
शिमला: प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि राज्य सरकार ने जनसुविधा एवं प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश में विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए एक आयोग का गठन किया है। इस पुनर्गठन में नई प्रशासनिक इकाइयों का गठन, मौजूदा इकाइयों का विलय तथा उनका विभाजन शामिल है।
उन्होंने बताया कि आयोग हिमाचल प्रदेश में जिलों, उप-मंडलों, तहसीलों, उप-तहसीलों, विकास खंडों और अन्य विभागीय मडलों की मौजूदा संरचना की समीक्षा करेगा। आयोग द्वारा जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, पहुंच, प्रशासनिक दक्षता और जनसुविधा के दृष्टिगत नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन, विलय, विभाजन अथवा पुनर्गठन की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा।
इस आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी करेंगे। अधिवक्ता विशाल पंवर और आईएफएस अधिकारी (सेवानिवृत्त) राजेश शर्मा इसके सदस्य होंगे, जबकि निदेशक भू-अभिलेख, हिमाचल प्रदेश, आयोग के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
प्रवक्ता ने बताया कि राजस्व, वित्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, वन, लोक निर्माण, जल शक्ति और सामान्य प्रशासन विभागों के प्रशासनिक सचिव आवश्यकता पड़ने पर स्पेशल इन्वाइटी के रूप में विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने और विशेषज्ञ सुझाव प्राप्त करना सुनिश्चित करेंगे।
उन्होंने कहा कि अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने से पहले आयोग संबंधित हितधारकों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से परामर्श करेगा। आयोग नई प्रशासनिक इकाइयों की स्थापना के लिए आवश्यक बुनियादी अधोसंरचना और कार्यबल की जरूरतों सहित वित्तीय प्रभावों का भी आकलन करेगा। इसके अतिरिक्त, आयोग द्वारा राज्य के राजकोष पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले बिना संसाधनों के बेहतर उपयोग और मौजूदा कार्यालयों के कामकाज को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के उपाय प्रस्तुत किए जाएंगे।
प्रवक्ता ने बताया कि आयोग का मुख्यालय शिमला में स्थित होगा। राजस्व विभाग और संबंधित जिलों के उपायुक्त आवश्यक सहायता, अभिलेख तथा जनसांख्यिकीय आंकड़े उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करेंगे।
उन्होंने कहा कि आयोग अधिसूचना जारी होने की तिथि से छह माह की अवधि तक कार्य करेगा और निर्धारित समयावधि के भीतर अपनी विशिष्ट सिफारिशों सहित अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा।

लाहौल-स्पीति में 116.28 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किए
शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल-स्पीति के दुर्गम और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जनजातीय सीमावर्ती क्षेत्रों में 116.28 करोड़ रुपये लागत की विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किए।
मुख्यमंत्री ने स्पीति घाटी के रोंगटोंग में बैटरी स्टोरेज से संचालित प्रदेश के पहले सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण किया। काजा में 4.42 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस 2 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र के साथ 1 मेगावाट-आवर क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की गई है। समुद्र तल से लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस संयंत्र से प्रतिवर्ष लगभग 36 लाख यूनिट बिजली उत्पादन होने की संभावना है। इस परियोजना का निर्माण कार्य 30 मई, 2023 को शुरू हुआ था और दिसंबर, 2024 में इसका संचालन शुरू हो गया था। वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 तथा वर्तमान वित्त वर्ष में 30 सितंबर, 2026 तक इस संयंत्र से 22,58,752 यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ। यह परियोजना दूरदराज के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा की संभावनाओं को इंगित कर रही है। साथ ही यह हिमालयी क्षेत्रों में उपयुक्त तकनीक एवं प्रभावी संचालन प्रणालियों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने का सफल उदाहरण भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौर ऊर्जा परियोजना स्पीति घाटी में विकास की नई परिभाषा स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि रोंगटोंग जलविद्युत परियोजना को पूरी तरह से कार्यशील बनाया जाएगा, जिसके लिए 6 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। वर्ष 2023 में स्पीति के अपने पहले दौरे का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय क्षेत्र के लोगों ने बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर चिंताएं व्यक्त की थीं। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परियोजना का संचालन शुरू होना इन समस्याओं के समाधान और क्षेत्र की विद्युत अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने लाहौल-स्पीति जिला के काजा तथा किन्नौर जिला के समदो में 47.95 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 66/22 केवी विद्युत उप-केंद्रों की आधारशिला भी रखी। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगभग 100 किलोमीटर के एरियल डिस्टेंस पर स्थित ये उप-केंद्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी अधोसंरचना को मजबूत करेंगे और काजा, समदो तथा आसपास के क्षेत्रों में अधिक विश्वसनीय, स्थिर एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।
वर्तमान में स्पीति क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति मुख्य रूप से किन्नौर जिले के पूह स्थित 66/22 केवी उप-केंद्र से लगभग 200 किलोमीटर लंबे 22 केवी पूह-काजा फीडर के माध्यम से की जाती है। इस फीडर की अधिक लंबाई और इससे जुड़े कई कनेक्शन के कारण वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, तकनीकी बिजली हानि तथा नियमित विद्युत आपूर्ति बनाए रखने जैसी समस्याएं सामने आती हैं और प्रतिकूल मौसम के दौरान ये समस्याएं अधिक गंभीर हो जाती हैं।
प्रस्तावित उप-केंद्र विद्युत वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ करने, वोल्टेज नियंत्रण में सुधार लाने, तकनीकी हानियों को कम करने और स्थानीय विकास, पर्यटन और आवश्यक सेवाओं के कारण बढ़ रही बिजली की मांग की मांग को पूरा करने में सहायक साबित होंगे। यह परियोजना सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि रक्षा एवं सुरक्षा से संबंधित प्रतिष्ठानों, सीमावर्ती बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षण संस्थानों और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के लिए विश्वसनीय बिजली आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। क्षेत्र में बेहतर विद्युत अधोसंरचना के निर्माण से स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लोगों को राहत मिलने की सम्भावना है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में प्रतिकूल जलवायु और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बिजली आपूर्ति तथा बुनियादी ढांचे के रखरखाव में आने वाली चुनौतियों से लोगों को निजात मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने लाहौल-स्पीति जिले की पिन घाटी में 39.55 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चिदांग-तंगती खर तेलिंग सड़क परियोजना का भी लोकार्पण किया। इस परियोजना से कच्ची सड़क को बेहतर और हर मौसम में उपयोग योग्य सड़क में परिवर्तित किया गया है, इससे दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित, सुगम और अधिक विश्वसनीय सड़क संपर्क उपलब्ध होगी।
सड़क निर्माण में सुरक्षा की दृष्टि से क्रैश बैरियर, पैरापेट, संकेतक और गति अवरोधक जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण पिन घाटी में बेहतर सड़क सुविधा से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ गांवों तक पहुंचना आसान होगा और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे। इससे विशेष रूप से हरी मटर और बीज आलू सहित कृषि उत्पादों तथा आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में भी सुविधा मिलेगी। बेहतर सड़क संपर्क से स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षण संस्थानों, प्रशासनिक कार्यालयों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी।
मुख्यमंत्री ने स्पीति घाटी में 24.36 करोड़ रुपये की लागत से 12 किलोमीटर लंबे तांगयुत-हिक्किम सड़क मार्ग के उन्नयन कार्य का भी लोकार्पण किया। यह परियोजना दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और अत्यधिक ठंडे मौसम वाले इस ऊंचाई वाले क्षेत्र में सड़क संपर्क सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
बेहतर सड़क सुविधा से कृषि उत्पादों और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में सुविधा, सुगम्य यात्रा सुविधा तथा आवश्यक सेवाओं तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित होगी। इससे उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित डाकघर के लिए प्रसिद्ध हिक्किम गांव तक संपर्क भी बेहतर होगा और पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इस परियोजना से स्थानीय आजीविका को विशेष बल मिलेगा तथा पर्यटन और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे जिससे दूरदराज के जनजातीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

काजा : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज काजा स्थित सीबीएसई स्कूल के विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत करने, अपने लक्ष्य निर्धारित करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब सहजता से दिए और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। विद्यार्थियों ने काजा स्कूल को सीबीएसई से संबद्ध करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दूरदराज के स्पीति क्षेत्र में सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलना उनके लिए महत्वपूर्ण है और इससे उन्हें बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध होंगे।
संवाद के दौरान एक छात्रा ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि स्कूल में 85 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें से 46 छात्राएं छात्रावास में रहती हैं। उन्होंने छात्रावास में कुक, सफाई कर्मचारी और महिला वार्डन की कमी का मामला उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए यहां छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों के लिए भी अलग आवासीय ब्लॉक तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस क्षेत्र में एक बेहतर स्कूल विकसित करने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाएगी।
एक अन्य छात्रा ने स्कूल के पाठ्यक्रम में पर्यावरण अध्ययन को शामिल करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने इस सुझाव की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचेगा तभी हम भी बचेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आगामी शैक्षणिक सत्र से नैतिक शिक्षा शुरू करने जा रही है, जिसके लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है।
विद्यार्थियों ने स्कूल की कक्षाओं में ठंड और अपर्याप्त रोशनी के कारण पढ़ाई में होने वाली कठिनाइयों से भी मुख्यमंत्री को अवगत करवाया। इस पर मुख्यमंत्री ने स्कूल के बेहतर भवन एवं सुविधाओं के विकास के लिए धन उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल को बेहतर स्वरूप प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और इसे अगले शैक्षणिक सत्र तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
एक छात्र ने कहा कि आप दूसरी बार स्पीति घाटी आए हैं, आपको कैसा महसूस हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पीति प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण एक खूबसूरत क्षेत्र है। राज्य सरकार यहां पर्यटन से जुड़े विभिन्न परियोजनाएं विकसित कर रही है, जिससे स्थानीय लोगों की आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा यहां हिमाचल दिवस का आयोजन किए जाने के बाद क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने यह भी बताया कि यहां आईस हॉकी स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों की संभावनाएं बढ़ेंगी।
एक छात्र ने स्पीति घाटी के विद्यार्थियों के लिए विशेष कोचिंग की सुविधा उपलब्ध करवाने का आग्रह किया, ताकि उन्हें पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए घाटी से बाहर न जाना पड़े। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन देते हुए कहा कि यहां शीघ्र ही स्किल ट्रेनिंग कोर्स शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यटन क्षेत्र से संबंधित विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी विचार किया जाएगा, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
इस अवसर पर विधायक अनुराधा राणा भी उपस्थित थीं।

शिमला:अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं विधायक सुन्दर सिंह ठाकुर ने आज नई दिल्ली में बताया कि इस वर्ष प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का आयोजन 21 से 27 अक्तूबर, 2026 तक कुल्लू में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता 21 अक्तूबर को इस उत्सव का शुभारंभ करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू समापन समारोह की अध्यक्षता करेंगे।
सुन्दर सिंह ठाकुर ने कहा कि स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय नृत्य शैलियों के संगम पर आधारित ग्लोबल डांस कार्यक्रम इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण होगा। इसके अतिरिक्त ड्रोन और लेजर शो भी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेंगे।
अंतरराष्ट्रीय नृत्य महोत्सव के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह कुल्लू दशहरा का मुख्य आकर्षण होगा। इस महोत्सव में भाग लेने वाले विभिन्न देशों की संस्कृतियों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के रंग-बिरंगे लोकनृत्यों का प्रदर्शन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि थाईलैंड, मिस्र, उज्बेकिस्तान, रूस, कजाकिस्तान और अमेरिका सहित लगभग 12 देशों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की है, जबकि कुल 24 देशों द्वारा इसमें भाग लेने की आशा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद इस आयोजन की सांस्कृतिक भागीदार है, जबकि उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में योगदान दे रहे हैं।
सुन्दर सिंह ठाकुर ने कुल्लू दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा की जानकारी देते हुए बताया कि इसका इतिहास 17वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि कुल्लू स्थानीय देवी-देवताओं की भूमि है और उनकी उपस्थिति के कारण इस क्षेत्र को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के आयोजन के लिए अब तक 346 स्थानीय देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजे जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस उत्सव को भव्य स्तर पर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसी के अनुरूप न केवल कार्यक्रमों की गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं, बल्कि उत्सव के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सात दिवसीय यह उत्सव पिछले वर्षों की परंपरा के अनुसार आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न विभागों और संस्थानों द्वारा स्टॉल भी लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सात दिवसीय कार्यक्रम में स्थानीय खेल प्रतियोगिताएं और नशा मुक्ति अभियान भी महत्वपूर्ण गतिविधियां होंगी।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन के व्यापक प्रचार-प्रसार और देशभर के लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से नई दिल्ली में यह पूर्वावलोकन समारोह आयोजित किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी प्रमुख आकर्षण है। यहां पर्यटक विभिन्न देशों के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने के साथ हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्रों और अन्य विशिष्ट स्थानीय उत्पादों की खरीदारी भी कर सकते हैं।
उन्होंने देशभर के लोगों को इस भव्य उत्सव का हिस्सा बनने और कुल्लू आकर इसकी सांस्कृतिक छटा का अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया।
इस अवसर पर प्रधान आवासीय आयुक्त अजय यादव और उप-आवासीय आयुक्त मयंक शर्मा भी उपस्थित थे।

शिमला: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार चुनावी पराजय का सामना कर रही है, लेकिन राहुल गांधी अपनी राजनीतिक कार्यशैली में सुधार करने के बजाय बार-बार चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस को जनता का विश्वास हासिल करने के लिए आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि झूठे आरोप लगाकर जनता को परेशान तो किया जा सकता है, लेकिन जनता का विश्वास और चुनावी विजय हासिल नहीं की जा सकती।
श्रीकांत शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक राजनीतिक दल और नेता को सवाल उठाने तथा आरोप लगाने का अधिकार है, लेकिन आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हैं, लेकिन जब उनसे प्रमाण मांगे जाते हैं तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक जवाबदेही और प्रमाण आधारित सार्वजनिक चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेतृत्व को समझना चाहिए कि केवल आरोपों को दोहराने से वे सत्य सिद्ध नहीं हो जाते।
भाजपा प्रदेश प्रभारी ने कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने ‘चौकीदार चोर है’ का नारा देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के खिलाफ व्यापक राजनीतिक अभियान चलाया था, लेकिन चुनाव परिणामों में जनता ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उस समय भी कांग्रेस नेतृत्व ने सकारात्मक राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करने के बजाय आरोपों की राजनीति को प्राथमिकता दी थी। शर्मा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी आज भी उसी राजनीतिक रणनीति को दोहरा रहे हैं और चुनावी पराजय के वास्तविक कारणों का विश्लेषण करने के बजाय दूसरों को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास कर रहे हैं।
श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व लंबे समय से राहुल गांधी को पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, लेकिन लगातार चुनावी चुनौतियों के बावजूद संगठन और राजनीतिक रणनीति में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस बार-बार राहुल गांधी की राजनीतिक री-लॉन्चिंग का प्रयास करती है, लेकिन प्रत्येक चुनावी चुनौती के बाद पार्टी को नए सिरे से अपनी रणनीति समझाने की आवश्यकता पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अब आत्मचिंतन करना चाहिए कि कांग्रेस का जनाधार मजबूत करने के लिए केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय संगठनात्मक स्तर पर क्या सुधार आवश्यक हैं।
भाजपा प्रदेश प्रभारी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर किसी भी प्रकार की आपत्ति उठाने के लिए संवैधानिक और कानूनी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। यदि राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी के पास मतदाता सूची में अनियमितताओं के प्रमाण हैं, तो उन्हें संबंधित चुनाव अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़कों पर प्रदर्शन करना राजनीतिक अधिकार है, लेकिन आम नागरिकों को अनावश्यक असुविधा पहुंचाने या बिना पर्याप्त प्रमाण के चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाने से बचना चाहिए।
श्रीकांत शर्मा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग का दायित्व पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित करना तथा अपात्र या त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों की विधिसम्मत जांच करना है। उन्होंने दावा किया कि सत्यापन के दौरान कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें संबंधित व्यक्तियों के नाम या पते की पुष्टि नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना निर्धारित प्रक्रिया और उचित अवसर के मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे किन विशिष्ट मामलों में मतदाता सूची की प्रक्रिया पर आपत्ति जता रहे हैं और उनके पास उसके समर्थन में कौन-से दस्तावेज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सभी राजनीतिक दलों को इस प्रक्रिया में रचनात्मक सहयोग देना चाहिए। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उसके लिए कानूनी उपाय उपलब्ध हैं और ऐसे मामलों का तथ्यात्मक समाधान होना चाहिए।
भाजपा प्रदेश प्रभारी ने कहा कि कांग्रेस को चुनावी पराजय के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच जाकर अपनी नीतियों, कार्यक्रमों और संगठनात्मक कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय मतदाता करते हैं और प्रत्येक राजनीतिक दल को जनादेश का सम्मान करना चाहिए।
श्रीकांत शर्मा ने राहुल गांधी से आत्मचिंतन करने का आग्रह करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से आगे बढ़कर ठोस तथ्यों, सकारात्मक कार्यक्रमों और जनता से सीधे संवाद पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान अधिकार की रक्षा के पक्ष में है।

शिमला : वोट चोरी के खिलाफ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा निर्देशित विरोध प्रदर्शन के तहत प्रदेश में 25 अक्टूबर से 25 नवम्बर तक सभी जिलों,ब्लॉकों व बूथ स्तर तक वोट बचाओ देश बचाओ चौपाल का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए पार्टी के जिला प्रभारियों को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से विशेष हिदायतें जारी की गई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने बताया है कि 25 अक्टूबर से 25 नवम्बर तक देशभर में चरण तीन के तहत वोट बचाओ,देश बचाओ चौपाल का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में 25 अक्टूबर को पीसीसी नेताओं डीसीसी अध्यक्षों की वोट चोरी के खिलाफ सयुंक्त प्रेस वार्ताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात ब्लॉकों के अध्यक्ष एवं जिला अध्यक्षों के साथ जिला स्तरीय बैठके करेंगे।अगले दिन बूथ लेवल एजेंट्स के साथ ब्लॉक स्तरीय बैठके होगी। 4 नवम्बर से 10 नवम्बर के बीच बीएलए और स्थानीय कार्यकर्ता वोट रक्षक के तौर पर प्रत्येक बूथ पर मतदाता सत्यापन अभियान चलाएगी,इसके तहत उन सब नागरिकों का पता लगाया जाएगा जिनके नाम मनमाने ढंग या हेराफेरी से मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। सभी बीएलओ को सत्यापित और हस्ताक्षरित विलोपन रिकॉर्ड व मतदाता डोजियर अपने सम्बंधित ब्लॉक पार्टी कार्यलयों में औपचारिक तौर पर जमा करवाने होंगे।
विनय कुमार ने बताया कि 12 से 30 नवम्बर तक प्रदेश के सभी गांवों में सुलभ प्रारूप में बैठके आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में उनके मताधिकार की पूरी जानकारी के साथ उनके अधिकारों की जानकारी दी जाएगी। इसमें उन्हें भाजपा द्वारा वोट चोरी के बारे विस्तार पूर्वक जानकारी दी जाएगी।
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विनय कुमार ने बताया है कि 1 नवम्बर को दिल्ली के रामलीला मैदान में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा इंडिया गठबंधन की एक मेगा राष्ट्रीय रैली का आयोजन होगा। इसमें संस्थागत कब्जे के खिलाफ राष्ट्र की एकजुट आवाज को दर्ज करने के लिये देशभर से लोगों की व्यापक भागीदारी के साथ साथ पार्टी के सभी नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
विनय कुमार ने बताया कि संविधान दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस ने दिल्ली चलो के आह्वान पर छह प्रमुख प्रवेश मार्गों , सहारनपुर,जयपुर,अलीगढ़, मेरठ,देहरादून, चंडीगढ़ व ग्वालियर से 25 व 26 नवम्बर को सभी राज्य की यात्राएं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचेगी।

शिमला: इंदिरा गांधी राज्य खेल परिसर में आयोजित शिमला जिला टेबल टेनिस प्रतियोगिता में बुधवार को विभिन्न आयु वर्गों के मुकाबलों में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के दौरान कई मुकाबले रोमांचक रहे, जबकि खिलाड़ियों ने फाइनल तक पहुंचने के लिए कड़ा संघर्ष किया। जिला टेबल टेनिस संघ के प्रेस सचिव सुदीप महाजन ने बताया कि प्रतियोगिता में उभरती प्रतिभाओं ने अपने खेल कौशल का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर जिला टेबल टेनिस संघ के सचिव अभय लखनपाल सहित अकलेश सैणी, जसवंत गांगटा, सोमनाथ प्रामनिक, अरविंद और हिमांशु शर्मा उपस्थित रहे।
बुधवार को खेले गए मुकाबलों के परिणामों में गल्र्ज अंडर-13 वर्ग के फाइनल में हिमन्या कश्यप ने नायशा को 3-1 से हराकर खिताब जीता। सेमीफाइनल में हिमन्या ने सान्वी सूद को 3-0 से, जबकि नायशा ने गीतांजलि को 3-1 से पराजित किया।
ब्वॉयज अंडर-13 वर्ग के फाइनल में अद्वय ब्राम्टा ने सार्थक आनंद को 3-0 से हराया। अंडर-15 गल्र्ज वर्ग में आध्या द्विवेदी ने अदविका कौशिक को 3-2 से मात देकर खिताब अपने नाम किया। वहीं, ब्वॉयज अंडर-15 वर्ग के फाइनल में आयान तोमर ने सात्विक गौतम को 3-0 से हराकर जीत दर्ज की।
सेमीफाइनल मुकाबलों में अंडर-15 गल्र्ज वर्ग में आध्या ने हिमन्या कश्यप को 3-1 से और अदविका ने मिहिका डोगरा को 3-2 से हराया। ब्वॉयज अंडर-15 वर्ग में आयान ने अद्वय ब्राम्टा को 3-2 से, जबकि सात्विक गौतम ने अंशवीर को 3-1 से पराजित किया।
अंडर-19 ब्वॉयज वर्ग के फाइनल में युग ने तनय रावत को 3-2 से हराकर खिताब जीता। इससे पूर्व इस वर्ग के सैमीफाइनल मेें तनय रावत ने अथर्व वर्मा को 3-2 से और युग ने अद्वय ब्राम्टा को हराया था।

सोलन: नेपाल के सात प्रांतों के 49 अधिकारी डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सेब एवं अखरोट की वैज्ञानिक खेती और प्रबंधन पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य नेपाल के अधिकारियों की तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करना तथा समशीतोष्ण फलों की खेती के क्षेत्र में ज्ञान और अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को वैज्ञानिक जानकारी और व्यावहारिक कौशल प्रदान किए जा रहे हैं, ताकि वे अपने-अपने प्रांतों में किसानों और बागवानी से जुड़े अन्य हितधारकों तक इन तकनीकों और जानकारियों का प्रसार कर सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. धर्म पाल शर्मा ने किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए वैज्ञानिक बागवानी ज्ञान एवं तकनीकों को साझा करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अधिकारी प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग नेपाल के विभिन्न प्रांतों में किसानों और अन्य हितधारकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में संसाधन व्यक्तियों के रूप में कार्य करते हुए विश्वविद्यालय में सीखी गई तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रसार कर सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सेब एवं अखरोट उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है। इसमें समशीतोष्ण फल फसलों की संभावनाओं एवं महत्व, सेब और अखरोट की पौधशाला उत्पादन तकनीकों, सिंचाई एवं जल प्रबंधन, सघन बागवानी प्रणालियों, मूलवृंतों (रूटस्टॉक्स) के चयन, आधुनिक प्रवर्धन विधियों, परागण प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, कटाई उपरांत प्रबंधन तथा फल प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
डॉ. अजय शर्मा और डॉ. मीना कुमारी के समन्वय में संचालित इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के सघन सेब बागानों, कीवी और अखरोट के बागानों, पौधशाला, मधुमक्खी पालन तथा फल प्रसंस्करण इकाई का भ्रमण भी करवाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागी मृदा एवं पत्ती विश्लेषण प्रयोगशाला तथा कीटनाशक अवशेष प्रयोगशाला का भी भ्रमण कर रहे हैं। इन भ्रमणों के माध्यम से उन्हें आधुनिक फल उत्पादन तकनीकों, पौधशाला प्रबंधन, मृदा एवं पौधों में पोषक तत्वों के विश्लेषण, कीटनाशक अवशेषों की निगरानी तथा समशीतोष्ण फलों की खेती से जुड़ी अन्य वैज्ञानिक पद्धतियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो रहा है।
कार्यक्रम के अंतर्गत मशोबरा और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कंडाघाट का भ्रमण भी आयोजित किया जाएगा। इन भ्रमणों के माध्यम से प्रतिभागियों को खेत स्तर पर अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों को देखने तथा विशेषज्ञों और किसानों के साथ संवाद करने का अवसर मिल रहा है। इससे उन्हें आधुनिक बागवानी पद्धतियों के व्यावहारिक उपयोग को समझने में सहायता मिल रही है।

शिम्मला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कुंजुम पास के नीचे टनल निर्माण के लिए सर्वे करवाने तथा इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस टनल के निर्माण के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है और इसके निर्माण से क्षेत्र के लोगों और पर्यटकों को वर्षभर बेहतर सड़क संपर्क सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने स्पीति घाटी को प्राकृतिक खेती क्षेत्र घोषित करने की घोषणा करते हुए कहा कि काजा में कॉलेज खोलने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके अतिरिक्त, काजा में स्त्री रोग विशेषज्ञ और मेडिसिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने काजा में हेलिपोर्ट निर्माण के लिए सर्वे करवाने का आश्वासन भी दिया, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने दो दिवसीय प्रवास पर स्पीति घाटी के काजा में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में स्पीति के विकास पर 500 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। समदो-काजा ट्रांसमिशन लाइन का कार्य तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिस पर लगभग 350 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्पीति के लोगों की आय दोगुनी करने की दिशा में प्रयासरत है।
सुक्खू ने कहा कि जब वह पहली बार 15 अप्रैल को हिमाचल दिवस कार्यक्रम के दौरान इस क्षेत्र में आए थे, तब स्थानीय लोगों ने बिजली की समस्या उनके समक्ष रखी थी। अब इस दिशा में किए गए प्रयास धरातल पर उतरने लगे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का लगभग 42 प्रतिशत भू-भाग शीत मरुस्थलीय क्षेत्र में आता है और इन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के विकास के लिए सरकार विशेष ध्यान दे रही है तथा अधिक धनराशि खर्च की जा रही है।
कर्मचारियों के कल्याण और पुरानी पेंशन योजना पर सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने दिवाली के अवसर पर महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने पर विचार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को आत्मसम्मान के साथ वृद्धावस्था में जीवन-यापन करने और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से पुरानी पेंशन योजना बहाल की गई है तथा आने वाले समय में और कर्मचारियों को इसके दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओपीएस लागू करने के कारण केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष मिलने वाले 1,600 करोड़ रुपये रोक दिए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रतिबिंबित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा प्रदेश सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए धन खर्च करने को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में केवल 35 प्रतिशत कर्मचारी उपलब्ध थे। वर्तमान सरकार के प्रयासों से यह संख्या बढ़कर 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद क्रिटिकल केयर ब्लॉक का कार्य शुरू करवाया।
आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना में वर्ष 2023-27 के बीच प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 26 करोड़ रुपये हैं लेकिन इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य ने लगभग 204 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के लोगों को लगभग 1,000 करोड़ रुपये का इलाज करवाने के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ता था। वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में एम्स दिल्ली की तर्ज पर आधुनिक चिकित्सा तकनीक उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार ने अपने संसाधनों से धनराशि खर्च की है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के रास्तों को बंद करके राज्य सरकार ने 4,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की है, जिसका उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं को संचालित करने में किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने लाहौल-स्पीति के पूर्व विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि वह क्षेत्र की जनता के साथ विश्वासघात करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं के राजनीतिक भविष्य को प्रदेश की जनता तय करेगी। उन्होंने उप-चुनाव में लाहौल-स्पीति की जनता द्वारा महिला विधायक को चुनने का उल्लेख करते हुए कहा कि वह आज क्षेत्र के लोगों के हितों की लड़ाई लड़ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में वोट चोरी के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए कहा कि नौ विधायकों को अपने पक्ष में करके हिमाचल प्रदेश की सरकार गिराने का प्रयास किया गया था, लेकिन भगवान, जनता और प्रदेश के देवी-देवताओं के आशीर्वाद से राज्य सरकार सफलतापूर्वक कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं को 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने की शुरुआत भी स्पीति की महिलाओं से की थी। उन्होंने घोषणा की कि सरकार ‘अपना परिवार, सुखी परिवार’ योजना शुरू करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश की सभी पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक पेंशन, 300 यूनिट मुफ्त बिजली तथा प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये का बीमा उपलब्ध करवाने का प्रावधान होगा।
विधायक अनुराधा राणा ने क्षेत्र में क्रियान्वित किए जा रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि 15 अप्रैल, 2023 को मुख्यमंत्री द्वारा की गई सभी घोषणाओं को पूरा कर दिया गया है। बौद्ध संस्कृति की यह धरती करुणा और प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आम आदमी की समस्याओं को समझते हैं, क्योंकि वह स्वयं संघर्ष के रास्ते से आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री क्षेत्र में अगले दो-तीन वर्षों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत हैं। पहले क्षेत्र में चिकित्सकों की कमी थी, लेकिन अब विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है और क्षेत्र को 12 वर्षों बाद खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) मिला है। विधायक ने नौतोड़ के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस इस मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रही है और राज्य सरकार लगातार राज्यपाल के समक्ष इस विषय को उठा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्पीति में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास कर रही है। क्षेत्र में 75 करोड़ रुपये की लागत से आइस हॉकी ग्राउंड तथा आठ करोड़ रुपये की लागत से क्रिकेट ग्राउंड स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, स्टार गेजिंग की शुरुआत की गई है और शीतकालीन खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।

शिमला: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के बयान पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान की प्रतिक्रिया पर कड़ा पलटवार किया है। शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के मंत्रियों को हिमाचल प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित विकास परियोजनाओं का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के मंत्री तथ्यों का जवाब देने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में लगे हुए हैं। रणधीर शर्मा ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में केंद्र और राज्य के समन्वय से हिमाचल प्रदेश में सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और औद्योगिक विकास की अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कई परियोजनाएं प्रशासनिक देरी, लंबित स्वीकृतियों और वित्तीय प्रबंधन की समस्याओं से प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने कहा “कांग्रेस के मंत्रियों ने केवल एक ऐसा राजनीतिक चश्मा पहन रखा है जिसमें उन्हें मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का दिखाया हुआ चाल-चरित्र ही नजर आता है। उन्हें न केंद्र सरकार का सहयोग दिखाई देता है, न स्वीकृत परियोजनाएं और न ही उन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याएं।” रणधीर शर्मा ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश में विकास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान अनेक महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं। कांग्रेस सरकार को इनका तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए।
हिमाचल में ₹1.20 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं और सहायता प्रावधानों का उल्लेख
रणधीर शर्मा ने कहा कि हाल की केंद्रीय समीक्षा में राष्ट्रीय राजमार्गों की ₹55,103 करोड़, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की ₹13,697 करोड़, भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल परियोजना की ₹13,410 करोड़ और चंडीगढ़-बद्दी रेल परियोजना की ₹1,540 करोड़ लागत का उल्लेख हुआ।इसी प्रकार किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की अनुमानित लागत ₹15,624 करोड़, रेणुकाजी बांध परियोजना की लगभग ₹7,000 करोड़ तथा लूहरी स्टेज-I परियोजना की लगभग ₹1,800 करोड़ है।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्स बिलासपुर पर ₹1,400 करोड़ से अधिक, तीन मेडिकल कॉलेजों के लिए लगभग ₹547 करोड़, ऊना पीजीआई सैटेलाइट सेंटर के लिए ₹495 करोड़, आईजीएमसी सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के लिए ₹200 करोड़, जायका स्वास्थ्य परियोजना के लिए ₹1,422 करोड़ तथा पीएम-अभीम के अंतर्गत लगभग ₹360 करोड़ की परियोजनाओं और सहायता का उल्लेख किया गया है।
इसके अतिरिक्त ऊना बल्क ड्रग पार्क के लिए ₹1,000 करोड़ का केंद्रीय अनुदान, विशेष पूंजीगत निवेश सहायता के अंतर्गत ₹2,381 करोड़ का प्रावधान, आपदा पुनर्निर्माण के लिए लगभग ₹2,006 करोड़ का पैकेज तथा बाह्य सहायता प्राप्त पुनर्निर्माण परियोजना के लिए लगभग ₹2,150 करोड़ का प्रावधान भी शामिल है। रणधीर शर्मा ने कहा कि इन मदों का कुल परियोजना एवं सहायता मूल्य ₹1.20 लाख करोड़ से अधिक बनता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें विभिन्न चरणों की परियोजना लागत, केंद्रीय सहायता और वित्तीय प्रावधान शामिल हैं, जिन्हें राज्य सरकार को एकमुश्त प्राप्त धनराशि नहीं कहा जा सकता। उन्होंने मांग की कि प्रदेश सरकार इन सभी परियोजनाओं में अब तक प्राप्त धन, व्यय की गई राशि और शेष कार्यों की स्थिति सार्वजनिक करे।
स्वास्थ्य विभाग की परियोजनाओं पर सरकार से सवाल
रणधीर शर्मा ने कहा कि केंद्रीय मंत्री नड्डा ने पीएम-अभीम योजना के अंतर्गत स्वीकृत लगभग ₹360 करोड़ के उपयोग और स्वास्थ्य सुविधाओं के निर्माण में हो रही देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर की परियोजना समीक्षा में नौ स्वीकृत क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से केवल एक के पूरा होने, 12 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में से किसी के भी पूरा नहीं होने तथा 73 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट में से 29 के निर्माण की जानकारी सामने आई थी।उन्होंने पूछा कि स्वास्थ्य मंत्री स्पष्ट करें कि इन संस्थानों में से कितने वर्तमान में मरीजों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं और शेष कब तक संचालित होंगे।शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया देने के बजाय अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं, स्वीकृत पदों, रिक्तियों और लंबित परियोजनाओं का विस्तृत विवरण जनता के सामने रखना चाहिए।
बल्क ड्रग पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क पर भी मांगा जवाब
रणधीर शर्मा ने कहा कि ऊना बल्क ड्रग पार्क के लिए केंद्र सरकार द्वारा ₹1,000 करोड़ का अनुदान स्वीकृत किया गया है। परियोजना समीक्षा के अनुसार ₹225 करोड़ जारी किए जा चुके हैं और लगभग ₹117 करोड़ का उपयोग हुआ है।उन्होंने कहा कि उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान को बताना चाहिए कि शेष राशि के उपयोग, औद्योगिक ढांचे के विकास और परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए क्या कार्ययोजना तैयार की गई है।उन्होंने मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए प्रस्तावित लगभग ₹100 करोड़ की केंद्रीय सहायता से संबंधित राज्य सरकार के निर्णयों पर भी स्पष्टीकरण मांगा। शर्मा ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
रेल परियोजनाओं में राज्य की लंबित हिस्सेदारी पर सवाल
रणधीर शर्मा ने कहा कि चंडीगढ़-बद्दी रेल परियोजना की लागत लगभग ₹1,540 करोड़ है। हाल की समीक्षा में राज्य सरकार की लगभग ₹231 करोड़ की लंबित हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया गया।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह राशि कब जारी की जाएगी।उन्होंने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल परियोजना में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा संबंधी लंबित प्रक्रियाओं को भी शीघ्र पूरा करने की मांग की।
आपदा सहायता और पुनर्निर्माण कार्यों का हिसाब दे सरकार
रणधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आपदा के बाद पुनर्निर्माण और पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सहायता और परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।उन्होंने लगभग ₹2,006 करोड़ के PDNA पैकेज और लगभग ₹2,150 करोड़ की बाह्य सहायता प्राप्त पुनर्निर्माण परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को प्रत्येक मद की स्वीकृति, वास्तविक प्राप्ति, व्यय और कार्यों की प्रगति अलग-अलग सार्वजनिक करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित लोगों के लिए समय पर पुनर्निर्माण कार्य पूरे करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
कांग्रेस मंत्रियों से पांच सवाल
रणधीर शर्मा ने पूछा कि केंद्र से स्वीकृत परियोजनाओं में अब तक कितनी राशि जारी हुई है और कितनी खर्च की गई है? स्वास्थ्य क्षेत्र की लंबित परियोजनाओं के पूरा होने की निर्धारित तिथि क्या है? बल्क ड्रग पार्क की प्रगति क्या है? रेल परियोजनाओं में राज्य की लंबित हिस्सेदारी कब जारी होगी? तथा आपदा पुनर्निर्माण के लिए उपलब्ध धनराशि से कितने कार्य पूरे किए गए हैं?उन्होंने कहा कि इन प्रश्नों का उत्तर आंकड़ों और दस्तावेजों के साथ दिया जाना चाहिए।रणधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपनी प्रशासनिक कमियों से ध्यान हटाने के लिए बार-बार केंद्र सरकार पर आरोप लगाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मंत्री यदि केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से असहमत हैं तो उन्हें परियोजनावार आधिकारिक विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।