
हिमाचल : प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत किया। यह सर्वेक्षण अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किया गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 राज्य की आर्थिक स्थिति का वास्तविक एवं साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन प्रस्तुत करता है, जिसमें राजकोषीय दबाव, जलवायु संवेदनशीलता तथा बदलती विकास प्राथमिकताओं के संदर्भ में प्रगति एवं उभरती चुनौतियों को रेखांकित किया गया है। यह सर्वेक्षण क्षेत्रीय प्रवृत्तियों, नीतिगत प्रयासों तथा सतत एवं समावेशी विकास के लिए आगे की दिशा का संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैंः
वर्ष 2025-26 में हिमाचल की आर्थिक स्थिति
* हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था निरंतर सशक्त और अनुकूलनशील विकास गति के साथ आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) प्रचलित मूल्यों पर लगभग ₹2.54 लाख करोड़ आंका गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10.1 प्रतिशत की संतोषजनक वृद्धि को दर्शाता है। स्थिर मूल्यों पर राज्य की अर्थव्यवस्था लगभग 8.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं और जलवायु चुनौतियों के बावजूद विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निरंतर आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। यह प्रदर्शन हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती और अनुकूलन क्षमता को रेखांकित करता है।
अग्रिम अनुमान के अनुसार, वितीय वर्ष 2025-26 के लिए स्थिर (2011-12) भावों या वास्तविक राज्य सकल घरेलू उत्पाद ₹1,56,681 करोड़ अनुमानित है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹1,44,656 करोड़ था और यह वित्त वर्ष 2024-25 (प्रथम संशोधित अनुमान) के 6.4 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2025-26 के लिए 8.3 प्रतिशत वृद्धि दर प्रदर्शित करता है।
* वित वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान में प्राथमिक क्षेत्र से सकल मूल्य वर्धित में स्थिर भावों पर 8.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान के दौरान प्राथमिक क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धित स्थिर भावों पर 2024-25 प्रथम संशोधित अनुमान में ₹17,362 करोड़ के मुकाबले ₹18,824 करोड़ हो गया।* वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अग्रिम अनुमान के अनुसार, स्थिर (2011-12) भावों पर द्वितीयक क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धित ₹66,324 करोड़ अनुमानित है जोकि वित्त वर्ष 2024-25 प्रथम संशोधित अनुमान के लिए ₹61,561 करोड था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज होने की आशा है।
* राज्य में सेवा क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धित में सबसे अधिक योगदान है। वित्तीय वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान के लिए सेवा क्षेत्र के लिए स्थिर (2011-12) भावों पर ₹62,581 करोड़ अनुमानित है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 प्रथम संशोधित अनुमान में यह ₹57,643 करोड़ था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है।
प्रति व्यक्ति आय (पी.सी.आई.)
* सेवा क्षेत्र राज्य की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख प्रेरक बना हुआ है, जिसे पर्यटन, व्यापार, परिवहन तथा वित्तीय सेवाओं के निरंतर विस्तार से बल मिल रहा है, जबकि उद्योग तथा जलविद्युत राज्य के विकास के महत्वपूर्ण स्तंभ बने हुए हैं। इसके साथ ही कृषि एवं सहायक क्षेत्र बड़ी आबादी की आजीविका को सहारा देते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला बने हुए हैं और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। राज्य के लोगों की आर्थिक समृद्धि को दर्शाते हुए वर्ष 2025-26 में हिमाचल प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय ₹2,83,626 आंकी गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है तथा राष्ट्रीय औसत से ₹64,051 अधिक है।
* राज्य के प्रति व्यक्ति आय में 2011-12 में ₹87,721 से बढ़कर 2025-26 में ₹2,83,626 हो गई, जो 2011-12 की तुलना में 8.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज करती है।
क्षेत्रवार योगदान
* किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को तीन प्रमुख क्षेत्रों-प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक द्वारा किए गए आर्थिक योगदान के संदर्भ में मापा जाता है। राज्य के सकल राज्य मूल्य वर्धित में तृतीयक क्षेत्र का सबसे अधिक योगदान रहा है, इसके बाद द्वितीयक और प्राथमिक क्षेत्रों का स्थान है।
* वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल राज्य मूल्य वर्धित के अग्रिम अनुमान के आधार पर, तृतीयक क्षेत्र का प्रचलित मूल्यों पर राज्य के सकल राज्य मूल्य वर्धित में 46.3 प्रतिशत हिस्सा है, इसके बाद द्वितीयक क्षेत्र का 39.4 प्रतिशत और प्राथमिक क्षेत्र का 14.3 प्रतिशत है।कृषि एवं संबंधित क्षेत्र
* राज्य की अर्थव्यवस्था में प्राथमिक क्षेत्र के योगदान में वर्षों से निरंतर वृद्धि हुई है। वर्तमान कीमतों पर सकल राज्य मूल्य वर्धित में कृषि और संबद्ध क्षेत्र का योगदान वित्त वर्ष 2021-22 में ₹22,428 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹32,415 करोड़ हो गया है।
* वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच वर्तमान कीमतों पर फसलों के सकल राज्य मूल्य वर्धित में उल्लेखनीय सुधार हुआ है (वित्त वर्ष 2021-22 में ₹13,722 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹18,515 करोड़ हो गया है)। इसी अवधि में वर्तमान कीमतों पर सकल राज्य मूल्य वर्धित में फसल क्षेत्र का योगदान 35 प्रतिशत बढ़ा है।
* अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर कीमतों पर कृषि और संबद्ध क्षेत्र के सकल राज्य मूल्य वर्धित में 8.30 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह वृद्धि दर 2.70 प्रतिशत रही थी।
* वित्त वर्ष 2025-26 में पशुधन उपक्षेत्र सकल राज्य मूल्य वर्धित का 2.40 प्रतिशत और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के सकल राज्य मूल्य वर्धित का 17.45 प्रतिशत है।
औद्योगिक क्षेत्र के प्रवृत्तियाँ
* राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन में उद्योग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्तमान कीमतों पर उद्योग क्षेत्र (खनन और उत्खनन सहित) का अनुमानित मूल्य ₹94,381 करोड़ है।
* वित्त वर्ष 2025-26 में सकल राज्य मूल्य वर्धित में उद्योग क्षेत्र (खनन और उत्खनन सहित) का वर्तमान मूल्य पर योगदान 39.96 प्रतिशत है, जिसमें से 25.32 प्रतिशत विनिर्माण क्षेत्र से, 8.42 प्रतिशत निर्माण क्षेत्र से और 6.22 प्रतिशत बिजली, जल आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाओं से आता है।
* अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उद्योग क्षेत्र के सकल राज्य मूल्य वर्धित में 7.77 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है और राष्ट्रीय स्तर पर, इसी अवधि के दौरान उद्योग क्षेत्र के सकल वार्षिक वृद्धि मूल्य में स्थिर रूप से 6.15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
* वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, विनिर्माण क्षेत्र में 5.74 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। 2015-16 से 2025-26 के बीच, उद्योग क्षेत्र के उप-क्षेत्रों में विनिर्माण क्षेत्र ने 5.19 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर का अनुभव किया।विकास महत्वपूर्ण है और राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी आवश्यक है।
* संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों की आय बढ़ाने के लिए निर्माण उप-क्षेत्र का वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उद्योग क्षेत्र में निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर सबसे अधिक 12.56 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
पर्यटन
* वर्ष 2024-25 (प्रथम संशोधन) के अनुसार आतिथ्य सत्कार, परिवहन, हस्तशिल्प और संबंधित उद्योगों में पर्यटन, होटल और रेस्तरां क्षेत्र का हिमाचल प्रदेश के सकल राज्य मूल्य वर्धित में 7.77 प्रतिशत का योगदान देता है।
* महामारी के बाद हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, घरेलू पर्यटकों की संख्या 2020 में 32.13 लाख से बढ़कर 2025 में 311.47 लाख हो गई है, जो महामारी से पहले के स्तर के करीब है। राज्य के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह वृद्धि दीर्घकालिक रूप से सतत बनी रहे।
ऊर्जा
* 143 परियोजनाओं से राज्य सरकार की पात्रता कुल 1,574.06 मेगावाट बिक्री योग्य विद्युत का है। दिसंबर 2025 तक ₹1,668 करोड़ का राजस्व अर्जित किया गया है, तथा मार्च 2026 तक अतिरिक्त ₹249 करोड़ प्राप्त होने की संभावना है।
* हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड वर्तमान में 28 जलविद्युत परियोजनाओं (589.35 मेगावाट) का संचालन कर रहा है। इन परियोजनाओं से दिसंबर 2025 तक 1,973.64 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन दर्ज किया गया है, तथा मार्च 2026 तक यह उत्पादन 2,200 एम.यू से अधिक होने का अनुमान है। इससे राज्यभर में विश्वसनीय एवं सतत विद्युत वितरण सुनिश्चित होगा।
मुद्रास्फीति की वर्तमान प्रवृत्तियाँ
* सितंबर से आगे, सभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक खंडों में मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। शहरी मुद्रास्फीति में तीव्र नरमी आई और यह अक्टूबर से नवंबर के दौरान लगभग शून्य स्तर के निकट पहुँच गई, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक – संयुक्त में निरंतर गिरावट दर्ज की गई और यह दिसंबर तक घटकर लगभग 1 प्रतिशत रह गई।सामाजिक सेवाएं
* स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, 115 सिविल अस्पतालों, 110 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 586 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा 24 ई.एस.आई. सिविल डिस्पेंसरी सहित एक सुदृढ़ स्वास्थ्य अवसंरचना नेटवर्क के माध्यम से उपचारात्मक, निवारक एवं पुनर्वास सेवाओं का व्यवस्थित रूप से प्रदान करता है।
* हिमाचल प्रदेश के लोगों को राज्य के भीतर और बाहर यात्री परिवहन सेवाएं हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा 3,079 बसों, 110 इलेक्ट्रिक बसों, 38 टैक्सियों, 50 इलेक्ट्रिक टैक्सियों और 12 टेम्पो ट्रैवलर के बेड़े के साथ प्रदान की जा रही हैं।
सरकार अवसंरचना में निवेश, सतत पर्यटन को प्रोत्साहन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर सृजित करने के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विकास के लाभ राज्य के प्रत्येक नागरिक तक पहुँच सकें।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में प्रस्तुत प्रमुख पहलें
हिमाचल प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कई संरचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक सुधार प्रस्तुत किए गए हैं, जिनका उद्देश्य सर्वेक्षण को साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण एवं विकास नियोजन के लिए एक प्रभावी उपकरण के रूप में सुदृढ़ करना है। संशोधित रूपरेखा से स्पष्टता, विश्लेषणात्मक गहराई तथा सुगमता में वृद्धि हुई है, जिससे नीति-निर्माताओं, योजना निर्माताओं, शोधकर्ताओं एवं अन्य हितधारकों को आर्थिक प्रवृत्तियों एवं क्षेत्रीय प्रदर्शन को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलती है।
1. अध्याय-वार कार्यकारी सारांश
2. मुख्य उपलब्धियों पर समर्पित अनुभाग
3. प्रमुख मुद्दों एवं चुनौतियों की पहचान
4. परिणाम-उन्मुख विश्लेषणात्मक ढांचा
5. उभरते विकास क्षेत्रों पर विस्तारित विशेष ध्यान
6. सुदृढ़ आँकड़ा एवं साक्ष्य आधार
7. प्रस्तुतीकरण एवं आँकड़ा दृश्यांकन में सुधार
8. नीति एवं योजना प्राथमिकताओं के साथ सामंजस्य
9. भावी दिशा
उपरोक्त सभी पहलों के माध्यम से आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को अधिक संरचित, विश्लेषणात्मक एवं नीति-उन्मुख दस्तावेज बनाया गया है, जो हिमाचल प्रदेश में सूचना आधारित निर्णय लेने एवं विकास नियोजन को सशक्त बनाता है।

विधायक सुरेश कुमार और कै. रणजीत सिंह ने राजेन्द्र राणा द्वारा 20 मार्च को सोलन में की गई प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों का खंडन
शिमला:विधायक सुरेश कुमार और कैप्टन रणजीत सिंह ने शिमला से जारी प्रेस वक्तव्य के माध्यम से सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेन्द्र राणा द्वारा 20 मार्च को सोलन में की गई प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि राजेन्द्र राणा द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत, भ्रामक और तथ्यों से कोसों दूर हैं। विधायकों ने कहा कि यह बयानबाजी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और मीडिया में जगह बनाने की एक हताश कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। बिना किसी प्रमाण के झूठ का ऐसा पुलिंदा तैयार करना यह दर्शाता है कि विपक्ष के पास जनहित के वास्तविक मुद्दों का पूर्ण अभाव है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास को लेकर जिस प्रकार की कहानियां गढ़ी गई हैं, वह पूरी तरह निराधार हैं। मुख्यमंत्री के सभी कार्यक्रम निर्धारित होते हैं। इस तरह की मनगढ़ंत बातें करना केवल सनसनी फैलाने का प्रयास है। सलाहकारों को लेकर की गई टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक है। जबकि उनके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत सुधार और कार्यान्वयन को गति मिली है। उनको लेकर आपत्तिजनक बातें कहना विपक्ष की हताशा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि एंट्री टैक्स को लेकर गलत आंकड़े पेश किए गए हैं। वास्तविकता यह है कि टैक्स संरचना में किए गए बदलावों का उद्देश्य राजस्व सुदृढ़ करना और विकास कार्यों को गति देना है। पिछले वर्षों में राज्य का अपना राजस्व लगातार बढ़ा है, जिससे सड़कों, स्वास्थ्य और शिक्षा पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। केवल एक आंकड़े को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना भ्रामक है। हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के पास जमीन को लेकर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। जमीन से जुड़े सभी लेन-देन विधिक प्रक्रियाओं के तहत होते हैं। बिना किसी प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना केवल राजनीतिक दुर्भावना का परिचायक है।
विधायकों ने कहा कि प्रदेश में वेतन कटौती और आर्थिक आपातकाल जैसी बातें पूरी तरह काल्पनिक हैं। राज्य सरकार ने पिछले समय में कर्मचारियों और पेंशनरों पर हजारों करोड़ रुपये के लाभ दिए हैं। डी.ए. और अन्य भत्तों को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा रहा है। वेतन कटौती की बात फैलाकर कर्मचारियों में भ्रम और भय पैदा करना पूरी तरह निंदनीय है।
विधायकों ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर भी गलत चित्र पेश किया गया है। यह सही है कि राज्य पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है, लेकिन इसमें से बड़ा हिस्सा पूर्व सरकारों के समय का है। वर्तमान सरकार ने वित्तीय अनुशासन के तहत राजस्व बढ़ाने और अनावश्यक खर्चों में कटौती के कदम उठाए हैं। ठेकेदारों को भुगतान पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है और अब तक हजारों करोड़ रुपये की देनदारियां निपटाई जा चुकी हैं। बजट घोषणाओं को झूठा बताना सरासर गलत है। बजट के माध्यम से बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये के प्रावधान किए गए हैं, जिनका लाभ सीधे आम जनता तक पहुंच रहा है। जमीनी स्तर पर कार्य स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की बयानबाजी केवल प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। विपक्ष बार-बार झूठे आंकड़े और भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह करना चाहता है, लेकिन प्रदेश की जागरूक जनता सच्चाई को समझती है। प्रदेश सरकार विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण के अपने एजेंडे पर मजबूती से आगे बढ़ रही है। हजारों करोड़ रुपये की विकास योजनाएं धरातल पर क्रियान्वित हो रही हैं और आने वाले समय में इनके और बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
विधायकों ने कहा कि इस प्रकार के बेबुनियाद आरोप न तो सरकार की कार्यशैली को प्रभावित कर सकते हैं और न ही जनता के विश्वास को डिगा सकते हैं। विपक्ष को यह समझ लेना चाहिए कि हिमाचल में अब तथ्य और काम की राजनीति चलेगी, न कि झूठ और भ्रम की।

पहाड़ी क्षेत्रों में परियोजनाओं की निर्माण लागत अधिक
जेजेएम 2.0 के लिए केंद्र और हिमाचल प्रदेश के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर
शिमला: भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार के मध्य आज नई दिल्ली में जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री शिमला से वर्चुअल माध्यम से जुड़े, जबकि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल भी वर्चुअली कार्यक्रम में शामिल हुए।
प्रदेश सरकार की ओर से जल शक्ति विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन और भारत सरकार की ओर से संयुक्त सचिव स्वाति नायक ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। जेजेएम 2.0 को दिसंबर, 2028 तक लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत पुनर्गठित पेयजल से संबंधित अधोसंरचना के पुनर्निर्माण के साथ-साथ ग्रामीण पेयजल आपूर्ति क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वर्तमान में सभी एकल ग्राम योजनाओं (एसवीएस) को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनमें वह योजनाएं भी शामिल हैं जिन पर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पहले ही अग्रिम व्यय कर चुके हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं और इसकी तुलना अन्य राज्यों से नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण की लागत तुलनात्मक रूप से काफी अधिक होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अन्य राज्यों के मापदंडों को हिमाचल प्रदेश पर लागू किया जाना अनुचित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंचायती राज संस्थानों के माध्यम से जलापूर्ति योजनाओं के प्रबंधन और वितरण को बढ़ावा दे रही है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार से जेजेएम के तहत लंबित 1,227 करोड़ रुपये जारी करने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए उन्नत एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

महंगाई, बेरोजगारी और बंद होते संस्थान—कांग्रेस सरकार का चौथा बजट भी जनता के साथ धोखा होगा
शिमला: भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल की अध्यक्षता में आज भाजपा प्रदेश कार्यालय, चक्कर (शिमला) में महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में प्रदेश उपाध्यक्षों, प्रदेश महामंत्रियों एवं प्रदेश सचिवों ने भाग लिया। बैठक में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान-2026 की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि, एसआईआर के तहत चल रहे कार्यक्रमों तथा बूथ स्तर पर संचालित अभियानों की भी समीक्षा की गई। साथ ही 6 अप्रैल को पार्टी स्थापना दिवस एवं 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक के पश्चात मीडिया को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला चौथा बजट भी प्रदेश की जनता के साथ एक और बड़ा धोखा साबित होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में कांग्रेस ने झूठी गारंटियों का जाल बिछाकर 65 लाख मतदाताओं के साथ विश्वासघात किया और सत्ता प्राप्त की।
डॉ. बिंदल ने कहा कि कांग्रेस ने 28 लाख महिलाओं को हर महीने ₹1500 देने का वादा किया था, जिसे पहली कैबिनेट में लागू करने की बात कही गई थी, लेकिन आज तक प्रदेश की महिलाओं को एक भी रुपया नहीं मिला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब मुख्यमंत्री ₹1500 की जगह ₹100 देने की बात कर रहे हैं, जो कांग्रेस की नीयत और नीति दोनों को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने युवाओं को 5 लाख रोजगार और 1 लाख सरकारी नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन आज तक एक भी वादा धरातल पर दिखाई नहीं देता। बेरोजगार युवाओं के साथ यह एक बड़ा मजाक है और आने वाला बजट भी उनके साथ छलावा ही साबित होगा।
डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने अब तक लगभग ₹45,000 करोड़ का कर्ज लेकर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को गंभीर संकट में डाल दिया है। इसके बावजूद विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। उन्होंने कहा कि हजारों की संख्या में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद कर दिए गए हैं, भर्तियां रोक दी गई हैं और सड़कों व पेयजल योजनाओं पर काम बंद पड़ा है।
उन्होंने कहा कि एक ओर विकास कार्य ठप हैं, वहीं दूसरी ओर जनता पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ाया जा रहा है। बिजली, पानी, एचआरटीसी किराया, स्टांप ड्यूटी, सीमेंट, पेट्रोल-डीजल और राशन के दामों में भारी वृद्धि की गई है तथा सब्सिडी खत्म कर आम जनता की कमर तोड़ दी गई है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारी, अधिकारी और सेवानिवृत्त वर्ग अपने हकों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। विद्यार्थियों को न तो वर्दी मिल रही है और न ही स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं। बिना योजना और बिना तैयारी के फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों चरमराई हुई हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का तथाकथित “व्यवस्था परिवर्तन” वास्तव में “व्यवस्था पतन” में बदल चुका है और प्रदेश को एक ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया है जहां से वापस लौटना कठिन प्रतीत हो रहा है।
अंत में डॉ. बिंदल ने कहा कि कांग्रेस सरकार पूरी तरह से विफल, दिशाहीन और जनविरोधी साबित हुई है। प्रदेश की जनता अब सच्चाई समझ चुकी है और आने वाले समय में कांग्रेस को इसका जवाब मिलेगा।

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सीआईआई हिमाचल प्रदेश द्वारा शिमला में गुरुवार देर शाम ‘बेहतर कल हेतु भविष्य-उन्मुख हिमाचल प्रदेश का निर्माण: वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए स्थानीय सामर्थ्य का दोहन’ विषय पर आयोजित वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने उद्योगपतियों को पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश की भौगोलिक और पर्यावरणीय विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए हरित उद्योगों को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योगों को हर संभव सहयोग और आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगी तथा पर्यटन और आतिथ्य सत्कार क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटन क्षेत्र में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना भी बना रही है।
राज्य के जिला मुख्यालयों और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट निर्मित किए जा रहे हैं तथा हेली-टैक्सी सेवाओं का संचालन शुरू किया जा चुका है और इन सेवाओं को विस्तार प्रदान करने की योजना है। इसके अलावा कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार का कार्य भी प्रगति पर है।
मुख्यमंत्री ने आश्वासन देते हुए कहा कि उद्योगपतियों का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वे अपनी शिकायतें सीधे उनके संज्ञान में ला सकते हैं। उन्होंने सिंगल-विंडो प्रणाली में सुधार पर बल देते हुए कहा कि उद्योगों से संबंधित सभी स्वीकृतियां एक ही स्थान पर उपलब्ध करवाई जानी चाहिए और उद्योग विभाग को निवेशकों का मार्गदर्शन करना चाहिए।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकांश उद्योग पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों के पास स्थित हैं और सरकार इन क्षेत्रों में बेहतर आधारभूत अधोसंरचना विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि शिमला की तर्ज पर बद्दी में अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट्स निर्मित की जाएंगी और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली लोड की समस्याओं को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊना जिले के हरोली में बल्क ड्रग पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां निवेशकों को प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। बद्दी तक रेलवे सम्पर्क बढ़ाने के लिए राज्य सरकार 50 प्रतिशत लागत वहन कर रही है, जिसमें भूमि अधिग्रहण का खर्च भी शामिल है, इससे बीबीएमबी से जुड़े उद्योगों को भी लाभ होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को ‘लंग्स ऑफ नॉर्थ इंडिया’ (उत्तर भारत की प्राणवायु) और ‘वाटर बाउल’ (जल पात्र) के रूप में जाना जाता है, लेकिन हिमाचल को इसका उचित हिस्सा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) सहायता को बंद कर दिया गया है और वर्तमान सरकार इसे पुनः बहाल करने के लिए प्रयासरत है।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू राज्य के पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंनेे संसाधन जुटाने की दिशा में विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों ने लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। वर्ष 2024 में राज्य ने राजनीतिक संकट भी देखा, लेकिन सरकार ने इन तमाम चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया। राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित लोगों को अपने संसाधनों से सहायता प्रदान की। इसके विपरीत प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद, राज्य के आपदा प्रभावित परिवार अब भी केंद्र से 1,500 करोड़ रुपये की सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश उद्योग स्थापित करने के लिए उद्योग निवेशी नीतियों और वातावरण प्रदान करता है। यहां बिजली की कोई कमी नहीं है और कानून-व्यवस्था भी सुदृढ़ है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य कर रहा है और स्थानीय उत्पादों की खरीद को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब हम स्थानीय उत्पादों को चुनते हैं, तो हम केवल अपने उद्यमों का समर्थन नहीं करते, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, स्थानीय आजीविकाओं का निर्माण करतेे हैं और आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश की नींव रखते हैं।

शिमला : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि आज देश में कमजोर होती मुद्रास्फीति, बढ़ती महंगाई,बेरोजगारी व पेट्रोलियम, एलपीजी की भारी कमी व गंभीर हालात के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह जिम्मेवार है। ट्रम्प के हाथ की कठपुतली बन कर प्रधानमंत्री ने देश की विदेश नीति को कमजोर कर दिया है और यही वजह है कि आज देश पश्चिमी देशों के युद्ध के चलते गंभीर चुनौतियो का सामना करने पर मजबूर हो गया है।
विनय कुमार ने आज यहां कहा कि देश में बढ़ती एलपीजी की कमी की वजह से आम लोग बहुत ही परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री ट्रम्प के हाथों न खेलते तो आज देश में न तो पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी होती और न ही एलपीजी की कोई कमी। देश की अर्थव्यवस्था को तहस नहस करने के लिये मोदी सरकार की नीतियां पूरी तरह जिम्मेदार है।
विनय कुमार ने केंद्र की मोदी सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संसद में न बोलने का आरोप लगाते हुए कहा संविधान व लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए विनय कुमार ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने की वजह से प्रदेश के हितों व अधिकारों का हनन किया जा रहा है। राजस्व घाटा अनुदान बंद करना प्रदेश के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। इस अन्याय को सहन नहीं किया जा सकता।
विनय कुमार ने प्रदेश से चुन कर गए सभी भाजपा सांसदों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि प्रदेशहित में उनकी जुबान भी पूरी तरह बंद है। उनकी आंखों पर राजनीति का चश्मा चढ़ा है। उन्हें प्रदेश की नहीं,अपनी राजनीति की ज्यादा चिंता है। प्रदेश भाजपा के सभी नेता अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।
विनय कुमार ने कहा है कि प्रदेश के लोग भाजपा को कभी माफ नहीं करेंगे। प्रदेश के लोग कल भी कांग्रेस के साथ थे और आगे भी रहेंगे। लोग भाजपा के झूठ को देख व जान चुके हैं और अब वह उनके किसी भी झांसे में आने वाले नहीं।

शिमला: विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भाजपा की ओर से सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा गया कि वर्तमान सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए लगातार विपक्ष, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी, पर दोष मढ़ने का प्रयास कर रही है।
भाजपा नेता ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण किसी भी सरकार का आईना होता है, लेकिन इस बार अभिभाषण को जिस प्रकार जल्दबाजी में समाप्त किया गया, वह कई सवाल खड़े करता है। अभिभाषण में स्वयं राज्यपाल द्वारा की गई टिप्पणियों पर सरकार को गंभीरता से मंथन करने की आवश्यकता है, विशेषकर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर उठाए गए मुद्दों पर।
राकेश जमवाल ने कहा कि सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री, मंत्री और सत्ता पक्ष के विधायक लगातार भाजपा पर आरोप लगाने में ही लगे रहे, जबकि वास्तविकता यह है कि प्रदेश की वर्तमान स्थिति के लिए पूरी तरह सरकार स्वयं जिम्मेदार है। वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश का पक्ष प्रभावी ढंग से न रख पाना भी सरकार की बड़ी विफलता है।
भाजपा ने आरोप लगाया कि यह सरकार संवैधानिक पदों और संस्थाओं का सम्मान नहीं करती। राज्यपाल, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और यहां तक कि न्यायपालिका तक पर टिप्पणी करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। हाल ही में एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा राज्यपाल और देश के वरिष्ठ नेताओं पर की गई टिप्पणियां इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार मर्यादाओं को लगातार तोड़ रही है।
नेता प्रतिपक्ष के दिल्ली दौरे को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी भाजपा विधायक राकेश जमवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि प्रदेश के हितों के लिए केंद्र से संवाद करना गलत है, तो मुख्यमंत्री स्वयं विपक्ष के साथ दिल्ली जाकर प्रदेश के मुद्दे उठाने का साहस क्यों नहीं दिखाते।
राकेश जमवाल ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा गया कि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे पूरी तरह खोखले साबित हुए हैं। सुंदरनगर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया गया कि सिविल अस्पताल को अपग्रेड तो कर दिया गया, लेकिन भवन निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। पूर्व भाजपा सरकार द्वारा शुरू किए गए कई प्रोजेक्ट्स को वर्तमान सरकार ने या तो रोक दिया है या उनकी गति धीमी कर दी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के ट्रांसफर कर दिए गए, लेकिन उनकी जगह नई नियुक्तियां नहीं हुईं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर रेडियोलॉजी, अल्ट्रासाउंड और अन्य आवश्यक सेवाएं तक प्रभावित हैं।
राकेश जमवाल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रदेश में 1000 करोड़ रुपये से अधिक के भवन और आधारभूत ढांचे तैयार किए गए, लेकिन वर्तमान सरकार उन्हें भी “अनावश्यक” बताकर काम रोक रही है। सुंदरनगर में स्टाफ क्वार्टर, सीएचसी भवन और इंडोर स्टेडियम जैसे महत्वपूर्ण कार्य अधर में लटके हुए हैं। सरकार की गारंटियों पर सवाल उठाते हुए भाजपा ने कहा कि चुनाव के समय किए गए वादों को पूरा करने में सरकार पूरी तरह विफल रही है और आने वाले समय में जनता इसका जवाब देगी।
भाजपा नेता ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में प्रदेश सरकार की अपनी कोई ठोस उपलब्धि नजर नहीं आई, बल्कि अधिकतर योजनाएं केंद्र सरकार की थीं। ऐसे में बेहतर होता कि सरकार केंद्र का आभार व्यक्त करती, जो हिमाचल के विकास के लिए लगातार सहयोग कर रही है।
अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने एक शेर के माध्यम से सरकार पर निशाना साधा—
“उम्र भर ये भूल करता रहा,
धूल चेहरे पर थी और मैं आईना साफ करता रहा।”
उन्होंने कहा कि सरकार को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी कमियों को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

शिमला: एसजेवीएन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता, ने पार्थजीत डे को नवरत्न सीपीएसई एसजेवीएन के निदेशक (वित्त) के रूप में कार्यभार ग्रहण कर करने पर हार्दिक बधाई दी और एसजेवीएन में उनका स्वागत किया।
एसजेवीएन में शामिल होने से पूर्व, पार्थजीत डे एनएचपीसी लिमिटेड में कार्यरत रहे, जहाँ वह निगम मुख्यालय में निगमित लेखा एवं नीति अनुभाग, निगमित कर प्रकोष्ठ एवं कर्मचारी लाभ न्यासों के प्रभारी रहे। उन्होंने एनएचपीसी की अधीनस्थ कंपनी, लोकतक डाउनस्ट्रीम हाइड्रोइलेक्ट्रिक कारपोरेशन लिमिटेड के निदेशक मंडल में नामित निदेशक के रूप में भी कार्य किया।
पार्थजीत डे नवंबर, 1998 में एनएचपीसी में ट्रेनी अधिकारी (वित्त) के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की और उन्होने निगमित लेखा, कराधान, वित्तीय प्रणालियों और अनुबंधों के क्षेत्रों में 27 वर्षों से अधिक का व्यापक कारोबारी अनुभव हासिल किया है। इनके व्यापक अनुभव में भारतीय लेखा मानकों, कराधान कानूनों, टैरिफ विनियमों और कारपोरेट प्रशासन की गहन सूझ-बुझ शामिल है, जो विद्युत क्षेत्र की परियोजनाओं की अभियोजना, विकास एवं प्रचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पार्थजीत डे ने रंगित प्रोजेक्ट (सिक्किम), तीस्ता लो डैम प्रोजेक्ट (पश्चिम बंगाल), सियांग बेसिन प्रोजेक्ट (अरुणाचल प्रदेश) और ग्रामीण सड़क प्रोजेक्ट (बिहार) सहित कई प्रोजेक्ट स्थलों पर अपनी सेवाएँ प्रदान की हैं। उन्होंने एनएचपीसी में भारतीय लेखा मानकों को प्रथम बार अपनाने के लिए गठित समिति का नेतृत्व भी किया।
डे इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया के फेलो सदस्य हैं और इनके पास चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट तथा सीजीएमए योग्यताएँ भी हैं।

नाहन : उपायुक्त सिरमौर एवं आयुक्त मंदिर न्यास माता बाला सुन्दरी, प्रियंका वर्मा ने आज श्री महामाया बालासुंदरी माता मंदिर त्रिलोकपुर में परिवार सहित विधिवत रूप से पूजा -अर्चना व हवन यज्ञ कर चैत्र नवरात्र मेले का शुभारंभ किया तथा जिला वासियों को नवरात्र पर्व की शुभकामनाएँ दी।
इस अवसर पर उन्होंने बताया कि आज से 02 अप्रैल, तक आयोजित होने वाले इस चैत्र नवरात्र मेला त्रिलोकपुर में 3000 हजार दिपों को प्रकाशित कर महाआरती का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि माता बालासुंदरी मेला त्रिलोकपुर में हिमाचल से ही नहीं, बल्कि हरियाणा सहित अन्य राज्य से भी बहुत अधिक संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए आते है। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए उनकी सुरक्षा हेतू मेला स्थल व आस पास के क्षेत्र में उचित कानून व्यवस्था की गई है।
पुलिस तथा होमगार्ड जवानों सहित मंदिर न्यास समिति के सुरक्षा कर्मियों को मेले के दौरान सुरक्षा व शांति व्यवस्था पर कड़ी नजर बनाए रखने के आदेश दिए गए है।
उन्होंने बताया कि मेला के दौरान प्राथमिक उपचार व अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के अतिरिक्त आपातकालीन स्थिति के लिए एम्बुलेंस सेवा भी उपलब्ध रहेगी।
इसके उपरान्त उन्होंने मेला स्थल व परिसर में साफ सफाई, पेयजल तथा बिजली की सप्लाई की उचित व्यवस्था इत्यादि प्रबंधो का भी जायजा लिया तथा मेला अधिकारियों को मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा उनकी सभी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखने को भी कहा।
उपायुक्त ने दर्शन के लिए आने वाले श्रद्घालुओं से साफ-सफाई, शांति व अनुशासन बनाए रखने में सहयोग करने का आह्वान किया।