रक्षा बंधन की पौरणिक कथाएं व राखी बांधने के शुभ मुहूर्त : कालयोगी आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

रक्षा बंधन की पौरणिक कथाएं व राखी बांधने के शुभ मुहूर्त : कालयोगी आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

रक्षा बंधन की पौरणिक कथाएं व राखी बांधने के शुभ मुहूर्त : कालयोगी आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

रक्षा बंधन की पौरणिक कथाएं व राखी बांधने के शुभ मुहूर्त : कालयोगी आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

रक्षा बंधन के त्योहार का इंतज़ार हर बहन को बेसब्री से होता है। लेकिन भाई को भी बहन से राखी बंधवाने का उतना ही इंतज़ार होता है। भाई-बहन का पावन त्योहार जहाँ बचपन से लेकर उम्र भर के हर पड़ाव में भाई-बहन को एक-दूसरे से बांधे रखता है। वहीं भाई-बहन के प्यार का अटूट बंधन सालों सालों से राखी के धागे से और ज्यादा मजबूत होता जाता है। पर्व भारतीय समाज में इतनी व्यापकता और गहराई से समाया हुआ है कि इसका सामाजिक महत्व तो है ही, धर्म, पुराण, इतिहास, साहित्य और फिल्में भी इससे अछूते नहीं हैं। राखी का त्योहार कब शुरू हुआ यह कोई नहीं जानता, लेकिन भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है कि देव और दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ तब दानव हावी होते नजर आने लगे। भगवान इंद्र घबरा कर बृहस्पति के पास गए। वहां बैठी इन्द्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी। उन्होंने रेशम का धागा मंत्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बांध दिया। संयोग से वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था।

स्कंध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में रक्षाबंधन का प्रसंग मिलता है। दानवेंद्र राजा बलि का अहंकार चूर करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और ब्राह्मण के वेश में राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए।

भगवान ने बलि से भिक्षा में तीन पग भूमि की मांग की। भगवान ने तीन पग में सारा आकाश, पाताल और धरती नाप लिया और राजा बलि को रसातल में भेज दिया। बलि ने अपनी भक्ति के बल पर भगवान से रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया। भगवान को वापस लाने के लिए नारद ने लक्ष्मी जी को एक उपाय बताया। लक्ष्मी जी ने राजा बलि राखी बांध अपना भाई बनाया और पति को अपने साथ ले आईं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी।

इस त्योहार से कई ऐतिहासिक प्रसंग जुड़े हैं। राजपूत जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएं उनको माथे पर कुमकुम तिलक लगाने के साथ-साथ हाथ में रेशमी धागा बांधती थी। यह विश्वास था कि यह धागा उन्हें विजयश्री के साथ वापस ले आएगा।

मेवाड़ की रानी कर्मावती को बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर आक्रमण करने की सूचना मिली। रानी उस समय लड़ने में असमर्थ थी अत: उन्होंने मुगल बादशाह हुमायूं को

राजा बलि का अहंकार चूर करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया

राजा बलि का अहंकार चूर करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया

राखी भेज कर रक्षा की याचना की। हुमायूं ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुंच कर बहादुरशाह के विरुद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ाई लड़ी. हुमायूं ने कर्मावती व उनके राज्य की रक्षा की।

एक अन्य प्रसंग में कहा जाता है कि सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के हिंदू शत्रु पोरस (पुरू) को राखी बांधकर अपना मुंहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन ले लिया। पोरस ने युद्ध के दौरान हाथ में बंधी राखी और अपनी बहन को दिए हुए वचन का सम्मान किया और सिकंदर पर प्राण घातक प्रहार नहीं किया।

रक्षाबंधन की कथा महाभारत से भी जुड़ती है। जब युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूं, तब भगवान कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी।

कृष्ण और द्रौपदी से संबंधित वृत्तांत में कहा गया है कि जब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया था तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांध दी थी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। कृष्ण ने इस उपकार का बदला बाद में चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर चुकाया था।

  • भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व 18 अगस्त को मनाया जा रहा है। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं पड़ेगा। तीन वर्ष के बाद यह संयोग बन रहा है, जब रक्षाबंधन के दिन लोगों को भद्रा काल देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लोग दिन भर शुभ मुहूर्तों में राखी बांध सकेंगे।
इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं

इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं

इसके साथ ही इस बार सिंहसान-गौरी योग के बनने से रक्षाबंधन का पर्व और भी विशेष रहेगा। इस बार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रक्षाबंधन का पर्व भद्रा मुक्त रहेगा क्योंकि भद्रा काल सूर्योदय होने से पहले ही समाप्त हो जाएगा। इस कारण लोग चाहें तो सुबह मुहूर्त में रक्षाबंधन कर सकते हैं। दोपहर व शाम को भी राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त हैं।

  • सुबह 06 से 07.30 बजे तक- शुभ।
  • सुबह 10.30 से दोपहर 12 बजे तक- चर।
  • दोपहर 12 से 01.30 बजे तक- लाभ।
  • दोपहर 01.30 से 03 बजे तक- अमृत।
  • शाम 04.30 से 06 बजे तक- शुभ।
  • शाम 06 से 07.30 बजे तक- अमृत।
  • गौ सेवा के लिए आप भी अपना बहुमूल्य योगदान करें और गौ सेवा के लिए आगे आएं। ज्योतिष अनुसंधान केंद्र काल योग सेवा ट्रस्ट शिमला, सेक्टर 34 सी, केनरा बैंक के सामने न्यू शिमला, एस्ट्रो अधिकारी संपर्क सूत्र-82638-82638 और 92182-00013, 14 आचार्य जी से आप वॉट्स ऐप और फेसबुक पर इस नंबर से जुड़ सकते हैं आचार्य महेन्द्र कृष्ण शर्मा, 91295-00004

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