ब्लॉग

शिमला में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस ने मनाया काला दिवस…

शिमला: जिला शिमला कांग्रेस कमेटी शहरी और ग्रामीण की ओर से मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस नेताओं और सांसदों के साथ कथित दुर्व्यवहार व गिरफ्तारी के विरोध में काला दिवस मनाया गया।

जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने अपने हाथों पर काले रिबन बांधकर सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर अलोकतांत्रिक ढंग से विपक्ष की आवाज को कुचलने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता खतरे में है। कांग्रेस ने विपक्ष के प्रमुख नेताओं को अवैध रूप से हिरासत में लेने (डिटेन करने) और उनके साथ की गई बदसलूकी की कड़े शब्दों में निंदा की। नेताओं ने कहा कि सरकार की यह कार्रवाई पूरी तरह से तानाशाही और अलोकतांत्रिक है।

इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष अमित नंदा , सोनिया, कृष्णा, रीना पुंडीर, बबली , जिला कमेटी शिमला शहरी के दीपक सुंद्रियाल, रवि राणा, कुश पाल सिंह,​ ​जय प्रकाश, ​उमा वर्मा ,महासचिव ​मुकेश भाटिया, ​दीक्षित जोगटा, ​सुमित गौतम,​सचिव गुरविंदर सिंह, ​पुनीत, गौरव, संदीप ठाकुर , महिन्द्रजीत बबलू ,पंकज, रंजीत कर्नल, कुमार मौजूद रहे।

 ​वहीं जिला शिमला कांग्रेस कमेटी शहरी व ग्रामीण ने भी आज उपायुक्त कार्यालय शिमला के समक्ष मौन प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन नई दिल्ली में शीर्ष नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की अवैध हिरासत, तथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग कार्यालय दिल्ली की ओर शांतिपूर्ण मार्च कर रहे 300 से अधिक सांसदों के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए दुर्व्यवहार व गिरफ्तारी के खिलाफ किया गया।

​ पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने  डीसी कार्यालय के समक्ष हाथों में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ काला दिवस की तख्तियों के साथ  मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग दोहराई।

​ ​आज के इस धरना प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष अमित नंदा, कैलाश फेडररेशन के अध्यक्ष बलदेव ठाकुर, डीसीसी शिमला ग्रामीण के अध्यक्ष हरि कृष्ण, डीसीसी शहरी अध्यक्ष इंदरजीत के अतिरिक्त पवन वर्मा, देवेंद्र ठाकुर, संधिरा शीनू, महेश वर्मा, अनु ठाकुर, दीपक सुंदरियाल, रीना पंढरी, सोनिया चौहान, रीना कश्यप, मुकेश भाटिया, प्रियंका, अनीता शर्मा, विक्रम ठाकुर, जितेंद्र ब्रागटा, संजय ठाकुर, कुलदीप कुमार के अतिरिक्त पार्टी के कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता इस धरना प्रदर्शन में शामिल हुए।

हिमाचल चयन आयोग: जेई सिविल की भर्ती परीक्षा का परिणाम घोषित

हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) ने जूनियर इंजीनियर (सिविल) के 149 पदों को पोस्ट कोड-26016 के अंतर्गत ट्रेनी आधार पर भरने के लिए आयोजित कंप्यूटर बेस्ड स्क्रीनिंग टेस्ट (सीबीटी) का परिणाम घोषित कर दिया है। यह परीक्षा परिणाम आयोग की वेबसाइट एचपीआरसीए.एचपी.जीओवी.इन पर उपलब्ध करवा दिया गया है।

आयोग के सचिव डॉ. विक्रम महाजन ने बताया कि इन पदों के लिए 8192 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 6726 उम्मीदवारों ने सीबीटी परीक्षा दी थी। इस परीक्षा में उत्तीर्ण 372 उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जा रहा है, जोकि 15 अक्तूबर से आरंभ होगी। इसका शेड्यूल अलग से तय किया जाएगा। इसकी सूचना उम्मीदवारों को उनकी ईमेल आईडी पर दी जाएगी। उन्हें अलग से बुलावा पत्र नहीं भेजे जाएंगे। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय इन उम्मीदवारों को अपने साथ सभी आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रतियां, इनकी सेल्फ अटेस्टड फोटो प्रतियों के दो-दो सैट, आवेदन पत्र की डाउनलोडड कॉपी और आईडी प्रूफ इत्यादि साथ लाने होंगे।

सचिव ने बताया कि अगर कोई उम्मीदवार निर्धारित तिथि को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए उपस्थित नहीं होता है तो उसे कोई और अवसर नहीं दिया जाएगा।

हमीरपुर : जेबीटी शिक्षकों के 13 पदों पर बैचवाइज भर्ती

हिमाचल चयन आयोग: मेडिकल सोशल वर्कर की भर्ती परीक्षा का परिणाम घोषित

हमीरपुर : हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) ने मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में मेडिकल सोशल वर्कर के 2 पदों को पोस्ट कोड-26006 के अंतर्गत भरने के लिए आयोजित कंप्यूटर बेस्ड स्क्रीनिंग टेस्ट (सीबीटी) का परिणाम घोषित कर दिया है। यह परीक्षा परिणाम आयोग की वेबसाइट एचपीआरसीए.एचपी.जीओवी.इन पर उपलब्ध करवा दिया गया है।

आयोग के सचिव डॉ. विक्रम महाजन ने बताया कि इन पदों के लिए 162 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 98 उम्मीदवारों ने सीबीटी परीक्षा दी थी। इस परीक्षा में उत्तीर्ण 9 उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जा रहा है, जोकि 15 अक्तूबर को होगी। इसकी सूचना उम्मीदवारों को उनकी ईमेल आईडी पर दी जाएगी। उन्हें अलग से बुलावा पत्र नहीं भेजे जाएंगे। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय इन उम्मीदवारों को अपने साथ सभी आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रतियां, इनकी सेल्फ अटेस्टड फोटो प्रतियों के दो-दो सैट, आवेदन पत्र की डाउनलोडड कॉपी और आईडी प्रूफ इत्यादि साथ लाने होंगे।
सचिव ने बताया कि अगर कोई उम्मीदवार निर्धारित तिथि को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए उपस्थित नहीं होता है तो उसे कोई और अवसर नहीं दिया जाएगा।

हिमाचल चयन आयोग: शारीरिक शिक्षा अध्यापक और संस्कृत शिक्षक की भर्ती परीक्षा 27 को

हमीरपुर : हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) हमीरपुर ने शारीरिक शिक्षा अध्यापकों और संस्कृत शिक्षकों की भर्ती के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) की तिथि घोषित कर दी हैं। आयोग के सचिव डॉ. विक्रम महाजन ने बताया कि शारीरिक शिक्षा अध्यापक (प्रारंभिक) पोस्ट कोड-26024, संस्कृत शिक्षक पोस्ट कोड-26023 और शिक्षक (शारीरिक शिक्षा) पोस्ट कोड-26035 की सीबीटी परीक्षा 27 अक्तूबर को होगी।

डॉ. विक्रम महाजन ने बताया कि परीक्षा से एक सप्ताह पहले आयोग की वेबसाइट एचपीआरसीए.एचपी.जीओवी.इन पर एक लिंक का प्रावधान किया जाएगा, जिससे अभ्यर्थी अपना रोल नंबर एवं एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे। रोल नंबर और परीक्षा केंद्र की जानकारी मोबाइल फोन पर एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएगी।

सचिव ने सभी अभ्यर्थियों से नियमित रूप से आयोग की वेबसाइट पर या अपने मोबाइल पर एसएमएस और ईमेल पर ताजा स्टेटस चेक करते रहने की अपील की है। अधिक जानकारी के लिए आयोग के कार्यालय में या दूरभाष नंबर 01972-222204 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

नई दिल्ली : चुनाव आयोग के खिलाफ ‘INDIA’ का धरना; CM सुक्खू भी हुए शामिल…

नई दिल्ली : नई दिल्ली स्थित राजघाट में चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राजघाट पर ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा आयोजित शांतिपूर्ण धरने में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी एवं संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के साथ हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू समेत कई विपक्षी नेता मौजूद रहे।

CM सुक्खू ने बच्चों से किया वायदा निभाया, स्कूल भवनों के लिए चार करोड़ रुपये जारी

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम के दौरान बच्चों और स्थानीय लोगों से किए वायदे को पूरा करते हुए शिमला जिला के रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र के भटवाड़ी और रामपुर विधानसभा क्षेत्र के काशापाट के लिए विकास कार्यों की सौगात दी है। रामपुर स्कूल में विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान एक छात्रा ने मुख्यमंत्री से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रचौली के नए भवन के निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने बच्चों की इस मांग को प्राथमिकता देते हुए घोषणा की थी, जिसे अब योजना विभाग ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसी प्रकार, काशापाट स्कूल के नए भवन के निर्माण के लिए भी दो करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। इस तरह मुख्यमंत्री ने बच्चों से किया अपना वायदा निभाते हुए शिक्षा के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री ने अपने प्रवास के दौरान जनता की मांगों को गंभीरता से सुना और अब उनकी घोषणाओं के अनुरूप धनराशि जारी कर यह सुनिश्चित किया है कि विकास कार्यों को शीघ्र गति मिल सके। उनके प्रवास के दौरान स्थानीय लोगों की मांगों पर की गई कुल नौ घोषणाओं के लिए 15.75 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। इससे क्षेत्र में सड़क, पुल, फुट ब्रिज, क्रैश बैरियर तथा अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।
रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र के तांगणू-जांगलिक पंचायत क्षेत्र में स्थानीय लोगों की मांग पर मुख्यमंत्री ने सुंदरु खड्ड पर पुल निर्माण के लिए चार करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी, जिसके लिए धनराशि अब जारी कर दी गई है। इसके अतिरिक्त बरशील पुल के लिए एक करोड़ रुपये तथा शिशारा में फुट ब्रिज के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी जारी की गई है। इसके अलावा रोहड़ू में अंबेडकर भवन के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है। इस संबंध में योजना विभाग द्वारा स्वीकृति पत्र लोक निर्माण विभाग को भेज दिया गया है।
इसी प्रकार, रामपुर विधानसभा क्षेत्र के काशापाट में स्थानीय लोगों की मांग को पूरा करते हुए धनदोल से काशापाट तक क्रैश बैरियर लगाने के लिए दो करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। जबल से खाबल सड़क के सुधार तथा क्रैश बैरियर लगाने के लिए भी दो करोड़ रुपये स्वीकृति किए गए हैं।
‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम केवल जनसंवाद का माध्यम नहीं बन रहा बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान और मौके पर किए गए वायदों को धरातल पर उतारने का प्रभावी माध्यम बन गया है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, आम लोगों की मांगों को संवेदनशीलता से सुनना और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की कार्यशैली की विशेष पहचान बनकर उभरा है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रवास के दौरान की गई घोषणाओं पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक धनराशि जारी की जा रही है। 

कांग्रेस का एसआईआर के खिलाफ आंदोलन असंवैधानिक, जनता में भ्रम फैला रही कांग्रेस – रणधीर शर्मा

शिमला: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं श्री नैना देवी जी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रणधीर शर्मा ने शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में चलाए जा रहे आंदोलन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक संवैधानिक व्यवस्था के विरुद्ध आंदोलन करके जनता में भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कांग्रेस के इस आंदोलन को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि संविधान की दुहाई देने वाले कांग्रेस नेताओं को पहले संविधान और चुनाव संबंधी कानूनों का अध्ययन करना चाहिए।

रणधीर शर्मा ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के अंतर्गत चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि देश में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण कोई नई प्रक्रिया नहीं है। इससे पहले भी विभिन्न अवसरों पर यह प्रक्रिया अपनाई गई है और कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल में भी मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण हुआ है। उन्होंने कहा कि 2002 से 2004 के बीच भी यह प्रक्रिया अपनाई गई थी और वर्ष 2025 में पुनः विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू हुआ। ऐसे में कांग्रेस द्वारा आज उसी व्यवस्था का विरोध करना उसकी राजनीतिक सोच में विरोधाभास को दर्शाता है।

भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और उनकी पार्टी के अन्य नेता लंबे समय से वोट चोरी के आरोप लगाते रहे हैं। कभी एक व्यक्ति का नाम दो स्थानों की मतदाता सूची में होने का आरोप लगाया जाता है, तो कभी फर्जी मतदाताओं का मुद्दा उठाया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि जब एसआईआर का उद्देश्य ही मतदाता सूचियों की जांच करना, दोहरे नामों की पहचान करना, अपात्र प्रविष्टियों को हटाना और पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित करना है, तो कांग्रेस इसका विरोध क्यों कर रही है?

रणधीर शर्मा ने कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में मतदाता सूचियों में अनियमितताओं को लेकर गंभीर है तो उसे इस प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले मतदाता सूचियों पर सवाल उठाती है और जब उनकी जांच एवं पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होती है तो उसका विरोध करने लगती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके वोट चोरी के आरोप तथ्यों पर आधारित थे या केवल राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा थे।

उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान की पुस्तक हाथ में लेकर राजनीतिक बयान देने से संविधान की समझ प्रमाणित नहीं होती। संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन करना और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिस मतदाता सूची में अनियमितताओं का वह आरोप लगाता है, उसी सूची के पुनरीक्षण का विरोध किस आधार पर किया जा रहा है।

रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का चुनावी प्रक्रिया के प्रति दृष्टिकोण भी विरोधाभासी रहा है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस किसी चुनाव में जीतती है तो वह उसे जनता का जनादेश बताती है, लेकिन चुनाव हारने पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े करने लगती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ईवीएम से हुए विधानसभा चुनावों के बाद ही बनी है। कर्नाटक में भी कांग्रेस ईवीएम के माध्यम से हुए चुनाव में जीती और पंजाब में कांग्रेस की सहयोगी आम आदमी पार्टी की सरकार भी ईवीएम से हुए चुनावों के परिणामस्वरूप बनी। ऐसे में कांग्रेस को बताना चाहिए कि जिन राज्यों में वह जीतती है, वहां ईवीएम सही कैसे हो जाती है और जहां हारती है, वहां उसी व्यवस्था पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं?

रणधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ किए गए विरोध प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों से संवैधानिक मर्यादाओं के पालन की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनके सहयोगी मंत्री राजनीतिक विरोध के दौरान संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का ध्यान नहीं रख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री जिस चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से निर्वाचित होकर सत्ता में आए हैं, आज उसी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि यदि कांग्रेस का मानना है कि ईवीएम या चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में गंभीर गड़बड़ी है, तो क्या मुख्यमंत्री अपनी स्वयं की चुनावी जीत पर भी सवाल उठाएंगे? क्या वह अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं?

रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार को राष्ट्रीय चुनाव आयोग पर आरोप लगाने से पहले हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के साथ अपने व्यवहार की भी समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनावों के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों, अधिसूचनाओं और चुनाव संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर सरकार का रवैया टकरावपूर्ण रहा है। आरक्षण, पुनर्गठन, मतदाता सूचियों और चुनावी तैयारियों जैसे विषयों पर सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच उत्पन्न विवादों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं के प्रति एक समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हालिया स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम कांग्रेस के आरोपों पर भी सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने दावा किया कि चार नगर निगमों के चुनाव में तीन स्थानों पर भाजपा को सफलता मिली, जबकि एक स्थान पर कांग्रेस विजयी रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिन चुनावों में वह जीती, क्या वहां भी ईवीएम की विश्वसनीयता पर उसे संदेह है?

उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव बैलेट पेपर से संपन्न हुए और उनमें भी भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को व्यापक जनसमर्थन मिला। जिला परिषदों, पंचायत समितियों तथा पंचायत स्तर पर मिले समर्थन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मतदाता अपनी पसंद व्यक्त करने में सक्षम हैं, चाहे मतदान ईवीएम से हो या बैलेट पेपर से। लोकतंत्र में चुनाव परिणामों का सम्मान किया जाना चाहिए।

रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने संगठन की आंतरिक समस्याओं और राजनीतिक कमजोरियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए चुनाव आयोग तथा चुनावी प्रक्रिया को लगातार विवादों में ला रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी नीतियों, नेतृत्व और संगठनात्मक स्थिति पर आत्मचिंतन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में एसआईआर के मुद्दे पर मुख्यमंत्री और मंत्रियों का स्वयं सड़कों पर उतरना कांग्रेस संगठन की स्थिति पर भी सवाल खड़े करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या कांग्रेस के पास अब आंदोलन करने के लिए पर्याप्त कार्यकर्ता नहीं बचे हैं कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों को स्वयं मोर्चा संभालना पड़ रहा है?

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए रणधीर शर्मा ने कहा कि एसआईआर से संबंधित विषय न्यायालय के समक्ष भी विचाराधीन हैं और चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने कहा कि जिन राजनीतिक दलों को किसी प्रक्रिया पर आपत्ति है, उन्हें तथ्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी मतदाता सूचियों की पारदर्शिता, शुद्धता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा की पक्षधर है। मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटना नहीं चाहिए और अपात्र या दोहरी प्रविष्टियों का भी नियमानुसार निस्तारण होना चाहिए।

रणधीर शर्मा ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनहित और राष्ट्रहित में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर निराधार आरोप लगाने के बजाय जनता के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए तथा अपनी राजनीतिक स्थिति का आत्ममंथन करना चाहिए।

तीन दिवसीय हिमाचल दौरे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु दिल्ली रवाना

हिमाचल: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का तीन दिवसीय हिमाचल दौरा राष्ट्रपति और प्रदेश की जनता के बीच आत्मीय एवं स्नेहपूर्ण संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने वाला रहा। यह बात राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने राष्ट्रपति के हिमाचल प्रदेश दौरे के समापन पर मनाली स्थित डीआरडीई हेलीपैड पर उन्हें गरिमापूर्ण विदाई देने के उपरांत कही।
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रपति की हिमाचल प्रदेश में उपस्थिति प्रदेशवासियों के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय रही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति, आत्मीयता तथा लोगों के साथ उनके संवाद ने इस यात्रा को विशेष बनाया। इसकी स्मृतियां लंबे समय तक लोगों के मन में बनी रहेंगी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान एम्स बिलासपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में भाग लेने के साथ-साथ अटल टनल, कुल्लू जिला के मनाली में स्थित ऐतिहासिक हिडिंबा माता मंदिर और मॉल रोड तथा लाहौल स्पीति जिला के सिस्सू का भ्रमण भी शामिल रहा। एम्स बिलासपुर के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्वारा दिए गए संबोधन का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मानवता की सेवा तथा दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने पर उनका विशेष बल अत्यंत प्रेरणादायी है और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का यह संदेश युवा चिकित्सकों को अपने ज्ञान एवं कौशल को प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सेवा के लिए समर्पित करने के लिए प्रेरित करेगा।
राज्यपाल ने कहा कि अटल टनल का दौरा हिमाचल प्रदेश में बढ़ती कनेक्टिविटी और राज्य के सामरिक महत्व को रेखांकित करता है, जबकि हिडिंबा माता मंदिर की यात्रा प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का यह दौरा देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद और हिमाचल की जनता के बीच गहरे एवं आत्मीय संबंधों की अभिव्यक्ति भी रहा।
राज्यपाल ने राष्ट्रपति द्वारा हिमाचल प्रदेश में बिताए गए बहुमूल्य समय के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

एचपीएमसी निदेशक मंडल की 222वीं बैठक आयोजित; निगम के आधुनिकीकरण, डिजिटल सुधार और वाणिज्यिक विस्तार से संबंधित लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय

हिमाचल: प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम लिमिटेड (एचपीएमसी) के निदेशक मंडल की 222वीं बैठक आज राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जनशिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आयोजित हुई।
बैठक में निगम के विभिन्न ऑपरेशनल, वाणिज्यिक एवं विकासात्मक विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई। निदेशक मंडल ने एचपीएमसी को और अधिक सुदृढ़ बनाने, प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए नए एवं व्यापक मार्केट अवसर विकसित करने तथा राज्य के फल उत्पादकों एवं बागवानों को अधिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों को स्वीकृति दी।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी के खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों के आधुनिकीकरण एवं उन्नयन पर विशेष बल दिया। इसका उद्देश्य प्रसंस्करण दक्षता में सुधार, उत्पादों की गुणवत्ता एवं मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना तथा उपलब्ध आधारभूत संरचना का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत एचपीएमसी के उत्पादों के प्रचार-प्रसार, ब्रांडिंग एवं विपणन को भी सुदृढ़ किया जाएगा जिससे घरेलू बाजार के साथ-साथ उभरते हुए नए बाजारों में निगम की उपस्थिति को विस्तार मिल सकेगा। इस परियोजना पर लगभग 1.69 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी।
बैठक में एचपीएमसी खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र, पराला में एप्पल सनैप्स संयंत्र स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की गई। इसका उद्देश्य प्रदेश में उत्पादित सेब के बेहतर उपयोग, प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन के लिए अतिरिक्त अवसर सृजित करना है।
यह परियोजना प्रदेश की सेब अर्थव्यवस्था से जुड़े वाणिज्यिक तंत्र को और मजबूत करने के साथ-साथ बागवानी उपज के विविध एवं बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करेगी। परियोजना की अनुमानित लागत 8.19 करोड़ रुपये है।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी के लिए हिमाचल प्रदेश से बाहर कियोस्क स्थापित करने संबंधी नई नीति को भी स्वीकृति प्रदान की। इससे एचपीएमसी के उत्पादों की अधिक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने और निगम की ब्रांड वैल्यू को बढ़ावा मिलेगा।
नई कियोस्क नीति के माध्यम से एचपीएमसी के उत्पादों के विपणन के लिए अतिरिक्त चैनल विकसित किए जाएंगे। साथ ही, उपयुक्त स्थानों पर कियोस्क स्थापित कर निगम के उत्पादों को नए उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाने तथा ‘एचपीएमसी’ ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलवाने के प्रयास किए जाएंगे।
निदेशक मंडल ने मंडी मध्यस्थता योजना के तहत किए जा रहे सुधारों तथा एचपीएमसी की कार्यप्रणाली के आधुनिकीकरण की भी समीक्षा की।
इस अवसर पर बागवानों से संबंधित रिकॉर्ड एवं प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण पर विशेष बल दिया गया। बैठक में एमआईएस सपोर्ट प्राइस में एक प्रति रुपये किलोग्राम की बढ़ोतरी के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया कि गया जिससे फल उत्पादकों और बागवानों को अतिरिक्त सहायता मिली है।
बागवानों से संबंधित रिकॉर्ड एवं प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित एवं सुलभ बनाने के लिए एचपीएमआईएम वेब पोर्टल एवं मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई।
डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किसानों एवं बागवानों के व्यक्तिगत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने एवं उनके सुव्यवस्थित रख-रखाव की सुविधा उपलब्ध हुई है। इससे उनके मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, दक्ष एवं त्वरित बनी है। यह प्रणाली भविष्य में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को सुगम बनाने के साथ-साथ पारंपरिक मैनुअल रिकॉर्ड-रखरखाव पर निर्भरता को कम करने में भी सहायक होगी।
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि निगम द्वारा की जा रही डिजिटल पहल का मूल उद्देश्य किसानों एवं बागवानों को बिना किसी अतिरिक्त लागत के अधिक सुविधा एवं सरल सेवाएं उपलब्ध कराना है। साथ ही, इन पहलों के माध्यम से एचपीएमसी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, रिकॉर्ड की ट्रेसबिलिटी, जवाबदेही एवं कार्यकुशलता को और सुदृढ़ किया जा रहा है।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी की निष्क्रिय एवं कम उपयोग में लाई जा रही परिसंपत्तियों तथा सुविधाओं के मॉनेटाइजेशन और उनके अधिकतम उपयोग संबंधी प्रस्ताव की भी समीक्षा की। ऐसी परिसंपत्तियों को उत्पादक एवं व्यावसायिक उपयोग में लाने के लिए विभिन्न संभावनाओं पर विचार किया गया। विशेष रूप से मुंबई, चेन्नई एवं कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से इन परिसंपत्तियों के प्रभावी उपयोग की संभावनाएं तलाशने पर चर्चा हुई।
इस पहल का उद्देश्य निगम के लिए अतिरिक्त राजस्व सृजित करना, परिसंपत्तियों के उपयोग की दक्षता बढ़ाना तथा निष्क्रिय आधारभूत ढांचे के रख-रखाव से जुड़े वित्तीय भार को कम करना है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसी सभी व्यवस्थाओं में एचपीएमसी के व्यावसायिक एवं संस्थागत हित पूरी तरह सुरक्षित रहें।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी के उत्पादों के निर्यात को देश के व्यापक बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक विस्तारित करने के लिए आवश्यक उपायों पर भी चर्चा की।
इस दिशा में उपयुक्त बाजारों की पहचान, उत्पादों की प्रभावी ब्रांड पोजिशनिंग, विपणन रणनीति को सुदढ़ करने तथा मार्केटिंग एवं निर्यात संपर्क-संबंध विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य एचपीएमसी के उत्पादों की बाजार क्षमता को बढ़ाना तथा निगम के लिए नए व्यावसायिक अवसरों का सृजन करना है।
उद्योग मंचों, बिजनेस मीट्स एवं अन्य संबंधित आयोजनों में एचपीएमसी की सक्रिय भागीदारी से निगम को व्यापक ब्रांड प्रचार, व्यावसायिक नेटवर्किंग, नए बाजार संपर्क, संभावित व्यापारिक साझेदारियों तथा नए वाणिज्यिक अवसरों की तलाश के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध होंगे।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि एचपीएमसी द्वारा की जा रही सभी पहलों का अंतिम उद्देश्य बागवानी क्षेत्र में अधिक मूल्यवर्धन, बेहतर बाजार पहुंच और व्यापक व्यावसायिक अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए, ताकि इनका प्रत्यक्ष एवं दीर्घकालिक लाभ प्रदेश के किसानों एवं बागवानों तक पहुंच सके।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी को एक आधुनिक, व्यावसायिक रूप से सक्षम, दक्ष एवं किसान-बागवान केंद्रित संगठन के रूप में विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके लिए निगम की उपलब्ध आधारभूत संरचना का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग, प्रसंस्करण एवं विपणन क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण, डिजिटल तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाना तथा देश-विदेश के नए बाजारों की संभावनाओं का निरंतर अन्वेषण किया जाएगा।
बैठक में एचपीएमसी उपाध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार शर्मा, सचिव बागवानी सी.पॉलरासू, प्रबन्ध निदेशक डी.सी. राणा, विशेष सचिव वित्त विजय वर्धन, निदेशक बागवानी सतीश कुमार और निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।

हिमाचल ने GST परिषद् की 57वीं बैठक में लिया भाग

हिमाचल: जीएसटी परिषद् की 57वीं बैठक केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित की गई।
 प्रदेश सरकार ने जीएसटी परिषद द्वारा प्रस्तावित उन सुधारों का स्वागत किया, जिनका उद्देश्य कर प्रणाली को अधिक करदाता-अनुकूल बनाना और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल करना है। पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, रिफंड, आकलन, न्यायनिर्णयन तथा अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित प्रस्तावित उपायों से जीएसटी अनुपालन को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार ने छोटे करदाताओं को राहत प्रदान करने वाले प्रस्तावों तथा रक्षा और सीएसडी कैंटीन से संबंधित उपायों का भी स्वागत किया। बैठक में राज्य से संबंधित टोल वसूलने के अधिकार की लीज के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रदेश द्वारा राज्य की टोल संग्रहण व्यवस्था से संबंधित प्रस्तावित जीएसटी छूट का स्वागत किया गया।
वास्तविक करदाताओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने वाले उपायों का समर्थन करते हुए राज्य ने बल दिया कि जीएसटी सुधारों में अनुपालन में सुगमता और प्रभावी प्रवर्तन के बीच उचित संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। ऐसे प्रस्ताव, जो प्रवर्तन को कमजोर कर सकते हैं, धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं अथवा वैध राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं, उनका सावधानीपूर्वक पुनर्विचार किया जाना चाहिए, ताकि करदाता सुविधा के नाम पर राजस्व संरक्षण और कर चोरी की रोकथाम से समझौता न हो।
राज्य ने जीएसटी लागू होने से उत्पन्न राजस्व संबंधी प्रभावों के लिए पूर्ण मुआवजे का मुद्दा भी उठाया, ताकि राज्य की वित्तीय स्थिरता सुरक्षित रह सके। यह बल दिया गया कि राज्य के राजस्व में पांच वर्षों तक वर्ष-दर-वर्ष 14 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित करते हुए राजस्व की सुरक्षा की जाए तथा इसके बाद भी राजस्व संरक्षण तब तक जारी रखा जाए, जब तक राज्य का वास्तविक राजस्व पांचवें वर्ष के लिए निर्धारित संरक्षित राजस्व के स्तर तक नहीं पहुंच जाता।
पर्वतीय राज्यों की विशेष चिंताओं एवं आवश्यकताओं के समाधान के लिए पर्वतीय राज्यों पर एक मंत्रियों के समूह के गठन की मांग भी दोहराई गई।
इसके अतिरिक्त, राज्य ने फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में रेट इनवर्जन को दूर करने के लिए एपीआई पर कर की दर कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस प्रकार के युक्तिकरण से इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को कम करने, इनपुट टैक्स क्रेडिट के संचय और उससे संबंधित रिफंड दावों को कम करने तथा घरेलू एपीआई विनिर्माण एवं फार्मास्यूटिकल उद्योग को और अधिक प्रोत्साहन देने में मदद मिलेगी।