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मण्डी : 30 जनवरी को बैहना, गलियां बैहना, छछोल, रोपा सहित आसपास के क्षेत्रों में बिजली रहेगी बंद

मण्डी : विद्युत अनुभाग गुटकर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र बैहना, गलियां बैहना, छछोल, रोपा तथा इनके आसपास के क्षेत्रों में 30 जनवरी को प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। यह व्यवधान 11 के.वी. लाइन पर पुरानी तारों को नई तारों से बदलने तथा नए फोर पोल स्ट्रक्चर के निर्माण एवं स्थापना कार्य के चलते रहेगा। यदि मौसम खराब रहता है तो यह कार्य अगले दिन किया जाएगा। यह जानकारी देते हुए विद्युत उप-विभाग मंडल-2, मंडी के सहायक अभियंता ने उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील की है।

मण्डी: थाना प्लौन जल विद्युत परियोजना के प्रभावित क्षेत्रों में 23 से 28 फरवरी को जन सुनवाई

पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन योजना के प्रारूप पर आमंत्रित किए जाएंगे सुझाव एवं आपत्तियां

मण्डी: जिला मंडी में व्यास नदी पर हिमाचल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित थाना प्लौन जल विद्युत परियोजना (191 मेगावाट) के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन योजना के प्रारूप पर जन सुनवाई का आयोजन 23 फरवरी से 28 फरवरी तक किया जाएगा। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एवं प्रशासक, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन, थाना प्लौन जल विद्युत परियोजना डॉ मदन कुमार ने बताया कि जन सुनवाई बैठकों में परियोजना प्रभावित परिवारों और व्यक्तियों से योजना के संबंध में सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।

उन्होंने बताया कि भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 16 की उप-धारा 1, 2 एवं 3 के अंतर्गत पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन योजना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है तथा इसे संबंधित उपमंडल अधिकारियों, विभागीय कार्यालयों और पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार हेतु उपलब्ध करवा दिया गया है।

डॉ मदन कुमार ने बताया कि कोटली उप-मंडल में 23 फरवरी को प्रातः 11 बजे महान मेला ग्राउंड में मोहाल महान, कोट कून और द्वाहन तथा 26 फरवरी को प्रातः 11 बजे डोलरा बल्ह में सदोह, खड़कल्याणा और जंडरोला मोहालों के लिए जन सुनवाई आयोजित की जाएगी। जोगिन्दरनगर उप-मंडल में 25 फरवरी को प्रातः 11 बजे बनारू अब्बल में बनारू अब्बल, बनारू डोम एवं बनोगी मोहालों की तथा 27 फरवरी को प्रातः 11 बजे चड़ोंझ में मकरीड़ी, रोपडू, बल्ह, चड़ोंझ एवं बनवार मोहालों के लिए जन सुनवाई होगी।

इसी प्रकार पधर उपमंडल में 24 फरवरी को प्रातः 11 बजे बाड़ी धार में बड़ा गांव, बेवला, बाह, भटवाड़ी एवं झनाड़ मोहालों की तथा सदर उप-मंडल में 28 फरवरी को प्रातः 11 बजे ग्राम पंचायत मैगल में मथनेवाल और मैगल मोहालों के लिए जन सुनवाई निर्धारित की गई है।

उन्होंने परियोजना से प्रभावित सभी परिवारों एवं व्यक्तियों से आग्रह किया है कि वे निर्धारित तिथि, समय एवं स्थल पर उपस्थित होकर पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन योजना के प्रारूप पर अपने सुझाव एवं आपत्तियां प्रस्तुत करें, ताकि योजना को अंतिम रूप देने से पूर्व उन्हें सम्मिलित किया जा सके।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष पद के लिए आवेदन आमंत्रित

ऊना: जिला कार्यक्रम अधिकारी ऊना नरेंद्र कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में अध्यक्ष पद को भरने के लिए पात्र अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि इच्छुक उम्मीदवार इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 3 फरवरी 2026, सायं 5 बजे निर्धारित की गई है।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि इससे पूर्व में 18 जुलाई 2023 एवं 5 अगस्त 2025 को जारी विज्ञापनों के तहत आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को पुनः आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि अध्यक्ष पद से संबंधित पात्रता मापदंड, नियम एवं अन्य विवरण महिला एवं बाल विकास विभाग की आधिकारिक वेबसाइट himachal.nic.in/wcd पर उपलब्ध हैं।

नरेंद्र कुमार ने जिले के पात्र एवं इच्छुक उम्मीदवारों से निर्धारित तिथि के भीतर आवेदन करने का आग्रह किया है।

कुल्लू,: 29 जनवरी को बंद रहेंगे मनाली उपमंडल में शिक्षण संस्थान

कुल्लू: उपायुक्त कुल्लू एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के अध्यक्ष तोरुल एस. रवीश, ने मनाली उपमंडल में प्रतिकूल मौसम , सड़को के अवरुद्ध होने और भूस्खलन की स्थिति के मद्देनजर छात्रों की सुरक्षा को देखते मनाली उपमंडल के शिक्षण संस्थानों को गुरुवार को बंद रखने के आदेश जारी किया है।

पिछले 48 घंटों में मनाली उपमंडल में वर्षा और बर्फबारी के कारण विभिन्न क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क अवरोध की घटनाएँ हुई हैं। उप-मंडलीय अधिकारी (सिविल), मनाली की रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि अवरुद्ध सड़क संपर्क छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।

इस आदेश के तहत मनाली उपमंडल के सभी शैक्षणिक संस्थान – स्कूल, DIET, आंगनवाड़ी केंद्र, कॉलेज, ITI, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेज (सरकारी एवं निजी) – 29 जनवरी 2026 को छात्रों के लिए बंद रहेंगे।

सभी संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिए गए हैं कि इस आदेश की व्यापक रूप से सूचना सुनिश्चित करें।

जयराम ठाकुर बोले- विपक्षी विधायकों की प्राथमिकता को सरकार नहीं दे रही तरजीह

शिमला : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला से जारी बयान में कहा कि सरकार के 3 साल का कार्यकाल पूरा हो गया लेकिन भारतीय जनता पार्टी के विधायकों द्वारा हर वर्ष अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए दी गई विधायक प्राथमिकता को सरकार बिल्कुल भी प्राथमिकता नहीं दे रही है। तीन-तीन सालों से जो प्राथमिकता विधायकों द्वारा दी जा रही है सरकार उन पर कोई भी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है। न तो सरकार उनके डीपीआर बनवा रही है न उन्हें वित्तीय स्वीकृतियों के लिए अन्य संबंधित विभागों तक भेज रही है। इस सरकार में  विधायक प्राथमिकता के काम अभी फाइलों में अटके हुए हैं। सरकार द्वारा विधायक प्राथमिकता में भी जमकर पक्षपात किया जा रहा है और विपक्ष के विधायकों के कामों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है उनको वित्तीय स्वीकृति नहीं दी जा रही है। जिन परियोजनाओं में बजट आ गया है डीपीआर स्वीकृत हो गई है फॉरेस्ट क्लीयरेंस से भी मिल चुकी है उसे भी न करने के बहाने तलाशे जा रहे हैं। इसके बाद भी हर साल विधायक प्राथमिकता की बैठक का आयोजन सरकार द्वारा किया जाता है। जब सरकार को विधायक प्राथमिकता को गंभीरता से लेना ही नहीं है तो फिर बार-बार विधायक प्राथमिकता बैठक का नाटक करने का क्या औचित्य है? अगर मुख्यमंत्री और सरकार का यही रवैया रहा तो आगामी विधायक प्राथमिकता बैठक में भारतीय जनता पार्टी के विधायक क्यों ही जाएंगे? सरकार अपनी दलगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से विपक्ष को विधायक प्राथमिकता बैठक के बहिष्कार के लिए बाध्य कर रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि यह प्रदेश के इतिहास में पहली बार है जब विधायकों की विधायक निधि भी रोक दी गई है। विधायकों की ऐच्छिक निधि भी रोक दी गई है। सरकार के द्वारा किए जाने वाले सारे विकास कार्य पहले से ही बंद पड़े हैं। प्रदेश आपदा के दौर से गुजर रहा है। पेयजल योजनाएं  बंद  पड़ी है। पुल बहुत सी जगह टूटे पड़े हैं जिन्हें सरकार द्वारा दुरुस्त कराया जाना चाहिए लेकिन नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में लोगों के लिए विधायक निधि ही एकमात्र सहारा होती है जिसकी मदद से आवश्यकता के आधार पर विकास कार्य करवा कर लोगों को राहत दी जा सकती है लेकिन सरकार द्वारा उस पर भी रोक लगाई गई है जिससे विधायकों के हाथ भी बंध गए हैं। सरकार की तरफ से पहले ही उपेक्षा झेल रहे भाजपा विधायकों के पास अपने विधानसभा क्षेत्र में विकास के लिए कोई विकल्प बचा ही नहीं है। इसी तरह से सुक्खू सरकार ने ऐच्छिक निधि रोककर प्रदेश के जरूरतमंद गरीब लोगों की मदद करने का रास्ता भी रोक रही है। अपने विधानसभा क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों के लिए ऐच्छिक निधि एक वरदान की तरह होती है। जिससे विधायक जरूरतमंद लोगों की मदद कर पाते हैं। अब वह रास्ता भी भाजपा विधायकों के लिए बंद है। इस सरकार की दलगत पक्षपात पूर्ण और प्रतिशोध की राजनीति की कीमत अब प्रदेश के लोगों को चुकानी पड़ रही है जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। 
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री से वह विनम्रता पूर्वक कहना चाहते हैं कि सरकार के दिन बहुत कम बचे हैं इसलिए वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करें और विधायकों की विधायक निधि और ऐच्छिक निधि को तत्काल प्रभाव से जारी करें। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के विधायकों द्वारा विधायक प्राथमिकता के माध्यम से दिए गए कार्यों को गंभीरता से पूरा करने का प्रयास करें। विधायक प्राथमिकता की डीपीआर, बजट स्वीकृति सुनिश्चित करें। अगर सरकार पूर्व की विधायक प्राथमिकताओं को गंभीरता से नहीं लेती तो भारतीय जनता पार्टी के पास इस बैठक के बहिष्कार के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। 
 *पालमपुर के रीक्षित समेत भारतीय बंधकों की रिहाई पर दी बधाई और प्रधानमंत्री का जाताया आभार*

जयराम ठाकुर ने अमरीकी कोस्ट गार्ड द्वारा बंधक बनाए गए रूसी तेल टैंकर मैरिनेरा (बेला –1) के पालमपुर के रीक्षित समेत तीनों  क्रू मेंबर की रिहाई पर प्रदेश वासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर का आभार जताते हुए कहा कि पिछले हफ्ते रीक्षित  के पालमपुर स्थित घर जाकर उनके माता पिता समेत अन्य परिजनों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया था और पूरे प्रकरण को प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय से साझा कर सभी के अति शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने का निवेदन किया था। रीक्षित चौहान की रिहाई उनके परिजनों समेत पूरे देश के लिए बेहद सुखद है।

 *महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन पर जताया शोक*

जयराम ठाकुर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अजीत पवार तथा उनके साथ विमान में सवार अन्य लोगों की दुखद मृत्यु पर गहरा शोक प्रकट किया।  उन्होंने कहा कि यह घटना अत्यंत दुःखद, पीड़ादायक और हृदय विदारक है। इस दुःखद घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएँ शोक संतप्त परिजनों एवं उनके सभी प्रशंसकों के साथ हैं। उन्होंने प्रभु से प्रार्थना की है कि दिवंगत पुण्यात्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवारों को इस अथाह दुःख को सहन करने की शक्ति एवं धैर्य प्रदान करें।

“भाजपा ने किया संघर्ष, छैला–नेरीपुल–यशवंतनगर–कुमारहट्टी सड़क निर्माण को लेकर केंद्र ने लिया त्वरित संज्ञान” – सुरेश कश्यप

“सांसद सुरेश कश्यप के पत्राचार के बाद गडकरी मंत्रालय ने प्रस्ताव राज्य सरकार को प्राथमिकता के आधार पर भेजा”

शिमला: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के शिमला संसदीय क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए भाजपा लगातार संघर्षरत रही है और जनहित की आवाज़ को केंद्र सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रयासों और लगातार पत्राचार का ही परिणाम है कि छैला–नेरीपुल–यशवंतनगर–कुमारहट्टी सड़क परियोजना को लेकर केंद्रीय स्तर पर गंभीरता से संज्ञान लिया गया है।

सांसद सुरेश कश्यप ने बताया कि उन्होंने दिनांक 22 अगस्त 2025 को  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  को पत्र लिखकर अवगत करवाया था कि शिमला संसदीय क्षेत्र के सोलन, सिरमौर और शिमला जिलों में सेब, फूल एवं अन्य नकदी फसलों के उत्पादन के लिए यह सड़क मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। पत्र में उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया था कि छैला, नेरीपुल, औछघाट, सतौननगर, बखाला चौकी और कुमारहट्टी जैसे क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह मार्ग बागवानों तथा स्थानीय जनता की जीवनरेखा है और इसे राष्ट्रीय राजमार्ग अथवा डबल लेन सड़क के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि इसके पश्चात उन्होंने दिनांक 19 दिसंबर 2025 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी को भी विस्तृत पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने आग्रह किया कि CRIF योजना के अंतर्गत 36 किलोमीटर लंबाई वाले इस मार्ग को पूर्ण निर्माण हेतु प्राथमिकता दी जाए। सांसद ने पत्र में स्पष्ट किया कि यह सड़क किसानों और बागवानों को दिल्ली सहित देश की प्रमुख मंडियों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराएगी और क्षेत्रीय विकास को गति देगी।

सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि उनके द्वारा भेजे गए पत्रों पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने त्वरित कार्यवाही करते हुए दिनांक 28 जुलाई 2025 के पत्र में उल्लेख किया कि यह प्रस्ताव Central Roads and Infrastructure Fund (CRIF) के अंतर्गत राज्य सरकार को प्राथमिकता के आधार पर विचार हेतु अग्रेषित किया गया है। मंत्री ने कहा कि CRIF अधिनियम 2000 के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य सरकार परियोजनाओं की सूची प्राथमिकता के आधार पर केंद्र को भेजती है और इसी प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारियों को प्रस्ताव राज्य को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दिनांक 10 नवंबर 2025 को पुनः पत्र लिखकर सांसद सुरेश कश्यप को आश्वस्त किया कि मंत्रालय नए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की नीति के तहत यातायात घनत्व, सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं और PM गति शक्ति योजना के अंतर्गत इस प्रकार की महत्वपूर्ण सड़कों को प्राथमिकता दे रहा है तथा प्रस्तावित मार्ग पर आवश्यक दिशा-निर्देश अधिकारियों को जारी किए गए हैं।

सुरेश कश्यप ने यह भी स्मरण करवाया कि इससे पूर्व वर्ष 2015 में भी इसी मार्ग के सुधार एवं चौड़ीकरण को लेकर केंद्रीय मंत्री द्वारा सकारात्मक पत्राचार किया गया था, जिससे यह सिद्ध होता है कि भाजपा सरकार हिमाचल प्रदेश की सड़क अधोसंरचना को लेकर लगातार संवेदनशील और प्रतिबद्ध रही है।

उन्होंने कहा कि यह मांग नई नहीं है, बल्कि सांसद सुरेश कश्यप जब वर्ष 2015 में पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे, तब भी उन्होंने इस महत्वपूर्ण सड़क मार्ग के निर्माण एवं उन्नयन की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया था। उस समय से लेकर आज तक वे निरंतर जनता की इस बहुप्रतीक्षित मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से इसे रखते आए हैं।

उन्होंने कहा कि सड़कें केवल परिवहन का माध्यम नहीं बल्कि पहाड़ी प्रदेश के विकास की रीढ़ हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय राजमार्गों, सुरंगों, पुलों और आधुनिक सड़क नेटवर्क की कई सौगातें मिली हैं।

सांसद सुरेश कश्यप ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को प्राथमिकता प्रदान करे ताकि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ हो और क्षेत्र की जनता, बागवानों, किसानों एवं पर्यटकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

उन्होंने कहा कि भाजपा हिमाचल की जनता के अधिकारों और विकास के लिए निरंतर संघर्ष करती रही है और आगे भी केंद्र से अधिक से अधिक परियोजनाएं लाकर प्रदेश के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करेगी।

दिल्ली – शिमला -धर्मशाला उड़ानों के सुचारू संचालन हेतु राज्य सरकार हर साल देगी 31 करोड़

शिमला: राज्य में हवाई सेवाओं को मजबूत करने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने दिल्लीदृशिमला और शिमला-धर्मशाला मार्गों पर नियमित हवाई सेवाओं का संचालन करने का निर्णय लिया है। यह उड़ानें सप्ताह भर संचालित होंगी और इनका निरंतर संचालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा हर साल 31 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है और पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि इससे बेहतर हवाई सेवाओं पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य के समग्र आर्थिक विकास में सहायता मिलेगी। नियमित हवाई सेवाओं के संचालन से यात्रा का समय घटेगा और पर्यटकों, व्यापारियों तथा आम जनता के लिए सुगम आवागमन का साधन सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा कि शिमला और धर्मशाला के लिए विश्वसनीय हवाई सेवाओं से प्रशासनिक कार्यप्रणाली को मजबूती मिलेगी तथा त्वरित मेडिकल इवैक्यूएशन में मददगार साबित होने के अलावा आपात स्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी। हवाई सेवाओं के निरंतर संचालन के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने मेें प्रदेश सरकार का यह कदम रणनीतिक साबित होगा। सब्सिडी आधारित क्षेत्रीय हवाई संपर्क से दैनिक यात्रियों, व्यापारिक यात्रियों और पर्यटकों को समान रूप से लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य में तीन संचालित हवाई अड्डों के अलावा कई हेलीपैड मौजूद हैं और प्रत्येक जिला मुख्यालय तथा अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। हाल ही में संजौली हेलीपोर्ट से चंडीगढ़ और रिकांगपियो के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की गई हैं, जिससे पर्यटक राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सुगमता से पहुंच सकेंगे। इसके अतिरिक्त संजौली-रामपुर-रिकांगपियो तथा संजौली-मनाली (सासे हेलीपैड) पर भी शीघ्र हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी। इन हवाई मार्गों के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को मानक संचालन प्रक्रिया की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।

देश में प्रथम स्थान पर हिमाचल पुलिस; आपातकालीन सेवा के रिस्पॉन्स टाइम में पहला स्थान

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा पिछले 24 घंटों के दौरान आपातकालीन सेवा (ईआरएसएस-112) के अंतर्गत औसत रिस्पॉन्स टाइम में पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह असाधारण सफलता प्रदेश भर में तैनात ईआरएसएस-112 टीमों तथा पुलिस थानों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पेशेवर दक्षता, निष्ठा और उत्कृष्ट टीमवर्क का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने कहा कि अत्यंत चुनौतीपूर्ण पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों तथा सीमित संसाधनों के बावजूद प्रदेश पुलिस ने नागरिकों को सबसे तेज आपातकालीन सहायता प्रदान करके देश में नाम कमाया है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने लोगों को सरकार द्वारा त्वरित सेवाएं उपलब्ध करवाने की वचनबद्धता को दोहराते हुए कहा कि भविष्य में भी ‘स्पीड, सेंसिटिविटी और सर्विस’ प्रदेश पुलिस का मार्गदर्शक मंत्र बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग नहीं है, बल्कि इस संकल्प की पुनः पुष्टि है कि जब भी हिमाचल प्रदेश का कोई नागरिक सहायता के लिए पुकारेगा, प्रदेश पुलिस देश में सबसे पहले उसके पास पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि यह सफलता मूलतः एक संवेदनशील, उत्तरदायी और पेशेवर पुलिस बल की दूरदर्शी सोच का प्रतिफल है।
पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने कहा कि यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि अनुशासित कार्यप्रणाली, तकनीक का बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग तथा सशक्त फील्ड-स्तरीय पर्यवेक्षण के माध्यम से सबसे कठिन भौगोलिक चुनौतियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व व मार्गदर्शन एवं अटूट सहयोग से संभव हो पाई है।

सोलन: जलवायु परिवर्तन एवं सीबीआरएन जोखिम न्यूनीकरण में बहु-क्षेत्रीय समन्वय अहम – विशेषज्ञ

हिमाचल:  प्रदेश में जलवायु परिवर्तन एवं रासायनिक, जैविक, विकिरणीय एवं परमाणु (सीबीआरएन) जोखिमों के न्यूनीकरण हेतु बहु-क्षेत्रीय कार्रवाई को प्रभावी रूप से लागू करने पर केंद्रित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ आज डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), सोलन के सहयोग से किया जा रहा है।

इस कार्यशाला का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाओं एवं उभरते सीबीआरएन जोखिमों से निपटने के लिए संस्थागत तैयारी को सुदृढ़ करना तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना है। कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, प्रशासकों, विषय विशेषज्ञों, स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों, शिक्षाविदों एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाओं एवं सीबीआरएन जोखिमों पर गहन मंथन किया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, सोलन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं अतिरिक्त उपायुक्त राहुल जैन ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन एवं सीबीआरएन जोखिमों से निपटने की वर्तमान प्रणाली में मौजूद खामियों की पहचान करना तथा विशेषज्ञों के माध्यम से इनके व्यावहारिक समाधान तलाशना है। उन्होंने कहा कि सोलन जिला बीते वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुआ है तथा यहां एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र भी है, जिससे यह जिला विभिन्न प्रकार के जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनता है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला के दौरान किए गए विमर्श के आधार पर एक श्वेत पत्र तैयार किया जाएगा, जो प्रभावी एवं संरचित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन की तैयारी में पिछले वर्षों में सुधार हुआ है, फिर भी बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है। समाज में व्यवहारिक बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया तथा विशेषज्ञों से व्यावहारिक और लागू किए जा सकने वाले सुझाव देने का आग्रह किया।

अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य ने नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों की वहन क्षमता (कैरीइंग कैपेसिटी) के अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया तथा विकास एवं आपदा जोखिम प्रबंधन के बीच संतुलित और सतत दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोलन जैसे जिले अत्यधिक वर्षा, भूस्खलन, वनों में आग तथा जनस्वास्थ्य आपात स्थितियों जैसी जलवायु-संबंधी आपदाओं के प्रति संवेदनशील हैं। इस परिप्रेक्ष्य में कार्यशाला का उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान, नीति ढांचे एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों को जिला एवं स्थानीय स्तर पर क्रियान्वित योजनाओं में बदलना है।

इससे पूर्व पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. भारद्वाज ने कहा कि यह कार्यशाला ऐसे महत्वपूर्ण समय में आयोजित की जा रही है, जब प्रदेश ने हाल के वर्षों में कई आपदाओं का सामना किया है, जिससे जान-माल की भारी क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श से भविष्य की आपदाओं से निपटने हेतु शमन एवं तैयारी उपायों को और सुदृढ़ किया जाएगा।

कार्यशाला में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, राज्य स्वास्थ्य विभाग, टाटा ट्रस्ट्स, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क), मुंबई, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड रिसर्च, नई दिल्ली, कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, केंद्रीय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, तथा डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

कार्यशाला के दौरान तकनीकी सत्र, विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल चर्चाएं तथा हितधारकों के साथ संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, आपदा जोखिम शासन, सीबीआरएन तैयारी तथा समुदाय-आधारित जोखिम न्यूनीकरण जैसे विषयों पर चर्चा होगी। कार्यशाला से जागरूकता बढ़ने, संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु व्यावहारिक सिफारिशें सामने आने की अपेक्षा है।