शिमला: तहसील कल्याण अधिकारी सुन्नी सतीश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया 3 मार्च 2026 को सिविल अस्पताल सुन्नी में एक कैटरेक्ट (मोतियाबिंद) स्क्रीनिंग कैंप आयोजित किया जा रहा है। इस कैंप के अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों की निशुल्क जांच की जाएगी।
उन्होंने बताया कि यह कैंप सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिन वरिष्ठ नागरिकों में मोतियाबिंद पाया जाएगा, उनका ऑपरेशन इंदिरा गांधी मेडिकल अस्पताल शिमला में पूर्णतः निःशुल्क कराया जाएगा। ऑपरेशन हेतु चयनित मरीजों को अस्पताल आने-जाने के लिए निःशुल्क वाहन सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि अधिक से अधिक संख्या में इस शिविर का लाभ उठाएँ तथा अपने परिचित वरिष्ठ नागरिकों को भी 3 मार्च 2026 को सिविल अस्पताल सुन्नी में जांच हेतु अवश्य भेजें।
शिमला : शिमला जिले के पुलिस थाना कुमारसैन के तहत जब्बलपुर के पास शनिवार सुबह एक थार गाड़ी (HR 98X-1948) सड़क से करीब 150 मीटर नीचे जाबल नाले में गिर गई। स्थानीय निवासी रोहित कुमार ने बताया कि जब वह सो रहे थे, तभी उन्होंने जोरदार धमाके की आवाज सुनी। बाहर निकलकर देखा तो एक गाड़ी नाले में गिरी हुई थी। मौके पर पहुंचने पर पाया गया कि चालक अंकुर राजपाल पुत्र पृथ्वी राज राजपाल निवासी सैक्टर 48ए, चंडीगढ़ गाड़ी से बाहर छिटक गया था और उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी। वहीं, गाड़ी के अंदर उनकी पत्नी अपराजिता सीट बैल्ट से बंधी हुई थी और दर्द से कराह रही थी। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला और 108 एम्बुलैंस से कोटगढ़ अस्पताल भेजा। वहां से उसे आईजीएमसी शिमला रैफर किया गया, लेकिन रास्ते में ठियोग के पास उनकी हालत बिगड़ गई, जिस पर उन्हें ठियोग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज आईजीएमसी शिमला से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए राज्य स्तरीय एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ करते हुए कहा कि अगले 90 दिनों में 14 वर्ष की आयु की 65000 लड़कियों को यह टीका लगाया जाएगा। उन्होंने अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों से इस कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील करते हुए जन जागरूकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश में बढ़ते कैंसर के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस बीमारी से लड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 40 वर्षों से सरकारें एक ही ढर्रे पर चलती रहीं। इस व्यवस्था को बदलने के लिए राज्य सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन का नारा दिया। अगर हमारी सरकार भी पांच वर्षों तक ऐसी ही चलती तो हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी पीछे चला जाता। उन्होंने कहा कि आज कैंसर जैसी बीमारी का इलाज संभव है, अगर सही समय पर सही इलाज मिले। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 300 करोड़ रुपये की लागत से हमीरपुर में स्टेट ऑफ दी आर्ट कैंसर अस्पताल बनाने जा रही है ताकि रोगियों को प्रदेश में ही सस्ता और सुलभ इलाज उपलब्ध हो सके।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार अगले लगभग आठ महीनों में आईजीएमसी समेत प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में विश्व स्तरीय तकनीक से लैस उपकरण और मशीनें स्थापित करने जा रही है। आने वाले तीन वर्षों में प्रदेश के सभी जोनल अस्पतालों, आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों, पीएचसी, सीएचसी में भी एम्स की तर्ज पर आधुनिक तकनीक उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में हेल्थ टूरिज्म को विकसित करने का लक्ष्य रखा है, जिसका लाभ प्रदेश के लोगों के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र से जुड़े डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ और तकनीशियन को होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हाई-एंड मशीनें और उपकरण लगाने के लिए 3000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई रिफॉर्म किए। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सों और टैक्निकल स्टाफ जैसे आप्रेशन थियेटर असिसटेंट, रेडियोग्राफर आदि के पद स्वीकृत किए हैं, जिन्हें भरा जा रहा है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को आईजीएमसी में आधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का शुभारम्भ किया गया है क्योंकि यहां पर 19 साल पुरानी मशीन काम कर रही थी। उन्होंने कहा, ‘‘आम आदमी की पीड़ा को समझकर उसके कल्याण के लिए फैसले करना ही व्यवस्था परिवर्तन है।’’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पांचों मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत करने जा रही है। चमियाणा अस्पताल और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी शुरूआत करने के बाद 10 मार्च को आईजीएमसी में भी यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे रहे हैंे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया जा रहा है जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। हाई-एंड मशीनें लगाने पर राज्य सरकार 3000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।
एचपीवी टीकाकरण अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा और बच्चियों को टीके निःशुल्क उपलब्ध करवाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि टीकाकरण अभियान मेडिकल अधिकारियों की देखरेख में चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व और दूरगामी सोच का परिणाम है।
कार्यक्रम में विधायक हरीश जनारथा एवं सुरेश कुमार, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा राकेश शर्मा, मिशन निदेशक, एनएचएम प्रदीप ठाकुर और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

शिमला: भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने आज प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एआई इम्पैक्ट समिट 2026 प्रकरण को लेकर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 20 फरवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया अर्धनग्न प्रदर्शन राष्ट्रविरोधी कृत्य था, क्योंकि उस समय 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भारत की मेजबानी में उपस्थित थे। यह आयोजन भारतीय जनता पार्टी का नहीं, बल्कि भारत सरकार का था, इसलिए उस प्रदर्शन से भाजपा की नहीं बल्कि देश की छवि धूमिल हुई।
रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि इस राष्ट्रविरोधी गतिविधि के सूत्रधार स्वयं मुख्यमंत्री सुक्खू हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा की परंपराओं और नियमों की अनदेखी करते हुए आरडीजी (Revenue Deficit Grant) के मुद्दे को राजनीतिक उद्देश्य से आगे बढ़ाया और राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लाने की संवैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार किया।
उन्होंने कहा कि 16 मार्च 2026 से प्रारंभ हुए बजट सत्र में परंपरा के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लाया जाना चाहिए था, किंतु सरकार ने आरडीजी के मुद्दे पर सरकारी संकल्प लाकर तीन दिन तक चर्चा करवाई। 18 फरवरी को प्रस्ताव पारित होते ही सदन स्थगित कर दिया गया। शर्मा ने प्रश्न उठाया कि क्या मुख्यमंत्री और उनके मंत्री आरडीजी बहाली की मांग को लेकर प्रधानमंत्री या वित्तमंत्री से मिले? “दिल्ली जाकर उन्होंने आरडीजी पर कोई पहल नहीं की, बल्कि कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की और 20 फरवरी के राष्ट्रविरोधी कृत्य की जिम्मेदारी ली,” उन्होंने आरोप लगाया।
भाजपा नेता ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल व्यक्तियों को हिमाचल सदन में ठहराया गया, जिसकी पुष्टि स्वयं मुख्यमंत्री ने की है। “मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि कमरों की बुकिंग उनके कार्यालय से हुई। यह स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है,” उन्होंने कहा।
रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस द्वारा मामला दर्ज करने और आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई के बाद उन्हें हिमाचल लाया गया और चिड़गांव जैसे दूरस्थ क्षेत्र में सरकारी संरक्षण में ठहराया गया। जब दिल्ली पुलिस विधिसम्मत दस्तावेजों और न्यायालय से अनुमति प्राप्त कर आरोपियों को लेकर लौट रही थी, तब हिमाचल पुलिस द्वारा उन्हें रोका गया और पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के दबाव में की गई प्रतीत होती है।
उन्होंने कहा कि “यह स्पष्ट है कि आरोपियों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए। मुख्यमंत्री ने पहले ही संरक्षण की जिम्मेदारी ली थी, इसलिए पुलिस की कार्रवाई भी राजनीतिक निर्देशों पर हुई।” भाजपा ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए और विशेष रूप से मुख्यमंत्री तथा मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की जांच हो।
रणधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश शांतिप्रिय और देशभक्त प्रदेश है। “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री संवैधानिक मर्यादाओं को ठेस पहुंचाते हुए एक कांग्रेसी नेता की तरह व्यवहार कर रहा है। प्रदेश की जनता और सदन को गुमराह कर राष्ट्रविरोधी गतिविधि को अंजाम देना अक्षम्य है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस हाईकमान द्वारा तीन वर्ष के कार्यकाल की समीक्षा के बीच अपनी कुर्सी बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने यह राजनीतिक कदम उठाया। “प्रदेश हितों की पैरवी करने के बजाय हाईकमान को खुश करने की राजनीति की गई,” उन्होंने कहा।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि वह इस पूरे मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करती है, ताकि यह सामने आ सके कि इस राष्ट्रविरोधी कृत्य के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार थे और मुख्यमंत्री कार्यालय की वास्तविक भूमिका क्या रही।
मण्डी: उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने आदेश जारी कर मंडी सदर, गोहर, सरकाघाट, थुनाग और कोटली उपमंडलों में 3 मार्च को घोषित स्थानीय अवकाश की तिथि में परिवर्तन किया है। अब इन उप मंडलों में 3 मार्च के स्थान पर 2 मार्च, 2026 को स्थानीय अवकाश रहेगा।
जारी आदेश के अनुसार यह संशोधन 27 दिसंबर, 2025 को जारी स्थानीय अवकाश अधिसूचना के संदर्भ में किया गया है। संबंधित उप मंडलों के सभी सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में होली के अवसर पर अवकाश 2 मार्च को ही मान्य होगा। जबकि 3 मार्च को सभी सरकारी कार्यालय व शिक्षण संस्थान खुले रहेंगे।
मण्डी: जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी पारस डोगर ने बताया कि उपायुक्त मंडी द्वारा जारी संशोधित अधिसूचना के अनुसार 2 मार्च (सोमवार) को होली उत्सव के अवसर पर स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में 3 मार्च (मंगलवार) को घोषित स्थानीय अवकाश के स्थान पर अब 2 मार्च को अवकाश रहेगा।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय के दृष्टिगत जिला मुख्यालय मंडी स्थित सभी न्यायिक न्यायालयों में 2 मार्च को पूर्व निर्धारित मामलों की सुनवाई अब 3 मार्च (मंगलवार) को प्रभावी रूप से की जाएगी।
हमीरपुर: विद्युत उपमंडल-2 हमीरपुर में 28 फरवरी को लाइनों की आवश्यक मरम्मत और पेड़ों की काट-छांट के कार्य के चलते अणु के सामुदायिक भवन के आस पास के क्षेत्र, पुरी टैंट हाउस, सिंदूरी माता मंदिर व आस पास के क्षेत्रों में सुबह 11 बजे से 1 बजे तक बिजली बंद रहेगी।
सहायक अभियंता सौरभ राय ने इस दौरान सभी उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील की है।

नगर परिषद बिलासपुर ने गीला और सूखा कचरा अलग-अलग कर सफाई कर्मियों को देने की अपील की
बिलासपुर: वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद बिलासपुर वर्षा चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर परिषद क्षेत्र में इधर-उधर कचरा फैंकने पर अब प्रति व्यक्ति 25 हजार से 50 हजार रुपये तक का चालान कर जुर्माना वसूल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नगर परिषद ने इधर-उधर कचरा फैंकने वालों पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से निगरानी प्रक्रिया आरम्भ कर दी है।
उन्होंने बताया कि अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर की अध्यक्षता में गत दिनों विभिन्न विभागीय अधिकारियों के साथ बिलासपुर शहर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि लोगों ने नगर परिषद क्षेत्र की पहाड़ियों व नालों इत्यादि में अधिक कचरा फेंकने पर हाॅट-स्पाॅट बना दिए हैं जिससे महामारी फैलने का अंदेशा बना हुआ है तो वहीं शहर की सुन्दरता भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने बताया कि नगर परिषद बिलासपुर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लोगों को घर-घर जाकर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने बारे जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि घरों, दुकानों, संस्थानों इत्यादि से निकलने वाले गीला व सूखा कचरे को इधर-उधर फेंकने के बजाए अलग-अलग करके सफाई कर्मियों को ही सौंपे ताकि शहर का पर्यावरण प्रदूषित न हो और सुंदरता भी बनी रहे।
उन्होंने नगर परिषद के समस्त लोगों से शहर को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए सहयोग की अपील की है।