ब्लॉग

केंद्रीय वित्त मंत्री से मिले जयराम ठाकुर, हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र से मांगी अधिक वित्तीय मदद

इसी महीने में एक्सटर्नल ऐडेड प्रोजेक्ट के जरिए केंद्र ने प्रदेश को 3000 करोड़ की मदद की

हिमाचल भवन और सदन को षड्यंत्र का अड्डा ना बनाएं मुख्यमंत्री

पूरी कैबिनेट दिल्ली गई न प्रधानमंत्री से मिली और न  वित्त मंत्री से मिली

शिमला : हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर विस्तारपूर्वक चर्चा की तथा प्रदेश के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न वित्तीय विषयों को उनके समक्ष रखा। जयराम ठाकुर ने केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को निरंतर दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले हिमाचल प्रदेश के संतुलित एवं सतत विकास के लिए केंद्र का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक के दौरान उन्होंने प्रदेश की वित्तीय सुदृढ़ता, आधारभूत संरचना के विकास, आपदा राहत तथा विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के लिए अधिकतम वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के हितों का पूर्ण ध्यान रखेगी और प्रदेश को आवश्यक सहयोग हमेशा की तरह  प्रदान करती रहेगी। उन्होंने आंकड़े रखते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश को जितना सहयोग मिला वह पिछले 70 सालों में भी नहीं मिल पाया। हिमाचल प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने से केंद्र द्वारा प्रायोजित 191 योजनाओं में प्रदेश की भागीदारी मात्र 10% की होती है, बाकी सारा खर्च केंद्र सरकार द्वारा ही वहन किया जाता है। हिमाचल प्रदेश में आधारभूत संरचनाओं के विकास हेतु नेशनल हाईवे, फोर लेन, विश्व स्तरीय टनल, और रेलवे का जाल भी केंद्र सरकार द्वारा बिछाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा कहते हैं कि बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर ही बेहतर भविष्य की बुनियाद है। हिमाचल में केंद्र के सहयोग से कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। जिसका लाभ समूचे प्रदेश को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास और जनता के हितों की रक्षा के लिए वे निरंतर प्रयासरत हैं तथा हिमाचल के अधिकारों और आवश्यकताओं को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी रूप से उठाते रहेंगे। 
इस महीने हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार से मिले 3000 करोड़ के प्रोजेक्ट
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को वाह्य सहायता प्राप्तपरियोजनाओं (ईएपी) के जरिए केंद्र सरकार द्वारा 3000 करोड़ रुपए की मदद की गई है। जिसमें से जायका दो के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं की सुदृढ़ीकरण के लिए 1617 रुपए के प्रोजेक्ट की स्वीकृति दी गई है। इसमें जायका द्वारा 1294 करोड़ रुपए का ऋण दिया जाएगा। जिसमें से 1165 करोड़ केंद्र सरकार वहन करेगी। इससे हिमाचल प्रदेश के 5 मेडिकल कॉलेज और 86 स्वास्थ्य संस्थाओं में व्यवस्थाएं सुधरेगी। इसके अलावा आपदा पुनर्निर्माण हेतु विश्व बैंक द्वारा 1992 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी गई थी। इस प्रोजेक्ट में भी केंद्र सरकार  1792 करोड़ रुपए का भुगतान करेगी। 
हिमाचल भवन और सदन को षड्यंत्र का अड्डा ना बनाएं मुख्यमंत्री
हार के कारण कांग्रेस के नेताओं का मानसिक संतुलन खो गया है। नरेंद्र मोदी का विरोध, भारतीय जनता पार्टी का विरोध अलग बात है और देश का विरोध अलगबात है। एआई इंपैक्ट समिट पर देश ही नहीं दुनिया की निगाहें थी।  20 से ज्यादा बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल थे। दुनिया की बड़ी से बड़ी टेक कंपनियों के मुखिया शामिल थे। वहां पर जाकर कांग्रेस का नंगा नाच कांग्रेस की असलियत को ही सामने ला रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान बहुतदुर्भाग्यपूर्ण है। हिमाचल भवन और सदन हिमाचल की प्रतिष्ठा और पहचान के प्रतीक हैं इसे हम षड्यंत्र का अड्डा और सराय नहीं बनने दे सकते हैं। 
पूरी कैबिनेट दिल्ली गई न प्रधानमंत्री से मिली और न  वित्त मंत्री से मिली
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के आर्थिक हालात को लेकर पूरी की पूरी कैबिनेट मुख्यमंत्री हमें दिल्ली पहुंची  लेकिन हैरानी की बात यह है कि ना तो कोई प्रधानमंत्री से मिला और नहीं वित्त मंत्री से। कांग्रेस की पूरी कैबिनेट अपने-अपने नेताओं से मिलकर अपनी राजनीतिक समीकरणों को फिट करने में ही जुटी रही। हिमाचल को किसी भी प्रकार से यदि मदद होगी तो वह केंद्र सरकार से होगी प्रधानमंत्री से होगी वित्त मंत्री से होगी न कि कांग्रेस के नेताओं से, लेकिन उनसे मिलने तक की जहमत किसी ने नहीं उठाई। सुक्खू  सरकार का रवैया इस बात का सबूत है कि  सभी लोग सिर्फ और सिर्फ राजनीति करना चाहते हैं और हिमाचल के हितों के नाम पर घड़ी वाली आंसू बहा रहे हैं इनका हिमाचल प्रदेश के हितों से कोई लेनादेना नहीं है।

मुख्य सचिव ने की एचपीवी टीकाकरण अभियान की तैयारियों की समीक्षा

मुख्य सचिव के सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश- अभियान की सफलता के लिए सभी विभाग आपस में मिलकर करें कार्य 

टीका निजी क्षेत्र में पहले से ही उपलब्ध, लेकिन इसकी कीमत बहुत अधिक, सरकार इसे यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम के तहत सभी पात्र बालिकाओं को करा रही निःशुल्क उपलब्ध 

शिमला: मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने आज यहां राज्यव्यापी मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। यह अभियान 28 फरवरी, 2026 से पूरे प्रदेश में यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत शुरू किया जाएगा।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि अभियान सफलतापूर्वक संचालित हो सके। ग्राम पंचायतों, शहरी निकायों, विभिन्न सरकारी विभागों, विद्यालयों और विभिन्न मीडिया माध्यमों के माध्यम लोगों को टीके के लाभ, उसकी सुरक्षा और निःशुल्क उपलब्धता के बारे में जागरूक करने पर विशेष बल दिया गया। एचपीवी टीका गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से बचाव में सहायक है, जो भारत में महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। वैज्ञानिक रूप से यह टीका सुरक्षित और प्रभावी पाया गया है और विश्व के कई देशों में इसका सफल उपयोग किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 67,000 किशोरियों को एकल खुराक (सिंगल डोज वैक्सीन) टीका निःशुल्क लगाया जाएगा। टीकाकरण सत्र 29 मार्च, 5 अप्रैल और 12 अप्रैल, 2026 को आयोजित होंगे। जो किशोरियां किसी कारणवश छूट जाएंगी, उनके लिए 19 अप्रैल, 10 मई, 24 मई और 21 जून, 2026 को विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। टीकाकरण 378 चिन्हित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा किया जाएगा। इसके दृष्टिगत कोल्ड चेन व्यवस्था सुनिश्चित की गई है तथा पंजीकरण और निगरानी यू-विन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए अभिभावकों की सहमति भी ली जाएगी।
तीन महीने के इस विशेष अभियान के बाद एचपीवी टीकाकरण नियमित रूप से यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम के तहत जारी रहेगा। यह अभियान और इसे नियमित टीकाकरण में शामिल करना मुख्यमंत्री के स्वस्थ और समृद्ध हिमाचल दृष्टिकोण के अनुरूप है।
यह पहल प्रदेश की बालिकाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और राज्य में कैंसर के मामलों को कम करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। यह टीका निजी क्षेत्र में पहले से ही उपलब्ध है लेकिन वहां इसकी कीमत बहुत अधिक है, जबकि सरकार इसे यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम के तहत सभी पात्र बालिकाओं को निःशुल्क उपलब्ध करवा रही है।

 

पंजीकृत कामगारों के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य

शिमला : हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड (HPBOCW) के अंतर्गत पंजीकृत सभी कामगारों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। बोर्ड की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और विशेष रूप सेहिमकेयर‘ (HIMCARE) स्वास्थ्य योजना का निर्बाध लाभ सुनिश्चित करने के लिए केवाईसी (e-KYC) करवाना अब अनिवार्य कर दिया गया है।

यह जानकारी देते हुए श्रम कल्याण अधिकारी शिमला श्रेय शर्मा ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार बोर्ड में पंजीकृत श्रमिकों को मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान की जा रही है। इस सुविधा को सक्रिय करने और लाभार्थी के डेटा कोहिम परिवारपोर्टल पर अपडेट करने के लिए केवाईसी की प्रक्रिया को पूर्ण करना आवश्यक है।

बोर्ड ने सभी पंजीकृत कामगारों से आग्रह किया है कि वे अविलंब कार्यालय श्रम कल्याण अधिकारी, शिमला जोन में उपस्थित होकर अपनी केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करें। इसके लिए कामगारों को अपना आधार कार्ड, बोर्ड पंजीकरण कार्ड (श्रमिक कार्ड) और आधार से लिंक मोबाइल नंबर साथ लाना होगा।

उन्होंने बताया कि ईकेवाईसी प्रक्रिया पूर्ण होने की स्थिति में कामगारों को मिलने वाली वित्तीय सहायता और स्वास्थ्य लाभ रुक सकते हैं। अतः सभी पात्र लाभार्थी समय रहते इस औपचारिकता को पूर्ण कर लें ताकि भविष्य में किसी भी असुविधा से बचा जा सके।

साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बन-डाईऑक्साइड एमीशनस से निपटने के वैज्ञानिक आकलन पर रिपोर्ट जारी

अप्रत्याशित बादल फटने की घटनाएं और सिकुड़ते ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के संकेतः मुख्यमंत्री
राज्य में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एमओए हस्ताक्षरित

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज ‘साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बनडाईऑक्साइड एमीशनसः पाथवेज फॉर हिमाचल प्रदेश’ शीर्षक से रिपार्ट जारी की। इस अवसर पर मैसर्स डाबर इंडिया लिमिटेड और मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ राज्य में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) भी हस्ताक्षरित किए गए।

इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार और हरीश जनारथा, सचिव (पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन) एस.के. सिंगला, यूएनईपी क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन की सचिवालय प्रमुख डॉ. डर्वुड जैल्के, मार्टिना ओटो, डायरेक्टर इंडिया प्रोग्राम आईजीएसडी ज़ेरिन ओशो, निदेशक डीसी राणा तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

पहले एमओए के तहत डाबर इंडिया लिमिटेड प्रदेश के किसानों को प्रतिवर्ष 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे (प्रति किस्म के एक लाख) और दस वर्षों में कुल 1.20 करोड़ पौधे (प्रति प्रजाति 10 लाख) उनकी पारिस्थितिकीय अनुकूलता के अनुसार उपलब्ध करवाएगी। निम्न एवं मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर जैसी प्रजातियों के पौधे ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर जिलों और निचले शिमला क्षेत्र में वितरित किए जाएगें। मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला (जड़ी-बूटियां), पदम काष्ठ (वृक्ष) और पुष्करमूल (जड़ी) के पौधे कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर जिलों में वितरित किए जाएगें। अल्पाइन प्रजातियां जैसे अतीस और विष (जड़ी-बूटियाँ) किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को उपलब्ध करवाई जाएगी।
दूसरा एमओए मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ पांच वर्षों की अवधि के लिए हस्ताक्षरित किया गया है, जिसके अंतर्गत सोलन जिला में चयनित औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इस समझौते के तहत छह प्राथमिकता वाली प्रजातियां जिनमें हल्दी (कुर्कुमा लोंगा), अश्वगंधा (विथानिया सोम्निफेरा), शतावरी (एस्पैरागस रेसमोसम), तुलसी (ओसिमम सैंक्टम), चिरायता (स्वर्टिया चिरायिता) और हिमालयन जेंटियन (जेंटियाना कुरू) शामिल है की खेती की जाएगी। इसमें आसपास की पंचायतों को शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 108 बीघा से अधिक भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को शामिल किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान कर राज्य के स्वच्छ पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए कई पहलें की गई हैं। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष पहले सरकार ने हिमाचल प्रदेश को ग्रीन एनर्जी स्टेट के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सत्त प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान वर्ष में 200 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और युवाओं को सौर परियोजनाएं स्थापित करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
नालागढ़ में ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से एक मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र भी स्थापित किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी बढ़ावा दे रही है। इस वर्ष अप्रैल तक एचआरटीसी के बेड़े में लगभग 300 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। विभिन्न सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है और 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक समस्या के रूप में उभर रहा है जिसके परिणामस्वरूप राज्य में अप्रत्याशित बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियरों के सिकुड़ने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को प्राकृतिक चेतावनी समझते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। वर्ष 2023 की आपदा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा में राज्य में 23,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए थे।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश केवल एक भौगोलिक भू-भाग ही नहीं है बल्कि हिमालय की आत्मा है। ग्लेशियर, नदियां, वन और पर्वत इसकी पहचान हैं और इस पर लाखों लोगों का जीवन निर्भर है। हिमालय में किसी भी प्रकार की अस्थिरता के दुष्परिणाम न केवल राज्य बल्कि पूरे देश पर पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है और जब तक पड़ोसी राज्य भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के लंबित बकाये के निपटारे के लिए ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक किशाऊ और रेणुका बांध जैसी आगामी परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। 

चंबा में स्थापित होगी ‘ग्लोबल स्किल्स एंड डिजिटल यूनिवर्सिटी – CM सुक्खू

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में जिला चंबा में ‘ग्लोबल स्किल्स एंड डिजिटल यूनिवर्सिटी’ स्थापित करने को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के स्थापित होने से राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, डिजिटल एवं कौशल विकास के सुदृढ़ीकरण को नई दिशा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला चंबा की सिहुंता तहसील के मौहल चलेरा में स्थापित हो रहा यह विश्वविद्यालय युवाओं को कौशल-आधारित, व्यावसायिक तथा उद्योगोन्मुखी शिक्षा प्रदान करेगा। इस निर्णय से युवाओं की रोज़गार क्षमता बढ़ेगी, उद्यमशीलता को प्रोत्साहन, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के ‘सीखो और कमाओं’ मॉडल से प्रदेश के युवाओं को लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा क्रेडिट-आधारित तथा राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप प्रमाणपत्र, डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रम संचालित किए जाएगें। युवाओं के लिए आधुनिक शैक्षणिक पद्धतियों के अनुरूप ऑनलाइन, ब्लेंडेड तथा अनुभवात्मक शिक्षण पद्धति को अपनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विशेष रूप से ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। विश्वविद्यालय में हेल्थकेयर एवं एलाइड साइंसेज़, मैनेजमेंट एवं कॉमर्स, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, हॉस्पिटैलिटी एवं कुलिनरी आर्ट्स, इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी, अपैरल एंड टैक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक एवं पेट्रोकेमिकल्स, फिटनेस एंड फिजिकल एजूकेशन, कार्पेटिंग एंड फर्नीचर, ड्रोन डेवलपमेंट एंड एपलिकेशन, पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन, कृषि तथा भाषाओं से संबंधित पाठ्यक्रम पढ़ाए जाएगें।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की दूरदर्शिता को प्रदर्शित कर रही इस पहल के तहत उद्योगों की मांग और वैश्विक मानकों के अनुरूप भविष्योन्मुखी शिक्षा प्रणाली का निर्माण किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की स्थापना से जिला चंबा और पूरे राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी तथा शिक्षा, कौशल विकास और रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियों और बदलते वैश्विक रोज़गार बाज़ार को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों के डिज़िटल कौशल का विकास कर उन्हें भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा। विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल मार्केटिंग, फिनटेक और ई-कॉमर्स जैसे कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त युवाओं को वर्चुअल लैब और उद्योग सहयोग के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा ताकि दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी भी अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग में कुशलता हासिल कर सकें।
उन्होंने कहा कि रोज़गार क्षमता बढ़ाने और युवाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत इंडस्ट्री लिंकेज, अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम, इनक्यूबेशन सेंटर तथा प्लेसमेंट सपोर्ट सेल स्थापित किए जाएंगे। सेक्टर स्किल काउंसिल और प्रमुख उद्योगों के सहयोग से पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे तथा ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण के अवसर भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। ‘सीखो और कमाओ’ मॉडल विद्यार्थियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करेगा।
शिक्षा क्षेत्र में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की पहल को इंगित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शासन व्यवस्था, पाठयक्रम निर्माण और संस्थागत जवाबदेही में सुधार लाकर शिक्षा को अधिक पारदर्शी, परिणामोन्मुखी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्किल्स एंड डिजिटल यूनिवर्सिटी एक आदर्श संस्थान के रूप में परिवर्तनकारी बदलाव लाने, शिक्षा और रोज़गार के बीच की खाई को पाटने तथा नवाचार, समावेशन और सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, उपायुक्त किरण भड़ाना ने दिए- ओवरस्पीडिंग व ड्रंकन ड्राइविंग पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश

लाहौल स्पीति : सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उपायुक्त लाहौल स्पीति किरण भड़ाना,की अध्यक्षता में आज उपायुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष, में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिशासी अभियंता पवन राणा द्वारा उपायुक्त एवं सभी उपस्थित सभी असहायों का स्वागत करते हुए कार्यवाही आरंभ की ।इस बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, ब्लैक स्पॉट्स पर सुरक्षा उपाय, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता तथा जागरूकता गतिविधियों को लेकर व्यापक चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक के दौरान वर्ष 2025 में जिले में घटित सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों की समीक्षा की गई, जिसमें कुल 20 सड़क हादसों में 12 लोगों की मृत्यु तथा 58 लोगों के घायल होने की जानकारी प्रस्तुत की गई। उपायुक्त ने इन घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सभी संबंधित विभागों को दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए ठोस, समन्वित एवं परिणाम आधारित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पिछली बैठक दिनांक 13 नवंबर, 2025 में लिए गए निर्णयों की प्रगति की समीक्षा करते हुए लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने को कहा।

दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) में सुरक्षा को मजबूत करने हेतु लोक निर्माण विभाग एवं सीमा सड़क संगठन द्वारा जिले के 15 चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर 1520 मीटर क्रैश बैरियर, 505 मीटर रिटेनिंग वॉल तथा 280 मीटर ब्रेस्ट वॉल के निर्माण के लिए 3.99 करोड़ रुपये का विस्तृत प्रस्ताव परिवहन सचिव को स्वीकृति हेतु भेजा गया है, जिस पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इसके अतिरिक्त इन संवेदनशील एवं दूरस्थ क्षेत्रों में आपातकालीन सहायता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस एवं आपदा प्रबंधन के संपर्क नंबरों सहित फ्लैश एवं चेतावनी साइन बोर्ड स्थापित किए जाएंगे।

सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आरटीओ एवं पुलिस विभाग को निर्देश दिए गए कि वे स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों तथा आम जनता के बीच नियमित जागरूकता अभियान आयोजित करें तथा इसकी मासिक रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को प्रस्तुत करें।

उपायुक्त ने सभी उपमंडल अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से त्रैमासिक सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त लोक निर्माण विभाग एवं सीमा सड़क संगठन को सड़कों की नियमित मरम्मत एवं रखरखाव सुनिश्चित करने तथा दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर आवश्यक सुरक्षा उपाय करने को कहा गया।

पुलिस विभाग को आईटीएमएस प्रणाली के माध्यम से ओवरस्पीडिंग एवं ड्रंकन ड्राइविंग पर कड़ी निगरानी रखने तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

उपायुक्त किरण भड़ाना ने कहा कि सड़क सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करने तथा नियमित अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बैठक में एसडीएम कुनिका एकर्स, पुलिस अधीक्षक शिवानी मेहला, आरटीओ कुल्लू राजेश भण्डारी ,84 आरसीसी के ओसी मेजर पारस एवं 70 आरसीसी के कैप्टेन संजय,मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोशल लाल, बीडीओ डॉ. विवेक गुलेरिया, उप निदेशक शिक्षा रमेश चंद सहित पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, सीमा सड़क संगठन एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

जिला में 4380 बच्चों को दी गई एल्बेंडाजोल की खुराक – DC लाहौल स्पीति किरण भड़ाना

उपायुक्त ने बच्चों को एल्बेंडाजोल पिलाकर किया राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का शुभारंभ

वंचित रह गए बच्चों के लिए 28 फरवरी को आयोजित किया जाएगा मॉप-अप राउंड

लाहौल-स्पीति: जिला लाहौल-स्पीति में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का शुभारंभ उपायुक्त किरण भड़ाना ने जिला मुख्यालय स्थित आंगनबाड़ी केंद्र केलांग में बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक पिलाकर किया। इस अवसर पर उन्होंने अभियान को बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उपायुक्त ने जानकारी दी कि अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान का उद्देश्य बच्चों को कृमि संक्रमण से मुक्त कर उनके स्वास्थ्य, पोषण स्तर और शारीरिक-मानसिक विकास को सुदृढ़ करना है। कृमि संक्रमण बच्चों की वृद्धि एवं सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए समय पर दवा सेवन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि एल्बेंडाजोल दवा कृमि संक्रमण की रोकथाम में प्रभावी है तथा बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होती है।

उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत जिले के 123 आंगनवाड़ी केंद्रों एवं 220 विद्यालयों के माध्यम से कुल 4380 बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक देकर प्रतिरक्षण किया गया।

उन्होंने बताया कि जिला में 1 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 866 बच्चों को कृमि मुक्ति दवाई सहित विटामिन-ए की खुराक पिलाई गई, जबकि 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 3514 बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य उपमंडल लाहौल में 1860 बच्चों को और काजा उप मंडल में 2520 बच्चों को कृमि मुक्ति दवाई पिलाई गई। यह पहल बच्चों के समुचित शारीरिक विकास और कुपोषण की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उपायुक्त ने अभिभावकों से अपील की कि यदि कोई बच्चा किसी कारणवश आज दवा लेने से वंचित रह गया है, तो उसके लिए 28 फरवरी को मॉप-अप राउंड आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोशन लाल, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. पारस, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

143 पदों के लिए कैंपस इंटरव्यू 26 व 27 फरवरी को

सोलन: उप रोज़गार कार्यालय बद्दी में 26 फरवरी, 2026 को 57 पदों के लिए तथा उप रोज़गार कार्यालय नालागढ़ में 27 फरवरी, 2026 को 86 पदों की भर्ती के लिए कैंपस इंटरव्यू आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी ज़िला रोज़गार अधिकारी सोलन जगदीश कुमार ने दी।

जगदीश कुमार ने कहा कि मैसर्ज़ हिम इंजीनियर इंडिया प्रा. लि., बददी, वेल्डर, प्रेस ऑपरेटर, ड्राइवर ट्रक, के 17 पद तथा मैसर्ज़ अर्युदा गलोबल चंडीगढ, ऑपरेटर, टेलेकालर, कोरडीनेटर, फील्ड इंजीनियर के 40 पदों को भरने लिए 26 फरवरी, 2026 को उप-रोजगाार कार्यालय, मॉडल कैरियर सेंटर, बददी, नजदीक गुरुद्वारा संडोली, जिला सोलन, व मैसर्ज़ पेंगुइन इलेकटाªॅनिक प्रा. लि. नालागढ, द्वारा ट्रेनी के 80 पद, व मैसर्ज कोमेड केमिकल बददी द्वारा एग्जीक्यूटिव, हेल्पर, केमिस्ट के 6 पदों को भरने लिए 27 फरवरी, 2026 को उप-रोजगार कार्यालय, नालागढ, जिला सोलन, में भर्ती के लिए कैंपस इंटरव्यू आयोजित किए जा रहे है।

उन्होंने कहा कि उक्त पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता 10वीं, 12वीं, आई.टी.आई., वेल्डर, बी.फार्मा, डी.फार्मा, बी.टेक इलेक्ट्रॉनिक्स व आयु 19 से 40 वर्ष के मध्य होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इन पदों की विस्तृत जानकारी आवेदक विभागीय पोर्टल ई.ई.एम.आई.एस. में प्राप्त कर सकते हैं। सभी योग्य एवं इच्छुक आवेदक विभागीय पोर्टल ई.ई.एम.आई.एस. पर कैंडिडेट लॉगइन टैब के माध्यम से पंजीकृत करने के उपरांत अपनी रेजिस्ट्रेशन प्रोफाइल पर अधिसूचित रिक्तियों के लिए अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आवेदन करने से पूर्व प्रत्येक आवेदक का नाम रोज़गार कार्यालय में पंजीकृत होना अनिवार्य है।

जगदीश कुमार ने कहा कि इच्छुक उम्मीदवार अपनी योग्यता सम्बन्धी सभी अनिवार्य प्रमाण पत्र व दस्तावेजों सहित 26 फरवरी, 2026 को उप-रोजगार कार्यालय, मॉडल कैरियर सेंटर, बददी, नजदीक गुरुद्वारा संडोली, जिला सोलन, तथा 27 फरवरी, 2026 को उप-रोजगार कार्यालय, नालागढ, जिला सोलन, में प्रातः 10.30 बजे पहुंचकर कैंपस इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि कैंपस इंटरव्यू में भाग लेने के लिए कोई भी यात्रा भत्ता नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अधिक जानकारी के लिए उम्मीदवार दूरभाष नम्बर 9872640412, 9816928706 तथा 8219971112 पर सम्पर्क कर सकते है।

चंबा: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने 44 लाख की धन राशि से निर्मित अतिरिक्त विद्यालय भवन का किया लोकार्पण

शिक्षकों की सक्रिय भूमिका विभागीय नीतियों की सफलता का आधार

चंबा जिला के राजकीय विद्यालयों में नामांकन बेहतर, हरसंभव सहयोग करेगी सरकार –शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर

चंबा: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय चंबा में 44 लाख की धन राशि से निर्मित अतिरिक्त भवन का विधिवत लोकार्पण किया।

शिक्षा मंत्री ने इस दौरान विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाई जा रही विभिन्न सुविधाओं का भी निरीक्षण किया।

रोहित ठाकुर ने इस अवसर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा स्थानीय लोगों से संवाद करते हुए कहा कि विभागीय नीतियों की सफलता का आधार शिक्षक हैं।

साथ में उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं की धरातल पर सफलता

शिक्षकों की निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी हैं। चाहे वह राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल, सीबीएसई पाठ्यक्रम से राजकीय विद्यालयों की संबद्धता , अटल आदर्श विद्यालय, पीएम श्री या सीएम श्री योजना हो—इन सभी की सफलता शिक्षकों की सक्रिय भूमिका पर निर्भर करती है।

रोहित ठाकुर ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सभी विभागीय कर्मी भविष्य की चुनौतियों के दृष्टिगत विशेष तत्परता रखेंगे।

शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बाल एवं कन्या चंबा का गौरवशाली इतिहास रहा है और यह संस्थान न केवल चंबा जिला बल्कि समूचे प्रदेश के प्रतिष्ठित विद्यालयों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों एवं सर्वांगीण विकास का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

उन्होंने कन्या विद्यालय में प्रारंभ की गई फेसियल अटेंडेंस प्रणाली तथा अन्य नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे प्रयास वर्तमान की आवश्यकता है।

शिक्षा मंत्री ने संसाधनों के समुचित उपयोग तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की प्राथमिकता पर बल देते हुए कहा कि जिला चंबा के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों का नामांकन बेहतर है, यहां के विद्यालयों को सशक्त बनाने के लिए सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

रोहित ठाकुर ने विधायक नीरज नैय्यर द्वारा चंबा विधानसभा क्षेत्र में करवाए जा रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों और वित्तीय चुनौतियों के बावजूद क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

शिक्षा मंत्री ने विद्यालय की छात्राओं द्वारा पारंपरिक लोक सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए प्रोत्साहन स्वरूप 15 हजार की धनराशि देने की भी घोषणा की।

उन्होंने इसके पश्चात राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय करियां का दौरा कर संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

विधायक नीरज नैय्यर ने इससे पहले शिक्षा मंत्री का स्वागत किया तथा राज्य सरकार द्वारा चंबा विधानसभा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए विशेष प्राथमिकता को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का विशेष आभार व्यक्त किया। साथ में उन्होंने विकासात्मक परियोजनाओं सहित शिक्षा गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाने के लिए विधानसभा क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न कार्यों का उल्लेख भी किया।

पूर्व मंत्री आशा कुमारी, पूर्व विधायक तिलक राज शर्मा, सोहनलाल,

उपायुक्त मुकेश रेपसवाल, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार,उप मंडल दंडाधिकारी प्रियांशु खाती, उपनिदेशक स्कूल शिक्षा विकास महाजन, शिक्षकगण, विद्यार्थी तथा उनके अभिभावक एवं स्थानीय गण मान्य लोग इस अवसर पर उपस्थित रहे।

सुंदरनगर: प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन प्लॉट का किसानों व विद्यार्थियों ने किया भ्रमण

सुंदरनगर: कृषि विभाग द्वारा कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) के तत्वावधान में विकास खंड धनोटु की ग्राम पंचायत घांगल में उन्नतशील किसान श्री प्रताप सिंह के प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन प्लॉट का भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला किन्नौर से आए किसानों ने प्राकृतिक खेती के तहत उगाई गई गेहूं एवं मटर की फसलों का अवलोकन किया तथा खेती की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न विधियों, कम लागत में अधिक उत्पादन तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के उपायों के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रतिभागियों ने खेत में अपनाई जा रही पद्धतियों को नजदीक से देखा और अपने अनुभव साझा किए।

इसके अतिरिक्त, विकास खंड धनोटु के बीज गुणन फार्म छातर में स्थापित प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन प्लॉट का भी भ्रमण कराया गया। इस दौरान राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनैड के छात्र-छात्राओं ने प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले विभिन्न घटकों की जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों को जीवामृत एवं घनजीवामृत बनाने की विधि का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया तथा उन्होंने स्वयं इनका निर्माण कर सीखने का अनुभव प्राप्त किया।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के भ्रमण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों एवं विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती के प्रति प्रेरित करना तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।