किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

नौणी: राज्य के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों में सेवा दे रहे वैज्ञानिकों के आधुनिक कृषि से संबन्धित ज्ञान में इजाफ़ा करने के उद्देश्य से एक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ॰ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी नौणी में संपन्न हुआ। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे 25 वैज्ञानिकों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम को नौणी विवि के विस्तार शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का विषय ‘वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से किसानों की आय में बढ़ोतरी’था। प्रशिक्षण समन्वयक और विश्वविद्यालय के संयुक्त निदेशक (संचार) डॉ. आर के ठाकुर ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य राज्य के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों में काम कर रहे वैज्ञानिकों की कृषि संबन्धित ज्ञान का विस्तार और विशेषज्ञता बढ़ाना था। यह कार्यक्रम वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से किसान की आय बढ़ाने पर केंद्रित था और भारत सरकार के वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण है।

उन्होनें बताया कि कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक, कृषि गतिविधियों का एक अभिन्न हिस्सा होते हैं और किसी भी क्षेत्र के किसानों की कृषि संबन्धित समस्याओं के निवारण में अहम भूमिका अदा करतें हैं। इसलिए हमारा लक्ष्य है कि इन वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता को बढ़ाकर कृषि और बागवानी क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी और वैज्ञानिक हस्तक्षेप इन वैज्ञानिकों के माध्यम से हमारे किसान-बागवान तक पहुंचें। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने राज्य के प्रत्येक जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलें है जिसे कृषि विवि पालमपुर और नौणी विश्वविद्यालया के वैज्ञानिकों द्वारा प्रबंधित किया जाता है। वर्तमान में हिमाचल में 13 कृषि विज्ञान केंद्र हैं।

प्रशिक्षण के दौरान, भाग लेने वाले वैज्ञानिकों को विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए गए जिसमें निम्नलिखित प्रमुख थे

  • किसानों की आय को दोगुना करने के लिए बागवानी हस्तक्षेप और रणनीतियों
  • सजावटी फसलों का विविधीकरण
  • औषधीय,सुगंधित फसलों और मसालों की खेती
  • वैकल्पिक खेती प्रणाली
  • रोजगार उत्पादन के लिए संरक्षित खेती
  • एपिकल्चर एवं परागण प्रबंधन
  • एकीकृत रोग प्रबंधन
  • शून्य लागत प्राकृतिक खेती
  • ऑफ-सीजन सब्जी उत्पादन
  • सब्जी बीज उत्पादन
  • लाभ में सुधार के लिए फल बागानों में एग्रोफोरेस्ट्री हस्तक्षेप
  • मशरूम उत्पादन
  • फसल की कटाई के बाद नुकसान और उसका शमन

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