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मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए 1617 करोड़ किए स्वीकृत

शिमला: प्रदेशभर में सुलभ एवं उच्च गुणवत्तापूर्ण वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की व्यापक स्वास्थ्य आधुनिकीकरण पहल के प्रथम चरण में 1,617 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस निवेश के तहत सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों, सुपर स्पेशियलिटी केन्द्रों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के बुनियादी ढांचे को उन्नत किया जाएगा। यह परियोजना 1 अप्रैल, 2026 से 30 अप्रैल, 2031 तक लागू की जाएगी।
समय पर चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता रोगियों के उपचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निदान और उपचार में देरी से न केवल स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बनती है, बल्कि लागत में भी वृद्धि होती है। अध्ययनों के अनुसार, देर से निदान होने पर रोगी का चिकित्सा व्यय 30दृ50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जो स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक शीघ्र पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत संस्थानों को अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं, सिमुलेशन-आधारित मेडिकल प्रशिक्षण प्रणालियों, एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरणों तथा एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म से सुसज्जित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य विशेषज्ञ उपचार तक समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना, रेफरल से संबंधित लागत को कम करना, रोगियों के स्वास्थ्य में सुधार करना तथा दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ करना है। इससे लैंगिक समानता और जलवायु अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे हिमाचल प्रदेश सुलभ और तकनीक-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य आधुनिकीकरण में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित होगा।
प्रवक्ता ने बताया कि परियोजना का पहला चरण भौतिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में नए भवनों का निर्माण, नवीनीकरण और शैक्षणिक ब्लॉकों, बाह्य एवं आंतरिक रोगी सुविधाओं का उन्नयन किया जाएगा। उच्च स्तरीय सिमुलेशन केंद्र, एआर/वीआर आधारित प्रशिक्षण सुविधाएं, डिजिटल पुस्तकालय और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म से एकीकृत स्किल लैब स्थापित की जाएंगी। एमआरआई, सीटी स्कैनर, डिजिटल रेडियोलॉजी सिस्टम और मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाओं जैसे उन्नत इमेजिंग और जांच उपकरण स्थापित किए जाएंगे। पीएसीएस, एलआईएमएस, टेलीमेडिसिन और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) सहित डिजिटल प्लेटफॉर्म को एबीडीएम मानकों के अनुरूप इंटरऑपरेबल डेटा विनिमय के लिए एकीकृत किया जाएगा।
दूसरे चरण में आईजीएमसी शिमला, एआईएमएसएस चमियाना और डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में तृतीयक उपचार केन्द्रों को और सुदृढ़ किया जाएगा। रीनल और बोन मैरो ट्रांसप्लांट, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, उन्नत एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं, बाल चिकित्सा सेवाएं तथा रोबोटिक-सहायता प्राप्त सर्जरी जैसी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। संस्थानों को ओ-आर्म 3डी इमेजिंग, न्यूरो-नेविगेशन सिस्टम, रोबोटिक सर्जरी प्लेटफॉर्म और एकीकृत क्रिटिकल केयर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। एक उन्नत बाल चिकित्सा देखभाल एवं नवाचार केंद्र भी स्थापित किया जाएगा, जो क्रिटिकल, सर्जिकल और टेली-सक्षम बाल चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करेगा।
परियोजना के तीसरे चरण में आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसके तहत इन संस्थानों को सीटी स्कैनर, मोबाइल एक्स-रे यूनिट, अल्ट्रासाउंड मशीनें, लैप्रोस्कोपिक सिस्टम और नेत्र शल्य चिकित्सा इकाइयों सहित आधुनिक डायग्नोस्टिक और सर्जिकल सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। टेलीमेडिसिन सेवाओं और डिजिटल रेफरल नेटवर्क का विस्तार कर जिला अस्पतालों को तृतीयक और सुपर स्पेशियलिटी केंद्रों से निर्बाध रूप से जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए कई पहलें की जा चुकी हैं। एआईएमएसएस चमियाना और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में रोबोटिक सर्जरी सुविधाएं शुरू की गई हैं और जल्द ही अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित करने के लिए 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिवर्ष 9.5 लाख मरीज उपचार के लिए हिमाचल प्रदेश से बाहर जाते हैं, जिससे राज्य की जीडीपी को लगभग 1,350 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। यदि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं राज्य के भीतर उपलब्ध कराई जाएं, तो अनुमान है कि प्रतिवर्ष लगभग 550 करोड़ रुपये की जीडीपी की बचत की जा सकती है, साथ ही मरीजों का बहुमूल्य समय भी बचेगा।

युवाशक्ति के सशक्तिकरण का मजबूत स्तंभ केंद्रीय बजट 2026-27 – अनुराग ठाकुर

हिमाचल: पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने केंद्रीय बजट 2026–27 को भारत के युवाओं के लिए निर्णायक और परिवर्तनकारी बजट बताते हुए कहा कि यह बजट युवा शक्ति को विकसित भारत @2047 के लिए तैयार करने में महत्वूर्ण भूमिका निभाएगा।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  युवाओं के सशक्तिकरण व उनकी ऊर्जा को राष्ट्रनिर्माण में लगाने की दिशा में विगत 12 वर्षों से कार्यरत हैं। मोदी सरकार का यह बजट युवाओं के सशक्तिकरण में अल्पकालिक उपायों से आगे बढ़कर शिक्षा, कौशल, नवाचार, रोजगार और उद्यमिता के लिए दीर्घकालिक योजना पर आधारित है। यह बजट शिक्षा और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा और देश के विकास के अगले चरण की दिशा तय करेगा। शिक्षा मंत्रालय के लिए कुल बजट बढ़कर ₹1,39,289.48 करोड़ हो गया है, जो 2025-26 की तुलना में 8.27 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2026–27 में कुल पूंजीगत व्यय ₹12.21 लाख करोड़ होगा, जो निजी निवेश को आकर्षित करेगा और इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स तथा सेवाओं में युवा भारतीयों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार अवसर पैदा करेगा”

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “यह बजट तीन प्रमुख उद्देश्यों से प्रेरित है आर्थिक विकास को तेज और स्थिर बनाना, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और सभी के लिए अवसरों और संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करना। यह बजट शिक्षा, नवाचार और कौशल विकास को मजबूत करेगा, MSME सेक्टर को सशक्त बनाएगा, पर्यटन को बढ़ावा देगा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करेगा और टियर-II व टियर-III शहरों को नए विकास केंद्रों में बदलेगा।
प्रमुख पहलें जैसे इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ का प्रावधान) तथा बायोफार्मा शक्ति (पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़) डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, विनिर्माण तथा उन्नत तकनीकों में उच्च-गुणवत्ता वाले रोजगार उत्पन्न करेंगी। ये क्षेत्र बड़ी संख्या में युवा इंजीनियरों, शोधकर्ताओं तथा कुशल पेशेवरों को अवशोषित करेंगे तथा भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करेंगे”

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) कंटेंट क्रिएटर लैब्स के बनाने से 2030 तक तेजी से बढ़ते AVGC सेक्टर के लिए 20 लाख प्रोफेशनल्स को तैयार करना और उन्हें बेहतर मंच मिलेगा।
STEM संस्थानों और कोर्स में लड़कियों की संख्या को और बढ़ाने के लिए सरकार हर जिले में लड़कियों के लिए एक हॉस्टल बनाएगी। यह हॉस्टल वायबिलिटी गैप फंडिंग और पूंजीगत सहायता के जरिए स्थापित किए जाएंगे।

 अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “एमएसएमई तथा स्टार्टअप्स के लिए मजबूत समर्थन इस बजट की युवा-केंद्रित विशेषता है। ₹10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड तथा सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड के निरंतर समर्थन से युवा उद्यमियों को जोखिम पूंजी तथा वृद्धि वित्त उपलब्ध होगा, जिससे वे अपनी नवाचारों को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी उद्यमों में विकसित कर सकें। अनुपालन सरलीकरण, लघु अपराधों का अपराधमुक्तिकरण तथा डिजिटल सिंगल-विंडो सिस्टम प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों तथा युवा-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करते हैं।

खेल तथा युवा सेवाओं पर  अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि युवा मामले एवं खेल मंत्रालय को पर्याप्त वृद्धि मिली है। 2026-27 में मंत्रालय के लिए कुल बजटीय समर्थन लगभग ₹4,480 करोड़ है (2013–14 स्तर का लगभग 3.7 गुना), जिसमें प्रमुख आवंटन जैसे मेरा युवा भारत (₹655.2 करोड़) युवाओं को जोड़ने तथा संलग्न करने तथा खेलो इंडिया (₹924.4 करोड़) खेल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा एथलीट समर्थन के लिए हैं, जबकि केंद्रीय योजना मदों (एनएसएस, राष्ट्रीय युवा सशक्तिकरण कार्यक्रम, खेल प्रतिभागियों को प्रोत्साहन, राष्ट्रीय महासंघों को सहायता, खेल में मानव संसाधन विकास आदि) में अनुदान मांगों में विशिष्ट आवंटन हैं जो जमीनी स्तर पर भागीदारी, प्रतिभा पहचान तथा युवा एथलीटों तथा खेल उद्यमियों के लिए व्यावसायिक पथ प्रदान करते हैं”

मई-जून के दौरान सेब की बीमारियों के निदान के लिए वैज्ञानिक सिफारिशें, सेब उगाने वाले क्षेत्रों के बागवानों को सतर्क रहने की जरूरत

सेब में अल्टरनेरिया एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच पर जागरूकता अभियान 17 फरवरी से पुनः आरंभ

हिमाचल : प्रदेश के पाँच जिलों में सेब में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोगों के प्रति जागरूकता अभियान 17 से 19 फरवरी तक पुनः आयोजित किया जाएगा। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, की आठ टीमें बागवानी विभाग के सहयोग से शिमला, किन्नौर, चंबा, कुल्लू और मंडी जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में फील्ड  स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करेंगी।

इससे पूर्व 10 से 13 फरवरी के बीच विश्वविद्यालय की टीमों ने इन जिलों के 54 स्थानों को कवर करते हुए विभिन्न गांवों के 2,500 से अधिक किसानों को अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोगों के बारे में जानकारी किया। अभियान के दूसरे चरण में उन चिन्हित सेब उत्पादक क्षेत्रों में विशेष रूप से पहुंच बढ़ाई जाएगी, जो इन पर्ण रोगों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।

हाल के वर्षों में अल्टरनेरिया और मार्सोनिना लीफ ब्लॉच सेब उत्पादन के लिए चुनौती के रूप में उभरे हैं, जिससे समय से पूर्व पत्तों का झड़ना, फल का आकार छोटा होना तथा उत्पादन और गुणवत्ता में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। प्रदेश के कई बागानों में प्रचलित आर्द्र परिस्थितियाँ इन रोगों की पुनरावृत्ति को बढ़ावा देती हैं। समय पर वैज्ञानिक प्रबंधन के अभाव में ये रोगजनक प्रत्येक मौसम में दोबारा सक्रिय हो जाते हैं, जिससे बागानों के स्वास्थ्य और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

अभियान के दौरान टीमें खेत भ्रमण, किसान संवाद तथा स्थल पर प्रदर्शन आयोजित करेंगी, ताकि बागवान रोगों के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर सकें और वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित प्रबंधन उपाय अपनाएं। विशेष जोर रोग चक्र को तोड़ने तथा रसायनों के अंधाधुंध एवं अप्रभावी उपयोग को हतोत्साहित करने पर दिया जाएगा।

जिला-वार कार्यक्रम विवरण

जिला शिमला (टीम 1–4)
टीम 1: भरथाटा एवं बटारगलु17 फरवरी; नंदपुर एवं बड्यार18 फरवरी; छाज्जपुर एवं धर्माना–19 फरवरी
टीम 2: लोअरकोटी एवं मुनचारा–17 फरवरी; देविदार एवं जांगला–18 फरवरी; तेलगा एवं संदासु–19 फरवरी
टीम 3: बमटा, मातल एवं खद्दर–17 फरवरी; चौपाल, बासाधार एवं बलग––18 फरवरी;
टीम 4: ननखड़ी एवं नागाधार–17 फरवरी; खडाहन एवं आदर्शनगर–18 फरवरी; टिप्पर एवं खोलीघाट–19 फरवरी

जिला किन्नौर:
कमरू एवं थेमगरंग–17 फरवरी; रिब्बा एवं स्किब्बा–18 फरवरी; चौरा–19 फरवरी

जिला चंबा:
सलूणी एवं दांड–17 फरवरी; जसौरगढ़–18 फरवरी; दिउर (सलूणी)–19 फरवरी

जिला कुल्लू:
डोगर(बंजार)- 17 फरवरी, मनाली क्षेत्र–18 फरवरी; बंजार क्षेत्र––19 फरवरी

जिला मंडी:
सेरी करसोग–17 फरवरी; चुराग घाटी–18 फरवरी; केलोधार–19 फरवरी

यह जागरूकता अभियान किसानों की रोग पहचान, रोकथाम एवं वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित प्रबंधन तकनीकों संबंधी जानकारी को सुदृढ़ करने के साथ-साथ प्रदेश में सतत सेब उत्पादन एवं बागवानों की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

हिमाचल में मेडिकल कॉलेजों पर केंद्र ने की स्थिति स्पष्ट ; प्रदेश सरकार गलत तथ्य पेश कर रही – सांसद सुरेश कश्यप”

“सिरमौर मेडिकल कॉलेज में देरी के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार, 283 करोड़ का राज्यांश तक जमा नहीं किया”

शिमला:  भाजपा सांसद सुरेश कुमार कश्यप ने हिमाचल प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में दिए गए उत्तर के संदर्भ में प्रदेश सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट तथ्यों के साथ स्थिति रखी है, लेकिन प्रदेश सरकार धरातल की वास्तविकता को छुपाने और गलत तथ्य प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही है।

सांसद कश्यप ने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के उत्तर में साफ उल्लेख है कि केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत स्वीकृत मेडिकल कॉलेजों के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। चंबा, हमीरपुर और नाहन मेडिकल कॉलेज कार्यशील हैं, जबकि सिरमौर मेडिकल कॉलेज परियोजना ठेकेदार और कार्यान्वयन एजेंसी के विवाद के कारण प्रभावित बताई गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार केंद्र को जो आंकड़े भेज रही है, वे सत्य से परे हैं और वास्तविक प्रगति को छुपाया जा रहा है। कश्यप ने कहा कि वास्तविकता यह है कि प्रदेश सरकार सिरमौर में मेडिकल कॉलेज को लेकर गंभीर ही नहीं है और कॉलेज को वहां से हटाने या कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार को लगभग ₹283 करोड़ का राज्यांश जमा करना था, जो अब तक जमा नहीं कराया गया। राज्यांश जमा न होने के कारण परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई है, जिसका खामियाजा सिरमौर की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि सिरमौर के लोग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश सरकार उन्हें गुमराह करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार इस विषय पर स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करे, लंबित राज्यांश तुरंत जारी करे और मेडिकल कॉलेज परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करे।

31 मई से पहले हर हाल में चुनाव करवाने होंगे – सुप्रीम कोर्ट

हिमाचल: प्रदेश पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 31 मई से पहले हर हाल में चुनाव करवाने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुनर्सीमांकन के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव को नहीं टाला जा सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है।

सोलन: उपायुक्त की अध्यक्षता में बीबीएन क्षेत्र की ट्रक ऑपरेटर यूनियनों की बैठक आयोजित

सोलन:  उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने आज नालागढ़ में बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र की ट्रक ऑपरेटर यूनियनों के सम्बन्ध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता की।

मनमोहन शर्मा ने इस अवसर पर ट्रक ऑपरेटर यूनियनों की विभिन्न समस्याओं एवं सुझावों को सुना और सम्बन्धित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए।

उपायुक्त ने कहा कि बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे माल की आवाजाही और उत्पादों को बाज़ार तक पहुंचाने में ट्रक यूनियनों की विशेष भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार और ज़िला प्रशासन उद्योगों एवं ट्रक यूनियनों को आवश्यक सहयोग के माध्यम से यह सुनिश्चित बना रहा है कि सभी के हित से हिमाचल का व्यापक लाभ हो।

मनमोहन शर्मा ने कहा कि बीबीएन क्षेत्र प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है। यहां उद्योग, कामगार एवं ट्रक यूनियनों के मध्य आपसी समन्वय महत्वपूर्ण है।

उन्होंने दभोटा ट्रक ऑपरेटर यूनियन को निर्देश दिए कि नए ट्रकों को यूनियन के साथ जोड़ने के लिए प्राप्त आवेदनों की वरिष्ठता सूची समयबद्ध उपमंडलाधिकारी नालागढ़ को उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित बनाएं कि इस प्रक्रिया को सदस्यता खुलने के अनुरूप निर्धारित समय अनुसार पूरा किया जाए।

उपायुक्त ने ट्रक ऑपरेटर यूनियन नालागढ़ के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि अपनी आगामी सामान्य सभा में दभोटा ट्रक ऑपरेटर सहकारी समिति लिमिटिड एवं ट्रक आपरेटर यूनियन नालागढ़ के विलय से संबंधित प्रस्ताव को आपसी सहमति द्वारा पूर्ण करने के लिए प्रयास करें।

बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटिड नालागढ़ के आवश्यक सामग्री व उपकरणों की माल ढुलाई, पूर्व बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्यवाही की समीक्षा तथा लंबित मामलों के समाधान पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में वाहनों की ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण के सम्बन्ध में भी सार्थक विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में ट्रक ऑपरेटर यूनियनों द्वारा यातायात व्यवस्था, अधिक भार ढुलाई की रोकथाम, मार्ग निर्धारण, औद्योगिक क्षेत्रों में ट्रकों की आवाजाही, आपसी विवादों का समाधान तथा सुरक्षा व्यवस्था जैसे विषयों पर सुझाव रखे गए।

बैठक में निर्णय लिया गया कि भविष्य में बीबीएन ट्रक ऑपरेटर यूनियन द्वारा नई गाड़ियों की सदस्यता खुलने की स्थिति में दभोटा ट्रक ऑपरेटर यूनियन की गाड़ियों को कुछ प्रतिशतता के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी।

इस अवसर पर उपमंडलाधिकारी नालागढ़ नरेंद्र अहलूवालिया, उपमंडलाधिकारी बद्दी संजीव धीमान, तहसीलदार नालागढ़ हुस्न चंद, ट्रक ऑपरेटर यूनियन नालागढ़ के प्रधान विद्या रत्न, नालागढ़ ट्रक ऑपरेटर यूनियन सहकारी समिति के प्रधान जितेंद्र, दभोटा ट्रक आपरेटर यूनियन के प्रधान राजेंद्र सिंह, दभोटा ट्रक ऑपरेटर यूनियन सहकारी समिति के प्रधान सुरमत सिंह, यूनियन के सदस्य हजूरा सिंह सैनी तथा अन्य प्रतिनिधि सदस्य व विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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मण्डी: उपमुख्यमंत्री 16 फरवरी को करेंगे अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव-2026 का शुभारंभ

प्रथम जलेब में होंगे शामिल, सेरी मंच पर प्रथम सांस्कृतिक संध्या के रहेंगे मुख्य अतिथि

मण्डी: उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री मंडी में 16 फरवरी से 22 फरवरी तक आयोजित किये जा रहे अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव-2026 की प्रथम जलेब (शोभायात्रा) में 16 फरवरी को शामिल होंगे तथा पड्डल मैदान में महोत्सव का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इसी रात्रि को वे ऐतिहासिक सेरी मंच पर आयोजित महोत्सव की प्रथम सांस्कृतिक संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उप-मुख्यमंत्री 15 फरवरी सायं मंडी पहुंचेंगे। वे सर्किट हाउस में संक्षिप्त विश्राम के उपरांत सायं 6:30 बजे पंचवक्त्र मंदिर के समीप शिवरात्रि महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही ब्यास आरती में भाग लेंगे। उनका रात्रि विश्राम सर्किट हाउस मंडी में रहेगा।

कार्यक्रम के अनुसार 16 फरवरी को दोपहर 12:45 बजे वे भ्यूली स्थित भीमाकाली मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे तथा मंदिर परिसर में दोपहर का भोजन (देवलु धाम) करेंगे। इसके उपरांत वे मंडी के अधिष्ठाता देवता राज माधो राय जी की पूजा-अर्चना करेंगे और प्रथम जलेब में शामिल होकर पड्डल मेला मैदान में अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव-2026 का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इसी सायं वे पुनः सर्किट हाउस में संक्षिप्त विश्राम के बाद रात्रि लगभग 10:15 बजे सेरी मंच पर आयोजित महोत्सव की प्रथम सांस्कृतिक संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

उप-मुख्यमंत्री 17 फरवरी को प्रातः मंडी से शिमला के लिए प्रस्थान करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में जुड़ा नया आयाम, 14 फरवरी को होगा मण्डी का प्रथम लिटरेचर फेस्टिवल

छोटी काशी साहित्य उत्सव के नाम से संकन गार्डन में आयोजन, उपायुक्त ने जारी किया पोस्टर

मण्डी: अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव को लेकर 12 फरवरी को देर सायं आयोजित पत्रकार वार्ता में उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव में एक नया आयाम जोड़ते हुए 14 फरवरी को मंडी का प्रथम लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित किया जा रहा है, जिसे छोटी काशी साहित्य उत्सव नाम दिया गया है। उन्होंने इस अवसर पर उत्सव का आधिकारिक लोगो भी जारी किया।

उपायुक्त ने कहा कि ऐतिहासिक मंडी नगर अपनी स्थापना के 500वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और इसकी समृद्ध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समर्पित यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। मंडी से अनेक प्रतिष्ठित लेखक जुड़े रहे हैं और यहां की साहित्यिक परंपरा अत्यंत समृद्ध है। धर्मशाला, कसौली और शिमला में साहित्य उत्सव आयोजित होते रहे हैं, लेकिन मंडी में ऐसा आयोजन न होना खटक रहा था। इसी सोच के साथ इस वर्ष महोत्सव के अंतर्गत साहित्य उत्सव को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन 14 फरवरी को संकन गार्डन में होगा तथा सुप्रसिद्ध लेखक राजा भसीन प्रथम लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन करेंगे। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि यह फेस्टिवल आगे चलकर और विस्तृत स्वरूप ले तथा स्थायी पहचान बनाए।

पांच सत्रों में विविध विषयों पर चर्चा

उत्सव के अंतर्गत पांच सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रथम सत्र में मंडयाली लोक साहित्य एवं समकालीन साहित्य विषय पर चर्चा होगी। दूसरे सत्र में कैमरा, मंडी कलम और रंगमंच के माध्यम से मंडी की कलात्मक अभिव्यक्ति पर संवाद आयोजित किया जाएगा। तीसरे सत्र में किस्सों की विरासत -लोक कथा से बाल कथा तक विषय पर विचार-विमर्श होगा।

चौथे सत्र में युवा लेखन एवं मानसिक स्वास्थ्य विषय पर चर्चा की जाएगी, जबकि पांचवें सत्र में प्राचीन पारंपरिक साहित्यिक शैलियों के विकास पर विमर्श होगा। इसके अतिरिक्त साहित्य क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। सायंकाल गजल संध्या भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहेगी।

15 फरवरी को दूसरी ब्यास आरती

उपायुक्त ने बताया कि 15 फरवरी को दूसरी ब्यास आरती का आयोजन भी किया जाएगा। इस आरती का संचालन करने के लिए बनारस से पांच विद्वान आमंत्रित किए गए हैं। पत्रकार वार्ता में महोत्सव की तैयारियों, विभिन्न आयोजनों और व्यवस्थाओं की रूपरेखा पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।

संजौली चौक से आईजीएमसी सड़क 22 मई दोपहर 12 बजे से रहेगी बंद

सरकाघाट: प्लासी–समैला-त्रिफालघाट सड़क पर वाहनों की आवाजाही 15 फरवरी तक बंद

सरकाघाट: उपमंडलाधिकारी सरकाघाट राजेन्द्र कुमार गौतम ने प्लासी–समैला-त्रिफालघाट सड़क मार्ग पर रिटेनिंग वॉल निर्माण कार्य के चलते यातायात अस्थायी रूप से बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं।

आदेशों के अनुसार इस कार्य को ध्यान में रखते हुए इस सड़क मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही 15 फरवरी, 2026 तक अस्थायी तौर पर बंद रहेगी।

प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि आम जनता की सुविधा के लिए निर्धारित स्थानों पर सूचना एवं डायवर्जन बोर्ड लगाए जाएं तथा डायवर्जन प्वाइंट पर सड़क को पूर्ण रूप से बंद रखा जाए। यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग प्लासी–उखला–बरस–समैला सड़क से रहेगा। प्रशासन ने आम जनता से सहयोग की अपील की है।

मण्डी :16 फरवरी से 25 फरवरी तक इंदिरा मार्केट की छत पर सजेगा सरस मेला – DC अपूर्व देवगन

मण्डी : उपायुक्त मण्डी अपूर्व देवगन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान 16 फरवरी से 25 फरवरी तक इंदिरा मार्केट की छत पर सरस मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में हिमाचल प्रदेश सहित देश के लगभग 16 राज्यों के स्वयं सहायता समूहों एवं हस्तशिल्पकारों की भागीदारी रहेगी।

उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों तथा मंडी जिला के सभी विकास खंडों से स्वयं सहायता समूहों के प्रतिभागी इसमें उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। मेले में लगभग 90 से 95 स्टॉल स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 15 स्टॉल स्थानीय व्यंजनों के लिए आबंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त एक स्टॉल दिव्यांगजन स्वयं सहायता समूह को विशेष रूप से प्रदान किया गया है।
उपायुक्त ने कहा कि सरस मेले में हस्तशिल्प, हथकरघा एवं खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उत्पाद मुख्य आकर्षण रहेंगे। यह आयोजन स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने तथा स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर सरस मेले का अवलोकन करने तथा स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की खरीदारी कर उनका उत्साह बढ़ाने का आग्रह किया है।