


घुमारवीं ग्रीष्मोत्सव के दौरान 8 और 9 अप्रैल को होगा दंगल, महिला एवं बाल केसरी वर्ग भी शामिल
राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव घुमारवीं में कुश्ती प्रतियोगिता के आयोजन को लेकर बैठक आयोजित
घुमारवीं, (बिलासपुर) : राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव घुमारवीं 2026 के दौरान आयोजित होने वाली कुश्ती प्रतियोगिता को लेकर मेला समिति अध्यक्ष एवं एसडीएम घुमारवीं गौरव चौधरी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में कुश्ती प्रतियोगिता के संयोजक एवं डीएसपी विशाल वर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं समिति सदस्य उपस्थित रहे।
एसडीएम गौरव चैधरी ने बताया कि घुमारवीं में 5 अप्रैल से 9 अप्रैल तक राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मेले के दौरान 8 और 9 अप्रैल को कुश्ती मुकाबलों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश सहित बाहरी राज्यों के पहलवानों के भाग लेने की संभावना है
उन्होंने बताया कि इस बार मेले में कुल पांच प्रमुख कुश्ती मुकाबले आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्य कुश्ती में विजेता पहलवान को 51,000 रुपये नकद राशि, गुर्ज (पारंपरिक प्रतीक) तथा उपविजेता को 41,000 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही हिमाचल कुमार कुश्ती का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें 16 से 21 वर्ष आयु वर्ग के पहलवान भाग ले सकेंगे। इस प्रतियोगिता में विजेता को 21,000 रुपये तथा उपविजेता को 15,000 रुपये की नकद राशि के साथ सम्मानित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इसी दौरान बिलासपुर कुमार कुश्ती प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के पहलवान भाग लेंगे तथा विजेता को 11,000 रुपये और उपविजेता को 9,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बार मेले में पहली बार बाल केसरी कुश्ती प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 15 वर्ष से कम आयु और 60 किलोग्राम से कम वजन वाले पहलवान भाग ले सकेंगे। इस प्रतियोगिता में विजेता को 5,100 रुपये तथा उपविजेता को 4,100 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त महिला कुश्ती प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा। महिला वर्ग में विजेता को 15,000 रुपये तथा उपविजेता को 11,000 रुपये की नकद राशि के साथ पुरस्कृत किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मेले के दौरान 8 अप्रैल को दोपहर 1ः00 बजे नगर परिषद प्रांगण से दंगल की भव्य जलेब (शोभायात्रा) निकाली जाएगी, जो मेला ग्राउंड तक पहुंचेगी। उन्होंने इस संबंध में सभी अधिकारियों को समयबद्ध सभी व्यवस्थाएं पूर्ण करने के निर्देश दिए।

धर्मशाला: जिला कांगड़ा में शिवरात्रि के पर्व के साथ ही पारंपरिक छिंज मेलों की रौनक शुरू हो जाती है। अगले चार-पांच महीनों तक गांवों, कस्बों और धार्मिक स्थलों पर लगने वाले ये मेले न केवल लोगों के जीवन में उत्साह और उमंग भरते हैं, बल्कि पहाड़ी लोक संस्कृति की जीवंत पहचान के रूप में भी सामने आते हैं। कांगड़ा के छिंज मेले वर्षों पुरानी उस परंपरा का हिस्सा हैं, जो आज भी लोगों के दिलों में उसी आत्मीयता और उत्साह के साथ जीवित है।
*शिवरात्रि के साथ शुरू होती है मेलों की रौनक*
शिवरात्रि के आगमन के साथ ही कांगड़ा के विभिन्न क्षेत्रों में मेलों का सिलसिला आरंभ हो जाता है। गांवों के मंदिर प्रांगण, खुले मैदान और पारंपरिक स्थल एक बार फिर लोगों की भीड़, रंग-बिरंगी दुकानों और उत्सव के माहौल से भर उठते हैं। इन मेलों में ग्रामीण जीवन की सादगी, पारंपरिक परिधान, लोक व्यवहार और आपसी मेलजोल की सुंदर झलक देखने को मिलती है। परिवार, रिश्तेदार, मित्र और दूर-दराज के लोग इन आयोजनों में पहुंचकर सामाजिक संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।
*मिट्टी के अखाड़े में दिखता है जोश और जुनून*
छिंज मेलों की सबसे बड़ी पहचान होती हैं पारंपरिक कुश्तियां। मिट्टी के अखाड़े में उतरते पहलवान जब अपने दांव-पेंच, ताकत और फुर्ती का प्रदर्शन करते हैं, तो पूरा माहौल रोमांच और उत्साह से भर उठता है। अखाड़े के चारों ओर जुटी भीड़ हर मुकाबले को सांसें थामकर देखती है।
कुश्ती प्रेमियों के लिए ये मेले किसी उत्सव से कम नहीं होते। छिंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि हमारी पुरानी खेल परंपरा, अनुशासन और युवा ऊर्जा का प्रतीक है। यह नई पीढ़ी को पारंपरिक खेलों से जोड़ने और मिट्टी से जुड़े खेलों के महत्व को समझाने का भी सशक्त माध्यम है।
*लोक संस्कृति और सामाजिक एकता का जीवंत मंच*
कांगड़ा के छिंज मेले केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, भाईचारे और सामाजिक एकता के सशक्त प्रतीक हैं। इन मेलों में हर वर्ग और हर उम्र के लोग एक साथ शामिल होते हैं। बच्चे झूलों और खिलौनों में खुशियां तलाशते हैं, महिलाएं खरीदारी और मेलजोल में भाग लेती हैं, युवा खेल और आयोजन का आनंद लेते हैं, जबकि बुजुर्ग इन मेलों में अपने पुराने समय की यादें फिर से जीते हैं।
ऐसे आयोजन समाज में अपनापन और सामुदायिक भावना को मजबूत करते हैं। बदलते समय में जब सामाजिक मेलजोल सीमित होता जा रहा है, छिंज मेले आज भी गांवों के सामाजिक जीवन की धड़कन बने हुए हैं।
*छोटे व्यापारियों के लिए बनते हैं आर्थिक सहारा*
छिंज मेलों का एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। मेलों के दौरान छोटे व्यापारी, रेहड़ी-फड़ी वाले, खिलौने बेचने वाले, खानपान की दुकानें लगाने वाले, झूला संचालक और घरेलू उपयोग की वस्तुएं बेचने वाले लोग अपनी दुकानें सजाते हैं।
चार-पांच महीनों तक चलने वाले इस मेले सीजन में अनेक परिवारों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। बहुत से छोटे कारोबारियों के लिए यह समय सालभर की आमदनी में अहम योगदान देता है। इस दृष्टि से छिंज मेले केवल परंपरा नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका और स्थानीय बाजार की मजबूती का भी महत्वपूर्ण आधार हैं।
*आस्था, परंपरा और उत्सव का अनोखा संगम*
कांगड़ा के अधिकतर छिंज मेले किसी न किसी धार्मिक या पारंपरिक अवसर से जुड़े होते हैं। कई स्थानों पर ये मंदिरों, देवस्थलों और स्थानीय आस्था केंद्रों के साथ आयोजित किए जाते हैं। यही कारण है कि इन मेलों में केवल उत्सव का रंग ही नहीं, बल्कि आस्था की गरिमा भी दिखाई देती है।
लोग श्रद्धा से माथा टेकते हैं, फिर मेले का आनंद लेते हैं। इस तरह छिंज मेले लोगों को केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
*आधुनिक दौर में भी कायम है छिंज की पहचान*
आज के आधुनिक और डिजिटल दौर में भी कांगड़ा के छिंज मेले अपनी गरिमा, लोकप्रियता और सांस्कृतिक पहचान के साथ लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। मनोरंजन के साधन भले बदल गए हों, लेकिन इन मेलों का आकर्षण आज भी वैसा ही है।
जब किसी गांव में छिंज मेला लगता है, तो वहां केवल आयोजन नहीं होता, बल्कि पूरा क्षेत्र एक उत्सव में बदल जाता है। यही इन मेलों की सबसे बड़ी ताकत है कि वे समय के साथ बदलते समाज में भी अपनी परंपरा और पहचान को मजबूती से बनाए हुए हैं।
*पहाड़ी संस्कृति की धड़कन हैं छिंज मेले*
वास्तव में, कांगड़ा के छिंज मेले केवल कुश्तियों या मेलों का आयोजन नहीं हैं। वे गांवों की धड़कन, लोक संस्कृति की पहचान, छोटे व्यापारियों की उम्मीद और समाज को जोड़ने वाली जीवंत परंपरा हैं।
यहां आस्था है, परंपरा है, खेल है, व्यापार है और सबसे बढ़कर सामाजिक एकता का संदेश है। यही कारण है कि कांगड़ा के छिंज मेले आज भी पहाड़ी संस्कृति की वह जीवंत तस्वीर बने हुए हैं, जिनमें मिट्टी की खुशबू, पहलवानी का गर्व और लोक जीवन की आत्मा एक साथ दिखाई देती है।

धर्मशाला: क्षेत्रीय रोजगार अधिकारी अक्षय कुमार ने सूचित किया है कि हैवेल्स इंडिया लिमिटेड नाॅएडा द्वारा अपरेंटिस (पुरूष एवं महिला) के 250 पद क्षेत्रीय रोज़गार अधिकारी धर्मशाला, जिला कांगड़ा को अधिसूचित किए गए हैं। इन पदों हेतु शैक्षणिक आईटीआई (इलेक्ट्रीशियन, फिटर, मैकेनिस्ट, इलेक्ट्राॅनिक्स, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल) और डिप्लोमा रखी गई है। इन पदो हेतु आयु 18 से 25 वर्ष रखी गई है। चयनित उमीदवार को कम्पनी द्वारा रूपए 13 हज़ार 500 से 15 हज़ार प्रति माह वेतन दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अभ्यार्थी अपने साथ दो पासपोर्ट साइज़ फोटो, हिमाचली प्रमाण पत्र, मूल प्रमाण पत्र एवं अपना बायोडाटा की काॅपी व अनुभव प्रमाणपत्र (यदि हो) साथ लेकर 6 अप्रैल को उप रोज़गार कार्यालय, देहरा, 7 अप्रैल को उप रोज़गार कार्यालय, पालमपुर, 8 अप्रैल को ज़िला रोज़गार कार्यालय, नगरोटा बगवां, 9 अप्रैल को क्षेत्रीय रोज़गार कार्यालय, धर्मशाला तथा 10 अप्रैल को उप रोज़गार कार्यालय, नूरपुर स्थान पर सुबह 10 बजे पहुंचकर उक्त कम्पनी के समक्ष साक्षात्कार हेतु उपस्थित हो सकते हैं। इस साक्षात्कार हेतु आवेदकों को किसी भी प्रकार का यात्रा भत्ता व अन्य देय नहीं होगा।
इवान सिक्यूरिटी फंक्शनस प्राइवेट लिमिटेड शिमला द्वारा सिक्यूरिटी गार्ड और सिक्यूरिटी सुपरवाइजर के भरे जाएंगे 80 पद
धर्मशाला: क्षेत्रीय रोजगार अधिकारी अक्षय कुमार ने सूचित किया है कि इवान सिक्यूरिटी फंक्शनस प्राइवेट लिमिटेड शिमला द्वारा सिक्यूरिटी गार्ड और सिक्यूरिटी सुपरवाइजर (पुरूष एवं महिला) के 80 पद क्षेत्रीय रोज़गार अधिकारी धर्मशाला, जिला कांगड़ा को अधिसूचित किए गए हैं। इन पदों हेतु शैक्षणिक योग्यता न्यूनतम दसवीं, बारहवीं, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन व एमबीए रखी गई है। इन पदो हेतु आयु 20 से 36 वर्ष रखी गई है। चयनित उमीदवार को कम्पनी द्वारा रूपए 13 हज़ार 500 से 25 हज़ार प्रति माह वेतन दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अभ्यार्थी अपने साथ दो पासपोर्ट साइज़ फोटो, हिमाचली प्रमाण पत्र, मूल प्रमाण पत्र एवं अपना बायोडाटा की काॅपी व अनुभव प्रमाणपत्र (यदि हो) साथ लेकर 6 अप्रैल को उप रोज़गार कार्यालय, पालमपुर, 7 अप्रैल को उप रोज़गार कार्यालय, काँगड़ा तथा 8 अप्रैल को ज़िला रोज़गार कार्यालय, ज्वालामुखी स्थान पर सुबह 11 बजे पहुंचकर उक्त कम्पनी के समक्ष साक्षात्कार हेतु उपस्थित हो सकते हैं। इस साक्षात्कार हेतु आवेदकों को किसी भी प्रकार का यात्रा भत्ता व अन्य देय नहीं होगा।

10 अप्रैल तक जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं पात्र युवा
तीन-तीन महीने के इन दोनों कोर्सों के दौरान हर महीने 2000 रुपये वजीफा भी मिलेगा
हमीरपुर: अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और दिव्यांग सशक्तिकरण निदेशालय शिमला, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के तहत शिमला स्थित नाइलिट (एनआईईएलआईटी) के सहयोग से अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए कौशल विकास कोर्सों का संचालन कर रहा है। इसी योजना के तहत नादौन के निकट टिल्लू में स्थित माइक्रो इन्फोटेक एजूकेशन सोसाइटी में इसी महीने से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टेक्नोलॉजी और ऑफिस ऑटोमेशन, अकाउंटिंग एवं पब्लिशिंग में तीन-तीन महीने के दो अलग-अलग कोर्स आरंभ किए जा रहे हैं। इन कोर्सों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दी गई है। सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित ये आवेदन जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय हमीरपुर में किए जा सकते हैं।
जिला कल्याण अधिकारी चमन लाल शर्मा ने बताया कि अल्प अवधि के इन कोर्सों के प्रशिक्षणार्थियों को हर महीने दो हजार रुपये वजीफा भी दिया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टेक्नोलॉजी के कोर्स के लिए आवेदक स्नातक होना चाहिए और इसमें प्रतिदिन केवल दो घंटे की क्लास होगी। ऑफिस ऑटोमेशन, अकाउंटिंग एवं पब्लिशिंग के लिए आवेदक बारहवीं पास होना चाहिए और इसमें प्रतिदिन केवल चार घंटे की क्लास होगी।
आवेदक हिमाचल का स्थायी निवासी तथा अनुसूचित जाति श्रेणी से संबंधित होना चाहिए। उसकी आयु 18 से 35 वर्ष के बीच हो। उम्मीदवारों का चयन स्नातक और बारहवीं कक्षा के अंकों के आधार पर होगा। बीपीएल उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। 30 प्रतिशत सीटें महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगी, लेकिन पर्याप्त महिला उम्मीदवार उपलब्ध न होने की स्थिति में ये सीटें पुरुष उम्मीदवारों को आवंटित की जा सकती हैं।
अधिक जानकारी के लिए जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय में या दूरभाष नंबर 01972-222379 पर संपर्क किया जा सकता है।

हमीरपुर: थल सेना में अग्निवीरों की भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दी गई है। थल सेना भर्ती कार्यालय हमीरपुर के निदेशक कर्नल श्रीधर राजन ने बताया कि अग्निवीर जीडी, अग्निवीर टेक्निकल, अग्निवीर क्लर्क एवं एसकेटी, अग्निवीर ट्रेड्समैन (8वीं-10वीं) और अग्निवीर महिला मिलिटरी पुलिस की भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि पहली अप्रैल निर्धारित की गई थी, जिसे अब 10 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है।
उन्होंने बताया कि निर्धारित अवधि में ऑनलाइन आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की पहले ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा होगी और इसमें उत्तीर्ण होने वाले युवाओं के ग्राउंड टेस्ट के लिए भर्ती रैली का आयोजन किया जाएगा। आवेदन के इच्छुक एवं पात्र युवा वेबसाइट – ज्वाइनइंडियनआर्मी.एनआईसी.इन joinindianarmy.nic.in पर लॉग इन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण करवाने वाले उम्मीदवार का एक्टिव मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी होनी चाहिए तथा ये आधार नंबर नंबर से लिंक होने चाहिए।

हमीरपुर : वर्ष 2016 में लापता हुई हरियाणा के पानीपत जिले के थाना समालखा के अंतर्गत गांव पट्टी कल्याणा की एक युवती की सूचना देने वाले व्यक्ति के लिए सीबीआई ने दो लाख रुपये ईनाम की घोषणा की है। चंडीगढ़ के सैक्टर 30-ए में स्थित सीबीआई की विशेष अपराध शाखा द्वारा हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव को प्रेषित पत्र के अनुसार 8 अगस्त 2016 को लापता हुई अन्नु कुमारी की उम्र उस समय 20 वर्ष थी और उसकी लंबाई लगभग पांच फुट छह इंच थी। अन्नु कुमारी की गुमशुदगी के संबंध में सीबीआई की विशेष अपराध शाखा ने 25 मार्च 2025 को केस दर्ज किया था।
उसके बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए सीबीआई के जांच अधिकारी के मोबाइल नंबर 98888-51676 पर या सीबीआई कार्यालय में या कार्यालय के दूरभाष नंबर 0172-2657285 पर संपर्क किया जा सकता है। सीबीआई की विशेष अपराध शाखा के इस पत्र की प्रतियां हमीरपुर सहित हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्तों को भी अग्रेषित की गई हैं।

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बाहर पंचायत चुनाव के रोस्टर में किए गए बदलावों को लेकर भाजपा विधायक दल ने नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अगुवाई में जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। मीडिया को संबोधित करते हुए जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला और कहा कि मुख्यमंत्री को बिना सोचे-समझे उल-जलूल फैसले लेने की आदत हो गई है, जिसके कारण बार-बार सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़ते हैं और इससे पूरे प्रदेश में सरकार की जग हंसाई हो रही है। सदन के भीतर और बाहर उपजे इस विवाद की मुख्य जड़ राज्य सरकार द्वारा जिलों के उपायुक्तों (डीसी) को रोस्टर में पांच प्रतिशत तक बदलाव करने की दी गई छूट है, जिसे विपक्ष लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मानता है।
जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि नए नियमों के तहत ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों, प्रधानों और पंचायत समिति अध्यक्षों के आरक्षण रोस्टर में फेरबदल का जो अधिकार उपायुक्तों को दिया गया है, वह सीधे तौर पर सत्ता का दुरुपयोग है ताकि कांग्रेस अपने चहेते कार्यकर्ताओं को लाभ पहुंचा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा चुनाव को निष्पक्ष तरीके से करवाने की नहीं बल्कि उसे टालने की है और वह माननीय हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए मनमाने फैसले ले रही है। सरकार पहले दिन सही पंचायत चुनाव कराने के पक्ष में नजर नहीं आ रही है। इसीलिए लगातार पंचायत चुनाव को रोकने के लिए साजिश कर रही है।
माननीय उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के फैसलों के बाद भी मुख्यमंत्री पंचायत चुनाव में अड़ंगा लगाने के अपने इरादे से पीछे नहीं हट रहे हैं। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया की शुरुआत के पहले दिन से ही सरकार पंचायत चुनाव को रोकने की साजिश में लग गई है। इसके लिए बार-बार राज्य निर्वाचन आयोग के आदेशों की अवहेलना हेतु प्रशासनिक अधिकारियों को किसी न किसी प्रकार प्रोत्साहित किया गया। उन्हें चुनाव करवाने के बजाय चुनाव रोकने के तोड़ खोजने में लगाया गया। आपदा प्रबंधन कानून लागू किया गया, हैरानी की बात यह रही की आपदा राहत के पैसे से हीसर्वाधिक आपदा प्रभावित क्षेत्र में सरकार ने अपने 3 साल के कार्यकाल का जश्न मनाया। लेकिन जैसे ही पंचायत चुनाव की बारी आती तो सरकार अपने कदम पीछे खींचने लगती।
प्रदर्शन के बाद भाजपा विधायक दल सदन के अंदर गया तो विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भी यह मुद्दा गरमाया रहा, जहां विधायक रणधीर शर्मा द्वारा नियम 67 के तहत लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर तुरंत चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष ने भारी हंगामा किया, जिसके परिणामस्वरूप विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
पंचायत चुनावों के आरक्षण रोस्टर पर विपक्ष द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव को खारिज करने पर विपक्ष ने फिर वॉकआउट किया और बाहर आकर मीडिया के समक्ष अपनी बात रखी। नेता प्रतिपक्ष ने जोर देकर कहा कि भौगोलिक विषमताओं के नाम पर जो शक्तियां डीसी को सौंपी गई हैं, उनका इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है और भाजपा इस जनविरोधी निर्णय का डटकर विरोध करेगी क्योंकि यह पंचायती राज संस्थाओं की स्वायत्तता पर सीधा प्रहार है और सरकार को ऐसे तानाशाही फैसलों को तुरंत वापस लेना चाहिए।

शिमला: एसजेवीएन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता ने बताया कि एसजेवीएन के प्रचालनरत विद्युत स्टेशनों ने विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 13302 मिलियन यूनिट विद्युत का उत्पादन किया हैं।1500 मेगावाट नाथपा झाकड़ी
जलविद्युत स्टेशन ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में 7506.617 मिलियन यूनिट के विद्युत उत्पादन को हासिल करके कमीशनिंग के पश्चात से अपना दूसरा सबसे अधिक वार्षिक विद्युत उत्पादन दर्ज किया है। उल्लेखनीय है कि विद्युत स्टेशन ने मार्च 2026 में कुल 150 बिलियन यूनिट के विद्युत उत्पादन को पार करते हुए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 412 मेगावाट रामपुर जलविद्युत स्टेशन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक का सबसे अधिक 2108.034 मिलियन यूनिट का वार्षिक विद्युत उत्पादन दर्ज किया है। यह उत्कृष्ट उपलब्धि, इसके 11 वर्ष के प्रचालनरत इतिहास में पहली बार 2100 मिलियन यूनिट का आंकड़ा पार करने का प्रतीक है। 60 मेगााट नैटवार मोरी जलविद्युत जलविद्युत स्टेशन ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में 310.37 मिलियन यूनिट का विद्युत उत्पादन दर्ज किया, जो इसके ओएंडएम का द्वितीय वर्ष है। यह विद्युत उत्पादन इसकी डिज़ाइन एनर्जी 265.5 मिलियन यूनिट से 17% अधिक है। इसके अलावा, 1000 मेगावाट बीकानेर सौर ऊर्जा स्टेशन ने दिनांक 19 मार्च 2026 को एक बिलियन यूनिट ऊर्जा उत्पादन का रिकॉर्ड दर्ज किया।
भूपेंद्र गुप्ता ने कर्मचारियों को बधाई दी और भारत सरकार, विद्युत मंत्रालय, उन राज्य सरकारों—जहाँ विद्युत स्टेशन अवस्थित हैं तथा सभी हितधारकों के निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपनी प्रथम परियोजना की कमीशनिंग के बाद से, कंपनी ने राष्ट्र की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करते हुए निरंतर विकास किया है।
एसजेवीएन निदेशक (कार्मिक), अजय कुमार शर्मा ने इस सफलता का श्रेय कर्मचारियों के समर्पण को दिया और इस बात पर बल दिया कि इन परियोजनाओं ने संबंधित क्षेत्रों—विशेष रूप से परियोजना स्थलों के आस-पास के क्षेत्रों के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पार्थजित डे, निदेशक (वित्त), एसजेवीएन ने भी कर्मचारियों को बधाई दी और कहा कि ये उपलब्धियाँ संगठन की सुदृढ़ प्रचालन क्षमताओं और देश के ऊर्जा क्षेत्र में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती हैं।
एसजेवीएन, एक नवरत्न सीपीएसई, भारत सरकार के वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है


