


मण्डी: मण्डी जिला के गुटकर-मंडी मार्ग पर मांगवाई गांव के समीप चेनज 250+400 पर नियंत्रित ब्लास्टिंग एवं कठोर चट्टानों की कटिंग का कार्य किए जाने के चलते 24 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 तक निर्धारित समयावधि में यातायात बंद रहेगा। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी मंडी डॉ मदन कुमार द्वारा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 के तहत जारी आदेशों के अनुसार सोमवार से शनिवार तक प्रातः 11 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक तथा सायं 7 बजे से अगले दिन प्रातः 6:30 बजे तक मार्ग पर यातायात की आवाजाही बंद रहेगी। वहीं, रविवार को प्रातः 11 बजे से सायं 4 बजे तक तथा सायं 5 बजे से अगले दिन प्रातः 9 बजे तक यातायात बंद रहेगा। जिला प्रशासन ने आम जनता एवं वाहन चालकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं तथा संबंधित विभागों एवं पुलिस के निर्देशों का पालन करें। प्रशासन ने कहा कि सड़क निर्माण कार्य के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है और कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए आमजन का सहयोग अपेक्षित है।

धर्मशाला: विद्युत उपमंडल-2, धर्मशाला के सहायक अभियंता लोकेश चौधरी ने जानकारी दी है कि विद्युत लाइनों के सामान्य रख-रखाव हेतु मन्दल, कोहाला, मसरेड, भडवाल, त्रेमब्लू, घियाणा खुर्द, उपरली बगली व अन्य साथ लगते क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। मौसम खराब होने पर उक्त कार्य अगले दिन किया जाएगा।
मैक्लोडगंज विद्युत उपकेन्द्र की 28 अक्तूबर को बिजली बंद रहेगी
विद्युत उपकेन्द्र मैक्लोडगंज के सहायक अभियंता रमन भरमौरिया ने जानकारी दी है कि विद्युत लाइनों के सामान्य रख-रखाव के चलते 28 अक्तूबर को प्रातः 9 बजे से शाम 5 बजे तक नड्डी, सतोबरी, बरनेटा, चांदमारी, भतल्ला, डलझील, तोतारानी, टेंगलमोड़, टीसीवी, भागसू नाग, धर्मकोट, हीरू, गल्लू, मैक्लोडगंज मुख्य बाजार, जोगीवाड़ा, दुसालनी, टिप्पा रोड, फरसेटगंज, दलाई लामा मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। मौसम खराब होने पर उक्त कार्य अगले दिन किया जाएगा।
शाहपुर उपमंडल के तहत 27 अक्तूबर को बिजली बंद
विद्युत उपमंडल शाहपुर के सहायक अभियंता विक्रम शर्मा ने जानकारी दी है कि विद्युत लाइनों के मरम्मत कार्य के चलते 27 अक्तूबर को सुबह 9 बजे से सांय 5 बजे तक अथवा कार्य समाप्ति तक कोटला फीडर के अन्तर्गत आईटीआई, द्रमण, मंझग्रां, ददरोली, डिग्री कॉलेज, छतड़ी, सिहूंवां, जलाड़ी, भरनौली, घटनालू, चमडेरा, केंद्रीय विश्वविद्यालय व आस-पास के क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बंद रहेगी।

हिमाचल: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की ओर से जारी नवीनतम मासिक ड्रग अलर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में निर्मित 95 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर बात करें तो देशभर में कुल 331 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। हिमाचल के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों जैसे बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित कई दवा निर्माण इकाइयों के नाम इस सूची में शामिल हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के सिरप, एंटीबायोटिक, हृदय रोग, दर्द और बुखार, खांसी, पेट संबंधी बीमारियों, आंखों की दवा, जीवनरक्षक इंजेक्शन और विटामिन उत्पादों के सैंपल मानकों पर असफल पाए गए हैं। यह खुलासा सीडीएससीओ के सितंबर माह के ड्रग अलर्ट में हुआ है। इसमें देश-विदेश में निर्मित 330 दवाओं को सबस्टैंडर्ड घोषित किया गया है। सबसे अधिक 63 दवा सैंपल बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र के हैं। ड्रग अलर्ट में हिमाचल के 95 उत्पादों के अलावा उत्तराखंड के 69, हरियाणा के 22, मध्य प्रदेश के 21, राजस्थान के 17, गुजरात के 15 और तमिलनाडु के 14 सैंपल शामिल हैं। महाराष्ट्र, पंजाब और सिक्किम के 12-12 तथा उत्तर प्रदेश के 10 सैंपल भी क्वालिटी टेस्ट में फेल हुए हैं। सीडीएससीओ ने स्पष्ट किया है कि जांच में मिली गुणवत्ता संबंधी खामी परीक्षण किए गए संबंधित बैच तक सीमित है। इसके आधार पर उसी दवा के अन्य बैचों अथवा निर्माता के दूसरे उत्पादों की गुणवत्ता पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए हिमाचल के राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने कड़ी कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने बताया कि जिन कंपनियों की दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही बाजार में मौजूद संबंधित दवाओं के खराब बैच की बिक्री और वितरण पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

शिमला पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत शोघी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए लगभग 7 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद की गई है। 23 अक्टूबर को गुप्त सूचना के आधार पर शोघी के नजदीक एक बस की चेकिंग की गई। इस दौरान राहुल जसवाल पुत्र राजेश कुमार जसवाल, उम्र 25 वर्ष, निवासी कोटी, जिला शिमला के कब्जे से लगभग 7 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद हुई।
इस संबंध में पुलिस थाना पश्चिम, शिमला में अभियोग संख्या 224/2026 दिनांक 23 अक्टूबर धारा 21 ND&PS Act के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है तथा उसे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। मामले में आगामी अन्वेषण जारी है।

शिमला: शिमला पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल सैल शिमला की टीम ने शोघी के पास कार्रवाई करते हुए लगभग 17 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद की है।
23 अक्टूबर को गुप्त सूचना के आधार पर शोघी के पास हरियाणा रोडवेज की एक बस की चेकिंग की गई। इस दौरान पंकज शर्मा (24 वर्ष), निवासी सुन्नी, शिमला तथा पियूष चौहान (21 वर्ष), निवासी सुन्नी, शिमला की तलाशी लेने पर उनके कब्जे से क्रमशः लगभग 9 ग्राम और 8 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद हुई।
इस संबंध में पुलिस थाना बालूगंज में अभियोग संख्या 225/2026 23 अक्टूबर, धारा 21 व 29 ND&PS Act के तहत मामला दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है तथा उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। मामले में आगामी अन्वेषण जारी है।

कृषि यंत्रों की खरीद पर किसानों को मिलेगा अनुदान का लाभ
हिमाचल: कृषि विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि कृषि अभियांत्रिकी के अंतर्गत प्रदेश में कृषि के मशीनीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि मशीनरी पोर्टल को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 25 अक्तूबर, 2026 को दोपहर 12 बजे से पुनः सक्रिय किया जा रहा है। इसके माध्यम से पात्र किसान विभिन्न कृषि उपकरणों एवं मशीनरी की खरीद के अनुदान के लिए आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को अधिक सुगम, आधुनिक एवं लाभकारी बनाने के लिए किसानों को पावर टिलर, पावर वीडर सहित विभिन्न कृषि उपकरण उपलब्ध करवा रही है। कृषि विभाग द्वारा सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन के अंतर्गत किसानों को कृषि उपकरणों की खरीद पर अनुदान प्रदान किया जाता है। इच्छुक किसान विभाग के डीबीटी पोर्टल agrimachinery.nic. in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि पोर्टल 25 अक्तूबर, 2026 को दोपहर 12 बजे से सक्रिय होगा तथा किसान 29 अक्तूबर, 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। इसके उपरांत 30 अक्तूबर, 2026 को लॉटरी प्रणाली के माध्यम से संबंधित कृषि उपकरणों के लिए लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी है तथा लॉटरी प्रणाली के सिद्धांतों के अनुरूप संचालित की जाती है।
उन्होंने बताया कि लघु एवं सीमांत किसानों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा महिला किसानों को पात्रता एवं निर्धारित नियमों के अनुसार कृषि उपकरणों की खरीद पर 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा।
प्रवक्ता ने किसानों से आग्रह किया कि वे निर्धारित समयावधि के भीतर पोर्टल पर आवेदन करें तथा कृषि मशीनरी खरीदते समय केवल भारत सरकार से पंजीकृत फर्म एवं स्वीकृत मॉडल का ही चयन करें, ताकि उन्हें भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

नौणी: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पादप रोग विज्ञान विभाग ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पोस्टर एवं मौखिक प्रस्तुति, दोनों श्रेणियों में शीर्ष सम्मान प्राप्त किए हैं। ये पुरस्कार 22-23 अक्तूबर, 2026 को आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई), शिमला में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘जलवायु सहनशीलता, खाद्य सुरक्षा एवं सतत कृषि के लिए पादप स्वास्थ्य की भावी रणनीतियां’ में प्रदान किए गए।
दो दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, किसानों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। संगोष्ठी में पादप स्वास्थ्य से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के साथ-साथ जलवायु-अनुकूल कृषि, खाद्य सुरक्षा और सतत फसल संरक्षण के लिए नवीन रणनीतियों पर चर्चा की गई। इसका संयुक्त आयोजन इंडियन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसाइटी, इंडियन पोटैटो एसोसिएशन, इंडियन सोसाइटी ऑफ प्लांट पैथोलॉजिस्ट्स तथा हिमालयन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसाइटी ने आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, शिमला के सहयोग से किया।
विश्वविद्यालय लौटने पर कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों से मुलाकात कर उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने विशेष रूप से पादप रोग विज्ञान विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. अनिल हांडा और उनकी वैज्ञानिक टीम की सराहना की, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित मंच पर उच्च गुणवत्ता वाला वैज्ञानिक शोध प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। प्रो. बवेजा ने कहा कि ये उपलब्धियां न केवल विभाग में हो रहे उत्कृष्ट शोध कार्यों को रेखांकित करती हैं, बल्कि विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अन्य विभाग भी इससे प्रेरणा लेकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान स्थापित करने के लिए प्रयासरत रहेंगे।
पुरस्कार विजेताओं में डॉ. अमन चौहान ने पोस्टर प्रस्तुति श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। उनका शोध ‘चेरी और प्लम के पेड़ों में फाइटोप्लाज्मा संक्रमण की त्वरित पहचान के लिए LAMP-आधारित परीक्षण’ विषय पर था। इस शोध में डॉ. अनिल हांडा, डॉ. भूपेश गुप्ता और डॉ. अजय ब्राक्टा सह-लेखक थे। यह तकनीक एक घंटे के भीतर फाइटोप्लाज्मा संक्रमण की त्वरित एवं विशिष्ट पहचान करने में सक्षम है। इससे बागवानी फसलों में खेत स्तर पर रोग निदान और बड़े पैमाने पर रोग निगरानी की संभावनाएं मजबूत होती हैं।
मौखिक प्रस्तुति श्रेणी में डॉ. शालिनी वर्मा, निकिता नेगी, डॉ. सतीश कुमार शर्मा, डॉ. गोपाल सिंह और अनन्या बेनल की टीम ने जापानी फल के पत्तों के झुलसा रोग के उभरने के कारणों की पहचान’ विषय पर अपने शोध के लिए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। इस अध्ययन में हिमाचल प्रदेश में इस रोग से जुड़े रोगजनकों की पहचान की गई।
मौखिक प्रस्तुति श्रेणी में तृतीय पुरस्कार डॉ. मीनू गुप्ता, मुस्कान ठाकुर, डॉ. भूपेश गुप्ता और डॉ. अनुपमा सिंह को लहसुन में बैंगनी धब्बा रोग उत्पन्न करने वाले आल्टर्नेरिया प्रजाति के विभिन्न आइसोलेट्स में सांस्कृतिक, आकारिकी एवं रोगजनकता संबंधी विविधताओं पर किए गए शोध के लिए प्रदान किया गया। यह अध्ययन आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फसल लहसुन को प्रभावित करने वाले प्रमुख रोग के रोगजनकों में पाई जाने वाली विविधताओं को समझने में सहायक है। ये उपलब्धियां पादप रोगों के निदान, रोगजनकों पर अनुसंधान तथा बागवानी एवं कृषि फसलों की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक आधार पर प्रभावी रणनीतियों के विकास में विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण योगदान को पुनः स्थापित करती हैं।

शिमला : जुब्बल-नावर-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में आयोजित नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधि सम्मान समारोह एवं कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बागवानों को अपने उत्पाद का दाम स्वयं तय करने की गारंटी देकर सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के किसानों-बागवानों को सिर्फ ठगने का काम किया है। एमआईएस के तहत खरीदे गए सेब का भुगतान नहीं मिलने के कारण प्रदेश के बागवान सरकार की राह देख रहे हैं। सरकार उनका पूरा उत्पाद खरीदने की बजाय उसे न खरीदने की तरकीबें निकाल रही है। पूर्व सरकार में भाजपा द्वारा बागवानों के हितों के लिए कई कदम उठाए गए, जिन्हें सुक्खू सरकार आगे नहीं बढ़ा सकी। इस सरकार ने जनहित में खोले गए स्कूलों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों को बंद करने, झूठ बोलने और लोन लेने के अलावा कोई काम नहीं किया है। प्रदेश के लोग भी अब कांग्रेस सरकार की इस तालाबंदी के खिलाफ उसे सत्ता से बाहर करने के लिए तैयार हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मैं पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर देख रहा हूं कि चारों तरफ भारतीय जनता पार्टी के लिए जबरदस्त उत्साह है। पंचायत चुनाव में जिला शिमला में जिस तरह भारतीय जनता पार्टी को जनादेश मिला है और जनसभाओं में जिस तरह का उत्साह दिखाई दे रहा है, उससे आगामी विधानसभा चुनाव के परिणाम स्पष्ट हैं। शिमला जिला से भी भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत होगी। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से एकजुट होकर कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने के लिए जी-जान से काम करने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और उनके नेतृत्व से प्रभावित होकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले सभी साथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने सभी से कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए एकजुट होकर पूरी ताकत से काम करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्य ठप हैं, संस्थानों पर ताले लगे हैं और कर्ज का बोझ बढ़कर 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार लगातार कर्ज पर कर्ज ले रही है, न पुराने कर्ज की वापसी कर रही है और न ही विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। सुक्खू सरकार विकास के बजाय अपनी कुर्सी बचाने और मित्रों के घर भरने में जुटी है। जनमंच, हिमकेयर, सहारा और स्वावलंबन जैसी जनहितकारी योजनाओं को बंद कर सरकार ने आम जनता को नुकसान पहुंचाया है। पंचायत चुनावों में जनता ने कांग्रेस को आईना दिखा दिया है। भाजपा ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और जनता के अधिकार सुनिश्चित किए। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की योजनाओं और बजट से ही प्रदेश में बड़े विकास कार्य हो रहे हैं, जबकि कांग्रेस सरकार झूठी गारंटियों और नए जिलों के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को विकास की गति देने के लिए फिर से डबल इंजन सरकार की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है, जबकि हिमाचल में कांग्रेस सरकार के कुशासन से विकास पिछड़ रहा है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में कोटखाई सहित शिमला जिले में व्यापक विकास कार्य हुए, लेकिन वर्तमान सरकार ने इन क्षेत्रों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि शिमला जिला परिषद में 26 वर्षों बाद भाजपा की जीत और कार्यकर्ताओं का उत्साह स्पष्ट संकेत है कि जनता कांग्रेस से निराश है। आगामी विधानसभा चुनावों में जुब्बल-नावर-कोटखाई सहित पूरे हिमाचल में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी।
320 पीजी मेडिकल सीट ऐतिहासिक सागौत, श्रेय लेने के बजाय क्रियान्वयन पर जोर दें सुक्खू : जयराम ठाकुर
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में 320 पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने और इसके लिए ₹415 करोड़ का अनुदान देने के केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत हमीरपुर में 57, चंबा में 28, मंडी में 55, नाहन में 32, आईजीएमसी शिमला में 91 और टांडा में 57 पीजी मेडिकल सीटें बढ़ेंगी। यह फैसला प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हिमाचल की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार बदहाली की ओर बढ़ी है। सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं है। लेकिन सुक्खू सरकार व्यवस्था सुधारने के बजाय अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने में जुटी है। ऐसे समय में केंद्र सरकार का यह बड़ा आर्थिक सहयोग हिमाचल के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए संजीवनी साबित हो सकता है।
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार के पैसे और प्रयासों से होने वाले कार्यों का श्रेय लेने के लिए मुख्यमंत्री सबसे आगे खड़े हो जाते हैं, लेकिन जब केंद्र के योगदान को स्वीकार करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करने की बारी आती है, तो उनकी जुबान पर ताला लग जाता है। उन्होंने कहा कि ₹415 करोड़ केंद्र सरकार दे रही है, मेडिकल सीटों में वृद्धि का लाभ हिमाचल को मिल रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री श्रेय लेने की राजनीति में व्यस्त हैं। आखिर मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता को यह बताएं कि जब केंद्र सरकार हिमाचल के विकास में इतना बड़ा योगदान दे रही है, तो उसके प्रति आभार जताने में उन्हें परेशानी क्यों है? प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को बदहाल करने की जिम्मेदारी से कांग्रेस सरकार बच नहीं सकती और न ही केंद्र सरकार के योगदान पर अपना राजनीतिक लेबल लगाकर अपनी विफलताओं को छिपा सकती है। मोदी सरकार ने एक बार फिर साबित किया है कि हिमाचल के विकास और जनहित के मामलों में वह पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्रेय लेने के बजाय क्रियान्वयन पर ध्यान दें जिससे केंद्र की योजना का लाभ लोगों को मिल सके।

