बीते 4 वर्षों से एसजेवीएन के टर्न ओवर और लाभ में निरंतर बढ़ोतरी

एसजेवीएन को 2168.67 करोड़ का लाभ : सीएमडी नंदलाल शर्मा

2030 तक 12 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य

कहा, बिना सहमति के एसजेवीएन कोई भी परियोजना नहीं बनाता

शिमला: एसजेवीएन अपनी यात्रा के 33 वर्ष पूरे कर चुका हैभारत सरकार एवं हिमाचल प्रदेश सरकार के एक संयुक्‍त उपक्रम के रूप में सीपीएसई के तौर पर एसजेवीएन लिमिटेड की स्‍थापना 24 मई, 1988 को हुई थी। यह बात एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नन्‍द लाल शर्मा ने आज शिमला में प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि एसजेवीएन की शुरुआत एक प्रोजेक्ट से हुई थी वहीं आज एसजेवीएन के पास 32 परियोजनाएं हैं। जिसका श्रेय एसजेवीएन के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को जाता है जिनकी कड़ी मेहनत की बदौलत एसजेवीएन न केवल देश व प्रदेश में अपितु पड़ोसी देशों से भी बड़ी परियोजनाओं को पाने में कामयाब हो रहा है। 

उन्होंने कहा कि बीते 4 वर्षों से एसजेवीएन के टर्न ओवर और लाभ में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। साल-दर-साल एक स्वस्थ लाभ दर्ज करते हुए एसजेवीएन एक मजबूत बैलेंस शीट के साथ नियमित रुप से लाभांश का भुगतान करने वाली कंपनी है। एसजेवीएन की वर्तमान अभिदत्‍त पूंजी 3929.80 करोड़ रुपए है जबकि अधिकृत पूंजी 7000 करोड़ रुपए है

एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नन्‍द लाल शर्मा

एसजेवीएन ने अपनी यात्रा भारत के सबसे बड़े जलविद्युत स्‍टेशन व 1500 मेगावाट के नाथपा झाकड़ी जलविद्युत स्‍टेशन के निर्माण एवं प्रचालन से शुरू की

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि एसजेवीएन ने अपनी यात्रा भारत के सबसे बड़े जलविद्युत स्‍टेशन व 1500 मेगावाट के नाथपा झाकड़ी जलविद्युत स्‍टेशन के निर्माण एवं प्रचालन से शुरू की थी।  यह विद्युत स्‍टेशन हिमाचल प्रदेश में वित्‍तीय वर्ष 2003-04 में कमीशन किया गया था तब से एसजेवीएन ने पांच और परियोजनाओं को सफलतापूर्वक कमीशन किया जिसमें हिमाचल प्रदेश में 412 मेगावाट का रामपुर जलविद्युत स्‍टेशन, महाराष्‍ट्र में 47.6 मेगावाट की खिरवीरे पवन विद्युत परियोजना, गुजरात में 5.6 मेगावाट का चारंका सौर विद्युत संयंत्र तथा गुजरात में 50 मेगावाट की साडला पवन विद्युत परियोजना तथा हिमाचल प्रदेश में 1.31 मेगावाट का ग्रिड कने‍क्‍टेड सौर पावर स्‍टेशन शामिल है।

आज एसजेवीएन  भारत में 7 राज्‍यों के साथ-साथ पड़ोसी देशों नेपाल और भूटान में विद्युत परियोजनाएं निष्‍पादित कर रहा

उन्होंने कहा कि एसजेवीएन एकल परियोजना के साथ शुरू हुआ था और  आज यह भारत में 7 राज्‍यों के साथ-साथ पड़ोसी देशों नेपाल और भूटान में विद्युत परियोजनाएं निष्‍पादित कर रहा है।  एसजेवीएन की वर्तमान स्‍थापित क्षमता 2016.51 मेगावाट (1912 मेगावाट जलविद्युत, 97.6 मेगावाट पवन विद्युत तथा 6.91 मेगावाट सौर विद्युत से युक्‍त) है।  कंपनी 86 किमी लंबी एक ट्रांसमिशन लाइन को भी कार्यान्वित कर रही है, जबकि नेपाल में अरुण -3 एचईपी से नेपाल-भारत सीमा पर बथनाहा तक 217 कि.मी. ट्रांसमिशन लाईन निर्माणाधीन है। सौर विद्युत परियोजनाओं में एसजेवीएन पोर्टफोलियो का तेजी से विकास हो रहा है। एसजेवीएन के वर्तमान परियोजना पोर्टफोलियो में लगभग 30 परियोजनाएं हैं जिनकी कुल क्षमता 11,000  मेगावाट से अधिक है, जिनमें से 2016.51 मेगावाट प्रचालनाधीन है।

एसजेवीएन के लिए वर्ष 2020-21 एक बेहतर वित्तीय वर्ष रहा

एसजेवीएन के लिए वर्ष 2020-21 एक बेहतर वित्तीय वर्ष रहा। वर्ष 2019-20 में कुल राजस्व 3095.24 करोड़ रुपए से बढ़कर वर्ष 2020-21 में 3123.07 करोड़ रुपए हो गया तथा 2168.67 करोड़ रुपए का कर पूर्व लाभ (पीबीटी) दर्ज किया गया, जो कि एसजेवीएन के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक रिकार्ड है। गत वित्तीय वर्ष में दर्ज किए गए 1557.43 करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ की तुलना में वर्ष 2020-21 के लिए शुद्ध लाभ बढ़कर 1633.04 करोड़ रुपए हो गया। वर्ष 2019-20 में नेट वर्थ पर 12.80% की रिटर्न के साथ, प्रति शेयर आय (ईपीएस) 3.96 रुपए प्रति शेयर से बढ़कर वर्ष 2020-21 में 4.16 रुपए प्रति शेयर हो गया। एसजेवीएन ने वर्ष 2020-21 के लिए 2.20 रुपए प्रति शेयर के लाभांश की घोषणा की है। कोविड-19 के प्रभाव से निपटने के लिए एसजेवीएन ने 2020-21 में कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत 52.87 करोड़ रुपए व्‍यय किया है।

स्थानीय लोगों की सहमति हमेशा अनिवार्य

उन्होंने इस बात पर विशेष बल देते हुए कहा कि एसजेवीएन कोई भी परियोजना बिना सहमति के नहीं बनाता है बल्कि लोकल स्टेक होल्डर और स्थानीय लोगों की सहमति हमेशा अनिवार्य रहती है

एसजेवीएन 11 राज्यों को दे रहा है बिजली 

एक सवाल के जवाब में उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि एसजेवीएन 11 राज्यों को बिजली दे रहा है। जिन लोगों को रोजगार मिलता है तथा सुविधाएं मिलती हैं वे सहयोग करते हैं। बिना सहमति के हम कोई भी परियोजना नहीं बनाते हैं हाइड्रो परियोजना में सबसे ज्यादा रोजगार मिलता है और लंबे समय के लिए मिलता है

नन्द लाल शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि 10 निम्न परियोजनाएं निर्माणाधीन चरण में हैं :

  • 900 मेगावाट अरुण-3 जलविद्युत परियोजना

  • 60 मेगावाट नैटवाड़ मोरी जलविद्युत परियोजना

  • 1320 मेगावाट बक्सर ताप विद्युत परियोजना (बीटीपीपी)

  • 600 मेगावाट खोलोंग्‍चू जलविद्युत परियोजना

  • 210 मेगावाट लूहरी स्टेज- I जल विद्युत परियोजना

  • 210 मेगावाट लूहरी स्टेज -1

  • 66 मेगावाट धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना-

  • गुजरात में स्थापित 70 मेगावाट सौर विद्युत परियोजना:

  • उत्तर प्रदेश में स्थापित 75 मेगावाट सौर विद्युत परियोजना

  • बिहार में स्थापित 200 मेगावाट की सौर विद्युत परियोजना

  • इरेडा द्वारा आबंटित 1000 मेगावाट सौर विद्युत परियोजना

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