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28 फरवरी तक ई-केवाईसी करवाएं पंजीकृत श्रमिक – नरदेव सिंह कंवर

हिमाचल:  प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर की अध्यक्षता में आज वर्चुअल माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में प्रदेश भर से अधिकारी व कर्मचारी जुड़े। बैठक में बताया गया कि बोर्ड में 4.77 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। इन पंजीकृत श्रमिकों के ई-केवाईसी की प्रक्रिया 28 फरवरी तक जारी रहेगी। नरदेव सिंह कंवर ने पंजीकृत श्रमिकों से आग्रह किया कि वे नजदीकी कार्यालय और फील्ड में जहां भी विभाग के कैंप लग रहे हैं वहां जाकर ई-केवाईसी करवाएं।
बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव कुमार भी उपस्थित थे।

“केंद्र से करोड़ों की सहायता के बावजूद नाहन मेडिकल कॉलेज शून्य पर ; कांग्रेस सरकार जवाब दे पैसा कहां गया?” – बिंदल

“आरडीजी और केंद्रीय सहायता पर झूठा नैरेटिव बना रही सरकार — तथ्य रखने पर भाजपा का वॉकआउट”

शिमला: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि वे दो गंभीर विषयों पर जनता का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि महामहिम राज्यपाल द्वारा प्रस्तुत सरकारी रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि चंबा, हमीरपुर, टांडा मेडिकल कॉलेज, चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और आईजीएमसी को अलग-अलग आर्थिक सहायता मिली — जबकि नाहन मेडिकल कॉलेज पूरी तरह शून्य पर है।

उन्होंने कहा कि नाहन मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य पिछले सवा तीन वर्षों से बंद पड़ा है। पूरा धन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दिया, लेकिन आज तक उसका हिसाब नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि

11-मंजिला बिल्डिंग और 500-बेड अस्पताल अभी तक शुरू क्यों नहीं हुआ?

50-बेड माता-शिशु अस्पताल का काम तीन साल बाद भी क्यों अटका है?

नर्सिंग कॉलेज की स्वीकृत राशि कहां गई?

डॉ. बिंदल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी चिंताजनक है — टेस्ट महंगे, पर्ची शुल्क लागू, दवाइयों की कमी, डॉक्टरों की कमी, तीन पीएचसी और एक सीएचसी बंद, हिमकेयर योजना ठप और आयुष्मान कार्ड तक अटेंड करने वाला नहीं। यह सिरमौर और नाहन की जनता के साथ अन्याय है।

सर्वदलीय बैठक पर तीखा हमला: उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कहने पर बुलाई गई बैठक में भाजपा पूरी गंभीरता से पहुंची और लगभग दो घंटे चर्चा सुनी। वित्त सचिव द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट भी सुनी। लेकिन जब भाजपा ने उसी सरकारी रिपोर्ट के तथ्य रखने शुरू किए तो बीच-बीच में टोका-टोकी की गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने पूरा दोष केंद्र सरकार पर डालने का प्रयास किया और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिसका भाजपा ने विरोध दर्ज कराया।

डॉ. बिंदल ने कहा: “सवा तीन साल में लगभग ₹27000 करोड़ रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट और अन्य मदों में हजारों करोड़ मिलने के बावजूद संस्थान बंद, विकास ठप और जनता परेशान — आखिर पैसा गया कहां?”

उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे पर विरोध दर्ज कर भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने बैठक से वॉकआउट किया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पिछले 40 महीनों में केंद्र ने हर विकासात्मक मद में हिमाचल को अभूतपूर्व सहयोग दिया, लेकिन राज्य सरकार की धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक विफलता के कारण प्रदेश बैकफुट पर पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि भाजपा का विरोध राजनीति नहीं बल्कि जनहित और पारदर्शिता के लिए है और पार्टी जनता के सामने सच लाती रहेगी।

किन्नौर में उद्यम पोर्टल पर एक दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न

किन्नौर:  हिमाचल प्रदेश उद्योग विभाग ने रैम्प कार्यक्रम के अंतर्गत किन्नौर स्थित क्लब सिल्क रूट बैंक्वेट हॉल में राजकीय क्रय पोर्टलों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम पोर्टल विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक आयोजित की गई।

इस कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों को सरकारी ऑनलाइन क्रय प्रणाली के प्रभावी उपयोग के प्रति जागरूक करना तथा उनकी क्षमता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम के दौरान उद्यमियों को सरकारी ई-बाजार मंच, केंद्रीय लोक क्रय पोर्टल तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम से संबंधित डिजिटल मंचों पर पंजीकरण प्रक्रिया, निविदा भागीदारी, आवश्यक औपचारिकताओं तथा विपणन विस्तार के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में जिला उद्योग केंद्र, किन्नौर के महाप्रबंधक गुरु लाल नेगी ने उद्यमियों को राजकीय क्रय पोर्टलों पर पंजीकरण कर अपने उत्पादों की दृश्यता बढ़ाने तथा सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग स्थानीय उद्यमों को प्रतिस्पर्धी बनाने तथा उनके व्यवसाय के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यशाला में 68 से अधिक उद्यमियों ने भाग लिया तथा संवादात्मक चर्चा में सक्रिय सहभागिता निभाई। प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रक्रियाओं से संबंधित प्रश्न पूछे और सरकारी खरीद प्रणाली के माध्यम से व्यवसायिक अवसरों के विस्तार में रुचि दिखाई।

कार्यक्रम सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुआ तथा उद्योग विभाग ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन तथा व्यवसाय सुगमता को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

चंबा: पांगी में ऐतिहासिक जुकारू उत्सव का आगाज, चारो ओर गूृंजा ‘तकड़ा थिया न’!

पांगी:  जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र पांगी में 15 दिवसीय जुकारू उत्सव का आगाज बुधवार से हो गया है। पांगी जुकारू उत्सव को आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। मंगलवार मध्यरात्रि को घाटी के लोग अपने घरों की दीवारों पर बलीराजा का चित्र उकेरकर इसकी प्राण प्रतिष्ठा की गई। बीते दिन पंगवाल समूदाय के लोग अपने घरों में लिपाई पुताई करते है।  शाम को घर के मुखिया भरेस भंगड़ी और आटे के बकरे बनाता है। ये बनाते समय कोई किसी से बातचीत नहीं करता है। पूजा सामग्री अलग कमरे में रखी जाती है। रात्रिभोज के बाद गोबर की लिपाई की जाएगी। वहीं आज सुबह करीब तीन बजे बलीराज को गंगाजल के छिड़काव  व विषेश पूजा अर्चना के बाद बाली राजा का प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद 15 दिनों तक पांगी घाटी के लोग बलीराज की पुजा करते है। वहीं बालीराज के समक्ष चौका लगाया जाता है। गोमूत्र और गंगाजल छिड़कने के बाद गेहूं के आटे और जौ के सत्तुओं से मंडप लिखा जाता है। जिसे पंगवाली भाषा में चौका कहते है।  मंडप के सामने दिवार पर बलीराज की मूर्ति स्थापित की जाती है। इसे स्थानीय बोली में जन बलदानों राजा कहते हैं। आटे से बने बकरे, मेंढ़े आदि मंडप में तिनकों के सहारे रखे जाते हैं। घाटी के बाशिंदे आटे के बकरे तैयार कर राजा बलि को अर्पित करेंगे। धूप-दीये और चौक लगाकर 15 दिन तक राजा बलि की ही पूजा करेंगे। इस दौरान कुलदेवता से लेकर अन्य देवी-देवताओं की पूजा नहीं की जाती है। आज लोग एक-दूसरे के घरों में जाकर बड़े-बुजुर्गो का आशीर्वाद ले रहे है। जिसे स्थानीये भाषा में पड़ीद कहते है।

क्या है पांगी का जुकारू उत्सव : बुधवार की पावन सुबह, जब ब्रह्म मुहूर्त का शुभ समय होता है, तब घाटी के लोग स्नानादि करके श्रद्धा और भक्ति भाव से राजा बलि के समक्ष नतमस्तक होते हैं। वातावरण में आस्था और परंपरा की सुगंध फैल जाती है। इसके पश्चात घर के छोटे सदस्य अपने बड़े सदस्यों के चरण वंदना करते हैं। बड़े स्नेहपूर्वक उन्हें आशीर्वाद देते हैं। राजा बलि की पूजा के लिए पनघट से पवित्र जल लाया जाता है और जल देवता की भी विधिवत पूजा की जाती है। इस दिन घर का मुखिया श्रद्धा के साथ गौ माता की पूजा करता है, जो समृद्धि और सुख का प्रतीक मानी जाती हैं। यह त्योहार केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप का भी प्रतीक है। सर्दी और बर्फबारी के कारण जो लोग लंबे समय से अपने घरों में सीमित थे, वे अब मौसम के बदलते ही एक-दूसरे से मिलने निकलते हैं। सर्दी कम होने के साथ ही रिश्तों की गर्माहट भी बढ़ जाती है।

आज घाटी के लोग एक-दूसरे के घर जाकर गले मिलते हैं और अपनापन जताते हैं। मिलते समय वे प्रेमपूर्वक कहते हैं – “तकड़ा’ ‘थिया’ न”, और विदा लेते समय कहते हैं – “मठे’ मठे’ विश”। यह शब्द केवल अभिवादन नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली भावनाएँ हैं। परंपरा के अनुसार, लोग सबसे पहले अपने बड़े भाई के घर जाते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं, फिर अन्य संबंधियों और परिचितों से मिलने का क्रम चलता है। इस प्रकार यह पर्व परिवार, सम्मान, प्रेम और सामाजिक एकता का अनुपम उदाहरण बन जाता है। तीसरा दिन मांगल या पन्हेई के रूप में मनाया जाता है ‘पन्हेई’ किलाड़ परगने में मनाई जाती है जबकि साच परगना में ‘मांगल’ मनाई जाती है। ‘मांगल’ तथा ‘पन्हेई’ में कोई विशेष अंतर नहीं होता मात्र नाम की ही भिन्नता है। मनाने का उद्देश्य एवं विधि एक जैसी ही है फर्क सिर्फ इतना है कि साच परगने मे मांगल जुकारू के तीसरे दिन मनाई जाती है तथा पन्हेई किलाड़ परगने में पांचवें दिन मनाई जाती है। मांगल तथा पन्हेई के दिन लोग भूमि पूजन के लिए निर्धारित स्थान पर इकट्ठा होते हैं इस दिन प्रत्येक घर से सत्तू घी शहद ‘मंण्डे’ आटे के बकरे तथा जौ, गेहूं आदि का बीज लाया जाता है। कहीं-कहीं शराब भी लाई जाती है

अपने अपने घरों से लाई गई इस पूजन सामग्री को आपस में बांटा जाता है भूमि पूजन किया जाता है कहीं-कहीं नाच गान भी किया जाता है इस त्यौहार के बाद पंगवाल लोग अपने खेतों में काम करना शुरू कर देते हैं। इस मेले को ‘उवान’ ‘ईवान’ आदि नामों से भी जाना जाता है। यह मेला किलाड़ तथा धरवास पंचायत में तीन दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन मेला राजा के निमित दूसरे दिन प्रजा के लिए मनाया जाता है और तीसरा दिन नाग देवता के लिए मनाया जाता है, यह मेला माघ और फागुन मास में मनाया जाता है। उवान के दौरान स्वांग नृत्य भी होता है इस दिन नाग देवता के कारदार को स्वांग बनाया जाता है। लंबी लंबी दाढ़ी मूछ पर मुकुट पहने सिर पर लंबी-लंबी जटाएं हाथ में कटार लिए स्वांग को मेले में लाया जाता है। दिन भर नृत्य के बाद स्वांग को उसके घर पहुंचाया जाता है इसी के साथ ईवान मेला समाप्त हो जाता है।

पंगवाल एकता मंच के अध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर ने सभी पांगी वासियों को जुकारू उत्सव की बधाई दी हुई है। उन्होंने बताया  कि पंगवाल समुदाय के भाईचारे का प्रतीक जुकारू उत्सव का इंतजार हर पांगी वाले पूरा साल करते है। उन्होंने बताया कि इस त्यौहार को आज पांगी के लोगों पूरे प्रदेश भर में बनाते है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि पांगी के जुकारू उत्सव को प्रदेश स्तर का दर्जा दिया जाए। 

कुल्लू-मनाली एयरपोर्ट से जुड़े मुद्दों पर उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक आयोजित

कुल्लू : उपायुक्त तोरुल एस. रवीश की अध्यक्षता में कुल्लू-मनाली एयरपोर्ट से संबंधित विभिन्न विकासात्मक एवं सुरक्षा इत्यादि विषयों पर बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक में एयरपोर्ट की सुरक्षा, क्षतिग्रस्त बॉउंड्री वॉल निर्माण, एयरपोर्ट एनवायरमेंट कमेटी की बैठक के आयोजन, एयरपोर्ट क्षेत्र एवं आसपास संचालित पैराग्लाइडिंग गतिविधियों को लेकर सुरक्षा मानकों, नियमन और समन्वय जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। बैठक में आपदा की स्थिति में एयरपोर्ट अथॉरिटी, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बीच संसाधनों के साझा उपयोग तथा संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विचार किया गया।

बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने, बॉउंड्री वॉल निर्माण से जुड़े तकनीकी, भूमि और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर भी संबंधित विभागों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

उपायुक्त ने बैठक में चर्चा में आए सभी प्रमुख मुद्दों पर हर संभव सहयोग का आश्वासन देते हुए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश जारी किए। बैठक में एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारी, एसडीएम कुल्लू निशांत ठाकुर, सहायक आयुक्त जयबन्ती ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कुल्लू, मनाली व बंजार में 14 मार्च काे लोक अदालत

हिमाचल:  प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, शिमला, हिमाचल प्रदेश के तत्वावधान में 14 मार्च  को जिला न्यायालय, कुल्लू मनाली और बंजार  न्यायालय में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।

सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कुल्लू  आभा चौहान ने अवगत करवाया कि 14 मार्च 2026 की लोक अदालत में दुर्घटना क्लेम, श्रम विवाद के मामले, बिजली व पानी के बिल, जमीनी विवाद, बैंक से संबंधित विवाद, वैवाहिक विवाद और विशेष रूप से कम राशि के चेक से लेन देन के मामले लिए जाएंगे। इस अवसर पर मोटर व्हीकल की लोक अदालत का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मोटर व्हीकल के चालानों का भी निपटारा किया जायेगा।

जिन व्यक्तियों के न्यायालय में उपरोक्त श्रेणी के मामले लंबित हैं, वे ऐसे मामलों को लोक अदालत में लगवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में फैसला दोनों पक्षों की रजामंदी से किया जाता है व किसी पक्ष की हार या जीत नहीं होती। उन्होंने कहा कि लोगों को लोक अदालत का भरपूर फायदा उठाना चाहिए व इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कुल्लू हिमाचल प्रदेश के दूरभाष नम्बर 01902-222378 पर संपर्क किया जा सकता है।

बिलासपुर: जिला में मार्च -अप्रैल माह में चलेगा ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान

इस अभियान के अंतर्गत जिला की लगभग 4 हजार पात्र किशोरियों का होगा टीकाकरण

जिला टास्क फोर्स (इम्यूनाइजेशन) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने दी जानकारी

बिलासपुर:  उपायुक्त राहुल कुमार की अध्यक्षता में बचत भवन बिलासपुर में जिला टास्क फोर्स (इम्यूनाइजेशन) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी मार्च व अप्रैल माह में जिला में चलाए जाने वाले ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान के प्रभावी संचालन के लिए विस्तृत कार्य योजना पर चर्चा की गई।

इस मौके पर उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि जिला में 14 वर्ष पूर्ण कर चुकी और 15 वर्ष से कम आयु की किशोरियों के लिए एचपीवी टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत जिला की लगभग 4 हजार पात्र किशोरियों का टीकाकरण किया जाएगा। साथ ही बताया कि अभियान की अवधि के दौरान आयु सीमा में 15 वर्ष तथा अतिरिक्त 90 दिनों तक की छूट प्रदान की जाएगी। इस टीकाकरण अभियान के तहत जिला की 14 वर्ष आयु वर्ग की कुल जनसंख्या की 1 प्रतिशत अनुमानित किशोरियों को शामिल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त जिला व प्रदेश के बाहर से आने वाली किशोरियों को भी इस टीकाकरण अभियान के साथ जोड़ा जाएगा।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के हवाले से बताया कि गर्भाशय के निचले हिस्से (सर्विक्स) का कैंसर महिलाओं में गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और इसका प्रमुख कारण एचपीवी संक्रमण है। एचपीवी प्रजनन तंत्र का सबसे सामान्य वायरल संक्रमण है। अधिकांश संक्रमण बिना लक्षण के स्वयं समाप्त हो जाते हैं, किंतु लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है। उन्होंने बताया कि एचपीवी वायरस के 200 से अधिक प्रकार हैं, जिनमें 17 प्रकार कैंसर उत्पन्न करने वाले हैं। एचपीवी-16 और एचपीवी-18 विश्व स्तर पर लगभग 77 प्रतिशत तथा भारत में लगभग 83 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाने के लिए मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीका शुरू किया जा रहा है। एचपीवी टीका मुख्य रूप से उच्च जोखिम वाले प्रकारों विशेषकर टाइप 16 और 18 से होने वाले कैंसर की रोकथाम करता है, जो भारत में लगभग 83 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि समय पर टीकाकरण एवं स्क्रीनिंग से इस कैंसर के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

इस टीकाकरण अभियान के दौरान एएनएम व एलएचवी नर्स वैक्सीनेटर, आशा व आंगनवाड़ी वर्कर लिंक मोबिलाइजर, स्वास्थ्य संस्थान स्टाफ वेरिफायर तथा महिला आरोग्य समिति, जन आरोग्य समिति तथा स्वास्थ्य कर्मी स्वयंसेवक के रूप में शामिल रहेंगे। उन्होंने बताया कि एचपीवी टीका जिला में केवल कोल्ड-चेन युक्त सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ही लगाया जाएगा।

राहुल कुमार ने बताया कि युविन पोर्टल पर एचपीवी टीकाकरण के लिए बालिका का पंजीकरण दो तरीके से किया जा सकता है। जिसमें पहला सिटीजन पोर्टल के माध्यम से स्व-पंजीकरण के तहत माता-पिता या अभिभावक युविन पोर्टल पर लॉग-इन करके पंजीकरण करा सकते हैं। जबकि दूसरे तरीके से यदि पहले पंजीकरण नहीं हुआ है तो ऑन-साइट पंजीकरण के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा सहमति विवरण का उपयोग करते हुए बालिका का पंजीकरण सीधे टीकाकरण स्थल पर भी किया जा सकता है।

उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को इस अभियान की सफलता सुनिश्चित बनाने के लिए व्यापक समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिये। साथ ही एचपीवी टीकाकरण अभियान के प्रति व्यापक जागरूकता सुनिश्चित बनाने को भी कहा ताकि कोई भी पात्र किशोरी इस टीकाकरण अभियान से छूट न पाए। साथ ही अभिभावकों से भी अपील की है कि वह अपनी बेटियों का समय पर एचपीवी टीकाकरण कराकर उन्हें सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित बनाने के लिए आगे आएं।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि एचपीवी टीकाकरण अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर डाॅ. शशिदत्त शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

ऊना में सर्वाइकल कैंसर से बचाव को विशेष एचपीवी टीकाकरण अभियान

29 मार्च से 21 जून तक चलेगा अभियान : उपायुक्त

ऊना: उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से बचाव एवं सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम के उद्देश्य से जिले में 29 मार्च से 21 जून तक विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने यह जानकारी मंगलवार को ज़िला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में आयोजित एचपीवी टीकाकरण अभियान को लेकर गठित ज़िला टास्क फ़ोर्स की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। बैठक में अभियान की रणनीति, लक्षित आयु वर्ग की पहचान, पंजीकरण प्रक्रिया तथा विभिन्न विभागों के समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई।
उपायुक्त ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों का टीकाकरण किया जाएगा। अभियान से पूर्व 10 मार्च तक सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों तथा प्रवासी श्रमिक परिवारों का हाउस-टू-हाउस पंजीकरण और 20 मार्च तक ऑनलाइन पंजीकरण पूर्ण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है और समय पर टीकाकरण से इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने अभियान को लेकर जन-जागरूकता पर विशेष जोर दिया। विभिन्न विभागों के समन्वय से व्यापक जागरूकता गतिविधियां संचालित करने को कहा ताकि लक्षित आयु वर्ग की प्रत्येक पात्र किशोरी का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके।
उपायुक्त ने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए आशा वर्कर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह तथा पंचायती राज संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। साथ ही शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए कि विद्यालयों में आयोजित पैरेंट्स मीटिंग्स के माध्यम से अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण एवं टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र किशोरियां इस अभियान से लाभान्वित हों।
उपायुक्त ने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित कर उन्हें गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने में सहयोग करें।
वहीं, सीएमओ डॉ. संजीव वर्मा ने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) विश्व स्तर पर सबसे आम संक्रमणों में से एक है। समय रहते रोकथाम न होने पर यह वायरस सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर टीकाकरण, सुरक्षित व्यवहार, नियमित जांच तथा व्यापक जन-जागरूकता के माध्यम से एचपीवी से होने वाली बीमारियों को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि टीकाकरण खाली पेट नहीं किया जाएगा तथा टीका लगाने के उपरांत किशोरियों को आधे घंटे तक निगरानी (ऑब्जर्वेशन) में रखा जाएगा, ताकि किसी भी संभावित प्रतिकूल प्रतिक्रिया की स्थिति में तुरंत आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। किशोरियां स्वयं भी https://uwin.mohfw.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकती हैं।

23 से 28 फरवरी तक मनाया जाएगा नेशनल डी-वॉर्मिंग सप्ताह

उपायुक्त ने जानकारी दी कि 23 से 28 फरवरी तक ऊना जिले में नेशनल डी-वॉर्मिंग सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान जिले में 1,53,544 बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही 41,358 बच्चों को विटामिन-ए की खुराक प्रदान करने का लक्ष्य भी रखा गया है, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को बेहतर बनाया जा सके।

इस अवसर पर जिला टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर रिचा, जिला पंचायत अधिकारी श्रवण कुमार,जिला भाषा अधिकारी निकुराम सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

विपिन परमार बोले- जनाक्रोश की ज्वाला में घिरी कांग्रेस सरकार; चौड़ा मैदान बना सत्ता की नाकामी का आईना!

शिमला: वरिष्ठ भाजपा नेता एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि शिमला का ऐतिहासिक चौड़ा मैदान आज प्रदेश की कांग्रेस सरकार की विफलताओं का साक्षात प्रमाण बन गया है। उन्होंने कहा कि बजट सत्र के दूसरे दिन जिस प्रकार पेंशनरों को अपने अधिकारों की रक्षा हेतु सड़कों पर उतरना पड़ा, वह सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक जड़ता का स्पष्ट संकेत है। विपिन सिंह परमार ने कहा कि जिन लोगों ने अपना संपूर्ण जीवन प्रदेश की सेवा में समर्पित किया, आज वही अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने को विवश हैं—यह किसी भी लोकतांत्रिक शासन के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि विधानसभा परिसर के बाहर पेंशनरों द्वारा पारंपरिक ‘नाटी’ के माध्यम से दर्ज कराया गया विरोध केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति गहरे असंतोष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब बुजुर्ग पेंशनर भी सड़कों पर उतरकर सरकार को जगाने का प्रयास करें, तो यह स्पष्ट है कि शासन तंत्र जनभावनाओं से कट चुका है।

विपिन सिंह परमार ने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार प्रशासनिक शिथिलता, वित्तीय अव्यवस्था और नीतिगत अनिर्णय की प्रतिमूर्ति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों की मांगों को लेकर सरकार का रवैया टालमटोल से भरा हुआ है। बार-बार आश्वासन दिए जा रहे हैं, किंतु निर्णय लेने की इच्छाशक्ति का पूर्ण अभाव दिखाई देता है।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक होती जा रही है। विकास कार्य ठप पड़े हैं, योजनाएं कागजों में सिमट चुकी हैं और कर्मचारी वर्ग निराशा में डूबा हुआ है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों के लंबित डीए और अन्य वित्तीय लाभों को रोके रखना उनके अधिकारों का सीधा हनन है। चुनाव के समय किए गए वादों को निभाने के स्थान पर सरकार अब बहानों का सहारा ले रही है।

विपिन सिंह परमार ने वित्तीय परिदृश्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि वित्त सचिव स्वयं यह संकेत दे रहे हैं कि ‘सहारा योजना’ तथा बिजली-पानी जैसी मूलभूत सेवाओं पर दी जा रही सब्सिडी बंद करनी पड़ सकती है, तो यह सरकार की आर्थिक विफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जो सरकार राहत देने के नाम पर सत्ता में आई थी, वही आज जनता से राहत छीनने की तैयारी कर रही है। विपिन सिंह परमार ने कहा कि गरीब, निम्न एवं मध्यमवर्गीय परिवारों पर इस प्रकार का बोझ डालना जनादेश के साथ विश्वासघात है और यह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।

आरडीजी के विषय में भी विपिन सिंह परमार ने सरकार की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस शासित अन्य राज्यों में इस विषय पर तीव्र विरोध दर्ज किया गया है, तो हिमाचल में सरकार की स्पष्ट नीति क्या है? विपिन सिंह परमार ने कहा कि दोहरे मापदंड और परस्पर विरोधी वक्तव्य जनता के बीच भ्रम और अविश्वास उत्पन्न करते हैं।

विपिन सिंह परमार ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री न तो विपक्ष की सार्थक आलोचना को महत्व देते हैं और न ही अपने ही विधायकों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा कि शासन संचालन में परिपक्वता का अभाव दिखाई देता है और निर्णय प्रक्रिया में समन्वय की कमी स्पष्ट है। अधिकारी वर्ग असमंजस में कार्य कर रहा है, जिसका सीधा प्रभाव प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ रहा है।

विधानसभा के भीतर की स्थिति का उल्लेख करते हुए विपिन सिंह परमार ने कहा कि जब सदन में भी विषयों पर स्पष्टता और संतुलन का अभाव दिखाई दे, तो यह सरकार की आंतरिक कमजोरी को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, किंतु वर्तमान परिस्थितियां इसके विपरीत संकेत दे रही हैं।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। युवा वर्ग अवसरों के अभाव में हताश हो रहा है, कर्मचारी असंतोष से घिरे हैं और पेंशनर आंदोलनरत हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जनविश्वास के क्षरण का संकेत है।

 विपिन सिंह परमार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ही पेंशनरों और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर ठोस एवं समयबद्ध निर्णय नहीं लिए, तो भाजपा सड़क से सदन तक व्यापक जनांदोलन छेड़ने को बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल अधिकारों की बहाली का नहीं, बल्कि प्रदेश की अस्मिता, पारदर्शिता और उत्तरदायी शासन की पुनर्स्थापना का है।