
ऊना: ऊना जिला के पशु चिकित्सा संस्थानों में मल्टी टास्क वर्कर (पशु मित्र) के 36 रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया के तहत शारीरिक परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। यह शारीरिक परीक्षाएं जिला के सभी उपमंडलों में 17 से 19 फरवरी तक आयोजित की जाएंगी। यह जानकारी पशुपालन विभाग ऊना के उप निदेशक वीरेंद्र सिंह पटियाल ने दी।
उप निदेशक ने बताया कि उपमंडल गगरेट के अंतर्गत पशु चिकित्सालय बढ़ेड़ा राजपूतां, सिविल वेटनरी डिस्पेंसरी पांबड़ा, वेटनरी डिस्पेंसरी नंगल जरियालां तथा अंबोटा के लिए पशु मित्र भर्ती की शारीरिक परीक्षा 17 फरवरी को सुबह 9 बजे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अंबोटा के मैदान में आयोजित की जाएगी।
उपमंडल अंब के अंतर्गत पशु चिकित्सालय रिपोह मिसरां, सलोई तथा वेटनरी डिस्पेंसरी भरवाईं के लिए शारीरिक परीक्षा 18 फरवरी को सुबह 9 बजे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अंब के मैदान में होगी।
उपमंडल बंगाणा के अंतर्गत उपविभागीय पशु चिकित्सालय बंगाणा, पशु चिकित्सालय लठियाणी, थानाकलां, रायपुर मैदान, चौकीमिनार, वेटनरी डिस्पेंसरी तलमेहड़ा, छपरोह कलां तथा वीसीपी मंदली के लिए शारीरिक परीक्षा 18 फरवरी को सुबह 10 बजे बंगाणा के चिली (डूमखर) गौशाला के समीप मैदान में आयोजित की जाएगी।
उपमंडल हरोली के अंतर्गत वीसीपी ललड़ी, पशु चिकित्सालय भदसाली, वीसीपी पंडोगा, पशु चिकित्सालय बीटन, वेटनरी डिस्पेंसरी ललड़ी, सलोह तथा छोटा दौलतपुर के लिए शारीरिक परीक्षा 18 फरवरी को सुबह 11 बजे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हरोली के मैदान में होगी।
इसके अतिरिक्त उपमंडल ऊना के अंतर्गत मुर्राह ब्रीडिंग फार्म बरनोह, जोनल पशु चिकित्सालय बरनोह, जीपीएफ जलग्रां, पूल स्टोर ऊना, पशु चिकित्सालय बसदेहडा, मजारा तथा वेटनरी डिस्पेंसरी देहलां अपर के लिए शारीरिक परीक्षा 19 फरवरी को सुबह 11 बजे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (छात्र) ऊना के मैदान में आयोजित की जाएगी।
श्री पटियाल ने बताया कि शारीरिक परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को एक मिनट के भीतर 25 किलोग्राम वजन को 100 मीटर तक ले जाना अनिवार्य होगा। शारीरिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की मेरिट सूची पशु मित्र भर्ती समिति ेद्वारा तैयार की जाएगी। प्रत्येक संस्थान के लिए मेरिट के आधार पर 5 अभ्यर्थियों का पैनल तैयार किया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति से पूर्व काउंसलिंग के दौरान मूल दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा, जिसकी तिथि अलग से अधिसूचित की जाएगी।
उन्होंने सभी आवेदकों से आग्रह किया कि वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शारीरिक परीक्षा में समय पर उपस्थित होना सुनिश्चित करें।

ऊना: ऊना जिले के अम्ब उपमण्डल के होनहार पैरा एथलीट सुनील कुमार ने दुबई में आयोजित 17वीं फज़ा अंतर्राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो रजत पदक जीतकर प्रदेश और देश का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
जैवलिन थ्रो स्पर्धा में 32.47 मीटर भाला फेंककर उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया, जबकि शॉटपुट प्रतियोगिता में 8.04 मीटर गोला फेंककर दूसरा रजत पदक हासिल किया।
उल्लेखनीय है कि सुनील कुमार इससे पूर्व 23वीं राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स गेम्स 2025 में भी जैवलिन थ्रो स्पर्धा में रजत पदक जीत चुके हैं।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बधाई संदेश में कहा कि सुनील कुमार की यह उपलब्धि हिमाचल की खेल प्रतिभा का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना अत्यंत सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सुनील भविष्य में भी देश के लिए पदक जीतते रहेंगे । उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग प्रदान करने को प्रतिबद्ध है।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने अपने संदेश में कहा कि सुनील कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो रजत पदक जीतकर इतिहास रचा है। यह उपलब्धि न केवल ऊना बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हिमाचल का मान बढ़ाते हुए सुनील कुमार ने सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
वहीं, श्री चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन सिंह बबलू और उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने भी सुनील कुमार और उनके परिवार को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि सभी के लिए ऐतिहासिक क्षण है और युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

हिमाचल: प्रदेश पशुपालन विभाग के प्रवक्ता ने आज यहां स्पष्ट किया कि पशु मित्रों के चयन के लिए आयोजित की जा रही शारीरिक परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया तथा कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार भ्रामक और तथ्यों से परे हैं। उन्होंने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पशु मित्र नीति, 2025 के अनुसार की जा रही है, जिसे 14 अगस्त 2025 को अधिसूचित किया गया था।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह शारीरिक परीक्षा केवल एक सामान्य कार्यात्मक फिटनेस जांच है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयनित अभ्यर्थी पशु चिकित्सा संस्थानों और पशुपालन फार्मों में अपने आवश्यक दायित्व सुरक्षित रूप से निभा सकें। इन कार्यों में पशुओं को संभालना, बीमार भेड़ या बकरी (लगभग 25 किलोग्राम) को उठाना तथा चारे की बोरियां ले जाना शामिल है।
उन्होंने कहा कि यह कोई सहनशक्ति की प्रतियोगिता नहीं है और न ही इसका उद्देश्य किसी भी अभ्यर्थी, विशेषकर महिलाओं, का अपमान या भेदभाव करना है। यह परीक्षा सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू की गई है और इसका एकमात्र उद्देश्य पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रवक्ता ने बताया कि 5,000 रुपये प्रतिमाह का मानदेय चार घंटे प्रतिदिन के अंशकालिक बहुउद्देशीय-कार्यों के लिए निर्धारित है। हालांकि कार्य अंशकालिक है, लेकिन पशुपालन से जुड़े कार्यों में शारीरिक श्रम शामिल होता है, इसलिए न्यूनतम शारीरिक क्षमता आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शारीरिक परीक्षा उप-मंडलाधिकारी (सिविल) की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा कराई जा रही है तथा इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। अभ्यर्थी निर्धारित वजन को अपने अनुसार किसी भी सुविधाजनक तरीके से उठा सकते हैं, सिर पर उठाना अनिवार्य नहीं है। यदि निर्धारित प्रक्रिया से कोई परिवर्तन पाया जाता है तो उसकी जांच की जाएगी।
अब तक 315 अभ्यर्थी शारीरिक परीक्षा में शामिल हो चुके हैं और किसी भी प्रकार की चोट की कोई सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाग सभी अभ्यर्थियों के साथ न्याय, सुरक्षा और सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जनता से आग्रह है कि वे भ्रामक या चयनित प्रस्तुतियों के बजाय अधिसूचित नीति पर भरोसा करें।

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के अंतर्गत आने वाले कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), किन्नौर को फार्म एंड फूड द्वारा आयोजित किसान सम्मान समारोह के दौरान प्रतिष्ठित सर्वश्रेष्ठ केवीके पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
यह पुरस्कार समारोह किसान चैंबर, मोहाली में आयोजित किया गया, जिसमें कृषि वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, प्रगतिशील किसानों तथा पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। केवीके किन्नौर को जिले में प्राकृतिक खेती पद्धतियों के प्रचार-प्रसार तथा बड़े स्तर पर अपनाने में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
डॉ. प्रमोद शर्मा, सह-निदेशक (अनुसंधान एवं प्रसार) एवं प्रमुख, केवीके किन्नौर ने इस उपलब्धि का श्रेय क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप किसानों से सतत जमीनी स्तर पर संवाद तथा किसान-केंद्रित प्रसार गतिविधियों को दिया। उन्होंने फार्म एंड फूड का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थान के सतत प्रयासों को मान्यता प्रदान करना सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर केवीके किन्नौर के कीट विज्ञानी डॉ. बुधि राम को किसान-केंद्रित इको-हाइव तकनीक के माध्यम से देशी मधुमक्खियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सर्वश्रेष्ठ युवा शोधकर्ता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं केवीके किन्नौर द्वारा नामांकित किसान आशीष नेगी को जैविक फल उत्पादों के विपणन में उत्कृष्ट कार्य हेतु सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार प्रदान किया गया। यह सम्मान जैविक फल उत्पादन, मूल्य संवर्धन एवं सुदृढ़ विपणन संपर्क स्थापित करने में केवीके के मार्गदर्शन के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है तथा क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों के लिए एक आदर्श स्थापित करता है।
इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए माननीय कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने केवीके किन्नौर की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के सम्मान प्रभावी अनुसंधान एवं प्रसार कार्य को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय की सतत, जलवायु-सहिष्णु एवं किसान-उन्मुख कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करता है। विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. इंदर देव ने भी केवीके टीम एवं सभी विजेताओं को बधाई देते हुए जिले में कृषि-बागवानी गतिविधियों को सुदृढ़ करने में उनके निरंतर प्रयासों की सराहना की।

हिमाचल प्रदेश: पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने बजट 2026–27 का स्वागत करते इसे भारत की नारी शक्ति के विकास में एक अहम और महत्वपूर्ण बजट बताया है। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “ पिछले 12 वर्षों में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की नारीशक्ति ने सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। इस बार वित्त मंत्री माननीया निर्मला सीतारमण जी द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 महिलाओं पर केंद्रित आर्थिक सुधारों का ऐतिहासिक विस्तार दर्शाता है। 2026–27 का बजट Women Empowerment के आजतक के इतिहास में यह बजट एक रेफरेंस बनकर उभरेगा क्यों यह भारत का आज तक का सबसे बड़ा gender-responsive बजट है। मोदी सरकार ने कुल बजट का 9.37% हिस्सा महिलाओं की बराबरी और सशक्तिकरण के लिए रखा गया है जहाँ हमारी सरकार ने महिला और बालिकाओं कल्याण के लिए इस बार पाँच लाख करोड़ का प्रावधान किया है जो पिछले बजट के मुकाबले 11.36% अधिक है। नारी शक्ति संवर्धन के लिए हमने लखपति दीदी योजना को शी मार्ट (Self-Help Entrepreneur Marts) से जोड़ने का फैसला किया है जोकि 2023 में यह योजना शुरू हुई थी। इस योजना के अंतर्गत 1,48,32,258 (एक करोड़, अड़तालीस लाख, बत्तीस हजार दो सौ अट्ठावन) महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और हमारा लक्ष्य है 2027 तक तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाना”
अनुराग सिंह ठाकुर ने बजट को ₹1,07,688.42 करोड़ तक बढ़ाए जाने पर प्रकाश डाला, जो महिलाओं और लड़कियों के लिए 100% आवंटन वाली योजनाओं के अंतर्गत है। यह पर्याप्त धनराशि आवास, आजीविका, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और उद्यमिता में फैली हुई है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण सुनिश्चित करती है। बजट का एक प्रमुख जोर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका पर है। श्री ठाकुर ने दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) पर प्रकाश डाला, जिसके लिए 2026–27 में ₹19,200 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो लाखों महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों को ऋण, कौशल और सतत आय के अवसर प्रदान करता है। उन्होंने NAMO Drone Didi जैसी पहलों के माध्यम से महिला किसानों और कृषि-उद्यमियों के लिए निरंतर समर्थन की सराहना की, जिसके लिए ₹676.85 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो ग्रामीण महिलाओं को अत्याधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी से सशक्त बनाता है और रोजगार तथा उद्यमिता के नए रास्ते खोलता है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने विशेष रूप से स्वयं सहायता उद्यमी (SHE) मार्ट्स की ऐतिहासिक घोषणा पर प्रकाश डाला , जो लाखों महिला SHG सदस्यों को स्वतंत्र उद्यमी बनाने की परिवर्तनकारी नीति कदम है।
महिलाओं के आवास और गरिमा पर, श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी एवं शहरी 2.0) को महिलाओं पर केंद्रित घटकों के अंतर्गत ₹21,625.05 करोड़ का भारी आवंटन मिला है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाओं के लिए सुरक्षित घर स्वामित्व, संपत्ति सृजन और वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करता है। इसे पूरक बनाते हुए, PMAY–ग्रामीण को ₹52,575.01 करोड़ आवंटित किया गया है, जिसमें महिलाओं को प्राथमिक या सह-स्वामी बनाया जाता है, जो ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा और घरेलू निर्णय लेने की शक्ति को मजबूत करता है।
बजट महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित योजनाओं के लिए ₹1,014.05 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसमें सेफ सिटी परियोजनाएं और मजबूत पुलिसिंग ढांचा शामिल है, जो सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है। महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में, मिशन शक्ति के लिए ₹3,200 करोड़ आवंटन का स्वागत किया, जो महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रमुख कार्यक्रम है, जिसमें सुरक्षा, कौशल विकास, कानूनी सहायता और संस्थागत समर्थन प्रणालियां शामिल हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग के लिए ₹36 करोड़ महिलाओं के अधिकारों के लिए शिकायत निवारण और नीति वकालत को मजबूत करेगा।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ प्रत्येक जिले और उच्च शिक्षा संस्थानों में, विशेष रूप से STEM विषयों में लड़कियों के छात्रावास स्थापित किए जाएंगे, साथ ही समग्र शिक्षा और संबद्ध कार्यक्रमों के अंतर्गत निरंतर निवेश जो लड़की छात्राओं को सीधे लाभ पहुंचाते हैं। ये उपाय प्रतिधारण में सुधार, ड्रॉपआउट कम करने और उच्च तथा तकनीकी शिक्षा में महिला भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं।
अनुराग सिंह ठाकुर ने आगे कहा कि सरकार न केवल उद्यम सृजन को बढ़ावा दे रही है बल्कि बाजार पारिस्थितिकी तंत्र और संस्थागत समर्थन को मजबूत कर रही है, जिसमें She-MARTS खुदरा नेटवर्क, उद्यम वित्तपोषण पहल, मजबूत SHG आजीविका प्रणालियां, सुरक्षा कार्यक्रम, आवास स्वामित्व और शिक्षा समर्थन शामिल हैं, जो सभी महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के लिए एक एकीकृत रणनीति बनाते हैं”

हिमाचल : प्रदेश बागवानी विभाग के प्रवक्त्ता ने आज यहां बताया कि कुछ नर्सरी संचालक बिना उचित दस्तावेजों के दूसरे राज्यों से अवैध तरीके से फलदार पौधे लाकर प्रदेश के किसानों को बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में सेब, नाशपाती, आडू, प्लम आदि पौधों की अनाधिकृत एवं अवैध बिक्री की जा रही है। ऐसे पौधों की गुणवत्ता, स्वास्थ्य एवं प्रमाणित स्रोत की कोई जानकारी नहीं होती, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान, रोगग्रस्त पौधों के माध्यम से बागीचों में बीमारी फैलने और फसल विफलता का गंभीर जोखिम रहता है।
इस गंभीर समस्या के मध्यनजर बागवानी विभाग द्वारा हिमाचल प्रदेश फल नर्सरी पंजीकरण एवं विनियमन अधिनियम, 2015 तथा नियम, 2020 के तहत कठोर कार्रवाई शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि वैध लाइसेंस, पंजीकरण और उचित दस्तावेजों जैसे पौधों का स्रोत प्रमाण-पत्र, फाइटोसैनिटरी प्रमाण पत्र, किस्म प्रमाणीकरण आदि के बिना नर्सरी व्यवसाय चलाने वाले या पौधे बेचने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
किसानों से अपील है कि वे किसी भी नर्सरी से पौधे खरीदते समय नर्सरी संचालक का वैध लाइसेंस पंजीकरण प्रमाण पत्र अवश्य देंखें और बिना बिल के कोई भी फल पौध न लें। यदि फल पौध प्रमाणित किस्म का नहीं पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग का उद्देश्य राज्य में फल नर्सरी व्यवसाय को पूर्णतः विनियमित करना तथा किसानों को उच्च गुणवत्ता, प्रमाणित और रोगमुक्त पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है। जन सहयोग से ही इस अवैध व्यापार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
प्रवक्त्ता ने बागवानों से आग्रह किया कि वह गैर पंजीकृत पौधशालाओं एवं सड़क किनारे बिक रहे फल पौध व बिना उपयुक्त दस्तावेजों के बेचे जा रहे फलदार पौधों को न खरीदें। इसके अलावा ऐसे किसी भी व्यक्ति या नर्सरी की सूचना नजदीकी बागवानी विस्तार अधिकारी, बागवानी विकास अधिकारी अथवा विषय विशेषज्ञ को तुरंत दें।

सोलन: क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा, जिला कुल्लू, में “कुल्लू में लहसुन एवं मसाला फसलों की व्यावसायिक खेती” विषय पर दो दिवसीय जिला स्तरीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय,नौणी के बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) परियोजना के अंतर्गत किया गया, जिसे वर्तमान में विभाग द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है।
संगोष्ठी में कुल्लू जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 100 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया, जो क्षेत्र में लहसुन एवं मसाला फसलों की व्यावसायिक खेती के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक खेती पद्धतियों, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा उन्नत कृषि प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा देकर उत्पादकता एवं लाभप्रदता में वृद्धि करना था।
कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कुल्लू के हेड डॉ. सुरेंद्र ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होंने कुल्लू घाटी की कृषि-जलवायु परिस्थितियों में लहसुन एवं मसाला फसलों की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला तथा किसानों को उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों को अपनाकर अधिक लाभ अर्जित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा बाजारोन्मुख उत्पादन प्रणाली के महत्व पर बल दिया।
बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. एन.के. भरत ने संगोष्ठी के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए फसल उत्पादकता बढ़ाने में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने मसाला फसलों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बीज आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।
क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा के सह-निदेशक डॉ. बी.एस. ठाकुर, ने जमीनी स्तर पर उन्नत तकनीकों के तेजी से प्रसार हेतु अनुसंधान–प्रसार–किसान समन्वय को मजबूत करने पर बल दिया। वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक (बीज प्रौद्योगिकी) डॉ. अशोक ठाकुर ने लहसुन एवं अन्य मसाला फसलों में प्रमाणित बीज उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा क्षेत्र में चयनित एक्जॉटिक मसालों की खेती की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
तकनीकी सत्रों में लहसुन एवं प्रमुख मसाला फसलों की उत्पादन तकनीक, पौध संरक्षण उपाय, बीज उत्पादन तकनीक, तथा मृदा एवं जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। केवीके कुल्लू, क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा एवं हरेक के विशेषज्ञों ने विस्तृत व्याख्यान देते हुए उन्नत किस्मों, कीट एवं रोग प्रबंधन, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई पद्धतियों तथा फसलोपरांत प्रबंधन संबंधी व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। विशेष किसान–वैज्ञानिक संवाद सत्र का आयोजन भी किया गया, जिसमें किसानों ने रोग प्रबंधन, बीज उपलब्धता, भंडारण, विपणन एवं सरकारी योजनाओं से संबंधित प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने उनके प्रश्नों का विस्तृत एवं क्षेत्र-विशिष्ट समाधान प्रस्तुत किया।
मसाला फसल उत्पादन में नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए तीन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया। समापन दिवस पर प्रतिभागियों को केवीके कुल्लू एवं बजौरा स्थित अनुसंधान केंद्रों के प्रायोगिक खेतों का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने प्रचलित अनुसंधान परीक्षणों, उन्नत किस्मों तथा वैज्ञानिक फसल प्रबंधन के प्रदर्शन का अवलोकन किया।

कांगड़ा: कांगड़ा जिले के उपमंडल देहरा के तहत ग्राम पंचायत चनौर में वीरवार दोपहर राजकीय प्राथमिक पाठशाला में एक सिरफिरे व्यक्ति ने स्कूल परिसर में घुसकर मिड-डे मील वर्कर की दराती से वार कर बेरहमी से हत्या कर दी। हमलावर ने विद्यार्थियों और कुछ अध्यापकों के सामने ही इस खूनी खेल को अंजाम दिया। मृतका की पहचान 59 वर्षीय सुलोचना देवी पत्नी विशंभर दास निवासी चनौर के रूप में हुई है। हत्या के आरोपी राकेश कुमार उर्फ मोनू (48) निवासी चनौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस मामले में हत्या के कारणों की जांच में जुटी है। स्कूल सेंटर हेड टीचर सरिता देवी के अनुसार दोपहर के समय अचानक विद्यार्थियों के चिल्लाने की आवाजें सुनाई दीं। बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनकर जब वे मौके पर पहुंची तो मिड डे मील वर्कर सुलोचना देवी रसोई के दरवाजे के बाहर खून से लथपथ गिरी हुई थी और आरोपी वहीं पर खड़ा था। आरोपी कह रहा था कि वह इसके टुकड़े-टुकड़े कर देगा। घटना के दौरान अध्यापकों ने साहस दिखाते हुए तुरंत बच्चों को कमरों के भीतर बंद कर दिया, जिससे उन पर हमला न हो सके। शिक्षकों ने आरोपी को रोकने का प्रयास किया, तो वह उन्हें भी धमकाने लगा और आरोपी काबू में नहीं आ रहा था। वहीं, शोर सुनकर पास स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल चनौर के अध्यापक भी मौके पर पहुंच गए और आरोपी काबू में नहीं आया तो शिक्षकों ने उस पर पत्थर बरसाए। इसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। हालांकि, तब तक सुलोचना देवी दम तोड़ चुकी थीं।
सूचना मिलते ही डाडासीबा पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी राकेश उर्फ मोनू को गिरफ्तार कर लिया है।
शिक्षा मंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
प्राथमिक विद्यालय चनौर में हुई घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने देहरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत चनौर के प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील वर्कर सलोचना देवी की हत्या की घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि विद्यालय बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान होने चाहिए।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और कानून के अनुसार सख्त एवं आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने शिक्षा विभाग को राज्य के सभी विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था की तुरंत समीक्षा करने और उसे अधिक मजबूत बनाने के निर्देश दिए ताकि विद्यार्थियों, शिक्षकों, मिड-डे मील वर्करों सहित सभी सहायक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और भविष्य में ऐसी घटना न हो।
शिक्षा मंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग इस दुःख की घड़ी में परिवार के साथ है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
उन्होंने दिवंगत की आत्मा की शांति तथा परिवार को इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।