


कुमारसैन में बिना मलबा गिरे सफाई के टेंडर, विधायक कुलदीप राठौर और अधिकारियों की भूमिका की हो उच्चस्तरीय जांच : भारद्वाज
शिमला: भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर आपदा राहत एवं पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त धनराशि के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को आपदा से हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए पीडीएनए के अंतर्गत सहायता उपलब्ध करवाई, लेकिन प्रदेश में इस धनराशि के इस्तेमाल को लेकर गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं।
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग के कुमारसैन और थानेधार उपमंडलों में वर्ष 2024-25 की आपदा राहत राशि से ऐसे कार्यों के टेंडर जारी किए जा रहे हैं, जिनकी वास्तविक आवश्यकता ही नहीं है। जिन सड़कों पर मलबा गिरा ही नहीं और जो पूरी तरह यातायात के लिए खुली हैं, वहां भी मलबा हटाने के नाम पर टेंडर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि अधिकारियों और चुनिंदा ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
भाजपा प्रवक्ता ने उदाहरण देते हुए कहा कि किट्टी सड़क का उन्होंने चार दिन पूर्व स्वयं निरीक्षण किया था। उनके अनुसार सड़क पर कहीं मलबा नहीं था, इसके बावजूद मलबा हटाने के नए टेंडर जारी किए जा रहे हैं। इसी प्रकार कटेड़ी सड़क पर टायरिंग और सफेद पट्टी की मार्किंग पहले से हो चुकी है, लेकिन दोबारा मार्किंग के टेंडर लगाए जाने की जानकारी मिली है। उन्होंने दावा किया कि इसके वीडियो प्रमाण भी उनके पास उपलब्ध हैं।
भारद्वाज ने कहा कि बड़ौगी से केड़ी तक लगभग डेढ़-दो किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह खुली है और वहां आपदा से कोई उल्लेखनीय नुकसान नहीं हुआ, फिर भी मलबा हटाने के टेंडर जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस सड़क के संबंध में आरटीआई के माध्यम से जानकारी भी मांगी गई है।
उन्होंने विधायक कुलदीप राठौर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ चुनिंदा ठेकेदारों और कांग्रेस से जुड़े व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर प्रक्रिया प्रभावित की जा रही है। उन्होंने पूरे मामले में विधायक और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की।
भारद्वाज ने ओडी से बिथल तक हॉर्टिकल्चर सड़क के लगभग एक करोड़ रुपये के कार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सड़क चौड़ीकरण और कटिंग के लिए उचित डंपिंग साइट की व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मिट्टी जंगल में फेंकने से वन क्षेत्र और बगीचों को नुकसान पहुंचा। स्थानीय लोगों द्वारा न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त करने के बावजूद संबंधित कार्यों के टेंडरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कुमारसैन क्षेत्र के बड़ागांव में प्रस्तावित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भवन निर्माण के लिए उपलब्ध राशि वापस मंगवाए जाने की जानकारी मिली है। एक ओर आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं के कार्य लंबित हैं, दूसरी ओर अनावश्यक टेंडरों पर धन खर्च करने के आरोप सामने आ रहे हैं।
भारद्वाज ने मुख्यमंत्री से मांग की कि कुमारसैन और थानेधार उपमंडलों में आपदा राहत राशि से जारी सभी टेंडरों, भुगतान, माप पुस्तिकाओं और कार्यों का भौतिक सत्यापन करवाया जाए।** उन्होंने कहा कि सरकार केंद्र से प्राप्त धनराशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो भाजपा स्थानीय जनता के साथ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में संबंधित सड़कों के वीडियो और अन्य दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

नौणी: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा फूड टेक क्लब द्वारा शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में विश्व खाद्य दिवस-2026 मनाया गया। इस वर्ष की थीम ‘आज नवाचार करें, कल का पोषण करें’ पर आधारित इस कार्यक्रम में स्वस्थ आहार, सतत खाद्य प्रणालियों, खाद्य सुरक्षा और उद्यमिता को बढ़ावा देने में नवाचार की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।विश्व खाद्य दिवस प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य विश्वभर में भुखमरी की चुनौती के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी लोगों को सुरक्षित, पौष्टिक और पर्याप्त भोजन उपलब्ध करवाने के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है। इस वर्ष की थीम अधिक टिकाऊ, समावेशी और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम कृषि-खाद्य प्रणालियों के विकास में नवाचार के महत्व को रेखांकित करती है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि खाद्य उद्योग के वैज्ञानिक सलाहकार एवं परामर्शदाता अजय शर्मा ने मुख्य व्याख्यान दिया। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रो. बवेजा ने अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने तथा जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वस्थ खानपान और संतुलित पोषण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों को खाद्य क्षेत्र में उद्यमिता अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि खाद्य प्रसंस्करण और इससे जुड़े उद्योगों में नवाचार आधारित व्यवसाय स्थापित करने तथा रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र युवाओं के लिए नए उद्यमों के विकास और आजीविका के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और खाद्य उत्पादों के पोषण संबंधी गुणों को संरक्षित रखने में सक्षम नवीन पैकेजिंग समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने युवा नवाचारियों से वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक तकनीक और उद्यमशीलता कौशल का समन्वय कर ऐसे समाधान विकसित करने का आह्वान किया, जो उपभोक्ताओं और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी हों।मुख्य व्याख्यान में अजय शर्मा ने खाद्य उद्योग में उभरते अवसरों और चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए नवाचार, उत्पाद विकास और टिकाऊ खाद्य प्रसंस्करण पद्धतियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्योग की आवश्यकताओं को समझने तथा मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों के विकास और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया।
विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश शर्मा ने कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, कटाई के बाद प्रबंधन तथा अपशिष्ट के प्रभावी उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन उपायों से खाद्य पदार्थों की बर्बादी और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के साथ-साथ कृषि उत्पादों का आर्थिक मूल्य भी बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नवीन खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाकर खाद्य अपशिष्ट को कम करने, किसानों की आय बढ़ाने तथा रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर सृजित करने में मदद मिल सकती है।
विश्व खाद्य दिवस के उपलक्ष्य में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने तथा स्वस्थ आहार, खाद्य नवाचार और सतत विकास के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रो. बवेजा ने बेकरी ब्लॉक से प्रशासनिक ब्लॉक तक जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली के माध्यम से स्वस्थ खानपान की आदतें अपनाने और सक्रिय जीवनशैली बनाए रखने का संदेश दिया गया, ताकि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के साथ समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जा सके।
कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर एवं नारा लेखन प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिनमें खाद्य सुरक्षा, पोषण, सतत विकास और नवाचार से जुड़े विभिन्न विषयों पर 28 पोस्टर और 16 नारे प्रस्तुत किए गए। इसके अतिरिक्त, 14 खाद्य स्टॉल लगाए गए, जिनमें विभिन्न खाद्य उत्पादों और व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण विभाग के सहयोग से कार्य कर रहे महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार खाद्य उत्पादों की प्रदर्शनी रही। इस प्रदर्शनी के माध्यम से महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण के जरिए महिला उद्यमिता तथा आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने की संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संवैधानिक अधिकारियों, विभिन्न विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

हिमाचल : प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड (एचपीबीओसीडब्ल्यूडब्ल्यूबी) के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर ने पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं के सम्बन्ध में आज नई दिल्ली में भारत सरकार के संयुक्त सचिव आशुतोष ए.टी. पेडणेकर से शिष्टाचार भेंट की।
बैठक के दौरान विभिन्न योजनाओं तथा श्रमिकों की आर्थिक सहायता, शिक्षा संबंधी लाभ तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। चर्चा के दौरान आशुतोष ए. टी. पेडणेकर ने बोर्ड की कार्यप्रणाली की प्रशंसा की। उन्होंने बोर्ड द्वारा ई-केवाईसी के माध्यम से पात्र लोगों की पहचान करके उन तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के प्रयासों की भी सराहना की।
अध्यक्ष ने संयुक्त सचिव को अवगत करवाया कि अब तक लगभग 4.77 लाख श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि लगभग एक लाख ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी की गई है। उन्होंने ऐसी ही प्रणाली पूरे देश में लागू करने पर बल दिया ताकि पात्र लाभार्थियों की पहचान करके उन्हंे विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा सके। इस दौरान लेवर चौक बनाने पर भी विस्तृत चर्चा की गई ।
उन्होंने कहा कि जनवरी 2023 से अब तक बोर्ड द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत लगभग 108 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत ही सबसे अधिक 15,536 लाभार्थियों को लाभ प्रदान किया गया तथा शिक्षा के लिए 46,38,01,225 रुपये की राशि वितरित की गई।
श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने के उद्देश्य से उचित मूल्यों की दुकानों के माध्यम से योजनाओं के प्रचार-प्रसार, डिजिटल लेबर चौक तथा सैस एकत्रित से संबंधित कार्यों पर भी बल दिया जा रहा है और संबंधित कार्यों की प्रगति के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
नरदेव सिंह कंवर ने कहा कि बोर्ड की कल्याणकारी योजनाओं को अन्य देशों में भी सराहा गया है। उन्होने कहा कि श्रीलंका और नेपाल से आए प्रतिनिधिमंडलों ने बोर्ड की कार्यप्रणाली एवं कल्याणकारी योजनाओं की प्रशंसा की तथा अपने देशों में भी हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की योजनाओं की तर्ज पर कल्याणकारी योजनाएं क्रियान्वित करने की संभावना पर बल दिया।
इसके अतिरिक्त, आम जनता एवं पात्र श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर एलईडी डिस्प्ले के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने की पहल भी की जा रही है।
नरदेव सिंह कंवर ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दिशा-निर्देशों एवं मार्गदर्शन में हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड कामगारों और उनके परिवारों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि बोर्ड पात्र लाभार्थियों तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से लाभ पहुंचाना सुनिश्चित कर रहा है।

कांगड़ा: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि किसी भी सरकार के संचालन के लिए सुशासन अनिवार्य है। ई-गवर्नंेस की वास्तविक सफलता तकनीकी जटिलता में नहीं, बल्कि आम नागरिकों, विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन को सरल बनाने की क्षमता में निहित है।
मुख्यमंत्री ने आज जिला कांगड़ा के धर्मशाला में प्रशासनिक सुधार एवं ई-गवर्नेंेस विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। इस सम्मेलन में देशभर से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि हमें पारंपरिक नौकरशाही व्यवस्था से आगे बढ़कर पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली की ओर बढ़ना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि सत्तासीन होने का उद्देश्य सुख-सुविधाओं का आनंद लेना नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ना है। सरकार का लक्ष्य हिमाचल के संसाधनों का लाभ प्रदेशवासियों तक पहुंचाते हुए आने वाले कुछ वर्षों में हिमाचल प्रदेश को देश के सबसे समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ई-गवर्नेंस के माध्यम से जनसेवाओं को बेहतर बनाने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।
श्री सुक्खू ने कहा कि स्पष्ट नीतिगत दृष्टिकोण के तहत राज्य सरकार ने कई ऐसे व्यवस्था परिवर्तन संबंधी निर्णय लिए हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई है। शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए, सरकार ने प्री-नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विशेष प्रयास किए हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि वर्ष 2021 में पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रदेश 21वें स्थान पर था।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को दूसरी सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य के चिकित्सा संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं शुरू की गई हैं। इसके अतिरिक्त, 15 से 19 वर्ष पुराने चिकित्सा उपकरणों को बदलने की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है। इन प्रयासों से प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं और लोगों को महंगे इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाने की बाध्यता से राहत मिल रही है। अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। इसके अतिरिक्त, विशेषज्ञ चिकित्सकों के वेतन में वृद्धि की गई है तथा चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के सैकड़ों पद प्राथमिकता के आधार पर भरे गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। इसके दृष्टिगत ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण सरकार की तीसरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ग्रामीण आबादी की आय में सम्मानजनक वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। प्रदेश सरकार ने गाय और भैंस के दूध के लिए देश में सर्वाधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत प्राकृतिक पद्धति से तैयार गेहूं 80 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का 50 रुपये प्रति किलोग्राम और अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिटीजन पोर्टल के माध्यम से नागरिक सेवाओं का विस्तार किया है। इसके जरिए लोग घर बैठे अथवा लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और शिकायत निवारण पोर्टल ने अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूरदराज के क्षेत्रों से प्राप्त शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जा रही है और शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बिना शिकायत को निस्तारित नहीं माना जाता है।
उन्होंने कहा कि इंतकाल, भूमि का बंटवारा और निशानदेही जैसे राजस्व संबंधी विवाद के लंबित मामलों से प्रदेश के लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता था। प्रदेश सरकार ने राजस्व प्रबंधन प्रणाली और राजस्व लोक अदालतों जैसे कदम उठाए, जिससे पारदर्शिता बढ़ाने तथा हजारों लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिली है।
सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र में राज्य सरकार की पहलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निराश्रित बच्चों को कानूनी रूप से ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया गया है। सरकार उनकी शिक्षा, पालन-पोषण, उच्च शिक्षा, कोचिंग, वस्त्र, विवाह और आवास जैसी आवश्यकताओं का ध्यान रख रही है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से अधिक नहीं है, उन परिवारों के देश-विदेश में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक की ऋण सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ‘हरित हिमाचल’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने सहित पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।
पहाड़ी राज्यों के भौगोलिक और पर्यावरणीय चुनौतियों को इंगित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के वन, नदियां और जलविद्युत संसाधन देश की पर्यावरणीय एवं ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसके बावजूद प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और पर्यावरणीय संरक्षण की लागत का असंगत बोझ राज्य को उठाना पड़ता है। उन्होंने राष्ट्रीय विकास में पहाड़ी राज्यों के योगदान का निष्पक्ष आकलन करने तथा जलविद्युत परियोजनाओं, रॉयल्टी, जल उपकर और केंद्रीय वित्तीय सहायता के मामलों में उनके हितों पर न्यायसंगत विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश रचनात्मक संवाद, तथ्यों और संवैधानिक माध्यमों से अपने जायज हकों के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।
मुख्यमंत्री ने धर्मशाला में इस राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी), आयोजकों और राज्य प्रशासनिक टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन एक समावेशी डिजिटल शासन व्यवस्था विकसित करने में सहायक साबित होगा, जिससे आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के साथ-साथ प्रौद्योगिकी का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
इससे पूर्व, डीएआरपीजी की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने स्वागत संबोधन में कहा कि हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्य प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विभिन्न नवाचारों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए नियमित संवाद और विचारों के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया।
हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने नागरिकों को पारदर्शी और उत्तरदायी सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रौद्योगिकी को नियमित अंतराल पर उन्नत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सचिव प्रशासनिक सुधार शैनामोल ए. ने हिमाचल की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर आयोजित सत्र को संबोधित किया और स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार ने ई-गवर्नंेस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उभरती प्रौद्योगिकी से प्रेरित डिजिटल परिवर्तन एवं नवाचार पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव सी.पी. वर्मा ने ‘ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार-राज्य एवं जिला स्तर’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित किया।
डीएआरपीजी के अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

कांगड़ा: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज कांगड़ा जिला के धर्मशाला स्थित सकोह में 33.78 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले इंडोर आइस स्केटिंग रिंक एवं रोलर स्केटिंग रिंक की आधारशिला रखी।
इस भवन के बेसमेंट में जिम, बिलियर्ड्स रूम और कैफे की सुविधा होगी। इसके अतिरिक्त धरातल मंजिल में वीआईपी लाउंज तथा ऊपरी बालकनी में 1,079 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। इस रोलर स्केटिंग रिंक की दर्शक दीर्घा में 250 लोगों के बैठने की क्षमता होगी जबकि परिसर में 250 वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य में गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने धर्मशाला शहर के लिए 982 लाख रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन सुविधा का भी लोकार्पण किया। इस संयंत्र की निर्धारित क्षमता 60 केएलडी प्रतिदिन है। इसके माध्यम से सीवरेज नेटवर्क से वंचित धर्मशाला के सात वार्डों को सुविधा मिलेगी, जिससे लगभग 7,500 परिवार लाभान्वित होंगे।
इस अवसर पर कृषि मंत्री चंद्र कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के अध्यक्ष आर.एस. बाली, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (डिजिटल प्रौद्योगिकी, सुशासन एवं नवाचार) गोकुल बुटेल,

निशानदेही, तकसीम और इंतकाल के लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे पर जोर, भूमि हस्तांतरण में तेजी लाने के निर्देश
ऊना: उपायुक्त जतिन लाल ने राजस्व अधिकारियों को जिले में राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्ती (करेक्शन) के सभी लंबित मामलों का निपटारा 15 दिसंबर तक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का भी इस विषय पर विशेष फोकस है। उन्होंने अधिकारियों को इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निपटाने को कहा ।
उपायुक्त ने निशानदेही (डिमार्केशन) और तकसीम (पार्टिशन) के लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने तथा इंतकाल (म्यूटेशन) और जमाबंदी से जुड़े मामलों की पेंडेंसी कम करने के निर्देश भी दिए। वह वीरवार को उपायुक्त कार्यालय में राजस्व अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त इशांत जसवाल, सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और जिले के अन्य राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे।
जतिन लाल ने अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित समयसीमा में उनका निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
विभागीय भूमि हस्तांतरण में देरी दूर करें: उपायुक्त ने विभिन्न विभागों की विकास परियोजनाओं और निर्माण कार्यों के लिए भूमि हस्तांतरण की स्थिति की उपमंडलवार समीक्षा की। उन्होंने लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय बैठकें करने के निर्देश दिए, ताकि भूमि हस्तांतरण में देरी से विकास कार्य प्रभावित न हों। पंचायतों की ओर से भूमि हस्तांतरण के लिए भेजे गए मामलों में खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) की अनुशंसाओं को शामिल करने को भी कहा।
स्वामित्व योजना के कार्य में तेजी लाएं: उपायुक्त ने स्वामित्व योजना के तहत जिले के उन सभी महालों के मानचित्र अपलोड करने का कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए, जहां यह काम लंबित है। जिले के 175 पटवार सर्कलों में कार्यरत पटवारियों को योजना के आगामी चरणों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण देने तथा उनकी शंकाओं और तकनीकी समस्याओं का समाधान करने को कहा। चूना मार्किंग और ड्रोन मैपिंग का कार्य पूरा होने के बाद अगली प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने खराब स्थिति वाले पटवार भवनों के संबंध में प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए। इसमें आवश्यक धनराशि उपलब्ध करवाने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
उपायुक्त ने आपदा के कारण पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए विशेष राहत पैकेज के तहत वितरित सहायता राशि की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने भूमिहीन परिवारों को सरकार की व्यवस्था के तहत दो और तीन बिस्वा भूमि उपलब्ध करवाने से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की। इसके अतिरिक्त एसडीएम न्यायालयों में लंबित अतिक्रमण संबंधी मामलों का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए।
5 नवंबर से चलेगा डेटा संग्रह अभियान: उपायुक्त ने जिला जनगणना पुस्तिका (डिस्ट्रिक्ट सेंसस हैंडबुक) तैयार करने के लिए डेटा संग्रह अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। यह अभियान 5 नवंबर से एक माह तक चलेगा। इसमें पटवारियों की भूमिका को देखते हुए 27 अक्तूबर को उनके लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

मियां हीरा सिंह स्टेट कोऑपरेटिव ट्रेनिंग सेंटर एवं सामुदायिक केंद्र का निर्माण जल्द होगा पूरा
पंजावर में बस अड्डे के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा
ऊना: उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हरोली विधानसभा क्षेत्र के पंजावर में निर्माणाधीन मियां हीरा सिंह स्टेट कोऑपरेटिव ट्रेनिंग सेंटर एवं सामुदायिक केंद्र में अगले वर्ष से एमबीए की कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इसके लिए गुजरात के आनंद स्थित त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के साथ सहयोग किया जाएगा। यह विश्वविद्यालय सहकारिता के क्षेत्र में प्रशिक्षित प्रबंधक, विशेषज्ञ और नेतृत्व तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।
उन्होंने बताया कि करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस भवन का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
मुकेश अग्निहोत्री बुधवार को सहकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखने वाले पंजावर गांव में आयोजित छिंज मेले में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रवासियों की मांग को ध्यान में रखते हुए पंजावर में बस अड्डे के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग बस अड्डे के लिए जिस स्थान का चयन करेंगे, वहां इसका निर्माण किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री ने छिंज मेले के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को कुश्ती के प्रति प्रोत्साहित करते हैं।
दंगल में मलेरकोटला के रज्जाक विजेता और होशियारपुर के बिल्लू उपविजेता रहे। मुकेश अग्निहोत्री ने विजेता को 41 हजार रुपये और उपविजेता को 30 हजार रुपये देकर सम्मानित किया। वहीं, ऊना केसरी का खिताब ऊना हॉस्टल के समीर ने अपने नाम किया, जबकि पंजावर के सौरभ उपविजेता रहे। इस मुकाबले में समीर को 12 हजार रुपये और सौरभ को 9 हजार रुपये देकर सम्मानित किया गया।

मण्डी: जिला दंडाधिकारी अपूर्व देवगन ने मंडी जिले में कार्यरत विभिन्न गैस एजेंसियों के अंतर्गत आने वाले नए फोकल पॉइंट्स के लिए 14.2 किलोग्राम, 10 किलोग्राम और 5 किलोग्राम भार के घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों की डिलीवरी दरें (अतिरिक्त कुली/ट्रांसपोर्टेशन शुल्क) निर्धारित की हैं।
इसके दृष्टिगत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा रूट चार्ट एवं नए फोकल प्वाइंट्स के संबंध में जारी अधिसूचना के अनुसार मैसर्स टारना गैस सर्विस, मंडी के लिए टिक्कर कलां क्षेत्र, मैसर्स शहीद यशवंत इंडेन गैस सर्विस, नेरचौक के लिए सकरवाहण, लोअर ततियार और अप्पर ततियार, मैसर्स शहीद खेम चंद गैस सर्विस, कोटली के लिए बरनोटा तथा परोल, खिली, नलोह व कड़कोह, एचपीएससीएससी इंडेन डिस्ट्रीब्यूटर, जोगिंदर नगर के लिए करमानी बस्ती, बनौण से बाबा कुटिया, कुराती धागों से घारथोली, लांघा, भटवाड़, एचपीएससीएससी इंडेन डिस्ट्रीब्यूटर, सरकाघाट के लिए साईन जारलू, रडू सदोआ, जंधरुं कलां, नलशा, गरोह और बांधल ब्राह्मण, एचपीएससीएससी इंडेन, करसोग के लिए करसोग के विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों जैसे नाली, बेलूधार, पथरावी, महोग नाला, शकेलाड आदि तथा एचपीएससीएससी इंडेन डिस्ट्रीब्यूटर, पधर के लिए भुभू से चमाह, गधीबगला लल्लू, भतेहड़, और भदवाहन आदि और मांडव इंडेन गैस सर्विस के लिए सेगली से भुराता, डुमास और रकनी निर्धारित किए गए हैं।
प्रशासन ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि जहां तक सड़क मार्ग ठीक है, जिसे नए फोकल प्वांईट में जोड़ा जा सकता है, वहां तक का सड़क के फिटनेस एवं दूरी प्रमाण पत्र प्रस्ताव सहित जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले या सम्बन्धित निरीक्षक कार्यालय को प्रेषित करें।
12 नवंबर तक जमा होंगे आवेदन, 17 नवंबर को होगी स्क्रीनिंग
मण्डी: बाल विकास परियोजना सुंदरनगर के अंतर्गत ग्राम पंचायत सोझा के आंगनवाड़ी केंद्र सलाह में आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पद को भरने के लिए पात्र महिला उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह जानकारी सीडीपीओ सुंदरनगर पूनम चौहान ने दी।
उन्होंने बताया कि बाल विकास परियोजना सुंदरनगर के अंतर्गत आने वाले आंगनवाड़ी केंद्र सलाह में सहायिका का एक पद भरा जाना है। इच्छुक पात्र महिला उम्मीदवार अपने आवेदन सादे कागज पर पूर्ण विवरण के साथ 12 नवंबर 2026 को शाम पांच बजे तक बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय में जमा करवा सकती हैं। आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग 17 नवंबर 2026 को की जाएगी।
