
हिमाचल: प्रदेश होम स्टे नियम, 2025 के तहत सोलन ज़िला की सभी पर्यटन इकाइयों एवं होम स्टे इकाइयों को अधिसूचना के प्रकाशन के तीन माह के भीतर ज़िला पर्यटन विकास अधिकारी, पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग सोलन में पंजीकरण करना सुनिश्चित बनाना होगा। यह जानकारी ज़िला पर्यटन विकास अधिकारी सोलन पदमा छोडोन ने दी।
पदमा छोडोन ने कहा कि भारत सरकार की इनक्रेडिबल इंडिया बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान व इनक्रेडिबल इंडिया होमस्टे प्रतिष्ठान योजना या हिमाचल प्रदेश होम स्टे योजना, 2008 के तहत पूर्व में पंजीकृत व कार्यरत पर्यटन इकाइयां या होम स्टे को ई-सर्विसेज पोर्टल के माध्यम से निर्धारित प्राधिकारी के पास होम स्टे के पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सभी पर्यटन इकाइयां एवं होम स्टे इकाइयां https://homestay.hp.gov.in पोर्टल पर भी अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पंजीकरण की अंतिम तिथि तक निर्धारित प्राधिकारी पूर्व में पंजीकृत व कार्यरत पर्यटन इकाइयों या होम स्टे का निःशुल्क पंजीकरण करेगी।
ज़िला पर्यटन विकास अधिकारी सोलन ने पूर्व में पंजीकृत व नए स्थापित पर्यटन इकाइयों या होम स्टे को अपना पंजीकरण करवाने का आग्रह किया।
हमीरपुर : उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने वीरवार को हीरानगर स्थित चिल्ड्रन पार्क का निरीक्षण किया। उन्होंने पार्क के सौंदर्यीकरण और विभिन्न सुविधाओं के विस्तार की संभावनाओं को लेकर वन विभाग के अधिकारियों के साथ व्यापक चर्चा की।
उपायुक्त ने कहा कि यह पार्क हमीरपुरवासियों के अलावा बाहर से आने वाले लोगों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र है। सुबह-शाम की सैर एवं व्यायाम के साथ-साथ कुछ सुकून भरे पल बिताने के लिए यह एक बेहतरीन जगह है। उन्होंने कहा कि इस पार्क के विस्तार और सौंदर्यीकरण की अभी भी काफी संभावनाएं हैं। इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और यहां फूड पार्क भी स्थापित किया जाएगा।
इस अवसर पर एडीसी अभिषेक गर्ग, डीएफओ अंकित सिंह और अन्य अधिकारियों ने उपायुक्त को पार्क में विभिन्न सुविधाओं के विस्तार की संभावनाओं से अवगत करवाया।

शिमला: हरित ऊर्जा राज्य के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में आज हिमाचल प्रदेश सरकार और मै. जियोट्रॉपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच प्रदेश में जियोथर्मल ऊर्जा की संभावनाओं को तलाशने हेतु एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया।
इस अवसर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और भारत में आइसलैंड के राजदूत बेनेडिक्ट होस्कुल्डसन भी उपस्थित थे।
प्रदेश सरकार की ओर से ऊर्जा निदेशालय के मुख्य अभियंता डी.पी. गुप्ता और जियोट्रॉपी ईएचएफ के चेयरपर्सन टोमस ओट्टो हेनसन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।
मुख्यमंत्री ने सतत् ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार हरित ऊर्जा स्रोतों के दोहन की दिशा में कार्य कर रही है और जियोथर्मल ऊर्जा स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जियाथर्मल ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं जिनका दोहन करके पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कम्पनी को निर्देश दिए कि इस दिशा में अन्वेषण कार्य शुरू किया जाए ताकि जियोथर्मल क्षमता का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा।
इस अवसर पर ऊर्जा निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने की तलाई में सब तहसील, कलोल पीएचसी को अपग्रेड करने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने पूछा, क्या भाजपा सांसद व विधायक उठाएंगे हिमाचल के अधिकारों की आवाज
बिलासपुर : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज बिलासपुर जिला के झंडूता विधानसभा क्षेत्र के बरठीं में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए री-रड़ोह पुल तथा दधोग टपें गांव में पुल के निर्माण के लिए अढ़ाई करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने बरठीं, गेहड़वी और झंडूता स्कूल को सीबीएसई पाठ्यक्रम पर आधारित करने की भी घोषणा की। उन्होंने तलाई में सब तहसील, मल्होट में कॉपरेटिव बैंक खोलने की घोषणा की। पीएचसी कलोल को अपग्रेड करने की घोषणा की। उन्होंने भल्लू घाट पुल पर हुए सड़क हादसे के प्रभावित 16 परिवारों को 31-31 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके अलावा उन्होंने मरणोपरांत शौर्य चक्र विजेता बलदेव चंद के परिजनों को भी सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि पहली बार हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी का मुख्यमंत्री बना। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं कि कभी आम परिवार से निकल कर प्रदेश की सेवा करने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने जनता के पांच हजार करोड़ रुपये लोगों में बांटने की बजाय राजनीतिक लाभ के लिए खर्च किए। वर्तमान सरकार से पिछली भाजपा सरकार को 50 हजार करोड़ अधिक मिला और 50 हजार करोड़ कर्ज के तौर पर लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने आय के संसाधन पैदा किए और भ्रष्टाचार के दरवाजों को बंद किया। वर्तमान सरकार ने 23 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया और 26 हजार करोड़ रुपए ब्याज और मूलधन वापिस किया।
श्री सुक्खू ने कहा कि संविधान के प्रावधानों के मुताबिक 73 साल से हिमाचल प्रदेश को ग्रांट मिल रही थी लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश में 68 प्रतिशत वन भूमि है और लोग 32 प्रतिशत भूमि पर गुजारा करते हैं। लेकिन इस बात को नजर अंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि एक फरवरी हिमाचल प्रदेश के इतिहास का काला दिन है, जब केंद्र सरकार ने हर साल मिलने वाले लगभग दस हजार करोड़ रुपये की ग्रांट बंद कर दी। उन्होंने कहा, ‘‘आज भाजपा के सांसदों और विधायकों से पूछा जाना चाहिए, क्या पांच साल में न मिलने वाले 50 हजार करोड़ के विरुद्ध आवाज उठाएगें? इसके विरुद्ध प्रदेश की जनता को आवाज उठानी पड़ेगी क्योंकि यह लोगों के अधिकारों पर डाका है। हम यह लड़ाई जनता के सहयोग से लड़ेंगे। हिमाचल के अधिकारों के लिए हम भाजपा विधायकों के नेतृत्व में दिल्ली जाने को तैयार हैं। आज मैं मुख्यंमत्री हूं, कल कोई और होगा लेकिन हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई सर्वोपरि है।’’
उन्होंने कहा कि मछुआरों की रॉयल्टी को राज्य सरकार ने 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया है और आने वाले समय में इसे और कम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशुओं को सहारा देने के लिए राज्य सरकार ने प्रति पशु सहायता 700 से बढ़ाकर 1200 रुपए किया। उन्होंने कहा कि मुझ पर ओपीएस बंद करने का दबाव है, लेकिन मैं इस दबाव के आगे नहीं झुका। भाजपा की सरकार ने राजस्थान में आते ही सरकारी कर्मचारियों की ओपीएस को बंद करना का निर्णय ले लिया है। लेकिन जब तक हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, तब तक ओपीएस बंद नहीं होगी। हालाँकि केंद्र सरकार ने ओपीएस लागू करने पर 1600 करोड़ रुपए की मदद बंद कर दी। हम युवाओं को रोजगार दे रहे हैं लेकिन केन्द्र की भाजपा सरकार ने प्रदेश को अग्निवीर दिए। उन्होंने कहा कि दस वर्ष में केंद्र सरकार ने प्रदेश के सैनिकों को अग्निवीर बनाकर छोड़ दिया। क्या किसी न सोचा कि चार साल बाद युवा क्या करेंगे?
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के दौरान 9300 करोड़ रुपए नुकसान का आकलन केंद्र सरकार की टीम ने किया लेकिन भाजपा के सांसद संसद में खामोश रहे। भाजपा सांसदों ने एक भी सवाल संसद में नहीं पूछा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं हर आपदा प्रभावित क्षेत्र में गया। मैं झंडूता भी आया। किसी ने माँग नहीं की लेकिन लोगों के दर्द को देखते हुए हमने घर गिरने पर मिलने वाले मुआवजे को डेढ़ लाख रुपए से बढ़ाकर सात लाख रुपए किया। शहर में दस हजार और गांवों में पांच हजार रुपए किराया दिया। आम आदमी का दर्द बांटना ही व्यवस्था परिवर्तन है।’’
उन्होंने कहा कि भाजपा ने लोकतंत्र को खरीदने और सरकार गिराने का प्रयास किया गया। नौ विधायक सरकार को छोड़ कर चले गए। देश के इतिहास में पहली बार आजाद विधायक इस्तीफा स्वीकार करवाने के लिए धरने पर बैठ गए। लेकिन जनता के आशीर्वाद से कांग्रेस फिर से चालीस की संख्या पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की सोच से लोगों को रोजगार देने के लिए मनरेगा शुरू की, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार ने इस योजना की आत्मा को ही समाप्त कर दिया। इस कदम से रोजगार के अवसरों को केंद्र सरकार ने छीन लिया। लेकिन भाजपा के सारे सांसद चुप हैं।
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने झण्डूता विधानसभा क्षेत्र के बरठीं में 42.43 करोड़ रुपये की 4 विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किये।
मुख्यमंत्री ने 3.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित परमवीर चक्र विजेता नायब सूबेदार संजय कुमार राजकीय बहुतकनीकी, कलोल के प्रशासनिक भवन का उद्घाटन किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 12.88 करोड़ रुपये की लागत से घुमारवीं-बरठीं-शाहतलाई सड़क के उन्नयन कार्य, 25 करोड़ रुपये से शाहतलाई नगर के लिए मल निकासी योजना (पुनरीक्षित) के निर्माण कार्य तथा 1.25 करोड़ रुपये की लागत से शाहतलाई में चरण गंगा के सौंदर्यकरण के कार्य का शिलान्यास भी किया।
इससे पहले लोगों ने मुख्यमंत्री का बरठीं पहुंचने पर खुली जीप में उनका भव्य स्वागत किया।
कांग्रेस नेता विवेक कुमार ने मुख्यमंत्री का झंडूता विधानसभा क्षेत्र पहुँचने पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को आगे ले जाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीन प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के बावजूद वह दिन रात प्रदेश की जनता के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सौतेले रवैये के बावजूद वह हिमाचल प्रदेश लोगों को राहत पहुंचाने में लगे हैं। आपदा प्रभावित परिवारों के लिए राज्य सरकार ने मुआवजा राशि में कई गुणा बढ़ौतरी की है और घर को नुकसान होने पर अब आठ लाख रुपए की राहत राशि प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश गुणात्मक शिक्षा के मामले में 21वें स्थान से 5वें स्थान पर पहुंचा है। आज प्रदेश के अनाथ बच्चों को राज्य सरकार ने ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया है।

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज बिलासपुर जिले के घुमारवीं में नेशनल हैंडबाल प्रतियोगिता के समापन अवसर पर उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए अनेक क्रांतिकारी कदम उठा रही है ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष 1 मार्च के बाद राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में मोबाइल फोन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगायेगी तथा स्कूल परिसर में मोबाइल लाने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी के पास मोबाईल पाया गया तो उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, मोबाइल जब्त किया जाएगा और उसके माता-पिता को स्कूल बुलाकर समझाया जाएगा। बार-बार नियम तोड़ने पर तय एसओपी के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए शिक्षा विभाग जल्द ही मानक प्रक्रिया तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि स्कूलों में लंच टाइम के दौरान बच्चे मोबाइल में व्यस्त रहते हैं जिससे वह पढ़ाई पर ध्यान केंन्द्रित नहीं कर पाते।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल नए स्कूल खोलने पर नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर फोकस कर रही है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सरकारी स्कूल में पढ़े हैं, इसलिए स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा लागू करना बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार स्कूलों में खेलों को बढ़ावा देगी और बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी प्रोत्साहित केरगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश में खेल पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है तथा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में खेल के मैदान बनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में एशियन गेम्स में भाग लेकर हिमाचल लौटी प्रदेश की बेटियों को राज्य सरकार रोजगार उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने नेशनल हैंडबॉल प्रतियोगिता की विजेता हिमाचल प्रदेश टीम को 20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से प्रदेश के युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है, इसलिए सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों की डाइट मनी को भी बढ़ाया है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा राज्य में 400 रुपये तथा राज्य से बाहर 500 रुपये डाइट मनी प्रदान की जा रही है और राज्य से 200 किलोमीटर बाहर प्रतियोगिता में भाग लेने पर हवाई सेवा की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी की सराहना करते हुए कहा कि खेलों के प्रति उनकी विशेष रुचि रही है, इसी कारण उन्होंने घुमारवीं में नेशनल हैंडबॉल चैंपियनशिप आयोजित करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि घुमारवीं में इंडोर स्टेडियम निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाएगा। इसके अलावा घुमारवीं स्कूल भवन का निर्माण एक वर्ष के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मोरसिंगी में गर्ल्ज हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा।
69वीं अंडर-19 छात्रा हैंडबॉल स्कूल प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में हिमाचल प्रदेश की टीम ने राजस्थान की टीम को पराजित किया। हरियाणा की टीम तीसरे स्थान पर रही। इस प्रतियोगिता में देशभर से आई 30 टीमों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने विजेता और रनर-अप टीमों को भी सम्मानित किया।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, पूर्व विधायक बंबर ठाकुर व तिलक राज शर्मा, जिला कांग्रेस की अध्यक्ष अंजना धीमान, कांग्रेस नेता विवेक कुमार, एपीएमसी बिलासपुर के चेयरमैन सतपाल वर्धन, निदेशक उच्च शिक्षा अमरजीत शर्मा, निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली, उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार तथा एसपी संदीप धवल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

नई दिल्ली: नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल ने आज विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने 2014-2026 के दौरान केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को दिए गए काफी अधिक हस्तांतरणों और विकास निवेशों को 2004-14 की अवधि की तुलना में उजागर किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने किया और जिसमें शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप , कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद राजीव भारद्वाज , राज्य सभा सांसद हर्ष महाजन व सिकंदर कुमार मौजूद रहे ।
सांसदों ने इस प्रेस कांफ्रेस में सेक्टर-दर-सेक्टर कर हस्तांतरण और वित्त आयोग के परिणामों से लेकर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और नए केंद्रीय संस्थानों तक केंद्र द्वारा हिमाचल की सहायता के साक्ष्य को पटल पर रखा ताकि यह दिखाया जा सके कि केंद्र प्रायोजित सहायता ने राज्य में निवेश और कनेक्टिविटी को कैसे बढ़ावा दिया।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “2014 से अब तक केंद्र सरकार ने हिमाचल की दिल खोल कर मदद की। यूपीए के कार्यकाल में हिमाचल का जो विशेष राज्य का दर्जा छीन लिया गया था, उसे मोदी जी ने वापस हिमाचल को दिया। कांग्रेस जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। अगर यूपीए सरकार के 2004 से 2014 तक तक केंद्रीय करों में हिमाचल के हिस्सेदारी की बात करें तो यह मात्र 12,639 करोड़ रुपये थी, जबकि मोदी सरकार के 2014 से 2026 के बीच यह बढ़कर 76,799 करोड़ रुपये हो गया। यूपीए के समय केंद्र से हिमाचल को कुल 50,298 करोड़ रुओये का अनुदान-एड मिला जोकि 2014 से 2024 तक मोदी सरकार के समय में बढ़कर. 1.41 लाख करोड़ रुपये हो गए।
हम मौजूदा समय की बात करें तो नए वित्त आयोग के फॉर्मूले के तहत हिमाचल का शुद्ध संघीय करों में हिस्सा 0.830% (15वें FC के आधार पर) से बढ़कर 16वें FC के तहत 0.914% हो गया है, जो एक संरचनात्मक वृद्धि को दिखाता है। हिमाचल प्रदेश राज्य को वित्त वर्ष 2004-05 से 2013-14 के दौरान पीएमजीएसवाई के अंतर्गत जारी केंद्रीय धन राशि: रु. 1,549.15 करोड़ थी जोकि वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 (04.02.2026 तक) के दौरान पीएमजीएसवाई के अंतर्गत जारी केंद्रीय धन राशि रु. 6,895.89 करोड़ रुपये हो गई”अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ हम सभी सांसद अपनी ओर से हिमाचल के मुख्यमंत्री व कांग्रेस सरकार से अनुरोध करते हैं कि आप दिल्ली आइए और आपने जो ज़्यादा ब्याज दर पर कर्ज ले रखा है उस ब्याज दर को कम करने के लिए, हिमाचल का बोझ कम करने के लिए हम आपके साथ वित्त मंत्रालय के साथ बैठक करने को तैयार हैं। हमें अपना हिमाचल प्यारा है और आरोप प्रत्यारोप की राजनीति की बजाय आप रिफॉर्मस लाइए हम आपका सहयोग करने के लिए तैयार हैं। हाल ही में कांग्रेस शासित राज्य तेलंगाना के मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी जी अपने प्रदेश की इसी तरह की समस्या को लेकर दिल्ली आए जिस पर प्रधानमंत्री जी व वित्त मंत्री जी ने उनकी मदद की जिसका जिक्र रेड्डी जी ने तेलंगाना की विधानसभा में किया की केंद्र सरकार ने उनकी मदद की। हम कॉपरेटिव फेडरलिज्म में भरोसा रखते हैं और यदि तेलंगाना कर सकता है तो हिमाचल क्यों नहीं “अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि पहाड़ी राज्यों के लिए पूंजीगत सहायता के प्रति केंद्र का रवैया भी बदला है। राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता (SASCI) ने ब्याज-मुक्त 50 वर्षीय ऋण प्रदान किए और 2020-21 से जनवरी 2026 तक हिमाचल को लगभग Rs. 8,309 करोड़ दिए, जो पहले की अवधि में मौजूद नहीं था। वित्त आयोग से जुड़े स्थानीय निकायों के अनुदान भी हिमाचल के लिए काफी बढ़े हैं, जिसमें ग्रामीण स्थानीय निकायों को अकेले 16वें FC के तहत Rs. 3744 करोड़ मिले हैं, जो 15वें FC के Rs. 1673 करोड़ से लगभग दोगुना है”
अनुराग सिंग ठाकुर ने कहा कि “2014 से हिमाचल में स्थापित केंद्रीय संस्थानों और उनके बाद आए फंड तथा परियोजनाओं में AIIMS बिलासपुर (लागत ~Rs.1,470+ करोड़), हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय (500 करोड़), IIM सिरमौर (531.75 करोड़), IIIT ऊना (Rs 64 करोड़), चंबा/हमीरपुर/नाहन में कई नए मेडिकल कॉलेज (700 करोड़) और औद्योगिक विकास योजना सहायता (सितंबर 2023 में Rs.1,164 करोड़ स्वीकृत) शामिल हैं। औद्योगिक परियोजनाओं में ऊना बल्क ड्रग पार्क (Rs.1,000 करोड़ केंद्रीय फंडिंग) और नालागढ़ मेडिकल डिवाइसेज पार्क को हाइलाइट किया गया, जो रोजगार सृजन और राज्य के विनिर्माण आधार को मजबूत करने वाले उत्प्रेरक प्रोजेक्ट हैं”
सांसदों ने पहले दशक की तुलना में कनेक्टिविटी परियोजनाओं में भारी छलांग पर जोर दिया। रेलवे के तहत केंद्र ने 2026-27 में अकेले Rs. 2,911 करोड़ आवंटित किए हैं और वर्षों में चार प्रमुख नई रेल ट्रैक परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें 255 किमी नई ट्रैक निर्माणाधीन हैं (अनुमानित लागत ~Rs.13,168 करोड़), साथ ही 2014-26 में 24 रेल फ्लाईओवर/अंडरब्रिज पूरे किए गए हैं। ब्रिफिंग में नामित नई लाइनें शामिल हैं: नंगल-ऊना-तलवाड़ा, भानुपाली-बिलासपुर-बेरी, चंडीगढ़-बड्डी और कांगड़ा गेज बहाली; अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चार स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। हाईवे के तहत जून 2025 तक राज्य में 2,600 किमी से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए गए हैं, और प्रमुख NH सेक्शन (जैसे किरतपुर-नेरचौक) का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया है”
अनुराग सिंह ठाकुर ने समझाया कि “16वें FC ने मानदंडों के वेट को संशोधित किया है, उदाहरण के लिए जनसंख्या (2011) का वेट बढ़ा है जबकि क्षेत्र का वेट 15% से घटकर 10% हो गया है और नया “जीडीपी में योगदान” पैरामीटर (10%) जोड़ा गया है। इन समायोजनों से हिमाचल का हिस्सा 0.830% से बढ़कर 0.914% हो गया और अनुमानों के अनुसार 2026-27 में वार्षिक हस्तांतरण प्राप्तियां 2025-26 के 11,561.66 करोड़ से बढ़कर 13,947 करोड़ हो गईं, यानी 2300 करोड़ से अधिक की वृद्धि। सांसदों ने डेटा का उपयोग करके दिखाया कि कई राज्य, जिसमें कई विपक्षी शासित राज्य भी शामिल हैं, FC-16 के तहत बढ़ा हुआ हिस्सा देख रहे हैं, जो बदलाव की निष्पक्ष, फॉर्मूला-आधारित प्रकृति को रेखांकित करता है”
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ हिमाचल का डेवोल्यूशन घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है। “अन्यायपूर्ण कटौती” के कांग्रेस के खोखले दावों के विपरीत, 16 वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश का विभाज्य पूल में हिस्सा 15वें वित्त आयोग के 0.830% से बढ़ाकर 0.914% कर दिया है। नए फॉर्मूले के तहत हिमाचल का पोस्ट-डेवोल्यूशन प्राप्ति 2025-26 के बजट अनुमान (बीई) में लगभग ₹11,561.66 करोड़ से बढ़कर ₹13,949.97 करोड़ हो गया है, जो लगभग ₹2,388 करोड़ की वृद्धि है। यह केंद्रीय कर डेवोल्यूशन में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। 15 वें वित्त आयोग के तहत कोविड से उबरने में राज्यों की मदद के लिए आरडीजी फ्रंट-लोडेड था और इसे स्पष्ट रूप से समय-बद्ध, संक्रमणकालीन उपाय के रूप में तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य राज्यों को 2025-26 तक लगभग शून्य राजस्व घाटे तक लाना था। 16 वें वित्त आयोग ने परिणामों की समीक्षा की और निष्कर्ष निकाला कि 14 वें वित्त आयोग और 15 वें वित्त आयोग के तहत बड़े आरडीजी हस्तांतरणों के बावजूद, वास्तविक राजस्व घाटा सामान्य की ओर नहीं बढ़ा क्योंकि कई राज्यों ने राजस्व संग्रहण को मजबूत नहीं किया या व्यय को युक्तिसंगत नहीं बनाया। इसलिए 16 वें वित्त आयोग ने सामान्य आरडीजी को जारी रखना प्रतिकूल माना, क्योंकि यह विकृत प्रोत्साहन पैदा कर सकता है और संरचनात्मक सुधारों की दबाव को कम कर सकता है”
अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया कि मोदी सरकार राज्यों के साथ भेदभाव नहीं करती है। 16 वें वित्त आयोग फॉर्मूले के तहत कई विपक्षी शासित राज्यों को भी डेवोल्यूशन में लाभ हुआ है। 16 वें वित्त आयोग द्वारा शुरू की गई क्षैतिज पुनर्वितरण (horizontal redistribution) में मानदंडों का पुनः-वेटेज किया गया, जिसमें जनसंख्या/जनसांख्यिकीय प्रदर्शन पर भार बढ़ाया गया और जीडीपी में योगदान के लिए 10% वेटेज जोड़ा गया, जबकि क्षेत्रफल पर भार कम किया गया। इस से कई राज्यों को लाभ हुआ, जिनमें कई विपक्षी शासित राज्य भी शामिल हैं, जबकि कुछ अन्य राज्यों को कमी आई। इसलिए 16 वें वित्त आयोग के समायोजन को पक्षपातपूर्ण अभ्यास के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता”

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बरठीं में जिला प्रशासन बिलासपुर की अभिनव पहल ‘पढ़ाई विद एआई’ का विधिवत शुभारंभ किया। यह एआई ऐप आधारित डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म विशेष रूप से जिला बिलासपुर के उन विद्यार्थियों के लिए आरंभ किया गया है जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को नई दिशा देने, सोच का विस्तार करने और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारने की सबसे सशक्त तरीका है। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए राज्य सरकार निरंतर नवाचार और शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित करते हुए शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य कर रही है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि ‘पढ़ाई विद एआई’ विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सशक्त और दूरदर्शी पहल है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के समान अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि इसके अंतर्गत पूर्ण डिजिटल शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिसमें निरंतर अकादमिक काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने बताया कि एनटीपीसी के सहयोग से ‘पढ़ाई विद एआई’ से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।