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घुमारवीं /बिलासपुर: बद्धाघाट में 3.5 करोड़ रुपये से बनेगा फुटबॉल मैदान, मिलेंगी बेहतर खेल सुविधाएं – राजेश धर्माणी

घुमारवीं (बिलासपुर):  नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि विद्यार्थियों को जीवन में अपना लक्ष्य निर्धारित करने के साथ-साथ एक रोल मॉडल भी चुनना चाहिए, ताकि वे अपने भविष्य की दिशा तय कर सकें और उसे प्राप्त करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ सकें। राजेश धर्माणी आज घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत राजकीय उच्च पाठशाला चुवाड़ी तथा टकरेड़ा में विद्यार्थियों के साथ आयोजित संवाद सत्र के दौरान बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि समय का सदुपयोग, अनुशासन और निरंतर मेहनत सफलता की राह को आसान बनाते हैं। विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर नवाचार, अनुसंधान और नए कौशल सीखने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए, जिससे उनकी प्रतिभा निखरेगी और वे भविष्य में देश एवं प्रदेश की आर्थिक प्रगति में योगदान दे सकेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में लक्ष्य निर्धारण, समय प्रबंधन और अनुशासन के साथ-साथ सांस्कृतिक, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों तथा कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने के लिए भी प्रेरित किया।
बद्धाघाट में 3.5 करोड़ रुपये से बनेगा फुटबॉल मैदान, सुनिश्चित होगी बेहतर खेल सुविधाएं
संवाद सत्र के दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों से उनकी पसंद के खेलों के बारे में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने फुटबॉल में रुचि व्यक्त करने पर उन्होंने कहा कि घुमारवीं के बद्धाघाट में लगभग 3.5 करोड़ रुपये की लागत से फुटबॉल मैदान का निर्माण किया जा रहा है। इस मैदान के बनने से क्षेत्र के बच्चों और युवाओं को फुटबॉल खेलने के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा स्थानीय खेल प्रतिभाओं को अपनी क्षमता निखारने और आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।
विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय कुल्लू-मनाली तथा बाघा बार्डर, गोल्डन टैंपल शैक्षणिक भ्रमण की होगी व्यवस्था
संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने तकनीकी शिक्षा मंत्री के समक्ष शैक्षणिक भ्रमण पर जाने की इच्छा व्यक्त की। इस पर राजेश धर्माणी ने कहा कि चुवाड़ी स्कूल के बच्चों के लिए दो दिवसीय कुल्लू-मनाली जबकि टकरेड़ा स्कूल के विद्यार्थियों के लिए बाघा बार्डर, गोल्डन टेंपल तथा जलियांवाला बाग अमृतसर का शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा और उनके ज्ञान का दायरा भी बढ़ेगा।
विद्यार्थी अनुशासित जीवन अपनाएं, संतुलित आहार लें तथा फास्ट फूड से रहें दूर
श्री धर्माणी ने विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए अपनी दिनचर्या में व्यायाम, खेलकूद और मेडिटेशन को शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सुबह जल्दी उठने, नियमित व्यायाम करने और संतुलित आहार अपनाने से शरीर स्वस्थ रहता है तथा कार्यक्षमता में भी वृद्धि होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को हरी सब्जियां और पौष्टिक भोजन खाने, फास्ट फूड से दूरी बनाए रखने तथा पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का सेवन कम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को क्रोध और इष्र्या जैसी नकारात्मक भावनाओं से दूर रहकर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतिदिन समाचार पत्रों की सुर्खियां और पत्रिकाएं पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया। इससे विद्यार्थियों को देश-दुनिया में होने वाली घटनाओं की जानकारी मिलेगी और सामान्य ज्ञान में भी वृद्धि होगी। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, प्रभावी संवाद कौशल और मंच पर बोलने का आत्मविश्वास विकसित करने पर विशेष ध्यान देने को भी कहा। उन्होंने विद्यालय में कम्युनिकेशन क्लब स्थापित करने पर बल देते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को अपने विचार व्यक्त करने और मंच पर बोलने का नियमित अवसर मिलेगा। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य रचनात्मक कार्यों में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया, ताकि उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास हो सके।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनना, सही निर्णय लेना और समाज एवं देश के विकास में सकारात्मक योगदान देना भी है। विद्यार्थियों को जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

इस अवसर पर उप निदेशक उच्च शिक्षा (स्कूल) नरेश चंदेल सहित विद्यालय के सभी अध्यापक उपस्थित रहे।

शिमला: मशोबरा में राज्य स्तरीय महिला किसान दिवस आयोजित, 150 से अधिक महिला किसानों ने लिया भाग

कृषि में महिलाओं की भूमिका और योगदान पर हुई चर्चा

शिमला: महिला किसान दिवस के अवसर पर शिमला जिला के मशोबरा में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 150 से अधिक महिला किसानों ने भाग लिया। इस दौरान कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका, उनके योगदान तथा आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों के प्रसार में उनकी भागीदारी पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि प्रशिक्षण एवं विस्तार संस्थान के निदेशक डॉ. संतोष गुप्ता ने की। उन्होंने कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए कृषि विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों डॉ. उपेंद्र शर्मा और डॉ. संगीता ने महिला किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिला किसानों को प्राकृतिक खेती की पद्धतियों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें इन तकनीकों को अपनाने और अन्य किसानों तक इनके प्रसार के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

राज्य स्तरीय कार्यक्रम के अतिरिक्त शिमला जिला के सभी विकास खंडों में भी महिला किसान दिवस मनाया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने, उनके अनुभवों को साझा करने तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, मशोबरा के सहनिदेशक डॉ. दिनेश ठाकुर, परियोजना निदेशक (आतमा) शिमला डॉ. देवी चंद कश्यप, परियोजना उपनिदेशक (आतमा) डॉ. अनिल ठाकुर सहित आतमा परियोजना के सभी अधिकारी उपस्थित रहे।

CM सुक्खू ने रंगरिक में बालिका छात्रावास के लिए की 2 करोड़ रुपये देने की घोषणा

स्वास्थ्य उपकेन्द्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में किया जाएगा स्तरोन्नत
‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री ने रंगरिक में रात्रि प्रवास किया

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश सरकार के ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम के तहत स्पीति घाटी के रंगरिक में रात्रि प्रवास किया। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने मंजुश्री में जनसमस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने रंगरिक स्थित स्वास्थ्य उपकेन्द्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्तरोन्नत करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दुर्गम गांवों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को करीब से समझने के लिए वह इन गांवों में रात्रि प्रवास कर रहे हैं। इस दौरान वह संवाद के माध्यम से जनसमस्याओं से अवगत होते हैं और उनके समाधान को केन्द्र में रखकर विभिन्न योजनाओं को प्रदेश के बजट में शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के महत्त्वाकांक्षी ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम के तहत जनसमस्याओं के समाधान को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान की जा रही है। विकास की मुख्यधारा से वंचित समाज के संवेदनशील वर्गों तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी वह प्रदेश के कई दुर्गम क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कदम उठाए हैं।
रंगरिक प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने सोनम फुंसुक के आवास पर रात्रि विश्राम किया। स्थानीय निवासियों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और उन्हें स्थानीय व्यंजन परोसे।
मुख्यमंत्री ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, रंगरिक, के बालिका छात्रावास का औचक निरीक्षण भी किया। उन्होंने छात्रावास में रह रही छात्राओं से बातचीत की और उनकी समस्याएं ध्यानपूर्वक सुनीं। छात्राओं द्वारा बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग पर मुख्यमंत्री ने नए बालिका छात्रावास के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।
उन्होंने छात्राओं को आश्वस्त किया कि उनकी अन्य समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा। इनमें छात्रावास की चारदीवारी का निर्माण, दो मल्टी-टास्क वर्करों और एक महिला वार्डन की नियुक्ति तथा छात्रावास में पानी की कमी की समस्या का समाधान शामिल है।
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने की स्थित वृद्धाश्रम का दौरा किया और वहां रह रहे वृद्धजनों से संवाद कर उन्हें उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
इस अवसर पर विधायक अनुराधा राणा भी उपस्थित रहीं।

नए जिलों के गठन पर सुधीर शर्मा का तंज, बोले— ‘घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने’

शिमला।: हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश सरकार की ओर से नए जिलों के गठन के लिए आयोग बनाने की चर्चा के बीच भाजपा नेता ओर धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा ने सरकार की मंशा, आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।शिमला विश्वविद्यालय में हमीरपुर छात्र एसोसिएशन के हमीर संगम में पहुचे सुधीर शर्मा ने नए जिलों के गठन की कवायद को चुनावी शगूफा करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
सुधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए नए जिलों के गठन जैसे फैसले पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने।” उनका कहना है कि जब प्रदेश पहले से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तो ऐसे में नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन से पैदा होने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को उठाना आसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि आज जरूरत नए जिले बनाने की नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और आम जनता के काम समय पर पूरा करने की है। सरकार को सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ स्मार्ट वर्किंग पर जोर देना चाहिए, ताकि लोगों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
सुधीर शर्मा ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनियाभर में तेजी से तरक्की हुई है। ऐसे में उनका व्यक्तिगत मानना है कि नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने के बजाय मौजूदा व्यवस्था को मजबूत और तकनीक आधारित बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चाहे नए जिले बनाने की बात हो या अन्य प्रशासनिक इकाइयों के गठन की, सरकार को पहले यह देखना चाहिए कि इससे आम जनता को वास्तव में कितना लाभ मिलेगा। प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल जिलों की संख्या बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान सुनिश्चित करना होना चाहिए।
सुधीर ने कहा प्रदेश में ऐसे कई रोजमर्रा के मुद्दे हैं, जिनके लिए लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकों के काम जल्द से जल्द हों और सरकारी फाइलों का निपटारा समयबद्ध तरीके से किया जाए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में ही लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो नई इकाइयां बनाने से पहले इन समस्याओं का समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है?

‘छह महीने तक लोग इसी चर्चा में उलझे रहेंगे’

नए जिलों के गठन को लेकर सुधीर शर्मा ने सरकार पर जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नए जिलों की चर्चा शुरू होने के बाद लोग इसी बहस में उलझे रहेंगे कि कौन-सा नया जिला बनेगा, उनका क्षेत्र किस जिले में आएगा और उन्हें किस जिला मुख्यालय में जाना पड़ेगा।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने लगभग छह महीने तक जनता को इस चर्चा में उलझाए रखने का रास्ता तलाश लिया है। इस दौरान प्रदेश के दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दे पीछे छूट सकते हैं, लेकिन वास्तविक समस्याएं अपनी जगह बनी रहेंगी।
सुधीर शर्मा ने कहा कि नए जिलों के गठन की चर्चा से प्रदेश की आर्थिक चुनौतियां, विकास कार्यों से जुड़ी समस्याएं और आम जनता की परेशानियां खत्म नहीं होने वाली हैं। सरकार को उन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, जिनका सीधा संबंध प्रदेश के विकास और लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से है।

नए जिलों पर कई सौ करोड़ का खर्च, पैसा कहां से आएगा?

सुधीर शर्मा ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले से ही वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में नए जिलों का गठन करने से राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
उन्होंने दावा किया कि नए जिलों के गठन पर प्रदेश को कई सौ करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है, तो इस अतिरिक्त खर्च के लिए धन कहां से आएगा?
सुधीर शर्मा ने कहा कि नए जिलों के गठन के लिए केवल घोषणा करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए प्रशासनिक ढांचे का विस्तार करना पड़ेगा और विभिन्न सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी। ऐसे में सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि नए जिलों के गठन पर कितना खर्च आएगा और उसके लिए वित्तीय संसाधन कहां से जुटाए जाएंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार कर्ज लेकर राज्य का संचालन कर रही है। ऐसे हालात में किसी भी नई प्रशासनिक व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके आर्थिक परिणामों का आकलन करना जरूरी है।
भाजपा नेता ने कहा कि सरकार को यह भी देखना चाहिए कि नए जिलों पर होने वाले खर्च का प्रदेश की दूसरी विकासात्मक जरूरतों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उनके अनुसार, आर्थिक संसाधनों का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

‘सड़कों के गड्ढे भरने के पैसे नहीं, नए जिले बनाने की बात’

सुधीर शर्मा ने कहा कि जब सड़कों के गड्ढे भरने जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध करवाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो ऐसे में नए जिलों के गठन पर खर्च करने की योजना पर भी विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को सबसे पहले सड़कों की मरम्मत, विकास कार्यों और आम जनता को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर ध्यान देना चाहिए। लोगों को बेहतर सड़कें, प्रभावी प्रशासन और समय पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध करवाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे मौजूद हैं, तो सरकार नए जिलों के गठन को प्राथमिकता क्यों दे रही है?

10 गारंटियों को लेकर भी सरकार पर निशाना

भाजपा नेता सुधीर शर्मा ने कांग्रेस सरकार की चुनावी गारंटियों का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति और चुनावी गारंटियों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नए जिलों के गठन की चर्चा शुरू करना जनता का ध्यान दूसरी तरफ मोड़ने की कोशिश है।
उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार के सामने पहले से वित्तीय चुनौतियां हैं, तो नए जिलों के गठन के लिए अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था कैसे की जाएगी?
सुधीर शर्मा ने कहा कि सरकार को चुनाव के दौरान किए गए वादों और प्रदेश की मौजूदा जरूरतों पर जवाब देना चाहिए। उनके अनुसार, जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।

सुधीर शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों और आईएएस अधिकारियों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ अधिकारियों की संख्या और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर चर्चा होती है, वहीं दूसरी तरफ नए जिलों के गठन की बात की जा रही है।
उन्होंने आशंका जताई कि नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने से सरकारी कामकाज की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है। उन्होंने कहा कि कई बार एक अधिकारी से फाइल दूसरे अधिकारी के पास और फिर तीसरे तथा चौथे अधिकारी के पास जाती रहती है। इससे कामकाज में देरी होती है और आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

संस्कृति और भाषा को ध्यान में रखकर बने थे जिले

सुधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में पहले हुए जिलों के गठन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में जिलों की प्रशासनिक इकाइयां बनाते समय स्थानीय संस्कृति, भाषा और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया था।
उन्होंने कहा कि जिलों का गठन एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय होता है। इसलिए इस तरह के फैसले लेते समय केवल राजनीतिक या प्रशासनिक पहलुओं को ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।
उनके अनुसार, नए जिलों के गठन पर चर्चा करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसकी वास्तविक जरूरत क्या है, इससे जनता को क्या लाभ मिलेगा और इसके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था कैसे होगी।

शिमला: अशोक सिंघल का जीवन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति समर्पण की प्रेरणा – राज्यपाल

राज्यपाल बोले- सनातन संस्कृति केवल हमारी प्राचीन विरासत नहीं है, बल्कि जीवन को समझने और जीने की एक समग्र दृष्टि है

राज्यपाल ने अशोक सिंघल को श्रद्धांजलि अर्पित की

शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल का जीवन और उनकी विरासत समाज को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और अपने आचरण, सामाजिक जीवन और भावी पीढ़ियों को दिए जाने वाले संस्कारों के माध्यम से जीवंत बनाए रखने की जिम्मेदारी का स्मरण करवाती हैं।
राज्यपाल ने आज शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने सिंघल के जीवन को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और हिंदू समाज की सांस्कृतिक चेतना के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने जीवनपर्यन्त भारतीय संस्कृति के संरक्षण, हिंदू समाज को संगठित करने और देश की प्राचीन परंपराओं के प्रति गौरव की भावना जागृत करने के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन हमें यह स्मरण करवाता है कि किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी आर्थिक और भौतिक उपलब्धियों में ही नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और अपनी विरासत के प्रति गौरव में भी निहित होती है।
सनातन की शाश्वत प्रासंगिकता पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि सनातन संस्कृति केवल हमारी प्राचीन विरासत नहीं है, बल्कि जीवन को समझने और जीने की एक समग्र दृष्टि है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जैसे वैश्विक बंधुत्व की भावना आदर्श भारतीय संस्कृति के सार को अभिव्यक्त करती हैं, जो संपूर्ण मानवता के कल्याण की कामना करती है।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने सांस्कृतिक जागरूकता को व्यापक जन-विमर्श का हिस्सा बनाने, पारंपरिक मूल्यों की समझ को बढ़ावा देने और लोगों को उनकी सभ्यतागत पहचान से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य किया।
राज्यपाल ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास में अशोक सिंघल का महत्वपूर्ण स्थान है। विश्व हिंदू परिषद के माध्यम से उन्होंने इस आंदोलन को संगठित करने, जनसमर्थन का विस्तार करने और श्री राम जन्मभूमि से जुड़ी आस्था के विषय को राष्ट्रीय परिदृश्य में प्रमुखता से लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनकी विरासत का सम्मान करने का सबसे सार्थक तरीका सेवा, अनुशासन, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने में है। उन्होंने लोगों से भारत की सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करने, उसके ज्ञान और परंपराओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने तथा सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी वरिष्ठ महिला कार सेविका राजदुलारी सूद और योगाचार्य विनोद को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया।
इससे पूर्व, कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. वीर सिंह रंगड़ा ने अशोक सिंघल के जीवन, आदर्शों और योगदान का स्मरण किया।
मुख्य वक्तव्य देते हुए विश्व हिंदू परिषद के केन्द्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने सामाजिक सद्भाव, वैदिक शिक्षा, संत समाज और गौ-संरक्षण के क्षेत्र में अशोक सिंघल के योगदान पर प्रकाश डाला।

शिमला: IGMC से डॉक्टरों की सुपर स्पेशिलिटी चमियाणा स्थानांतरण पर सैमडिकोट ने जताया कड़ा विरोध, सरकार को सौंपा 10 सूत्रीय मांग पत्र

शिमला: इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला के फैकल्टी सदस्यों और विशेषज्ञ डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाला ‘SAMDCOT एसोसिएशन’ने हाल ही में जारी प्रशासनिक आदेशों, प्रस्तावों और विभागों में किए गए बदलावों पर गहरी चिंता और विरोध जताया है। इन आदेशों के तहत IGMC शिमला से फैकल्टी सदस्यों, विभागों और क्लिनिकल जिम्मेदारियों को ‘अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटीज’ (AIMSS), चमियाना में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि बिना किसी योजना और सुविधा के IGMC से फैकल्टी, यूनिट और विभागों को AIMSS चमियाना शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे मरीजों की देखभाल और पढ़ाई दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है। 14 और 15 अक्टूबर को हुई जनरल बॉडी मीटिंग के बाद एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।  

एसोसिएशन ने बताया कि गायनोकोलॉजी जैसी जरूरी सेवाओं को बिना अतिरिक्त स्टाफ, बेड और सपोर्ट सिस्टम के चमियाना भेजा जा रहा है। IGMC लक्कड़ बाजार और चमियाना के बीच कोई तय रेफरल सिस्टम नहीं है। ऐसे में गंभीर, बुजुर्ग और ग्रामीण मरीजों को एक कैंपस से दूसरे कैंपस तक भटकना पड़ रहा है। इससे इलाज में देरी, शारीरिक परेशानी और आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

एसोसिएशन ने कहा है कि IGMC शिमला केवल एक सामान्य अस्पताल नहीं है, यह हिमाचल प्रदेश का प्रमुख और मूल संस्थान है। पिछले छह दशकों से यह संस्थान अंडरग्रेजुएट (MBBS) और पोस्टग्रेजुएट (MD/MS) मेडिकल ट्रेनिंग, क्लिनिकल रिसर्च और राज्य के दुर्गम इलाकों में मरीजों को विशेष स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए एक शैक्षणिक आधार (बैकबोन) के रूप में कार्य कर रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि वह AIMSS चमियाना के विकास का विरोध नहीं करता है। उन्नत सुपर-स्पेशलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। हालांकि किसी नए संस्थान का विकास मौजूदा स्वास्थ्य नेटवर्क को मजबूत करने वाला होना चाहिए न कि उस मूल संस्थान को ही खत्म करके,जिस पर पूरा सिस्टम टिका है। मुख्य बिंदु 1. संसाधनों के पुनर्वितरण से कर्मचारियों की कमी दूर नहीं होती IGMC शिमला से अनुभवी फैकल्टी और डॉक्टरों को बार-बार AIMSS चामियाना भेजने से केवल कर्मचारियों की कमी एक कैंपस से दूसरे कैंपस में स्थानांतरित हो जाती है। इससे हिमाचल प्रदेश में विशेषज्ञों की कुल संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं होती। पहले से ही अत्यधिक काम के बोझ तले दबे कर्मचारियों को इधर-उधर करने से दोनों संस्थानों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इससे मूल कॉलेज (IGMC) में महत्वपूर्ण क्लिनिकल सेवाओं में कमी आती है जबकि नए केंद्र को भी केवल आंशिक या अपर्याप्त स्टाफ ही मिल पाता है। 2. NMC के नियमों और मेडिकल शिक्षा के लिए खतरा IGMC शिमला में फैकल्टी की नियुक्ति पूरी तरह से ‘नेशनल मेडिकल कमीशन’ (NMC) के अनिवार्य नियमों के अनुसार की गई है। मनमाने ढंग से किए गए तबादलों और प्रतिनियुक्तियों (deputations) के कारण फैकल्टी की संख्या अनिवार्य न्यूनतम सीमा से नीचे जा सकती है। इससे अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों की मान्यता खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि यही फैकल्टी IGMC शिमला में पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए गाइड या को-गाइड के रूप में काम करती है। इसके अलावा इससे क्लिनिकल रेजीडेंसी ट्रेनिंग प्रोग्राम प्रभावित होते हैं और दशकों की मेहनत से बनी शैक्षणिक साख को नुकसान पहुंचता है।

 एसोसिएशन की 10 प्रमुख मांगें

1. तबादलों पर तत्काल रोक: IGMC शिमला से AIMSS चामियाना में फैकल्टी, यूनिट्स और विभागों के सभी प्रस्तावित और लंबित तबादलों पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही 2 महीने की रोटेशनल पॉलिसी (बारी-बारी से तैनाती की नीति) को फिर से लागू किया जाए। 

2. पिछले पुनर्गठनों की समीक्षा: हाल ही में किए गए तबादलों और तैनाती के आदेशों की फिर से जांच की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे तय सेवा नियमों और संस्थान की कार्य-सीमाओं के अनुरूप हैं। 3. नई भर्तियों के लिए अलग व्यवस्था: AIMSS चमियाना में स्टाफ की जरूरतें पूरी करने के लिए IGMC के मौजूदा कर्मचारियों को वहां भेजने के बजाय, फैकल्टी, नर्सिंग अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों की सीधी और नियमित भर्ती की जाए। 

4. संयुक्त उच्च-स्तरीय समिति का गठन: बुनियादी ढांचे, काम के बोझ और मानव संसाधन की जरूरतों का आकलन करने के लिए एक समीक्षा समिति बनाई जाए। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, अस्पताल प्रशासक और फैकल्टी एसोसिएशन के चुने हुए प्रतिनिधि शामिल हों। 

5. NMC के नियमों का सख्ती से पालन: यह सुनिश्चित किया जाए कि तैनाती के सभी आदेश लिखित मूल्यांकन के आधार पर हों, ताकि IGMC शिमला में NMC के स्टाफिंग नियमों का पूरी तरह से पालन होता रहे। 

6. संस्थानों के बीच मरीजों को भेजने (रेफरल) के लिए एक मानक ढांचा: एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में मरीजों को भेजने की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए स्पष्ट क्लिनिकल प्रोटोकॉल, पारदर्शी ड्यूटी रोस्टर, समर्पित परिवहन और एकीकृत डायग्नोस्टिक (जांच) सुविधाएं तैयार की जाएं। 

7. सेवा संबंधी असमानताओं को दूर करना: समान क्लिनिकल ग्रेड वाले पदों के लिए एक जैसी NPA (नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस) नीति लागू की जाए और सभी टीचिंग फैकल्टी के लिए छुट्टियों के मानक नियम सुनिश्चित किए जाएं। 

8. कैडर नियमों में संस्थान की स्वायत्तता: साझा कैडर नीति के लिए पारदर्शी नियम बनाए जाएं, ताकि फैकल्टी के करियर विकास, शैक्षणिक शोध के समय और उनके कार्यकाल की सुरक्षा हो सके।

 9. संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) से अनिवार्य परामर्श: प्रशासन में कोई भी बड़ा बदलाव या पुनर्गठन करने से पहले, विभागों के प्रमुखों और फैकल्टी संगठनों के साथ व्यवस्थित और पूर्व-परामर्श किया जाए। 

10. समय-सीमा के साथ लिखित योजना: इन प्रशासनिक और संचालन संबंधी चुनौतियों को हल करने के लिए एक स्पष्ट और समय-सीमा वाली नीतिगत रूपरेखा (रोडमैप) जारी की जाए। 

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उन्हें लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से विरोध करने पर मजबूर होना पड़ेगा। 14 और 15 अक्टूबर को SAMDCOT की एक आम सभा (जनरल बॉडी मीटिंग) आयोजित की गई, जिसमें ऊपर बताए गए विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। सभा में मौजूद सभी सदस्यों ने इन प्रस्तावों का सर्वसम्मति से समर्थन किया है।

 

किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई, विविधीकृत फसल उत्पादन, प्राकृतिक खेती व सुदृढ़ विपणन व्यवस्था से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता – कृषि मंत्री

शिमला: कृषि मंत्री, हिमाचल प्रदेश प्रो. चंद्र कुमार ने आज कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभागीय योजनाओं एवं हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना चरण-II (जाइका) तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न योजनाओं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने किसानों के हित में संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने तथा विभागीय सेवाओं का लाभ पात्र किसानों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि विभाग ने एग्रीस्टैक प्रोजैक्ट के अन्तर्गत वर्ष 2025-26 में केन्द्र सरकार से 140 करोड़ प्राप्त किए हैं तथा इस वर्ष 400 करोड़ के लिये योग्य हो गए हैं। मंत्री ने हाल ही में स्थापित किसान हैल्पलाईन सैन्टर का भी दौरा कर इसकी कार्यप्रणाली का जायजा लिया तथा इसके व्यापक प्रसार के निर्देश दिए।

बैठक में कृषि निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह जसरोटिया ने विभाग की विभिन्न योजनाओं, उपलब्धियों एवं प्रगति से अवगत करवाया। उन्होंने कृषि क्षेत्र के विकास एवं किसानों के हित में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत ₹28.31 करोड़ तथा कृषि उन्नति योजना (KY) के अंतर्गत ₹36.51 करोड़, अर्थात कुल ₹64.82 करोड़ की द्वितीय किस्त जारी करवाने के लिए मंत्री जी का आभार व्यक्त किया।

बैठक में प्राकृतिक खेती के अंतर्गत हल्दी उत्पादन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जाइका परियोजना के माध्यम से हमीरपुर, पालमपुर, सोलन और मंडी क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती से उत्पादित हल्दी को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि मंत्री ने प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने तथा उत्पादों की गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बल दिया।

बैठक में 5 अक्तूबर, 2026 तक एचपीसीडीपी चरण-II की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत प्रदेश में उच्च मूल्य वाली फसलों, विशेषकर सब्जियों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य उत्पादन अवसंरचना विकसित करना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा कृषि उत्पादों के विपणन के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करना है।परियोजना के अंतर्गत प्रदेश में कुल 306 उप-परियोजनाएं संचालित की जाऐगी। अब तक कुल 174 उप-परियोजनाओं का र्निमाण करके 4,462.16 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की गई है, जबकि 1,323.80 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों की खेती के माध्यम से फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया गया है। परियोजना के अंतर्गत 10 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन किया गया है तथा 238 स्वयं सहायता समूह स्थापित किए गए हैं।

परियोजना के पात्र एवं गैर-पात्र घटकों सहित कुल 1,010.60 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान के मुकाबले कुल व्यय 348.26 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखने, व्यय एवं प्रतिपूर्ति संबंधी प्रक्रियाओं में तेजी लाने तथा परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई, विविधीकृत फसल उत्पादन, प्राकृतिक खेती तथा सुदृढ़ विपणन व्यवस्था से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर किसानों की उत्पादकता, आय और आजीविका में सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

कृषि मंत्री ने प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने तथा उत्पादों की गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बल दिया। कृषि संसाधनों के वैज्ञानिक मानचित्रण और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभाग के 50 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान देहरादून में रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। किसानों की आय बढ़ाने, पारंपरिक कृषि पद्धतियों के संरक्षण तथा कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बैठक में देशी गायों की खरीद पर सहायता, गौशालाओं में लाइनिंग, हल्दी की खेती को प्रोत्साहन तथा स्थानीय एवं पारंपरिक फसलों के प्रदर्शन आयोजित करने जैसे प्रावधानों पर भी चर्चा की गई, साथ में मंत्री जी ने हल्दी के उत्पादों के विपणन को तलाश करने के भी निर्देश दिये।

कृषि मंत्री ने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, किसानों के साथ बेहतर संवाद तथा कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के अधिकाधिक उपयोग के माध्यम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।

पालमपुर: 19 अक्टूबर को होगा श्रीराम मंदिर संकल्प-पट्टिका एवं डॉ. शिव कुमार की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण

पालमपुर: द पालमपुर रोटरी आई फाउंडेशन, मरांडा, द पालमपुर रोटरी हेल्पएज फाउंडेशन, रोटरी भवन ट्रस्ट, पालमपुर एवं रोटरी क्लब पालमपुर के संयुक्त तत्वावधान में 19 अक्टूबर, 2026 को रोटरी भवन, पालमपुर में पूर्व केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार एवं पूर्व मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश श्रद्धेय श्री शांता कुमार जी की इच्छा से श्रीराम मंदिर संकल्प-पट्टिका तथा डॉ. शिव कुमार जी की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा।

वर्ष 1989 में पालमपुर में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की रोटरी भवन में आयोजित बैठक में श्रीराम मंदिर निर्माण के समर्थन में ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया था। इस ऐतिहासिक प्रसंग की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से रोटरी भवन, पालमपुर में श्रीराम मंदिर संकल्प-पट्टिका स्थापित की जा रही है। 19 अक्टूबर को होने वाला इसका अनावरण पालमपुर के इतिहास से जुड़ने के इस महत्त्वपूर्ण प्रसंग को स्मरण करने का विशेष अवसर होगा।

समारोह के दौरान डॉ. शिव कुमार जी की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण भी किया जाएगा। डॉ. शिव कुमार जी द पालमपुर रोटरी आई फाउंडेशन, मरांडा, द पालमपुर रोटरी हेल्पएजक्लब फाउंडेशन, रोटरी भवन ट्रस्ट, पालमपुर तथा रोटरी पालमपुर के संस्थापक अध्यक्ष रहे। रोटरी संस्थाओं की स्थापना और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मानपूर्वक स्मरण करने के उद्देश्य से उनकी आवक्ष प्रतिमा स्थापित की जा रही है। दोनों अनावरण श्रद्धेय श्री शांता कुमार जी के कर-कमलों से संपन्न होंगे।

इस संबंध में जानकारी देते हुए श्री के. जी. बुटेल, अध्यक्ष, द पालमपुर रोटरी आई फाउंडेशन, मरांडा एवं रोटरी भवन ट्रस्ट, पालमपुर ने बताया कि समारोह 19 अक्टूबर, को प्रातः 11:00 बजे रोटरी भवन, पालमपुर में आयोजित होगा।

शिमला: अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी पर विश्व हिंदू परिषद हिमाचल प्रदेश ने किया कार्यक्रम आयोजित

अशोक सिंघल के जीवन व उनके द्वारा वेद शिक्षा, संत समाज, गुरुकुल, गौरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को लोगों के समक्ष रखा

शिमला: विश्व हिंदू परिषद हिमाचल प्रदेश द्वारा अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष के निमित्त देश भर में कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी निमित्त हिमाचल का उद्धघाटन कार्यक्रम गेयटी थिएटर, शिमला में रहा। इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के  राज्यपाल  कविन्द्र गुप्ता  विशेष अतिथि के रूप में, विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा  मुख्य वक्ता के रूप में तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघ चालक प्रो. वीर सिंह रांगड़ा , कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। पूज्य स्वामी तन्महिमा नंद  महाराज रामकृष्ण मिशन का भी आशीर्वचन उपस्थित लोगों को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्र गीत तथा राष्ट्र गान से हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन किया किया। लेखराज राणा क्षेत्र मंत्री विश्व हिंदू परिषद् ने कार्यक्रम की भूमिका रखी। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. वीर सिंह रांगड़ा ने अशोक सिंघल के जीवन पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता बजरंग लाल बागड़ा केंद्रीय महामंत्री विहिप ने श्रीराम जन्मभूमि के पुरोधा अशोक सिंघल के जीवन तथा उनके द्वारा समरसता, वेद शिक्षा,संत समाज, गुरुकुल, गौरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को लोगों के समक्ष रखा।
कार्यक्रम में वरिष्ठ महिला कारसेवक राजदुलारी सूद  तथा योगाचार्य विनोद  को सम्मानित किया गया।
 राज्यपाल कवीन्द्र गुप्ता ने जन्मभूमि के प्रति अपने कर्तव्यों, अपने संस्कारों तथा अशोक सिंघल  के द्वारा हिंदू समाज के प्रति किए गए कार्यों को विस्तृत रुप से प्रस्तुत किया साथ ही श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में उनके महत्वपूर्ण योगदान को और उनके द्वारा किए गए कार्यों को अपने जीवन में उतारने का आवाहन किया। विहिप के प्रांत अध्यक्ष डॉ. केशव वर्मा  ने उपस्थित कार्यकर्ताओं तथा अधिकारियों, प्रेस, तथा विभिन्न संगठनों से आए कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रांत मंत्री अधिवक्ता तुषार डोगरा  द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद, मातृशक्ति, दुर्गा वाहिनी राष्ट्रीय सेविका समिति, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विभिन्न संस्थाओं के प्रमुख कार्यकर्ता कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

हिमाचल : फोटो टाइप सैटर ऑपरेटर की डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में 18 और उम्मीदवारों को मौका

हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) हमीरपुर द्वारा पोस्ट कोड-25008 के तहत की जा रही फोटो टाइप सैटर ऑपरेटर की भर्ती प्रक्रिया की डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए मेरिट आधार पर 18 और उम्मीदवारों को बुलाया जा रहा है।

आयोग के सचिव डॉ. विक्रम महाजन ने बताया कि फोटो टाइप सैटर ऑपरेटर के पदों को भरने के लिए आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) का परिणाम 20 जुलाई को घोषित किया गया था तथा मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था। उन्होंने बताया कि अधिकतम विज्ञापित पदों को भरने और वेटिंग पैनल तैयार करने के लिए अब मेरिट के आधार पर ही 18 और उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का मौका दिया जा रहा है।

डॉ. विक्रम महाजन ने बताया कि इन सभी 18 उम्मीदवारों के रोल नंबर आयोग की वेबसाइट पर डाल दिए गए हैं। इनकी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन 19 अक्तूबर को सुबह 10 बजे आयोग के कार्यालय में आरंभ होगी। इन उम्मीदवारों को उनकी ईमेल आईडी पर सूचित किया जाएगा। उन्हें अलग से बुलावा पत्र नहीं भेजे जाएंगे। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय इन उम्मीदवारों को अपने साथ सभी आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रतियां, इनकी सेल्फ अटेस्टड फोटो प्रतियों के दो-दो सैट, आवेदन पत्र की डाउनलोडड कॉपी और आईडी प्रूफ इत्यादि साथ लाने होंगे।

सचिव ने बताया कि अगर कोई उम्मीदवार निर्धारित तिथि को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए उपस्थित नहीं होता है तो उसे कोई और अवसर नहीं दिया जाएगा।