्स चमियाना को एक स्वतंत्र शिक्षण संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है; यहाँ की सभी डीएम और एमसीएच (DM/MCh) सीटें मूल संस्थान आईजीएमसी के तहत ही संचालित होती हैं। वैधानिक और व्यावहारिक रूप से, जब तक कोई संस्थान स्वतंत्र मेडिकल कॉलेज न हो, वहाँ ‘प्रिंसिपल’ का पद नहीं हो सकता। इसके सुचारू संचालन के लिए एकल प्रशासनिक ढांचा—जैसे डायरेक्टर अथवा आईजीएमसी के समन्वय में कार्यरत वाइस-प्रिंसिपल—होना अनिवार्य है। दोहरे प्रशासनिक तंत्र से विकास कार्य बाधित ही होंगे।
​एनएमसी दिशानिर्देशों की अनिवार्यता पर स्पष्टता: एसोसिएशन ने कुछ प्रशासनिक हलकों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क पर कड़ा ऐतराज जताया कि “स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए एनएमसी के नियम अनिवार्य नहीं हैं।” यह धारणा पूरी तरह भ्रामक और जोखिम भरी है। यद्यपि स्वास्थ्य सेवाओं का प्रशासन राज्य सूची में आता है, किंतु उच्च एवं व्यावसायिक चिकित्सा शिक्षा के मानकों का निर्धारण भारतीय संविधान की संघ सूची (सूची-I) की प्रविष्टि 66 और समवर्ती सूची के तहत आता है। इसलिए एनएमसी के वैधानिक नियम पूरे देश में बाध्यकारी हैं। एनएमसी मानकों की अनदेखी करने से राज्य में एमबीबीएस, एमडी/एमएस और सुपरस्पेशियलिटी सीटों की मान्यता पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
​आंदोलन पर निर्णय: ​फैकल्टी तबादला आदेश रद्द होने और माननीय मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासनों के दृष्टिगत, SAMDCOT ने 2 से 4 नवंबर तक प्रस्तावित अपनी पेन-डाउन हड़ताल को दो सप्ताह के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है।
​यह दो सप्ताह का स्थगन प्रदेश सरकार को आवश्यक औपचारिक अधिसूचनाएं जारी करने और सहमत बिंदुओं को लागू करने हेतु पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से किया गया है। इस अवधि के उपरांत एसोसिएशन प्रगति की समीक्षा करेगी। 

हिमाचल: राज्य महिला आयोग बिलासपुर में 3 नवंबर को करेगा कोर्ट सुनवाई

4 नवंबर को स्टाॅकिंग और साइबर अपराध पर होगा जागरूकता कार्यक्रम

बिलासपुर:  हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग के एक प्रवक्ता ने बताया कि 3 नवंबर को बिलासपुर स्थित डीसी कोर्ट में कोर्ट सुनवाई आयोजित की जाएगी। इस दौरान बिलासपुर जिला और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाएगी। इस महिला आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्य सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगी। उन्होंने कहा कि अपनी शिकायत प्रस्तुत करने के इच्छुक लोग इस सुनवाई में भाग ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से 4 नवंबर को बिलासपुर स्थित जिला परिषद भवन में स्टॉकिंग और साइबर अपराध विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य इन विषयों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों से जागरूकता कार्यक्रम में भाग लेने का आह्वान किया है।

गुटकर-मण्डी हाईवे पर सड़क बंद करने की समय-सारणी में संशोधन

सोमवार से शनिवार सुबह 11 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक नहीं रहेगा सड़क बंद करने का प्रतिबंध
रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही रहेगा सड़क बंद
मण्डी: उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि गुटकर-मंडी हाईवे पर मंगवाई के समीप सड़क बंद करने की समय-सारणी में संशोधन किया गया है। यह संशोधित व्यवस्था 31 अक्तूबर से 9 नवंबर, 2026 तक प्रभावी रहेगी।
उन्होंने बताया कि पूर्व में जारी आदेश के अनुसार सोमवार से शनिवार तक सुबह 11 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक प्रस्तावित सड़क बंद रखने की व्यवस्था को वापस ले लिया गया है। अब इस अवधि में सड़क बंद नहीं रहेगी।
उन्होंने बताया कि पूर्व निर्धारित रात्रि 7 बजे से सुबह 6:30 बजे तक की सड़क बंद रखने की समय-सारणी में संशोधन करते हुए इसे अब रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक निर्धारित किया गया है।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि रविवार को भी सड़क बंद रखने का समय रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही रहेगा। रविवार को इसके अतिरिक्त किसी अन्य समय सड़क बंद करने की अनुमति नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि 24 अक्तूबर, 2026 को जारी मूल आदेश की अन्य सभी शर्तें यथावत रहेंगी। संशोधित आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा तथा निर्धारित अवधि तक प्रभावी रहेगा।