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संजौली चौक से आईजीएमसी सड़क 22 मई दोपहर 12 बजे से रहेगी बंद

हमीपुर/भोरंज: जाहू के बस स्टैंड का गेट 3 नवंबर तक रहेगा बंद

भोरंज: एसडीएम शशिपाल शर्मा ने बताया कि जाहू के बस स्टैंड के जीर्णोद्धार का कार्य तेजी से करवाया जा रहा है। इस कार्य को सुचारू रूप से जारी रखने तथा इसे अतिशीघ्र पूरा करने के लिए बस स्टैंड के गेट को 3 नवंबर तक बंद किया जा रहा है। उन्होंने इस दौरान सभी लोगों से सहयोग की अपील की है।

हमीरपुर: सुजानपुर में ड्राईवर और जेसीबी ऑपरेटर के 10 पदों के लिए साक्षात्कार 21 को

हमीरपुर : उपमंडल सुजानपुर के गांव री-भलाणा के गणपति स्टोन क्रशर में भारी वाहन चालक और जेसीबी ऑपरेटरों के 10 पदों को भरने के लिए 21 अक्तूबर को उप रोजगार कार्यालय सुजानपुर में साक्षात्कार लिए जाएंगे।

जिला रोजगार अधिकारी सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि इन पदों के लिए 18 से 45 वर्ष तक के लाइसेंसधारक अभ्यर्थी पात्र होंगे। चयनित अभ्यर्थियों को 15 हजार रुपये मासिक वेतन के साथ भोजन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि अगर कोई युवा इन पदों के लिए योग्यता रखता है और उसका नाम किसी भी रोजगार कार्यालय में पंजीकृत है तो वह अपने मूल प्रमाण पत्रों तथा हिमाचली प्रमाण पत्र के साथ साक्षात्कार में भाग ले सकता है।

भर्ती के संबंध में अधिक जानकारी के लिए जिला रोजगार कार्यालय के दूरभाष नंबर 01972-222318 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

स्वास्थ्य, सड़क, रेल और औद्योगिक परियोजनाओं में देरी पर श्वेतपत्र जारी करे सरकार, केंद्र पर दोष मढ़ने से नहीं छिपेंगी नाकामियां – विपिन परमार

धर्मशाला: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कुशासन, कुप्रबंधन, कुनीति और कुव्यवस्था का पर्याय बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा विकास के लिए उपलब्ध करवाई जा रही हजारों करोड़ रुपये की सहायता का समयबद्ध उपयोग करने में प्रदेश सरकार विफल साबित हो रही है।

परमार ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कुल्लू में आयोजित जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता सम्मेलन में तथ्यों और आंकड़ों के माध्यम से कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत प्रदेश के लिए लगभग *₹360 करोड़* स्वीकृत किए गए, लेकिन केंद्रीय मंत्री द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार 15 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से केवल एक का निर्माण पूरा हुआ है। इसी प्रकार 73 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट में से एक भी संचालित नहीं हो पाई है। उन्होंने सवाल किया कि स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवा से जुड़ी परियोजनाओं में इतनी देरी क्यों हो रही है।

विपिन परमार ने कहा कि ऊना बल्क ड्रग पार्क के लिए केंद्र सरकार ने *₹1,000 करोड़* की सहायता का प्रावधान किया और ₹225 करोड़ जारी किए। इसके बावजूद परियोजना की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में देरी का सीधा प्रभाव निवेश, रोजगार और प्रदेश की आर्थिक संभावनाओं पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध ₹521 करोड़ की राशि के उपयोग को लेकर भी सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री के अनुसार लगभग 52 प्रतिशत राशि ही उपयोग की गई है।

परमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल में राष्ट्रीय राजमार्गों, रेल परियोजनाओं, एम्स बिलासपुर, जायका स्वास्थ्य परियोजना और किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के माध्यम से विकास को गति देने के प्रयास किए हैं। राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण, मंजूरियों और अपने हिस्से की प्रशासनिक जिम्मेदारियां समय पर पूरी करनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य, सड़क, रेल और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए प्राप्त केंद्रीय सहायता, खर्च की गई राशि तथा लंबित कार्यों पर *श्वेतपत्र जारी करें।*

विपिन परमार ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा समर्थित प्रतिनिधियों को मिली सफलता संगठन के लिए उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि भाजपा जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी और कांग्रेस सरकार से विकास कार्यों पर जवाब मांगती रहेगी।

भवन निर्माण और भूमि उप-विभाजन के लिए निगम की अनुमति अनिवार्य – राकेश शर्मा

निगम के आयुक्त ने राजस्व और टीसीपी विभाग के अधिकारियों के साथ की बैठक

आम लोगों की सुविधा के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करें सभी अधिकारी

हमीरपुर : नगर निगम हमीरपुर के आयुक्त राकेश शर्मा ने निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में भवन निर्माण और भूमि उप-विभाजन के कार्यों तथा सार्वजनिक रास्तों को निगम के नाम हस्तांतरित करने से संबंधित विषयों पर राजस्व और टीसीपी विभाग के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की।

राकेश शर्मा ने कहा कि निगम के अंतर्गत आने वाले सभी नए एवं पुराने क्षेत्रों में भवन निर्माण करने के लिए हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना अधिनियम, 1977 की धारा 30 के अंतर्गत स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य है। भवन निर्माण की स्वीकृति हेतु पंजीकृत वास्तुकार के माध्यम से विभागीय वेब पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है। इसी प्रकार, भूमि के उप-विभाजन के लिए भी निगम की अनुमति अनिवार्य है। इसमें सड़क की निर्धारित चौड़ाई, पार्क एवं खुली जगह, सीवरेज, जलापूर्ति तथा विद्युत जैसी आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का प्रावधान सुनिश्चित करना आवश्यक है।

आयुक्त ने कहा कि भूमि उप-विभाजन अथवा अन्य संबंधित मामलों में निर्धारित शर्तों के अनुसार रास्तों को निगम के नाम गिफ्ट डीड के माध्यम से हस्तांतरित किया जाना आवश्यक है। आवश्यक स्वीकृति के बिना किए गए भूमि उप-विभाजन अवैध माने जा सकते हैं। निर्धारित समय-सीमा के पश्चात संबंधित कार्यालय की आवश्यक स्वीकृति के बिना किए गए उप-विभाजनों में भूखंडों की खरीद-फरोख्त तथा उन पर भवन निर्माण की स्वीकृति के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में भवन निर्माण की स्वीकृति, विद्युत कनेक्शन तथा सीवरेज सुविधा की उपलब्धता भी लागू नियमों एवं संबंधित विभागीय प्रावधानों के अधीन होगी।

आयुक्त ने बताया कि निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाली रियल एस्टेट परियोजनाओं, जिनमें 500 वर्गमीटर से अधिक भूमि क्षेत्रफल अथवा आठ या अधिक अपार्टमेंट वाली परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं, के लिए हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के अंतर्गत पंजीकरण की आवश्यकता होती है।

राकेश शर्मा ने राजस्व विभाग, निगम के संबंधित अधिकारियों तथा टीसटीसीपी विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित कर जनहित से संबंधित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित होने से आम जनता को भवन निर्माण की स्वीकृति, भूमि उप-विभाजन, रास्तों के हस्तांतरण तथा बिजली, पानी और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं से संबंधित मामलों में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा की

शिमला: मुख्य सचिव के.के. पंत ने आज यहां ई-गवर्नेंस सुधार विषय पर 16-17 अक्तूबर, 2026 को जिला कांगड़ा के धर्मशाला में आयोजित किए जा रहे राष्ट्रीय सम्मेलन के तैयारियों के संबंध में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन देशभर के नीति निर्माताओं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को डिजिटल शासन के भविष्य पर विचार-विमर्श करने का एक मंच प्रदान करेगा। इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि ई-गवर्नेंस सुधारों की नवोन्मेषी पहलों को प्रदर्शित करेंगे।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों और पहलों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए हिमाचल डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में तीव्र गति से अग्रसर है। नई डिजिटल व्यवस्थाओं और प्रशासन के क्षेत्र में मौजूदा प्रणालियों में किए गए सुधारों की कई पहलों को राष्ट्रीय मंच पर सराहा गया है। उन्होंने अधिकारियों को इस सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उपायुक्त कांगड़ा के साथ समन्वय से तैयारियों के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन में नवोन्मेषी शासन पहलों और नागरिक केन्द्रित सुधारों पर व्यापक स्तर पर चर्चा की जाएगी।
बैठक में सचिव प्रशासनिक सुधार ए. शाइनामोल, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, प्रशासनिक सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

किन्नौर: पिकअप खाई में गिरी; दो युवकों की मौत…

शिमला: किन्नौर के भावानगर में एक पिकअप के अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिरने से गाड़ी में सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी के अनुसार दोनों युवक पिकअप लेकर भावा वैली से वांगतू की तरफ जा रहे थे। हादसा सड़क के एक सुनसान हिस्से में हुआ, जिसके चलते किसी को भी गाड़ी के खाई में गिरने का पता नहीं चला। शनिवार रात को चौपाल निवासी सुनील कुमार ने भावानगर पुलिस को अपनी पिकअप गाड़ी (HP-08A-3774) के लापता होने की सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने गाड़ी की तलाश शुरू कर दी।

पुलिस की तलाश के दौरान रविवार दोपहर दुर्घटनाग्रस्त पिकअप का पता चला। शेरपा कॉलोनी से आगे काफनू की तरफ सड़क के नीचे गहरी खाई में गाड़ी दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों युवकों को खाई से बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान शुरू किया। दोनों युवकों के शवों को खाई से निकालने के लिए पुलिस की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को मौके पर बुलाया गया। करीब छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला जा सका। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बताया जा रहा है कि दोनों युवक शादीशुदा थे। मृतकों की पहचान चौपाल निवासी दया (37) और उमेश (24) के रूप में हुई है।

बताया जा रहा है कि दोनों युवक पिकअप में सेब ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले क्रेट लेकर जा रहे थे। इन दिनों किन्नौर जिले में सेब का सीजन चल रहा है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि पिकअप अनियंत्रित होकर खाई में कैसे गिरी। हादसे के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

DC लाहुल-स्पीति किरण भड़ाना के पूर्व विधायक पिता का निधन, CM सुक्खू ने जताया दुख

हिमाचल: राजस्थान के भरतपुर जिले में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या का मामला सामने आया है। वह हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की उपायुक्त किरण भड़ाना के पिता थे। प्रारंभिक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भरतपुर जिले के भोंडा गांव में क्रशर प्लांट से जुड़े विवाद के दौरान यह घटना हुई। बताया गया है कि अतर सिंह भड़ाना रविवार शाम प्लांट पर पहुंचे थे। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ विवाद बढ़ गया और मामला हिंसक हो गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, हमले में अतर सिंह भड़ाना गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। बाद में जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना में उनके साथ मौजूद गगन शर्मा के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, क्रशर प्लांट के संचालन और खनन गतिविधियों को लेकर प्लांट पक्ष तथा स्थानीय ग्रामीणों के बीच विवाद चल रहा था। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने की बात सामने आई है। हालांकि, विवाद की पूरी वजह, घटना में शामिल लोगों की भूमिका और हमले से जुड़े अन्य पहलुओं की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी दुखद समाचार मिलते ही लाहुल स्पीति की उपायुक्त किरण भड़ाना केलंग से राजस्थान के लिए रवाना हो गई हैं।

मुख्यमंत्री ने उपायुक्त किरण भड़ाना के पिता के निधन पर शोक व्यक्त किया

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना के पिता अतर सिंह भड़ाना के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुःखद घड़ी में वह उनके साथ हैं। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत की आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

पूर्व भाजपा सरकार सीमित संसाधनों का अनुचित दोहन न करती और भ्रष्टाचार को संरक्षण न देती तो प्रदेश पर देनदारियों का न पड़ता इतना बोझ – कांग्रेस मंत्री

शिमला: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज यहां कहा कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2017 से 2022 तक भाजपा की सरकार रही और यह दौर हिमाचल के लिए विकास की दृष्टि से काला अध्याय रहा। उन्होंने कहा कि डबल ईंजन का नारा लगाने वाली भाजपा ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में हिमाचल के विकास में कोई महत्त्वपूर्ण योगदान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि हिमाचल से संबंध रखने वाले केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता जगत प्रकाश नड्डा ने वित्तीय चुनौतियों के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक प्रबन्धनों को दरकिनार कर राजनीति से प्रेरित और तथ्यहीन बयान दिए हैं। ऐसे बयान भाजपा की नकारात्मक कार्यशैली और प्रदेश में उनके कम होते जनाधार से उपजी भाजपा की बौखलाहट का नतीजा है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कार्यान्वित की जा रही है जिसमें केन्द्र सरकार 90 प्रतिशत और प्रदेश सरकार शेष 10 प्रतिशत का आर्थिक योगदान देती है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के हिस्से के रूप में हिमाचल को योजना के तहत वर्ष 2021-26 के दौरान 112 करोड़ रुपये अब तक जारी नहीं किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 से अब तक वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान 2.85 हजार लोगों का उपचार किया गया है जिस पर लगभग 420 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। लोगों के उपचार के लिए आयुष्मान भारत के तहत हिमाचल का वित्तीय हिस्सा 90-10 के प्रावधान के तहत लगभग 59 करोड़ बनता था लेकिन प्रदेश सरकार ने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए लगभग 203 करोड़ रुपये अपने संसाधनों से जुटाकर अतिरिक्त व्यय किया है। यह राशि प्रदेश के निर्धारित हिस्से से लगभग चार गुणा अधिक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार हिमाचल को तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर रही है लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा, वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा जनकल्याण की दिशा में उठाए गए कदमों को रोककर प्रदेश हित के विपरीत कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन के तहत क्रिटिकल केयर ब्लॉक, जिला एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं, शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट आदि सुविधाओं के विकास के लिए 360 रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसमें 90 प्रतिशत केन्द्रीय हिस्सा था। उन्होंने कहा कि इस राशि का महत्त्वपूर्ण हिस्सा अब तक राज्य को नही मिला है। केन्द्र सरकार द्वारा पर्याप्त धनराशि जारी न करने के कारण लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी इन महत्त्वपूर्ण अधोसंरचनाओं एवं सुविधाओं का विकास अधूरा पड़ा है।
उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को मंहगाई भत्ता भी नहीं दिया और पे-कमिशन की देनदारियां देने में भी असमर्थ रही।
उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र सरकार समय-समय पर प्रदेश को विभिन्न मदों में राज्य के हक का पैसा निर्धारित समयावधि में जारी करना सुनिश्चित करे तो विभिन्न परियोजनाएं और अधोसंरचना विकास के कार्य समय पर पूरे किए जा सकते हैं जिससे आमजन को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर पूर्णतः रोक लगाई है और पूर्ण पारदर्शिता तथा जवाबदेही भी सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि यदि आयुष्मान भारत के तहत केन्द्र सरकार के हिस्से की लम्बित राशि हिमाचल को समय पर मिलती तो प्रदेश में निर्माणाधीन 9 क्रिटिकल ब्लॉक, 12 जिला एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं, 38 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर तथा 73 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट समय पर तैयार होते और प्रदेशवासियों को घर द्वार पर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने में सहयोग मिलता।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने जब दिसम्बर, 2022 में प्रदेश की बागडोर खुद सम्भाली तो उस समय हिमाचल प्रदेश पर लगभग 75 हजार करोड़ रुपये का कर्ज और लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की कर्मचारियों की देनदारियां थी। उन्होंने कहा कि यदि पूर्व भाजपा सरकार प्रदेश के सीमित संसाधनों का अनुचित दोहन न करती और भ्रष्टाचार को संरक्षण न प्रदान करती तो प्रदेश पर देनदारियों का इतना बोझ न पड़ता।

केलांग: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने  आईसीएमआर उच्च पर्वतीय चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र की रखी आधारशिला 

केलांग: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हिमाचल प्रदेश के केलांग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के उच्च पर्वतीय चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र का भूमि पूजन कर आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह केंद्र उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी अनुसंधान के लिए एक मजबूत संस्थागत आधार तैयार करेगा तथा हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और अधिक ऊंचाई पर तैनात सुरक्षा बलों के जवानों की विशिष्ट स्वास्थ्य चुनौतियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड, बदलती जलवायु परिस्थितियों और जनजातीय समुदायों की विशिष्ट जीवनशैली के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए समर्पित वैज्ञानिक अनुसंधान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रीय चुनौतियों का व्यवस्थित अध्ययन करके स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की पहचान, उपयुक्त चिकित्सा उपायों का विकास तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ बनाने और प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के संकल्प का उल्लेख करते हुए नड्डा ने कहा कि इस केंद्र की स्थापना दूरदराज के हिमालयी और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की विशिष्ट स्वास्थ्य आवश्यकताओं के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित स्वास्थ्य उपाय स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य में सुधार लाने के साथ-साथ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात सशस्त्र बलों के जवानों के कल्याण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

आईसीएमआर, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं और एम्स बिलासपुर मिलकर करेंगे अनुसंधान

नड्डा ने इस अनुसंधान केंद्र की स्थापना में आईसीएमआर और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के बीच सहयोग की सराहना की। उन्होंने एम्स बिलासपुर के योगदान का भी उल्लेख किया, जो उच्च पर्वतीय परिस्थितियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के अध्ययन में भागीदारी करेगा। उन्होंने कहा कि इस संयुक्त प्रयास से वैज्ञानिक विशेषज्ञता और चिकित्सकीय अनुभव को एक मंच पर लाया जाएगा। इससे ऊंचाई से संबंधित स्वास्थ्य चुनौतियों की बेहतर समझ विकसित होगी तथा वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं और उपचार पद्धतियों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह केंद्र जनजातीय समुदायों तथा अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सशस्त्र बलों के जवानों के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगा। यहां होने वाले अनुसंधान से निवारक एवं स्वास्थ्य संवर्धन संबंधी रणनीतियां विकसित की जा सकेंगी।

नड्डा ने कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन विकसित करने में आईसीएमआर की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस वैज्ञानिक उपलब्धि ने भारत के साथ-साथ विश्व के अन्य देशों को भी महामारी से लड़ने में सहायता प्रदान की।

अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चिकित्सा समाधान विकसित करने में मिलेगी सहायता : संजय सेठ

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने केलांग में उच्च पर्वतीय अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए आईसीएमआर और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों के पास अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कार्य करने का व्यापक अनुभव है। इस अनुभव को आईसीएमआर की वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमताओं के साथ जोड़ने से कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने तथा उनके प्रभावी चिकित्सा समाधान विकसित करने में सहायता मिलेगी।

हिमालयी समुदायों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि : जयराम ठाकुर

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि केलांग में आईसीएमआर उच्च पर्वतीय अनुसंधान केंद्र की स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने कहा कि अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन बेहतर स्वास्थ्य समाधान विकसित करने में सहायक होगा।जयराम ठाकुर ने कहा कि इस अनुसंधान केंद्र से न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि भारत और विश्व के अन्य उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को भी लाभ मिलेगा।

 दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक कदम : कंगना रनौत

मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद कंगना रनौत ने कहा कि बेहतर सड़क और परिवहन संपर्क सुविधाओं ने हिमाचल प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में जीवन को काफी हद तक बदल दिया है। पहले कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई क्षेत्र वर्ष के अनेक महीनों तक शेष दुनिया से कटे रहते थे।उन्होंने कहा कि केलांग की पर्वतीय वादियों में आईसीएमआर उच्च पर्वतीय अनुसंधान केंद्र की स्थापना ऐतिहासिक पहल है। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा, उच्च पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा तथा हिमाचल प्रदेश सहित व्यापक मानव समाज के कल्याण में योगदान मिलेगा।

 प्रयोगशाला और स्थानीय समुदायों के बीच स्थापित होगा सीधा संबंध : डॉ. राजीव बहल

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने केंद्र की वैज्ञानिक परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए कहा कि केलांग एक ऐसा स्थान बनेगा, जहां प्रयोगशाला और स्थानीय समुदाय एक साथ मिलकर कार्य करेंगे।उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग केवल अनुसंधान का विषय नहीं होंगे, बल्कि अनुसंधान प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनेंगे। इस पहल का उद्देश्य केवल शोधपत्र प्रकाशित करना नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य में वास्तविक सुधार लाना है।डॉ. बहल ने केंद्र की स्थापना और संचालन में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं, हिमाचल प्रदेश सरकार तथा स्थानीय समुदायों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की चिकित्सा सुविधाएं होंगी मजबूत : एयर मार्शल संदीप थरेजा

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के महानिदेशक एयर मार्शल संदीप थरेजा ने कहा कि इस केंद्र में होने वाला अनुसंधान विश्व के अत्यंत कठिन उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की चिकित्सा सेवाओं को सीधे तौर पर मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्रीय अनुभव और आईसीएमआर की वैज्ञानिक विशेषज्ञता के समन्वय से अनुसंधान के निष्कर्षों को व्यावहारिक चिकित्सा प्रक्रियाओं में बदला जा सकेगा।

इससे ऊंचाई के अनुकूल शरीर को ढालने की प्रक्रिया, स्वास्थ्य समस्याओं की प्रारंभिक पहचान और प्रभावी उपचार के लिए बेहतर चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित किए जा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि केलांग में विकसित वैज्ञानिक जानकारी से सशस्त्र बलों के जवानों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को भी लाभ मिलेगा।

लाहौल-स्पीति के पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने विश्वास व्यक्त किया कि केलांग में होने वाला अनुसंधान आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और निवारक चिकित्सा उपायों के विकास में सहायक सिद्ध होगा।

### ग्रीन आईसीएमआर कैंपस पहल के तहत पौधारोपण, वैज्ञानिक प्रदर्शनी का उद्घाटन

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने ग्रीन आईसीएमआर कैंपस पहल के अंतर्गत हिमालयी क्षेत्र की स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए।

नड्डा ने स्कूली विद्यार्थियों के लिए आयोजित वैज्ञानिक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने अनुसंधान केंद्र की वेबसाइट और संस्थागत वीडियो का शुभारंभ किया तथा केंद्र की स्थापना के उपलक्ष्य में विशेष स्मारक डाक आवरण भी जारी किया।

समारोह में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

### वर्षभर संचालित होने वाला स्थायी अनुसंधान केंद्र बनेगा केलांग

लगभग एक दशक पूर्व केलांग में आईसीएमआर द्वारा स्थापित फील्ड स्टेशन के आधार पर विकसित किया जा रहा यह केंद्र आधुनिक प्रयोगशालाओं और विशेष प्रशिक्षित मानव संसाधनों से युक्त एक स्थायी संस्थान होगा, जो वर्षभर कार्य करेगा।

इसका प्रमुख उद्देश्य अत्यधिक ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, भीषण ठंड और बदलती जलवायु परिस्थितियों के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों से संबंधित वैज्ञानिक प्रमाण विकसित करना होगा।

आईसीएमआर, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं तथा अन्य अनुसंधान संस्थान जैव चिकित्सा अनुसंधान, जनस्वास्थ्य और उच्च पर्वतीय शरीर क्रिया विज्ञान के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता साझा करेंगे।

यह केंद्र सैनिकों और नागरिक आबादी, दोनों से संबंधित स्वास्थ्य चुनौतियों पर अनुसंधान करेगा।

अनुसंधान के प्रमुख विषयों में ऊंचाई से संबंधित स्वास्थ्य जोखिम, उच्च पर्वतीय वातावरण के अनुकूलन की प्रक्रिया, मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य, बच्चों की वृद्धि एवं पोषण तथा हिमालयी समुदायों में विभिन्न बीमारियों के स्वरूप का अध्ययन शामिल होगा।

### ड्रोन, डिजिटल हेल्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी होगा उपयोग

अनुसंधान केंद्र दुर्गम और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों की संभावनाओं का भी अध्ययन करेगा।

इसके अंतर्गत ड्रोन के माध्यम से दवाओं की आपूर्ति, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इन तकनीकों के माध्यम से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाले लोगों तक आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की संभावनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।

केंद्र में विकसित वैज्ञानिक प्रमाण उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए निवारक और उपचार संबंधी चिकित्सा प्रक्रियाओं को मजबूत करेंगे। साथ ही हिमालयी और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने में भी सहायक होंगे।

इस पहल का लाभ हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे हिमालयी एवं सीमावर्ती क्षेत्रों को भी मिलने की अपेक्षा है।

केलांग में इस अनुसंधान केंद्र की स्थापना उच्च पर्वतीय चिकित्सा, वैज्ञानिक अनुसंधान और जनस्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।

शिमला: अंतरराष्ट्रीय लवी मेला 11 से 14 नवंबर तक; चार सांस्कृतिक संध्याओं के साथ मिस्टर-मिस बुशहर प्रतियोगिता, लेजर शो व पारंपरिक स्वाद महोत्सव होंगे मुख्य आकर्षण

चार सांस्कृतिक संध्याओं के साथ मिस्टर-मिस बुशहर प्रतियोगिता, लेजर शो और पारंपरिक स्वाद महोत्सव होंगे मुख्य आकर्षण
शिमला: अंतरराष्ट्रीय लवी मेला-2026 के आयोजन को लेकर मेला आयोजन समिति की बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में रामपुर में आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय लवी मेले का आयोजन 11 से 14 नवंबर तक किया जाएगा। मेले के दौरान चार सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन होगा, जिनमें दो संध्याएं पहाड़ी संस्कृति, एक बॉलीवुड तथा एक पंजाबी संगीत पर आधारित होगी। इसके अतिरिक्त खेलकूद प्रतियोगिताएं, लेजर शो, पारंपरिक वाद्य यंत्र प्रतियोगिता, कवि सम्मेलन, पारंपरिक स्वाद महोत्सव, वॉल आर्ट प्रतियोगिता तथा मिस्टर एवं मिस बुशहर प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएंगी।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि लवी मेला ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और हमारी सभ्यता का अभिन्न अंग है। इस मेले के माध्यम से वर्षों से चली आ रही व्यापारिक परंपराओं को निरंतर आगे बढ़ाने के साथ-साथ विलुप्त हो रही पारंपरिक वस्तुओं, कलाओं एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मेले में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक प्रत्येक वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
बुशहर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा बढ़ावा
लवी मेले में बुशहर रियासत के इतिहास, संस्कृति एवं समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अंतर्गत ऐतिहासिक एवं विरासत प्रदर्शनी, पुराने छायाचित्रों और दस्तावेजों का प्रदर्शन, पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा, ऊनी उत्पादों, पारंपरिक आभूषणों तथा स्थानीय कृषि एवं बागवानी उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
इसके अतिरिक्त सेब एवं अन्य बागवानी उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों, स्वयं सहायता समूहों (SHG), किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। पारंपरिक शिल्प का सजीव प्रदर्शन, स्थानीय वास्तुकला एवं विरासत का प्रदर्शन, रामपुर हेरिटेज वॉक और पारंपरिक लवी बाजार भी मेले के प्रमुख आकर्षण होंगे। मेले में बुशहर और तिब्बत के ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
शहर में होगी विशेष लाइटिंग और सजावट
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि लवी मेले के दौरान रामपुर शहर में विशेष लाइटिंग एवं सजावट की जाएगी, ताकि पूरे शहर को आकर्षक एवं एकरूप स्वरूप प्रदान किया जा सके। विभिन्न स्थानों पर सेल्फी प्वाइंट भी बनाए जाएंगे। मेले की स्मारिका के लिए स्कूली बच्चों के साथ-साथ आम नागरिकों से भी लेख आमंत्रित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि मेले में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अधिक अस्थायी पेयजल कनेक्शन उपलब्ध करवाए जाएंगे। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष योजना तैयार की जाएगी तथा शहर के विभिन्न स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात होंगे 300 पुलिस कर्मी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने कहा कि लवी मेले के दौरान कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 300 पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाएगी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गौरवजीत सिंह को सुरक्षा व्यवस्था का प्रभारी बनाया जाएगा। शहर में यातायात प्रबंधन एवं सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मेले के दौरान जुआ खेलने जैसी अवैध गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
अश्व प्रदर्शनी में प्रदर्शित होंगे चामुर्थी घोड़े
अंतरराष्ट्रीय लवी मेले के मैदान में विशेष अश्व प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जिसमें हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध चामुर्थी नस्ल के घोड़े प्रमुख आकर्षण होंगे। स्पीति नस्ल के नाम से पहचाने जाने वाले ये घोड़े अपनी छोटी कद-काठी, सुडौल शरीर तथा कठिन पहाड़ी रास्तों और बर्फीले क्षेत्रों में चलने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं।
इस बार अन्य राज्यों की घोड़ों की नस्लों को भी प्रदर्शनी में शामिल करने की योजना है, ताकि विभिन्न नस्लों के बीच व्यापार एवं पशुपालन को बढ़ावा मिल सके। इस संबंध में अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों को भी प्रदर्शनी में आमंत्रित किया जाएगा। घोड़ों के लिए 400 और 800 मीटर की दौड़ तथा गुब्बारा फोड़ जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
किसान गोष्ठी में पशुपालकों को मिलेगा प्रशिक्षण
मेले के दौरान किसान गोष्ठी का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें पशुओं के स्वास्थ्य, देखरेख, खान-पान एवं बेहतर पशुपालन संबंधी जानकारी दी जाएगी। अन्य राज्यों से आने वाले प्रतिनिधि भी अपने अनुभव साझा करेंगे। इसके अतिरिक्त अश्व पालकों की समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान के लिए विचार-विमर्श किया जाएगा।
किन्नौरी मार्केट को मिलेगा एक स्वरूप
इस वर्ष किन्नौरी मार्केट में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए आयोजन समिति की ओर से एक ही शैली की कैनोपी उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे बाजार की सुंदरता एवं व्यवस्थित स्वरूप को बनाए रखने में मदद मिलेगी। इस बाजार में पारंपरिक सूखे मेवे, दालें, कपड़े और अन्य स्थानीय वस्तुओं का व्यापार किया जाता है।
विभागीय उपलब्धियों की लगेगी प्रदर्शनी
लवी मेले में विभिन्न सरकारी विभागों की प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। इनमें पिछले तीन वर्षों के दौरान विभागों द्वारा किए गए प्रमुख कार्यों एवं उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि आम जनता को सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी मिल सके। इस बार पिछले वर्ष प्रदर्शित की जा चुकी उपलब्धियों को दोहराने के बजाय नई उपलब्धियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
स्कूली बच्चों के लिए होगी निबंध लेखन प्रतियोगिता
लवी मेले में पहली बार रामपुर शहर एवं आसपास के स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता के प्रारंभिक चरण में प्रत्येक स्कूल से प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का चयन अंतिम प्रतियोगिता के लिए किया जाएगा। अंतिम चरण में भी प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ अन्य प्रतिभागियों को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
स्कूल स्तर की प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को लवी मेले के इतिहास पर निबंध लिखना होगा। प्रतियोगिता के नियम एवं शर्तें जल्द ही जारी की जाएंगी।
जन-जागरूकता गतिविधियों पर भी रहेगा विशेष ध्यान
मेले के दौरान नशामुक्त हिमाचल अभियान, सड़क सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, स्वच्छ एवं हरित लवी अभियान, प्लास्टिक मुक्त मेला, रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच शिविर, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, साइबर सुरक्षा, महिला एवं बाल सुरक्षा, यातायात प्रबंधन तथा पौधरोपण जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनका उद्देश्य सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल मेले को प्रोत्साहित करना है।