


कुल्लू: केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत बुनाई एवं डिजाइनिंग प्रशिक्षण केंद्र, शास्त्री नगर, कुल्लू में चार माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। प्रशिक्षण 2 नवंबर, 2026 से शुरू होगा।
प्रशिक्षण केंद्र प्रभारी ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य अभ्यर्थियों को बुनाई एवं डिजाइनिंग के कार्य में दक्ष बनाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 30 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि के दौरान कार्यदिवसों में उपस्थिति के आधार पर 125 रुपये प्रतिदिन वजीफा भी प्रदान किया जाएगा। इसमें महिला, पुरुष एवं ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं।
इच्छुक अभ्यर्थी अपनी आयु, पहचान, नाम, पता, शैक्षणिक योग्यता तथा बुनाई एवं डिजाइनिंग के अनुभव से संबंधित विवरण सहित आवेदन 29 अक्तूबर, 2026 को शाम 5 बजे तक बुनाई एवं डिजाइनिंग प्रशिक्षण केंद्र, शास्त्री नगर, कुल्लू में जमा करवा सकते हैं।
अभ्यर्थियों का चयन गठित समिति द्वारा साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। साक्षात्कार 30 अक्तूबर, 2026 को प्रातः 11 बजे प्रशिक्षण केंद्र, शास्त्री नगर, कुल्लू में आयोजित होगा। इसके लिए अभ्यर्थियों को अलग से कोई पत्र जारी नहीं किया जाएगा।
अधिक जानकारी के लिए बुनाई एवं डिजाइनिंग प्रशिक्षण केंद्र, शास्त्री नगर, कुल्लू के दूरभाष नंबर 01902-225915 पर संपर्क किया जा सकता है।

उपायुक्त ने अधिकारियों को समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
कुल्लू: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर शुक्रवार की उपायुक्त एवं अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव समिति के उपाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार शर्मा की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।
बैठक में उत्सव की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित विभागों को सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने तथा आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। 21 से 27 अक्तूबर तक आयोजित होने वाले इस सात दिवसीय उत्सव की तैयारियों की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने दुकानों एवं स्टॉलों के आवंटन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेलकूद प्रतियोगिताओं, कानून-व्यवस्था, सुरक्षा, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, एलपीजी उपलब्धता, परिवहन, सजावट, अग्नि सुरक्षा तथा आपातकालीन बचाव व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कला केंद्र के सौंदर्यीकरण, झूला-हिंडोला-जर्मन हेंगर, देवताओं के आगमन एवं ठहराव संबंधी प्रबंधों, सांस्कृतिक दलों के आवास, कार्निवाल तथा ड्रोन एवं लेजर शो की तैयारियों की भी समीक्षा की।
उपायुक्त ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनजेडसीसी), दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एसजेडसीसी), विभिन्न जिलों के सांस्कृतिक दलों, महिला मंडलों तथा स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों और ऑडिशन से संबंधित तैयारियों की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी करें और गुणवत्ता व सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि उत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, स्वच्छता तथा आपातकालीन सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। सभी विभाग अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें और किसी भी समस्या का समय रहते समाधान सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक होने के साथ-साथ कुल्लू का गौरवपूर्ण उत्सव है। इसके सफल आयोजन के लिए सभी विभागों का समन्वित प्रयास आवश्यक है, ताकि स्थानीय लोगों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलें तथा उत्सव की गरिमा और भव्यता बनी रहे।
बैठक में पुलिस अधीक्षक अभिषेक एस., अतिरिक्त उपायुक्त सुरजीत सिंह राठौड़ सहित जिले के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बिलासपुर: बाल विकास परियोजना सदर, जिला बिलासपुर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के कुल 14 रिक्त पदों को भरने के लिए पात्र स्थानीय महिला उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक उम्मीदवार आवश्यक दस्तावेजों सहित 23 अक्तूबर, 2026 को शाम 5 बजे तक आवेदन जमा करवा सकती हैं। पात्र उम्मीदवारों के साक्षात्कार 28 अक्तूबर, 2026 को प्रातः 10 बजे उपमंडलाधिकारी (नागरिक) सदर के कार्यालय में आयोजित किए जाएंगे।
इन आंगनवाड़ी केंद्रों में भरे जाएंगे पद: जारी सूचना के अनुसार पर्यवेक्षक वृत्त मेथी के अंतर्गत ब्रह्मपुखर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का एक पद तथा अर्बन क्षेत्र के वार्ड नंबर-5 और वार्ड नंबर-9 में आंगनवाड़ी सहायिकाओं के पद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हरनोडा वृत्त के नैहर, बैरी वृत्त के चमलोग, रानी कोटला वृत्त के डाबर-2, रानी कोटला, सोलग ज्योरा, निचली साई एवं साई ब्राह्मणा तथा मलोखर वृत्त के थाच में आंगनवाड़ी सहायिकाओं के रिक्त पद भरे जाने हैं। ब्रह्मपुखर वृत्त के अंतर्गत भजून, निहारखंड बासला-1 और दयोथ केंद्रों में भी रिक्त पद शामिल हैं। उम्मीदवार संबंधित केंद्र और पद की पुष्टि बाल विकास परियोजना सदर कार्यालय से कर सकती हैं।
पात्रता एवं शैक्षणिक योग्यता: आवेदन करने वाली महिला उम्मीदवार हिमाचल प्रदेश की स्थायी निवासी तथा संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र के सर्वे क्षेत्र की निवासी होनी चाहिए। आवेदन की अंतिम तिथि तक आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। दोनों पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण निर्धारित की गई है। उम्मीदवार के परिवार की वार्षिक आय 50,000 रूपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार अथवा कार्यकारी दंडाधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
आवेदन के साथ संलग्न करने होंगे आवश्यक दस्तावेज: उम्मीदवार सादे कागज पर आवेदन करें तथा उसमें पद और संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र का नाम स्पष्ट रूप से लिखें। आवेदन के साथ सर्वे क्षेत्र का प्रमाण पत्र, हिमाचली स्थायी निवासी प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण के लिए दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र, 12वीं एवं उच्चतर शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नवीनतम नकल तथा निर्धारित प्रारूप में परिवार की वार्षिक आय का प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा।
नियमानुसार लागू होने पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, बाल सेविका, बालवाड़ी अध्यापिका, नर्सरी अध्यापिका, संबंधित पंचायत में कार्यरत सिलाई अध्यापिका अथवा ईसीसीई शिशु पालक के अनुभव प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग, 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता, स्टेट होम अथवा नारी सेवा सदन की प्रवासिनी, अनाथ, विधवा, परित्यक्ता या तलाकशुदा होने, पति के सात वर्ष से लापता होने तथा केवल दो बेटियां और कोई बेटा न होने से संबंधित प्रमाण पत्र, जहां लागू हों, संलग्न किए जा सकते हैं। सभी दस्तावेजों की स्वप्रमाणित छायाप्रतियां आवेदन के साथ लगाना अनिवार्य है।
25 अंकों के आधार पर होगा चयन: भर्ती प्रक्रिया में कुल 25 अंक निर्धारित किए गए हैं। शैक्षणिक योग्यता के लिए अधिकतम 10 अंक, अनुभव के लिए 3 अंक, 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता के लिए 2 अंक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित होने पर 2 अंक, निर्धारित विशेष श्रेणियों के लिए 3 अंक, केवल दो बेटियां और कोई बेटा न होने की स्थिति में 2 अंक तथा व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए 3 अंक निर्धारित हैं। शैक्षणिक योग्यता के अंतर्गत 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के प्रतिशत के आधार पर अधिकतम 7 अंक, स्नातक के लिए 2 अतिरिक्त अंक तथा स्नातकोत्तर के लिए 1 अतिरिक्त अंक का प्रावधान है। अनुभव एवं अन्य पात्रता संबंधी अंकों का निर्धारण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।
इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन जमा करवाएं तथा भर्ती संबंधी विस्तृत शर्तों और केंद्र वार रिक्तियों की जानकारी बाल विकास परियोजना सदर कार्यालय से प्राप्त करें।

शिमला : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा है कि भाजपा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जितना मर्जी बचाव कर लें एसआईआर के नाम पर भाजपा के लिये वोट चोरी के अपराध से उन्हें कोई नहीं बचा सकती। उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के साथ देश वोट चोरी के खिलाफ कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ा हो गया है। अब देश का माहौल भाजपा के खिलाफ होता जा रहा है।
विनय कुमार ने कहा है कि भाजपा ज्ञानेश कुमार के चुनावी काले कारनामों से लोगों का ध्यान बांटने का असफल प्रयास कर रही है। देश के 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से काटने का पूरा सच अब उजागर हो चुका है। इसका सच अब छुपाया नहीं जा सकता।
विनय कुमार ने कहा कि भाजपा की मिलीभगत से ज्ञानेश कुमार ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को दाव पर लगा दिया है। वर्तमान में चुनाव आयोग की निष्पक्षता तार तार हो गई है। देश मे पहली बार चुनाव आयोग के खिलाफ जनमत खड़ा हो गया है। अब देश मे ईवीएम की जगह वेल्ट पेपर से चुनाव करवाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।
विनय कुमार ने कहा है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक भारत देश की चुनाव प्रक्रिया आज सवालों के घेरे में खड़ी हो गई है। ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस पद पर बैठने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है।
विनय कुमार ने कहा कि कांग्रेस ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना जन आंदोलन तब तक जारी रखेगी,जबतक वह इस पद से नही हट जाते। उन्होंने लोगों का आह्वान किया है कि देश के संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिये सभी को एकजुटता के साथ आगे आना होगा।

आगामी 28 फरवरी तक पूरा करें 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सभी गतिविधियांः जगत सिंह नेगी
शिमला: राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जनशिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आज यहां एचपी शिवा परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर एवं ऊना जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। एशियाई विकास बैंक द्वारा वित्तपोषित एचपी शिवा परियोजना प्रदेश के सात जिलों में क्रियान्वित की जा रही है।
बैठक में अवगत करवाया गया कि एचपी शिवा परियोजना के प्रथम चरण के अंतर्गत कुल 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसमें से लगभग 2,700 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा चुका है व 1,900 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
शेष क्षेत्र में पौधारोपण का कार्य जनवरी-फरवरी, 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा। इस क्षेत्र में मुख्यतः प्लम एवं पर्सिमन जैसी विंटर सीजन फसलों का रोपण किया जाना है। परियोजना के अंतर्गत 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए कुल 331 क्लस्टरों को अंतिम रूप दिया गया है जिससे लगभग 10,646 किसान परिवार लाभान्वित होंगे।
बैठक में अवगत करवाया गया कि परियोजना के द्वितीय चरण के लिए सर्वेक्षण कार्य भी प्रगति पर है। इसके अंतर्गत लगभग 2,500 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान कर ली गई और 2,153 हेक्टेयर क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य जारी है। लगभग 1,500 हेक्टेयर क्षेत्र की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर तकनीकी स्वीकृति के लिए एशियाई विकास बैंक को भेजी जा चुकी है। एशियाई विकास बैंक से स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत निविदा प्रक्रिया अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह से शुरू की जाएगी।
जगत सिंह नेगी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में निम्न गुणवत्ता वाले पौधों की खरीद न की जाए। नर्सरी संचालकों को भी निर्देश दिए गए कि वे तकनीकी मानकों एवं स्पैसिफिकेशन के अनुरूप उच्च गुणवत्ता की पौध सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करें।
सौर बाड़बंदी, खेतों की तैयारी, ड्रिप व लिफ्ट सिंचाई योजनाओं सहित विभिन्न निर्माण एवं अधोसंरचना संबंधी कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा भी की गई।
बागवानी मंत्री ने फील्ड अधिकारियों एवं परियोजना प्रबंधन इकाई को सख्त निर्देश जारी किए कि परियोजना के सभी घटकों का कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए और 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी क्लस्टरों को पूर्ण रूप से तैयार कर किसानों को हस्तांतरित किया जाए। उन्होंने द्वितीय चरण के कार्यों को समय पर शुरू करने के लिए निविदा प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए।
जगत सिंह नेगी ने प्रथम चरण के तहत 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सभी गतिविधियों को पूरा करने तथा सभी क्लस्टरों का किसानों को हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए 28 फरवरी, 2027 की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय-सीमा तक कार्य पूर्ण न होने की स्थिति में संबंधित ठेकेदारों तथा अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बैठक में बागवानी विभाग के निदेशक सतीश कुमार, एचपी शिवा परियोजना निदेशक समीर सिंह, प्रोक्योरमेंट अधिकारी मनोज शर्मा और बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर एवं ऊना जिलों के उप-निदेशक उपस्थित रहेे।

छात्रा ने पूछा था, क्या आप हमें नया भवन बनाकर देंगे, सीएम की घोषणा पर जारी हुई धनराशि
शिमला: शिमला जिला के रोहड़ू स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के नए भवन के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने दो करोड़ रुपये जारी किए हैं। योजना विभाग ने इस संबंध में लोक निर्माण विभाग को धनराशि स्वीकृत करने का पत्र भेज दिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने 1 अक्तूबर को अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान रोहड़ू सीबीएसई स्कूल में विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान एक छात्रा के आग्रह पर यह राशि उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अब धनराशि जारी कर दी गई है।
संवाद के दौरान छात्रा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि क्या वह उनके स्कूल के लिए नया भवन बनवा सकते हैं। अपनी समस्या बताते हुए छात्रा ने कहा कि स्कूल के सीबीएसई से संबद्ध होने के बाद विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है और अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूल को दो शिफ्टों में संचालित करने की योजना है। छात्रा ने बताया कि बसों की उपलब्धता से जुड़ी समस्या के कारण लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ कुछ विद्यार्थियों को स्कूल बदलने के लिए भी मजबूर होना पड़ सकता है।
छात्रा की समस्या को गंभीरता से सुनने के बाद रोहड़ू में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं भी गांव से जुड़े हैं और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि दो करोड़ रुपये से पूरे भवन का निर्माण संभव नहीं है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू करने के लिए यह राशि उपलब्ध करवाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि नए भवन के निर्माण के लिए भविष्य में भी अतिरिक्त धनराशि जारी की जाएगी ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त और उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि रोहड़ू में विद्यार्थियों के लिए एक बेहतर कैंपस तैयार किया जाएगा।
रोहड़ू के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का क्षेत्र के विकास कार्यों और घोषणाओं के लिए धनराशि जारी करने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि धनराशि जारी होने से रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने रोहड़ू के विकास में कोई कमी नहीं रखी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो कहते हैं, उसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं और यही उनकी कार्यशैली की विशेषता है।

शिमला: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों, ग्रामीण सड़कों, रेल संपर्क, स्वास्थ्य, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख विकास परियोजनाओं की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पहाड़ी प्रदेश में संपर्क सुविधाओं, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक अवसरों के विस्तार के लिए निरंतर निवेश और सहयोग उपलब्ध करा रही है। इन परियोजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार को स्वीकृत राशि का प्रभावी उपयोग, समयबद्ध निर्णय और नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।
नड्डा ने कहा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क और रेल संपर्क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि मरीजों की अस्पताल तक पहुंच, किसानों-बागवानों की उपज को बाजार, पर्यटन, रोजगार और आपदा के दौरान राहत कार्यों से सीधे जुड़ा है। इसलिए परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और निर्धारित समयसीमा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना: छह राज्यों के समझौते से महत्वपूर्ण प्रगति
समीक्षा में लगभग ₹15,624 करोड़ की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का भी उल्लेख किया गया। सितंबर 2026 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया तथा 15 सितंबर को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौता हुआ। इससे लंबे समय से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। टोंस नदी पर हिमाचल प्रदेश–उत्तराखंड सीमा से जुड़ी इस परियोजना से जल भंडारण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।
राष्ट्रीय परियोजना के रूप में इसके वित्तीय भार का लगभग 90 प्रतिशत केंद्र सरकार तथा शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्य वहन करेंगे। परियोजना के माध्यम से लगभग 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा तथा 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत प्राप्त होने का अनुमान है। समीक्षा में रेणुकाजी बांध परियोजना (लगभग ₹7,000 करोड़) और लूहरी स्टेज-I जलविद्युत परियोजना (लगभग ₹1,800 करोड़) सहित महत्वपूर्ण ऊर्जा एवं जल संसाधन पहलों का भी उल्लेख किया गया।
राष्ट्रीय राजमार्ग: चार बड़े कॉरिडोर और ₹55,103 करोड़ का निवेश
समीक्षा में बताया गया कि प्रदेश में 25 राष्ट्रीय राजमार्गों का कुल नेटवर्क 2,592 किलोमीटर है, जिसमें 1,244 किलोमीटर एनएचएआई, 779 किलोमीटर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और 569 किलोमीटर सीमा सड़क संगठन के अंतर्गत हैं। एनएचएआई परियोजनाओं में कुल ₹55,103 करोड़ का निवेश है। श्री नड्डा ने कीरतपुर–मनाली, पठानकोट–मंडी, परवाणू–शिमला और शिमला–मटौर कॉरिडोर की प्रगति की विशेष समीक्षा की।
लगभग ₹12,939 करोड़ की कीरतपुर–मनाली परियोजना के कई प्रमुख खंड पूरे हो चुके हैं; पंडोह–टकोली खंड को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस मार्ग पर 31 सुरंगें शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 44 किलोमीटर है। यह मार्ग मंडी, कुल्लू और मनाली में सुरक्षित एवं सुगम आवाजाही तथा पर्यटन को मजबूत करेगा।
परवाणू–सोलन–शिमला बाईपास परियोजना (लगभग ₹8,950 करोड़) में परवाणू–सोलन खंड पूरा हो चुका है। सोलन–कैथलीघाट खंड सितंबर 2027 और शिमला बाईपास सितंबर 2028 तक पूरा होने की अपेक्षा है। पठानकोट–मंडी परियोजना पर लगभग ₹10,805 करोड़ के कार्य 2028–29 तक तथा शिमला–मटौर कॉरिडोर पर लगभग ₹10,226 करोड़ के प्रस्तावित कार्य 2029–30 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पिंजौर–बद्दी–नालागढ़ परियोजना पर भी काम जारी है।
ब्यास नदी से जुड़े राजमार्ग खंडों की सुरक्षा तथा बाढ़ एवं भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्थायी बहाली के लिए ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग की अनुमतियों पर शीघ्र निर्णय का मुद्दा उठाया गया। प्रस्तावित भुभु जोत सुरंग की डीपीआर तैयार करने के लिए बोलियां आमंत्रित किए जाने की जानकारी भी दी गई। श्री नड्डा ने सुरक्षित सड़क निर्माण और केंद्र–राज्य समन्वय को प्राथमिकता देने पर बल दिया।
ग्रामीण सड़कें: 26,506 किलोमीटर स्वीकृत, शेष कार्य जल्द पूरे हों
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में 4,170 सड़कों के लिए लगभग ₹13,697 करोड़ की लागत से कुल 26,506 किलोमीटर सड़कें स्वीकृत हैं। प्रगति विवरण के अनुसार 23,601 किलोमीटर सड़कें पूरी हो चुकी हैं और लगभग 90 प्रतिशत पात्र बसावटों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराया गया है। नड्डा ने प्रथम चरण की शेष 9 सड़कों को मार्च 2027 तक पूरा करने तथा पीएमजीएसवाई-IV के अंतर्गत स्वीकृत 25 कार्यों के ठेके शीघ्र आवंटित करने को कहा। उन्होंने गुणवत्ता निगरानी मजबूत करने और दूरस्थ गांवों के लिए सड़क संपर्क में देरी न होने देने पर जोर दिया।
रेल संपर्क: भूमि अधिग्रहण और राज्य हिस्सेदारी से जुड़े मामले सुलझें
लगभग ₹13,410 करोड़ की भानुपल्ली–बिलासपुर–बेरी रेल परियोजना के भानुपल्ली–बिलासपुर खंड को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बिलासपुर–बेरी खंड में भूमि अधिग्रहण संबंधी लंबित मामलों पर राज्य स्तर से शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई। श्री नड्डा ने कहा कि समय पर निर्णय रेल संपर्क के विस्तार को गति देंगे।
चंडीगढ़–बद्दी रेल लाइन की अनुमानित लागत ₹1,540 करोड़ है और इसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। समीक्षा के अनुसार लगभग ₹1,160 करोड़ व्यय हो चुके हैं, जबकि राज्य की देय हिस्सेदारी में से करीब ₹231 करोड़ अभी हस्तांतरित किए जाने हैं। श्री नड्डा ने लंबित राशि शीघ्र उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए कहा कि बद्दी जैसे औद्योगिक क्षेत्र के लिए रेल संपर्क माल परिवहन, निवेश और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य अवसंरचना: विशेषज्ञ उपचार और मेडिकल कॉलेजों का विस्तार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। बिलासपुर में एम्स के लिए ₹1,400 करोड़ से अधिक, चंबा, नाहन और हमीरपुर मेडिकल कॉलेजों के लिए लगभग ₹547 करोड़, ऊना के पीजीआई सैटेलाइट सेंटर के लिए ₹495 करोड़ तथा आईजीएमसी शिमला के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के लिए लगभग ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन प्रयासों से राज्य के मरीजों की अन्य शहरों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।
जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) समर्थित लगभग ₹1,422 करोड़ की स्वास्थ्य परियोजना को जून 2025 में स्वीकृति मिली थी। इसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार के अनुदान के रूप में उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके तहत हमीरपुर, नाहन, नेरचौक, टांडा, चंबा और आईजीएमसी शिमला के मेडिकल कॉलेजों को सुदृढ़ करने के साथ उन्नत एमआरआई, कैंसर उपचार और अन्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जानी हैं।
स्वीकृत स्वास्थ्य निधि को समय पर जनसुविधाओं में बदलने पर जोर
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम) के तहत 2021–22 से 2025–26 की अवधि के लिए हिमाचल प्रदेश को लगभग ₹360 करोड़ की स्वीकृति दी गई। समीक्षा के अनुसार स्वीकृत 9 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से 1 पूरा हुआ है; 12 एकीकृत जनस्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में से कोई पूरी नहीं हुई है तथा 73 ब्लॉक जनस्वास्थ्य इकाइयों में से 29 का निर्माण पूरा हुआ है। श्री नड्डा ने इन कार्यों में तेजी लाने और नई सुविधाओं का संचालन समय पर सुनिश्चित करने पर बल दिया।
15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत ₹521 करोड़ में से लगभग ₹390 करोड़ खर्च होने की जानकारी दी गई। श्री नड्डा ने कहा कि केवल राशि की स्वीकृति पर्याप्त नहीं है; ग्रामीण जांच सुविधाओं, आपातकालीन उपचार और जिला स्तर पर विशेषज्ञ सेवाओं के रूप में उसका वास्तविक लाभ मरीजों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए निर्माण, व्यय और संचालन की नियमित समीक्षा जरूरी है।
उद्योग और पुनर्निर्माण: स्वीकृत सहायता का प्रभावी उपयोग हो
ऊना के बल्क ड्रग पार्क के लिए ₹1,000 करोड़ की केंद्रीय अनुदान सहायता का प्रावधान है, जिसमें ₹225 करोड़ जारी और लगभग ₹117 करोड़ उपयोग किए गए हैं। मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए लगभग ₹100 करोड़ का परिव्यय प्रस्तावित था, लेकिन राज्य सरकार ने अक्टूबर 2024 में प्रस्ताव वापस लेकर ₹30 करोड़ की किस्त लौटा दी। श्री नड्डा ने कहा कि इन औद्योगिक अवसरों का समयबद्ध उपयोग निवेश, उत्पादन और युवाओं के रोजगार के लिए आवश्यक है। समीक्षा में अन्य शैक्षणिक और शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति भी देखी गई।
प्रदेश में पूंजीगत निवेश तथा आपदा के बाद पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण के लिए केंद्र की सहायता पर भी चर्चा हुई। वित्त वर्ष 2024–25 में पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता के तहत ₹2,381 करोड़, आपदा उपरांत पुनर्बहाली के लिए ₹2,006 करोड़ तथा बाह्य सहायता प्राप्त पुनर्निर्माण परियोजना के लिए ₹2,150 करोड़ के प्रावधानों का उल्लेख किया गया। श्री नड्डा ने समन्वित कार्रवाई और स्वीकृत संसाधनों के पारदर्शी उपयोग पर जोर दिया।
जनहित से जुड़े कार्यों में गति और जवाबदेही सुनिश्चित करे राज्य सरकार
समीक्षा के अंत में श्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रही है। अब प्राथमिकता स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने और उनके परिणाम जनता तक पहुंचाने की होनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से लंबित सड़क एवं रेल कार्यों, स्वास्थ्य संस्थानों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर समयबद्ध निर्णय लेने, नियमित निगरानी करने तथा स्वीकृत निधि का गुणवत्तापूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

शिमला : भाजपा विधायक राकेश जम्वाल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी अब खुलकर सामने आने लगी है। प्रदेश कांग्रेस का संगठन इतना कमजोर हो चुका है कि मुख्यमंत्री को ही हर विरोध प्रदर्शन में उतरकर मोर्चा संभालना पड़ रहा है। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस संगठन अपने राजनीतिक कार्यक्रमों का नेतृत्व करने में असमर्थ है, या फिर मुख्यमंत्री पर हाईकमान को खुश करने और अपने राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड में नंबर बढ़वाने का दबाव है?
राकेश जम्वाल ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद किसी सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता की भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश का नेतृत्व करते हैं और उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और जनता की समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों और पद की गरिमा को दरकिनार कर बार-बार राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री का इस तरह छात्र संगठन के नेता की तरह हर राजनीतिक मोर्चे पर उतरना उनकी प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन मुख्यमंत्री और एक सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता की भूमिका में अंतर होता है। यदि प्रदेश कांग्रेस का संगठन मजबूत है, तो उसे अपने आंदोलनों और राजनीतिक कार्यक्रमों का नेतृत्व स्वयं करना चाहिए। हर मुद्दे पर मुख्यमंत्री का आगे आना यह सवाल पैदा करता है कि प्रदेश में सरकार और संगठन की जिम्मेदारी आखिर कौन निभा रहा है। क्या मुख्यमंत्री हिमाचल की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं या कांग्रेस हाईकमान के सामने अपनी राजनीतिक सक्रियता साबित करने में लगे हैं?
राकेश जम्वाल ने दिल्ली में राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सरकारी हेलीकॉप्टर के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और सरकार स्वयं सीमित संसाधनों की बात करती है। ऐसे में जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, यात्रा का खर्च किस मद से वहन हुआ और क्या इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन किया गया।
उन्होंने कहा कि हिमाचल के संसाधन प्रदेश की जनता की अमानत हैं, किसी राजनीतिक दल या उसके हाईकमान की निजी संपत्ति नहीं। यदि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए किया गया है, तो सरकार को संबंधित खर्च और नियमों के अनुपालन की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। सरकारी मशीनरी का उपयोग जनहित को प्राथमिकता देकर होना चाहिए, न कि राजनीतिक हित साधने के लिए। पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है।
राकेश जम्वाल ने संवैधानिक पदों की गरिमा के विषय पर कहा कि मुख्यमंत्री को अपने पद की मर्यादा के साथ-साथ दूसरे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और संस्थाओं का सम्मान भी बनाए रखना चाहिए। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक पदों के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा नहीं है। संवैधानिक पद पर बैठकर दूसरे संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली बयानबाजी उचित नहीं ठहराई जा सकती। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन उसके साथ मर्यादा और जिम्मेदारी भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि प्रदेश की जनता ने उन्हें हिमाचल चलाने की जिम्मेदारी दी है, न कि हर राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होकर हाईकमान के सामने अपनी सक्रियता साबित करने की। हिमाचल के संसाधनों, सरकारी मशीनरी और संवैधानिक पद की गरिमा को राजनीतिक हितों से ऊपर रखना मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है। राकेश जम्वाल ने मांग की कि सरकारी हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों और खर्च का विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता के सामने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करें।

