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हिमाचल: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों-गैर शिक्षकों को चार अप्रैल तक अवकाश

निजी स्कूलों की मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन अब 30 मार्च तक

हमीरपुर : प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कमल किशोर भारती ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जिला हमीरपुर के निजी स्कूलों की मान्यता के नवीनीकरण और वर्ष 2026-31 तक मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 मार्च कर दी गई है। उन्हांेने बताया कि ये आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ये ऑनलाइन आवेदन वेबसाइट एमर्जिंगहिमाचल.एचपी.जीओवी.इन पर किए जा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि शिक्षा का अधिकार 2009 तथा निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2011 हिमाचल प्रदेश में निहित प्रावधानों के अनुसार जिला हमीरपुर के सभी निजी पाठशालाओं का कोई भी ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उपनिदेशक ने बताया कि प्री प्राइमरी से पांचवीं तक कक्षा वाले विद्यालय अपने ऑनलाइन आवेदन निर्धारित शुल्क के साथ संबंधित बीईईओ को प्रेषित करेंगे। जबकि, प्राइमरी से आठवीं और छठी से आठवीं तक की कक्षाओं वाले विद्यालय प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक को ऑनलाइन प्रेषित करेंगे।

कमल किशोर भारती ने बताया कि ऑनलाइन आवेदनों में त्रुटियां पाई जाने पर इन्हें ऑनलाइन ही वापस विद्यालय को भेजा जाएगा। त्रुटियों के निवारण के उपरांत इन्हें पुनः संबंधित कार्यालय को ऑनलाइन प्रेषित किया जा सकता है। सही आवेदनों को ऑनलाइन ही मान्यता पत्र व मान्यता नवीनीकरण पत्र जारी किए जाएंगे।

उपनिदेशक ने बताया कि सत्र 2026-27 में केवल वही विद्यालय विद्यार्थियों को दाखिला दे पाएंगे, जिनके पास विभाग का मान्यता प्रमाण पत्र होगा। मान्यता पत्र व मान्यता नवीनीकरण पत्र के बिना संचालित होने वाले विद्यालयों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्री प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक नई मान्यता प्राप्त करने और स्कूल को स्तरोन्नत करके छठी से आठवीं तक नई मान्यता प्राप्त करने के लिए पांच हजार रुपये शुल्क अदा करना होगा। पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक नई मान्यता प्राप्त करने का शुल्क दस हजार रुपये निर्धारित किया गया है। जबकि, पहली से आठवीं कक्षा तक मान्यता के नवीनीकरण का शुल्क 500 रुपये प्रतिवर्ष है।

शिमला : पीक आवर्स में थाना प्रभारी संभालेगे ट्रैफिक संचालन की कमान

शिमला: शिमला शहर में प्रातःकाल सभी लोग अपने दैनिक कार्यों, कार्यालय जाने तथा बच्चों के स्कूल जाने के लिए विभिन्न वाहनों का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार दोपहर बाद स्कूलों की छुट्टी और कार्यालयों से लोगों के घर लौटने के दौरान सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है, जिससे कई स्थानों पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस संदर्भ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिमला द्वारा सभी थाना प्रभारी (SHO) को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे पीक आवर्स के दौरान यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु खुद ट्रैफिक संचालन की कमान संभालेगे।

पीक आवर्स के दौरान यातायात नियमन

विभिन्न बाधा बिंदुओं (बॉटलनेक्स) पर लगने वाले ट्रैफिक जाम की चुनौती को देखते हुए शिमला शहर के सभी SHO प्रतिदिन सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तथा दोपहर बाद 04:30 बजे से 06:00 बजे तक व्यक्तिगत रूप से यातायात व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।

वे सुबह और शाम की व्यस्त अवधि के दौरान शिमला ट्रैफिक पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर वाहनों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित कर रहे है तथा जाम की स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर रहे हैं जिससे सुगम ट्रैफिक संचालन मजबूत हो रहा है।

जिला पुलिस शिमला का प्राथमिक लक्ष्य शिमला के प्रत्येक निवासी और आगंतुक को सुरक्षित, सुगम एवं निर्बाध यातायात अनुभव प्रदान करना है। पीक आवर्स में पुलिस की बढ़ी हुई उपस्थिति से शहर के सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया गया है जिसमें सभी नागरिकों का सहयोग भी मिल रहा है जिसके लिए शिमला पुलिस उनकी आभारी है।

हिमाचल: आम आदमी पार्टी प्रदेश की 68 विधानसभा सीटों पर लड़ेगी चुनाव

हिमाचल :  प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने प्रदेश की सभी 68 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। आप के हिमाचल प्रभारी ऋतुराज झा की अध्यक्षता में पिछले करीब 10 महीनों से प्रदेशभर में संगठन का विस्तार किया जा रहा है। ब्लॉक स्तर तक कमेटियों का गठन किया जा रहा है और जल्द ही सभी जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में हमीरपुर से पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता जगत राम ने कहा कि प्रदेश की जनता कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों से निराश हो चुकी है। ऐसे में आम आदमी पार्टी प्रदेश में तीसरे विकल्प के रूप में उभरने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि 22 मार्च को मंडी में एक बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री रहे मनीष सिसोदिया विशेष रूप से शामिल होकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे।

जगत राम ने बताया कि संगठन को मजबूत करने के लिए पार्टी जल्द ही प्रदेश के सभी जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करने जा रही है। इसी कड़ी में 22 मार्च को मंडी में एक बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री रहे मनीष सिसोदिया विशेष रूप से शिरकत करेंगे और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे।जगत राम ने कहा कि प्रदेश में सेवानिवृत्त कर्मचारी और बेरोजगार युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। यदि जनता का समर्थन मिला तो आम आदमी पार्टी पंजाब की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी सरकार बनाने का प्रयास करेगी।

कुल्लू : सैंज में बोलेरो खाई में गिरी, चालक समेत दो की मौत

कुल्लू : कुल्लू जिले की सैंज घाटी के रैला-सियुंड मार्ग पर रविवार देर रात बोलेरो कैंपर अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में वाहन चालक समेत दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार शरण गांव के पास एक तीखे मोड़ पर बोलेरो अचानक नियंत्रण खो बैठी और करीब 50 मीटर नीचे खाई में जा गिरी। दुर्घटना के समय वाहन में दो लोग सवार थे और दोनों की मौके पर ही जान चली गई।

सूचना मिलने के बाद सैंज पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को खाई से निकालकर सैंज अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान फागणु राम (56) पुत्र खबदू राम निवासी गांव देऊली, डाकघर बालीचौकी और लोकेश वर्मा (26) पुत्र जालम सिंह निवासी गांव बायर, डाकघर तिल्ली, जिला मंडी के रूप में हुई है। सोमवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम बंजार अस्पताल में करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस अधीक्षक कुल्लू मदन लाल कौशल ने बताया कि हादसे को लेकर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

जयराम ठाकुर बोले-सुक्खू सरकार की 3 साल की बजट घोषणाएं अधूरी, कहां गया बजट का पैसा!

शिमला : पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू की सरकार पर निशाना  साधते हुए कहा कि तीन साल कार्यकाल बीत जाने के बाद भी कांग्रेस अपने पहले बजट की घोषणाओं को भी अमली जामा नहीं पहुंच पाई है। कुछ घोषणाएं तो सिर्फ कागजों में ही रह गई। कई घोषणाएं तो ऐसी हैं जिसके बारे में सरकार हर बजट में बात करती है लेकिन जमीन पर कुछ नजर नहीं आता है।  जिस तरीके से जनता के बीच झूठ बोलकर और झूठी गारंटियां देकर सुक्खू सरकार सत्ता में आई इस तरीके से विधानसभा के भीतर बजट में भी झूठी घोषणाएं करके अपनी सरकार चला रहे हैं। मुख्यमंत्री को समझना चाहिए कि चुनावी रैली और विधानसभा के भीतर कही गई बातों के बीच फर्क होता है। जिन योजनाओं का बजट में प्रावधान होता है उसे पूरा करना भी सरकार की जिम्मेदारी होती है लेकिन वर्तमान सरकार की बजट में की गई दर्जनों घोषणाएं कागजों में धूल फांक रही है और उन्हें सरकार द्वारा भुला दिया गया है।  प्रदेश की जनता और भाजपा मुख्यमंत्री से अपेक्षा रखती है कि वह अपना चौथा बजट पेश करने से पहले पूर्व के तीनों बजट में की गई घोषणाओं के अधूरा रहने का जवाब दें। 
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने गारंटी के नाम पर प्रदेश की मातृ शक्ति से झूठ बोला और बजट की घोषणा के नाम पर छात्र शक्ति से झूठ बोला। पहले ही बजट में सरकार ने 20000 मेधावी छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी के लिए 25 हजार रुपए की सब्सिडी देने की घोषणा की जिसका अब जिक्र भी नहीं होता। प्रदेश में 6 ग्रीन कॉरिडोर बनाने की घोषणा करने वाली सरकार ने इलेक्ट्रिक चार्जिंग पर ₹6 प्रति यूनिट का एनवायरमेंट सैस लगाया है। प्रदेश के हर विधान सभा में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान खोलने की घोषणा हुई लेकिन काम सिर्फ हवा हवाई हैं। चंबा, नाहन, हमीरपुर में पैट स्कैन की घोषणा फाइलों में दफ़न है। किसानों, बागवानों, खिलाड़ियों, महिलाओं, जनजातीय क्षेत्रों के निवासियों के लिए की गई छोटी-छोटी घोषणाएं भी कागज से बाहर नहीं निकल पाई हैं। युवाओं के लिए नौकरी, रोजगार और स्वावलम्बन की घोषणाएं भी कागज तक सीमित हैं। 
व्यवस्था परिवर्तन के बड़े दावे करने वाली सुक्खू सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले वर्ष में 63,712 करोड़ रुपये, दूसरे वर्ष में 75,496 करोड़ रुपये और तीसरे वर्ष में 58,343 करोड़ रुपये (अनुपूरक बजट को छोड़कर) का बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया। इस प्रकार तीन वर्षों में सरकार ने लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इसके अतिरिक्त सरकार ने इस अवधि में 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी लिया। 
इतना बड़ा बजट पेश करने और भारी ऋण लेने के बावजूद यदि विधानसभा में बजट के दौरान घोषित योजनाओं को तीन-तीन वर्षों तक शुरू भी नहीं किया जा सका, तो यह सरकार की नीति, नियत और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि जब बजट में योजनाओं के लिए प्रावधान किया गया था, तो उन योजनाओं की शुरुआत क्यों नहीं हुई? और उन योजनाओं के लिए जो धन का प्रावधान किया गया था, वह पैसा आखिर गया कहां?

पहाड़ी राज्यों के लिए अलग पर्यावरण नीति की आवश्यकता को लेकर लोकसभा में उठाया मुद्दा – सुरेश कश्यप

हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और विकास के संतुलन हेतु केंद्र सरकार के अनेक कदम : सुरेश कश्यप

शिमला: भाजपा लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पहाड़ी राज्यों के लिए अलग पर्यावरण नीति बनाए जाने की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री से यह जानना चाहा कि हिमाचल प्रदेश सहित अन्य पहाड़ी राज्यों में तेजी से बढ़ते पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों, आधारभूत ढांचे के विस्तार, अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियों तथा बढ़ते वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा क्या विशेष कदम उठाए जा रहे हैं और क्या पहाड़ी राज्यों के लिए अलग और व्यावहारिक पर्यावरण नीति बनाने पर विचार किया जा रहा है।

सांसद सुरेश कश्यप के प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र (Indian Himalayan Region – IHR) देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र न केवल पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जीवन समर्थन प्रणाली प्रदान करता है बल्कि देश के मैदानी क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी के लिए जल, जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हिमालय से उत्पन्न नदियां और पारिस्थितिक तंत्र देश के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन का आधार हैं।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (GBPNIHE) द्वारा भारतीय हिमालयी क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में पर्यावरणीय स्थितियों का निरंतर अध्ययन किया जा रहा है। इस संस्थान द्वारा वायु गुणवत्ता, जल गुणवत्ता, ध्वनि स्तर और पारिस्थितिक तंत्र पर मानव गतिविधियों के प्रभाव का आकलन किया जाता है ताकि नीतिगत स्तर पर आवश्यक सुधार किए जा सकें।

उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण नीतिगत और नियामक उपाय लागू किए गए हैं। इनमें पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया, वन संरक्षण से जुड़े नियम, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अनुमति प्रक्रिया तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विकास गतिविधियों के लिए निर्धारित मानक शामिल हैं। इन प्रावधानों के तहत किसी भी विकास परियोजना को तभी अनुमति दी जाती है जब वह पर्यावरणीय मानकों और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर उपयुक्त पाई जाती है।

मंत्री ने बताया कि निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन, धूल नियंत्रण, अपशिष्ट निपटान तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, ताकि पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सके।

इसके अलावा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत देश के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए व्यापक कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं, जिनमें भारतीय हिमालयी क्षेत्र के शहर भी शामिल हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों की सहभागिता से प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा सतत और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रणनीतियां तैयार की गई हैं, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों का विकास पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया जा सके। इसके तहत ढलानों के संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, मृदा अपरदन रोकने, अपशिष्ट प्रबंधन और पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अध्ययन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सतत विकास को ध्यान में रखते हुए विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययन और नीति संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए हैं, ताकि हिमालयी क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक रणनीति विकसित की जा सके।

सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां, पारिस्थितिक संवेदनशीलता और प्राकृतिक संसाधनों की सीमाएं मैदानी राज्यों से भिन्न होती हैं, इसलिए इन क्षेत्रों के लिए विशेष नीति और दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमालयी क्षेत्रों के सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सांसद सुरेश कश्यप ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में पहाड़ी राज्यों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए और भी प्रभावी नीतियां लागू की जाएंगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों के विकास और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

लोगों को उपलब्ध करवाएं उच्च गुणवत्ता वाली खाद्य वस्तुएं – उपायुक्त

जिला स्तरीय सार्वजनिक वितरण प्रणाली समिति की समीक्षा बैठक आयोजित

शिमला : उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि विभाग द्वारा खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति सही तरीके से होती है परन्तु उचित भण्डारण न होने की स्थिति में कई बार खाद्य वस्तुएं ख़राब हो जाती हैं इसलिए डिपो धारक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और मिड-डे मील कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करें की खराब खाद्य वस्तुएं जनता या बच्चों तक पहुंचें और अगर कोई खाद्य वस्तु खराब पाई जाती है तो उसकी सूचना तुरंत विभाग को दें।

उपायुक्त आज यहां जिला स्तरीय सार्वजनिक वितरण प्रणाली समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस बैठक में त्रैमासिक कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।

अनुपम कश्यम ने कहा कि उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम विभिन्न योजनाओं के तहत जिला के लोगों को राशन मुहैया करवाया जा रहा है। इसके अलावा आंगनवाड़ी केंद्रों में भी बच्चों के लिए राशन मुहैया करवाया जा रहा है। उचित मूल्य की दुकानों में खाद्य वस्तुओं की स्टोरेज सही जगह हो और लोगों को सही राशन मिले, इसकी जिम्मेदारी विभाग को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। अगर किसी उचित मूल्य की दुकान में खराब खाद्य वस्तुओं की विक्री के बारे में शिकायत प्राप्त होती है तो सख्त करवाई अमल में लाई जाएगी। डिपुओं में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति निरंतर रहनी चाहिए ताकि आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

बैठक में बताया गया कि जिला में 627 उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से राशन मुहैया करवाया जा रहा है, जिसमें 348 सहकारी सभाएं, 234 व्यक्तिगत, 02 महिला मंडल, 02 ग्राम पंचायत व खाद्य आपूर्ति निगम की 41 दुकानें शामिल हैं। जिला में दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं को 5525 क्विंटल चीनी, 32456 क्विंटल चावल, 57648 क्विंटल गन्दम आटा, 8251 क्विंटल दालें, 2260 क्विंटल आयोडाईजड़ नमक और 512038 लीटर खाद्य तेल उपलब्ध करवाया गया है। इस अवधि के दौरान, 1362 निरीक्षण किए गए जिसमें 05 दुकानों में अनियमितताएं पाई गई और इनसे 5910 रुपये जुर्माना एकत्रित किया गया। इसी प्रकार, होटल और ढाबों में 03 घरेलू सिलेंडरों का प्रयोग करने पर उनसे 9000 रुपए जुर्माना वसूला गया। इसके अतिरिक्त, 11 उचित मूल्य की दुकानों द्वारा प्राधिकरण का नवीनीकरण न करने पर उनसे प्रतिभूति राशि जब्ती के रूप में मुबालिक 44000 रुपए सरकारी कोष में जमा करवाए गए। उचित मूल्य की दुकानों द्वारा थोक गोदामों से बिलों को अस्वीकार करने पर उनसे विभाग द्वारा इस अवधि में 4,50,625 रुपए की राशि सरकारी कोष में जमा करवाई गई। दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक लिए गए विभिन्न खाद्यानों के 58 सैंपल से केवल 01 सैंपल की रिपोर्ट असंतोषजनक पाई गई। 

बैठक में जिला के विभिन्न क्षेत्रों में 12 उचित मूल्य की दुकान खोलने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई और अन्य क्षेत्रों में उचित मूल्य की दुकान खोलने के प्रस्ताव का पुनः प्रचार-प्रसार किया जाएगा। 

जिला स्तरीय सतर्कता समिति की समीक्षा बैठक आयोजित
इसके पश्चात, जिला स्तरीय सतर्कता समिति की समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई जिसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के सफल क्रियान्वयन के बारे में चर्चा की गई। जिला में अधिनियम के तहत 84636 परिवारों को कवर करने का लक्ष्य है जिसमें 72147 ग्रामीण क्षेत्रों और 12849 शहरी क्षेत्रों के परिवार शामिल हैं। जिला शिमला में कुल 66230 परिवारों का चयन किया जा चुका है तथा 18406 परिवारों का चयन किया जाना शेष है। 

बैठक में बताया गया कि अंत्योदय अन्न योजना के तहत चयनित राशन कार्ड धारकों को निःशुल्क 15 किलोग्राम चावल और 18.800 किलोग्राम गन्दम आटा प्रति कार्ड मुहैया करवाया जाता है। इसी प्रकार, प्राथमिक गृहस्थियों को निःशुल्क चावल 2 किलोग्राम प्रति व्यक्ति और निःशुल्क 2.800 किलोग्राम गन्दम आटा प्रति व्यक्ति मुहैया करवाया जाता है। इसके अतिरिक्त, प्राथमिक गृहस्थियों की श्रेणी के अंतर्गत ऐसे बीपीएल परिवार जिन्हे राष्ट्रीय खाद्य अधिनियम 2013 के उपरांत 35 किलोग्राम से कम खाद्यान्न मिल रहे थे, को बीपीएल दरों पर अतिरिक्त गन्दम व चावल उपलब्ध करवाए जा रहे हैं ताकि प्रत्येक बीपीएल परिवार को कम से कम 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त हो सकें। गरीबी रेखा से ऊपर अर्थात एपीएल श्रेणी के अंतर्गत आने वाले उपभोक्ताओं को गन्दम आटा 12 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से 14 किलोग्राम प्रति कार्ड तथा चावल 13 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से 6 किलोग्राम प्रति कार्ड उपलब्ध करवाए जाते हैं। 

जिला नियंत्रक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नरेंद्र धीमान ने क्रमवार मदों को प्रस्तुत किया। 
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त सचिन शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस ममता पॉल सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार जनता को गुमराह करने में लगे, भाजपा सरकार के रिकॉर्ड विकास को छिपाने का प्रयास – त्रिलोक कपूर

जयराम सरकार के कार्यकाल में ₹92,439 करोड़ के 603 एमओयू, कांग्रेस सरकार ने निवेश को धरातल पर उतरने से रोका : त्रिलोक कपूर

शिमला: भाजपा की वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के प्रवक्ता केवल जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पूर्व भाजपा सरकार पर अनावश्यक आरोप लगाने की राजनीति कर रही है।

त्रिलोक कपूर ने कहा कि यदि विकास कार्यों की बात की जाए तो 2017 से 2022 तक जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने हिमाचल प्रदेश में रिकॉर्ड विकास कार्य किए और प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने औद्योगिक विकास, पर्यटन, आईटी, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया।

उन्होंने कहा कि 2019 में आयोजित “राइजिंग हिमाचल ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट” प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी निवेश पहल थी। इस दौरान 603 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जिनकी कुल अनुमानित निवेश राशि लगभग ₹92,439 करोड़ थी। इन एमओयू में एग्रीबिजनेस, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी, सिविल एविएशन, हाइड्रो और नवीकरणीय ऊर्जा, वेलनेस एवं आयुष, हाउसिंग एवं शहरी विकास तथा आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे 8 प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया था।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जयराम सरकार के कार्यकाल में आईटी सेक्टर में ही 14 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जिनकी अनुमानित निवेश राशि ₹2,833 करोड़ थी। इसके अलावा पर्यटन नीति 2019 के तहत होटल परियोजनाओं, वेलनेस सेंटर और केबल कार परियोजनाओं के लिए भी कई महत्वपूर्ण एमओयू किए गए थे।

उन्होंने बताया कि मार्च 2022 में सोलन जिले के नालागढ़ में स्थापित मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए उद्योग विभाग द्वारा ₹810 करोड़ के 15 एमओयू निवेशकों के साथ किए गए थे, जिससे प्रदेश में फार्मा और मेडिकल उपकरण उद्योग को बढ़ावा मिलने की संभावना थी।

त्रिलोक कपूर ने कहा कि जयराम ठाकुर सरकार ने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 2021–22 के दौरान 6 एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिनकी अनुमानित निवेश राशि ₹1,000 करोड़ से अधिक थी। इसके साथ ही 2022 में 27 जलविद्युत परियोजनाओं के लिए एमओयू किए गए, जिनकी संभावित उत्पादन क्षमता 722.4 मेगावाट थी और ये परियोजनाएं चंबा, कांगड़ा, लाहौल-स्पीति, कुल्लू, शिमला और किन्नौर जिलों में प्रस्तावित थीं।

उन्होंने कहा कि निवेश को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए भाजपा सरकार ने 2018 में स्टेट सिंगल विंडो (Investment Promotion and Facilitation) एक्ट लागू किया था, जिससे उद्योगों को अनुमति और मंजूरी की प्रक्रिया सरल बनाई गई।

त्रिलोक कपूर ने कहा कि निवेश परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी के लिए भाजपा सरकार ने “राइजिंग हिमाचल” मोबाइल ऐप और “हिमप्रगति” पोर्टल भी शुरू किए थे, ताकि निवेश से जुड़े एमओयू को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जा सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने भाजपा सरकार द्वारा लाए गए इन निवेश प्रस्तावों और योजनाओं को आगे बढ़ाने के बजाय उनमें अड़चनें खड़ी करने का काम किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने न तो निवेश को गति दी और न ही प्रदेश के औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी।

त्रिलोक कपूर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के पास अपनी कोई उपलब्धि नहीं है, इसलिए वह भाजपा सरकार के कार्यों को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार ने हिमाचल प्रदेश को निवेश और विकास के नए मार्ग पर आगे बढ़ाया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उन अवसरों को भी ठप कर दिया।

उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस सरकार की इस राजनीति का लगातार पर्दाफाश करती रहेगी और प्रदेश की जनता के सामने सच्चाई रखेगी।

किसान के हाथ में पैसा देने पर काम कर रही सरकार – CM सुक्खू

मिल्क फेड और एनडीडीबी के बीच तीन समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित

हिमाचल:  प्रदेश सरकार तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौता ज्ञापनों पर प्रदेश सरकार की तरफ से सचिव पशुपालन रितेश चौहान तथा प्रबंध निदेशक दि हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रसंघ समिति अभिषेक वर्मा ने हस्ताक्षर किए, जबकि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बोर्ड की ओर से हस्ताक्षर किए। पहला समझौता ज्ञापन कांगड़ा मिल्क यूनियन का गठन एवं संचालन, जबकि दूसरा समझौता जिला सिरमौर के नाहन तथा सोलन जिला के नालागढ़ में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दो दूध प्रसंस्करण संयंत्रों व जिला हमीरपुर के जलाड़ी और जिला ऊना के झलेड़ा में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दो दुग्ध अभिशीतन केन्द्रों की स्थापना व तीसरा समझौता ज्ञापन मिल्कफेड में उद्यम संसाधन प्लानिंग सॉफ्टवेयर लागू करने के बारे में है।
कांगड़ा ज़िला के ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का स्वचालित आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता भविष्य में तीन लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाई जा सकेगी। समझौते के तहत नई मिल्क यूनियन में कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चम्बा जिलों को शामिल किया गया है जिससे दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।
डेयरी क्षेत्र को आधुनिक एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उद्यम संसाधन प्लानिंग सॉफ्टवेयर लागू किया जा रहा है। इससे दूध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, उत्पादन, भंडारण तथा वितरण से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का डिजिटल प्रबंधन संभव हो पायेगा। इस पहल से दूध उत्पादक किसानों का रिकॉर्ड व्यवस्थित होगा तथा उन्हें समय पर और पारदर्शी तरीके से भुगतान किया जा सकेगा। इसके साथ ही उत्पादन प्रबंधन, स्टॉक नियंत्रण और सप्लाई चेन की निगरानी अधिक प्रभावी होगी, जिससे डेयरी संचालन में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पहले दिन से ही कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र को राज्य सरकार ने प्राथमिकता दी है और यह सिलसिला यहीं रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से राज्य सरकार सीधे किसान के हाथ में पैसा देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला में ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट बनने के बाद ‘हिम’ ब्रांड के गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बाजार में उतारे जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी और किसानों को उनकी मेहनत के बेहतर परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार के पास धन का कोई अभाव नहीं है और राज्य सरकार प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने पर आने वाले समय में 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश दूध ख़रीद पर सबसे अधिक समर्थन मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने गाय और भैंस के दूध के ख़रीद मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि की है। गाय के दूध पर समर्थन मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध पर 47 रुपये से 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है। उन्होंने कहा कि दुग्ध प्रोत्साहन योजना के तहत दूध ख़रीद केन्द्र तक स्वयं दूध ले जाने पर प्रति लीटर तीन रुपये का प्रत्यक्ष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। दूध पर मिलने वाली परिवहन सब्सिडी में 1.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का मकसद मात्र दूध का रेट बढ़ाना नहीं है, बल्कि गांव में युवाओं को स्वरोजगार प्रदान करना है, ताकि गांव की आर्थिकी में सुधार आ सके।’’
उन्होंने कहा कि गोपाल योजना के तहत असहाय पशुओं की उचित देखभाल की जा रही है। गौ-सदनों और गौ-अभ्यारण्य में गायों के लिए देखभाल अनुदान को 700 रुपये से बढ़ाकर एक हजार 200 रुपये प्रतिमाह किया गया है।
कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने ‘हिम’ ब्रांड को प्रचलित करने पर बल देते हुए कहा कि हमें अपने उत्पादों को वेरका और अमूल की तर्ज पर आगे बढ़ाना होगा, ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अक्तूबर माह तक ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हो जाएगा, जिससे कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चम्बा जिला के किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को पशुओं की सेहत में सुधार करने की भी आवश्यकता है और राज्य सरकार उन्हें अच्छी नस्ल के दुधारू पशु खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देसी गाय को भी बढ़ावा दे रही है क्योंकि डेयरी और कृषि क्षेत्र राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शराब बिक्री पर भी राज्य सरकार ने सेस लगाया है, जिसका सबसे बड़ा हिस्सा डेयरी क्षेत्र को दिया गया है तथा इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।

हमीरपुर: गौड़ा और बाईपास के कई क्षेत्रों में 15 को बंद रहेगी बिजली

हमीरपुर:विद्युत उपमंडल-2 हमीरपुर में 15 मार्च को हाउसिंग बोर्ड फीडर में गो स्विच लगाने के कार्य के चलते बसंत रिजॉर्ट्स, हमीर अस्पताल, सिटी अस्पताल, हमीरपुर पब्लिक स्कूल, मोरिंगा मॉल, अप्पर, मिडल और लोअर गौड़ा, रिलायंस टॉवर, उसयाना, लोहारडा, सीवरेज प्लांट तथा आसपास के क्षेत्रों में सुबह 10 से सायं 3 बजे तक बिजली बाधित रहेगी। सहायक अभियंता सौरभ राय ने इस दौरान सभी उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील की है।