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जनता के साथ कांग्रेस नेताओं ने भी नकारा सुक्खू का बजट – जयराम ठाकुर

शिमला: प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश किए गए चौथे पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दावा किया है कि बजट को लेकर जनता तो छोड़िए कांग्रेस नेताओं में भी कोई उत्साह नहीं है। उन्होंने इसे प्रदेश के इतिहास का सबसे निराशाजनक दस्तावेज करार देते हुए कहा कि मैंने अपने राजनीतिक जीवन में लगातार 29 बजट विधानसभा में पेश होते देखे हैं, लेकिन इस तरह का नीरस और दिशाहीन बजट पहले कभी नहीं देखा। इस बजट को देखकर प्रदेश की जनता अपना माथा पीट रही है और उसे इस बात का पछतावा हो रहा है कि उन्होंने सत्ता ऐसे दल को सौंप दी है जिसने अपनी नाकामियों और गलत नीतियों से हिमाचल प्रदेश को विकास के पायदान से नीचे धकेल कर गर्त में डाल दिया है। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर प्रदेश मैं पहली बार ऐसी सरकार आई है जो प्रदेशवासियों को कुछ देने के बजाय उनसे छीनने और उनसे लेने में यकीन रखती हैं। सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुविधा के लिए पूर्व सरकार द्वारा बनाए गए 2000 से ज्यादा संस्थान उनसे छीन लिए और अब जाते-जाते लोगों से जनहित योजनाओं का बजट और कर्मचारियों की सैलरी छीन रही है। सरकार का अत्याचार बहुत हो गया अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पूरे बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री का अहंकार सातवें आसमान पर रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस बजट को तैयार करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की मेहनत को पूरी तरह दरकिनार कर दिया और उन्हें दूध से मक्खी की तरह निकालकर बाहर फेंक दिया, जबकि सारा श्रेय खुद लेने की कोशिश में वह इस तरह बोल रहे थे जैसे पूरा बजट उन्होंने अकेले ही तैयार किया हो। इस बजट में विकास के नाम पर जो कुछ भी दावा किया गया वह केंद्र सरकार की योजनाओं के जरिए ही हो पाएगा। चाहे प्रदेश में सड़के बनने की घोषणा हो या फिर नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि, सारा पैसा केंद्र सरकार द्वारा ही दिया जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री  का अपना क्या योगदान है?
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की चरमराती वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों की दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के मनमाने और अविवेकपूर्ण फैसलों के कारण आज प्रदेश का कर्मचारी वर्ग पूरी तरह हताश और निराश हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले तो सारा सरकारी खजाना अपने ‘मित्रों’ की खातिरदारी और रेवड़ियां बांटने में लुटा दिया और अब जब खजाना खाली हो गया है, तो वित्तीय स्थिति सुधारने के ढोंग के नाम पर प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर छोटे कर्मचारियों तक की सैलरी डेफर (विलंबित) करने का तानाशाही निर्णय लिया है। ठाकुर ने दावा किया कि इस बजट से न केवल विपक्ष और जनता, बल्कि सत्ता पक्ष के अपने विधायक भी खुश नजर नहीं आए और सदन के भीतर का माहौल यह बता रहा था कि कांग्रेस के नेता खुद इस बजट का उपहास उड़ा रहे थे।
उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री को घेरा और कहा कि सुक्खू सरकार ने अपनी कोई नई मौलिक योजना शुरू करने के बजाय केवल केंद्र संचालित योजनाओं का पैसा डाइवर्ट कर उन्हें नया नाम देकर चलाने का प्रयास किया है, जो जनता के साथ एक बड़ा धोखा है। आम जनता पर पड़ने वाले बोझ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जनता पर अनावश्यक टैक्स थोप दिए गए हैं और चुनाव पूर्व किए गए 300 यूनिट मुफ्त बिजली तथा महिलाओं को 1500 रुपये देने के वादों पर अब कड़े नियम और शर्तें थोप दी गई हैं ताकि कम से कम लोगों को इसका लाभ मिल सके, जबकि वादा 18 वर्ष से ऊपर की सभी महिलाओं के लिए था। बिजली और पानी के भारी-भरकम बिलों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है और दूध के दाम बढ़ाने का जो दावा सरकार कर रही है, उसकी जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी खरीद बहुत कम की जा रही है जिससे पशुपालकों में भारी रोष व्याप्त है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि यह बजट पूरी तरह से चालाकी भरा और खोखला है, जिसमें केंद्रीय योजनाओं के नाम बदलकर अपनी वाहवाही लूटने की कोशिश की गई है, लेकिन धरातल पर बजट का कोई वास्तविक प्रावधान नहीं है, जिसके कारण आज प्रदेश का कोई भी वर्ग इस बजट से संतुष्ट या उत्साहित नहीं है और मुख्यमंत्री को अपनी विफलताएं छिपाने के लिए सदन में मजाक का सहारा लेना पड़ रहा है।

आर्थिक चुनौतियों के बीच संतुलित और जनहितकारी बजट; हर वर्ग को साधने की सफल पहल – बलदेव ठाकुर

शिमला:  हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव एवं वर्तमान में राज्य बस अड्डा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक बलदेव ठाकुर ने कहा कि हाल ही में आई आपदा से हुए भारी नुकसान तथा केंद्र सरकार के नकारात्मक रवैये के बावजूद प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एक संतुलित और प्रभावशाली बजट प्रस्तुत किया है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश की कुल राजस्व प्राप्तियां 40,361 करोड़ रुपये हैं, जबकि व्यय 46,938 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिससे 6,577 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा उत्पन्न हुआ है। इसके अतिरिक्त 9,698 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा और लगभग 85,311 करोड़ रुपये का कर्ज प्रदेश की वित्तीय स्थिति को चुनौतीपूर्ण बनाता है।

बलदेव ठाकुर ने आरोप लगाया कि पूर्व में केंद्र सरकारें ऐसी परिस्थितियों में प्रदेश की सहायता करती रही हैं, लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने राजनीतिक द्वेष के चलते न केवल अनुदान रोके हैं, बल्कि राज्य की ऋण सीमा में लगभग 3,000 करोड़ रुपये की कटौती भी की है, जिससे प्रदेश सरकार पर अतिरिक्त दबाव बनाया गया।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को उम्मीद थी कि इन परिस्थितियों में प्रदेश सरकार अस्थिर हो जाएगी, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इन आशंकाओं को गलत साबित करते हुए एक मजबूत और दूरदर्शी बजट पेश किया है। उनके अनुसार, यह बजट हिमाचल के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ बजटों में से एक है, जिसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

बजट में किसानों और बागवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए किसान आयोग के गठन तथा फसलों एवं दुग्ध उत्पादों के समर्थन मूल्य में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स, पंप ऑपरेटर, पैरा फिटर, मल्टी टास्क वर्कर्स, आउटसोर्स कर्मचारियों सहित विभिन्न वर्गों के वेतन और सामाजिक पेंशनों में वृद्धि कर निचले तबके को सशक्त बनाने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं, साथ ही विभिन्न विभागों में नई भर्तियों की दिशा में भी पहल की गई है।

विशेष रूप से, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन में क्रमशः 50%, 40%, 30% और 20% की कटौती कर छह माह तक रोक लगाने का निर्णय लिया गया है, ताकि आर्थिक संसाधनों को जनकल्याणकारी योजनाओं में लगाया जा सके। बलदेव ठाकुर ने इसे देश के अन्य नेताओं के लिए एक अनुकरणीय कदम बताया।

अंत में उन्होंने कहा कि यह बजट न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि वर्ष 2027 में कांग्रेस की पुनः सत्ता वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार भी तैयार करता है।

एसडीआरएफ का राष्ट्रीय सीएसएसआर प्रतियोगिता में अव्वल आना हिमाचल के लिए गर्व का क्षण – मुख्यमंत्री

शिमला: शिमला के ओक ओवर में आज एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की उत्कृष्ट उपलब्धि का सम्मान किया गया। इस टीम ने लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर की कोलैप्स्ड स्ट्रक्चर सर्च एंड रेस्क्यू प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को विजेता एसडीआरएफ टीम ने प्रतिष्ठित ट्रॉफी भेंट की। मुख्यमंत्री ने टीम के सदस्यों को उनकी शानदार उपलब्धि और समर्पण के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह वास्तव में गर्व का क्षण है जब हिमाचल प्रदेश जैसा छोटा राज्य किसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाएं लगातार बढ़ रही हैं और 2023 तथा 2025 में इनसे व्यापक नुकसान हुआ है। उन्होंने एसडीआरएफ, होम गार्ड्स, अग्निशमन विभाग और सिविल डिफेंस की सराहना की, जिन्होंने इन कठिन परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने और फंसे हुए लोगों व पर्यटकों को सुरक्षित निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने होम गार्ड वॉलंटियर मैनेजमेंट सिस्टम का भी उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य राज्यभर में होम गार्ड स्वयंसेवकों के समन्वय, दक्षता और प्रबंधन को बेहतर बनाना है। इसके साथ ही फायर सेफ्टी कोड 2026 की भी समीक्षा की गई, जो राज्य में आपदा प्रबंधन और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने सभी टीम सदस्यों को उनकी उत्कृष्ट सेवा और आपदा प्रबंधन में योगदान के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए। एसडीआरएफ टीम ने 9 से 11 मार्च 2026 तक गाजियाबाद स्थित एनडीआरएफ की 8वीं बटालियन के परिसर में आयोजित राष्ट्रीय सीएसएसआर प्रतियोगिता में इतिहास रचते हुए पहला स्थान हासिल किया। इस प्रतियोगिता में 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 30 टीमों ने भाग लिया था। टीम ने अपने ही पिछले रिकॉर्ड को तोड़ते हुए मात्र 41 मिनट में प्रतियोगिता पूरी की, जो उनकी दक्षता, तैयारी और संचालन क्षमता का प्रमाण है। अंतिम परिणामों में हिमाचल प्रदेश एसडीआरएफ प्रथम, उत्तर प्रदेश एसडीआरएफ द्वितीय और आंध्र प्रदेश एसडीआरएफ तृतीय स्थान पर रहे।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, महापौर सुरेन्द्र चौहान, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) केके पंत, पुलिस महानिदेशक (होमगार्ड) सतवंत अटवाल, विशेष सचिव राजस्व व आपदा प्रबंधन डीसी राणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

चंबा: कार खाई में जा गिरी; दो युवतियों सहित तीन की मौत, तीन गंभीर रूप से घायल

हिमाचल: प्रदेश के डलहौजी में शुक्रवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में गांधी चौक से जंदरीघाट–करेलनू मार्ग पर एक कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार, ऑल्टो कार (PB 01 E 7701) में छह लोग सवार थे, जो पंजाब के रहने वाले बताए जा रहे हैं। देर रात वाहन अचानक नियंत्रण खो बैठा और सड़क से फिसलकर करीब 1 से डेढ़ किलोमीटर गहरी खाई में जा गिरा। हादसा इतना भयावह था कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। रास्ते में सोफिया नामक युवती ने भी दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या तीन हो गई। मृतकों में सिमरनप्रीत कौर (18) और सुरेंद्र (25) शामिल हैं। घायलों में प्रिंस (21), सुमन प्रीत (19) और बलबीर (20) का इलाज जारी है। इनमें से कुछ को गंभीर हालत में रेफर किया गया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस थाना डलहौजी की टीम मौके पर पहुंची। मुख्य आरक्षी सुनील कुमार के नेतृत्व में राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया. स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को खाई से निकालकर सिविल अस्पताल डलहौजी पहुंचाया गया।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

हिमाचल बजट सत्र: एंट्री टैक्स में बढ़ोतरी के खिलाफ भाजपा का विधानसभा में जोरदार प्रदर्शन और सरकार को घेराबंदी की चेतावनी

शिमला: ​हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्रदेश का बजट पेश किए जाने से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी विधायक दल ने सरकार की नीतियों, विशेषकर हाल ही में बढ़ाए गए एंट्री टैक्स के खिलाफ सदन के बाहर और भीतर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में एकजुट हुए विपक्ष ने सरकार पर आम जनता और व्यापारी वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का गंभीर आरोप लगाते हुए इस टैक्स वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायकों ने नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि एंट्री टैक्स में की गई भारी वृद्धि न केवल परिवहन क्षेत्र को प्रभावित करेगी, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम महंगाई के रूप में आम आदमी की रसोई तक पहुंचेंगे। जयराम ठाकुर ने तर्क दिया कि कमर्शियल वाहनों पर लगने वाले इस अतिरिक्त कर से माल ढुलाई और परिवहन लागत में सीधा इजाफा होगा, जिससे बाजार में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ना तय है।

विपक्ष ने सरकार की इस नीति को ‘जनविरोधी’ करार देते हुए चेतावनी दी कि हिमाचल द्वारा उठाए गए इस कदम से पड़ोसी राज्यों के साथ भी व्यापारिक संबंधों में तनाव आ सकता है। विशेष रूप से पंजाब का संदर्भ देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि हिमाचल सरकार अपनी सीमाओं पर कर बढ़ाती है, तो जवाबी कार्रवाई में अन्य राज्य भी हिमाचल की गाड़ियों पर भारी टैक्स लगा सकते हैं, जिससे राज्य का अंतर्राज्यीय व्यापार पूरी तरह चरमरा जाएगा और स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। भाजपा विधायक दल ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन करते हुए सरकार से मांग की कि बजट भाषण से पूर्व ही इस जनविरोधी निर्णय को वापस लेकर जनता की चिंताओं का समाधान किया जाए, अन्यथा पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक अपना आंदोलन और अधिक तेज करेगी।

हिमाचल प्रदेश इतिहास का अब तक का सबसे उबाऊ, नीरस, दिशा और विजन हीन बजट – जयराम ठाकुर

शिमला : बजट अनुमान 2026- 27 पर मीडिया से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयरान ठाकुर ने कहा कि यह हिमाचल प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे उबाऊ निराश और दिशाहीन बजट है जिसमें प्रदेश के लिए कुछ नहीं है। इस प्रदेश का बजट लगातार प्रदेश की अपेक्षाओं पर न तो खरा उतर रहा है और ना ही बिकाश को गति देने में क़ामयाब हो रहा है। रुको सरकार में प्रदेश का राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से अब तक राजकोषीय घाटा क्रमशः 10,300 करोड़, हिमाचल 10,337 करोड़ , 12,414 करोड़ और 9896 करोड़ हो गया है इसी वर्षों में प्रदेश का पूंजीगत निवेश क्रमशः 6,781 करोड़, 6239 करोड़, 3941करोड़ और 3089 करोड़ रह गया। यानी विकास को पूर्ण विराम लग चुका है। वर्ष 2025-26 के लिए 58514 करोड़ का मुख्य बजट था। वित्तीय 2026-27 के किए बजट 54928 करोड़ का है। पिछले बार से 3586 करोड़ कम है। यह पिछले साल के बजट से 6.13 कम है। दुनिया में दुनिया भर में बजट अनुमान हमेशा आगे की राह दिखाते हैं लेकिन सुक्खू सरकार का यह बजट प्रदेश वो पीछे की दिशा में ले जाने वाला बजट बन कर रह गया है। यह बजट सुक्खू सरकार के पहले 53,412 करोड़ के बजट के लगभग बराबर है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि इस सरकार की वित्तीय प्रबंधन की हकीकत सामने आ चुकी है। हर बार सरकार कर्मचारियों के वेतन में किस प्रकार कमी ला सके इस दिशा मे काम करते हैं। 3 साल से व्यवस्था परिवर्तन और प्रदेश हित का नारा लगाते लगाते प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बदतर स्थिति में पहुंचा दिया है। जो भी घोषणाएं मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में की हैं वह भी पिछली बजट घोषणाओं की तरह या तो कागजों में धूल फांकती रह जाएंगी या फिर चुनावी गारंटीयों की तरह गोलमोल करके उनके पूरे होने  करने के विज्ञापन पूरे प्रदेश में लग जाएंगे और  लोग दफ्तरों के चक्कर काटते रहेंगे। यह सरकार सिर्फ अपना समय काट रही है। क्योंकि इस समय सरकार के पास करने को कुछ है नहीं और मुख्यमंत्री को अच्छे से पता है कि चुनाव के बाद हिमाचल से कांग्रेस इस तरह गायब हो जाएगी जैसे पूरे देश से गायब हो गई है। इसलिए इस तरीके के हथकंडे अपना कर अपनी लायबिलिटीज टाल रही है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि पिछली बार के बजट अनुमानों में जिस प्रकार से असमानता थी वह सप्लीमेंट्री बजट में सामने आई। कंट्री कन्यादान योजना का 10% हिस्सा भी आवंटित बजट का खर्चकर पाए। इसी तरीके से शगुन योजना का मात्र 17% हिस्सा तथा महिला सम्मान निधि का 3.7% फीफा वित्तीय वर्ष के तीन तिमाहियों में खर्च हो पाया।  इसी प्रकार से उनकी ऑर्गेनिक फार्मिंग की योजना भी सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित होकर रह गई। क्योंकि कल 1643 किसानों से ही सरकार द्वारा दो  2.69 करोड़ रुपए की खरीदारी हो पाई। इस योजना के लाभार्थियों को प्रति किसान 14000 रुपए भी नहीं मिले। जबकि इन योजनाओं पर प्रदेश सरकार द्वारा सैकड़ों करोड़ों रुपए खर्च किए गए। प्रदेश के कोने-कोने में बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए अखबारों और सोशल मीडिया पर विज्ञापन दिए गए। जयराम ठाकुर ने कहा यह बजट पूर्णतया दिशाहीन और दूरदर्शिताहीन बजट है जिसमें प्रदेश के लिए कुछ भी नहीं हैं। 29 साल के अपने राजनीतिक कार्यकाल में मैंने ऐसा दिशाहीन बजट नहीं देखा। 

कई नई योजनाओं को शुरू कर बजट को ऐतिहासिक बनाया गया है – विनय कुमार

शिमला : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने आज प्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत बजट को नई राह पर नया कदम बताते हुए कहा है कि वित्तीय संकट के बाबजूद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने समावेशी विकास के प्रति अपनी वचनबद्धता को दर्शाया है।
विनय कुमार ने बजट पर प्रतिक्रिया में बजट की सराहना करते हुए कहा है कि बजट में ग्रामीण विकास के साथ साथ कृषि व बागवानी विकास शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मूलभूत सुविधाओं के विस्तार,रोजगार पर विशेष ध्यान दिया गया है। कई नई योजनाओं को शुरू कर बजट को ऐतिहासिक बनाया गया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र की बेरुखी के बाबजूद प्रदेश को आर्थिक तौर पर सुदृढ और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह बजट प्रदेश में मिल का पत्थर साबित होगा। उन्होंने इस बजट के लिये मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के लोगों को बधाई दी हैं।

हिमाचल: मुख्यमंत्री सुक्खू ने पेश किया 54,928 करोड़ का बजट; मुख्य बिंदु:- 

हिमाचल : प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश किया। केंद्र सरकार से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने को आधार बनाकर सीमित संसाधनों के चलते मुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये के बजट अनुमान पेश किए, जो चालू वित्त वर्ष से 3586 करोड़ रुपये कम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कोई कटौती नहीं की गई है। जलशक्ति, लोक निर्माण जैसे विभागों के बजट को भी कम नहीं किया गया है। वित्तीय अनुशासन की दिशा में बड़ी घोषणा की गई।

आर्थिक संकट के बीच सीएम ने अपना, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों का वेतन 3 से 50 फीसदी तक छह महीने के लिए स्थगित करने की घोषणा की।इसमें मुख्यमंत्री के वेतन का 50 फीसदी, उप मुख्यमंत्री व मंत्रिमंडल के सदस्यों के वेतन का 30 प्रतिशत व विधायकों के वेतन का 20 प्रतिशत अगले 6 महीनों के लिए अस्थायी रूप से स्थगित करने की घोषणा की। सभी निगम-बोर्ड अध्यक्ष , उपाध्यक्ष और सलाहकारों के वेतन का 20 प्रतिशत भी इसी अवधि के लिए अस्थायी रूप से स्थगित रहेगा। मुख्य सचिव, एसीएस, प्रधान सचिव के वेतन का 30 प्रतिशत। सचिवों, एचओडी का 20 प्रतिशत डेफर रहेगा। डीजीपी व एडीजीपीएस का 30 प्रतिशत तथा आईजी, डीआईजी , एसएसपी व एसपी स्तर तक के पुलिस अधिकारियों का 20 प्रतिशत वेतन स्थगित रहेगा। इसके अलावा वन विभाग प्रमुख, सभी पीसीसीएफ एवं  अतिरिक्त पीसीसीएफ का 30 प्रतिशत तथा सीसीएफ, सीएफ एवं डीएफओ स्तर तक के अन्य वन अधिकारियों का 20 प्रतिशत वेतन अस्थायी रूप से स्थगित रहेगा। इसके साथ ही, ग्रुप-ए व ग्रुप-बी के अधिकारियों के वेतन का तीन प्रतिशत हिस्सा अगले 6 महीनों के लिए अस्थायी रूप से डेफर किया जाएगा। जबकि ग्रुप-सी व डी कर्मचारियों को पूर्णतः इससे बाहर रखा जाएगा और उन्हें पूरा वेतन मिलता रहेगा। बोर्ड-निगम, पीएसयू, स्वायत्त निकाय, विश्वविद्यालय और सरकार से ग्रांट इन एड प्राप्त करने वाली सोसाइटी वे भी इस निर्णय को सरकार के अनुरूप अपनाएं। न्यायपालिका की सांविधानिक गरिमा और स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करते हुए, राज्य सरकार यह आशा करती है कि वर्तमान वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिला जज एवं अतिरिक्त जिला जजों  के स्तर पर 20 प्रतिशत तथा न्यायिक स्थापना के ग्रुप-ए और ग्रुप-बी अधिकारियों के स्तर पर 3 प्रतिशत वेतन के अस्थायी स्थगन पर उच्च न्यायालय अपने मार्गदर्शन एवं सहमति से  सरकार के अनुरूप विचार करेगा।   सीएम ने कहा कि उच्च न्यायालय अपने विवेक सेवरिष्ठ स्तर पर स्वेच्छा से 30 प्रतिशत तक स्थगत पर भी विचार कर सकता है। यह केवल अस्थायी स्थगन  है, और जैसे ही राज्य की आर्थिक स्थिति  बेहतर होगी, यह राशि वापस दे दी जाएगी। पेंशन में कोई कटौती नहीं होगी।

बजट के मुख्य बिंदु:- 

1. ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं आजीविका सुदृढ़ीकरण

डेयरी सहकारी समितियों की संख्या इस वर्ष के अन्त तक दोगुनी कर 2 हज़ार तक पहुँचाने का लक्ष्य

निजी क्षेत्र में लगने वाले Bulk Milk Cooler की स्थापना तथा दूध एकत्रित करने के लिए खरीदे जाने वाले 10 वाहनों के लिए 65 प्रतिशत की Subsidy

A2 Milk की Testing व Branding करके इसे Himachal Pradesh Milk Federation के माध्यम से 100 रूपये प्रति लीटर खरीदने की व्यवस्था ।

दुग्ध के Procurement से जुड़ी प्रदेश की पंजीकृत सहकारी संस्थाओं के किसानों को DBT के माध्यम से दिए जाने वाले Milk Incentive को अगले वित्तीय वर्ष से 3 रूपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 6 रूपये प्रति लीटर किया जाएगा।

गद्दी, गुज्जर, किन्नौरा और अन्य सम्बन्धित समुदायों के 40 हज़ार से अधिक परिवारों के लिए एक सशक्त बनाने हेतु 300 करोड़ रूपये के परिव्यय के साथ PEHEL (Pastoralists Empowerment in Himalayan Ecosystems for Livelihood) योजना प्रारम्भ की जाएगी।

पशु संख्या या चराई क्षेत्र की पाबन्दियों में उचित छूट देने पर विचार

ऊन की कटाई, सफाई, Testing, Grading और Packing की वैज्ञानिक व्यवस्था व ऊन के खरीद मूल्य को Market Stabilization Scheme के तहत 100 रुपये प्रति किलोग्राम के Support Price की घोषणा ।

मुर्गी पालन के क्षेत्र में आगामी पांच वर्षों में 62 करोड़ रूपये की लागत से स्वरोजगार की उड़ान-Comprehensive Himachal Integrated Commercial Poultry Scheme (CHIC) को लागू करने का प्रस्ताव

गौ-संरक्षण और बेसहारा पशुओं के पुनर्वास को प्राथमिकता \।

मत्स्य पालन क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने तथा मछुआरों के कल्याण के लिए “मुख्य मन्त्री मछुआरा सहायता योजना” शुरू करने की घोषणा ।

जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों पर रॉयल्टी की दर को 7.5 प्रतिशत से घटाकर “एक प्रतिशत” करने की घोषणा।

2. सतत् कृषि, बागवानी एवं वन

गेहूँ का MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया जाएगा। मक्का का MSP 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम होगा। पांगी घाटी की जौ का MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया जाएगा। हल्दी का MSP 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया जाएगा। राज्य में पहली बार अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम का MSP प्रावधान किया जा रहा है।

सरकार बीज सम्प्रभुता सुनिश्चित करने हेतु “बीज गाँव” स्थापित करेगी, जहाँ 50-100 किसान पारंपरिक बीज उत्पादन करेंगे। उत्पादकों को प्रति बीघा 5,000 रुपये सब्सिडी और प्रत्येक गाँव को 2 लाख रुपये का एकमुश्त Infrastructure अनुदान मिलेगी।

सरकार प्रदेश में हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग अधिनियम के माध्यम से “हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग” का गठन करेगी।

> कृषि विज्ञान केन्द्र हमीरपुर स्थित बड़ा में किसानों के प्रशिक्षण केंद्र व Hydroponic के लिए Centre of Excellence स्थापित किया जाएगा।

➤ 400 डेयरी फार्मिग इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी, 600 लाभार्थियों को सेवा क्षेत्र में सहयोग दिया जाएगा तथा 10 करोड़ रूपये की सहायता फार्म मशीनरी पर 50:50 के अनुपात में Cost Sharing के आधार पर दी जाएगी।

वर्ष 2026-27 के लिए मुख्यमंत्री खेत बाड़बन्दी योजना में 10 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है।

HPSHIVA परियोजना लगभग एक हजार 292 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से प्रदेश के जिला बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मण्डी, सोलन, सिरमौर और ऊना के 52 विकास खण्डों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।

गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जिला कांगड़ा के शाहपुर और जिला सिरमौर के बागथन में दो आधुनिक फाउंडेशन ब्लॉक की स्थापना का प्रस्ताव।

मण्डी जिले के हराबाग और समराहण में दो टेक्नोलॉजी सेंटर-Farmer Advisory & Capacity Development Centre (FACDC)

और Farmer Enterprise Incubation Centre (FEIC) की स्थापना का प्रस्ताव ।

लगभग 5 करोड़ की अनुमानित लागत से नगरोटा बगवां (कांगड़ा), दधोल (बिलासपुर) और नादौन (हमीरपुर) में तीन Post-Harvesting Management Facilities स्थापित की जाएंगी।

“मिशन 32 प्रतिशत” के अर्न्तगत Forest Cover वर्ष 2030 तक 32 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य ।

8 हज़ार हैक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण का लक्ष्य।

राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के अन्तर्गत लगभग 4 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में एक हज़ार 100 सामुदायिक समूहों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए, वृक्षारोपण का लक्ष्य ।

वर्ष 2026-27 में 50 नए स्थल ईको टूरिज्म के लिए विकसित किए जाएंगे। लगभग 50 प्रमुख वन विश्राम गृहों की बुकिंग को ऑन लाइन किया जाएगा।

बनखण्डी, कांगड़ा में बन रहे Zoological Park के लिए वर्ष 2026-27 के लिए 220 करोड़ का प्रावधान ।

Forest Ecosystems and Climate Proofing Project के अन्तर्गत लगभग 320 करोड़ रूपये के परिव्यय से इस परियोजना का दूसरा चरण का प्रारम्भ ।

Himachal Pradesh Forest Ecosystems Management and Livelihood Project के लिए 100 करोड़ रूपये तथा Integrated Development Project (IDP) के लिए वर्ष 2026-27 के लिए 50 करोड़ रूपये व्यय किया जाना प्रस्तावित है।

3. समावेशी सामाजिक कल्याण एवं महिला-बाल विकास

दिव्यांगजनों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन को प्रति माह सतरह सौ रूपये से बढ़ाकर तीन हज़ार रूपये प्रति माह करने की घोषणा ।

मानसिक बीमारी से ठीक हो चुके और परिवार द्वारा स्वीकार न किए गए व्यक्तियों के पुनर्वास हेतु दो नए हाफ वे होम स्थापित करने की घोषणा ।

सुन्दरनगर स्थित विशेष योग्यताओं वाले बच्चों हेतु संस्थान की क्षमता को 150 से बढ़ाकर 200 सीटें करने का प्रस्ताव है।

मुख्यमन्त्री महिला सशक्तिकरण योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों की पात्र महिलाएं को तीन लाख रूपये तक का Subsidized ऋण स्वरोजगार इकाईयां स्थापित करने हेतु उपलब्ध करवाया जाएगा।

‘मुख्यमंत्री कन्यादान योजना’ तथा ‘मुख्यमंत्री शगुन योजना’ का एकीकरण कर एक नई योजना ‘शुभ विवाह योजना’ प्रारंभ की जाएगी। इसके अंतर्गत BPL परिवार तथा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अन्तर्गत आने वाली 21 वर्ष से अधिक आयु की पात्र बालिकाओं/महिलाओं के विवाह के समय सरकार द्वारा 51 हज़ार रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

सरकार द्वारा सशक्त महिला योजना एवं वो दिन योजना को प्रभावी बनाने व इनमें एकरूपता लाने तथा सार्वजनिक संसाधनों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु, इन दोनों योजनाओं को “सशक्त नारी, स्वस्थ परिवार एकीकृत (IEC) मिशन” के अन्तर्गत एकीकृत किया जाएगा।

यौन शोषण से पीड़ित बालिकाओं व महिलाओं का मान-सम्मान, आत्मविश्वास तथा उनका आर्थिक व सामाजिक पुनर्वास हेतु एक नई योजना आरम्भ करने की घोषणा।

कोटला बरोग, सिरमौर में बन रहे Model De-Addiction Center के पास ही दो करोड़ रूपये की लागत से एक Observation Home व Special Home स्थापित किया जाएगा।

बाल आश्रम घुमारवीं, सुजानपुर, कल्पा, साहो, गरली, कुल्लू, सुन्दरनगर, टूटीकण्डी तथा कोटला बड़ोग में भवन निर्माण व मुरम्मत हेतु दो करोड़ रूपये प्रति संस्थान देने हेतु 18 करोड़ रूपये की राशि का आवंटित करने की घोषणा।

“इन्दिरा गांधी सुख शिक्षा योजना” में विस्तार करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 से इस योजना की पात्र लाभार्थियों के बच्चे, जो प्रदेश के बाहर भी IIT, NIT, IIM, AIIMS तथा NLUs जैसे प्रतिष्ठित सरकारी व्यवसायिक संस्थानों में प्रवेश पाएंगे, उनकी पाठ्यक्रम फीस, छात्रावास शुल्क तथा मैस शुल्क आदि पर आने वाला समस्त व्यय सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

4. शिक्षा सुधार एवं लर्निंग संवर्धन

प्रदेश सरकार ने न सिर्फ स्कूलों का Rationalization किया है बल्कि उनमें Quality Education की ओर विशेष ध्यान दिया है। प्रदेश के 100 स्कूलों को Central Board of School Education (CBSE) से सम्बद्ध करने का निर्णय लिया गया था। अभिभावकों के उत्साह को देखते हुए यह संख्या 150 तक पहुँच गई है। इन विद्यालयों में बच्चों के नामांकन में वृद्धि देखी जा रही है।

साथ ही हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड से सम्बद्ध 300 Senior Secondary Schools में भी समकक्ष सुविधाएँ दी जाएँगी। अगले वर्ष 150 और सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को CBSE से सम्बद्ध किया जाएगा और 150 हिमाचल बोर्ड से जुड़े

विद्यालयों को समकक्ष रूप से स्तरोन्नत किया जाएगा। इन सभी विद्यालयों के लिए एक Dedicated Cadre का भी सृजन किया जाएगा ।

मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना के तहत बच्चों को सप्ताह में दो दिन अतिरिक्त पोषण की व्यवस्था जारी रखने हेतु 17 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान।

राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों के नए भवनों के निर्माण और वर्तमान में क्रियाशील विद्यालयों को Upgrade करने का काम चल रहा है। 49 ऐसे स्कूलों को लगभग 99 करोड़ रुपये आवंटन करने की घोषणा ।

नादौन (हमीरपुर), सुन्दरनगर (मण्डी), पपरोला (कांगड़ा), सरकाघाट (मण्डी), संधोल (मण्डी), मतियाणा (शिमला), रोहडू (शिमला), जुब्बल (शिमला), माजरा (सिरमौर) और मोरसिंघी (बिलासपुर) में Sports Hostels के स्तर में व्यापक सुधार और इनमें प्रशिक्षित कोच तथा अन्य स्टाफ नियुक्त किए जाएँगे।

प्रदेश के सभी Senior Secondary Schools Senior Secondary Schools में चौकीदार और Multi Task Workers के पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा।

वर्ष 2026-27 से प्रदेश के Under Graduate Courses को पूरे देश से Align करने के लिये निम्नलिखित व्यवस्था परिवर्तन किया जाएगाः-

सभी UG कोर्स Semester System के माध्यम से चलाए जाएंगे।

Flexible UG Degree Programme की शुरुआत और विद्यार्थियों को Multiple Entry और Multiple Exit का विकल्प दिया जाएगा।

चुने हुए Degree Colleges में 4 वर्षीय Bachelor Degree with Honours और Research शुरू की जाएगी।

Academic Bank of Credits (ABC) को शुरू किया जाएगा।

Multi-Disciplinary Approach को बढ़ावा दिया जाएगा।

चुने हुए Colleges में Apprenticeship Embedded Degree Programme शुरू किए जाएंगें।

प्रदेश के Tier-I Colleges में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू की जाएगी।

हमीरपुर में प्रदेश का पहला Science College और हरिपुर गुलेर (काँगड़ा) में प्रदेश का दूसरा Fine Arts College स्थापित करने की घोषणा ।

प्रदेश के निम्न महाविद्यालयों को पहले चरण में Sports की दृष्टि से विकसित किया जाएगाः- GDC Ghumarwin, GDC Chamba, GDC Chowari, GDC Hamirpur, GDC Nadaun, GDC Dharamshala, GDC Palampur, GDC Dhaliara, GDC Kinnaur, GDC Kullu, GDC Mandi, GDC Sarkaghat, GDC Jogindernagar, GDC Saraswati Nagar, GDC Seema, GDC Rampur, GDC Reckong Peo, GDC Paonta Sahib, GDC Nahan, GDC Nalagarh, GDC Una और GDC Haroli

प्रदेश के Colleges में चल रहे Bachelor of Vocation Courses का विस्तार करके इन्हें 50 महाविद्यालयों में Self Financing Mode में शुरू किया जाएगा।

प्रदेश में Academia Industry Connect को बेहतर करने के लिये CSR Initiatives और PPP Mode में Industry Oriented Courses शुरू किए जाने की पहल की जाएगी।

Colleges में Online Learning, Blended Learning और Digital Learning को बढ़ावा देने के लिए Dedicated Lease Line की व्यवस्था की जाएगी।

प्रदेश में कुछ Degree Colleges ऐसे हो गये हैं जिनमें बच्चों की संख्या सौ से भी कम रह गई है, पहले चरण में हम ऐसे Colleges के बच्चों को जिनमें 75 से कम विद्यार्थी हैं, यदि वे District Head Quarter के Colleges में Admission लेते हैं तो उन्हें प्रति मास पांच हज़ार रूपये की राशि Stipend के तौर पर दी जायेगी ।

प्रदेश के महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों के 389 पदों की भर्ती जल्द ही सरकार भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगी।

तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार को जोड़ने हेतु Training and Placement Portal बनाया जाएगा।

जिला बिलासपुर के घुमारवीं क्षेत्र में Self-Financing Mode के अन्तर्गत एक Skill Academy स्थापित की जाएगी।

11 Government Polytechnics और एक Engineering College में New Age एवं Future-Oriented Courses शुरू किए जाएंगे।

5. हरित हिमाचल- स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु प्रतिबद्धता

Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) के तहत वर्ष में बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये 450 करोड़ रूपये खर्च किये जाने का प्रावधान है।

ऊर्जा क्षेत्र में Global Standard हासिल करने के लिये Uniform Environment Social Policy Procedure लागू व Integrated Resource Planning System शुरू किया जायेगा।

6 Battery Energy Storage System (BESS) युक्त सौर परियोजनाओं-सनेहड़ (11MW), दभोटा (9MW), टिहरा खास (6MW), माजरा (8MW), घन्द्रान (10MW) और सुकोहन (5MW) को स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी।

सिरमौर के पांवटा साहिब में 200 MVA क्षमता के 220/132 KV के GIS Substation का निर्माण लगभग 124 करोड़ रुपये की लागत से किया जाना प्रस्तावित है। यह काम वर्ष 2026-27 में शुरु कर दिया जायेगा।

काँगड़ा जिला के धर्मशाला और बैजनाथ में 63 MVA के दो GIS उपकेन्द्रों का निर्माण लगभग 221 करोड़ रुपये की लागत से किया जायेगा।

धारकुण्डा से माजरा तक की 29 किलोमीटर लम्बी ट्रांसमिशन लाईन का निर्माण कार्य भी आंरभ किया जायेगा। इस पर लगभग 41 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे ।

राजीव गांधी Start-up स्वरोजगार सौर योजना के तहत 100 किलोवाट से 2 मैगावाट तक की परियोजनाएं स्थापित करने के लिये जनजातीय क्षेत्रों में 5 प्रतिशत तथा शेष क्षेत्रों में प्रतिशत बजट अनुदान दिया जायेगा। 4

ग्राम पंचायतों में स्थापित की जा रही 500 KW Ground Mounted की सोलर परियोजनाओं के क्रियाशील होने पर आय का 30 प्रतिशत भाग ग्राम पंचायत और इसका 20 प्रतिशत भाग पंचायत क्षेत्र के वन्चित वर्गों के कल्याण पर खर्च किया जायेगा।

6. स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण

प्रत्येक पर 25 करोड़ रूपये व्यय के साथ Government Medical College टाण्डा, हमीरपुर तथा AIMSS शिमला स्थित चमियाणा में एक-एक Track Based Integrated Total Laboratory Automation System वाली Advance Testing Lab स्थापित की जाएगी।

IGMC शिमला, Government Medical College(GMC) टाण्डा, हमीरपुर तथा नेरचौक में 20 करोड़ रूपये की लागत से Bone Marrow Transplant & Apheresis Units स्थापित की जाएंगी।

GMC हमीरपुर, तथा नेरचौक के लिए लगभग 46 करोड़ रूपये की लागत से PET Scan मशीनें खरीदी जाएगी।

PET Scan की सुविधा को Government Medical College टाण्डा व IGMC Shimla में भी जल्द ही शुरू किया जाएगा।

AIMSS शिमला स्थित चमियाणा में 20 करोड़ रूपये की लागत से एक Digital Subtraction Angiography मशीन खरीदी जाएगी।

IGMC, शिमला में;

रोबोटिक सर्जरी हेतु आवश्यक एनेस्थीसिया उपकरणों की खरीद के लिए 5 करोड़ रूपये,

OBG विभाग की यूनिट स्थापना एवं रोबोटिक सर्जरी हेतु मशीनरी व उपकरणों की खरीद के लिए 3 करोड़ 68 लाख

रूपये,

मशीनरी व उपकरणों की खरीद हेतु 2 करोड़ 38 लाख रूपये,

शल्य चिकित्सा विभाग में 4K Laparoscopic Sets एवं Electro Surgical Station की खरीद हेतु 5 करोड़ रूपये निर्धारित किए है।

लिफ्ट स्थापना हेतु 2 करोड़ 38 लाख रूपये तथा लेक्चर थियेटर निर्माण हेतु 6 करोड़ रूपये, छात्राओं के छात्रावास हेतु Corrostophen Estate, लक्कड़ बाजार में 10 करोड़ रूपये का प्रावधान किया जाएगा।

Government Medical College नाहन में मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद हेतु लगभग दो करोड़ रूपये की राशि जारी की जाएगी।

Government Medical College चम्बा में कौशल प्रयोगशाला (Skill Lab) निर्माण हेतु एक करोड़ 33 लाख रूपये की राशि का प्रावधान

किया गया है।

ZH कुल्लू, ZH ऊना, RH सोलन, Medical College चम्बा व नाहन और टाण्डा में Cath Labs स्थापित की जाएंगी।

Government Medical College चम्बा के फेस-II को शुरू किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 194 करोड़ रूपये है।

Government Medical College नाहन में कॉलेज के निर्माण हेतु 500 करोड़ रूपये खर्च किए जाएंगे।

Government Medical College चम्बा, हमीरपुर तथा नाहन में प्रत्येक संस्थान में 40 बिस्तरों वाली Intensive Care Units(ICUs) स्थापित की जाएगी।

Government Medical College टाण्डा में लेक्चर थियेटर निर्माण हेतु 14 करोड़ 86 लाख रूपये व कॉलेज के भवन के रखरखाव हेतू 2 करोड़ 27 लाख रूपये का प्रावधान किया जाएगा।

Government Medical College हमीरपुर के Super Speciality Block के निर्माण हेतु 150 करोड़ रूपये का प्रावधान किया जाएगा।

हमीरपुर में 200 करोड़ रूपये की लागत से एक नए डेंटल कॉलेज की स्थापना का भी प्रस्ताव इस चरण में शामिल है। इसके अतिरिक्त Government Medical College, हमीरपुर में ऑडिटोरियम निर्माण हेतु 6 करोड़ रूपये तथा डॉक्टरों के आवास हेतु 7 करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान किया जाएगा।

AIMSS Chamiyana में क्रिटिकल केयर और एडिशनल ब्लॉक के Attic फ्लोर पर 10 करोड़ रूपये की लागत से हॉस्टल निर्माण किया जाएगा।

Government Medical College टाण्डा के नर्सिंग स्कूल हेतु 2 करोड़ 50 लाख रूपये का प्रावधान किया जाएगा।

Government Medical College मण्डी स्थित नेरचौक में छात्रों हेतु छात्रावास निर्माण हेतु 8 करोड़ 50 लाख रूपये की राशि जारी की जाएगी।

18 डे-केयर कैंसर सेंटर्स (DCCCs) और चार टर्शियरी केयर सेंटर्स IGMC शिमला, Government Medical College टाण्डा, AIIMS बिलासपुर और Government Medical College मण्डी के बीच Tele-Oncology सेवाएं स्थापित की जानी प्रस्तावित है।

प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा के लिए Human Papillomavirus (HPV) टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव।

समाज में बढ़ रही नशे की लत को दूर करने के लिए नीति आयोग की मदद से State Action Plan बनाया जाएगा।

चिकित्सा अधिकारी के 23 पद सृजित किए गए हैं तथा 232 पदों को लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरने हेतु प्रक्रिया जारी है।

150 सहायक स्टाफ नर्स, 30 रेडियोग्राफर, 40 फार्मेसी ऑफिसर, 500 रोगी मित्र एवं 99 OTAS सहित पैरामेडिकल पद भी भरे जाएंगे।

सहायक स्टाफ नर्सों के 900 पदों, पैरा मैडिकल स्टाफ के 124 पदों तथा जेओए आईटी के 50 पदों को राज्य चयन आयोग के माध्यम से भरने हेतु प्रक्रिया जारी है।

मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में विभिन्न संकायों के प्रवक्ताओं के 64 नए पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है।

स्टेट कैंसर संस्थान, हमीरपुर क्रियान्वयन हेतु विभिन्न श्रेणियों के 469 पदों को (111 पद फैकल्टी, 180 पद नर्सिंग, 55 पद पैरा मेडिकल स्टाफ तथा 123 अन्य सहायक श्रेणियों के) सृजित किया गया है, जिन्हें आगामी वर्ष में भरा जाएगा।

आगामी वर्ष में कुपोषण, एनीमिया तथा Micronutrient की कमी को दूर करने के उद्देश्य से पोषण अभियान के अनुरूप एक व्यापक State Nutrition Policy लाने की घोषणा।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सात वर्ष पूर्ण कर चुके विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों को एक अप्रैल, 2026 से एकमुश्त औसतन 14 हज़ार रुपये की वृद्धि प्रदान की जाएगी।

जो शेष कर्मचारी सात वर्ष का लाभ इस वित्तीय वर्ष से प्राप्त नहीं करेंगे, ऐसे सभी कर्मचारियों को 1 अप्रैल, 2026 से मूल वेतन पर 5 प्रतिशत की वृद्धि दी जाएगी।

चिकित्सा अधिकारी जो अभी तक नियमित नहीं हुए हैं, उनका मासिक वेतन 33 हजार 660 रुपये से बढ़ाकर 40 हज़ार रुपये किया जाएगा।

प्रमाण-आधारित (Evidence Based) आयुर्वेद को बढ़ावा देने और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएँ सुनिश्चित करने हेतु एक समर्पित आयुर्वेद अनुसंधान विंग स्थापित किया जाएगा।

उच्च हिमालयी क्षेत्रों की औषधीय संपदा के उपयोग हेतु लाहौल-स्पीति और अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में हर्बल गार्डन स्थापित करने की संभावनाएँ तलाशी जाएंगी।

वर्तमान में चल रही तीन सरकारी आयुर्वेदिक फार्मेसियों को HIMOSHDHAM सोसाइटी के अंतर्गत लाया जाएगा ताकि उनका आधुनिकीकरण हो सके। प्रारंभिक संचालन हेतु एक करोड़ रूपये की अनुदान प्रदान दिया जाएगा और प्रत्येक फार्मेसी में मल्टी-टास्क वर्कर नियुक्त किए जाएंगे।

जारी………………………………………

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शिमला पुलिस ने पकड़ा नाबालिक चोर गिरोह

शिमला:शिमला पुलिस ने एक नाबालिग चोर गिरोह को पकड़ा है। इस गिरोह ने सड़क निर्माण में लगी मशीनों से डीजल और बैटरियां चोरी कर ली थीं। सड़क निर्माण कंपनी को जैसे ही पता चला तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया। जिसके बाद सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची।  पुलिस ने दो पिकअप गाड़ियां (HP30-5790 और HP06B-5527) को जब्त कर लिया है। वहीं, तीन नाबालिग आरोपी पकड़े जाने के डर से ढांक में उतर गए थे, जिन्हें पुलिस ने जोखिम उठाते हुए रस्सियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकालकर हिरासत में लिया। चौथे आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया गया।  पुलिस ने मौके पर ही शिकायतकर्ता के बयान दर्ज कर थाना सुन्नी में अभियोग संख्या 11/2026 दिनांक 20.03.2026 के तहत धारा 303(1), 3(5) भारतीय न्याय संहिता में मामला दर्ज किया है। मामले की जांच पुलिस द्वारा जारी है। वहीं, जिला पुलिस शिमला ने सभी नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके और क्षेत्र में सुरक्षा बनी रहे।