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ऊना ‘हर घर नल से जल’ में अग्रणी; जिले ने हासिल किया 100 फीसदी कार्यात्मक नल कनेक्शन लक्ष्य

जिले ने हासिल किया 100 फीसदी कार्यात्मक नल कनेक्शन लक्ष्य, उपायुक्त ने गुणवत्ता और स्रोत संरक्षण पर दिया जोर

ऊना: ऊना जिला ने ग्रामीण पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए सभी ग्रामीण परिवारों को शत-प्रतिशत कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध करवा दिए हैं। जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त जतिन लाल ने इसकी पुष्टि की।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने कहा कि शत-प्रतिशत कार्यात्मक नल कनेक्शन की उपलब्धि जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने कहा कि शत-प्रतिशत कार्यात्मक नल कनेक्शन का लक्ष्य प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप जिला प्रशासन, जल शक्ति विभाग और ग्रामीण समुदाय के सामूहिक प्रयासों से हासिल किया गया है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस उपलब्धि को निरंतर बनाए रखते हुए जल आपूर्ति की गुणवत्ता, नियमितता तथा दीर्घकालीन जल स्रोत संरक्षण को समान प्राथमिकता दी जाए।

उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक परिवार तक प्रतिदिन स्वच्छ, पर्याप्त और निर्बाध पेयजल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए जमीनी निरीक्षण व्यवस्था, तकनीकी मॉनिटरिंग तथा जवाबदेही तंत्र को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर लंबित प्रविष्टियों को समयबद्ध पूर्ण करने तथा नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश भी दिए।

सदस्य सचिव एवं अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग शशि कांत ने बैठक में बताया कि जिले के सभी ग्रामीण परिवारों तक कार्यात्मक नल कनेक्शन पहुंच चुके हैं। उन्होंने योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, संस्थागत कवरेज तथा जल गुणवत्ता निगरानी प्रणाली की विस्तृत जानकारी भी प्रस्तुत की।

ऊना: एलआईसी में बीमा सलाहकार के भरे जाएंगे 50 पद, साक्षात्कार 17 को हरोली में

ऊना: एलआईसी शाखा कार्यालय ऊना द्वारा बीमा सलाहकार के 50 (अस्थायी) पद भरे जाएंगे। इन पदों के लिए साक्षात्कार 17 फरवरी को सुबह 10.30 बजे उप रोजगार कार्यालय हरोली में लिया जाएगा।

जिला रोजगार अधिकारी ऊना अक्षय शर्मा ने बताया कि बीमा सलाहकार पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता 10वीं उत्तीर्ण व अनुत्तीर्ण और न्यूनतम आयु 18 वर्ष रखी गई है। इसके अलावा पहले तीन वर्षो के लिए 7 हज़ार प्रतिमाह(महिला) और 5 हज़ार प्रतिमाह(पुरुष) सहित इंसेंटिव दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि योग्य व इच्छुक अभ्यर्थी अपने योग्यता प्रमाण पत्र, जन्म तिथि, रोजगार कार्यालय पंजीकरण कार्ड, आधार कार्ड, दो पासपोर्ट आकार की फोटो, मूल प्रमाण पत्र एवं बायोडाटा की कॉपी सहित साक्षात्कार में भाग ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए 01975-226192, 79860-17859 पर सम्पर्क किया जा सकता है। इसके अलावा साक्षात्कार में आने जाने का यात्रा भत्ता देय नहीं होगा।

देश हित सर्वोपरि, केंद्र को बदनाम कर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कांग्रेस सरकार” – बिंदल

शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने के बाद उत्पन्न वित्तीय स्थिति पर चर्चा के लिए होटल पीटरहॉफ, शिमला में आयोजित सर्वदलीय बैठक में भारतीय जनता पार्टी ने भाग लिया। भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, विधायक रणधीर शर्मा, विनोद कुमार, बलबीर वर्मा, त्रिलोक जम्वाल तथा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा उपस्थित रहे। बैठक में भाजपा ने प्रदेश के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए अपना तथ्यात्मक और विस्तृत पक्ष रखा।

बैठक में बोलते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का विकास सभी दलों की साझा जिम्मेदारी है और भाजपा ने सत्ता में रहते हुए तथा विपक्ष में रहते हुए हमेशा प्रदेश हित को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए लगभग 40 महीने हो चुके हैं और पूर्ण बहुमत होने के बावजूद अपनी वित्तीय विफलताओं का ठीकरा केंद्र सरकार और भाजपा पर फोड़ना एक योजनाबद्ध राजनीतिक प्रयास है।

डॉ. बिंदल ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होना कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि पूर्व वित्त आयोगों — 14वें और 15वें वित्त आयोग — की सिफारिशों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित था कि यह अनुदान चरणबद्ध रूप से कम होगा और निर्धारित अवधि के बाद समाप्त होगा। ऐसे में इसे नई आपदा के रूप में प्रस्तुत कर जनता को भ्रमित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब यह तथ्य वर्षों से ज्ञात था, तो प्रदेश सरकार को समय रहते वैकल्पिक संसाधन सृजन, व्यय नियंत्रण और राजस्व वृद्धि की नीति पर काम करना चाहिए था।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बैठक में केंद्र से प्राप्त वित्तीय सहायता के विस्तृत आंकड़े रखते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न मदों में हिमाचल प्रदेश को बड़ी मात्रा में धनराशि उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022–23 में लगभग ₹50,000 करोड़, वर्ष 2023–24 में लगभग ₹43,000 करोड़ तथा वर्ष 2024–25/2025–26 में लगभग ₹35,000 करोड़ से अधिक राशि अलग-अलग केंद्रीय योजनाओं, टैक्स डिवोल्यूशन, केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं (CSS), विश्व बैंक, नाबार्ड, पीएमजीएसवाई और अन्य अवसंरचना मदों के माध्यम से प्रदेश को प्राप्त हुई।

उन्होंने कहा कि केवल नेशनल हाईवे क्षेत्र में ही हिमाचल प्रदेश में लगभग ₹44,000 करोड़ से अधिक लागत की परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है, जो पूर्व कांग्रेस काल की तुलना में कई गुना अधिक है। रेलवे विस्तार के लिए जहां पहले बहुत सीमित राशि मिलती थी, वहीं अब हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट स्वीकृत और क्रियान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरंगों, फोरलेन, पुलों और ऑल-वेदर कनेक्टिविटी परियोजनाओं ने हिमाचल के इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य को बदला है।

डॉ. बिंदल ने औद्योगिक विकास के मुद्दे पर भी कांग्रेस नेताओं के बयानों का खंडन करते हुए कहा कि हिमाचल में उद्योगों की मजबूत आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा दिए गए औद्योगिक पैकेज से रखी गई थी। बाद में उस पैकेज को समाप्त करने और पुनर्स्थापित करने का इतिहास भी सार्वजनिक है। उन्होंने कहा कि आज बल्क ड्रग पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट केंद्र सरकार द्वारा दिए गए हैं, जिनकी निरंतर आलोचना करना प्रदेश के औद्योगिक भविष्य के साथ अन्याय है।

उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स डिवोल्यूशन में निरंतर वृद्धि हो रही है और आने वाले वर्षों में भी इसमें और बढ़ोतरी का प्रावधान है। जीएसटी कलेक्शन और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के माध्यम से राज्यों को अधिक संसाधन मिल रहे हैं। इसे नजरअंदाज कर केंद्र पर भेदभाव का आरोप लगाना तथ्यों के विपरीत है।

बैठक के दौरान भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आपत्ति दर्ज कराई कि कुछ वक्ताओं द्वारा केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के संदर्भ में अनुचित और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। भाजपा ने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा और संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है। इसी विषय पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने बैठक बीच में ही छोड़ दी।

भाजपा ने कहा कि वह प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए हर रचनात्मक चर्चा में भाग लेने को तैयार है, परंतु एकतरफा दोषारोपण, भ्रामक प्रस्तुति और राजनीतिक नैरेटिव गढ़कर वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाना समाधान नहीं है। पार्टी ने दोहराया कि प्रदेश हित से जुड़े हर विषय पर भाजपा मजबूती से अपनी बात रखती रहेगी और जनहित के मुद्दों को उठाती रहेगी।

भाजपा का हमेशा ही दोहरा चरित्र रहा है – विनय कुमार

शिमला:  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश का  राजस्व घाटा अनुदान बंद पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा आज बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से भाजपा के वाकआउट की आलोचना करते हुए कहा है कि ऐसा लगता है कि उन्हें प्रदेश की कोई चिंता नहीं है। उन्हें केवल अपनी राजनीति की ज्यादा चिंता रहती है। 

विनय कुमार ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा है कि अगर भाजपा को प्रदेश के भविष्य और उसके अधिकारों की तनिक भी चिंता होती तो आज की  इस बैठक में  वह अपने बहुमूल्य सुझाव देते। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा बुलाई गई इस बैठक में भाजपा का नकारात्मक रवैया बहुत ही चिंताजनक व निंदनीय है।

विनय कुमार ने कहा है कि भाजपा का हमेशा ही दोहरा चरित्र रहा है। घड़याली आंसू बहाना इसकी आदत है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने न तो  पिछले साल आई   प्राकृतिक आपदा के समय ही प्रदेश की कोई चिंता की थी और न ही अब  राजस्व घाटा अनुदान बंद होने पर उंसे कोई चिंता है। ऐसा लगता है कि भाजपा प्रदेश के लोगों से उन्हें सत्ता से बाहर करने का प्रतिशोध कर रही है,जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

“हिमाचल में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार पर केंद्र सरकार का स्पष्ट रोडमैप – सुरेश कश्यप”

“केंद्र प्रायोजित योजना के तहत चंबा, हमीरपुर और नाहन मेडिकल कॉलेज कार्यशील, सिरमौर परियोजना विवाद के कारण प्रभावित”

शिमला:  भाजपा सांसद सुरेश कुमार कश्यप द्वारा लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की स्थिति और विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। सांसद कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार देशभर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से मेडिकल कॉलेजों का नेटवर्क बढ़ा रही है, जिसका लाभ हिमाचल प्रदेश को भी मिल रहा है।

मंत्रालय द्वारा दिए गए उत्तर के अनुसार, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में देशभर में एम्स और आईएनआई सहित कुल 818 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए केंद्र सरकार जिला/रेफरल अस्पतालों से संबद्ध मेडिकल कॉलेज खोलने की केंद्र प्रायोजित योजना चला रही है, जिसमें वंचित और आकांक्षी जिलों को प्राथमिकता दी जाती है।

योजना के तहत केंद्र और राज्य के बीच फंडिंग का अनुपात विशेष श्रेणी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 तथा अन्य राज्यों के लिए 60:40 निर्धारित है। इसी योजना के अंतर्गत देशभर में स्वीकृत 157 मेडिकल कॉलेजों में हिमाचल प्रदेश के चंबा, हमीरपुर और नाहन स्थित मेडिकल कॉलेज शामिल हैं, जो वर्तमान में कार्यशील हैं।

मंत्रालय ने अपने उत्तर में यह भी स्पष्ट किया है कि योजना के तहत स्वीकृत मेडिकल कॉलेजों के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सिरमौर मेडिकल कॉलेज परियोजना ठेकेदार और कार्यान्वयन एजेंसी के बीच विवाद के कारण प्रभावित हुई है।

सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि वे हिमाचल प्रदेश में सभी स्वीकृत मेडिकल कॉलेजों के शीघ्र और पूर्ण संचालन के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे, ताकि प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

कोरोना काल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की सराहना : अनुराग ठाकुर

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 पर संयुक्त संसदीय समिति में हुई अनुराग ठाकुर की नियुक्ति 

हिमाचल : पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा सांसद  अनुराग सिंह ठाकुर को विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का सदस्य नियुक्त किया गया है। यह समिति उच्च शिक्षा में एक नया ढांचा लाने वाले प्रस्तावित विधेयक पर गहन विचार-विमर्श के लिए गठित की गई है, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को समाप्त करके विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) निर्माण के लक्ष्य पर कार्य करेगी। 

समिति की अध्यक्षता डॉ. डी. पुरंदेश्वरी कर रही हैं, जो एक प्रतिष्ठित पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में आंध्र प्रदेश के राजमुंद्री से लोकसभा सांसद हैं। लोकसभा और राज्यसभा से कुल 31 सदस्यों वाली यह समिति विधेयक के प्रावधानों की जांच करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे भारत की शैक्षिक सुधार और विकास की दृष्टि के अनुरूप हों।

अनुराग सिंह ठाकुर मौजूदा समय में स्टील, कोल व ख़ान की संसदीय समिति के चेयरमैन व संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इसके साथ ही श्री अनुराग सिंह ठाकुर 130वें संविधान संशोधन विधेयक 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन बिल 2025 और संघ शासित प्रदेशों की सरकार संशोधन विधेयक 2025 की जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

जयराम ठाकुर – रोज बैठकें बुला रहे मुख्यमंत्री, लेकिन उन्हें खुद नहीं पता कि करना क्या है?

शिमला: हिमाचल सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में केंद्र सरकार के ऊपर लगाए जा रहे अनर्गल  आरोपों और सुक्खू सरकार के राजनैतिक रवैए के चलते भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने बैठक का बहिष्कार किया और बीच बैठक से बाहर चले आए। नेता प्रतिपक्ष ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह सरकार सिर्फ ओछी राजनीति कर रही है। सर्वदलीय बैठक में प्रेजेंटेशन के दौरान गुमराह किया जाने वाले झूठे आंकड़े दिए जा रहे हैं, जो सिर्फ राजनीति से प्रेरित है। मुख्यमंत्री आए दिन बैठक पर बैठक बुला रहे हैं लेकिन वह खुद कंफ्यूज हैं कि उन्हें करना क्या है। 12 वें वित्त आयोग के समय से ही राजस्व घाटा अनुदान बंद करने की पैरवी आयोग द्वारा किसी न किसी तरह की जाती रही है। 13वें वित्त आयोग के समय हिमाचल प्रदेश को मात्र 7800 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा अनुदान दिया गया। 14 वें वित्त आयोग में हिमाचल प्रदेश को 40000 करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व घाटा अनुदान मिला जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में दिया गया तब हिमाचल मैं कांग्रेस की सरकार थी। 15वें वित्त आयोग ने भी राजस्व घाटा अनुदान खत्म करने की पुरजोर वकालत की। कोविड जैसी महामारी के बीच राजस्व घाटा अनुदान मिला लेकिन उसे “टेपर्ड डाउन” किया गया। 
जयराम ठाकुर ने कहा कि हमने वित्त आयोग के समक्ष अपना पक्ष मजबूती के साथ तर्क पूर्ण ढंग से रखा। 16वें वित्त आयोग के समक्ष हिमाचल प्रदेश की सरकार ने अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की बजाय केंद्र सरकार को कोसने का ही काम किया। मुख्यमंत्री राजनीति से कभी बाहर ही नहीं आना चाहते। बैठक बुलाकर भी सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। एक तरफ उनके अधिकारी कहते हैं कि प्रदेश की स्थिति ऐसी है तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कहते हैं कि कोई समस्या नहीं है। आखिर इतनी कन्फ्यूजन की स्थिति क्यों है? केंद्र सरकार द्वारा लगातार हिमाचल प्रदेश को भरपूर सहयोग किया जा रहा है। नरेंद्र मोदी के  केंद्र में आने के बाद से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले अनुदान और राज्य टैक्स हिस्सेदारी में स्वर्गीय मनमोहन सिंह की सरकार के तुलना में कई गुना ज्यादा धनराशि मिली है। हिमाचल प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने पर केंद्र प्रायोजित योजनाओं में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी मात्र 10% की रह गई है। वाह्य सहायता प्राप्त योजनाएं (ईएपी) में वित्तीय संस्थाओं द्वारा हिमाचल प्रदेश को दिए गए ऋण का मात्र  दस प्रतिशत राज्य सरकार देती है। बाकी 90 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार ही वहन करती है। मुख्यमंत्री केंद्र सरकार द्वारा हर साल हिमाचल को दिए जा रहे हैं आर्थिक और योजनाओं के सहयोग के बारे में प्रदेश को क्यों नहीं बताते। जिस समय मुख्यमंत्री और उनका पूरा मंत्रिमंडल केंद्र सरकार को सहयोग न  करने के लिए कोस रहा है उसे समय भी वर्ल्ड बैंक द्वारा हिमाचल प्रदेश को 1992 करोड़ रुपए का ऋण  ईएपी के तौर पर दिया गया। जिसमें से 1792 करोड़ रुपए केंद्र सरकार द्वारा चुकाए जाएंगे। 
उन्होंने कहा कि इस बार की बजट में केंद्र सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित स्कीम के बजट में 17% की वृद्धि की गई है। जो लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए है। इसका सीधा फायदा हिमाचल प्रदेश को मिलेगा। सड़क परिवहन,शिक्षा, स्वास्थ्य, जल शक्ति, अर्बन लोकल बॉडीज के बजट में ऐतिहासिक वृद्धि का भी लाभ सीधे तौर पर हिमाचल प्रदेश को मिलेगा। हिमाचल प्रदेश के टैक्स डेवोल्यूशन में भी लगभग 9 प्रतिशत की  बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह से अगले वित्तीय वर्ष में ही लगभग 2300 करोड़ करोड़ अधिक मिलेंगे। 
केंद्र हिमाचल प्रदेश को रेलवे से लेकर सड़क परिवहन, जल शक्ति मिशन, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी अनेकों जनहित योजनाओं के तहत भरपूर सहयोग कर रही है। हिमाचल सरकार ज्यादातर जगहों पर राज्य सरकार की हिस्सेदारी भी नहीं दे रही है जिसकी वजह से परियोजनाएं लटक रही है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार दिशाहीन  हो गई है और दूरदर्शिता से कोसों दूर है। यह सरकार सिर्फ अपनी नाकामी का ठीकरा केंद्र सरकार और पूर्व की सरकारों पर फोड़ना चाहतीहै। जोकि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। पंचायत चुनाव पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्थानीय  निकाय चुनाव 31 मई तक करवाने के निर्देश दिए हैं जिसका हम स्वागत करते हैं।

CM सुक्खू बोले- दुविधा में भाजपा, राजस्व घाटा अनुदान पर रुख स्पष्ट नहीं कर पाए

मुख्यमंत्री ने की सर्वदलीय बैठक बीच में छोड़कर जाने के लिए भाजपा की निंदा

शिमला:  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों में राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने के प्रदेश पर संभावित प्रभाव पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान को वापस लेने का प्रस्ताव राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इससे राज्य की आर्थिकी पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने बैठक को बीच में छोड़कर जाने के लिए भाजपा की आलोचना की और इस कदम को बेहद निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्देे को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और राज्य के लोगों के हितों की रक्षा करने के बजाय सिर्फ राजनीति कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि न केवल कांग्रेस, बल्कि सीपीआई (एम), आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी राजस्व घाटा अनुदान को फिर से बहाल करने के लिए प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जाहिर की है।
उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश के अधिकारों के लिए खड़ी होने को तैयार नहीं है। भाजपा नेता जनता के दबाव में बैठक में शामिल हुए और फिर बीच में ही छोड़कर चले गए।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को अपने कार्यकाल के दौरान राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर 54,000 करोड़ रुपये और जीएसटी मुआवजे के तौर पर 16,000 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि मौजूदा राज्य सरकार को अब तक राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर सिर्फ 17,000 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि पूरी सावधानी और वित्तीय प्रबंधन के साथ प्रदेश सरकार राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 275 (1) के अंतर्गत राजस्व घाटा अनुदान राज्यों का एक सांविधानिक अधिकार है, जिसका उद्देश्य राजस्व और व्यय के बीच के अंतर को कम करना है। यह व्यवस्था 1952 से चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारों के लिए लड़ना अच्छी तरह से जानती है लेकिन भाजपा का रुख प्रदेश हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेशवासियों के हितों की रक्षा का मामला है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता दुविधा में हैं और राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर लोगों के सामने अपना रुख साफ तौर पर रखने में नाकाम रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा नेताओं को एहसास है कि केन्द्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान वापस लेना सही कदम नहीं है, लेकिन उनमें रुख स्पष्ट करने की हिम्मत नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कभी भी राज्य के लोगों के साथ खड़ी नहीं रही। 2023 की आपदा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया लेकिन भाजपा सदस्यों ने सबसे पहले सदन से वॉकआउट कर लिया। प्रदेश की जनता भाजपा के हिमाचल विरोधी रवैये को देख रही है और उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन लोगों के अधिकारों की रक्षा सबसे जरूरी है।
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने भी सर्वदलीय बैठक बीच में ही छोड़कर जाने के लिए भाजपा की आलोचना की।
बैठक के दौरान सीपीआई (एम), आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को बिना शर्त समर्थन दिया।
पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सभी दलों को राज्य के लोगों को पेश आ रही दिक्कतों को समझना चाहिए। उन्होंने प्रदेशवासियों के हितों की रक्षा के लिए आम सहमति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि डॉ. राजेश चानना ने केंद्र से वित्तीय सहायता का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य के पास अपने सीमित संसाधन हैं। उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान को फिर से बहाल करने की मांग का समर्थन करते हुए पार्टी प्रस्ताव भी पेश किया। बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधि ने कहा कि राज्य को अपने हकों के लिए मिलकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 संकट का सामना करने के बाद, राज्य ने बीते तीन वर्षोंं में दो बड़ी आपदाओं का भी सामना किया है, जिससे उसके संसाधनों पर और दबाव पड़ा है।

हमीरपुर : जानिए कौन- कौन सी सड़कें रहेंगी बंद..कब तक

15 मार्च तक बंद रहेगी बाड़ा तजियार-सकरोह सड़क

हमीरपुर : बड़सर उपमंडल के अंतर्गत बाड़ा तजियार-सकरोह सड़क की मरम्मत एवं अपग्रेडेशन के कार्य के चलते इस सड़क पर यातायात 15 मार्च तक बंद कर दिया गया है।

इस संबंध में आदेश जारी करते हुए जिलाधीश गंधर्वा राठौड़ ने बताया कि बाड़ा तजियार-सकरोह सड़क की मरम्मत एवं अपग्रेडेशन के कार्य को सुचारू रूप से जारी रखने तथा इसे अतिशीघ्र पूरा करने के लिए इस सड़क पर वाहनों की आवाजाही 15 मार्च तक बंद की गई है। इस दौरान क्षेत्र के वाहन चालक बाड़ा-समैला-बारह महीने दा परौण सड़क से आवाजाही कर सकते हैं। जिलाधीश ने सभी वाहन चालकों से सहयोग की अपील की है।

20 मार्च तक बंद रहेगी पनयाली-कश्मीर सड़क

हमीरपुर : नादौन उपमंडल के अंतर्गत पनयाली-कश्मीर सड़क की मरम्मत एवं अपग्रेडेशन के कार्य के चलते इस सड़क पर यातायात 20 मार्च तक बंद कर दिया गया है।

इस संबंध में आदेश जारी करते हुए जिलाधीश गंधर्वा राठौड़ ने बताया कि पनयाली-कश्मीर सड़क की मरम्मत एवं अपग्रेडेशन के कार्य को सुचारू रूप से जारी रखने तथा इसे अतिशीघ्र पूरा करने के लिए इस सड़क पर वाहनों की आवाजाही 20 मार्च तक बंद की गई है। इस दौरान क्षेत्र के वाहन चालक पनयाली-समजल सड़क से आवाजाही कर सकते हैं। जिलाधीश ने सभी वाहन चालकों से सहयोग की अपील की है।

11 मार्च तक बंद रहेगी छियोड़ीं-हरसों लगवाण सड़क

हमीरपुर : हमीरपुर उपमंडल के अंतर्गत छियोड़ीं-हरसों लगवाण सड़क की मरम्मत एवं अपग्रेडेशन के कार्य के चलते इस सड़क पर यातायात 11 मार्च तक बंद कर दिया गया है।

इस संबंध में आदेश जारी करते हुए जिलाधीश गंधर्वा राठौड़ ने बताया कि छियोड़ीं-हरसों लगवाण सड़क की मरम्मत एवं अपग्रेडेशन के कार्य को सुचारू रूप से जारी रखने तथा इसे अतिशीघ्र पूरा करने के लिए इस सड़क पर वाहनों की आवाजाही 11 मार्च तक बंद की गई है। इस दौरान क्षेत्र के वाहन चालक बड़ू-टपरे सड़क या ककड़ियार-तरोपका सड़क या गुधवीं सड़क को वैकल्पिक रूट के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। जिलाधीश ने सभी वाहन चालकों से सहयोग की अपील की है।

8 मार्च तक बंद रहेगी कलूर, कोहला-नादौन, टिल्लू, बिलकेश्वर महादेव सड़क

हमीरपुर: नादौन उपमंडल के अंतर्गत कलूर, कोहला-नादौन, टिल्लू, बिलकेश्वर महादेव सड़क की मरम्मत एवं अपग्रेडेशन के कार्य के चलते इस सड़क पर यातायात 8 मार्च तक बंद कर दिया गया है।

इस संबंध में आदेश जारी करते हुए जिलाधीश गंधर्वा राठौड़ ने बताया कि कलूर, कोहला-नादौन, टिल्लू, बिलकेश्वर महादेव सड़क की मरम्मत एवं अपग्रेडेशन के कार्य को सुचारू रूप से जारी रखने तथा इसे अतिशीघ्र पूरा करने के लिए इस सड़क पर वाहनों की आवाजाही 8 मार्च तक बंद की गई है। इस दौरान क्षेत्र के वाहन चालक अमतर-बेला सड़क से आवाजाही कर सकते हैं। जिलाधीश ने सभी वाहन चालकों से सहयोग की अपील की है।

श्री महामाया बाला सुंदरी चैत्र नवरात्र मेला 19 मार्च से 2 अप्रैल तक होगा आयोजित- प्रियंका वर्मा

नाहन:  उतर भारत का प्रसिद्ध श्री महामाया बाला सुंदरी आश्विन नवरात्र मेला त्रिलोकपुर में आगामी 19 मार्च से आरम्भ होकर 02 अप्रैल, 2026 तक चलेगा। मेले के आयोजन से जुड़े विभिन्न प्रबंधों की समीक्षा को लेकर बैठक का आयोजन उपायुक्त सिरमौर एवं आयुक्त मंदिर न्यास त्रिलोकपुर प्रियंका वर्मा की अध्यक्षता में हुआ।

उपायुक्त ने कहा कि चैत्र नवरात्र मेले के दौरान यात्रियों को हर सम्भव सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए मंदिर न्यास प्रयासरत है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह कालाअंब से त्रिलोकपुर मुख्य मार्ग तथा त्रिलोकपुर के लिए अन्य सम्पर्क मार्गो की समय रहते मरम्मत करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने मंदिर न्यास तथा सरकारी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह बैठक में लिए गए निर्णयों का पालन करना सुनिश्चित करें ताकि मेला सफलतापूर्वक आयोजित किया जा सके।

मेले के आयोजन हेतु एस.डी.एम नाहन को मुख्य मेला अधिकारी, तहसीलदार नाहन मेला अधिकारी तथा डी.एस.पी नाहन कानून सुरक्षा व्यवस्था हेतु मेला पुलिस अधिकारी होंगे। उन्होंने कहा कि मेले के प्रभावी प्रबंधन को लेकर मेला क्षेत्र को चार सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा और प्रत्येक सेक्टर में ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी नियुक्त रहेंगे।

उन्होंने बताया कि मेले के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिगत सी.सी. टीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे। मेले के दौरान कानून एवं व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए पर्याप्त मात्रा में पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसके अतिरिक्त व्यवस्था बनाए रखने के लिए गृह रक्षा व निजी सुरक्षा एजेंसियों के सुरक्षा कर्मचारियों को अस्थाई आधार पर तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मेले के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को इस तरीके से बनाया जाएगा जिससे त्रिलोकपुर के स्थानीय निवासियों को भी असुविधा का सामना ना करना पड़े। बैठक में निर्णय लिया गया कि 01 अप्रैल (चौदस) को कुश्ती का आयोजन किया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पॉलिथीन का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा।

बैठक में मेले के दौरान साफ-सफाई को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त काला अंब से त्रिलोकपुर तक यातायात नियंत्रण, वैकल्पिक मार्ग व्यवस्था, सूचना केंद्र की स्थापना, आपातकालीन सेवाएं, स्वास्थ्य व्यवस्था, ,खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, मेला क्षेत्र की साज-सज्जा व विद्युतीकरण, परिवहन सुविधा व वाहन पार्किंग और आपदा प्रबंधन को लेकर भी विचार विमर्श किया गया।

उन्होंने कहा कि मेला के दौरान केवल चयनित भंडारा स्थानों पर ही भंडारे का आयोजन होगा।

उपमंडलाधिकारी नाहन एवं संयुक्त आयुक्त मंदिर न्यास त्रिलोकपुर राजीव सांख्यान ने मदों को क्रमवार प्रस्तुत किया।

बैठक में तहसीलदार नाहन एवं मंदिर अधिकारी त्रिलोकपुर उपेंद्र कुमार, मंदिर न्यास के सरकारी व गैर सरकारी सदस्य और विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।