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बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं है मंजूर – उपायुक्त 

उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सलाहकार समिति की 9वीं बैठक आयोजित 

शिमला : उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है, इसलिए ऐसी वस्तुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाए जो बिना किसी लेबल के बाजार में बिक रही हैं।

उपायुक्त आज यहाँ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत गठित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की 9वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि गर्मी का मौसम आ रहा है और ऐसे में बाजार में कई ऐसी खाद्य वस्तुएं उपलब्ध रहती हैं जिनकी गुणवत्ता की कोई जानकारी नहीं होती इसलिए यह जरूरी है कि ऐसे पदार्थों की बाजार में बिक्री न हो। ऐसे खाद्य पदार्थों की जांच अवशय करें जिनमें कृत्रिम रंग या स्वाद के लिए केमिकल का उपयोग किया जा रहा हो। उन्होंने विभाग को खाद्य वस्तुओं के सैंपल बढ़ाने के निर्देश दिए। 

दूर दराज क्षेत्रों से लें सैंपल, लोगों को करें जागरूक

उन्होंने कहा कि विभाग आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बनने वाले खाने के भी सैंपल एकत्रित कर उनकी जाँच करे। बैठक में बताया गया कि विभाग द्वारा मशोबरा, घणाहट्टी आदि क्षेत्रों के शिक्षण संस्थानों से मिड-डे मील के सैंपल लिए गए थे जिस पर उपायुक्त ने विभाग को जिला के दूर दराज के क्षेत्रों से भी सैंपल लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग को रोहड़ू, चिड़गांव, कुपवी, चौपाल जैसे दूर दराज क्षेत्रों से भी सैंपल लेने चाहिए और वहां की जनता को जागरूक करने के लिए जागरूकता कैंप आयोजित करने चाहिए। 

गत बैठक में उपायुक्त ने स्कूल परिसरों के नजदीक चल रहे खाद्य विक्रेताओं की जांच और उन्हें जागरूक करने के निर्देश दिए थे जिस पर उन्हें अवगत करवाया गया कि गत बैठक से लेकर अभी तक 12 निगरानी नमूने लिए गए हैं और नगर निगम के खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा शिक्षण संस्थानों में लगभग 30 निरीक्षण किए गए हैं। इसके अलावा, लगभग 600 स्ट्रीट फूड विक्रेता के लिए गत वर्ष दिसंबर में खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण और प्रमाणन (फॉस्टैक) द्वारा प्रशिक्षण आयोजित किया गया था।

होटल और भोजन प्रतिष्ठानों की भी हो जांच, शादियों से भी लें सैंपल

उपायुक्त ने ग्रामीण और नगर निगम क्षेत्र के तहत होटल और भोजन प्रतिष्ठानों की भी जांच के निर्देश दिए थे जिस पर अवगत करवाया गया कि गत वर्ष से लेकर अभी तक 67 प्रवर्तन नमूने और 88 निगरानी नमूने जिला में एकत्रित किए गए हैं। इसी प्रकार, नगर निगम क्षेत्र में 80 प्रवर्तन नमूने और 85 निगरानी नमूने एकत्रित किये गए हैं। उपायुक्त ने कहा कि शादियों में भी सैंकड़ों लोगों के लिए खाना बनता है इसलिए उस खाने के भी सैंपल लेना जरुरी है ताकि किसी की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ न हो।  

बैठक में बताया गया कि निर्णायक अधिकारी (अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी) द्वारा 15 मामले निपटाए गए हैं जबकि 01 मामला जुब्बल कोर्ट में फाइल किया गया है और 26 मामले कोर्ट में फाइल किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, नगर निगम क्षेत्र में गत तीन माह में 57 सुधार नोटिस जारी किये गए हैं और 56 खाद्य व्यवसाय संचालकों द्वारा अनुपालन रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है। यह भी बताया गया कि 03 जुलाई 2025 से लेकर अभी तक नगर निगम क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा लाइसेंसिंग और पंजीकरण 280 लाइसेंस जारी किये गए हैं। इसी प्रकार, जिला में कुल 238 लाइसेंस और 1849 पंजीकरण जारी किये गए हैं। 

उपायुक्त ने विभाग को मोबाइल फ़ूड टेस्टिंग लेबोरेटरी को भी कार्यशील बनाने के निर्देश दिए और उसके माध्यम से लोगों को जागरूक करने को कहा।

रोबोटिक सर्जरी में शोर ज्यादा, काम कम – राकेश जमवाल

मण्डी मेडिकल कॉलेज बना रेफरल सेंटर, बुनियादी सुविधाएं ठप
शिमला: भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने विधानसभा में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में “रोबोटिक सर्जरी” के नाम पर केवल शोर मचाया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह से विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि जब सदन के भीतर सरकार से यह पूछा गया कि किन-किन मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी शुरू की जा रही है, कितनी मशीनें खरीदी गई हैं, डॉक्टरों और स्टाफ को क्या प्रशिक्षण दिया गया है, तो सरकार का जवाब था कि “सूचना एकत्रित की जा रही है।” यह जवाब अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि सरकार बिना तैयारी के केवल घोषणाएं कर रही है।
राकेश जमवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री हर मंच से रोबोटिक सर्जरी, पेट स्कैन और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करते हैं, लेकिन जब तथ्य सामने रखने की बारी आती है तो सरकार के पास कोई स्पष्ट आंकड़े नहीं होते।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है और मशीनें खरीद ली हैं, तो फिर सदन में इसकी जानकारी देने में देरी क्यों हो रही है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार केवल प्रचार पर ध्यान दे रही है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं किया गया है।
मंडी के नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज का उदाहरण देते हुए जमवाल ने कहा कि यह संस्थान आज पूरी तरह से “रेफरल सेंटर” बनकर रह गया है। यहां आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत बड़े संस्थानों की ओर भेज दिया जाता है, जबकि कई बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार एमआरआई, कैथ लैब और अन्य आधुनिक सुविधाएं शुरू करने की घोषणाएं की गईं, लेकिन तीन वर्ष बीतने के बावजूद इनका कोई अता-पता नहीं है। इससे साफ है कि सरकार की प्राथमिकता केवल घोषणाएं करना है, न कि उन्हें धरातल पर उतारना।

विधायक राकेश जमवाल ने आगे कहा कि जब प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, रेडियोलॉजी विभाग पूरी तरह से सुचारू नहीं हैं और जरूरी उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं, तब रोबोटिक सर्जरी जैसी महंगी तकनीक की बात करना आम जनता के साथ मजाक है। जमवाल ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने यह आकलन किया है कि रोबोटिक सर्जरी का खर्च कितना होगा और क्या गरीब तथा मध्यम वर्ग के लोग इसका लाभ उठा पाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले से ही लैपरोस्कोपिक सर्जरी महंगी होती है, ऐसे में रोबोटिक सर्जरी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती है।

हिमकेयर योजना को लेकर भी जमवाल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि एक तरफ सरकार इस योजना पर पुनर्विचार कर उसे बंद करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर महंगी स्वास्थ्य सेवाओं की घोषणाएं कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अस्पतालों पर करोड़ों रुपये की देनदारियां लंबित हैं और सरकार उन्हें चुकाने में विफल रही है, जिससे आम जनता को उपचार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है।
जमवाल ने आईजीएमसी शिमला की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि यह प्रदेश का सबसे पुराना और प्रमुख मेडिकल कॉलेज है, लेकिन यहां से भी डॉक्टरों का स्थानांतरण किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और कमजोर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करना चाहती है तो उसे सबसे पहले बुनियादी ढांचे, डॉक्टरों की उपलब्धता और जरूरी उपकरणों पर ध्यान देना चाहिए।

राकेश जमवाल ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और सरकार को जवाबदेह बनाएगी। उन्होंने मांग की कि सरकार रोबोटिक सर्जरी जैसे बड़े दावों से पहले प्रदेश के अस्पतालों की जमीनी हकीकत सुधारने पर ध्यान दे, ताकि आम जनमानस को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

बिलासपुर: ऋषिकेश अनुभाग के तहत आसपास के क्षेत्रों में बंद रहेगी बिजली

बिलासपुर:  सहायक अभियंता विद्युत उप मण्डल-।। ई. रविन्द्र चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि 30 मार्च को ऋषिकेश अनुभाग में बिजली की लाईनों की आवश्यक मरम्मत, पेडों की कांट-छांट व जीओ स्वीच के पार्ट बदले के चलते कुछ क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी।

उन्होंने बताया कि ऋषिकेश अनुभाग के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र धराडसानी तथा इसके आसपास के क्षेत्रों में प्रातः 10 बजे से सांय 5 बजे तक विद्युत आपूर्ति आंशिक रुप से बाधित रहेगी। उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील की है।

पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने जिला प्रशासन को भेजा उनके घर को कोविड केयर सेंटर बनाने का प्रस्ताव

सुक्खू सरकार ने कांगड़ा में गाड़ियों की पासिंग व्यवस्था को किया तहस-नहस : सुधीर शर्मा

कांगड़ा: भाजपा विधायक श्री सुधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर कांगड़ा जिला में गाड़ियों की पासिंग व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह मामला लाखों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और आजीविका से जुड़ा हुआ है, जिसे सरकार ने नजरअंदाज कर दिया है।

 शर्मा ने शनिवार को धर्मशाला में जारी अपने बयान में कहा कि पहले कांगड़ा जिला में आरटीओ और एमवीआई द्वारा 21 विभिन्न केंद्रों पर गाड़ियों की पासिंग की सुविधा उपलब्ध थी, जिससे लोगों को सुविधा मिलती थी। लेकिन वर्तमान सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त कर लंज के निकट गाहलियां में एकमात्र ऑटोमैटिक टेस्टिंग सेंटर (ATS) स्थापित कर दिया है, जिसे एक निजी फर्म संचालित कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नए सिस्टम के कारण दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले वाहन मालिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, पासिंग प्रक्रिया के दौरान उनसे अत्यधिक शुल्क वसूला जा रहा है, जिसमें फाइल चार्ज से लेकर अन्य प्रक्रियाओं में हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं। शर्मा ने सवाल उठाया कि जब एक ऑटो रिक्शा को केवल 20 किलोमीटर के दायरे में ही चलने की अनुमति है, तो बैजनाथ जैसे क्षेत्र से चालक लगभग 135 किलोमीटर दूर गाहलियां कैसे पहुंचेगा। उन्होंने इसे नियमों के विरुद्ध और अव्यवहारिक निर्णय बताया। उन्होंने यह भी कहा कि देहरा विधानसभा क्षेत्र में इस नियम को लागू नहीं किया गया है, जहां अब भी आरटीओ और एमवीआई द्वारा गाड़ियों की पासिंग की जा रही है। यह भेदभावपूर्ण नीति सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती है।शर्मा ने कहा कि हजारों लोग इस विषय को लेकर उनके पास शिकायत लेकर पहुंचे हैं और उन्होंने प्रशासन को भी ज्ञापन सौंपा है। बावजूद इसके, जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

डीसी ने नहीं की कार्रवाई: हाल ही में कई ड्राइवरों व जनता ने धर्मशाला में डीसी हेमराज बैरवा को इस बारे में ज्ञापन दिया था, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। सुधीर शर्मा ने कहा कि उन्होंने धर्मशाला डीसी आफिस का एक सिस्टम बनाया गया था, लेकिन वर्तमान में जनता के काम नहीं हो रहे हैं। अधिकारियों द्वारा जनता की अनदेखी और पेंडेंसी की सबसे ज्यादा शिकायतें धर्मशाला जो जिला मुख्यालय है वहां से आ रही हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस निर्णय को शीघ्र नहीं बदला और पहले की तरह 21 केंद्रों पर गाड़ियों की पासिंग की व्यवस्था बहाल नहीं की, तो जनता के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

पशु मित्र चयन प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण, संशोधित नीति में शारीरिक दक्षता परीक्षण लागू

बिलासपुर: उप-निदेशक पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन, बिलासपुर डॉ. विनोद कुंदी ने जानकारी देते हुए बताया कि पशुपालन विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पशु मित्र नीति-2025 अधिसूचित की गई है।

हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स एवं सोशल मीडिया में पशु मित्रों की नियुक्ति हेतु निर्धारित शारीरिक परीक्षण को लेकर व्यक्त की गई आशंकाओं के संदर्भ में पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया कि पशु मित्र की भूमिका में बड़े पशुओं को संभालना, बीमार भेड़-बकरियों (औसतन 25 किलोग्राम) को उठाना तथा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 50 किलोग्राम तक पशु आहार का परिवहन जैसे कार्य शामिल हैं। इन कार्यों के लिए न्यूनतम शारीरिक क्षमता एवं सहनशक्ति आवश्यक है, ताकि कार्यकर्ता एवं पशुधन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने बताया कि नीति के अंतर्गत किया जाने वाला शारीरिक परीक्षण केवल एक कार्यात्मक फिटनेस मूल्यांकन है, न कि सहनशक्ति प्रतियोगिता। इसका उद्देश्य केवल सौंपे गये कर्तव्यों को सुरक्षित रूप से निभाने की न्यूनतम क्षमता को सत्यापित करना है। यह परीक्षण सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होता है तथा इसका उद्देश्य किसी भी अभ्यर्थी को अपमानित करना या किसी वर्ग विशेष के लिए बाधा उत्पन्न करना नहीं है।

उन्होंने बताया कि अब तक 315 अभ्यर्थियों की शारीरिक परीक्षा आयोजित की जा चुकी है और किसी भी अभ्यर्थी को गंभीर चोट लगने की कोई घटना सामने नहीं आई है। मीडिया में आई घटना, जो जिला मंडी के धर्मपुर उपमंडल में घटी, उसमें आवेदक को कोई गंभीर चोट नहीं आई तथा वह परीक्षा पूर्ण करने में सक्षम रही। विभाग द्वारा सभी परीक्षा स्थलों पर आवश्यक सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि वह अपुष्ट सूचनाओं के बजाय अधिसूचित नीति के प्रावधानों पर ही विश्वास करें।

डॉ. कुंदी ने आगे बताया कि मामले की व्यापक समीक्षा के उपरांत हिमाचल प्रदेश सरकार ने पशु मित्र नीति में संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार पूर्व शारीरिक परीक्षण को शारीरिक दक्षता परीक्षण से प्रतिस्थापित किया गया है, जिसमें पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 5000 मीटर दौड़ 30 मिनट में तथा महिला अभ्यर्थियों के लिए 1500 मीटर दौड़ 10 मिनट में पूर्ण करना अनिवार्य रखा गया है। यह परीक्षण नीति के परिशिष्ट-डी में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुसार आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि पूर्व प्रावधानों के तहत पहले ही शारीरिक परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों को संशोधित नीति के अंतर्गत भी पात्र माना जाएगा, जबकि जो अभ्यर्थी पूर्व परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे, उन्हें संशोधित प्रारूप के अनुसार पुनः अवसर प्रदान किया जाएगा।

हिमाचल: सस्ता हुआ घरेलू एलपीजी सिलिंडर

जिला में घरेलू गैस सिलेंडरों और पेट्रोलियम पदार्थों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध

व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में सुधार, एडीसी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित

बिलासपुर: अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर ओम कांत ठाकुर की अध्यक्षता में आज व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों के वितरण बारे राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना/दिशानिर्देशों के सम्बन्ध में जिला में घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति की विस्तृत समीक्षा को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अवगत कराया कि वर्तमान में जिला बिलासपुर में घरेलू गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है। साथ ही, गैस एजेंसियों को उनकी व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कुल दैनिक मांग का लगभग 50 प्रतिशत आवंटन किया जा रहा है, जिससे व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति में भी सुधार हुआ है।

राज्य सरकार के निर्देशों के अनुरूप व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति विभिन्न क्षेत्रों के लिए निर्धारित की गई है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों एवं अस्पतालों के लिए 37 प्रतिशत, होटल, रेस्टोरेंट एवं ढाबों के लिए 36 प्रतिशत, सामाजिक कार्यक्रमों एवं सभाओं के लिए 9 प्रतिशत तथा फार्मास्युटिकल उद्योग, सरकारी/पीएसयू/कॉरपोरेट/औद्योगिक इकाइयों एवं कैंटीन के लिए 9 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अतिरिक्त उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वह इन दिशा-निर्देशों के अनुरूप उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडरों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करें।

जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले ब्रिजेन्द्र पठानिया ने बताया कि जिले में घरेलू गैस सिलेंडरों एवं पेट्रोलियम पदार्थों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा आम जनता को किसी भी प्रकार की चिंता या घबराहट की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान में जिले में 14 गैस एजेंसियां कार्यरत हैं, जो उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार नियमित आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देशानुसार शहरी क्षेत्रों में 25 दिन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का बुकिंग अंतराल लागू किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे समय पर अपने गैस सिलेंडर की बुकिंग करवाएं, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

इसके अतिरिक्त, विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि कालाबाजारी एवं अवैध भंडारण पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

निजी कोविड टीकाकरण केंद्र करेंगे राज्य में टीकाकरण अभियान आरम्भ

जिला बिलासपुर में ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान 29 मार्च से

14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की 2735 किशोरियों का 30 स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से होगा टीकाकरण

स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियों को दिया अंतिम रूप, 5 अप्रैल तथा 12 अप्रैल को भी जारी रहेगा अभियान

बिलासपुर: जिला बिलासपुर में ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (एचपीवी) से बचाव एवं सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए 29 मार्च (रविवार) से विशेष टीकाकरण अभियान शुरू होने जा रहा है। यह अभियान आगामी 5 अप्रैल तथा 12 अप्रैल को भी जारी रहेगा। इस अभियान के अंतर्गत जिला बिलासपुर में चार चिकित्सा खंडों के अंतर्गत कुल 30 स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की 2735 किशोरियों का टीकाकरण किया जाएगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने अन्य संबंद्ध विभागों के सहयोग से सभी तैयारियों को अंतिम रूप प्रदान कर दिया है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर डाॅ. शशी दत शर्मा ने बताया कि जिला में ह्यूमन पेपीलौमा वायरस टीकाकरण अभियान के लिए जिला के चारों चिकित्सा खंडों में 30 स्वास्थ्य संस्थानों को चिन्हित किया गया है। जिनके माध्यम से 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की कुल 2735 किशोरियों का टीकाकरण किया जाएगा, जिनकी जन्म तिथि 28 फरवरी 2011 से 24 मई 2012 होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि घुमारवीं चिकित्सा खंड में 4 कोल्ड चेन प्वाईंट (सीसीपी) हैं जिनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भराड़ी, सिविल अस्पताल (सीएच) घुमारवीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हरलोग तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुठेड़ा शामिल है। इसी तरह झंडुता चिकित्सा खंड में कुल 9 कोल्ड चेन प्वाईंट (सीसीपी) हैं, जिनमें सिविल अस्पताल (सीएच), बरठीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तलाई तथा झंडुता, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) भेहड़ी, गेहड़वीं, कलोल, मरोतन, पनौल तथा ऋषिकेश शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि चिकित्सा खंड मारकंड के अंतर्गत कुल 10 कोल्ड चेन प्वाईंट (सीसीपी) हैं जिनमें क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर स्थित एमसीएच, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी पंजगाई, सिविल अस्पताल मारकंड, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीएचसी बागी सुंगल, भजून, छडोल, मलोखर, नम्होल, राजपुरा, मंडी मानवा शामिल हैं। जबकि श्री नैना देवी जी चिकित्सा खंड में 7 कोल्ड चेन प्वाईंट (सीसीपी) हैं जिनमें सिविल अस्पताल घवांडल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वारघाट, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वाहण, तरसूह, टोबा, भाखड़ा तथा बैहल शामिल हैं।

सीएमओ ने बताया कि ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (एचपीवी) यानि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर विश्व स्तर पर सबसे आम संक्रमण में से एक है और भारत में भी महिलाओं में आम कैंसर में से दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है। समय पर टीकाकरण, सुरक्षित व्यवहार, नियमित जांच तथा तथा व्यापक जन जागरूकता के माध्यम से एचपीवी से होने वाली बीमारियों को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

उन्होंने बताया कि टीकाकरण खाली पेट नहीं किया जाएगा तथा टीका चिकित्सक की निगरानी में ही लगाया जायेगा तथा टीका लगाने के उपरांत किशोरियों को आधे घंटे तक निगरानी में रखा जाएगा ताकि किसी भी संभावित प्रतिकूल स्थिति में तुरंत आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

उन्होंने बताया कि जिला के सभी खण्ड चिकित्सा अधिकारियों एवं अन्य विभागों को जरूरी दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस अभियान को सफल बनाने के लिए आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूहों तथा पंचायती राज संस्थाओं के अलावा शिक्षा विभाग के माध्यम से विद्यालयों में आयोजित पेरेंट्स मीटिंग के दौरान अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण तथा टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूक कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि किसी कारणवश अभियान के दौरान जो किशोरियां छूट जाएंगी उनका टीकाकरण आगामी 19 अप्रैल, 10 मई और 24 मई तथा 21 जून 2026 को किया जाएगा।

ट्रेनी मशीन ऑपरेटर के 30 पदों के लिए 6 अप्रैल को घुमारवीं में होंगे साक्षात्कार

बिलासपुर: जिला रोजगार अधिकारी राजेश मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्धमान टेक्स्टिल प्राइवेट लिमिटेड बद्दी में ट्रेनी मशीन ऑपरेटर के 30 पदों के लिए उप रोजगार कार्यालय घुमारवीं में 6 अप्रैल को प्रातः 10ः30 बजे से कैंपस इंटरव्यू का आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इन पदों के लिए 18 से 30 आयु वर्ग के इच्छुक पुरुष व महिला उम्मीदवार जिनकी शैक्षणिक योग्यता 8वीं, 10वीं व 12वीं पास हो आवेदन कर सकते है। चयनित अभ्यर्थियों को 12,750 रुपये मासिक वेतन तथा अन्य भत्ते प्रदान किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार जिनका रोजगार कार्यालय में नाम पंजीकृत हो वह अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित निर्धारित स्थान, तिथि व समय पर उपस्थित होकर कैंपस इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं।

सोलन : 43 पदों के लिए कैंपस इंटरव्यू 4 अप्रैल को

सोलन: मैसर्ज़ देव भूमि फल एवं सब्जी किसान उत्पादक कम्पनी में फील्ड ऑफिसर, सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव, पैंट्री बॉय व ड्राइवर के 21 पद तथा स्काई मरचेंट इंटरनेशनल शिमला में मेनेजमेंट ट्रेनी व मारकेटिंग ट्रेनी के 22 पदों पर भर्ती के लिए 04 अप्रैल, 2026 को ज़िला रोज़गार कार्यालय सोलन में कैंपस इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे।

यह जानकारी ज़िला रोज़गार अधिकारी जगदीश कुमार ने दी।

जगदीश कुमार ने कहा कि उक्त पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता 8वीं, 10वीं, 12वीं, ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, बेसिक कम्प्यूटर नॉलेज व आयु 20 वर्ष से 35 वर्ष के मध्य होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इन पदों की विस्तृत जानकारी आवेदक विभागीय पोर्टल ई.ई.एम.आई.एस. में प्राप्त कर सकते हैं। सभी योग्य एवं इच्छुक आवेदक विभागीय पोर्टल ई.ई.एम.आई.एस. पर कैंडिडेट लॉगइन टेब के माध्यम से पंजीकृत करने के उपरांत अपनी रेजिस्ट्रेशन प्रोफाइल पर अधिसूचित रिक्तियों के लिए अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर आवेदन कर सके हैं। उन्होंने कहा कि आवेदन करने से पूर्व प्रत्येक आवेदक का नाम रोज़गार कार्यालय में पंजीकृत होना अनिवार्य है।

ज़िला रोज़गार अधिकारी ने कहा कि इच्छुक उम्मीदवार अपनी योग्यता सम्बन्धी सभी अनिवार्य प्रमाण पत्रों व दस्तावेज़ों सहित ज़िला रोज़गार कार्यालय सोलन में 04 अप्रैल, 2026 को प्रातः 10.30 बजे पहुंचकर कैंपस इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि कैंपस इंटरव्यू में भाग लेने के लिए कोई भी यात्रा-भत्ता देय नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि अधिक जानकारी के लिए उम्मीदवार कार्यालय दूरभाष नम्बर 01792-227242 पर सम्पर्क कर सकते है।

दाड़ी धुम्मू शाह मेला 8 से 15 अप्रैल तक, भव्य एवं आकर्षक होगा आयोजन – मोहित रत्न

एसडीएम ने धुम्मू शाह मेला-2026 की तैयारियों को लेकर बैठक की अध्यक्षता की*

धर्मशाला: उप मंडल अधिकारी (नागरिक) धर्मशाला एवं मेला अधिकारी मोहित रत्न की अध्यक्षता में धुम्मू शाह मेला-2026 के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया तथा मेले से संबंधित व्यवस्थाओं, जिम्मेदारियों एवं समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई।

मोहित रत्न ने बताया कि धुम्मू शाह मेला दाड़ी में 08 से 15 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि धुम्मू शाह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और इसे भव्य एवं आकर्षक रूप में आयोजित किया जाएगा। मेले के दौरान आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।

मोहित रत्न ने बताया कि मेले के सफल संचालन हेतु विभिन्न 12 उप-समितियों का गठन किया गया है, जिनमें ग्राउंड मैनेजमेंट एवं आवंटन समिति, सांस्कृतिक कार्यक्रम समिति, व्यय समिति, मीडिया समन्वय समिति, आतिथ्य समिति, स्थल व्यवस्था समिति, कानून एवं व्यवस्था समिति, स्वच्छता समिति, पुरस्कार वितरण समिति, छिंज आयोजन समिति, मंदिर समिति तथा स्वागत समिति शामिल हैं। सभी समितियों को उनके कार्यों एवं जिम्मेदारियों के बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही कानून एवं व्यवस्था समिति को मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण एवं विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त पुरस्कार छिंज आयोजन समिति को पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता के आयोजन तथा मंदिर समिति को धार्मिक अनुष्ठानों एवं पूजा-अर्चना की व्यवस्थाओं की देखरेख करने के निर्देश दिए गए हैं। मोहित रत्न ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।

उन्होंने कहा कि मेले के दौरान अंतिम दो दिनों में सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन किया जाएगा तथा स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने के साथ-साथ मेले को व्यापक पहचान दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मेले के दौरान स्वयं सहायता समूहों को भी अपने उत्पाद प्रदर्शित करने एवं बिक्री करने के लिए स्टॉल उपलब्ध करवाए जाएंगे।

उन्होंने सभी अधिकारियों से व्यवस्थाओं को समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिला विकास अधिकारी (ग्रामीण विकास) भानु प्रताप सिंह, जिला भाषा अधिकारी अमित गुलेरी, एसएचओ नारायण सिंह, तहसीलदार गिरिराज ठाकुर, फायर ऑफिसर राजेश गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।