नौणी विवि के प्रोफेसर को मिलेगा प्रतिष्ठित जेपी वर्मा मेमोरियल अवार्ड

नौणी विवि के प्रोफेसर को मिलेगा प्रतिष्ठित जेपी वर्मा मेमोरियल अवार्ड

शिमला : डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के प्रोफेसर डॉ. ए.के गुप्ता को भारतीय फाइटोपाइथोलॉजिकल सोसायटी के प्रतिष्ठित जेपी वर्मा मेमोरियल अवार्ड (2018) के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार, प्रत्येक वर्ष इस सोसाइटी द्वारा दिया जाता है। प्लांट बैक्टीरियोलॉजी विषय में डॉ. गुप्ता के शिक्षण और अनुसंधान योगदान के आधार पर इस पुरस्कार के लिए उनके नाम का चयन हुआ है। पिछले महीने असम में आयोजित अपनी 70वीं वार्षिक बैठक के दौरान, सोसायटी ने इस पुरस्कार के लिए डॉ. गुप्ता का नाम अनुमोदित किया।

वर्तमान में डॉ. गुप्ता नौणी विश्वविद्यालय में प्लांट पैथोलॉजी विभाग में विभागाध्यक्ष के रूप में काम कर रहें है। अलीगढ़ में जन्में डॉ.॰ गुप्ता ने रोहिलखंड विश्वविद्यालय से जीव विज्ञान में बी॰एस॰सी॰ करने के बाद आगरा विवि से वनस्पति विज्ञान में एम॰एस॰सी॰ की और प्लांट पैथोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल की। जिवाजी विश्वविद्यालय से माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी में अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने आईएआरआई के गेहूँ अनुसंधान निदेशालय में काम किया।

डॉ. गुप्ता, 1989 में नौणी विश्वविद्यालय से जुड़े और क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान सबस्टेशन, ताबो में गुठलीदार फलों में तने, पत्ती में लगने वाले जीवाणु रोगों पर काम किया। डा॰ गुप्ता भारतीय फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी द्वारा स्थापित के॰पी॰वी॰ मेनन सर्वश्रेष्ठ पोस्टर रिसर्च पेपर अवार्ड भी जीत चुके हैं। उनका नाम एल्सेवियर पेशेवर समूह में भी शामिल है। कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में शोध पत्र के अलावा, डॉ. गुप्ता ने 25 पुस्तक अध्याय, विस्तार लेख और बुलेटिन भी प्रकाशित किए हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एचसी शर्मा और अन्य संकाय ने डॉ. गुप्ता को बधाई दी।

वर्ष 1949 में स्थापित, भारतीय फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी एक पेशेवर संस्था है, जो कि फाइटोपैथोलॉजी विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। यह संस्था माइकोलॉजी, प्लांट पैथोलॉजी, बैक्टीरियोलॉजी, वायरोलॉजी, फाइटोप्लाज्मोलॉजी और नेमेटोलोजी के क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ वैज्ञानिकों को अपनी शोध उपलब्धियों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करती है। इस सोसायटी का मुख्यालय दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के माइकोलॉजी और प्लांट पैथोलॉजी डिवीजन में है।

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