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हिमाचल: प्रदेश सरकार ने एंट्री टैक्स (प्रवेश शुल्क) में की बढ़ोतरी..

हिमाचल: प्रदेश सरकार ने एंट्री टैक्स (प्रवेश शुल्क) में बढ़ोतरी की है, जो कुछ श्रेणियों में लगभग दोगुनी हो गई है। । प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बैरियर नीति को अधिसूचित कर दिया है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। इसमें कई श्रेणियों में शुल्क को करीब ढाई गुना तक बढ़ाया गया है। माना जा रहा है कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद राज्य सरकार ने आय बढ़ाने के लिए टैक्स का सहारा लिया है। इस फैसले का सीधा असर चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से हिमाचल आने वाले सैलानियों और परिवहन कारोबार पर पड़ेगा।

एचपी टोल्स एक्ट, 1975 के तहत जारी नई दरों के मुताबिक कार, जीप, वैन या हल्के मालवाहक वाहन (7500 किलोग्राम जीवीडब्ल्यू तक) पर अब 170 रुपये प्रतिदिन टोल देना होगा। वहीं 12+1 सीट तक के यात्री वाहन के लिए 130 रुपये प्रतिदिन शुल्क तय किया गया है, हालांकि हिमाचल में निजी तौर पर पंजीकृत वाहनों पर यह लागू नहीं होगा। तिमाही और वार्षिक पास के लिए भी निर्धारित गुणांक के अनुसार राशि देनी होगी।

लाइट कमर्शियल व्हीकल, लाइट गुड्स व्हीकल या मिनी बस श्रेणी में 7500 से अधिक और 12000 किलोग्राम से कम जीवीडब्ल्यू वाले मालवाहक वाहन पर 320 रुपये प्रतिदिन टोल लगेगा। इसी श्रेणी में 12+1 से अधिक और 32+1 तक क्षमता वाले यात्री वाहन के लिए 200 रुपये प्रतिदिन शुल्क तय किया गया है।

दो धुरी तक के बस या ट्रक (12000 से अधिक लेकिन 20000 किलोग्राम से कम जीवीडब्ल्यू) के लिए मालवाहक पर 570 रुपये और बड़े यात्री बसों पर 250 रुपये प्रतिदिन टोल देना होगा। तीन धुरी वाले वाणिज्यिक वाहनों (25000 किलोग्राम तक जीवीडब्ल्यू) के लिए 600 रुपये प्रतिदिन शुल्क तय किया गया है।

भारी निर्माण मशीनरी, अर्थ मूविंग इक्विपमेंट या चार से छह धुरी वाले मल्टी एक्सल वाहनों (25000 से 60000 किलोग्राम जीवीडब्ल्यू) पर 800 रुपये प्रतिदिन टोल लगेगा, जबकि सात या उससे अधिक धुरी वाले ओवरसाइज्ड वाहनों (60000 किलोग्राम से अधिक जीवीडब्ल्यू) के लिए यह दर 900 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है।

सार्वजनिक या निजी कैरियर परमिट के साथ चलने वाले ट्रैक्टरों पर 100 रुपये प्रतिदिन, 500 रुपये तिमाही और 1000 रुपये वार्षिक शुल्क तय किया गया है। मोटर रिक्शा और स्कूटर रिक्शा पर 30 रुपये प्रतिदिन टोल रखा गया है, हालांकि यह हिमाचल में पंजीकृत वाहनों पर लागू नहीं होगा। बैरियर के आसपास रहने वाले निजी वाहन मालिकों के लिए विशेष श्रेणी में 100 रुपये प्रतिदिन, 300 रुपये तिमाही और 1000 रुपये वार्षिक शुल्क तय किया गया है।

धूप “विटामिन डी” के लिए बहुत उपयोगी

हिमाचल: प्रदेश में 22 फरवरी तक मौसम साफ..

हिमाचल: प्रदेश में वीरवार से मौसम साफ रहने की संभावना जताई जा रही है। 22 फरवरी तक प्रदेश में मौसम साफ बना रहने का पूर्वानुमान है। 23 फरवरी को पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से मध्य और उच्च पर्वतीय आठ जिलों में बारिश और बर्फबारी के आसार हैं।

भाजपा नेता प्रदेश में अनाप शनाप बयानबाजी कर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे – विनय कुमार

शिमला : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को कड़े शब्दों में कहा है कि अगर उन्हें आरडीजी, राजस्व घाटा अनुदान बहाल करने पर प्रदेश सरकार को कोई सहयोग नही देना है तो कम से कम प्रदेश में किसी भी झूठ व भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश न करें। प्रदेश में किसी भी प्रकार की वित्तीय आपातकाल जैसी कोई स्थिति नहीं है।
विनय कुमार ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की आज उस प्रेस वार्ता पर कड़ा एतराज जताया है जिसमें उन्होंने प्रदेश में वित्तीय आपातकाल की ओर बढ़ने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि राजस्व घाटा अनुदान,आरडीजी प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है और इसकी बहाली के लिये हरसंभव प्रयास किये जा रहें है।प्रदेश के विकास कार्यो को गति देने के लिये आरडीजी का जारी रहना बहुत ही आवश्यक है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर दोहरी राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता प्रदेश में अनाप शनाप बयानबाजी कर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नई दिल्ली में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में मंत्रिमंडल के सभी सहयोगियों के साथ मिल कर प्रदेश के अधिकारों को प्रमुखता से उठाते हुए आरडीजी की बहाली और आपदा राहत की घोषित 1500 करोड़ की राशि जारी करने का आग्रह करेगी।

शिमला: कुसुम्पटी बाजार सड़क 19 से 22 अगस्त तक यातायात के लिए बंद 

शिमला क्लब से इंदिरा गांधी खेल परिसर मार्ग 1 मार्च तक वाहनों के लिए बंद

शिमला: जिला दण्डाधिकारी शिमला अनुपम कश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि शिमला क्लब से लेकर इंदिरा गांधी खेल परिसर तक मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध को 01 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया है।
यह आदेश पूर्व में जारी आदेशों दिनांक 29 अक्टूबर 2025, 31 दिसंबर 2025 और 9 जनवरी 2026 की निरंतरता में जारी किए गए हैं।
आदेशानुसार कार्य कर रही एजेंसी को कार्य करते हुए पैदल चलने वाले लोगों खासकर स्कूली बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना होगा।

हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों के हितों पर कुठाराघात है मुफ्त व्यापार समझौते – CM सुक्खू

मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में प्रेस वार्ता को किया संबोधित

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज श्रीनगर में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि हाल ही में हुए मुफ्त व्यापार समझौते हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के किसानों और बागवानों पर गंभीर प्रभाव डालेंगे। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के कारण सेब, अखरोट, बादाम और अन्य फलों का आयात विदेशों से बढ़ेगा, जिससे स्थानीय किसानों और बागवानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों के प्रतिकूल प्रभाव आने वाले वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि और बागवानी पर निर्भर हैं। कृषि और बागवानी दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था का महत्त्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में सेब बागवानी से प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगभग 5,000 करोड़ रुपये का योगदान है और यह 2.5 लाख परिवारांे की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका का आधार है। इसके लिए केंद्र से कोई भी सहायता या समर्थन नहीं मिला, यह बागवानों के साथ सीधा अन्याय और हिमाचल तथा जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों की आर्थिकी पर प्रहार है।
श्री सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार ने न्यूज़ीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ मुफ्त व्यापार समझौते किए हैं, जिनके तहत सेब और सूखे मेवों पर आयात शुल्क में कमी की गई है। उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के किसानों और बागवानों को सीधा नुकसान होगा। ऐसे समझौते देश के किसानों और आम जनता के हित में नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार किसानों और आम जनता की आवाज उठा रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार उन्हें बोलने से रोकने का प्रयास कर रही है। राहुल गांधी की आवाज दबाई नहीं जा सकती। कांग्रेस पार्टी किसानों और बागवानों के साथ मजबूती से खड़ी है तथा उनके अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

शिक्षा मंत्री ने संस्थागत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण में तेजी लाने के दिए निर्देश

39 छात्र और छात्रा विद्यालयों का विलय कर सह-शिक्षा संस्थानों में परिवर्तित

योजनाओं और भविष्य की रणनीतियों की समीक्षा की

शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए गुणात्मक शिक्षा की दिशा में किए जा रहे सुधारों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य भर में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और संस्थागत सुविधाओं को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने कहा कि शैक्षणिक मानकों में सुधार लाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना वर्तमान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग और सरकारी संस्थानों में मजबूत शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में 39 छात्र और छात्रा विद्यालयों का विलय कर सह-शिक्षा संस्थानों में परिवर्तित किया गया है, ताकि बुनियादी ढांचे और शिक्षण स्टाफ का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, शून्य नामांकन वाले 39 विद्यालयों को निरस्त करने के लिए शीघ्र ही अधिसूचना जारी की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि दो किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने वाले विद्यार्थियों को समय पर परिवहन भत्ता उपलब्ध करवाया जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अधिकारियों को गैर-सीबीएसई विद्यालयों के विलय के लिए प्रारूप तैयार करने के निर्देश भी दिए।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि 100 से कम नामांकन वाले महाविद्यालयों का भी विलय किया जाएगा, ताकि संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का समायोजन आवश्यकता के अनुसार अन्य संस्थानों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय से व्यावसायिक पाठयक्रमों, शिक्षकों की भर्ती या वर्तमान कर्मचारियों की सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इन सुधारों के परिणामस्वरूप किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी।
खेल अधोसंरचना के विकास के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णयों के अनुसार नए और उन्नत खेल छात्रावासों को तत्काल प्रभाव से कार्यशील करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नवोदित खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इनमें जिला शिमला के चौपाल स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छात्र खेल छात्रावास (वॉलीबॉल), जिला सिरमौर के शिलाई स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कन्या खेल छात्रावास (कबड्डी), जिला शिमला के जुब्बल स्थित ठाकुर राम लाल कन्या खेल छात्रावास में लड़कियों के लिए बॉक्सिंग खेल की शुरुआत तथा जिला बिलासपुर के मोरसिंघी में हैंडबॉल खेल छात्रावास शामिल हैं। इन नई व्यवस्थाओं के साथ खेल छात्रावासों में संबंधित खेल विधाओं की संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जिससे खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।
रोहित ठाकुर ने खेल छात्रावासों के लिए लंबित 1.2 करोड़ रुपये के डाइट फंड को शीघ्र जारी करने तथा इस धन राशि के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
शिक्षा मंत्री ने विभाग को एससीईआरटी द्वारा तैयार मॉडयूल के आधार पर नव पदोन्नत प्रधानाचार्यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने शैक्षणिक गतिविधियों का निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के लिए रिक्त पड़े पदों को शीघ्र भरने के निर्देश भी दिए। उन्होंने शिक्षकों की भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा 23 वर्ष को समाप्त करने और आवश्यक कार्यवाही करने के आदेश दिए।
उन्होंने आंगनवाड़ियों और पीईपी की संयुक्त घोषणा से संबंधित मामलों तथा राज्य में पीएम-श्री विद्यालयों की प्रगति की भी समीक्षा की।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिक्षा विभाग द्वारा वित्तपोषित एनसीसी कैडेटों के लिए हैंगर एयरपोर्ट सुविधा पूरी तरह से संचालित करवाने पर संतोष व्यक्त किया। पहले कैडेटों को जालंधर हवाई अड्डे जाना पड़ता था, लेकिन अब वे सीधे कुल्लू हवाई अड्डे में उतर सकते हैं, जिससे यात्रा और प्रशिक्षण की व्यवस्थाएं काफी सुगम हो गई हैं।
बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर, परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा राजेश शर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जयराम सरकार के तीन साल कार्यक्रम में पढ़ा गया नड्डा का संदेश...

सोलन: जेपी नड्डा कल सीआरआई में टेटनस व डिप्थीरिया वैक्सीन का करेंगे शुभारंभ

टेटनस और डिफ्थीरिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में अहम कदम

शिमला: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा 21 फरवरी 2026 को टेटनस एवं डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन का शुभारंभ करेंगे। केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, कसौली में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में किया जा रहा है।
टेटनस एवं डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा टीकाकरण कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह वैक्सीन टेटनस और डिफ्थीरिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में अहम भूमिका निभाएगी और राष्ट्रीय टीकाकरण प्रयासों को नई गति प्रदान करेगी। सीआरआई कसौली की निदेशक डॉ. डिंपल कसाना ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का करीब साढे ग्यारह बजे शुभारंभ समारोह में पहुंचने का कार्यक्रम है।

हिमाचल विरोधी चेहरा बेनकाब होने से बौखला गए हैं जयराम ठाकुर – कांग्रेस

शिमला: उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि भाजपा का आरडीजी पर असली चेहरा प्रदेश के सामने बेनकाब हो चुका है, जिससे वह पूरी तरह बौखलाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज जय राम ठाकुर और भाजपा के अन्य नेता आरडीजी विरोधी हैं, जबकि उन्होंने हिमाचल प्रदेश की सीमित आर्थिक संसाधनों और भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए पंद्रहवें और सोलहवें वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश को आरडीजी देने की पुरजोर वकालत की थी। मंत्रियों ने सवाल उठाया कि जय राम ठाकुर प्रदेश की जनता को स्पष्ट करें कि कुछ ही महीनों में उनका रुख क्यों बदल गया है। आखिर क्यों आज वह और पूरी भाजपा हिमाचल प्रदेश के हितों के खिलाफ खड़ी है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का विरोध करते-करते भाजपा नेतृत्व शायद प्रदेश के लोगों के हितों को भूल चुका है।

मंत्रियों ने कहा कि भाजपा नेता आज केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली धनराशि को आर्थिक मदद के रूप में गिना रहे हैं, जबकि यह प्रदेश की जनता का अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बेतुके स्पष्टीकरण प्रदेश के लोगों के गले नहीं उतरने वाले। उन्होंने कहा कि जय राम ठाकुर और भाजपा नेताओं ने अब तक आरडीजी के मुद्दे पर एक बार भी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि क्या भाजपा आरडीजी को बंद करने के पक्ष में है या नहीं? उन्होंने कहा कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है, जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 275(1) में किया गया है। उन्होंने कहा कि जब जय राम ठाकुर के कार्यकाल में प्रदेश को 56 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के अतिरिक्त 14 हजार करोड़ रुपये का जीएसटी क्षतिपूर्ति (कंपनसेशन) प्राप्त हुआ, तब आरडीजी पर कोई आपत्ति नहीं थी, तो अब विरोध क्यों? क्या इसलिए कि आज हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है?

हर्षवर्धन चौहान और राजेश धर्माणी ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान हिमाचल प्रदेश के लिए आरडीजी बहाल करने के लिए नियम 102 के तहत लाए गए सरकारी प्रस्ताव का विरोध कर जय राम ठाकुर और भाजपा ने अपना वास्तविक चेहरा उजागर कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले आपदा प्रभावितों को विशेष आर्थिक सहायता देने संबंधी विधानसभा प्रस्ताव का भी भाजपा विधायकों ने समर्थन नहीं किया था। प्रदेश की जनता देख चुकी है कि भाजपा हिमाचल प्रदेश के अधिकारों के लिए कभी खड़ी नहीं होती।

जयराम ठाकुर बोले- “केंद्र का सहयोग लेकर भी कांग्रेस सरकार केंद्र को ही कोस रही, जवाबदेही से नहीं बच सकती सरकार”

शिमला: नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद से लगातार केंद्र सरकार से भरपूर सहयोग ले रही है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ गंभीर टिप्पणियाँ कर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वास्तविक मुद्दा यह नहीं है कि केंद्रीय बजट में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट का उल्लेख हुआ या नहीं, बल्कि असली प्रश्न यह है कि जब यह ग्रांट हिमाचल प्रदेश को मिल रही थी तब भी राज्य सरकार वित्तीय संकट का रोना रो रही थी।

उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिश के बाद यदि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद हुई है तो वर्तमान कांग्रेस सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रभावी वित्तीय प्रबंधन करे और प्रदेश को आगे ले जाए। अपनी नाकामियों का दोष केंद्र या पूर्व सरकारों पर डालना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वीकार करना चाहिए कि यदि वह स्थिति संभाल नहीं पा रही है तो जनता के सामने सच्चाई रखे।

नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होना परंपरा और नियम दोनों का हिस्सा है, लेकिन सरकार रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट पर राजनीतिक प्रस्ताव लाने पर आमादा थी। विपक्ष ने चर्चा में भाग लेकर तीन साल के कार्यकाल की नाकामियों को तथ्यों सहित रखा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान कई तथ्य गलत ढंग से प्रस्तुत किए गए और जब विपक्ष ने उन्हें सुधारने के लिए बोलने का अवसर मांगा तो अनुमति नहीं दी गई। ऐसी स्थिति में विरोध स्वरूप भाजपा विधायकों को सदन के वेल में जाना पड़ा।

जयराम ठाकुर ने स्पष्ट कहा कि भाजपा हिमाचल प्रदेश के हितों के साथ खड़ी है और प्रदेश हित सर्वोपरि है। यदि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद हुई है तो सरकार को यह भी समझना चाहिए कि अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से रखने में उसकी विफलता भी इसका कारण हो सकती है। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक भाषणों से आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा; इसके लिए ठोस नीति और वित्तीय अनुशासन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं बार-बार यह स्वीकार कर चुके हैं कि आने वाले समय में आर्थिक संकट बढ़ सकता है, गारंटियाँ पूरी करना कठिन होगा, विकास कार्य प्रभावित होंगे, कर्मचारियों के वेतन-पेंशन और डीए पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में संकट का राजनीतिकरण करने के बजाय समाधान पर ध्यान देना चाहिए।

वित्त आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान 12वें और 13वें वित्त आयोग में हिमाचल प्रदेश को लगभग ₹18,000 करोड़ के आसपास अनुदान मिला, जबकि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 14वें और 15वें वित्त आयोग के दौरान लगभग ₹89,254 करोड़ की सहायता मिली, जो पाँच गुना से अधिक है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि हिमाचल के साथ वास्तविक अन्याय कब हुआ। पिछले चालीस साल में हिमाचल को मात्र 21 हज़ार करोड़ मिले मोदी जी के कार्यकाल में 89 हज़ार करोड़ का राजस्व घाटा अनुदान मिला। यह भी रिकॉर्ड है। हिमाचल के लिए केंद्र सरकार लगातार बढ़ चढ़कर सहयोग कर रही है और सुक्खू सरकार आभार तो दूर सिर्फ कोसने का काम कर रही है। 

18 फरवरी 2026 को विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने ₹23,000 करोड़ ऋण लिया और ₹26,000 करोड़ चुकाया, जबकि अगले ही दिन कहा कि ₹35,400 करोड़ ऋण लिया और ₹27,043 करोड़ चुकाया। इसके अलावा विधान सभा में 26 अगस्त 2025 को विधान सभा में एक प्रश्न के जवाब में बताया कि उनकी सरकार ने 26830 करोड़ क़र्ज़ लिया और 8253 करोड़ रुपए वापिस किए। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मूलधन और ब्याज चुकाने के लिए 10200 करोड़ रुपए प्रावधान का प्रावधान किया गया है। विरोधी आंकड़ों पर जनता कैसे विश्वास करे।

उन्होंने कहा कि यदि सात महीने में ₹19,000 करोड़ से अधिक ऋण लेकर उसे चुकता करने का दावा किया जा रहा है। जब बजट में प्रावधान ही नहीं हैं तो वह कर्ज कहां से चुकाया गया। इस कदर सड़क से सदन तक मुख्यमंत्री द्वारा झूठ के महल बनाना उन्हें शोभा नहीं देता। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ऋण लेना कोई असामान्य बात नहीं है और सभी सरकारें आवश्यकता अनुसार ऋण लेती हैं, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगभग ₹40,672 करोड़ ऋण लिया गया और लगभग ₹38,276 करोड़ वापस किया गया, यानी अधिकांश ऋण की अदायगी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार के पास अंतिम वित्तीय वर्ष में लगभग 6500 करोड़ की उधार सीमा उपलब्ध थी, फिर भी उसे नहीं लिया गया। सत्ता में आते ही सुक्खू सरकार ने 6900 करोड़ रुपए का कर्ज लिया और उसे भाजपा के खाते में डाल दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी वित्तीय गतिविधियों के बावजूद सरकार संकट का माहौल क्यों बना रही है। अंत में जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा सहयोग के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन यदि प्रदेश की आर्थिक स्थिति का गलत चित्र प्रस्तुत कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया गया तो भाजपा तथ्य और आंकड़ों के साथ जवाब देगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को विपक्ष का सहयोग चाहिए तो उसे व्यवहार भी जिम्मेदार और लोकतांत्रिक रखना होगा।

एसजेवीएन ने एमएसएमई के लिए विशेष वेंडर डेवल्पमेंट मीट 2026 का किया सफलतापूर्वक आयोजन

शिमलाएसजेवीएन ने आज नई दिल्ली में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए विशेष वेंडर डेवल्पमेंट मीट 2026 का सफल आयोजन किया।एसजेवीएन  अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता, ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

मुख्य अतिथि  भूपेंद्र गुप्ता ने,  अजय कुमार शर्मा, निदेशक (कार्मिक), सिपन कुमार गर्ग, निदेशक (वित्त),  चंद्र शेखर यादव, कार्यकारी निदेशक/विभागाध्यक्ष (मानव संसाधन)  तथा कारपोरेट मुख्यालय, शिमला, संपर्क कार्यालय, दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी तथा वेंडर मीट से संबद्ध अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

 भूपेंद्र गुप्ता ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि विशेष वेंडर डेवल्पमेंट मीट 2026 नई सहभागिता बनाने, नए अवसर तलाशने तथा आपसी सहयोग को सुदृढ़ करने में एक उत्प्रेरक का कार्य करेगा।  उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से, एसजेवीएन ने वेंडर सशक्तिकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धतता को मजबूत करते हुए 36 वेंडर डेवलपमेंट मीट आयोजित किए हैं।  इस बात पर बल देते हुए कि एमएसएमई विकास एसजेवीएन की सफलता का एक आवश्यक हिस्सा है, उन्होंने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा महिला स्वामित्व वाले एमएसएमई को आर्थिक पारितंत्र की मुख्यधारा से जोड़ने तथा एसजेवीएन की प्रापण प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के महत्व पर भी बल दिया।

 अजय कुमार शर्मा, निदेशक (कार्मिक) ने वेंडर मीट को संबोधित करते हुए कहा कि एसजेवीएन अपने प्रापण लक्ष्यों को पूर्ण करने तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों सहित एमएसई सार्वजनिक प्रापण का लाभ प्रदान करने के लिए एमएसएमई के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के विजन में योगदान देते हुए यह आत्मनिर्भर, भविष्योन्मुखी और समावेशी एमएसएमई नेटवर्क को बढ़ावा देती हैं।

 सिपन कुमार गर्ग, निदेशक (वित्त) ने कहा कि एसजेवीएन, एमएसएमई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं, के साथ निकटता से जुड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी के परिकल्पित विकसित भारत 2047 के विज़न को पूर्ण करने में एमएसएमई प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।  उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एसजेवीएन एमएसएमई के साथ नॉलेज शेयरिंग और उत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर आधारित एक सहयोगी केन्द्र बनने के लिए प्रतिबद्ध है।

 चंद्र शेखर यादव, कार्यकारी निदेशक (मानव संसाधन) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने मुख्य अतिथि, प्रतिभागी वेंडरों तथा विभिन्न संगठनों से उपस्थित अधिकारियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।  उन्होंने यह भी दोहराया कि इस प्रकार के वेंडर मीट प्रापण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ एमएसई को सशक्त बनाने और एसजेवीएन के साथ उनकी सहभागिता को सुदृढ़ करने में अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुए हैं।

वेंडर मीट के दौरान, सहभागी विक्रेताओं को उपलब्ध अवसरों तथा प्रापण प्रक्रियाओं से अवगत करवाने के लिए एसजेवीएन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, राष्ट्रीय एससी-एसटी हब, जेम, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया, डीटीएक्स, एम1 एक्सचेंज, दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और महिला उद्यमी परिसंघ के प्रतिनिधियों द्वारा विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गई। प्रस्तुति सत्र के पश्चात एसजेवीएन की ई-प्रापण प्रक्रिया, विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों पर पंजीकरण की प्रक्रिया तथा वेंडरों के लिए उपलब्ध विभिन्न योजनाओं एवं सहायक उपायों के संबंध में जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से संवादात्मक प्रश्नोत्तर एवं वार्ता सत्र आयोजित किए गए।