नादौन : नागरिक अस्पताल नादौन के परिसर में स्थित लैब के पुराने भवन को गिराने और उसके मलबे को उठाने के लिए उक्त भवन की नीलामी प्रक्रिया 28 फरवरी को सुबह 11 बजे आरंभ की जाएगी।
इस पुराने भवन की नीलामी में भाग लेने के इच्छुक व्यक्ति खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय नादौन में संपर्क कर सकते हैं।

हमीरपुर : अदालतों में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 14 मार्च को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर हमीरपुर और उपमंडल स्तर के न्यायिक परिसरों नादौन तथा बड़सर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव कुलदीप शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न मामलों का निपटारा समझौते के आधार पर किया जाएगा। इस दौरान आपराधिक कंपाउंडेबल अपराध, एन. आई. एक्ट के मामले, धन वसूली के मामले और भूमि विवाद आदि पर सुनवाई करके निपटारा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सड़क दुर्घटना क्लेम के मामले, मोटर व्हीकल अधिनियम, श्रम विवाद के मामले, बिजली, पानी और टेलीफोन के बिल, वैवाहिक विवाद, भूमि अधिग्रहण के मामले, वेतन और भत्तों और सेवानिवृत्ति से संबधित मामलों का भी निपटारा होगा।
कुलदीप शर्मा ने बताया कि लोक अदालत में उन मामलों का निपटारा भी करवाया जा सकता है जो अभी तक न्यायालय में दायर नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि अपने मामलों का निपटारा करवाने के इच्छुक लोग जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण कार्यालय हमीरपुर या संबंधित न्यायालय में सादे कागज पर आवेदन कर सकते हैं। लोक अदालत से पहले प्री-लोक अदालत सीटिंग में भी इन मामलों का निपटारा आपसी सहमति के आधार पर करवाया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नंबर 01972-224399 पर संपर्क किया जा सकता है।

हमीरपुर : अदालतों में लंबित मामलों को मध्यस्थता, सुलह एवं आपसी सहमति से निपटाने के लिए एक विशेष अभियान आरंभ किया गया है। ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान के तहत विभिन्न मामलों के निपटारे के लिए जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण विशेषज्ञ सामुदायिक मध्यस्थों की नियुक्ति करने जा रही है। ये विशेषज्ञ हमीरपुर, नादौन, बड़सर और भोरंज की अदालतों में लंबित विभिन्न मामलों के निपटारे में मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे।
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव कुलदीप शर्मा ने बताया कि जिला हमीरपुर में मध्यस्थता के लिए विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया जाएगा। इस पैनल में राजस्व विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी, बैंकों और बीमा कंपनियों के सेवानिवृत्त अधिकारी, अधिवक्ता और कई अन्य परामर्शदाता शामिल किए जा सकते हैं।
कुलदीप शर्मा ने बताया कि अगर कोई सेवानिवृत्त अधिकारी, अधिवक्ता या अन्य परामर्शदाता सामुदायिक मध्यस्थ बनना चाहता है तो वह एक सप्ताह के भीतर जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के कार्यालय में आवेदन कर सकता है। आवेदन पत्र के साथ अपना बायोडाटा, संबंधित क्षेत्र में अनुभव और अन्य आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेज संलग्न करने होंगे। अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नंबर 01972-224399 पर संपर्क किया जा सकता है।
कुलदीप शर्मा ने बताया कि अदालतों में लंबित मामलों का निपटारा मध्यस्थता, सुलह एवं आपसी सहमति से करने से दोनों पक्षों के समय और धन की बचत होती है तथा उनमें सौहार्दपूर्ण संबंध भी बने रहते हैं। इसी के मद्देनजर राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण (नालसा) ने ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान शुरू किया है।

संवेदनशील पंचायतों की नशा निवारण समितियों को सख्त हिदायत, अनुपस्थित प्रधानाचार्यों को कारण बताओ नोटिस
सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर भी कड़ाई के निर्देश
ऊना: ऊना जिले में नशा निवारण अभियान को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि एंटी-चिट्टा अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा पंचायत स्तर पर गठित नशा निवारण समितियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
वे बुधवार को डीआरडीए सभागार में एन-कॉर्ड (राष्ट्रीय नार्को समन्वय पोर्टल) के तहत गठित जिला स्तरीय समिति तथा इसके उपरांत आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमठ भी उपस्थित रहे।
नशा निवारण में ढिलाई नहीं चलेगी
उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में नशा उन्मूलन पर विशेष फोकस किया गया है और इसी क्रम में व्यापक एंटी-चिट्टा अभियान संचालित है। उन्होंने बताया कि जिले की सभी पंचायतों में स्थानीय स्कूल अथवा कॉलेज के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में नशा निवारण समितियां गठित की गई हैं। इनमें से 10 पंचायतों को ‘चिट्टा’ के दृष्टिकोण से संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है, जहां विशेष सतर्कता और सक्रियता अपेक्षित है।
इन संवेदनशील पंचायतों की समितियों के अध्यक्ष के रूप में संबंधित स्कूल एवं कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को बैठक में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था, किंतु कुछ प्रधानाचार्यों की अनुपस्थिति पर उपायुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया करार देते हुए अनुपस्थित प्रधानाचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने दो टूक कहा कि भविष्य में इस प्रकार की उदासीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी तथा संतोषजनक उत्तर न मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जनता को अभियान से जोड़ें
जतिन लाल ने निर्देश दिए कि सभी नशा निवारण समितियां नियमित अंतराल पर बैठकें आयोजित करें तथा स्थानीय समुदाय, युवाओं, महिला मंडलों और सामाजिक संगठनों को अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ें। उन्होंने संदिग्ध गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने और संबंधित सूचनाएं तत्काल प्रशासन व पुलिस को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जो सदस्य अपेक्षित सहयोग नहीं दे रहे हैं, उनकी जानकारी प्रशासन को दी जाए ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
पुनर्वास केंद्रों की कड़ी निगरानी पर ज़ोर
उपायुक्त ने नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्रों के औचक निरीक्षण के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पाए जाने पर सख्ती से कार्रवाई की जाए। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत गठित जिला स्तरीय समिति को अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप केंद्रों की गहन जांच सुनिश्चित करने को कहा। प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों पर विशेष बल दिया।
सड़क सुरक्षा पर भी सख्त रुख
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में दुर्घटना संभावित स्थलों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने ब्लैक स्पॉट सुधार, आवश्यकतानुसार पैराफिट लगाने तथा तेज और लापरवाह वाहन चालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिले के प्रमुख बाजारों में घोषित नो-पार्किंग और नो-वेंडिंग जोन को प्रभावी ढंग से लागू करने के भी निर्देश दिए। उपायुक्त ने एसडीएम एवं पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई
बैठक में पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमठ ने बताया कि जिले में एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाया जाएगा तथा सभी विभागों के समन्वित सहयोग से कार्रवाई तेज की जाएगी।
उन्होंने केमिस्ट दुकानों के नियमित निरीक्षण, दवाओं के स्टॉक एवं रिकॉर्ड की जांच तथा प्रतिबंधित अथवा अवैध दवाओं की बिक्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सड़क सुरक्षा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि रैश ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग और शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जा रही है।
बैठक में एएसपी सुरेंद्र शर्मा, सीएमओ डॉ. संजीव वर्मा, एसडीएम बंगाणा सोनू गोयल, एसडीएम गगरेट सौमिल गौतम, डीएसपी हरोली मोहन रावत, डीएसपी अंब अनिल पटियाल सहित पुलिस, प्रशासन के अधिकारी तथा विभिन्न पंचायत स्तरीय नशा निवारण समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य उपस्थित रहे।

हिमाचल: मनाली में एक होमस्टे में ठहरे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के 22 वर्षीय पोते वीर सोरेन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जानकारी अनुसार वीर सोरेन अपने दोस्तों के साथ मनाली घूमने आया था। सोमवार को सोलंगनाला और हामटा स्नो प्वाइंट में घूमने के बाद वापस होम स्टे में लौट कर आया था। मंगलवार सुबह वह होम स्टे में ही रुका था। दोस्त वापस लौट तो वीरेन ने सर में भारी दर्द होने की बात की, जिसके बाद दोस्तों ने उसे दवाई दी। दोपहर ढाई बजे दोस्तो को वीरेन के विस्तर से नीचे गिरने की आवाज सुनाई दी। वहां जाकर देखा तो बेड से गिरा पड़ा था। दोस्तों ने उसे सिविल अस्पताल पहुंचाया। रास्ते में उसके मुंह से झाग भी निकला। सिविल अस्पताल में उसे सीपीआर दी गई लेकिन जांच उपरांत डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मुख्यमंत्री ने वीर सोरेन के निधन पर शोक व्यक्त किया
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पौत्र वीर सोरेन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वीर सोरेन का आज कुल्लू में आकस्मिक निधन हो गया।
मुख्यमंत्री ने शोकसंतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकसंतप्त परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

सोलन: डॉ. वाई. एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय द्वारा “सस्टेनेबल सिनर्जीज़ 2026” शीर्षक से प्रकृति-आधारित कृषि एवं नॉन टिम्बर फॉरेस्ट प्रोडक्टस (एन.टी.एफ.पी) विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के सहयोग से ANRF-PAIR (त्वरित नवाचार एवं अनुसंधान साझेदारी कार्यक्रम) के अंतर्गत आयोजित की गई।
इस अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली और आईआईटी रुड़की, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, शूलिनी विश्वविद्यालय, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय और नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। संगोष्ठी में प्रकृति-आधारित कृषि प्रणालियों एवं नॉन टिम्बर फॉरेस्ट प्रोडक्टस को मुख्यधारा की पर्यावरणीय स्थिरता रूपरेखा में समाहित करने हेतु नवाचारपूर्ण एवं सतत उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि निदेशक अनुसंधान डॉ. देविना वैद्य ने अपने संबोधन में कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल अनुसंधान सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक ज्ञान को समाज के हित में फील्ड स्तर तक पहुंचाना भी आवश्यक है। उन्होंने ए.एन.आर.एफ. परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम सहयोगात्मक एवं अंतःविषयक अनुसंधान को सुदृढ़ करते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के ग्रामीण विकास एवं प्रौद्योगिकी केंद्र की प्रो. अनुश्री मलिक ने कहा कि विश्वविद्यालय ने हिमालयी परिप्रेक्ष्य में ज्ञान प्रणाली को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. इंदर देव ने राज्य में प्राकृतिक खेती की सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रदेश में 2.2 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. यशपाल शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी।
संगोष्ठी में जैव प्रौद्योगिकी, मृदा विज्ञान, सूक्ष्मजीव विज्ञान, पर्यावरण अभियांत्रिकी एवं सतत कृषि के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों द्वारा पाँच मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।
प्रो. अनुश्री मलिक ने ‘ऐलगे-सहायित प्रकृति-आधारित कृषि: वर्तमान अनुसंधान एवं उत्पाद विकास परिदृश्य” विषय पर व्याख्यान देते हुए ऐलगे-आधारित जैव उर्वरकों, जैव प्रेरकों एवं जैव कीटनाशकों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह तकनीक बीज अंकुरण, फसल उत्पादकता एवं मृदा स्वास्थ्य को बढ़ाने में सहायक है तथा रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करती है। उच्च उत्पादन लागत, सीमित भंडारण अवधि एवं जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने अपशिष्ट जल उपचार, कार्बन अवशोषण एवं फसल पोषक उत्पादों के एकीकृत उत्पादन हेतु ‘ऐलगे बायोरिफाइनरी मॉडल’ का सुझाव दिया। प्रो. सुधीर वर्मा ने प्राकृतिक खेती के माध्यम से पुनर्योजी मृदा प्रबंधन विषय पर व्याख्यान देते हुए कम लागत वाली सतत कृषि पद्धतियों, मृदा उर्वरता की पुनर्स्थापना, अंतःफसल प्रणाली, जल संरक्षण, देशी केंचुओं की सक्रियता एवं सांस्कृतिक कीट प्रबंधन पर बल दिया।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के डॉ. निलेंदु बसाक ने पर्यावरण संरक्षण में मृदा सूक्ष्मजीव: मृदा स्वास्थ्य, जलवायु सहनशीलता एवं उभरते प्रदूषकों का संबंध विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मृदा सूक्ष्मजीव समुदायों की भूमिका पोषक तत्व चक्र, ग्रीनहाउस गैस नियंत्रण एवं प्रदूषक रूपांतरण में महत्वपूर्ण बताई। भारी धातुओं, सूक्ष्म प्लास्टिक एवं एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीन जैसे उभरते प्रदूषकों पर भी चर्चा की गई। उन्होंने देशी एवं आनुवंशिक रूप से संशोधित सूक्ष्मजीवों के माध्यम से मृदा उर्वरता एवं फसल उत्पादकता बढ़ाने पर चल रहे अनुसंधान की जानकारी दी।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के डॉ. रवि कांत भाटिया ने हरित एवं सतत जैव-अर्थव्यवस्था के लिए अभियांत्रिक बायोचार आधारित मूल्य संवर्धित उत्पाद” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संशोधित संरचना वाला बायोचार मृदा उर्वरता बढ़ाने, कार्बन अवशोषण, प्रदूषकों के नियंत्रण तथा उच्च मूल्य के जैव-आधारित उत्पादों के विकास में सहायक है।
डॉ. संजीव चौहान, पूर्व निदेशक अनुसंधान ने पर्यावरणीय स्थिरता विषय पर व्याख्यान देते हुए प्राकृतिक खेती को नॉन टिम्बर फॉरेस्ट प्रोडक्टस से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं शमन रणनीतियों, स्थिरता के चार स्तंभों तथा प्रत्यक्ष वन लाभों से अप्रत्यक्ष लाभों की ओर अनुसंधान के फोकस को स्थानांतरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र में सतत विकास हेतु बहु-विषयक सहयोग एवं दीर्घकालिक पारिस्थितिकीय योजना की आवश्यकता रेखांकित की।
संगोष्ठी की चर्चाओं में ANRF PAIR ढांचे के अंतर्गत संस्थागत साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। समापन सत्र में अनुसंधान नेटवर्क को सुदृढ़ करने, प्रकृति-आधारित कृषि मॉडल को बढ़ावा देने तथा समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति व्यक्त की गई। इस आयोजन के सह-समन्वयक डॉ. पंकज ठाकुर एवं डॉ. रोहित शर्मा रहे।
ANRF PAIR पहल शैक्षणिक उत्कृष्टता, अंतःविषयक सहयोग एवं राष्ट्रीय क्षमता निर्माण की साझा परिकल्पना का प्रतिनिधित्व करती है। ऊर्जा, पर्यावरणीय स्थिरता एवं फोटोनिक्स इसके प्रमुख विषयगत क्षेत्र हैं, जो राष्ट्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु एक सशक्त मंच प्रदान करते हैं। इस ढांचे के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली हब संस्थान है, जबकि दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू विश्वविद्यालय तथा इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय स्पोक संस्थान हैं, जो सामूहिक रूप से इस साझेदारी की वैज्ञानिक आधारशिला को सुदृढ़ करते हैं।
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शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वित्त विभाग को राज्य के लोक निर्माण (पीडब्ल्यूडी) और जल शक्ति सहित विभिन्न विभागों से संबंधित ठेकेदारों के 20 लाख रुपये तक के सभी लंबित बिलों को प्राथमिकता के आधार पर अदा करने के निर्देश दिए हैं।
वित्त विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां जानकारी दी कि लगभग 225 करोड़ रुपये की बकाया राशि शीघ्र ही विभिन्न ठेकेदारों को जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय छोटे और मध्यम ठेकेदारों पर पड़ रहे वित्तीय बोझ को कम करने तथा राज्य भर में चल रहे विकास कार्यों के सुचारु और निर्बाध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।