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जिला ऊना में गेहूं खरीद प्रक्रिया 8 अप्रैल से होगी शुरू

हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम नोडल एजेंसी नियुक्त

ऊना:  जिला ऊना में किसानों से गेहूं की खरीद के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। यह जानकारी देते हुए जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले (डीएफएससी) ऊना राजीव शर्मा ने बताया कि किसानों से गेहूं की खरीद 8 अप्रैल से 15 जून, तक अनाज मंडी रामपुर तथा अनाज मंडी टकारला में की जाएगी।

उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित और सुनिश्चित मूल्य प्राप्त होगा। जिले के किसान अपनी फसल की बिक्री हेतु 01 मार्च के बाद https://hpapp.nic.in/ पोर्टल पर ऑनलाइन माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।

डीएफएससी ने बताया कि टोकन सेवा आरंभ होने के उपरांत किसान निर्धारित तिथि के अनुसार अपने-अपने टोकन बुक कर मंडी में अपनी उपज बेच सकेंगे। इस व्यवस्था से किसानों को घर-द्वार के समीप फसल विक्रय की सुविधा प्राप्त होगी।

उन्होंने बताया कि खरीदी गई गेहूं की राशि किसानों के बैंक खातों में सीधे ऑनलाइन माध्यम से जमा की जाएगी, जिससे भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी, सुरक्षित और सुगम बनी रहेगी।

इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए किसान जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, जिला ऊना के कार्यालय के दूरभाष संख्या 01975-226016 अथवा क्षेत्रीय प्रबंधक, हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम सीमित, हमीरपुर के दूरभाष संख्या 01972-223922 पर संपर्क कर सकते हैं।

मण्डी के 500 वर्ष पूर्ण होने पर स्मारक ‘प्रतीक-चिह्न’ का लोकार्पण

मण्डी: राज्यपाल  शिव प्रताप शुक्ल ने आज मण्डी में मण्डी नगर की स्थापना के 500 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी (हि.प्र.) द्वारा निर्मित स्मारक ‘प्रतीक-चिह्न’ का लोकार्पण किया।

इस अवसर पर, राज्यपाल ने कहा कि मंडी यह प्रतीक चिन्ह नगर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। इस प्रतीक-चिह्न का ध्येय वाक्य “मण्डीः पंचशतानि वर्षाणि – अविच्छिन्ना परम्परा” है, जो पांच शताब्दियों से प्रवाहित आस्था और सांस्कृतिक निरंतरता को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि यह प्रतीक-चिह्न मंडी की 500 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उसकी अविच्छिन्न परंपरा और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जो अतीत, वर्तमान और भविष्य के मध्य एक सुदृढ़ सेतु के रूप में स्थापित होता है।

इस स्मारक में ‘गौरव वर्ष 500’ मंडी की ऐतिहासिक यात्रा का संकेत देता है। ‘छोटी काशी’ के रूप में विख्यात मंदिरों की धार्मिक पहचान, रियासती महलों का वैभव तथा माधवराय पालकी की उत्सवधर्मी लोक परंपरा को इसमें दर्शाया गया है। त्रिशूल शिव-शक्ति का प्रतीक है, जबकि पर्वत और विपाशा नदी (व्यास) नगर की भौगोलिक विशिष्टता एवं प्राकृतिक सौंदर्य को अभिव्यक्त करते हैं।

प्रतीक-चिह्न की परिकल्पना श्री चंद्रशेखर ठाकुर, सदस्य विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद एवं विधायक, धर्मपुर द्वारा की गई तथा इसके निर्माण के लिये मार्गदर्शन कुलपति आचार्य प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने प्रदान किया। अकादमिक प्रारूप इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा द्वारा तैयार किया गया, जबकि इसकी कलात्मक अभिव्यक्ति कुमारी स्वस्तिका शर्मा ने अपने सृजनात्मक संयोजन से साकार की।

विधायक श्री चंद्र शेखर, राज्यपाल के सचिव श्री चंद्रप्रकाश वर्मा, कुलपति प्रो. ललित अवस्थी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होने मण्डी पहुंचे राज्यपाल

मण्डी: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल आज मंडी जिले के कंगनीधार हेलीपैड पहुंचे, जहां उनका गरिमापूर्ण एवं पारंपरिक स्वागत किया गया। वे अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के समापन समारोह में भाग लेने के लिए मंडी पहुंचे हैं।
विधायक अनिल शर्मा, इंदर सिंह, पूर्ण चंद, नगर निगम के महापौर वीरेंद्र भट्ट, उपायुक्त अपूर्व देवगन, पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने राज्यपाल का स्वागत किया।
इस अवसर पर राज्यपाल की धर्मपत्नी जानकी शुक्ला भी उनके साथ उपस्थित रहीं।
इसके उपरांत, सर्किट हाउस पहुंचने पर नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर, अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव आम सभा के अध्यक्ष एवं विधायक चंद्रशेखर, विधायक दीप राज, तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ललित अवस्थी तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी राज्यपाल का अभिनंदन किया।
राज्यपाल आज सांस्कृतिक संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे तथा रविवार को अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के समापन समारोह में भी सम्मिलित होंगे।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने CRI कसौली में टेटनस व डिप्थीरिया वैक्सीन को किया लॉन्च..

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  जेपी नड्डा ने आज हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) में स्वदेशी रूप से निर्मित टेटनस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का शुभारंभ किया। सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों को बधाई दी और टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन के स्वदेशी शुभारंभ को एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह शुभारंभ राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा की रक्षा और भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी रूप से निर्मित टीडी वैक्सीन का शुभारंभ स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना की दिशा में एक ठोस कदम है।

टीडी वैक्सीन के औपचारिक शुभारंभ के साथ, अब इसे सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत आपूर्ति के लिए पेश किया गया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय अनुसंधान संस्थान अप्रैल 2026 तक यूआईपी को 55 लाख खुराकें उपलब्ध कराएगा, और भारत सरकार के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को और मजबूत करने के लिए आगामी वर्षों में उत्पादन में धीरे-धीरे वृद्धि होने की उम्मीद है।भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा पर प्रकाश डालते हुए मंत्री जी ने कहा कि भारत को व्यापक रूप से “विश्व की औषधालय” के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह विश्व स्तर पर अग्रणी टीका निर्माताओं में से एक है। उन्होंने आगे कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियामक प्रणालियों के वैश्विक मानकीकरण में भारत ने परिपक्वता स्तर 3 प्राप्त कर लिया है, जो इसके टीका नियामक ढांचे की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सीआरआई जैसे संस्थानों ने इन मानकों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

केद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने याद दिलाया कि ऐतिहासिक रूप से, टीके और दवाओं के विकास में लंबा समय लगता था—टेटनस के टीके को विकसित होने में विश्व स्तर पर दशकों लग गए, तपेदिक की दवाइयों को विकसित होने में लगभग 30 साल लगे और जापानी एन्सेफलाइटिस के टीके के लिए लगभग एक सदी का वैज्ञानिक प्रयास करना पड़ा। इसके विपरीत, कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत ने नौ महीनों के भीतर दो स्वदेशी टीके विकसित किए और बूस्टर खुराक सहित 220 करोड़ से अधिक खुराकें दीं। उन्होंने यह भी बताया कि कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से वितरित किए गए, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में भारत के डिजिटल परिवर्तन को दर्शाता है।भारत के वैश्विक एकजुटता प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वैक्सीन मैत्री पहल के तहत भारत ने लगभग 100 देशों को टीके उपलब्ध कराए, जिनमें से 48 देशों को टीके मुफ्त में मिले। उन्होंने कहा कि सीआरआई जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के योगदान से घरेलू और वैश्विक दोनों जरूरतों को पूरा करने की भारत की क्षमता मजबूत हुई है।

मंत्री ने संस्थागत प्रसवों में हुए सुधारों पर भी प्रकाश डाला, जो 79 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गए हैं, जो पूरे देश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच को दर्शाता है।उन्होंने दोहराया कि इस प्रकार के नीतिगत हस्तक्षेप और संस्थागत सुदृढ़ीकरण यह दर्शाते हैं कि सतत शासन प्रयासों से सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में कैसे बदलाव लाया जा सकता है और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को कैसे मजबूत किया जा सकता है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि, डॉ. डिंपल कसाना, निदेशक, केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, कसौली, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अन्य हितधारक उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि; इस बात को ध्यान में रखते हुए, 2006 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने देशों को टेटनस टॉक्सॉइड (टीटी) वैक्सीन से टीडी वैक्सीन की ओर बढ़ने की सिफारिश की। इस सिफारिश को डब्‍ल्‍यूएचओ के टेटनस वैक्सीन स्थिति पत्र (2017) में और 2002 और 2016 में रणनीतिक सलाहकार विशेषज्ञ समूह (एसएजीई) के विचार-विमर्श के माध्यम से पुनः पुष्ट किया गया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) ने गर्भवती महिलाओं सहित सभी आयु वर्ग के लिए भारत के टीकाकरण कार्यक्रम में टीटी टीके के स्थान पर टीडी टीके को अपनाने की सिफारिश की है। इस बदलाव का उद्देश्य मातृ एवं नवजात शिशु टेटनस उन्मूलन और नियमित टीकाकरण गतिविधियों में हासिल की गई उपलब्धियों को बनाए रखते हुए, टेटनस के साथ-साथ डिप्थीरिया से सुरक्षा को बढ़ाना और मजबूत करना है।

इस पहल को समर्थन देने के लिए, सीआरआई ने टीडी वैक्सीन के निर्माण का कार्य शुरू किया है। संस्थान ने विकासात्मक अध्ययन सफलतापूर्वक पूर्ण किए, परीक्षण लाइसेंस प्राप्त किया, पूर्व-नैदानिक अध्ययन और चरण I, II और III नैदानिक परीक्षणों के लिए छूट प्राप्त की, विपणन प्राधिकरण और निर्माण एवं बिक्री के लिए लाइसेंस प्राप्त किया, वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया और कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला से मंजूरी प्राप्त की।

शिमला: होटल में विदेशी पर्यटक की संदिग्ध हालात में मौत..

शिमला: राजधानी शिमला में लोअर कैथू क्षेत्र स्थित एक होटल में 86 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक मृत पाए गए। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान इंग्लैंड के 46 रटलैंड रोड निवासी बैरी एल्विन मॉस के रूप में हुई है। दोपहर करीब 12 बजे कैथू स्थित चितकारा पार्क के पास रहने वाले स्थानीय निवासी सूर्यवंशी ने सूचना दी कि उनके होटल के कमरा संख्या 103 में ठहरे एक विदेशी अतिथि अचेत अवस्था में पड़े हैं।

सूचना मिलते ही थाना प्रभारी और उपमंडलीय पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। होटल कर्मचारियों ने बताया कि मॉस ने कमरे में चेक-इन किया था और शाम को थोड़ी मात्रा में शराब का सेवन किया था। जब बार-बार दरवाजा खटखटाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो कर्मचारियों ने कमरा खोला और उन्हें फर्श पर अचेत अवस्था में पाया। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक वस्तुएं कब्जे में लीं और कमरे को सील कर चाबी सुरक्षित रख ली है। मॉस को तुरंत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (आईजीएमसी) ले जाया गया, जहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल के शवगृह में रखा गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की सूचना ब्रिटिश उच्चायोग को दे दी गई है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 194 के तहत आगे की कार्रवाई उच्चायोग से जवाब मिलने के बाद की जाएगी। मामले की जांच जारी है।

शिमला: 17 से 19 जनवरी को चलाए जाने वाले पल्स पोलियो अभियान के संदर्भ में बैठक

23 फरवरी को सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दी जाएगी एल्बेंडाजोल 

शिमला: उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आज यहाँ राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के दूसरे राउंड के लिए गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की बैठक का आयोजन किया गया।

उपायुक्त ने कहा कि जिला शिमला में 23 फरवरी, 2026 को सभी सरकारी और गैरसरकारी स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों पर 1 से 19 साल तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल और विटामिन-ए दी जाएगी ताकि जिला के सभी बच्चों को कृमि मुक्त किया जा सके। 

उन्होंने बताया कि 1 से 5 साल तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल और विटामिन-ए की गोलियां आंगनवाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्ले स्कूल में प्रदान की जाएँगी। वही 5 से 19 साल तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल स्कूलों में प्रदान की जाएगी ताकि बच्चों के पोषण एवं एनीमिया में सुधार किया जा सके। 

उपायुक्त ने कहा कि इस एक दिवसीय कार्यक्रम के तहत जिला के 2150 सरकारी एवं 450 निजी स्कूलों, 2154 आंगनवाड़ी केंद्रों, 997 आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से कार्यक्रम को सफल बनाया जाएगा। कार्यक्रम में जिला शिमला के 1 से 19  साल तक के 2 लाख 21 हजार 319 बच्चों का लक्ष्य समूह निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि जिला शिमला में कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया जा चूका है। इसके साथ-साथ सभी स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों एवं लोगों को जागरूक करने के दृष्टिगत प्रचार-प्रसार सामग्री का भी वितरण किया जा चूका है।

उन्होंने कहा कि 1-2 वर्ष की आयु के बच्चों को पहले 2 मिलीलीटर विटामिन-ए सिरप दिया जाएगा, तत्पश्चात 5 मिनट के अंतराल के बाद आधी गोली एल्बेंडाजोल चुरा बनाकर दी जाएगी। इसी प्रकार, 2-5 वर्ष के बच्चों को 2 मिलीलीटर विटामिन-ए और एक गोली एल्बेंडाजोल दी जाएगी। 5 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को एल्बेंडाजोल की एक पूरी गोली दी जाएगी। पहले से बीमार बच्चे को दवाई नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस सन्दर्भ में सभी आंगनवाड़ी केंद्रों एवं स्कूलों को आवशयक दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। 

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पहली बार सर्वाइकल कैंसर के विरुद्ध चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान; 1 मार्च से आशा वर्कर करेंगी घर-घर सर्वे

शिमला: सर्वाइकल कैंसर, जोकि स्तन कैंसर के बाद सबसे ज्यादा महिलाओं में पाई जाने वाली कैंसर की बीमारी है, के विरुद्ध पहली बार सरकार द्वारा एक विशेष टीकाकरण अभियान की शुरुआत की जा रही है जिसको लेकर 1 मार्च 2026 से आशा वर्कर के माध्यम से घर-घर जाकर सर्वे करवाया जाएगा और पात्र बालिकाओं की पहचान की जाएगी।
इस टीकाकरण अभियान को लेकर आज यहाँ उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में बताया गया कि इस राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान की शुरुआत 29 मार्च 2026 से की जानी प्रस्तावित है, जिसके तहत प्रत्येक रविवार को टीकाकरण होगा। यह अभियान 3 माह तक चलेगा।

क्या है सर्वाइकल कैंसर
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा (बच्चेदानी के निचले हिस्से) में होने वाला कैंसर है, जो मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के कारण होता है। यह 30-50 वर्ष की महिलाओं में अधिक आम है और यौन संबंध से फैलता है। सर्वाइकल कैंसर विश्व स्तर पर महिलाओं में चौथा सबसे आम कैंसर है और भारत में यह दूसरा सबसे आम कैंसर है। एचपीवी टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है। भारत में हर वर्ष लगभग 1.2–1.3 लाख नए सर्वाइकल कैंसर के मामले सामने आते हैं। हर वर्ष लगभग 75,000–80,000 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर पाया जाता है। यह रोग परिवार और समाज के लिए गंभीर क्षति है। एच.पी.वी. संक्रमण सामान्यतः युवावस्था में होता है, इसलिए कम उम्र में टीकाकरण करने से वायरस के संपर्क से पहले सर्वोत्तम सुरक्षा मिलती है। एच.पी.वी. वैक्सीन उन प्रकार के वायरस से सुरक्षा प्रदान करती है, जो अधिकांश सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं।

इन आयु वर्ग के लिए है टीकाकरण
स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन बालिकाओं ने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है लेकिन 15 वर्ष पूर्ण नहीं किए हैं, वह टीकाकरण के लिए पात्र हैं। इस अभियान के तहत सभी पात्र बालिकाओं को कवर किया जाएगा जिसमें प्रवासी और बेसहारा बालिकाएं भी शामिल रहेंगी। यह एकल खुराक मजबूत और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करती है। यह टीका सुरक्षित और प्रभावी है तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदित है। विश्वभर में अब तक करोड़ों खुराक दी जा चुकी हैं। महिलाओं को 35 वर्ष की आयु में और 45 वर्ष की आयु में इसकी जांच करवानी चाहिए। अगर समय पर करवाई गई जांच में कैंसर पाया जाता है तो उसका इलाज संभव है। टीकाकरण से लगभग 83 प्रतिशत तक सर्वाइकल कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है।

अभियान के तहत निशुल्क होगा टीकाकरण, जिला में 39 स्थल चिन्हित
भारत में निजी क्षेत्र में इस टीके की एक खुराक की कीमत 10,000 रुपए तक हो सकती है, लेकिन इस अभियान के अंतर्गत यह पूर्णतया निशुल्क उपलब्ध है। यह टीकाकरण आपके घर के निकट स्थित टीकाकरण स्थलों (सरकारी अस्पतालों) में किया जाएगा जिसके लिए शिमला शहर में 5 स्थल और पूरे जिला में 39 स्थल चिन्हित किए गए हैं। एच.पी.वी. टीकाकरण चयिनत रविवार को आयोजित किया जाएगा। सभी अभिभावकों से अनुरोध है कि वे अपनी सहमति प्रदान करें और अपनी पात्र बालिकाओं के स्वस्थ और समृद्ध जीवन हेतु टीकाकरण अवश्य करवाएँ।
बैठक में बताया गया कि यूएस की वैक्सीन गार्डासिल की 0.5 एमएल की एक डोज़ बायां बाजू के ऊपर के हिस्से में लगाई जाएगी।

यू-विन पोर्टल पर होगा टीकाकरण के लिए पंजीकरण, अभिभावकों की सहमति आवश्यक
बैठक में बताया गया कि टीकाकरण के लिए यू-विन पोर्टल पर पात्र बालिकाओं का पंजीकरण आशा वर्कर द्वारा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, टीकाकरण के लिए अभिभावकों की सहमति आवश्यक है जिसके लिए ओटीपी के माध्यम से उनकी सहमति ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।
टीकाकरण के बाद हल्का बुखार या इंजेक्शन स्थल पर मामूली सा दर्द जैसे सामान्य व अस्थायी लक्षण हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, टीकाकरण के लिए खाली पेट न आएं और टीकाकरण के उपरांत 30 मिनट तक निगरानी में रहना आवश्यक है।

टीकाकरण से वंचित न रहे कोई भी पात्र बालिका – उपायुक्त
उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि टीकाकरण वाले सभी 39 केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं ताकि किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटा जा सके। इसके अतिरिक्त उन्होंने श्रम विभाग को भी इस अभियान में जोड़ने के निर्देश दिए ताकि प्रवासी मजदूरों के परिवारों तक पहुंचा जा सके और कोई भी पात्र बालिका टीकाकरण से वंचित न रहे। उन्होंने शिक्षा विभाग को सभी स्कूलों में टीकाकरण को लेकर पूर्ण जानकारी साझा करने के निर्देश दिए ताकि सभी बालिकाओं को टीकाकरण उपलब्ध हो सके।

बैठक में प्रधानाचार्य आईजीएमसी डॉ सीता ठाकुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ यशपाल रांटा, उपनिदेशक उच्च शिक्षा लेखराज भारद्वाज, जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस ममता पॉल, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ विनीत, कमला नेहरू अस्पताल से एसएमओ डॉ मीनाक्षी और डॉ निशि सूद, आईजीएमसी से उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ प्रवीण और डॉ सुरेंद्र सिंह, आयुष विभाग से डॉ अख्तर अब्बास, आस्था अस्पताल पंथाघाटी से कल्पना शर्मा, आरसीएस शिमला की अध्यक्ष पूजा गोयल और सुरभि सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

सतलुज नदी में गाद से संभावित खतरे की पहचान कर जल्द दें रिपोर्ट – उपायुक्त शिमला

शिमला: उपायुक्त शिमला एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अनुपम कश्यप ने उपमंडल दण्डाधिकारी सुन्नी को सतलुज नदी में गाद जमा होने से संभावित खतरे की पहचान कर उसकी रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को प्रेषित करने निर्देश दिए हैं ताकि गाद निकालने का कार्य जल्द आरंभ किया जा सके। इसके अतिरिक्त, गाद जमा होने से विभिन्न विभागों, घरों, जमीन, पानी की स्कीम, पावर हाउस, सड़कों, सीवेज लाइनों और गौशाला को हुए नुकसान की भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

उपायुक्त आज यहां सतलुज नदी में गाद निकालने के कार्य को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में सुन्नी में गाद जमा होने की गंभीर समस्या और वन विभाग द्वारा गाद हटाने को लेकर दी गई रिपोर्ट पर चर्चा की गई। 

उपमंडल दण्डाधिकारी सुन्नी राजेश वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि तहसील सुन्नी के अंतर्गत मोहाल अनु से मोहाल लुनसु तक के हिस्से को, जो झूले वाले पुल के पास है और जो  मोहाल लुनसु को तहसील करसोग से जोड़ता है, को संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर अधिसूचित किया जाए। उन्होंने बताया कि निकाली गई गाद के स्टोरेज और डिस्पोजल के लिए सतलुज नदी के बाएं किनारे पर जमीन की पहचान कर ली गई है।

उपायुक्त ने कहा कि सतलुज नदी में गाद का यह मामला सुन्नी क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद गंभीर मामला है जिससे उनके घरों और जीवन को खतरा बना हुआ है। इसलिए इस मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार कर प्रेषित की जाए ताकि आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा सके। 

बैठक में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी प्रोटोकॉल ज्योति राणा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ यशपाल रांटा, डीएसपी विजय रघुवंशी, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग राजेश अग्गरवाल, रेंज वन अधिकारी देवी सिंह, सहायक अभियंता विद्युत उमंग गुप्ता, सहायक अभियंता जल शक्ति विभाग नागेंद्र सिंह रावत, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से डॉ नेहा शर्मा और गौरव मेहता भी उपस्थित रहे। 

नगर निगम शिमला का बजट जनता पर बोझ, विकास सिर्फ कागज़ों में” – कमलेश मेहता

“₹688 करोड़ का बजट, लेकिन आय मात्र ₹143 करोड़ — ‘ऊँची दुकान फीका पकवान’ जैसी वित्तीय योजना”

शिमला: भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा सचिव एवं पार्षद कमलेश मेहता ने नगर निगम शिमला के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस शासित नगर निगम द्वारा प्रस्तुत ₹688 करोड़ का बजट वास्तविकता से परे और जनता को भ्रमित करने वाला है। उन्होंने कहा कि जब नगर निगम की वास्तविक आय लगभग ₹143 करोड़ बताई जा रही है, तब इतने बड़े बजट का दावा करना केवल आंकड़ों का खेल है, जो “ढाक के तीन पात” जैसी स्थिति दर्शाता है।

कमलेश मेहता ने कहा कि यह भी बेहद गंभीर विषय है कि नगर निगम के महापौर स्वयं अपने पद पर असंवैधानिक स्थिति में बताए जा रहे हैं, और ऐसे में कहा जा सकता है कि कथित महापौर द्वारा प्रस्तुत बजट की वैधता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए पद की वैधानिक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि बजट में संपत्ति कर और पानी शुल्क बढ़ाने जैसे निर्णय सीधे आम नागरिकों की जेब पर असर डालेंगे। कांग्रेस की नीति “जनता से वसूली और उसी को विकास बताने” वाली प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि टैक्स बढ़ाकर बजट संतुलित करना कोई उपलब्धि नहीं बल्कि वित्तीय कुप्रबंधन का संकेत है।

मेहता ने बजट में घोषित परियोजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 14 खेल मैदान, 17 पार्किंग और 25 नई सड़कों जैसी घोषणाएँ आकर्षक जरूर हैं, लेकिन इनके लिए स्पष्ट वित्तीय स्रोत और समयबद्ध कार्ययोजना का अभाव है। बिना ठोस आधार के ऐसी घोषणाएँ केवल “हवा महल” साबित होती हैं।

उन्होंने कहा कि नगर निगम को केंद्र सरकार से लगभग ₹57 करोड़ का अनुदान मिलने की बात स्वयं बजट दस्तावेज़ों में कही गई है, जिससे साफ है कि निगम अपनी आय से विकास करने में सक्षम नहीं है और बाहरी सहायता पर निर्भर है। यह नगर निगम की वित्तीय स्थिति की वास्तविक तस्वीर दिखाता है।

कमलेश मेहता ने यह भी कहा कि पहली बार बजट बिना विपक्ष की पूर्ण भागीदारी के पेश किया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। “चर्चा से बचना और बजट थोपना यह दर्शाता है कि सरकार खुद अपने आंकड़ों पर भरोसा नहीं कर पा रही,” उन्होंने कहा।

अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के हितों से जुड़े हर मुद्दे को मजबूती से उठाती रहेगी और नगर निगम के इस अव्यावहारिक बजट की सच्चाई शहरवासियों के सामने रखती रहेगी। उन्होंने कहा कि शिमला की जनता को दिखावटी घोषणाएँ नहीं, बल्कि ठोस विकास चाहिए — और भाजपा इसी उद्देश्य के साथ संघर्ष करती रहेगी।

एंटी चिट्टा अभियान के तहत 96 आदतन और संगठित तस्करों को किया गया निरुद्ध

नशा तस्करी के विरुद्ध हिमाचल पुलिस का व्यापक अभियान

हिमाचल: प्रदेश पुलिस विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा शुरू किए गए प्रदेशव्यापी एंटी-चिट्टा अभियान के अंतर्गत संगठित नशा तस्करी के विरुद्ध व्यापक और समन्वित कार्रवाई करते हुए पुलिस द्वारा पीआईटी एंड एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों का प्रभावी रूप से क्रियान्वयन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 19 फरवरी को आठ कुख्यात नशा तस्करों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक (इन्हीबिटरी) आदेश जारी किए गए थे, जिनका आज सफल क्रियान्वयन किया गया। इस कार्रवाई के दौरान जिला शिमला से पांच, देहरा से एक, नूरपुर से एक तथा ऊना से एक तस्कर को निरुद्ध (डिटेन) किया गया। उन्होंने बताया कि यह अभियान बहु-जिला समन्वय, सटीक खुफिया सूचना और विधिक रणनीति के आधार पर संचालित किया गया, जिससे संगठित नशा आपूर्ति नेटवर्क को प्रभावी रूप से बाधित किया गया।
प्रवक्ता ने बताया कि वर्ष 2025 के अंत तक पीआईटी एंड एनडीपीएस एक्ट के तहत 65 नशा तस्करों को निरुद्ध किया गया था, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 31 तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 96 आदतन और संगठित तस्करों को इस कानून के अंतर्गत निरुद्ध किया जा चुका है। इन तस्करों की चल-अचल संपत्तियों की विस्तृत वित्तीय जांच जारी है। अवैध आय से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर विधि अनुसार जब्ती और कुर्की की कार्रवाई की जाएगी, ताकि उनके आर्थिक नेटवर्क को भी समाप्त किया जा सके।
प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में नशा तस्करी के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत आगे भी ऐसे लक्षित और समन्वित अभियान जारी रहेंगे। उन्होंने प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं से नशे से संबंधित किसी भी सूचना को तुरंत 112 या नजदीकी पुलिस थाना में साझा करने की अपील की है। सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।