


शिमला : हाल ही में हमीरपुर स्थित सिविल न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-3 द्वारा सी.एम.ए. संख्या 497/2026 में पारित अंतरिम आदेश जो कि स्मार्ट बिजली मीटर से सम्बन्धीत था, केवल जिला हमीरपुर के लम्बलू निवासी उपभोक्ता जैमल सिंह के व्यक्तिगत मामले तक ही सीमित था। तथापि उक्त आदेश के संबंध में विभिन्न माध्यमों से भ्रामक जानकारियां प्रसारित होने के कारण प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं में स्मार्ट बिजली मीटरों की स्थापना को लेकर अनावश्यक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
इस संबंध में हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई, जिस पर 13 जुलाई, 2026 को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान विभाग न विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रासंगिक प्रावधानों एवं स्मार्ट मीटर योजना से संबंधित तथ्यों को माननीय न्यायालय के समक्ष रखा। विभाग द्वारा प्रस्तुत तथ्यों एवं कानूनी पक्ष से माननीय न्यायालय तथा संबंधित प्रार्थी संतुष्ट हुए।
हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड ने संबंधित उपभोक्ता को यह भी स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया कि स्मार्ट मीटर स्थापित किए जाने के उपरांत भी उनका विद्युत कनेक्शन पोस्टपेड मोड में ही संचालित रहेगा तथा उनकी स्पष्ट सहमति के बिना इसे प्रीपेडमोड में परिवर्तित नहीं किया जाएगा। विभाग के इस आश्वासन के पश्चात संबंधित उपभोक्ता स्मार्ट मीटर स्थापित करवाने के लिए सहमत हो गए तथा उनके परिसर में स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया। इसके उपरांत प्रार्थी ने अपना वाद वापस ले लिया।
बोर्ड द्वारा सभी सम्मानित उपभोक्ताओं से आग्रह करता है कि वे स्मार्ट बिजली मीटरों की स्थापना के इस महत्वपूर्ण अभियान में विभाग का सहयोग करें। स्मार्ट मीटर आधुनिक, पारदर्शी एवं उपभोक्ता-हितैषी विद्युत वितरण प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इनके माध्यम से विद्युत बिलिंग में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, ऊर्जा प्रबंधन में सुधार आएगा, उपभोक्ताओं को अधिक त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध होंगी तथा विद्युत वितरण प्रणाली की दक्षता में वृद्धि होगी। दीर्घकाल में इस से विद्युत हानियों में कमी लाने तथा विद्युत दरों को यथासंभव नियंत्रित रखने में भी सहायता मिलेगी।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रदेश भर में स्मार्ट बिजली मीटरों की स्थापना का कार्य पूर्णतः नियमानुसार तथा पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार बिना किसी बाधा के सुचारु एवं निर्बाध रूप से जारी रहेगा। विभाग सभी उपभोक्ताओं से अपील करता है कि वे किसी भी प्रकार की अपुष्ट अथवा भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें तथा किसी भी जानकारी के लिए केवल विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

शिमला : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा है कि भाजपा जन आंदोलन के नाम कांग्रेस के खिलाफ कितनी भी समितियां बना ले,लोग अब इसके किसी भी बहकावे में आने वाले नही। अपने ऊपर लगे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी भाजपा लोगों का ध्यान बांटने का असफल प्रयास कर रही है। भाजपा को पहले नीट पेपर लीक व राम मंदिर से दान के हजारों करोड़ की चोरी का अपराध कबूल करना चाहिए। उसे हिम्मत कर अपने उन नेताओं का नाम सार्वजनिक करने चाहिए जो इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं।
विनय कुमार ने आज यहां एक प्रेस बयान में भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि कांग्रेस प्रदेश में भाजपा के खिलाफ युवाओं के भविष्य के साथ हो रहें खिलवाड़, नीट व सीबीएसई पेपर लीक व राम मंदिर चंदा लूट को मुख्य मुद्दा बनाने जा रही है। उन्होंने कहा है कि इस लूट से भाजपा की तिजोरियां भरी गई ,इसलिए भाजपा इसके असली और बड़े गुनहगारों पर हाथ डालने से परहेज कर रही है।
विनय कुमार ने कहा है कि केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस का जिला स्तर पर आयोजित नीट पेपर लीक व राम मंदिर चंदा लूट के विरोध प्रदर्शन सफल रहें है,अब दूसरे चरण में सभी ब्लॉकों में कांग्रेस पार्टी के नेता व कार्यकर्ता इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रही है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा ,इस लूट का पर्दाफाश होने के बाद अब अपना मुंह छुपाने की कोशिश कर रही है। केंद्र की मोदी सरकार इस लूट की जांच उच्चतम न्यायालय के किसी भी न्यायधीश से करवाने का साहस भी नही कर पा रही है। प्रधानमंत्री के मुंह से एक बार भी इस महालूट बारे एक भी शब्द नही निकल रहा है जबकि श्रीराम मंदिर निर्माण के समय वह देश विदेश के लोगों से चंदे के तौर पर महादान देने का अपील करते थे। आज जब इस दान की लूट का खुलासा हुआ है तो ऐसे में प्रधानमंत्री को इस पूरे चंदे की जानकारी देश के लोगों को देनी चाहिए। मंदिर निर्माण से लेकर अब तक कब कितना खर्च किया गया। इसकी पूरी ऑडिट रिपोर्ट देश के सामने रखनी चाहिए। प्रभु श्रीराम का मंदिर देश की धरोहर है और इसके आये व्यय का पूरा लेखा जोखा समय समय पर देश के सामने रखना चाहिए।

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (यूएचएफ), नौणी के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा 13 से 15 जुलाई, 2026 तक ‘डिजिटल जलवायु-स्मार्ट पर्वतीय कृषि’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के 25 किसानों तथा दो अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को उत्तराखंड सरकार के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मिशन निदेशक द्वारा प्रायोजित किया गया।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों, मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाओं, फसल बीमा, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त सतत बागवानी पद्धतियों के संबंध में ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना था।उद्घाटन सत्र में प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. एम. एस. जांगड़ा ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु-स्मार्ट कृषि की आवश्यकता एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। पर्यावरण विज्ञान विभाग की विभाग अध्यक्ष डॉ. परमिंदर कौर बावेजा ने प्रतिभागियों को पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना किसानों को मौसम संबंधी जोखिमों से होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने जलवायु-स्मार्ट कृषि के लिए जैव-आधारित समाधान, कृषि-मौसम परामर्श सेवाएं एवं मोबाइल एप्लीकेशन, जैव उर्वरक एवं पौध वृद्धि प्रोत्साहक राइजोबैक्टीरिया (पी. जी. पी. आर.), समशीतोष्ण फल फसलों के प्रवर्धन की तकनीकें, बागों में मृदा उर्वरता प्रबंधन, परागण प्रबंधन, सीवेज स्लज कम्पोस्टिंग, मशरूम उत्पादन आधारित उद्यमिता तथा मृदा एवं जल संरक्षण के लिए समेकित जल निकास उपायों जैसे विषयों पर व्याख्यान दिए।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय के औषधीय एवं सुगंधित पौधों के उद्यान, सोलन स्थित क्लाइमेट स्मार्ट मॉडल गार्डन तथा क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, मशोबरा का भ्रमण किया, जहां उन्हें आधुनिक बागवानी तकनीकों एवं बाग प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय की कृषि मौसम वेधशाला का भी भ्रमण करवाया गया, जहां उन्हें मौसम मापन उपकरणों तथा कृषि निर्णयों में मौसम पूर्वानुमान की भूमिका से अवगत कराया गया। प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद किया तथा अपने कृषि कार्यों में जलवायु-स्मार्ट तकनीकों को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई। समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि की जलवायु सहनशीलता, उत्पादकता तथा सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

शिमला: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के भाजपा विधायकों और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास अपनी सरकार की उपलब्धियां बताने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह भाजपा के विधायकों की संख्या और आगामी चुनाव परिणामों की भविष्यवाणी करके जनता का ध्यान अपनी सरकार की विफलताओं से भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।
राकेश जमवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह दावा कि भाजपा के 28 में से 16 विधायक आगामी चुनाव में जीत नहीं पाएंगे, उनकी हताशा और राजनीतिक घबराहट को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता तय करेगी कि कौन विधायक बनेगा और कौन सरकार बनाएगा, मुख्यमंत्री नहीं। भाजपा के विधायकों को लेकर भविष्यवाणी करने से पहले मुख्यमंत्री को अपनी सरकार, मंत्रियों और कांग्रेस विधायकों के बीच चल रहे असंतोष की चिंता करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को विधानसभा अध्यक्ष के पद से संतोष करने की सलाह देना मुख्यमंत्री की पद की गरिमा के विपरीत है। मुख्यमंत्री को विपक्ष के नेताओं पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करने के बजाय यह बताना चाहिए कि कांग्रेस सरकार ने अपने चुनावी वादों में से कितने पूरे किए। महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह, युवाओं को रोजगार, किसानों-बागवानों को राहत और जनता को 300 यूनिट निःशुल्क बिजली देने जैसे वादों का आज तक क्या हुआ, इसका जवाब प्रदेश की जनता मांग रही है।
जमवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री जिस कार्यक्रम को बड़ी जनसभा के रूप में प्रस्तुत करना चाहते थे, उसमें जनता की अपेक्षित भागीदारी नहीं हुई। लोगों के न पहुंचने के कारण रैली के स्थान पर टाउन हॉल के भीतर बैठक करनी पड़ी। यह घटना बताती है कि प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार की नीतियों से कितनी नाराज है। मुख्यमंत्री जनता के इस रोष से घबराए हुए हैं और इसी कारण विकास एवं जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाकर विपक्ष पर निराधार राजनीतिक हमले कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि मुख्यमंत्री बाहरी विपक्ष से अधिक अपनी ही पार्टी के नेताओं और मंत्रियों की अंदरूनी राजनीति से परेशान हैं। कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की लड़ाई, मंत्रियों के बीच खींचतान और सत्ता के अलग-अलग केंद्रों ने सरकार की कार्यप्रणाली को प्रभावित किया है। मुख्यमंत्री अपने ही नेताओं और मंत्रियों के राजनीतिक षड्यंत्रों के शिकार होते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अपनी विफलताओं का दोष भाजपा पर डालने का प्रयास कर रहे हैं।
राकेश जमवाल ने कहा कि तीन वर्षों से अधिक समय बीतने के बावजूद कांग्रेस सरकार के पास जनता के सामने रखने के लिए कोई उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं है। विकास कार्य ठप हैं, संस्थान बंद किए गए, कर्मचारी और पेंशनर अपने आर्थिक अधिकारों के लिए परेशान हैं तथा बेरोजगार युवा स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बिगाड़ने के बाद मुख्यमंत्री अब भाषणों और राजनीतिक बयानबाजी के सहारे अपनी सरकार की असफलताओं को छिपाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री यह समझ लें कि भाजपा को प्रमाणपत्र देने की आवश्यकता नहीं है। आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का हिसाब करेगी। भाजपा पूरी मजबूती के साथ जनता के बीच जाएगी और कांग्रेस सरकार की वादाखिलाफी, आर्थिक कुप्रबंधन तथा जनविरोधी नीतियों को उजागर करेगी।

शिमला: प्रदेश के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत चनावग में आयोजित एक दिवसीय हरशिंग धार मेले में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को मेले की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराएं और धार्मिक आस्थाएं ही प्रदेश की वास्तविक पहचान हैं तथा मेले हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए मेला समिति को बधाई देते हुए कहा कि हरशिंग धार मेला क्षेत्र के लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है तथा इसका आयोजन पौराणिक काल से पूरी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें दूसरी बार इष्ट देव हर्षिंगदेव महाराज के दरबार में उपस्थित होकर आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है। साथ ही क्षेत्र के अन्य स्थानीय देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेना भी उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के दौरे के दौरान वे स्थानीय लोगों की समस्याओं और विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी भी लेते हैं, ताकि योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच सके।
5 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होगी सड़क: इससे पूर्व लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री ने 5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली पटियार-घाटरु-बैरटीनाला वाया सीतरी जांयन संपर्क सड़क का शिलान्यास किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने 50 लाख रुपये की लागत से बनने वाली जूड-खुराना संपर्क सड़क की आधारशिला रखी तथा 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित राजकीय प्राथमिक पाठशाला जूड (जुडलू) के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करते हुए जिन दोनों संपर्क सड़कों का शिलान्यास किया गया है, उनका निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कर प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। उन्होंने मेला समिति द्वारा प्रस्तुत विभिन्न मांगों को चरणबद्ध ढंग से पूरा करने का आश्वासन भी दिया।
सामुदायिक भवन बनाया जाएगा: लोक निर्माण मंत्री ने घोषणा की कि हरशिंग धार देवस्थल के समीप एक बड़े सामुदायिक भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी की जाएंगी। उन्होंने बताया कि चनावग से हरशिंग धार देवस्थल तक मुख्य सड़क की मेटलिंग एवं टायरिंग का कार्य वर्षा ऋतु के बाद आरंभ किया जाएगा।
पार्किंग का निर्माण कार्य तीव्र गति से चला है: मंत्री ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप मंदिर परिसर के निकट एक बड़े वाहन पार्किंग स्थल का निर्माण किया जा रहा है, जिसका लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अतिरिक्त जोटरु से गांव तक तथा छामला डोरा से हरशिंग धार तक सड़क निर्माण कार्य भी कराया जाएगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को सभी आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस अवसर पर प्रधान मेला समिति हरशिंग धार की ओर से मुख्य अतिथि का पारंपरिक स्वागत किया गया तथा मेले की गतिविधियों और क्षेत्र की विभिन्न विकासात्मक मांगों से उन्हें अवगत कराया गया।
लोक निर्माण मंत्री ने मेले के सफल आयोजन के लिए मेला समिति को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की।

केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की वेबसाइट पर कर सकते है आवेदन
शिमला: अगर आप अपने परिवार या रिश्तेदारी में किसी बच्चे को गोद लेना चाहते है तो आपको अब केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के तहत पहले आवेदन करना होगा। इसके बाद सारी औपचारिकताएं करवाने के बाद जिला दंडाधिकारी द्वारा बच्चे का दत्तकग्रहण सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। नए नियमों के मुताबिक अब परिवार एवं रिश्तेदारी में बच्चे को गोद लेने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए इच्छुक माता पिता को कोई भी शुल्क अदा नहीं करना होगा।
इसके अलावा प्रदेश सरकार के प्रयासों के कारण चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट को भावी माता पिता को दत्तक ग्रहण करने में सफलता हासिल हो रही है। 20 दिसंबर 2022 से लेकर एक सितंबर 2025 तक 25 चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट को भावी माता पिता को दत्तक ग्रहण करवाया जा चुका है।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने समाज के समृद्ध लोगों से अपील की कि वे शिशु गृह और आश्रमों में पल रहे किशोर बच्चों को अपनाने के लिए आगे आएं ताकि इन बच्चों का सुखद और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। अंतर्देशीय रिश्तेदार दत्तक ग्रहण और सौतेले माता पिता द्वारा दत्तक ग्रहण किया जा सकता है। इसके लिए उन्हें सीएआरए की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। इसके बाद सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही बच्चा सौंपा जाता है। उन्होंने कहा कि रिश्तेदारी और परिवार में बच्चों को ऐसे ही गोद ले लिया जाता है। इस वजह से कई बार कानूनी दिक्कतें पेश आती है। इस व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में परिवार एवं रिश्तेदारी में दत्तक ग्रहण के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के माध्यम से कानूनी माता पिता का अधिकार मिलता है। ऐसे में लोगों को इन नियमों को सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि बच्चों का बेहतर भविष्य सुनिश्चित हो सके।
जिला कार्यक्रम अधिकारी शिमला ममता पॉल ने जानकारी देते हुए कहा कि बच्चा गोद लेने के लिए जिन्होंने आवेदन किया होता है, उन्हें मेरिट के आधार पर माता पिता दत्तक ग्रहण करवाया जाता है। इसके लिए अधिनियम के मुताबिक जो नियम व शर्तें पूरी करते है उन्हें ही लाभ दिया जाता है।
देश के भीतर रिश्तेदारी में दत्तक ग्रहण
देश के भीतर रिश्तेदारी में दत्तक ग्रहण वह प्रक्रिया है जिसमें भारत में रहने वाला कोई व्यक्ति अपने निकट संबंधी (जैसे भाई-बहन, चाचा-चाची, मामा-मामी, बुआ-फूफा, दादा-दादी या अन्य पात्र रिश्तेदार) के बच्चे को विधिक रूप से गोद लेता है। यह प्रक्रिया Central Adoption Resource Authority (CARA) द्वारा जारी दत्तक ग्रहण विनियमों तथा Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act के प्रावधानों के अनुसार संपन्न की जाती है।
रिश्तेदारी में दत्तक ग्रहण के लिए जैविक माता-पिता (या वैध अभिभावक) की सहमति, दत्तक ग्रहण करने वाले अभिभावकों की पात्रता तथा संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक होता है। इसके बाद सक्षम न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा दत्तक ग्रहण आदेश जारी किया जाता है। दत्तक ग्रहण पूर्ण होने के बाद बच्चे को दत्तक माता-पिता की संतान के समान सभी कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं, जिनमें पालन-पोषण, शिक्षा, उत्तराधिकार और अन्य वैधानिक अधिकार शामिल हैं। यदि बच्चा पांच वर्ष और उससे अधिक आयु का है तो उसमें बच्चे की सहमति भी ली जाएगी। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य बच्चे के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करते हुए उसे सुरक्षित, स्थायी और पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
सोतेले माता-पिता द्वारा दत्तक ग्रहण
सौतेले माता-पिता द्वारा दत्तक ग्रहण (Step&Parent Adoption) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी बच्चे के जैविक माता या पिता के पुनर्विवाह के बाद उसका पति या पत्नी (सौतेले माता या पिता) उस बच्चे को कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण करता,करती है।
-दत्तक ग्रहण के लिए बच्चे के जैविक माता-पिता (जहां लागू हो) तथा सौतेले माता-पिता की सहमति आवश्यक होती है।
-यदि बच्चे का एक जैविक अभिभावक जीवित है और उसके अभिभावकीय अधिकार समाप्त नहीं हुए हैं, तो उसकी विधिसम्मत सहमति आवश्यक होती है।
-दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन तथा निर्धारित कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।
-सक्षम न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी द्वारा दत्तक ग्रहण आदेश जारी किए जाने के बाद बच्चा सौतेले माता-पिता की वैध संतान माना जाता है।
-दत्तक ग्रहण के पश्चात बच्चे को शिक्षा, पालन-पोषण, उत्तराधिकार तथा अन्य सभी वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाते हैं, जो एक जैविक संतान को प्राप्त होते हैं।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी इंदु शर्मा ने कहा कि भारत में भारतीय नागरिक, एनआरआई और विदेशी नागरिक हर कोई बच्चे को गोद ले सकता है। लेकिन उसके लिए सबसे पहले उन्हें केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण द्वारा बनाए गए नियमों को पूरा करना जरूरी है।
शादी शुदा परिवार के अलावा इसके साथ ही सिंगल पैरेंट या कपल दोनों ही बच्चे को गोद ले सकते हैं। हालांकि मैरिड कपल के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं।
-अगर कोई शादीशुदा जोड़ा बच्चे को गोद ले रहा है तो उस कपल की शादी को कम से कम 2 साल का समय होना चाहिए।
-गोद लेने वाले बच्चे के माता-पिता को पहले से कोई जानलेवा बीमारी नहीं होनी चाहिए।
-बच्चे और माता-पिता की उम्र में कम से कम 25 साल का फर्क होना चाहिए।
-बच्चे को गोद लेने के लिए माता पिता दोनों की रजामंदी होना चाहिए।
-अगर कोई महिला किसी बच्चे को गोद लेना चाहती है तो वह लड़का या लड़की में से किसी को भी आसानी से गोद ले सकती हैं।
– अगर कोई पुरुष बच्चे को गोद लेना चाहता है तो उसे केवल लड़का ही गोद दिया जाता है।
– कपल लड़का या लड़की में से किसी को भी गोद ले सकता है।
– माता-पिता की बच्चा गोद लेते समय आर्थिक स्थिति सही होनी चाहिए।
ये दस्तोवज है आवश्यक
– गोद लेने वाले परिवार की मौजूदा तस्वीर।
– बच्चे को गोद लेने वाले परिवार या शख्स का पैन कार्ड।
– बर्थ सर्टिफिकेट या कोई भी ऐसा डॉक्यूमेंट जिससे उस व्यक्ति की जन्म तिथि का प्रमाण मिल सके।
– आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, नवीनतम बिजली का बिल, टेलीफोन बिल इन सब में से किसी भी एक डॉक्यूमेंट का होना बेहद जरूरी।
– उस साल के इनकम टैक्स की ऑथेंटिक कॉपी
– गोद लेने के इच्छुक दंपति को अपने-अपने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराने होंगे। वह सर्टिफिकेट किसी सरकारी अस्पताल के डॉक्टर का साइन किया हुआ प्रमाण पत्र हो सकता है, जिससे साबित हो जाए कि बच्चे को गोद लेने वाले शख्स को किसी तरह की बीमारी नहीं है।
– गोद लेने वाला शख्स शादीशुदा है तो शादी का प्रमाण पत्र ( अगर शादीशुदा हैं तो)।
– व्यक्ति तलाकशुदा है तो उसका प्रमाणपत्र।
-गोद लेने के पक्ष में इच्छुक व्यक्ति से जुड़े दो लोगों का बयान।
– अगर इच्छुक व्यक्ति का कोई बच्चा पहले से ही है और उसकी उम्र पांच साल से अधिक है तो उसकी सहमति।
भारत में बच्चा गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया
भारत में बच्चा गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया हिंदू दत्तक और भरण पोषण अधिनियम 1956 और किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत पूरी की जाती है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (Central Adoption Resource Authority) इस प्रक्रिया की देखरेख करता है। हिमाचल प्रदेश में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी कार्यरत है। इसी के माध्यम से बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया पूरी होती है।

शिमला: भारतीय जनता पार्टी, हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने संगठनात्मक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के 17 संगठनात्मक जिलों के लिए जिला प्रभारियों एवं सह-प्रभारियों की नियुक्ति की घोषणा की है। प्रदेश कार्यालय से जारी सूची के अनुसार चंबा जिले का प्रभारी प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन परमार तथा सह-प्रभारी पूर्व जिलाध्यक्ष रमेश राणा को बनाया गया है। नूरपुर का प्रभारी पूर्व सांसद सुरेश चंदेल तथा सह-प्रभारी प्रदेश प्रवक्ता श्री विनय शर्मा, कांगड़ा का प्रभारी विधायक विक्रम ठाकुर तथा सह-प्रभारी प्रदेश मीडिया सह-संयोजक श्री संजीव शर्मा, देहरा का प्रभारी प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक राजेश ठाकुर तथा सह-प्रभारी प्रदेश सचिव वंदना योगी, पालमपुर का प्रभारी प्रदेश संयोजक पंचायतीराज प्रकोष्ठ विनोद ठाकुर तथा सह-प्रभारी प्रदेश प्रवक्ता पंकज जमवाल, लाहौल-स्पीति का प्रभारी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित जाति मोर्चा नितिन कुमार तथा सह-प्रभारी किसान मोर्चा की प्रदेश महामंत्री ज्योति कपूर, कुल्लू का प्रभारी प्रदेश उपाध्यक्ष श्री बिहारी लाल शर्मा तथा सह-प्रभारी प्रदेश सचिव प्रियंता शर्मा, मंडी का प्रभारी पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज तथा सह-प्रभारी प्रदेश मीडिया सह-संयोजकभीम सेन, सुंदरनगर का प्रभारी प्रदेश सचिव तिलकराज शर्मा तथा सह-प्रभारी प्रदेश सचिव कुसुम सदरेट, हमीरपुर का प्रभारी प्रदेश सचिव अमित ठाकुर तथा सह-प्रभारी सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रियव्रत शर्मा, ऊना का प्रभारी प्रदेश सचिव शिशु भाई धर्मी तथा सह-प्रभारी प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं पूर्व प्रदेश सचिव श्री विशाल चौहान, बिलासपुर का प्रभारी प्रदेश उपाध्यक्ष श्मिधर सूद तथा सह-प्रभारी प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं पूर्व जिलाध्यक्ष देशराज शर्मा, सोलन का प्रभारी प्रदेश सह-संयोजक समस्त प्रकोष्ठ राजपाल सिंह तथा सह-प्रभारी प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज, सिरमौर का प्रभारी प्रदेश सचिव डॉ. संजय ठाकुर तथा सह-प्रभारी प्रदेश प्रवक्ता राकेश डोगरा, महासू का प्रभारी राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री डॉ. सिकंदर कुमार तथा सह-प्रभारी प्रदेश कार्यसमिति सदस्य आशुतोष वैद्य, शिमला का प्रभारी प्रदेश सचिव सुमीत शर्मा तथा सह-प्रभारी प्रदेश प्रवक्ता अजय ठाकुर और किन्नौर का प्रभारी प्रदेश प्रवक्ता अजय राणा तथा सह-प्रभारी प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विजय परमार को नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त पूर्व प्रदेश प्रवक्ता चेतन बरागटा को सोशल मीडिया एवं आईटी विभाग का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने सभी नव-नियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे संगठन की रीति-नीति और विचारधारा के अनुरूप पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि जिला प्रभारी एवं सह-प्रभारी संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने, संगठनात्मक कार्यक्रमों को गति देने तथा बूथ स्तर तक पार्टी को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी संगठनात्मक अभियानों और जनसंपर्क कार्यक्रमों को सफल बनाने में इन सभी पदाधिकारियों का अनुभव एवं सक्रियता संगठन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

नाहन, हमीरपुर, बिलासपुर, धर्मशाला और सोलन में शुरू होगी डिजिटल मैमोग्राफी सुविधा
42 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की
शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार जिला अस्पतालों और सभी सात राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ कर रही है ताकि लोगों को घर-द्वार के समीप ही बेहतर उपचार की सुविधा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने आज यहां स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जिला अस्पताल लोगों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन संस्थानों के सुदृढ़ीकरण के दृष्टिगत क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर, कुल्लू, ऊना और सोलन, जिला अस्पताल किन्नौर, डॉ. वाई.एस. परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल नाहन, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला तथा पालमपुर में 1.5 टेस्ला एमआरआई मशीनें स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीनें भी लगाई जा रही हैं, जिससे विशेषज्ञ जांच और उपचार की सुविधाएं और अधिक बेहतर होंगी।
उन्होंने कहा कि नैदानिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए जिला अस्पताल नाहन और हमीरपुर, क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर और सोलन तथा क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में डिजिटल मैमोग्राफी मशीनें भी लगाई जाएंगी।
उन्होंने कहा कि 42 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी है, जिनमें से 14 मशीनें प्राप्त हो चुकी हैं। दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जांच के लिए इन मशीनों का उपयोग किया जाएगा। इनका उपयोग छाती की जांच और टीबी की जल्द पहचान के लिए किया जाएगा, जिससे समय पर उपचार सुनिश्चित हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी चमियाना, आईजीएमसी शिमला, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नेरचौक में 256-स्लाइस हाई-एंड सीटी स्कैन मशीनें स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल एक्स-रे और 4डी अल्ट्रासाउंड मशीनें भी उपलब्ध करवाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एम्स, नई दिल्ली के मानकों के अनुरूप सभी चिकित्सा उपकरणों की खरीद सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों के रेडियोलॉजी विभागों को और मजबूत करने के भी निर्देश दिए, जिससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों की भर्ती की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है और शीघ्र ही सभी सात सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में आवश्यक पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की खरीद की समीक्षा करते हुए प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य प्रदेश में ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है, ताकि लोगों को उपचार के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े।
बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, मुख्य सचिव के.के. पंत, प्रधान सचिव एम. सुधा देवी, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, एनएचएम के मिशन निदेशक प्रदीप ठाकुर, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

