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मण्डी सरस मेले में 2.01 करोड की रिकॉर्ड बिक्री, 10 दिनों तक उमड़ी भीड़

मण्डी: इंदिरा मार्केट मंडी में 16 से 25 फरवरी तक आयोजित सरस मेला सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। दस दिनों तक चले इस मेले में कुल 2.01 करोड रुपये की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई। लोगों ने पूरे उत्साह के साथ स्थानीय उत्पादों की खरीददारी की और स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों पर खासा रुझान दिखाया। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने मेले की सफलता पर ग्रामीण विकास विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए टीम की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि सरस मेला ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम साबित हुआ है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयं सहायता समूहों को बधाई दी।

मेले के दौरान हैंडलूम, हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग तथा पारंपरिक उत्पादों की बिक्री को लोगों ने भरपूर समर्थन दिया। स्थानीय व्यंजन भी आकर्षण का केंद्र रहे और पूरे आयोजन के दौरान खरीदारों की निरंतर भीड़ बनी रही।
मेले के अंतिम दिन जिला विकास अधिकारी गोपी चंद पाठक ने प्रतिभागी स्वयं सहायता समूहों और स्टॉल संचालकों को प्रमाण पत्र वितरित कर उन्हें सम्मानित किया।
इस वर्ष मेले में कुल 97 स्टॉल स्थापित किए गए थे, जिन पर विभिन्न राज्यों तथा जिले के स्वयं सहायता समूहों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए।

अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव: 2 जून को फोटोग्राफी प्रतियोगिता

नलवाड़ी मेला 2026 में आयोजित होगी फोटोग्राफी प्रतियोगिता; बेहतर फोटोग्राफी करने वालों को मिलेगा नकद ईनाम

16 वर्ष से कम तथा 16 वर्ष से अधिक दो आयु वर्ग के लोग हो सकते हैं शामिल

बिलासपुर: राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला 2026 के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा विशेष फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता मोबाइल तथा प्रोफैशनल कैमरा के माध्यम से आयोजित होगी।

उपायुक्त एवं अध्यक्ष राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला कमेटी राहुल कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रतियोगिता में जिला के 16 वर्ष से कम तथा 16 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोग भाग ले सकते हैं।

उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य मेले की सांस्कृतिक गरिमा, आस्था, परंपरा और जीवंत वातावरण को कैमरे के माध्यम से संजोना है। प्रतिभागी शोभा यात्रा, श्रद्धालुओं की भावनाएं, पारंपरिक झलकियां तथा मेले के विभिन्न रंगों को दर्शाती तस्वीरें प्रस्तुत कर सकते हैं। मेले से संबंधित अन्य रचनात्मक और प्रभावशाली फोटोग्राफ भी स्वीकार किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि विजेता प्रतिभागियों को मेले के अंतिम दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या के दौरान नकद इनाम देकर सम्मानित किया जाएगा। फोटोग्राफर अपनी प्रविष्टियां 21 मार्च दोपहर 3 बजे तक जिला लोक संपर्क कार्यालय में जमा कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्रविष्टि के साथ प्रतिभागी का नाम, आयु, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल, फोटो का शीर्षक, फोटो लेने की तिथि तथा पहचान के लिए आधार कार्ड की स्कैन प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा। प्राप्त प्रविष्टियों का चयन मेला कमेटी द्वारा किया जाएगा।

बिलासपुर: जसवाणी के रिखी राम बांस से निर्मित उत्पादों से कर रहे जीवन निर्वाह

73 वर्ष की आयु में भी पारंपरिक बांस के उत्पादों को प्रतिदिन करते हैं तैयार

लेकिन बाजार में प्लास्टिक की दस्तक से पारंपरिक बांस उत्पादों की घटी है मांग

बिलासपुर: जिला बिलासपुर की तहसील घुमारवीं के गांव जसवाणी निवासी 73 वर्षीय रिखी राम आज भी हाथों की मेहनत और पारंपरिक हुनर के बल पर जीवन निर्वाह कर रहे हैं। लेकिन बदलते वक्त के साथ उनके चेहरे की झुर्रियों में एक चिंता साफ दिखाई दे रही है कि पीढ़ियों से चली आ रही बांस और लकड़ी के शिल्प की परंपरा अब धीरे-धीरे समाप्ति की कगार पर पहुंच चुकी है।

बेहद हंसमुख स्वभाव के धनी रिखी राम बताते हैं कि जीवन के शुरुआती लगभग 15 वर्ष पढ़ाई में लगाए, लेकिन आठवीं कक्षा में अंग्रेजी विषय में फेल होने के कारण स्कूल छोड़ दिया। पास के गांव भदरोग में लगभग 10-12 वर्षों तक लकड़ी की कारीगरी का काम सीखा। कठिन परिश्रम और लगन से काष्ठकला में महारत हासिल की। समय के साथ वह अकेले ही रोजगार की तलाश में हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों जिनमें जिला शिमला, सिरमौर आदि शामिल है में जाकर लकड़ी का कार्य किया। उनका कहना है कि प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लकड़ी के मकान, दरवाजे-खिड़कियां और अन्य पारंपरिक निर्माण कार्यों में उनकी कारीगरी की काफी मांग रहती थी।

लेकिन दुर्भाग्यवश लगभग 10 वर्ष पूर्व जसवाणी में मकान का काम करते समय हाथ में गंभीर चोट आई और हड्डियां टूट गईं। इस घटना के बाद भारी लकड़ी का कार्य छोड़ना पड़ा। ऐसे में जीवन यापन का संकट सामने था, लेकिन हार नहीं मानी। बांस से टोकरी, खारे और छडोलू (पारंपरिक बांस के बर्तन) बनाने का कार्य शुरू किया। लकड़ी के मुकाबले यह काम अपेक्षाकृत हल्का था और गांव में इसकी मांग भी थी।

रिखी राम कहते हैं कि कुछ वर्षों तक सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा, लेकिन फिर बाजार की बदलती तस्वीर ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। वर्तमान में लोग प्लास्टिक से निर्मित सामान की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। बाजार में सस्ता और टिकाऊ विकल्प मिलने से पारंपरिक बांस उत्पादों की मांग अब काफी कम हो गई है।

उनका कहना है कि कभी हर घर में बांस की टोकरी और खारे का उपयोग होता था, लेकिन आज सिर्फ खास मौकों तक ही सीमित हो गया है। रिखी राम कहते हैं कि पहले कच्चा माल (बांस) आसानी से आसपास के गांव में मिल जाता था, लेकिन अब बांस मिलना भी मुश्किल हो गया है। कच्चा माल (बांस) की तलाश में अब उनके जैसे कारीगरों को गांव-गांव भटकना पड़ता है तथा बहुत कम मात्रा में यह उपलब्ध हो पाता है। ऐसे में सिर्फ कच्चे माल की कमी ही नहीं, बल्कि तेजी से बदलती जीवनशैली भी इस परंपरा के लिए खतरा बन गई है।

रिखी राम की सबसे बड़ी चिंता यह है कि नई पीढ़ी इस काम से दूर भाग रही है। युवा इसे मेहनत वाला और कम आमदनी वाला पेशा मानते हैं। आधुनिक शिक्षा और नौकरी की दौड़ में पारंपरिक कारीगरी व शिल्पकारी को महत्व नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, रिखी राम ने इस उम्मीद के साथ बेटे को यह हुनर सिखाया है कि वह इस परंपरा को आगे बढ़ाएगा। लेकिन वह मानते हैं कि केवल कुछेक लोगों के प्रयास मात्र से यह कला अब लंबे वक्त तक जीवित नहीं रह सकती है।

यह कहानी सिर्फ रिखी राम की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों की भी है जिनकी कला अब बाजारवाद और आधुनिकता की आंधी में कहीं विलुप्त होती जा रही है। ऐसे में समाज ने मिलकर ऐसे कारीगरों को प्रोत्साहन, कच्चे माल की उपलब्धता और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित नहीं की, तो बांस और लकड़ी की यह पारंपरिक कारीगरी कहीं इतिहास के पन्नों में दफन होकर न रह जाए।

क्या है कारीगरों और शिल्पकारों के लिए सरकारी सहायता एवं योजना :

सरकार ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों की सहायता के लिए विश्वकर्मा योजना चलाई है। इस योजना के माध्यम से जहां टूल किट खरीदने के लिए 15 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है तो वहीं सस्ती दरों पर ऋण की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त पांच दिन का एडवांस प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। योजना के संबंध में अधिक जानकारी के लिए महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र या अपने नजदीकी प्रसार अधिकारी (उद्योग) स्थित बीडीओ कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

बिलासपुर में शराब के ठेकों की ऑनलाइन नीलामी 3 मार्च को

बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा शराब ठेकों के आवंटन की नई ऑनलाइन ई-नीलामी व्यवस्था के तहत जिला बिलासपुर में यह प्रक्रिया 3 मार्च 2026 को आयोजित की जाएगी। इस बारे उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार इस बार ठेकों का आवंटन ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इच्छुक एवं पात्र आवेदक निर्धारित पोर्टल पर पंजीकरण कर आवश्यक औपचारिकताओं को समय पर पूर्ण कर लें।

ऊना: बंगाणा में जैव नियंत्रण विषय पर जागरूकता शिविर आयोजित, बागवानों को दी आधुनिक तकनीकों की जानकारी

ऊना: बागवानी विभाग द्वारा जैव नियंत्रण प्रयोगशाला, शिमला के सौजन्य से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत विकास खण्ड बंगाणा में जैव नियंत्रण विषय पर एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता उपनिदेशक उद्यान, ऊना डॉ. के.के. भारद्वाज ने की। कार्यक्रम में विकास खण्ड बंगाणा के लगभग 50 बागवानों ने भाग लिया।

डॉ. केके भारद्वाज ने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य बागवानों को रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैविक एवं पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि उत्पादन लागत कम हो और आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि जैव नियंत्रण पद्धति न केवल फसलों के लिए सुरक्षित है, बल्कि भूमि की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

शिविर में जैव नियंत्रण प्रयोगशाला शिमला के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने बागवानों को जैव नियंत्रण के महत्व पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने लाभकारी मित्र कीटों, विभिन्न प्रकार के ट्रैप्स तथा मित्र फफूंद के उपयोग की वैज्ञानिक जानकारी साझा की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कम लागत में फ्रूट फ्लाई ट्रैप/फ्लूयर तैयार करने की सरल विधि तथा मित्र फंगस के प्रभावी उपयोग के बारे में जानकारी दी, ताकि बागवान अपने स्तर पर इन तकनीकों को आसानी से अपना सकें।

इस मौके पर पूर्व जिला परिषद सदस्य सत्या देवी, बागवानी विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों सहित बागबान भी उपस्थित रहे।

नाहन शहर केे आस पास के क्षेत्र में 11 जुलाई को विद्युत आपूर्ति रहेगी बाधित

सॉफ्टवेयर की अपडेशन के कारण 3 मार्च तक बंद रहेंगी विद्युत कार्यालयों की कुछ सेवाएं

हमीरपुर : विद्युत उपमंडल-2 हमीरपुर के सहायक अभियंता सौरभ राय ने बताया कि हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड 27 फरवरी से 3 मार्च तक अपने सॉफ्टवेयर सिस्टम को अपग्रेड करवा रही है। इसलिए, उक्त अवधि के दौरान बिजली बिलों का ऑनलाइन भुगतान, उपभोक्ता पोर्टल व मोबाइल ऐप सेवाएं, बिलिंग, कलेक्शन एवं शिकायत निवारण (सीआरएम) की सेवाएं बंद रहेंगी।

सहायक अभियंता ने बताया कि उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए सॉफ्टवेयर सिस्टम को अपग्रेड किया जा रहा है। बिजली की आपूर्ति से इसका कोई संबंध नहीं है। इसलिए, उक्त अवधि के दौरान बिजली की आपूर्ति सुचारू रहेगी।

डॉक्टरों को राहत, सरकार ने आधी की पीजी के लिए बैंक गारंटी

हमीरपुर: मोतियाबिंद के शिकार गरीब बुजुर्गों के मुफ्त ऑपरेशन एवं लैंस की सुविधा

ऑपरेशन और लैंस का पूरा खर्चा देता है सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग

हमीरपुर :  जिला कल्याण अधिकारी चमन लाल शर्मा ने बताया कि मोतियाबिंद के शिकार गरीब वरिष्ठ नागरिकों को नेशनल एक्शन प्लान फॉर सीनियर सिटीजन के तहत निशुल्क सर्जरी की सुविधा प्रदान की जा रही है।

उन्होंने बताया कि जिला हमीरपुर में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु संचालित नेशनल एक्शन प्लान फॉर सीनियर सिटीजन के अंतर्गत दो वरिष्ठ नागरिकों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल हमीरपुर में करवाए गए हैं। इन वरिष्ठ नागरिकों को उत्तम गुणवत्ता के लैंस लगवाए गए हैं। लैंस से लेकर दवाइयों तक का समस्त खर्चा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने वहन किया है।

जिला कल्याण अधिकारी ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि विभाग वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य एवं कल्याण हेतु निरंतर कार्यरत है। उन्होंने मोतियाबिंद के शिकार गरीब वरिष्ठ नागरिकों से इस सुविधा का लाभ उठाने की अपील की है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय या तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।

हिमाचल: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में सीएचओ के 940 पदों की भर्ती रद्द

हमीरपुर: भोरंज में आंगनवाड़ी सहायिका की चयन प्रक्रिया रद्द

हमीरपुर:  बाल विकास परियोजना भोरंज के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्र भोरंज-1 में आंगनवाड़ी सहायिका के खाली पद को भरने के लिए 26 फरवरी को निर्धारित चयन की प्रक्रिया को चयन समिति द्वारा अपरिहार्य प्रशासनिक कारणों से रद्द कर दिया गया है। बाल विकास परियोजना अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि इस संदर्भ में आगामी प्रक्रिया के बारे बाद में सूचित कर दिया जाएगा।

हिमाचल : प्रदेश में आज रात से मौसम बदलेगा करवट…

हिमाचल : प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वीरवार रात से मौसम के करवट बदलने की संभावना जताई जा रही है । 27 -28 फरवरी को पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से चंबा, कुल्लू, कांगड़ा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के कुछ क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार हैं। राजधानी शिमला सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में तीन मार्च तक मौसम साफ  मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 27-28 फरवरी और 2-3 मार्च को चंबा, कुल्लू, कांगड़ा, किन्नौर व लाहौल-स्पीति के के ऊंचे पहाड़ों पर कुछ जगहों पर हल्की बारिश-बर्फबारी का पूर्वानुमान है। सप्ताह के बाकी दिनों में राज्य में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।

शिमला: कुड्डू टोल बैरियर पर टोल वसूली हेतु ई-नीलामी 28 फरवरी को

27 फरवरी प्रातः 11 बजे तक जमा कर सकते हैं दस्तावेज

शिमला: उपमंडल दण्डाधिकारी जुब्बल गुरमीत नेगी ने जानकारी देते हुए बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा एच.पी. टोल्स अधिनियम, 1975 के अंतर्गत कुड्डू टोल बैरियर पर वसूली का अधिकार वित्तीय वर्ष 2026-27 (01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक) के लिए ई-नीलामी के माध्यम से प्रदान किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि ई-नीलामी की प्रक्रिया आधिकारिक पोर्टल https://eauction.gov.in/nicgep/app पर ऑन लाइन आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि दस्तावेज जमा करने की अंतिम तिथि 27 फरवरी 2026 प्रातः 11:00 है। दस्तावेजों की जांच एवं स्वीकृति 27 फरवरी को प्रातः 11:05 बजे से सायं 6:55 बजे तक की जाएगी। ई-नीलामी 28 फरवरी को प्रातः 09:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक चलेगी। उन्होंने बताया कि यह नीलामी एच.पी. वार्षिक टोल नीति 2026-27 तथा आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी, हिमाचल प्रदेश
अधिसूचित नियमों एवं शर्तों के अनुसार संचालित होगी। विस्तृत नियम एवं शर्तें आधिकारिक मूल्य एवं अन्य जानकारियां विभाग की आधिकारि क वेबसाइट www.hptax.gov.in पर उपलब्ध हैं।
गुरमीत नेगी ने बताया कि ई-नीलामी आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी, हिमाचल प्रदेश की स्वीकृति के अधीन होगी। आयुक्त को किसी भी या सभी बोलियों को बिना कारण बताए अस्वीकार करने का अधिकार सुरक्षित है। आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वह नवीनतम सचूना एवं अद्यतन के लिए www.hptax.gov.in वैबसाइट नियमित रूप से देखते रहे।