


बिलासपुर: जिला मुख्यालय के बचत भवन में कोल डैम विस्थापित पुनर्वास एवं पुनर्वास सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक सोमवार को बचत भवन, बिलासपुर में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मंडलायुक्त डॉ. राज कृष्ण परूथी ने की। बैठक में उपायुक्त राहुल कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त ओमकांत ठाकुर, एसडीएम सदर डॉ. राजदीप सिंह, सहायक आयुक्त राज कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा एनटीपीसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में कोल डैम परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। डिवीजनल कमिश्नर ने राजस्व विभाग को निर्देश दिए कि विस्थापित परिवारों को दिए जाने वाले 12 प्लॉटों से संबंधित राजस्व प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि इन प्लॉटों पर बिजली, पानी तथा सड़क जैसी सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध करवाई जाएं। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था के लिए सोलर लाइटें लगाने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में जानकारी दी गई कि एनटीपीसी द्वारा ब्लास्टिंग से प्रभावित परिवारों को अब तक 17 लाख 64 हजार 688 रुपए की राहत राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त परियोजना से प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध करवाने की दिशा में भी कार्य किया गया है। अब तक 440 प्रभावित लोगों को अस्थायी रोजगार तथा 25 लोगों को स्थायी रोजगार प्रदान किया गया है। डिवीजनल कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को एनटीपीसी की जॉब पॉलिसी के बारे में जागरूक किया जाए, ताकि पात्र परिवार इस योजना का लाभ उठा सकें।
बैठक के दौरान हरनोडा क्षेत्र में बच्चों और युवाओं के लिए खेल सुविधाएं विकसित करने के विषय पर भी विस्तार से चर्चा की गई। डिवीजनल कमिश्नर ने जिला खेल अधिकारी को निर्देश दिए कि वह संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि वहां किस प्रकार की खेल सुविधाएं और खेल मैदान विकसित किए जा सकते हैं, ताकि स्थानीय युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने एनटीपीसी के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि गैर-सरकारी सदस्यों के साथ नियमित रूप से बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि विस्थापित परिवारों की समस्याओं और मांगों को समय रहते समझा जा सके और उनका शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में विस्थापित परिवारों को दिए गए प्लॉटों में पानी की उपलब्धता, सड़क सुविधा तथा ड्रेनेज व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की गई। डिवीजनल कमिश्नर ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि इन समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम शीघ्र उठाए जाएं, ताकि विस्थापित परिवारों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
इसके अतिरिक्त हरनोड़ा योजना के अंतर्गत लगभग 59 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने की योजना पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए कृषि तथा उद्यान विभाग द्वारा जागरूकता शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि किसान आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल खेती की ओर प्रेरित हो सकें।
डिवीजनल कमिश्नर ने कहा कि कोल डैम परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और आजीविका से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना आवश्यक है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए विस्थापित परिवारों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।
यह बैठक 8 दिसंबर 2025 को हिमाचल प्रदेश सरकार के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय कोल डैम विस्थापित एवं पुनर्वास सलाहकार समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में आयोजित की गई।

हमीरपुर: क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण की बैठक 24 मार्च को दोपहर बारह बजे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय हमीरपुर में आयोजित की जाएगी।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अंकुश शर्मा ने बताया कि इस बैठक में एचआरटीसी द्वारा सरेंडर किए गए 18 रूटों के संबंध में चर्चा की जाएगी। उन्होंने सभी आवेदकों से इस बैठक में उपस्थित रहने की अपील की है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण की बैठक में केवल इन्हीं रूटों से संबंधित मामलों पर विचार व निर्णय लिया जाएगा।

ऊना: जिला प्रशासन ऊना ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूल बसों और अन्य स्कूली वाहनों के संचालन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेशों के अनुसार जिले में संचालित सभी स्कूल बसों और वैन संचालकों को परिवहन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों तथा
निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। यह आदेश जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं उपायुक्त ऊना जतिन लाल द्वारा स्कूली बच्चों की सुरक्षा तथा आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 33 और 34 के तहत जारी किए गए हैं।
जारी आदेश के अनुसार सभी स्कूल बसों और वैन में वैध फिटनेस प्रमाण पत्र, पंजीकरण प्रमाण पत्र, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य रूप से होने चाहिए। निरीक्षण के दौरान इन दस्तावेजों को सक्षम अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। प्रत्येक स्कूल वाहन के लिए प्रशिक्षित चालक का होना भी अनिवार्य है, जिसके पास परिवहन वाहन चलाने के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। इसके अतिरिक्त स्कूली बच्चों को ले जाते समय वाहन में सहायक अथवा परिचालक की उपस्थिति भी सुनिश्चित करनी होगी।
उपायुक्त ने बताया कि सभी स्कूल बसों और वैन में अग्निशामक यंत्र, प्राथमिक उपचार बॉक्स, आपातकालीन निकास, सुचारू रूप से कार्य करने वाले दरवाजे, उचित बैठने की व्यवस्था तथा स्पीड गवर्नर जैसे आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होना अनिवार्य है। साथ ही वाहनों की गति निर्धारित सीमा के भीतर रखी जाएगी और किसी भी परिस्थिति में बच्चों को ओवरलोड करके ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
उन्होंने सभी स्कूल बसों और वैन के आगे तथा पीछे स्पष्ट रूप से “स्कूल बस/वैन” अंकित करने के साथ-साथ निर्धारित मानदंडों के अनुसार स्कूल का नाम और संपर्क नंबर भी वाहन पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं।
उपायुक्त ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) ऊना तथा जिले के सभी उपमंडलाधिकारियों (एसडीएम) को निर्देश दिए हैं कि वे अगले 15 दिनों के भीतर विशेष निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान चलाकर स्कूल बसों और वैन की जांच सुनिश्चित करें तथा इसकी विस्तृत रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को प्रस्तुत करें। इसके बाद भी नियमित रूप से निरीक्षण जारी रखा जाएगा ताकि सुरक्षा मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित हो सके। यदि कोई स्कूल बस या वैन निर्धारित सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हुए पाई जाती है तो उसके विरुद्ध चालान, वाहन जब्ती अथवा संचालन पर रोक जैसी कार्रवाई की जा सकती है तथा संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
उपायुक्त ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए हैं कि स्कूलों के आसपास तथा प्रमुख मार्गों पर नियमित जांच अभियान चलाकर सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करें।
साथ ही उपायुक्त ने जिले के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे इन सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। आदेशों का उल्लंघन करने पर मोटर वाहन अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 तथा अन्य लागू कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश जिला ऊना के संपूर्ण क्षेत्राधिकार में तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

ऊना: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में सोमवार को नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन स्कूल गई दो मासूम सगी बहनें अपने ही स्कूल की बस की चपेट में आ गईं। इस हादसे में एक नन्हीं बच्ची की मौत हो गई] जबकि दूसरी बहन अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। जानकारी के अनुसार दोनों बच्चियां ऊना के रक्कड़ कॉलोनी स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ती थीं। सोमवार को नए सत्र के पहले दिन दोनों बहनें उत्साह के साथ स्कूल गई थीं। छुट्टी के बाद जब स्कूल बस उन्हें घर के पास रैंसरी क्षेत्र में उतारकर आगे बढ़ने लगी, उसी दौरान अचानक यह दर्दनाक हादसा हो गया।
बताया जा रहा है कि बच्चियों को बस से उतारने के बाद चालक वाहन को पीछे की ओर मोड़ रहा था। इसी दौरान दोनों मासूम बस के बेहद करीब आ गईं और देखते ही देखते बस की चपेट में आ गईं। कुछ ही पलों में खुशी का माहौल चीख-पुकार में बदल गया और आसपास मौजूद लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चियों को तुरंत क्षेत्रीय अस्पताल ऊना पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद तीन वर्षीय आश्वि की हालत गंभीर देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ रेफर कर दिया। लेकिन दुर्भाग्य से अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी सांसें थम गईं। वहीं पांच वर्षीय बड़ी बहन प्रिशा का उपचार अभी क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार स्कूल बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

शिमला: राज्यपाल (नामित) कविन्द्र गुप्ता तथा उनकी धर्मपत्नी बिंदु गुप्ता का सोमवार सायंकाल शिमला पहुंचने पर गर्मजोशी और उत्साह के साथ स्वागत किया गया।
कविन्द्र गुप्ता 10 मार्च, 2026 को प्रातः 11ः45 बजे हिमाचल प्रदेश के 30वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, विधायकगण, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, विश्वविद्यालयों के कुलपति, राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा अन्य गणमान्य नागरिकों ने लोक भवन में राज्यपाल (नामित) का स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राज्यपाल (नामित) तथा उनकी धर्मपत्नी बिंदु गुप्ता को हिमाचली टोपी, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि वे समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर हिमाचल प्रदेश के कल्याण और प्रगति के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हम सब मिलकर हिमाचल प्रदेश के बेहतर भविष्य के लिए आगे बढ़ेंगे। संभवतः मैं सात महीनों के भीतर इस प्रकार का पदोन्नयन प्राप्त करने वाला पहला व्यक्ति हूं। राज्यपाल के रूप में सेवा करना एक बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती है, जिसे मैं पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करूंगा।’’
यह स्वागत समारोह राज्य के लोगों और नेतृत्व द्वारा राज्यपाल (नामित) का शपथ ग्रहण समारोह से पूर्व हार्दिक अभिनंदन और सद्भावना का प्रतीक रहा।

शिमला: ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन की फेडरल एग्जीक्यूटिव की बैठक 08 मार्च 2026 को देहरादून में आयोजित हुई, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को प्रस्तुत कर पारित कराने की प्रस्तावित योजना पर गहरी चिंता और कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे और सेक्रेटरी जनरल पी रत्नाकर राव ने बताया कि बैठक में कहा गया कि बिजली कर्मचारी-इंजीनियर संगठनों, किसान संगठनों तथा उपभोक्ता समूहों सहित विभिन्न हितधारकों द्वारा बड़े पैमाने पर आपत्तियां और सुझाव दिए जाने के बावजूद सरकार इस बिल को बिना पर्याप्त चर्चा और लोकतांत्रिक परामर्श के आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
फेडेरेशन ने कहा कि जब सरकार ने स्वयं इस बिल पर सुझाव आमंत्रित किए थे, तो यह उसकी जिम्मेदारी थी कि वह पारदर्शिता के साथ बताए कि प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर क्या विचार किया गया और उन्हें किस प्रकार संबोधित किया गया। इन आपत्तियों की अनदेखी कर जल्दबाजी में कानून लाने का प्रयास लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है।
फेडरेशन ने परामर्श प्रक्रिया के संचालन पर भी कड़ी आपत्ति जताई। फेडरेशन ने बताया कि 30 जनवरी 2026 को विद्युत मंत्रालय ने प्राप्त सुझावों की समीक्षा के लिए एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया, जिसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के महानिदेशक को शामिल किया गया। यह संगठन लगातार बिजली वितरण क्षेत्र के निजीकरण की वकालत करता रहा है। ऐसे संगठन को राष्ट्रीय कानून को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में शामिल करना पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
फेडरल एग्जीक्यूटिव ने दोहराया कि प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 बिजली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजीकरण को तेज करने के उपकरण प्रतीत होते हैं। फेडेरेशन ने चेतावनी दी कि ऐसी नीतियां सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करेंगी और इसका प्रतिकूल प्रभाव बिजली कर्मचारियों, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
बैठक में बिजली क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ाए जा रहे निजीकरण पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। वितरण कंपनियों के निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को इक्विटी निजीकरण, प्रबंधन नियंत्रण निजी कंपनियों को देने तथा डिस्कॉम को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने जैसी शर्तों से जोड़ना जबरन निजीकरण थोपने का प्रयास बताया गया।
फेडरल एग्जीक्यूटिव ने विभिन्न राज्यों में चल रहे आंदोलनों की भी समीक्षा की, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण के खिलाफ चल रहे ऐतिहासिक आंदोलन का उल्लेख किया, जो 466 दिनों से अधिक समय से कर्मचारियों, किसानों और उपभोक्ताओं की व्यापक भागीदारी के साथ जारी है।
बैठक में उत्तराखंड सरकार द्वारा उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) के डाकपत्थर और ढालिपुर स्थित जल विद्युत परियोजनाओं की 76.73 हेक्टेयर भूमि को उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से निजी क्षेत्र को आवंटित करने के निर्णय का भी कड़ा विरोध किया गया। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि जल विद्युत परियोजनाओं के लिए सुरक्षित भूमि को अन्य प्रयोजनों में हस्तांतरित करना लखवार, किशाऊ तथा यमुना बेसिन की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा और इसका देशभर के बिजली अभियंता और कर्मचारी जोरदार विरोध करेंगे।
फेडरेशन ने पंजाब सरकार द्वारा बिजली क्षेत्र की भूमि बेचने और इसका विरोध करने वाले पदाधिकारियों के उत्पीड़न की भी कड़ी निंदा की।
फेडरल एग्जीक्यूटिव ने पूरे देश के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग को भी दोहराया।
इन परिस्थितियों को देखते हुए फेडरेशन ने 10 मार्च 2026 को देशव्यापी “लाइटनिंग एक्शन” का आह्वान किया है। यदि सरकार संसद में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल प्रस्तुत करती है तो देशभर के बिजली अभियंता और कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे और अपने कार्यालयों तथा परियोजना स्थलों के बाहर व्यापक प्रदर्शन करेंगे।
फेडेरेशन इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) तथा अन्य बिजली क्षेत्र के संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष को तेज करेगा।
फेडरल एग्जीक्यूटिव ने देशभर के सभी बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे एकजुट रहें और बिजली क्षेत्र, कर्मचारियों, किसानों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष के लिए तैयार रहें।

शिमला: कांग्रेस के प्रत्याशी रहे अनुराग शर्मा को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिया गया है। विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा ने उन्हें निर्विरोध चुने जाने का प्रमाणपत्र जारी किया। कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन शिमला में अनुराग शर्मा को चुने जाने पर जश्न मनाया गया। यहां पर ढोल, बैंड-बाजे के साथ स्वागत हुआ। राज्यसभा चुनाव के लिए विधानसभा सचिवालय को केवल एक ही नामांकन प्राप्त हुआ था। आज (सोमवार, 9 मार्च को) नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख थी। किसी अन्य उम्मीदवार के न होने के चलते अनुराग शर्मा का निर्वाचन निर्विरोध घोषित कर दिया गया। मौजूदा राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। उनके कार्यकाल के खत्म होने के बाद अनुराग शर्मा राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।

शिमला: भाजपा के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार इस समय भारी अस्थिरता और भय के माहौल में काम कर रही है। प्रदेश में कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत होने के बावजूद सरकार के भीतर जिस प्रकार की उथल-पुथल और असमंजस की स्थिति बनी हुई है, उससे स्पष्ट है कि सरकार के भीतर ही विश्वास का संकट गहरा चुका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के अंदर इतनी अस्थिरता है कि खुद उसके नेता भी आशंकित हैं कि कब क्या स्थिति बन जाए।
जयराम ठाकुर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने एक सैद्धांतिक निर्णय लेते हुए राज्यसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा, जिससे कांग्रेस पार्टी को स्वाभाविक रूप से बड़ा अवसर मिला। लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी के भीतर जिस प्रकार का संघर्ष और भ्रम की स्थिति देखने को मिली, वह अपने आप में दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली जाकर अपना पक्ष रख रहे थे और कई नेताओं को मुख्यमंत्री द्वारा लगातार यह भरोसा दिलाया जाता रहा कि उनके नाम पर विचार किया जा रहा है। लेकिन अंततः यह स्पष्ट हुआ कि मुख्यमंत्री ने अपने ही सहयोगियों और मित्रों को गुमराह किया।
उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं ने तो राज्यसभा नामांकन से जुड़ी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली थीं, क्योंकि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया था कि उन्हें टिकट दिया जाएगा। लेकिन अंतिम समय में स्थिति बदल गई और इससे कांग्रेस पार्टी के भीतर भारी असंतोष पैदा हुआ। जयराम ठाकुर ने कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा द्वारा सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त करना इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर सम्मान और संवाद की भावना समाप्त हो चुकी है। आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता ने स्वयं कहा कि उन्होंने जीवनभर आत्मसम्मान के साथ राजनीति की है और सच बोलने की कीमत चुका रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज हिमाचल प्रदेश में सरकार मंत्रिमंडल से नहीं बल्कि “मित्र मंडल” से चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि फैसले मंत्रिमंडल की बैठकों में नहीं बल्कि एक सीमित मित्र मंडल के बीच लिए जा रहे हैं, जहां यह तय होता है कि किसे लाभ देना है और किसे किनारे करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की नीतियां और संसाधन इसी मित्र मंडल की प्राथमिकताओं के आधार पर संचालित हो रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्यसभा के लिए जिस व्यक्ति को कांग्रेस ने साधारण कार्यकर्ता बताकर टिकट दिया, उसके शपथपत्र में लगभग 230 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सामने आई है और वर्तमान सरकार में उनके पास कई करोड़ रुपये के ठेके भी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ही कई नेता यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि यही साधारण कार्यकर्ता की परिभाषा है तो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे अन्य कार्यकर्ताओं को भी ऐसा अवसर क्यों नहीं मिला।
उन्होंने मुख्यमंत्री के दौरों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार मुख्यमंत्री का आधिकारिक टूर कार्यक्रम जारी होता है लेकिन बाद में वह किसी अन्य स्थान पर चले जाते हैं और इसकी जानकारी न तो प्रशासन को होती है और न ही जनता को। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इस प्रकार की कार्यप्रणाली कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार लगातार भाजपा सरकार पर आरोप लगाती रहती है, लेकिन सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार के पांच वर्षों में प्रदेश में अभूतपूर्व विकास कार्य हुए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगभग 7000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं प्रदेश को मिलीं और लगभग 4700 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने हिमकेयर योजना के माध्यम से गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी, सहारा योजना के माध्यम से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सहायता प्रदान की, मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल से जल पहुंचाने का काम किया।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन की व्यवस्था को मजबूत किया, जनमंच के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान किया और प्रदेश के विकास के लिए केंद्र से प्राप्त हर एक रुपये का उपयोग जनता के हित में किया। इसके विपरीत आज प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं, सड़क परियोजनाएं रुकी हुई हैं, पेयजल योजनाओं का काम बंद पड़ा है और सरकार केवल पहले से शुरू की गई योजनाओं के उद्घाटन कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में हुए अवैध पेड़ कटान का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां केवल 25 पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी, वहां 300 से अधिक पेड़ काट दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है और जांच को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार निजी भूमि पर भी सीमित संख्या में पेड़ काटने की अनुमति होती है, लेकिन यहां नियमों की खुलेआम अवहेलना हुई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार में नैतिक साहस है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
जयराम ठाकुर ने मंडी जिले में सामने आए वन कटान के एक अन्य मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हजारों ट्रकों के बराबर लकड़ी काटे जाने के आरोप लगे हैं और जब मामला सामने आया तो सबूतों को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन यह अपने आप में भ्रष्टाचार का एक गंभीर उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक अन्य परियोजना में भी भारी वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई है, जहां लगभग 120 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में भारी गड़बड़ी के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि समान क्षमता की परियोजना अन्य राज्यों में कम लागत में बन जाती है, लेकिन हिमाचल में अत्यधिक खर्च किया जा रहा है, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार पिछले तीन वर्षों से केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास भाजपा के पूर्व मंत्रियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत हैं तो कार्रवाई करे, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी केवल बयानबाजी करना राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सब कुछ देख रही है और समझ रही है कि कांग्रेस सरकार विकास के बजाय केवल सत्ता के संरक्षण और मित्रों को लाभ पहुंचाने की राजनीति कर रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा प्रदेश के हितों और संसाधनों की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठाती रहेगी और आने वाले समय में जनता इस सरकार को जवाब देगी।

