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मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना में बदलाव....

“मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजद़ूर जीवन सुरक्षा योजना’’ का लाभ उठाएं किसान

रीना ठाकुर/शिमला: किसानों के कल्याण के लिए इस वर्ष भी “मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना” जारी रहेगी। इस योजना की जानकारी देते हुए कृषि निदेशक डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा ने बताया कि कृषि मशीनरी के प्रयोग के दौरान किसानों तथा खेतीहर मजदूरों के घायल होने अथवा उनकी मृत्यु होने की सूरत में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने यह योजना आरम्भ की है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना के अंतगर्त इस वर्ष से मृत्यु होने पर मुआवजे के रूप में सहायता राशि 1.5 लाख से बढ़ाकर 3.0 लाख रूपए तथा स्थाई रूप से अपंग होने पर सहायता राशि 50,000 से बढ़ाकर 1.0 लाख रूपए कर दी गई है। इसके अतिरिक्त आशिंक स्थाई रूप से अपंग होने पर प्रभावित को 10,000 से 40,000 रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस योजना में उन किसानों तथा खेतीहर मजदूरों को मुआवज़ा मिलेगा जिनकी आयु 14 वर्ष से अधिक हो और जो कृषि मशीनरी  औजार व् उपकरण आदि खेत में प्रयोग के दौरान  अथवा कृषि मशीनरी को खेत से घर और घर से खेत ले जाते हुए किसी दुर्घटना की वजह से घायल हुए हों या मृत्यु हुई हो। जबकि इसमें उन किसानों तथा खेतीहर मजदूरों को भी शामिल किया जायेगा, जिनकी मृत्यु अथवा विकलांगता नलकूप, बोरवेल, पम्पिंग सेट लघु लिफ्ट इत्यादि को स्थापित या संचालित करते समय हुई हो। किसी भी उर्जा संचालित मशीनरी को उपयोगए स्थापित या ढुलाई करते समय लगने वाले बिजली के करंट से  होने वाली किसानों तथा खेतीहर मजदूरों की मृत्यु अथवा विकलांगता को भी इस योजना में शामिल किया जायेगा। इसके अंतर्गत आने वाली कृषि मशीनरी में विभाग में पंजीकृत ट्रैक्टर, पावर टिलर, वीडर, उर्जा चलित हल, रीपर व बाईडर मशीन, पावर थ्रैशर, घास काटने की मशीन, औजार, उपकरण, नलकूप, बोरवेल, पम्पिंग सेट लघु लिफ्ट इत्यादि स्थापित या संचालित करने के लिए उपयोग किये गए उपकरण हैं। इस योजना में केवल स्थानीय किसान तथा खेतीहर मजदूर ही आते हैं और किसी भी कंपनी या ठेकेदार के एक कार्यकर्ता व कर्मचारी को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि इस योजना को कृषि विभाग द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। मृतक के कानूनी वारिस या दुर्घटनाग्रस्त किसान को इस तिथि से 2 महीने के भीतर संबंधित ब्लॉक के विषय विशेषज्ञ को दावे के लिए आवेदन जमा करवाना होगा। हालांकि वास्तविक कारणों के आधार पर 6 महीने तक कृषि निदेशक को और 1 साल तक सचिव कृषि को देरी से आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है। दावे की राशि सभी तरह से पूर्ण आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर वितरित कर दी जायेगी। डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा ने बताया की इस योजना के अंतर्गत अब तक 68 किसानों को 23.30 लाख रुपये मुआवजे के रूप में दिए गए हैं। उन्होंने किसानों से आग्रह किया की वह सुरक्षित होकर खेत में काम करें।

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