


शिमला: भाजपा नेता एवं विधायक डॉ. जनक राज ने विधानसभा में मांग संख्या 9 (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) पर चर्चा के दौरान प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य नीतियों और बजट घोषणाओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बजट पेश करना केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि यह संविधान के तहत सरकार का दायित्व है कि उसमें किए गए वादों को धरातल पर लागू किया जाए।
डॉ. जनक राज ने कहा कि सरकार द्वारा पिछले बजटों में की गई अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं आज भी कागजों तक सीमित हैं। उन्होंने विशेष रूप से स्क्रब टाइफस के बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर वर्ष 10–15 लोगों की मौत के बावजूद घोषित स्टेट लेवल रिसर्च यूनिट आज तक स्थापित नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज और कमला नेहरू अस्पताल में लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर खोलने की घोषणा भी अधूरी है, जबकि आज भी नवजात शिशुओं की माताओं को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
डॉ. जनक राज ने सरकार से सवाल किया कि प्रत्येक जिले में इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब, गेस्ट वर्कर स्क्रीनिंग प्रोजेक्ट, डायलिसिस सुविधाएं, ब्लड स्टोरेज यूनिट और न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट स्थापित करने की घोषणाओं का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी में तीन महीने में PET स्कैन सुविधा शुरू करने का वादा भी एक वर्ष बाद तक पूरा नहीं हुआ।
उन्होंने एंबुलेंस सेवाओं को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 25 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस खरीदने की घोषणा का भी कोई अता-पता नहीं है।
हिमकेयर योजना का उल्लेख करते हुए डॉ. जनक राज ने कहा कि कुछ मामलों को आधार बनाकर योजना को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि लाखों लोगों को इसका लाभ मिला है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज से कराने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में स्थापित प्रोक्योरमेंट पॉलिसी को दरकिनार कर सिविल सप्लाई के माध्यम से खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।
जनजातीय क्षेत्रों की समस्याओं को उठाते हुए उन्होंने कहा कि पांगी, भरमौर और होली जैसे क्षेत्रों में आज भी अल्ट्रासाउंड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। महिलाओं को इलाज के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है, जो बेहद चिंता का विषय है।
डॉ. जनक राज ने कहा कि सरकार रोबोटिक सर्जरी जैसी महंगी सुविधाओं पर जोर दे रही है, जबकि प्रदेश के अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं—दवाइयां, बिस्तर, तकनीशियन और डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने इसे “प्राथमिकताओं का गंभीर असंतुलन” बताया।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी है—टेक्नीशियन, नर्स और विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। पालमपुर जैसे अस्पतालों में सर्जन होने के बावजूद एनेस्थेटिस्ट न होने से ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं।
डॉ. जनक राज ने सरकार से आग्रह किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दिखावे के बजाय जमीनी सुधारों पर ध्यान दिया जाए और बजट में किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
अंत में उन्होंने कहा कि सरकार को अहंकार छोड़कर सभी सुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए और प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

शिमला: भाजपा नेता एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने विधानसभा में मांग संख्या 9 (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) पर चर्चा के दौरान प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य बजट, नीतियों और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का आकलन उसके बजट से होता है, लेकिन इस बार का स्वास्थ्य बजट मात्र 5.83% रखा गया है, जो लगभग ₹2800–3000 करोड़ के आसपास है। उन्होंने इसे अपर्याप्त बताते हुए कहा कि बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार के पास उन योजनाओं के लिए ठोस वित्तीय आधार ही नहीं है।
परमार ने कहा कि सरकार हाई-एंड तकनीक जैसे रोबोटिक सर्जरी और PET स्कैन की बात कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि “डॉक्टर हैं, लेकिन ऑपरेशन थिएटर नहीं; मशीनें हैं, लेकिन टेक्निशियन नहीं”—यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में लैब टेक्निशियन, रेडियोग्राफर, ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट और परफ्यूजनिस्ट की भारी कमी है, जिसके कारण कई जगहों पर सर्जरी तक प्रभावित हो रही है। कई अस्पतालों में CT स्कैन मशीनें होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट और टेक्निकल स्टाफ के अभाव में वे बेकार पड़ी हैं।
विपिन परमार ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में स्वास्थ्य विभाग में पर्याप्त भर्ती नहीं हुई, जिससे स्थिति और बिगड़ी है। उन्होंने आर्थिक सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में 835 स्वास्थ्य संस्थानों और 16,699 बेड के बावजूद आवश्यक स्टाफ की भारी कमी है।
उन्होंने हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं का समर्थन करते हुए कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से लाखों लोगों को लाभ मिला है—हार्ट सर्जरी, कैंसर उपचार, डायलिसिस, ट्रांसप्लांट और प्रसूति सेवाएं तक संभव हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन योजनाओं को बदनाम कर बंद करने की साजिश रची जा रही है।
परमार ने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों पर ₹400 करोड़ से अधिक की देनदारियां लंबित हैं, जिसके कारण वेंडर्स ने सप्लाई बंद कर दी है और कई जगहों पर उपचार सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि आर्थिक सर्वे के अनुसार प्रदेश के लोगों को लगभग 14.48% स्वास्थ्य खर्च अपनी जेब से करना पड़ रहा है, जो चिंताजनक है।
रोबोटिक सर्जरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ₹28 करोड़ की मशीनों की खरीद में पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से पूछा कि टेंडर प्रक्रिया में कितनी कंपनियों ने भाग लिया और क्या अन्य सस्ती व प्रभावी विकल्पों पर विचार किया गया।
उन्होंने दवाइयों की गुणवत्ता पर भी गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में दवाइयों के सैंपल फेल होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने ड्रग कंट्रोल विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की।
विपिन परमार ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दिखावटी योजनाओं के बजाय बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है—डॉक्टरों, टेक्निकल स्टाफ, उपकरणों और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
अंत में उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्राथमिकताओं को सही दिशा में तय करे, ताकि प्रदेश की जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

हिमाचल: प्रदेश में शनिवार से मौसम खराब होने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा 28 से 30 मार्च के बीच प्रदेश में भारी बारिश के साथ आंधी, ओलावृष्टि व बर्फवारी होने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में 2 अप्रैल तक मौसम खराब बना रहेगा। राज्य में 1 – 2 अप्रैल को भी अनेक स्थानों पर हल्की बारिश और बर्फवारी होने के आसार हैं। राज्य में 2 अप्रैल तक प्रदेश में मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है।

ज़िला स्तरीय सार्वजनिक वितरण समिति एवं सतर्कता समिति की समीक्षा बैठक आयोजित
सोलन : उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने कहा कि ज़िला सोलन में पैट्रोल, डीज़ल तथा घरेलू गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और ज़िला प्रशासन यह सुनिश्चित बना रहा है कि उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना न करना पड़े। मनमोहन शर्मा आज यहां ज़िला स्तरीय सार्वजनिक वितरण समिति एवं ज़िला स्तरीय सतर्कता समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
मनमोहन शर्मा ने कहा कि ज़िला सोलन में वर्तमान में 20 गैस एजैंसियां कार्यरत हैं। इनके पास 2,07,021 घरेलू गैस उपभोक्ता पंजीकृत हैं। उन्होंने कहा कि सभी उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति सुचारू रूप से सुनिश्चित बनाई जा रही है। उन्होंने उपभोक्ताओं से आग्रह किया कि वह एल.पी.जी. व पैट्रोल तथा डीज़ल की आपूर्ति को लेकर घबराएं नहीं। प्रदेश सरकार के निर्देश पर ज़िला प्रशासन इस दिशा में पूर्ण सजग है।
उन्होंने सभी गैस एजैंसियों को रसोई गैस सिलेण्डरों के विरतण के कार्य में प्रयुक्त वाहनों पर लाउड स्पीकर स्थापित करने के निर्देश तथा निर्धारित रूट चार्ट के अनुसार गैस सिलेण्डर वितरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग के निरीक्षकों को बाज़ार में व्यावसायिक सिलेण्डरों की जांच करने के भी निर्देश दिए ताकि नियमानुसार सुचारू व्यवस्था बनी रहे।
उपायुक्त ने कहा कि ज़िला में 354 उचित मूल्य की दुकानों द्वारा दिसम्बर, 2025 से फरवरी, 2026 तक विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं को उनकी पात्रता के अनुसार आवश्यक वस्तुएं वितरित की गई हैं। इनमें लगभग 5950 क्विंटल चीनी, लगभग 29437 क्विंटल चावल, लगभग 52900 क्विंटल गन्दम आटा, लगभग 7437 क्विंटल दालें, लगभग 1668 क्विंटल आयोडाइज्ड नमक तथा 561385 लीटर खाद्य तेल वितरित किया गया है। उन्होंने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को उचित मूल्य की दुकानों में विक्रय की जा रही खाद्य वस्तुओं का समय-समय पर निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में विभिन्न स्थानों पर उचित मूल्य दुकानें खोलने के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।
उपायुक्त ने कहा कि ज़िला सोलन में 1064 विद्यालयों में 54503 बच्चों को मिड डे मील के तहत दोपहर का भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों को मिड डे मील में दिए जाने वाले भोजन की समय-समय पर जांच करने के निर्देश दिए।
बैठक में शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत कार्यान्वित की जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।
इस अवसर पर ज़िला नियंत्रक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले श्रवण कुमार हिमालयन, ज़िला पंचायत अधिकारी जोगिन्द्र प्रकाश राणा, ज़िला चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित रंजन तलवार, खण्ड विकास अधिकारी सोलन रमेश शर्मा, ज़िला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पदम देव शर्मा, उप निदेशक उच्च शिक्षा गोपाल चौहान, उप निदेशक प्राथमिक शिक्षा रीता गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

बिलासपुर: जिला रोजगार अधिकारी राजेश मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्धमान टेक्स्टिल प्राइवेट लिमिटेड बद्दी में ट्रेनी मशीन ऑपरेटर के 30 पदों के लिए उप रोजगार कार्यालय घुमारवीं में 6 अप्रैल को प्रातः 10ः30 बजे से कैंपस इंटरव्यू का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इन पदों के लिए 18 से 30 आयु वर्ग के इच्छुक पुरुष व महिला उम्मीदवार जिनकी शैक्षणिक योग्यता 8वीं, 10वीं व 12वीं पास हो आवेदन कर सकते है। चयनित अभ्यर्थियों को 12,750 रुपये मासिक वेतन तथा अन्य भत्ते प्रदान किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार जिनका रोजगार कार्यालय में नाम पंजीकृत हो वह अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित निर्धारित स्थान, तिथि व समय पर उपस्थित होकर कैंपस इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं।

चित्रकला विधा में मंडी कलम का भविष्य उज्ज्वल, अभिरूचि अनुसार आगे आएं युवा- अपूर्व देवगन
मण्डी: हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम (हिमक्राफ्ट) मंडी द्वारा अप्पर बिजनी में मंडी कलम चित्रकला एवं शिल्प पर आयोजित कार्यशाला आज संपन्न हुई। इसका समापन उपायुक्त अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में किया गया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए और उनका उत्साहवर्द्धन भी किया।
अपूर्व देवगन ने कहा कि युवाओं के कौशल में निखार लाने के लिए सरकार की ओर से विविध स्तर पर प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मंडी कलम जैसी लघु चित्रकला शैली पर यह कार्यशाला आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि मंडी नगर अपनी प्राचीन परंपराओं एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन में सदैव अग्रणी रहा है। यहां से उभरी चित्रकला विधा में मंडी कलम उत्तरोत्तर विस्तार पा रही है। इस कला के विकास में युवाओं का योगदान इसे और भी विशेष बना देता है। उन्होंने कहा कि इस विधा के प्रसार की अच्छी संभावनाएं हैं और चित्रकारी में रूचि रखने वालों को इसके लिए निरंतर प्रयास जारी रखते हुए आगे आना चाहिए।
उपायुक्त ने कहा कि एक माह की इस कार्यशाला के दौरान सभी प्रतिभागियों ने बेहद आकर्षक एवं सुंदर पेंटिंग्ज बनाई हैं। आम लोगों तक उनके इस हुनर को ले जाने के लिए आयोजकों की पहल पर इसकी एक प्रदर्शनी लगाने पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के इस तरह के कार्यक्रमों को मूर्तरूप प्रदान करने तथा ललित कला को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन हमेशा कलाकारों एवं कारीगरों के साथ है। उन्होंने मंडी कलम को प्रोत्साहन देने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम (हिमक्राफ्ट) के प्रयासों की भी सराहना की।
कार्यशाला के दौरान बताया गया कि मंडी कलम की एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत रही है जो सदियों पुरानी है। एक अनुमान के अनुसार सोलहवीं सदी से उन्नीसवीं सदी तक मंडी कलम लघु चित्रकला अपने चरम पर थी। मंडी कलम लघु चित्रकला इतिहास को भी दर्शाती है। इसमें स्थानीय लोककथाओं, प्रकृति और धार्मिक विषयों को बखूबी प्रदर्शित किया गया है, जो कुशल कारीगरों और चित्रकारों की पीढ़ियों से चली आ रही है।
हिमक्राफ्ट के जिला प्रभारी अक्षय सिंह डोड ने उपायुक्त का स्वागत कर उन्हें मंडी कलम पर आधारित एक पेंटिंग भेंट की। उन्होंने बताया कि एमएसएमई मंत्रालय द्वारा प्रायोजित इस कार्यशाला में 20 महिला कारीगरों ने भाग लिया, जिनको मंडी कलम लघु चित्रकला के साथ डिजाइनिंग स्किल अपग्रेडेशन और उद्यमिता विकास में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने नगर आयुक्त का भी कार्यशाला के लिए स्थान उपलब्ध करवाने पर आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में मास्टर क्राफ्ट पर्सन राजेश कुमार और डिजाइनर अंशुल मल्होत्रा ने प्रशिक्षण प्रदान करने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। -0-

जल जीवन मिशन कार्यों की प्रगति की समीक्षा बैठक में बोले उपायुक्त
अप्रैल में जल गुणवत्ता पर सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप आयोजित होगी: अपूर्व देवगन
मण्डी: उपायुक्त मण्डी अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में शुक्रवार को उपायुक्त कार्यालय के वीसी रूम में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के अंतर्गत जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल शक्ति विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति, जल स्रोतों के रखरखाव, जल गुणवत्ता तथा वित्तीय प्रबंधन से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक प्रत्येक माह आयोजित की जाती है ताकि जल जीवन मिशन के कार्यों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां गर्मी या सूखे की स्थिति में जल स्रोत प्रभावित होते हैं। उन्होंने गोहर क्षेत्र के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि सूखे की स्थिति में जल गुणवत्ता की निगरानी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा कि जल गुणवत्ता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अगले माह अप्रैल में एक दिवसीय सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जल परीक्षण, स्वच्छता मानकों तथा सुरक्षित पेयजल आपूर्ति से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की जाएगी। उपायुक्त ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि विद्यालयों में स्थापित पानी के टैंकों की नियमित जांच और सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके। वहीं स्वास्थ्य विभाग को भी जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में सदस्य सचिव, जिला जल एवं स्वच्छता मिशन एवं अधिशाषी अभियन्ता, जल शक्ति मंडल मंडी देवराज चौहान ने बताया कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को निर्धारित मानकों के अनुरूप नियमित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जल आपूर्ति प्रणाली को सुदृढ़ करने, जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा जल गुणवत्ता परीक्षण को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, स्रोत पुनर्जीवन तथा कैचमेंट क्षेत्र संरक्षण जैसे उपाय किए जा रहे हैं ताकि गर्मी के मौसम में भी पेयजल आपूर्ति प्रभावित न हो।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त गुरसीमर सिंह, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अरिंदम रॉय सहित शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे तथा जिला के विभिन्न मंडलों के अधिशाषी अभियंता वर्चुअल जुड़े थे ।

सरकाघाट: हिमाचल प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2019 बैच के अधिकारी कृष्ण कुमार शर्मा ने आज शुक्रवार को एसडीएम सरकाघाट के तौर पर अपना कार्यभार संभाला। कृष्ण कुमार शर्मा इससे पूर्व डिजिटल प्रौद्योगिकी और शासन विभाग शिमला में बतौर संयुक्त निदेशक सेवाएं दे रहे थे। वह उपमण्डल सरकाघाट के 33वें एसडीएम होंगे। कृष्ण कुमार शर्मा इससे पहले एसडीएम कुमारसेन व जोगिन्द्रनगर के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
एसडीएम सरकाघाट का कार्यभार संभालने के उपरांत उन्होंने उपमण्डल के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों से उपमण्डल के सर्वांगीण विकास के लिए सक्रिय सहयोग व योगदान का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वह सरकार की सभी जन कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए टीम भावना से जिले का विकास करेंगे, ताकि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता की समस्या के शीघ्र समाधान के लिए वह हमेशा प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही उपमंडल के सभी विभागों के अधिकारियों से बैठक कर क्षेत्र की समस्याओं व अन्य जानकारियां लेकर रुके हुए कार्यों को पूरा किया जाएगा।

बरच्छवाड़ सब स्टेशन में मरम्मत कार्य के चलते 29 मार्च बिजली आपूर्ति रहेगी बाधित
सरकाघाट: 33 केवी सब स्टेशन बरच्छवाड़ में आवश्यक मरम्मत कार्य के चलते 29 मार्च को विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। सहायक अभियंता विद्युत उपमंडल भद्रवाड़ ई. हंस राज ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रात: 9 बजे से सायं 05:00 बजे तक सभी 11 केवी फीडरों में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। इस दौरान सरकाघाट, गोपालपुर, मोहिं, मसेरन, टीहरा, ओल्ड रिस्सा, न्यू रिस्सा तथा धर्मपुर—के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में बिजली बंद रहेगी। इसके साथ डबरोग, बेहड़, सरकाघाट, लाका, कराडी, पपलोग, नौनु, रोपड़ी, रिस्सा चौक, ब्रारता, बाग, बरच्छवाड़, तताहर, नबाही, मोहीं, गोपालपुर, डली, दारपा, रखोह, भुआनी और कांगू ग्लू सहित अनेक क्षेत्रों में भी विद्युत आपूर्ति प्रभावित रहेगी।
उन्होंने सभी उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील की है।
रखोटा में मरम्मत कार्य के चलते 29 मार्च को बाधित रहेगी बिजली आपूर्ति
