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शिमला: कुसुम्पटी बाजार सड़क 19 से 22 अगस्त तक यातायात के लिए बंद 

15 अप्रैल तक बंद रहेगी बदारन-गाहलियां जोल-गारली सड़क

हमीरपुर:  बड़सर उपमंडल के अंतर्गत बदारन-गाहलियां जोल-गारली सड़क की मरम्मत एवं अपग्रेडेशन के कार्य के चलते इस सड़क पर यातायात 15 अप्रैल तक बंद किया गया है। इस संबंध में आदेश जारी करते हुए जिलाधीश गंधर्वा राठौड़ ने बताया कि बदारन-गाहलियां जोल-गारली सड़क के मरम्मत एवं अपग्रेडेशन कार्य को सुचारू रूप से जारी रखने तथा इसे अतिशीघ्र पूरा करने के लिए उक्त सड़क पर वाहनांे की आवाजाही 15 अप्रैल तक बंद की गई है। इस दौरान क्षेत्र के वाहन चालक बड़सर-हरसौर-गारली सड़क से आवाजाही कर सकते हैं।

केंद्र से किसी न किसी रूप में लगातार मिली मदद, राजस्व प्राप्ति में केंद्र का हिस्सा 53.6 प्रतिशत – जयराम ठाकुर

शिमला : विधान सभा में सुक्खू सरकार के बजट पर चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार को जमकर घेरा। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार में अधिकांश योजनाओं की घोषणाएं बिना पर्याप्त बजट प्रावधान के की गई हैं। पिछले तीन वर्षों की कोई भी योजना पूर्णतया लागू ही नहीं हो पाई। पिछले तीन सालों की बजट में घोषित दर्जनों योजनाएं ज़मीन पर नहीं उतर पाई है। इस बजट में प्रदेश के लिए कुछ भी नहीं है। दुनिया में बजट का आकार हर साल बढ़ता है लेकिन सुक्खू सरकार का वर्तमान बजट तीन साल पहले के बराबर है। जो मुख्य क्षेत्र हैं उनके बजट में लगातार कटौती हो रही है। पिछले बजट वर्ष में 2024-25 की अपेक्षा मेजर सेक्टर में 2354 करोड़ रुपए यानी 21 प्रतिशत की कमी आई। अगले वित्त वर्ष में यह कटौती चालू वित्त वर्ष के मुकाबले 3188 करोड़ रुपए यानी 41.77 फीसदी की कमी आई। इस तरह से प्रदेश का कैसे भला होगा? जब जन सुविधाओं के लिए बजट नहीं होगा तो लोगों को सुविधाएं कैसे मिलेगी?  पूंजीगत पिछले तीन सालों में लगातार गिरते हुए 3089 करोड़ यानी कि आधा हो गया। राजस्व घाटा लगातार बढ़ रहा है। पिछले चार बजट में राजस्व घाटा औसतन 10620 करोड़ रुपए रहा। 
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में नौकरियां लगातार कम हो रही हैं। हमारी सरकार के समय कोविड जैसी महामारी के बाद भी सरकारी नौकरियों का ‘आल टाइम हाई रिकॉर्ड’ स्थापित हुआ। जब हम सत्ता में आए तो 1 लाख 77 हजार 338 लोगों के पास सरकारी नौकरियां थी। 2022 में एक लाख 90 हज़ार 137 लोगों के पास सरकारी नौकरियां थी। यानी  12749 सरकारी नौकरियां बढ़ी। वहीं व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार में पिछले 15 सालों में हिमाचल प्रदेश में नौकरियां सबसे नीचे चली गई हैं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2025  में 1 लाख 75 हज़ार 579 नौकरियां हैं। तीन साल में कुल 15 हज़ार नौकरियां कम हो गई हैं। सुक्खू सरकार के व्यवस्था परिवर्तन में आंकड़े तो सरकार की पोल खोल रहे  हैं लेकिन मुख्यमंत्री झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार लगातार केंद्र सरकार को कोसती रहती है लेकिन पिछले तीन सालों में राजस्व प्राप्तियां में केंद्र की हिस्सेदारी क्रमशः 56%, 54% और 53.6% है। 
केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय करों में हिस्सा, केंद्रीय अनुदान और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को मिलाकर पिछले छह सालों में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2026 तक क्रमश: 24990 करोड़, 22723 करोड़, 24315 करोड़, 23413 करोड़, 23050 करोड़, 21124 करोड़ रुपए मिले। आरडीजी बंद होने के बाद भी केंद्र के सहयोग में कोई खास कमी नहीं आई है। अंतर को पाटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पिछले तीन सालों में क्रमशः लगभग 1500 करोड़, 2400 करोड़ और 3400 कुल 7300 करोड़ रुपए की मदद अलग से की है। 
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार का यह बजट सिर्फ झूठ का पुलिंदा है, इसमें समय काटने और लोगों को बरगलाने से ज़्यादा कुछ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खेत बाड़ाबंदी योजना के लिए प्रस्तावित बजट केवल ₹10 करोड़ है, जबकि हमने ₹40 करोड़ का प्रावधान किया था। मुख्यमंत्री हिमकेयर योजना के भी बजट को कम कर दिया है। मुख्यमंत्री ने सभी बीपीएल परिवारों को लाभ देने के बजाय केवल एक लाख परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है। इसके बावजूद 2026-27 में बिजली सब्सिडी का बजट घटाकर 1562 करोड़ से घटाकर 858 करोड़ रुपए कर दिया है जबकि 125 यूनिट फ्री योजना का लाभ लोगों को मिल नहीं रहा है। इसी तरह प्रमुख कार्यों का बजट 2026-27 में ₹2,624 करोड़ है। 
उन्होंने बड़ा सवाल उठाया कि वेतन स्थगन की बात सरकार कैसे कर सकती है? संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत केवल वित्तीय आपातकाल की स्थिति में ही वेतन में कटौती की जा सकती है। 
बजट 2026-27 में वेतन के लिए ₹14,721 करोड़ रुपए का प्रावधान है, जो वर्तमान वर्ष से मात्र 5 करोड़ रुपए अधिक है। इससे स्पष्ट है कि महंगाई भत्ता देने की कोई मंशा नहीं है। पैरा 26 में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026-27 में बिजली रॉयल्टी ₹2,500 करोड़ होगी लेकिन बजट में बिजली से प्राप्ति केवल ₹2,191 करोड़ दिखाई गई है, जो पिछले वर्ष से भी ₹8 करोड़ कम है। इसी तरह राज्य आबकारी से आय 2026-27 में ₹3,174 करोड़ अनुमानित है जो 2025-26 के ₹3,256 करोड़ से कम है। विकास केवल नादौन और देहरा क्षेत्रों तक सीमित है। यह बात सदन में विधान सभा अध्यक्ष महोदय भी कर चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल करते  हुए कहा कि आखिर मुख्यमंत्री सदन में बजट भाषण के में जो दावे कर रहे हैं, उनका साथ उनके द्वारा प्रस्तुत बजट के आंकड़े क्यों नहीं दे रहे हैं?

पांवटा साहिब में पंजाब पुलिस ने मारा छापा, बरामद की नशीली दवाईयां

शिमला: ठियोग में चिट्टे के साथ 4 लोग गिरफ्तार…

शिमला: पुलिस थाना ठियोग की टीम ने नियमित गश्त और नाका चेकिंग के दौरान बाईपास ठियोग के पास चार युवकों को लगभग 10 ग्राम चिट्टा के साथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमन वर्मा (37), संजीव कुमार (35), रोहित कुमार (33) और निखिल (33) के रूप में हुई है, जो सभी ठियोग क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस ने पूछताछ के आधार पर मादक पदार्थों की आपूर्ति का पता लगाया। जांच में सामने आया कि यह खेप बाहरी राज्य से लाई गई थी। पुलिस ने इस दिशा में कार्रवाई करते हुए 23 मार्च 2026 को मुख्य सप्लायर सन्नी राठौर (48), निवासी अबोहर, जिला फाजिल्का को हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को धारा 29 एनडीपीएस एक्ट के तहत नामजद किया गया है। पुलिस के अनुसारए गिरफ्तार किए गए सप्लायर को न्यायालय में पेश किया जा रहा है और मामले की जांच जारी है। पुलिस द्वारा अब केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित न रहकर सप्लाई चेन के स्रोत तक पहुंचने की रणनीति अपनाई जा रही है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में बैकवर्ड लिंकज के तहत केवल 1 आरोपी को गिरफ्तार किया गया था, जबकि वर्ष 2026 में इस दिशा में तेज कार्रवाई करते हुए मात्र डेढ़ महीने में ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस दिशा में की गई कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस अब सप्लाई चेन के मूल स्रोत (बैकवर्ड लिंकज) पर प्रभावी प्रहार कर रही है, जिससे मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है।

शिमला पुलिस भविष्य में भी इसी प्रकार सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई जारी रखते हुए समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सिरमौर के सराहां–चंडीगढ़ मार्ग की जर्जर हालत गंभीर चिंता का विषय – लोकसभा में उठाया मामला – कश्यप

42 किमी महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के शीघ्र सुधार और चौड़ीकरण की मांग – जनता को सुरक्षित आवागमन का अधिकार

शिमला: भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में नियम 377 के तहत हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से जुड़े सराहां–चंडीगढ़ मार्ग की दयनीय स्थिति का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि यह मार्ग न केवल क्षेत्र की छह ग्राम पंचायतों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है, बल्कि हिमाचल प्रदेश को हरियाणा और चंडीगढ़ से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय मार्ग भी है।
सुरेश कश्यप ने बताया कि लगभग 42 किलोमीटर लंबा यह मार्ग वर्तमान में अत्यंत जर्जर और खस्ताहाल स्थिति में है। हाल ही में हुई भारी वर्षा और भूस्खलन के कारण सड़क को कई स्थानों पर गंभीर क्षति पहुंची है, जिससे यह मार्ग संकरा, टूटा हुआ और जोखिमपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर प्रतिदिन भारी संख्या में लोगों का आवागमन होता है, लेकिन खराब हालत के कारण लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सड़क की खराब स्थिति के कारण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। साथ ही किसानों को अपनी उपज समय पर बाजार तक पहुंचाने में भी गंभीर दिक्कतें आ रही हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।
सांसद कश्यप ने सरकार से आग्रह किया कि सराहां–चंडीगढ़ मार्ग के शीघ्र सुधार, चौड़ीकरण और स्थायी सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि इस मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को इस महत्वपूर्ण मार्ग की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द कार्यवाही करनी चाहिए, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके और क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
“यह मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि क्षेत्र की जीवनरेखा है – इसके सुधार में किसी भी प्रकार की देरी जनहित के साथ अन्याय होगा।”

भारतनेट परियोजना से जोड़ी जाएंगी डोडरा क्वार की ग्राम पंचायतें – उपायुक्त शिमला

ग्रामीण ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जुडी जिला की 19 ग्राम पंचायतें, अन्य को जोड़ने का कार्य जारी

शिमला: भारतनेट परियोजना के माध्यम से जिला की 19 पंचायतों को जोड़ दिया गया है। यह जानकारी आज यहां उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय टेलीकाॅम समिति की बैठक में रखी गई।
उपायुक्त ने बताया कि जिला में अभी तक 19 ग्राम पंयायतों को भारतनेट परियोजना के माध्यम से जोड़ा गया है। इसके अलावा शेष अन्य ग्राम पंचायतों को जोड़ने का कार्य चला हुआ है। जिला की जिन ग्राम पंचायतों के अपने भवन नहीं है और किसी अन्य भवन में वो पंचायत घर चल रहे हैं, उन्हें संबधित खंड विकास अधिकारी अनुमति पत्र प्रदान करेंगे। इसके बारे में आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिला के दूर दराज क्षेत्र डोडरा क्वार की ग्राम पंचायतों को भारत नेट परियोजना के साथ जोड़ा जाएगा।

उपायुक्त ने कहा कि जिला में अनियिमित मोबाईल टाॅवर का रिकार्ड सभी कंपनियां तैयार करें। इसके साथ ही इन्हें भी नियमित करने की प्रक्रिया को शुरू करें। टेलीकॉम नीति के अनुसार मोबाईल टाॅवर का नियमितीकरण होना बेहद जरूरी है। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि अब भविष्य में इस सन्दर्भ में त्रैमासिक समीक्षा बैठक होगी।
इस बैठक एडीसी सचिन शर्मा, एडीएम लॉ एंड आर्डर पंकज शर्मा सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

  भारतनेट परियोजना
भारतनेट परियोजना केंद्र सरकार की युगांतरकारी पहल है, जिसे डिजिटल इंडिया अभियान की रीढ़ माना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े ग्रामीण ब्रॉडबैंड नेटवर्क का निर्माण करना है। इस योजना के तहत देश की लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों और अंततः सभी 6.45 लाख गाँवों को हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। यह केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम है। बीएसएनएल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी के तौर पर कार्य कर रही है।

  प्रमुख उद्देश्य और कार्यान्वयन मॉडल
भारतनेट का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम 100 एमबीपीएस की बैंडविड्थ उपलब्ध कराना है। इसे तीन चरणों में लागू किया जा रहा है। प्रथम चरण में भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर केबल के माध्यम से पंचायतों को जोड़ना। द्वितीय चरण में फाइबर, रेडियो और सैटेलाइट मीडिया के मिश्रण का उपयोग करना (विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों के लिए)। तृतीय चरण (भारतनेट) में इस चरण में पूरे नेटवर्क का उन्नयन और फाइबर टू द होम कनेक्शन प्रदान करना शामिल है। पंजाब जैसे राज्यों ने इस योजना को पूरे राज्य में सफलतापूर्वक लागू कर एक मिसाल पेश की है।

हरिपुरधार क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी को मिला बड़ा समर्थन

शिमला: हरिपुरधार क्षेत्र के महल जॉन भलोना पंचायत से 6 परिवारों नेआज भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। पूर्व पंचायत उप-प्रधान बलवीर शर्मा, दिनेश शर्मा, कृष्ण शर्मा, बलदेव शर्मा, भगत राम शर्मा और अन्य साथियों ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष श्री विनय कुमार के नेतृत्व में कांग्रेस की विचारधारा से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हुए।
राजीव भवन कांग्रेस कार्यालय शिमला में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने इन का स्वागत करते हुए कहा कि उनका विश्वास और समर्थन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में उनका स्वागत है और उन्हें पूरा मान-सम्मान दिया जाएगा।
कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि उनका विश्वास और समर्थन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हरिपुरधार क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और वे इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

धर्मशाला/शाहपुर: दक्षिण भारतीय शैली में सजा रूलहेड का मलह माता सुकराला मंदिर, आस्था और पर्यटन का अद्भुत संगम

शाहपुर के बोह में विराजती मलह माता सुकराला विश्व कुल देवी, 400 वर्ष पुरानी आस्था से जुड़ा भव्य देवस्थल*

धर्मशाला: देवभूमि हिमाचल के पावन देवस्थलों की श्रृंखला में आज हम बात कर रहे हैं शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव बोह के समीप रूलहेड में स्थित भव्य मलह माता सुकराला विश्व कुल देवी मंदिर की, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला, गहरी आस्था और मनोहारी प्राकृतिक सौंदर्य के कारण विशेष पहचान रखता है।
यह भव्य मंदिर दक्षिणी भारत के मंदिरों की तर्ज पर निर्मित किया गया है, जो इसे क्षेत्र के अन्य मंदिरों से अलग और विशिष्ट बनाता है। इसकी नक्काशी, शिल्पकला और स्थापत्य शैली श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है।
*400 वर्ष पुरानी आस्था से जुड़ी है मंदिर की कथा*
मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय शर्मा के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक लगभग 400 वर्ष पूर्व गौतम ब्राह्मण वंशजों के पूर्वज अपनी कुल देवी माता सुकराला जी के विरावल (जम्मू) स्थित प्राचीन मंदिर से माता का त्रिशूल लेकर बोह पहुंचे थे।
उस समय उनकी इच्छा गांव में माता का मंदिर स्थापित करने की थी, लेकिन कुछ कारणों से यह संकल्प तत्काल साकार नहीं हो पाया।
समय बीतने के साथ इस वंश के पृथ्वीराज शर्मा ने मंदिर निर्माण की पहल की। बाद में उनके पुत्र प्रकाश चंद शर्मा और विजय शर्मा ने श्रद्धालुओं और स्थानीय भक्तों के सहयोग से इस संकल्प को पूर्ण रूप दिया। अंततः वर्ष 2022 में इस भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ।
*उड़ीसा के कारीगरों ने दी अद्भुत शिल्पकारी*
मंदिर की भव्यता का एक विशेष पहलू इसकी कलात्मक शिल्पकारी है।
मंदिर में नक्काशी और शिल्प निर्माण का कार्य उड़ीसा के कुशल कारीगरों द्वारा किया गया है, जबकि निर्माण में प्रयुक्त पत्थर चंबा से लाए गए हैं।
इसी कारण मंदिर का स्थापत्य स्वरूप दक्षिण भारतीय शैली की झलक देता है, जो हिमाचल की धरती पर एक अनूठा दृश्य प्रस्तुत करता है।
*माता की महिमा से जुड़ी चमत्कारिक मान्यता*
माता सुकराला जी के नाम और महिमा को लेकर भक्तों के बीच एक अत्यंत रोचक लोककथा प्रचलित है। बताया जाता है कि एक बार चंबा के राजा माता के जम्मू स्थित मंदिर में पहुंचे और उन्होंने प्रश्न किया—
“मैं कैसे मानूं कि आपमें शक्ति है?”
मान्यता है कि उसी समय मंदिर परिसर के समीप खड़ा सूखा लसूड़े का पेड़ अचानक हरा-भरा हो गया।
इस चमत्कार के बाद माता की शक्ति और महिमा की चर्चा दूर-दूर तक फैल गई।
*मंदिर में विराजमान हैं तीन स्वरूप*
वर्तमान में मंदिर में
माता सुकराला जी (लक्ष्मी स्वरूप)
माता काली जी
माता सरस्वती जी
की पवित्र पिंडियां विराजमान हैं।
श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के तीनों स्वरूपों के दर्शन कर सुख-समृद्धि, शक्ति और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
*आस्था के साथ प्रकृति का अनुपम संगम*
मंदिर के समीप स्थित बोह घाटी का प्राकृतिक झरना (वॉटरफॉल) इस स्थान की सुंदरता को और भी दिव्य बना देता है।
इसी कारण यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि उभरता हुआ पर्यटन स्थल भी बन चुका है।
यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु जहां एक ओर माता के चरणों में शीश नवाते हैं, वहीं दूसरी ओर आसपास की प्राकृतिक छटा, पहाड़ी वातावरण और झरने की मधुर ध्वनि से मन को अद्भुत शांति का अनुभव होता है।

*आस्था, स्थापत्य और प्रकृति का अद्वितीय संगम*

मलह माता सुकराला विश्व कुल देवी मंदिर, रूलहेड (बोह)

आज श्रद्धा, संस्कृति, लोकविश्वास और स्थापत्य कला का ऐसा अद्भुत संगम बन चुका है, जो आने वाले समय में कांगड़ा क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है।

कुल्लू: पंडोह में अग्निवीर भर्ती रैली

कुल्लू: एआरओ मंडी द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए अग्निवीर भर्ती रैली का आयोजन 22 मार्च 6 से तीसरी इंडिया रिजर्व बटालियन, पंडोह के प्रशिक्षण मैदान में प्रारंभ हुआ। इस रैली में कुल्लू, मंडी एवं लाहौल-स्पीति जिलों के सीईई उत्तीर्ण 2959 अभ्यर्थी भाग ले रहे हैं।

भर्ती निदेशक एआरओ मंडी, कर्नल गौतम निशांत ने 21 मार्च को रैली की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों एवं जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि भर्ती पूरी तरह निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न करवाई जाएगी।

भर्ती प्रक्रिया का शुभारंभ 22 मार्च 2026 को प्रातः 6:30 बजे 1.6 किलोमीटर दौड़ (फिजिकल फिटनेस टेस्ट) के साथ हुआ। दौड़ के दौरान सभी युवा अभ्यर्थियों में उत्साह एवं जोश देखने को मिला।

रैली के प्रथम दिन कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति जिलों के 326 अभ्यर्थियों ने भाग लिया, जिनमें से 239 अभ्यर्थी दौड़ में उत्तीर्ण हुए। ये अभ्यर्थी अब आगे शारीरिक मापदंड, दस्तावेज़ सत्यापन एवं चिकित्सीय परीक्षण की प्रक्रिया से गुजरेंगे। आगामी दिनों में मंडी जिले के अभ्यर्थी भी इस रैली में भाग लेंगे।

हमीरपुर में 5 केंद्रों पर सीबीएसई काडर के लिए 1563 शिक्षकों ने दी परीक्षा

हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला ने सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों के डेपुटेशन के लिए रविवार को परीक्षा आयोजित की।

उच्चतर शिक्षा उपनिदेशक डॉ. मोही राम चौहान ने बताया कि इस परीक्षा हेतु जिला हमीरपुर में 1780 शिक्षकों के लिए पांच केंद्र बनाए गए थे। इन पांच परीक्षा केंद्रों पर कुल 1563 शिक्षकों ने परीक्षा दी, जबकि 217 अनुपस्थित रहे।

डिग्री कालेज कंजयाण में 300 आवेदक शिक्षकों में से 252 शिक्षकों ने, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भोरंज में 375 में से 337, डिग्री कालेज हमीरपुर में 602 में से 533, बहुतकनीकी कालेज बड़ू में 216 में से 182 और डिग्री कालेज सुजानपुर में 287 आवेदक शिक्षकों में से 259 शिक्षकों ने परीक्षा दी।

एनडीपीएस मामले में संलिप्त चार पुलिस कर्मी बर्खास्त, जीरो टॉलरेंस का सख्त संदेश

हिमाचल: प्रदेश पुलिस द्वारा जवाबदेही, पारदर्शिता और अनुशासन को सुदृढ़ करते हुए एक निर्णायक एवं उदाहरणीय कार्रवाई की गई है। पुलिस महानिदेशक, हिमाचल प्रदेश अशोक तिवारी, आईपीएस ने एक गंभीर मादक पदार्थ तस्करी मामले में संलिप्तता पाए जाने पर एसटीएफ कुल्लू में तैनात चार पुलिस कर्मियों—हेड कांस्टेबल राजेश कुमार, हेड कांस्टेबल समीर कुमार, HHC नितेश कुमार तथा कांस्टेबल अशोक कुमार—को सेवा से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए हैं।

यह कार्रवाई थाना न्यू शिमला में दर्ज एफआईआर संख्या 14/2026 दिनांक 10.03.2026 (एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत) से संबंधित है। विश्वसनीय सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 562 एलएसडी स्ट्रिप (लगभग 11.57 ग्राम) बरामद की थीं। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि यह मामला एक बड़े संगठित अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क का हिस्सा है, जिसकी आपूर्ति श्रृंखला केरल से हिमाचल प्रदेश तक फैली हुई थी।
जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन ट्रैकिंग तथा वित्तीय लेनदेन के विश्लेषण सहित तकनीकी साक्ष्यों द्वारा इन तथ्यों की पुष्टि हुई है।
जांच के दौरान उपरोक्त पुलिस कर्मियों की संलिप्तता सामने आने पर इसे गंभीर कदाचार एवं जनविश्वास के साथ विश्वासघात मानते हुए सक्षम प्राधिकारी द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

इस संबंध में पुलिस महानिदेशक ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पुलिस, मादक पदार्थों और भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य कर रही है, जो विभाग के भीतर भी समान रूप से लागू है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी पुलिस कर्मी समाज और युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में संलिप्त पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है तथा ईमानदारी, अनुशासन और जनविश्वास पुलिस संगठन के मूल स्तंभ हैं।

यह कार्रवाई पुलिस संगठन के लिए एक सशक्त संदेश है कि किसी भी प्रकार की आपराधिक संलिप्तता, विशेषकर एनडीपीएस मामलों में, सख्ती से निपटाई जाएगी। साथ ही, यह समाज को भी स्पष्ट संकेत देती है कि हिमाचल प्रदेश पुलिस नशे के नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने तथा युवाओं को इस खतरे से बचाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे नशा तस्करी एवं इससे संबंधित गतिविधियों के विरुद्ध अभियान में सक्रिय सहयोग करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना नजदीकी पुलिस थाना या उपलब्ध हेल्पलाइन के माध्यम से दी जा सकती है। एक सुरक्षित एवं नशामुक्त हिमाचल के निर्माण में जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।